विवाह रेखा | Vivah Rekha का चित्रों के साथ मतलब जाने हस्तरेखा




विवाह रेखा ( Vivah Rekha/Marriage Line in Hand in Hindi Hast Rekha)

विवाह रेखा के नाम से जानी जाने वाली रेखाएं बुध क्षेत्र पर होती हैं। वैसे तो ये रेखाएं विवाह से सम्बन्धी रीति और धर्म मर्यादा को मान्यता नहीं देती हैं। यह तो प्रेम से या किसी विपरीत लिंगी संबंधों को जो कि प्रभावित करे उसे ही स्पष्ट करती है। 


विवाह व्यक्ति के जीवन की एक प्रभावशाली और विशिष्ट घटना है, इस रेखा द्वारा यह ज्ञात होता है कि विवाह कब होगा या किसी महिला से घनिष्ट सम्बन्ध कब होगा और कैसा होगा। 

विवाह से संबंधित विचार करने हेतु इस रेखा के अलावा अनेक चिह्नों एवं संकेतों का भी विचार करना होता है। विवाह रेखा जो लम्बी हो वही विवाह का सूचक है।


Vivah Rekha Ke Gun Aur Dosh Sampurna Jankari




1.अ. जब कोई रेखा सारे हाथ को काटकर विवाह रेखा का स्पर्श करे तो विवाह टूट
जाता है।

1.ब. एक ही विवाह रेखा होना अधिक शुभ माना जाता है।

1.स. विवाह रेखा के ऊपरी भाग में एक अतिरिक्त शाखा होने पर पति पत्नी में भिन्नता या मतभेद रहता है।




2.अ. यदि विवाह रेखा कनिष्ठा की ओर मुड़ी होगी तो व्यक्ति विवाह के पक्ष में नहीं होता या फिर अविवाहित रहता है।


2.ब. जहां विवाह रेखा एक से अधिक होती है वहां ऊपरी रेखा प्रभावी मानी जाती है।

2.स. चन्द्र पर्वत से जाती हुई भाग्य रेखा विवाह के बाद भाग्योदय करती है।



3.अ. अंगूठा दुबला हो हृदय रेखा में कुछ अलग सा कटापन हो तथा शुक्र मुद्रिका में कटापन हो तो ऐसी स्थिति में हिस्टीरिया जैसी बीमारी होती है तथा काम वासना विवाह के बाद भी पूरी नहीं होती।

3.ब. विवाह रेखा के ठीक नीचे हृदय रेखा पर दोनों ओर तिरछी रेखा होने से व्यक्ति

वासना और प्रेम का अर्थ नहीं सम-हजयता तथा इनमें कामातुरता अधिक पायी जाती है।

3.स. यदि विवाह रेखा इतनी लम्बी हो कि सूर्य रेखा को काटे तो व्यक्ति को विवाह से मान मर्यादा, व सम्मान को धक्का लगेगा।


4.अ. यदि कोई शाखा आकर भाग्य रेखा में मिले तो समझना चाहिए कि उसका विवाह हो चुका है।


4.ब. विवाह रेखा के ऊपरी भाग में छोटी सी समांतर रेखा होने से पति पत्नी का संबंध
कुछ दिनों के लिए विच्छेद हो जाता है, पुनः पूर्ववत स्थिति हो जाती है।

4.स. विवाह रेखा के अंत में क्रास होना अत्यन्त अशुभ है, ऐसी स्थिति में दाम्पत्य
जीवन में कोई अशुभ घटना होती है।





4.ब. विवाह रेखा के ऊपरी भाग में छोटी सी समांतर रेखा होने से पति पत्नी का संबंध
कुछ दिनों के लिए विच्छेद हो जाता है, पुनः पूर्ववत स्थिति हो जाती है।

4.स. विवाह रेखा के अंत में क्रास होना अत्यन्त अशुभ है, ऐसी स्थिति में दाम्पत्य
जीवन में कोई अशुभ घटना होती है।
5.ब. विवाह रेखा मस्तिष्क रेखा को काटती हुई रूक जाय तो कोर्ट केश होकर विवाह सम्बन्ध खत्म होता है।
5.स. कोई रेखा शुक्र पर्वत से निकल कर भाग्य रेखा के साथ साथ आगे निकल जाय तो निकट सम्बन्धी की लड़की से विवाह होता है।

5.द. यदि कोई रेखा पतली हो और विवाह रेखा को छूती हुई उसके समानान्तर चलती हो तो विवाह के बाद जीवन साथी से बहुत प्रेम होता है।

यह चित्र देखकर विवाह के बारे में अगले पृष्ठ पर देखें







1.अल्पभाषी एवं स्वभाव लज्जा युक्त।

2. द्वितीय विवाह के विरोधी, उदार, प्रेमी पर अधिकार, भावना संतान सुख।

3. वासना से हानि, यव होने पर मान हानि एवं कारावास।

4. दुर्घटना आदि का भय।

5. दुःखी हृदय, स्वयं को नष्ट करने की चेष्टा, यही चिह्न कुछ आगे मंगल क्षेत्र पर होने से युद्ध क्षेत्र में वीरगति ।

6. विवाह टलने की आशंका, विवाह में बाधाएं।

7. विधवापन, भीषण दुर्घटना, पति लापता।

8. अविवाहित, विवाह न होना।

9. विधवापन के रेखा की पुष्टि।

10. रोका गया विवाह।

11. विवाह में विघ्न बाधायें।

12. विवाह सम्बन्ध में निराशा, विवाह सम्बन्धी कष्ट।

13. सुन्दर स्त्री को देखकर शीघ्र लालायित होना।

14. अचानक भीषण घटना, मृत्यु सम्भावित।

15. प्राण रक्षा।

16. शुक्र पर्वत उच्च होने से यह निशान हो तो कामुक वृति, चारित्रिक दुर्बलता, अनैतिकता एवं अनेक बुराइयां।

17. विवाह से असन्तोष।

18. विवाह रेखा शनि पर क्रास ग चिह्न शुक्र मुद्रिका युक्त किसी स्वार्थ के कारण घटना।

19. निकट सम्बन्धी से विवाह (दोषपूर्ण रवैया के कारण)

20. जीवन भर पुराना प्रेम दिमाग में मौजूद।

21. संतान रेखायें (पौर्वात्य पद्धतिनुसार)

विवाह कब होगा

हृदय रेखा के निकट विवाह रेखा होने से जातक का विवाह 15 से 19 वर्ष में होगा। यदि यह रेखा बुध क्षेत्र के मध्य में हो तो 20 से 27 वर्ष में तथा उससे अधिक ऊपर की ओर होने से 28 से 38 के उम्र में विवाह का योग
होता है। परन्तु इसका पूर्ण निर्णय भाग्य रेखा और जीवन रेखा को देखकर ही किया जा सकता है।

वैवाहिक जीवन का स्वरूप

1.अ.हृदय रेखा फीकी तथा चैड़ी, साथ में शुक्र पर्वत से निकलने वाली तथा मंगल अथवा बुध पर्वत को जाने वाली रेखा- भौतिक प्रेम विषय वासना।

1.ब.शुक्र पर्वत से निकलने वाली रेखा द्वारा हृदयरेखा, जीवनरेखा, मस्तिष्करेखा तथा विवाहरेखा को काटती हुई- विवाह सम्बन्धी कष्ट।

1.स.बृहस्पति पर्वत के नीचे आरम्भ होकर समरूप में हो तथा साथ में शुक्र पर्वत पर एक क्रास- - एकमात्र प्रेम।

2.अ.बृहस्पति पर्वत के नीचे शाखापुंज, एक शाखा शुक्रपर्वत को जाये- सुखद प्रेम।

2.ब.मस्तिष्क रेखा से शाखापुंज सहित निकलने वाली हृदय रेखा जो नीचे शुक्र पर्वत की ओर पहुंचे- विवाह विच्छेद।


2.स. हृदय रेखा शाखापुंज सहित उदय, जिसकी शाखा पहली और दूसरी उंगली की ओर च-सजयती हो, साथ में रेखाहीन बृहस्पति पर्वत तथा बिना किसी चिन्ह अथवा रेखा का साधारण चन्द्र पर्वत- अभावात्मक प्रेम।

3.अ.मस्तिष्क रेखा से बहुत दूर तक दोनों रेखायें शाखा हीन- प्रेम हीन जीवन।

3.ब.हृदय रेखा पर सफेद धब्बे- प्रेम के मामले में असफलता।

3.स.मस्तिष्क रेखा, जीवन रेखा के साथ जाती हुई- घातक प्रेम।

4.अ.सीधे बृहस्पति क्षेत्र से आ रही हो और हृदय रेखा से मिल जाने वाली मस्तिष्क रेखा- एक ही के प्रति प्रेम।

4.ब.शुक्र पर्वत से निकल रही रेखा मस्तिष्क, जीवन, हृदय तथा विवाह रेखायें काटती हुई- विवाह सम्बन्धी कष्ट।

4.स.भाग्य रेखा, हृदय रेखा को काटते समय जंजीरदार- प्रेम, कष्ट।

5.अ.शुक्र पर्वत तथा हृदय रेखा के मध्य में शाखापंुज- तलाक।

5.ब.सूर्य रेखा, विवाह रेखा द्वारा कटी हुई- अनुपयुक्त विवाह के कारण सामाजिक स्थिति की अनिष्ठा।

5.स.विवाह रेखा टूटी हुई- सम्बन्ध विच्छेद अथवा तलाक।

6.अ.विवाह रेखा शाखापुंज पर समाप्त और हृदय रेखा की ओर -हजयुकती हुई- तलाक की
द्योतक है।

6.ब.विवाह रेखा, बृहस्पति पर्वत पर शाखापुंजदार- सगाई टूटना।

6.स.सूर्यरेखा को छूती हुई नीचे की ओर एक शाखा- अनमेल विवाह।

7.अ.स्वास्थ्य रेखा पर तारक चिन्ह दूसरी उंगली के तीसरे पर्व पर तारक (तारा)चिन्ह। निकृष्ट हृदय रेखा बिना शाखापुंज - सन्तानहीनता।

7.ब.शुक्र तथा चन्द्र पर्वत पर स्टार होने से - रोमांसपूर्ण प्रेम और प्रेमी के साथ पलायन, यदि हाथ की रेखायें निकृष्ट हों- प्रेम के मामलों में अस्वाभाविक मनोवृत्तियां, अस्थिरता।

7.स.बृहस्पति- पर्वत पर क्रास- सुखी विवाह।

8.अ.बृहस्पति- पर्वत पर एक नक्षत्र- आकांक्षा तथा प्रेम की पूरी सन्तुष्टि।

8.ब.बृहस्पति- पर्वत एक नक्षत्र - श्रेष्ठ विवाह।

8.स.शनि- पर्वत पर एक क्रास - सन्तानोंत्पत्ति की असमर्थता।

9.अ.शनि- पर्वत पर क्रास के साथ- 2 शुक्र- पर्वत पर भी क्रास का चिन्ह- सुखांत प्रेम।

9.ब.शुक्र- पर्वत के अंगूठे के दूसरे पर्वं के बहुत समीप नक्षत्र- विवाह अथवा ’अवैध प्रेम सम्बन्ध’ जो व्यक्ति की सारा जीवन दुःखमय बनाये रखेगा।

9.स.जीवन रेखा अंगूठे के पास स्थिर विशेषकर यदि स्वास्थ्य तथा मस्तिष्क रेखायें नक्षत्र द्वारा जुड़ी हुई हों- सन्तानोत्पत्ति की अक्षमता।

10.अ.जीवन रेखा से मंगल पर्वत (बृहस्पति के नीचे) को जा रही किरण- युवावस्था के प्रतिकूल प्रेम जो कष्ट देवे।

10.ब.शुक्र पर्वत अथवा जीवन रेखा से किसी प्रमुख रेखा को द्वीप के साथ उपर्युक्त रेखा चाहे मध्यम हो- यह कष्ट तलाक देनेवाले व्यक्ति को गत जीवन में हुआ होगा।

10.स.मणिबन्ध- पहला वलय कलाई मंे ऊँचा और बीच में काफी उभरा हुआ- जनन क्रियाओं में कष्ट विशेषकर सन्तानोंत्पत्ति में।

11.अ.हृदय रेखा अपनी सामान्य स्थिति से नीचे स्थित भावहीनता ।

11.ब.हृदय रेखा जितनी लम्बी तथा बृहस्पति पर्वंत में जितनी दूर तक यह हो- उतना ही स्थिर और आदर्श प्रेम।

11.स.हृदय रेखा, बृहस्पति पर्वत के बजाए शनि- पर्वत के नीचे से उदित- कामुकता भरा प्रेम।

12.अ.हृदय रेखा कमजोर तथा निकृष्ट और हाथ के सिरे पर समाप्त होने वाली- सन्तान का न होना।

12.ब.हृदय रेखा में उदति तथा शनि क्षेत्र तक पहुंचने तथा यकायक हट जाने वाली गौण रेखा- अनुपयुक्त प्रेम।

12.स.भाग्य रेखा से हृदय रेखा की ओर जाने वाली छोटी रेखायें- प्रेम जिसका अन्त विवाह से भी न हो।

13.अ.जीवन रेखा के साथ चल रही और मंगल पर्वत को जा रही रेखा प्रेम सम्बन्ध में स्त्री अधिक स्थिर स्वभाव।

13.ब.शुक्र पर्वत के बहुत अन्दर, मंगल को उठ रही रेखा- किसी व्यक्ति से उस स्त्री का सम्बन्ध होगा और वह उससे दूर होता चला जायेगा।

13.स.हृदय रेखा को जा रही सीधी रेखा जीवन रेखा को जिस स्थान पर काट रही हो वहाँ शाखापंुज का होना- सुखहीन विवाह, तलाक तक हो सकता है।

14.अ.सीधी हृदय रेखा को जा रही रेखा पर द्वीप- सुखहीन विवाह सम्बन्ध के परिणाम गम्भीर यहां तक कि लज्जाजनक रहे हैं या रहेंगे।

14.ब.जीवन रेखा को काटती हुई और विवाह रेखा को पहुंचती हुई किरण जिस व्यक्ति के हाथ में हो उसे तलाक।




Love Marriage Line In Female Hand In Hindi



Love marriage ke hath mein bahut sign hote hai lekin aapko yaha par mein sabse common sign bata raha hu jiske hone par love marriage ka anuman jyadatar sahi nikalta hai.

Upar di gayi picture ko dekhiye agar us tarah ka sign aapke hath mein hai to aapki love marriage yani prem vivah ho sakta hai lekin ye sign nirdosh hona chahiye agar ye sign ya yog pura nahi bana hua hai to takleef aati hai aur love adhura rah jata hai.

Bhagya rekha ko agar chandra parvat se prabhav rekha aa kar mil jaati hai to vykti ka prem vivah yani love marriage hoti hai.

Aisa vykti shadi ke baad acchi tarakki bhi karta hai aur desh videsh mein yatra bhi karta hai.

Important Note:  Bhagya rekha aur prbhav rekha nirdosh honi chahiye warna ye yog nishfal ho jata hai aur kaam nahi karta hai.



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Tags: Prem Vivah Ke Totke, Dusari Shadi Ka Yog, Vivah Rekha Hindi
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