Wednesday, July 20, 2016



मस्तक रेखा का निकास बृहस्पति पर्वत से होना





मस्तक रेखा का निकास बृहस्पति पर्वत से होना  




बृहस्पति ग्रह आत्मसम्मान, महत्तकांक्षा, प्रौदता व शासन का प्रतीक है। हाथ में बृहस्पति उन्नत होने पर व्यक्ति सचरित्र, महत्वाकांक्षी तथा शासकीय प्रवृति के होते हैं। इसी प्रकार जिन लोगों की मस्तिष्क रेखा बृहस्पति से निकलती है, उन व्यक्तियों में स्वभावतः ही उपरोक्त सभी गुण आ जाते हैं। ऐसे व्यक्ति पुरुषार्थ से जीवन बनाते हैं (चित्र-67) तथा स्वयं के गुणों में निरन्तर वृद्धि करने वाले होते हैं। इनकी मस्तिष्क शब्द कोष होता है व ग्रहण-शक्ति अच्छी होती है। ये बैद्धिक त्रुटियां नहीं करते। संयोगवश यदि कोई गलती कभी कर जाएं तो पुनरावृति का तो प्रश्न ही नहीं उठता। महत्वाकांक्षा की विशेष भावना इनमें पाई जाने के कारण अध्ययन के समय ये गुट बना कर रहते हैं: रुढिवादिता इन्हें बिल्कुल पसन्द नहीं होती, अतः अपने परिवार वालों से इनका विरोध बना रहता है। अध्ययन में तो ये निपुण होते हैं, परन्तु मेहनती नहीं होते।

ऐसे व्यक्तियों की उंगलियां मोटी हों तो आत्म-सम्मान के कारण झगड़े आदि रहते हैं तथा मस्तिष्क रेखा की कोई शाखा मंगल पर जाती हो तो कत्ल जैसे लांछन भी जीवन में लगते हैं। यह सब, सम्मान अथवा महत्वाकांक्षा के कारण ही होता है। (नितिन कुमार पामिस्ट )


सुधारवादी दृष्टिकोण के कारण इनके चरित्र में धीरे-धीरे सुधार होता जाता है। यदि मस्तिष्क रेखा में कोई दोष जैसे लाल या काली न हो तो समय आने पर ऐसे व्यक्ति स्वयं पैरों पर खड़े हो जाते हैं। उगलियां पतली होने पर उपरोक्त दोषपूर्ण फल नहीं होते। ये स्वाभिमानी होते हैं, झुकना पसन्द नहीं करते और छोटी सी बात को भी बहुत महसूस करते हैं। कभी-कभी यहां तक नौबत आती है कि छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा कर बैठते हैं। यदि इनकं गृहस्थ-सम्बन्ध में जरा भी त्रुटि हो तो छोटी सी बात पर ही अपमान महसूस कर जाते हैं जैसे यदि पत्नी विना कहे कहीं चली जाए तो ये उसे लेने जाएं, ऐसा प्रश्न ही नहीं उठता। थोड़ा भी विरोध आपस में होने पर, दूसरे को ही झुकना पड़ता है। ऐसी स्त्रियां रोने में तेज, अड़ने वाली, शुरू में डरने वाली तथा बाद में बहादुर होती हैं। ----- इन्हें छोटे काम करने में लज्जा अनुभव होती है।  कभी-कभी आत्मसम्मान की मात्रा यहां तक बढ़ जाती है कि यदि गलत बात मुंह से निकल जाए तो उसी पर अड़ जाते हैं। छोटा काम नहीं करने के कारण स्थायित्व देर से प्राप्त होता है क्योंकि जब तक इनकी रुचि का कार्य नहीं मिलता, तब तक ये अपने आपको स्थायी महसूस नहीं करते और लगातार काम बदलने की सोचते रहते हैं। ऐसे व्यक्तियों की भाम्य रेखा चन्द्रमा से निकली हो तो स्त्री लोलुप होते हैं। (नितिन कुमार पामिस्ट )

ये मिलनसार व दृढ़ निश्चयी भी होते हैं। जिससे इनका परिचय या मित्रता हो जाती हैं, जीवन भर निभाते हैं, मित्रता होती भी अधिक व्यक्तियों से है। स्वयं से कोई गलती या अपराध होने पर क्षमा मांगने में देर नहीं करते और यदि कोई व्यक्ति गलती करके इनसे क्षमा मांगे तो क्षमा भी कर देते हैं। ऐसे व्यक्तियों की दृदय रेखा व मस्तिष्क रेखा यदि एक-दूसरे के समानान्तर हो तो बदले की भावना रहती हैं, जिसके पीछे पड़ते हैं, उन्हें जड़ से उखाड़ देते हैं। परोपकारी, व्यवहारिक व मानवोचिन गुण होने के साथ ही जैसे के साथ तैसा व्यवहार करने वाले होते हैं।

 ऐसे व्यक्ति झगड़े में कम पड़ते हैं और यदि किसी झगड़े में आ भी जाते हैं तो उसका निपटारा भी स्वयं ही कर देते हैं। मुकद्दमें लड़ने में यदि डिकरी भी हो जाए तो ऐसे व्यक्ति उन्हें क्षमा मांगने पर छोड देते हैं। पैसा देने या अन्य कोई वायदा ये करते हैं तो उसका पूर्णतया पालन करते हैं, चाहें अपना काम बन्द करके भी करना पड़े। अत: बाजार में इनकी साख होती है। मस्तिष्क रेखा समानान्तर होने पर ये लम्बे  समय तक किसी बात को नहीं भूल सकते और अवसर आने पर बदला लिए बगैर नहीं छोड़ते। 

ऐसे व्यक्ति अपने शत्रु को जान से नहीं मारते, जीवित रखकर मुकाबला करते हैं या अहसान से मारते हैं। उत्तरदायित्व अधिक अनुभव करने के कारण ऐसे व्यक्ति उस समय तक विवाह नहीं करते जब तक ये अपने पैरों पर खड़े न हो जाएं। अतः अपनी शादी तक रोक देते हैं तथा आदर्श पसन्द या अन्य किसी करण से इनकी शादी में कई बार विध्न पड़ता है।



मस्तक रेखा का जीवन रेखा से निकालना




मस्तक रेखा का निकास जीवन रेखा से जुड़ा हुआ होना 


इस लक्षण में, मस्तिष्क व जीवन रेखा आपस में अधिक दूर तक जुड़ी अर्थात् सम्मिलित या उलझी हुई नहीं होनी चाहिए। अधिक दूरी की परिभाषा हम लगभग डेढ़ इंच में करते हैं। डेढ़ इंच जुड़ी होने पर मस्तिष्क रेखा जीवन से अलग होती हो तो इसका फल दोषपूर्ण होता है, जबकि जीवन रेखा से मस्तिष्क रेखा का विना अधिक जोड़ के निकास गुणकारी है। इस प्रकार की मस्तिष्क रेखा केवल छूकर जीवन रेखा से निकलती है ।



 ऐसे व्यक्ति समझदार, प्रत्येक कार्य को सोच-समझकर करने वाले, जिम्मेदार तथा क्रियात्मक होते हैं और शीघ्र निर्णय लेते हैं। उपरोक्त लक्षण अधिक रेखा वाले हाथों में हो तो विचार करने व उसे क्रियान्वित  करने में कुछ समय अवश्य लतते है परन्तु क्रियतमक हाथ में सदैव ही शीघ्र निर्णय कर लिए जाते हैं। अधिक रेखा वाले व्यक्ति भी एक से अधिक भाग्य रेखा, अगूंठा ब उँगलियां पतली व छोटी, दोनों और द्विजिव्हाकार मस्तिष्क रेखा होने पर शीघ्र न ठीक निर्णय लेने वाले होते हैं। ये स्वतन्त्र निर्णय लेने वाले व उत्तरदायित्व निभाने वाले होते हैं। फलस्वरूप ऐसे व्यक्ति जीवन - में प्रगति करते हैं।  ( नितिन कुमार पामिस्ट )

स्त्रियों के हाथ में यह लक्षण होने पर तथा हाथ भी कोमल हो तो प्रत्येक दूसरे वर्ष में सन्तान हो जाती है। जीवन और मस्तिष्क रेखा दोष रहित हो तो पति-पत्नी का आपस में बहुत प्रेम रहता है, हृदय रेखा भी निर्दोष या दोहरी हो तो साथी के जरा भी रुखा बोलने पर इन्हें बहुत दु:ख होता है। अन्त तक इनकं सम्बन्ध मधुर बने रहते हैं और जीवन सुखी रहता है। एक दूसरे का विछोह इन्हें किसी भी मूल्य धर सहन नहीं होता। 

इस प्रकार से छूकर निकलने वाली मस्तिष्क रेखा सीधी मंगल की ओर जाती हो, राधा जीवन रेखा गोलाकार व भाग्य रेखा पतनी हो या हाथ भारी हो तो व्यक्ति अतुल सम्पति पैदा करता है और अपने वंश में नए साधनों के द्वारा ऐश्वर्य और प्रतिभा उत्पन्न करता है। ( नितिन कुमार पामिस्ट )

ऐसी मस्तिष्क रेखा जो चन्द्रमा की ओर जाए एवं जीवन रेखा गोलाकार हो, हाथ चौडा, भारी हो, छोटा व सुन्दर हो तो ऐसे व्यक्ति अत्यन्त व्यवहार कुशल होते हैं। इनके धन व सम्मान में वृद्धि होती रहती है। अभिवृद्धि को प्राप्त होते हैं। ऐसे व्यक्ति महामानव होते हैं, हृदय रेखा सुन्दर होकर शनि के नीचे पूर्ण होती हो अथवा बृहस्पति को छ्ती हो तो देवतुल्य सम्मान प्राप्त करते हैं व बहुचर्चित होते हैं। केवल छूकर निकली हुई मस्तिष्क रेरज्ञा बुध या सूर्य की ओर जाती हो और जीवन रेखा भी गोलाकार हो तो ऐसे व्यक्ति लेखन अथवा सम्पक स्थापित करने में चमत्कारिक सफलता प्राप्त करते हैं।



मस्तक रेखा का निकास ( जीवन रेखा से अलग )




मस्तक रेखा का जीवन रेखा से अलग हो कर निकालना 



इस प्रकार की मस्तिष्क रेखा बृहस्पति पर्वत के नीचे, जीवन रेखा से अलग होकर आरम्भ होती है। इस की दूरी अधिक से अधिक 1/4 इन्च या 1/6 इन्च होती है। इससे अधिक दूर निकली हुई मस्तिष्क रेखा का फल अच्छा नहीं होता। यह जितनी नजदीक से निकली होती है और जीवन रेखा से अलग होती है तो अच्छी मानी जाती है। यदि ऐसी मस्तिष्क रेखा, चतुष्कोण या किसी रेखा से बिना जुड़ी हो तो अति उत्तम होती है ।

जीवन रेखा से बृहस्पति पर जाने वाली शाखा के द्वारा अथवा जीवन रेखा से निकली भाग्य रेखा के द्वारा जुड़ी होने पर दोषपूर्ण नहीं मानी जाती। ऐसी मस्तिष्क रेखा जीवन रेखा के निकास के पास से ही निकलती हो तो यह अतुलनीय होती हैं, परन्तु ऐसा कम ही देखा जाता । (नितिन कुमार पामिस्ट)

ये व्यक्ति स्वतन्त्र विचारों के, बुद्धिमान, शीघ्र विश्वास करने वाले व आरम्भ में शीघ्र घबराने वाले होते हैं। मध्यायु के पश्चात् घबराने का दोष इनमें नहीं रहता। इस लक्षण के साथ उगलियों की लम्बाई भी अधिक हो तो विश्वास की मात्रा बढ़ जाती है, जोकि भाग्योदय में रुकावट बन कर सामने आती हैं। वदि भाग्य रेखा, मस्तिष्क रेखा पर रुकी हो तो ऐसे व्यक्ति कई बार घोखा खाते हैं। ये शर्मातु. अधिक एहसान मानने व लिहाज करने वाले होते** और स्पष्ट रूप से किसी बात को नहीं कहते। किसी को उधार देकर मांगते नहीं, जिन पर विश्वास करते हैं, उसे परिवार का सदस्य मान लेते हैं। अत: ये जब भी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर करते हैं, हानि उठाते हैं। ऐसे व्यक्तियों को 35 वर्ष की आयु तक साझे में व्यापार नहीं करना चाहिए और यदि परिस्थितिवश करना भी पड़े तो दूसरे साझियों के साथ सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए अन्यथा लाभ के बदले हानि ही हाथ लगेगी।

 ऐसे हाथों में यदि रेखाएं कम हों या हाथ कौणिक अर्थात उंगलियां अंगूठे की ओर झुकी हुई हों तो जल्दबाज होते हैं। फलस्वरूप सावधानी से कार्य न करने की कारण हानि उठाते हैं परन्तु स्थायित्व प्राप्त करने के पश्चात ये पूर्ण आत्म विश्वासी सिद्ध होते हैं। ऐसी स्त्रियां स्पष्ट वक्ता, हिम्मतवाली, व निडर होती हैं। यदि भाग्य रेखा हृदय रेखा पर रुकी हो व उंगलियां लम्बी हो तो दूसरे के प्रभाव में शीघ्र आती हैं। यदि कोई व्यक्ति थोड़ी भी सहानुभूति से बात करे तो उस पर पूर्ण विश्वास कर लेती हैं। (नितिन कुमार पामिस्ट)

 ऐसे व्यक्ति चरित्र में विश्वास करते हैं, अपने मन में दूसरे का प्रभाव होने पर भी इन्हें चरित्र-दोष नहीं होता। इनक अच्छे मित्र होते हैं व यथासम्भव मित्रता निभाते हैं, किसी से बदला लेने की भावना नहीं होती। यदि विशेष रूप से स्त्रियों के हाथ में जीवन रेखा में दोष हो तो थोड़ी-सी बात में बुरी तरह घबरा जाती हैं, जैसे पति का रात देर से घर आना या कोई समाचार अचानक सुनना आदि। मस्तिष्क रेखा, जीवन रेखा से अलग होकर निकले तो व्यक्ति बचपन में अधिक बीमार होते हैं व जलने से या ऊपर से गिर कर बच जाना इत्यादि घटनाएं होती हैं। यदि जीवन रेखा में विशेष दोष हो तो बचपन में निमोनिया, पाचन शक्ति च जिगर खराब रहता है तथा उपरोक्त रोगों के कारण कई बार बहुत अधिक बीमार हो जाते हैं। 

मस्तिष्क रेखा गोलाकार हो तो निमोनिया कई बार होता है। ऐसे बच्चे शरारती एवं प्रखर बुद्धि वाले होते हैं। मस्तिष्क रेखा द्विभाजित होने पर होशियार एव उत्तम विद्यार्थी सिद्ध होते हैं। यह मस्तिष्क रेखा मंगल पर या उसकी ओर जाए तो इनकी छाती पर तिल होता है। 

यह इनकी किसी योग्य सन्तानक होने का लक्षण है। ऐसे व्यक्ति नौकरी अवश्य करते हैं। कर्ज नहीं ले सकते, क्योंकि इससे इनके मस्तिष्क में तनाव रहता हैं। साझे में काम भी इन्हें अच्छा नहीं लगता। 

ऐसा देखा जाता है कि कुछ रोग जैसे दमा, हृदय रोग आदि एक पीढ़ी से दूसरी पीड़ी में चलते जाते हैं। यदि मस्तिष्क रेखा जीवन रेखा से अलग हो तो स्वयं को ऐसे रोग होने पर भी सन्तान की ये रोग नहीं लगते। ऐसे व्यक्ति की मस्तिष्क रेखा द्विभाजित हो तो जैसे-जैसे चिन्ता करते हैं, भारी होते जाते हैं और सफलता मिलती जाती है। काम करने में चतुर होते हैं। उंगलियां जितनी पतली होती हैं, यह सफलता व बुद्धिमत्ता का लक्षण होता है। जीवन रेखा गोलाकार होने पर ऐसे व्यक्ति यथा शक्ति अपने प्रभाव से व धन से दूसरों की सहायता करते देखे जाते हैं। इस लक्षण के साथ मस्तिष्क रेखा मोटी-पतली होने पर अधिक सोने वाले होते हैं। खाना खाने के बाद आलस्य आता है, हाथ कोमल हो तो आलसी होने के कारण अधिक सोने की आदत होती है। 

मस्तिष्क रेखा जीवन रेखा से अधिक दूर होकर निकली हो अर्थात इसकी दूरी जीवन रेखा से 34 इन्व या उससे अधिक हो तो यह व्यक्ति में अति आत्मविश्वास, जिसे हम पमण्ड कहते हैं, पैदा करती है। ऐसे व्यक्ति लापरवाह होते हैं, अपने जीवन निर्माण की भी चिन्ता नहीं करते। ये स्वछन्द विचारों की होते हैं व किसी की परवाह न करना, बात काटने पर निरादर कर देना, इनके लिए कोई विशेष बात नहीं होती। शनि की उंगली लम्बी या शनि उन्नत हो तो व्यक्ति एकान्त पसन्द होता है, भाग्य रेखा भी शनि पर हो तो झगड़ा तथा विरोध पसन्द नहीं होता। ऐसे व्यक्ति विरोधियों से दूर जाकर खुले में मकान बनाकर रहते हैं। परवाह कम करने से ऐसे पति-पत्नी में मनोमालिन्य बना रहता है, वे न तो एक-दूसरे का पक्ष ले सकते हैं और न तारीफ ही कर सकते हैं, फलस्वरूप अनायास ही विरोध रहता है। इनकी स्पष्टवादिता या कटुवाकशक्ति नौकरी में भी झगड़े का कारण बनती है। इनका गला सूखता है व नोंद कम आती है। स्वी के हाथ में यह लक्षण होने पर इन्हें शादी के बाद परेशानी होती है। ऐसे व्यक्तियों में आत्मविश्वास देर से पैदा होता है। यदि शुक्र भी उन्नत हो तो जीवन में सफलता भी देर से मिलती है।



शनि पर्वत के नीचे मस्तक रेखा पर दोष होना



शनि पर्वत के नीचे मस्तक रेखा पर दोष होना 


यह दोष विशेषतया व्यक्ति को स्वास्थ्य के विषय में विचारणीय है। इनकी कई अन्य फल भी होते हैं, परन्तु दूसरी रेखाओं के साथ समन्वय करने पर स्वास्थ्य के विषय में इस दोष के चिन्तन का परिणाम बहुत ही ठोस निकलता है। यह एक महत्वपूर्ण लक्षण है तथा जीवन के प्रत्येक पहलू पर प्रभाव डालता हैं। यदि मस्तिष्क रेखा में दोष है तो जीवन की हर घटना पर इसका प्रभाव पड़ता है । 



शनि की नीचे मस्तिष्क रेखा में दोष होने की साथ, यदि जीवन रेखा के प्रारम्भ अर्थात् बृहस्पति के नीचे दोष हो तो व्यक्ति के कन्धे या आस-पास के भाग में कोई न कोई बीमारी पाई जाती है। यदि जीवन रेखा के बिल्कुल आरम्भ में ही कोई दोष हो तो गले पर इसका प्रभाव पड़ता है। जीवन रेखा के मध्य में दोध होने पर व्यक्ति की पट, भोजन नली, आतें तथा रीढ़ की हड्डी में इसका प्रभाव पड़ता है। जीवन रेखा के उत्तरार्द्ध में इसका प्रभाव व्यक्ति के फेफड़ों, हदय आदि पर पड़ता है, अर्थात् उपरोक्त अंगों में बीमारी पाई जाती है। हाथ में कहीं भी नेष्ट लक्षण होने के साथ यदि मस्तिष्क रेखा में शनि के नीचे दोष हो तो उसके ------- उपरोक्त लक्षणों के आधार पर बताए गए दोषों की पुष्टि की जा सकती है। हृदय रेखा में यदि शनि के नीचे और मस्तिष्क रेखा में शनि के ऊपर कोई दोष होने पर गुर्दा, हर्निया, अपैन्डिक्स, दांत रोग एवं अण्डकोषों में जीमारी पाई जाती है। स्त्रियों में यह लक्षण दांत एवं गर्भाशय विकार का लक्षण है। हृदय रेखा टूटी होने पर यदि मस्तिष्क रेखा में शनि के नीचे दोष हो तो हृदय रोग होता है और शुक्र या चन्द्रमा उठा होने पर मानसिक विकृति हो जाती है। इसी प्रकार स्वास्थ्य की विषय में सोचते समय हमें मस्तिष्क रेखा को दोष का प्रभाव अवश्य रेखा में होने पर उसका फल कई गुना बढ जाता है एवं उस रोग की निश्चितता का अनुमान होता है।

मस्तिष्क रेखा में शनि के नीचे दोष होने पर व्यक्ति का जिगर एवं पैनक्रियाज ग्रन्थियों की कार्यशक्ति कमजोर होती है। इन्हें अधिक बैठकर काम नहीं करना चाहिए तथा अपने जिगर का पूर्ण ध्यान रखना चाहिए, नहीं तो मधुमेह होने की पूर्ण सम्भावना होती है। शनि के नीचे मस्तिष्क रेखा में झुकाव व जीवन रेखा थोड़ी भी सीधी होने पर ऐसा होता है। स्वयं को तथा परिवार में भी किसी को यह रोग पाया जाता है। इसी से रक्त-चाप, जलोदर, जालीदार फोड़ा, पेशाब अधिक तथा गरम आना, शरीर में दर्द, वायु प्रबल होना, पिण्डलियों में दर्द, बेहोशी, आधाशीशी दर्द जैसा कष्ट होता है। ऐसे व्यक्तियों को चिकनाई वाले पदार्थ नहीं पचते, अतः इनसे बचते रहना चाहिए। (नितिन कुमार पामिस्ट)


कोमल हाथों में रोग शीघ्र तथा कठोर हाथ में देर से होते हैं। रोग का कारण व्यक्ति अपने पूर्व कर्म को मानता है और भाग्य को ही इस विषय में दोष देता है। शनि के नीचे मस्तिष्क रेखा से कोई रेखा निकल कर नीचे की ओर जाती हो तो व्यक्ति की ऐडी में दर्द, गुप्तांग में भगन्दर रोग होते हैं। ऐड़ी क दर्द का कारण हड्डी बढ़ना होता है। ऐसे व्यक्तियों को अधिक नमक पसन्द होता है और उसी कारण हड्डी बढ़ जाती है। शनि के नीचे मस्तिष्क रेखा में तिल हो तो व्यक्ति के गुप्तांग में फोड़ा होता है, वैसे ही मस्तिष्क रेखा में कहीं भी तिल हो तो बड़ी आयु में लकवे का लक्षण है। 

स्वी के हाथ में उपरोक्त लक्षण के साथ जीवन रेखा के आरम्भ में दोष होने पर गर्भपात के कारण सन्तान की सम्भावना देर से होती है। यदि जीवन रेखा सीधी भी हो तो प्रजनन कष्टमय होता है। जीवन रेखा अधूरी होने पर तो निश्चित रूप से ऐसा कहा जा सकता है। इस दशा में व्यक्ति का जिगर किसी न किसी रूप में दोष पूर्ण पाया जाता है तथा बहुत सम्भावना होती है कि उसकी मृत्यु जिगर दोष से ही हो, आयु लम्बी हो तो निश्चय ही ऐसा होता है। (नितिन कुमार पामिस्ट)

मस्तिष्क रेखा में शनि के नीचे द्वीप या अन्य दोष होने पर, तथा चन्द्र की ओर एकदम झुकी होने पर एवं शुक्र पर्वत उठा हो तो मस्तिष्क में विकार आ जाता है।



नाख़ून (Nails On Hand)




नाख़ून



नाख़ून व्यक्ति की अनेक मनोवृत्तियाँ और रोगों के विषय में महत्वपूर्ण सूचना देते हैं। अत: हाथ को देखते समय नाखूनों का अध्ययन भी बहुत आवश्यक है। नाखूनों का अध्ययन उनको रंग, रूप लम्बाई, मोटाई, आकार और अन्य बनावट को विषय में सूक्ष्म रूप से कर लेना चाहिए। इस लक्षण से हमें कई विशेष जानकारियां मिलती हैं। प्रत्येक नाखून अपना विशेष महत्त्व रखता है। ग्रह या उंगली के लक्षण देखते समय नाखून का लक्षण भी उससे मिलाना आवश्यक हो जाता है।



नाखूनों के रंग

 श्वेत नाखून व्यक्ति में स्नायु-दोष का लक्षण है। इनका रक्त-चाप कम होता है। इन्हें सिर दर्द रहता है। यदि सिर के पिछले भाग में लगातार दर्द रहता हो तो ऐसे व्यक्तियों को लकचा होने का डर रहता है। स्नायु-विकार होने के समय नाखूनों का रंग बिल्कुल सफेद हो जाता है। कई बार इस प्रकार का रंग व्यक्ति में किसी दूसरी आत्मा का प्रभाव होने पर भी देखा जाता है, इनकी नींद कम आती है और मबराते अधिक हैं।

 हृदय रोग होने पर नाखूनों का रंग सफेद होता है। बीमारी की अवस्था में खून की कमी होने पर नाखून पतले हो जाते हैं और दबाने पर दब जाते हैं। हृदय रोग से ग्रस्त व्यक्ति के नाखून ऊबड़-खाबड़ तथा प्रेत-बाधा या अल्प-निद्रा रोग में ये कंवल सफेद होते हैं। आकार में विकार नहीं आता। चलने-फिरने से हृदय में पीड़ा का अनुभव करने वालों के नाखून हल्के सफेद होते हैं। इस रोग को एन्जायना कहते हैं। हृदय में छेद होने पर नाखून बीच में से ऊंचा हो जाता है। (नितिन कुमार पामिस्ट)

नाखून का रंग लाल होने पर व्यक्ति क्रोधी होता है। इनके शरीर में पित्त का प्रभाव अधिक होता है। इनकी कोई आदत नहीं डालनी चाहिए अन्यथा ये उसके आदी हो जाते हैं और छोड़ने में कठिनाई होती है। इन्हें खट्टी वस्तुएं नहीं खानी चाहिए। अघिक गरम पेय पदार्थ भी इनक स्वास्थ्य को हानि पहुंचाते हैं। लाल नाखून वाले व्यक्ति क्रोधी होते हैं। साथ में अन्य क्रोध के लक्षण होने पर ये विशेष क्रोधी पाये जाते हैं। 

अधिक धूम्रपान करने वालों के नाखून धुएं जैसे हो जाते हैं। यह रक्त में निकोटीन बढ़ जाने का लक्षण होता हैं। ऐसे लक्षण का प्रभाव हृदय पर पड़ता है। इनकी धूम्रपान कम कर देना चाहिए या बन्द कर देना चाहिए अन्यथा शरीर में कई रोग घर कर लेते है ।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

 लम्बे नाखून

 ऐसे व्यक्ति सीधे-सादे तथा भावुक होते हैं, इन्हें किसी भी विषय में तीव्र रूचि नहीं होती है। शरीर के अनुपात से लम्बे होने पर ऐसे व्यक्तियों की कमर मे दर्द रहता है। इन्हें मियादी बुखार बार-बार होता है। भाग्य रेखा गहरी होने पर यदि नाखून विशेष लम्बे हों तो कैंसर, ट्यूमर, गॉल ब्लेडर (पित्ताशय) में पथरी आदि की सम्भावना रहती है।  (http://indianpalmreading.blogspot.in)

छोटे नाखून

छोटे नाखून व्यक्ति में बुद्धिमत्ता व सतर्कता का लक्षण है। ऐसे व्यक्ति जल्दबाज होते हैं परन्तु, बुद्धिमान होने के कारण सफल ही रहते हैं। बचपन में इनका गला खराब रहता है। इनकी प्रबन्ध शक्ति अच्छी होती है।

चौड़े नाखून

चौड़े नाखून वाले व्यक्ति खुले दिल के, बुद्धिमान व सावधान होते हैं। खुले दिल के होने के साथ-साथ इनमें किसी बात को बहुत बारीकी से जानने का गुण होता है। ये जुबान के सच्चे होते हैं। मगर लम्बे समय तक एक काग नहीं कर सकते। उपाय अपाय की सोच कर कार्य करने वालों के नाखून चौड़े होते हैं। इनके स्वभाव • | में थोड़ी गर्म पायी जाती है, परंतु अबायोस ही किसी व्यक्ति से बिगाडते नहीं। इनकी छाती में दर्द की शिकायत रहती है। कभी-कभी रीद की हड्डी में भी दर्द रहता है, जिसका कारण झटका लगना होता है। अधिक चौडे और फैले हुए नाखून होने पर व्यक्ति की मस्तिष्क की नस फटने का डर रहता है। चौड़े नाखून यदि सख्त भी हों तो ऐसे व्यक्ति क्रोधी होते हैं।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

पतले नाख़ून 

 नाखूनों की मोटाई कम होने पर नाखून पतले कहे जाते हैं। ऐसे व्यक्ति का स्वास्थ्य कमजोर रहता है। मस्तिष्क में काम का दबाव होने से इनके सिर में दर्द रहने की शिकायत रहती है। इनका स्वभाव भूलने का होता है। ये आलसी होते हैं और नीद अधिक आती है। शरीर में दर्द और भूख की शिकायत भी इन्हें होती है। खट्टे च चटपटे पदार्थों में यह विशेष रूचि रखते हैं।

 मोटे नाखून 

नाखूनों का मोटा या मजबूत होना अच्छे स्वास्थ्य के चिन्ह हैं। सुदृढ़ नाखून वाले व्यक्ति शरीर व स्वास्थ्य के सुदृढ़ होते हैं। इन्हें लम्बे समय तक रहने वाली बीमारियां नहीं होती।


नाखूनों में चन्द्र


नाखूनों के पीछे की ओर सफंद भाग देखा जाता है, यह अर्ध-चन्द्राकार होता है। ऐसे व्यक्तियों का भार अवश्य बढ़ता है। भाग्य रेखा पतली होने के समय से इनका भार बढ़ना आरम्भ हो जाता है और जिस समय तक यह चन्द्र दिखाई देते रहते हैं, भार बढ़ता ही रहता है। जीवन रेखा सीधी होने पर व्यक्ति अधिक मोटा हो जाता है। अधिक बड़ा चन्द्र व्यक्ति में हृदय की कमजोरी का लक्षण है, इनको घबराहट बहुत होती है। अर्ध चन्द्र व अपूर्ण रेखा भी शरीर का भार बढने का लक्षण है।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

चन्द रहित नाखून

नाखून छोटे अर्थात कम लम्बे होने पर उनमें सफेद चन्द्र का अभाव होता है। ये भी दुर्बल-स्नायु के होते हैं व हृदय कमजोर होता है। परन्तु यदि नाखून मोटे व दबाने पर सख्त हों तो उपरोक्त रोगों का भय नहीं रहता।

नाखूनों में दाग

नाखूनों में सफेद दाग भी स्नायु दुर्बलता का लक्षण है। ऐसे व्यक्ति प्रेमी और साधारण झूठ बोलने वाले होते हैं। बचपन में अधिक वीर्यपात के कारण भी नाखूनों में इस प्रकार के दाग हो जाते हैं। सूर्य की उंगली पर सफेद दाग होने पर व्यक्ति को सम्मान लाभ होता है। धृहस्पति पर लेखन सम्बन्धी त्र शनि पर धन सम्बन्पी लाभ होता है।

नाखूनों में काले दाग व्यक्ति की मृत्यु की सूचना देते हैं। इनको मस्तिष्क में शीघ्र ठेस पहुंचती है। स्त्री मरने, सन्तान भाग जाने या उसकी मृत्यु होने, पर धन नाश होने या सम्मान पर प्रहार होने पर नाखूनों में काले दाग पैदा हो जाते हैं।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

नाखूनों में काले दाग शारीरिक कष्ट का चिन्ह हैं। यदि ऐसे दागू नाखून के आरम्भ अर्थात् चन्द्र के स्थान पर हों तो मृत्यु जैसे कष्ट का सूचक है।

नालीदार (रेखायुक्त) नाखून

प्राय: नाखूनों में नालियां बन जाती हैं। ये नालियां नाखूनों के बीव गहराई हो जाने का परिणाम होती हैं। लम्बे समय तक पेट में गैस या कब्ज रहने के पश्चात् इस प्रकार की नालियां बनती हैं। मस्तिष्क रेखा शनि के नीचे दोषपूर्ण होने पर अंगूठे के नाखून में इस प्रकार की नालियां या रेखाएं मधुमेह का निश्चित लक्षण है। (http://indianpalmreading.blogspot.in)

नारवून में कभी-कभी काली धारियां भी देखी जाती हैं। ऐसे व्यक्तियों को पेट में गैस बनती है तथा आगे चल कर इन्हें गुर्दे के रोग हो जाते हैं। अंगूठे में इस प्रकार का काली धारी होने पर व्यक्ति को सिर में दर्द की शिकायत रहकर उसके मस्तिष्क
की कोई छोटी नाड़ी फट जाती है, उसी के फलस्वरूप इस प्रकार काली धारी अंगूठे के नाखून में बनती है। यह धारी कुछ मोटी व स्पष्ट होती है। ऐसे व्यक्तियों को गुर्दे के रोग होने का डर रहता है। धारियां छूने पर चिकनी तथा नालियां खुरदरी अनुभव होती हैं।


लम्बे संकरे नाखून


जब नाखून बहुत संकरे हों तो रीद की कमजोरी की ओर संकेत करते हैं। यदि वे बहुत बड़े व पतले हों तो यह समझना चाहिए कि रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो गयी है और शरीर निर्बल हो गया है।

भद्दे नाखून

कुछ व्यक्तियों के नाखून कटे-फटे से अथवा भद्दे-से होते हैं। थे ऊथट-खाबड़ से दिखाई देते हैं। इन्हें पेशाव में फास्फेट जाता है। चित्र-14 इन्हें रोगों की सम्भावना रहती है। खून की कमी इसमें प्रधान कारण है। कई बार नाखूनों के अन्त में अर्थात् बाहर की ओर धुंधली काली-सफेद-सी धारी दिखाई देती है। ऐसे व्यक्तियों को हृदय रोग हो जाता है।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

चपटे

यदि नाखून बहुत चपटे दिखाई दें और ऊपरी अन्त पर मांस से उखड़े नजूर आयें तो पक्षाघात का खतरा होता है। यह खतरा और भी अधिक हो जाता है यदि वे सीप की आकार के होकर मूल स्थान की दिशा में नुकीले हों। जब इन नाखूनों में चन्द्र के कोई चिन्ह न हों तो यह समझना चाहिए कि रोग बढ़ गया है। (http://indianpalmreading.blogspot.in)

चतुष्कोणाकार नाखून

नाखूनों की लम्बाई व चौड़ाई बराबर होने पर ऐसे व्यक्ति उन्नति करने वाले होते हैं, परन्तु प्रारम्भिक जीवन में इन्हें संघर्ष का सामना करना पड़ता है। इनका लाभ और हानि बराबर होता है, परन्तु सन्तान के कार्य करने के पश्चात् विशेष सफलता मिलती है। इनकी मनोवृति मिली-जुली होती है। ऐसे व्यक्ति अच्छी बातों को ग्रहण करने वाले होते हैं, परन्तु क्रोध आने पर गुणों की टोपी उतार कर अलग रख देते हैं। बड़ी उम्र में इनका क्रोध बहुत कम हो जाता है। इस प्रकार स्नेह में भी ये व्यक्ति अविचारी पाए जाते हैं। आचार व व्यवहार में समान होते हैं। महसूस भी करते हैं और हसते भी हैं। इनका गला थोड़ा बहुत खराब होता है। वृद्धावस्था में नजला या कफ का प्रभाव देखा जाता है। ये साधारणतया शरीर से ठीक रहते हैं।

त्रिकोणाकार नाखून

कभी-कभी नाखून की बनावट त्रिकोणाकार देखी जाती है। ऐसे नाखून आगे से चौड़े तथा पीछे की ओर बहुत नुकीले हो जाते हैं। इस प्रकार नाखून की आकृति त्रिकोणाकार जैसी बन जाती है। ऐसे व्यक्ति बुद्धिमान, हँसमुख व जल्दबाज होते हैं। त्रिकोणाकार नाखून होना व्यक्ति की मानसिक दक्षता का लक्षण है। इनको गले व नाक के रोग देखे जाते हैं।

बृहस्पति या प्रथम उंगली का नाख़ून

हाथ में प्रथम उगली या बृहस्पति का नाखून व्यक्ति की मानसिक प्रवृत्तियों का मुख्य लक्षण है। बृहस्पति की दोनों उंगलियों के नाखून छोटे-बड़े अवश्य ही होने चाहिए. नहीं तो व्यक्ति की ग्रहण शक्ति कम होती है। जितना ही अधिक अन्तर बृहस्पति की दोनों उंगलियों के नाखूनों में होता है, उतना ही व्यक्ति भाग्यशाली, समझदार व चालाक होता है और उन्नति भी अधिक करता है।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

वृहस्पति के दोनों नाखून सम होने पर व्यक्ति सीधा होता है। इनमें ग्रहण शक्ति कम होती है। किसी भी बात को देर से समझते हैं और वृहस्पति का नाखून छोटा होने पर व्यक्ति में प्रबन्ध शक्ति अधिक होती है। मस्तिष्क रेखा एक से अधिक होने पर या मस्तिष्क रेखा दोनों ओर से शाखाकार होने पर ये उद्योगपति या बड़े प्रबन्धक होते हैं। बृहस्पति का नाखून गोल होने पर व्यक्ति के गले में दोष पाया जाता है। अन्य दोष होने पर इनकी सांस की नली का दमा हो जाता है।

शनि या दूसरी उंगली का नाखून

शनि का नाखून चौकोर, सुन्दर व छोटा होने पर व्यक्ति में मानव सुलभ गुणों की विशेषता पाई जाती है। ये पेड़-पौधों व पशु-पक्षियों सहित जीव मात्र से प्रेम करते हैं खेती, बागवानी व फुलवारी का इन्हें विशेष शौक होता है। ये व्यक्ति अध्यात्म व दर्शन में रूचि रखते हैं।

सूर्य या तीसरी उंगली का नाखून

सूर्य या तीसरी उंगली का नाखून चौकोर होने पर ऐसे व्यक्ति दस्तकार होते हैं। चौड़ा होने पर इनकी रूचि साहित्य की ओर जाती है।

बुध या चौथी उंगली का नाखून

इंसान की मानसिक रूचि व चरित्र की जानकारी के विषय में बुध की उंगली का नाखून विशेष महत्व रखता है। बुध का नाखून छोट, चौकोर व सुन्दर होने की या साहित्य में रूचि रखता है। ऐसे बच्चे क्या, क्यों, कैसे, इस प्रकार के प्रश्न करने वाले होते हैं। बुध का नाखून छोटा होने पर राजनीति में विशेष रूचि होती है तथा हाथ में अन्य लक्षण होने पर चुनाव लड़ता है। ये सफल राजनीतिज्ञ होते हैं।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

अंगूठे का नाखून

दोनों हाथों में एक जैसा हो तो व्यक्ति वंश परम्परा के अनुसार जीवन यापन करते हैं। बायें हाथ में अंगूठे का नाखून यड़ा व दायें का छोटा हो तो नये ढंग से जीवन निर्माण करते हैं। दायें हाथ में बड़ा व बायें में छोटा होने पर संघर्षशील होते हैं व अपना कमाया हुआ धन विश्वास व स्नेह के कारण दूसरों की सहायता में खर्च करने वाले होते हैं। ये 35 वर्ष के बाद धन-सम्पत्ति व सम्मान प्राप्त करते हैं तथा एकाग्रता से कार्य करने वाले होते हैं। ये स्वयं तथा समाज क लिए विशेष उदार होते हैं। जबकि दायें हाथ में नाखून छोटा होने पर व्यक्ति चालाक व निजी स्वार्थ आगे रखते हैं। दायां हाथ कता होने के कारण अधिकतर व्यक्तियों के इसी हाथ के नाखून बड़े होते हैं।

दो या अधिक नाखूनों का समन्वय

बुध व शनि का नाखून छोटा व चौकोर होने पर व्यक्ति में धार्मिक गुणों का अधिक समावेश होता है। इस सम्बन्ध में व्यक्ति विशेष ख्याति प्राप्त करता है तथा लेखक होने पर सत्-साहित्य का निर्माण करता है। बुध व वृहस्पति की उंगलियों कं नाखन छोटे व चौकोर हों तो व्यक्ति में व्यवहार व चरित्र सम्बन्धी गुण अधिक पाये जाते हैं। बुध व सूर्य का नाखून छोटा व चौकोर होने पर व्यक्ति रसायन व आयुर्वेद के ज्ञात होते हैं।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

नाखून का महत्व शोध या मनोविज्ञान की दृष्टि से केवल सुन्दर व उत्तम हाथ में होता है। निकृष्ट हाथों में निकृष्ट कोटि के गुण पाये जाने के कारण नाखूनों का विशेष महत्व नहीं होता। उस समय अंगूठे के नाखूनों से केवल व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक प्रवृत्तियों व रोग के विषय में जाना जाता है।







उँगलियाँ (Fingers On Hand)



उँगलियाँ

हाथ देखते समय उंगलियों का अध्ययन बहुत महत्व रखता है। उंगलियों का भली-भाँति निरीक्षण करना चाहिए. तत्पश्चात् फलादेश देना चाहिए।


सीधी उंगलिया


किसी भी व्यक्ति के हाथ में सीधी उंगलियां होना एक अच्छे गुण की निशानी है। यदि व्यक्ति की सारी उगली सीधी हों तो व्यक्ति धनी, सफल, सरल हदय व निरन्तर उन्नति करने वाले होते हैं। ऐसे व्यक्तियों के मार्ग में रुकावटें कम आती हैं। प्रकृति इनका अधिक साथ देती है। अन्य रेखाएं भी अच्छी होने पर या उंगलियों के आधार समतल होने पर ऐसे व्यक्ति बहुत शीघ्र व विशेष उन्नति करते देखे जाते हैं।

उंगलियां टेढी होने पर यदि हाथ उत्तम कोटि का हो तो ऐसे व्यक्ति अन्य ढंग से खोज कार्य करते हैं और शीघ्र ही अपना जीवन बना लेते हैं। ऐसे व्यक्तियों के प्रत्येक कार्य क्रान्तिकारी होते हैं।

दो या अधिक उंगलियों के आधार यदि समान हों तो व्यक्ति के जीवन में उन्नति के अधिक अवसर उपस्थित होते हैं। यदि तीन या चार उंगलियों के आधार नीचे से बिलकुल समतल अर्थात् सरल रेखाओं में हों तो ऐसे व्यक्ति धन, देश व समाज में अपनी गिनती रखते हैं। हाथ की उंगलियों के पोरों से जीवन के वर्षों की गणना की जाती है। अत: इस सिद्धान्त के अनुसार हाथ के जिस पोर पर आड़ी रेखा स्पष्ट रूप से होती हैं, व्यक्ति को उस आयु में किसी न किसी दुर्भाग्य का सामना करना पड़ता है। यदि सभी उंगलियों में 3 के स्थान पर 4 पोर हो तो यह जेल यात्रा का নিমিলন লম্বাদ ই৷ उंगलियों में छेद होना क्रान्तिकारी होने का लक्षण है।

ऐसे व्यक्ति भी कार्य में अपना महत्व दशतेि हैं। ये दबकर नहीं रहते, स्वतन्त्र विचारों की व स्पष्टवक्ता होते हैं। उगलियों में छिद्र होना, हाथ के चमसाकार होने का प्रमुख लक्षण है। अत: ऐसे व्यक्ति विविध विषयों के ज्ञात होते हैं, चाहे दक्षता किसी एक विषय में ही हो। उगलियां सीधी होने के साथ-साथ यदि नुकीली भी हों तो यह व्यक्ति के चरित्र में कलात्मकता का चिन्ह है। ऐसे व्यक्तियों का मस्तिष्क कल्पनाशील, विचारशील तथा प्रकृति प्रेमी होता है। मस्तिष्क रेखा में दोष होने पर ऐसे व्यक्ति पदाई में अधिक रूचि नहीं लेते। नुकीली उंगलियां होने के साथ-साथ हाथ भी कठोर हो तो परिवार में पेटदर्द, सिर में भारीपन, दौरे पड़ना, टांगों में दर्द रहना आदि बीमारिया किसी न किसी को अवश्य पाई जाती है।

दोनों हाथों को सामान्य रूप से सीधा रखने पर जिस उंगली का पोर दूसरी उंगलियों के पोर की अपेक्षा अधिक उभरा दिखाई देता है, यह उस उंगली के ग्रह सम्बन्धी विशेष महत्व का लक्षण है। जैसे बृहस्पति की उंगली का पोर उभरा होने पर अहम्, बातचीत में गम्भीरता और महत्वाकांक्षा, शनि की उंगली का पोर उभरा होने पर धन की लालसा, अध्यात्म विषय में जिज्ञासा तथा रहस्य जानने की अभिलाषा, सूर्य का पोर उभरा होने पर प्रतिष्ठा, यश, आकांक्षा तथा सबसे सुन्दर व्यवहार ख चिन्तनशीलता तथा बुध की उंगली का पोर उभरा होने पर वक्तृत्व शक्ति में संक्षिप्तता, सुन्दर व प्रभावशाली गुणों का द्योतक है। सत्य तो यह है कि इनके कहने की शैली विचित्र होती है।


छोटी उंगलियां

इस प्रकार की उंगलियों वाले व्यक्ति निजी लाभ की ओर अधिक ध्यान देने वाले होते हैं। ये पहले स्वयं के विषय में सोचते हैं तथा बाद में समाज आदि के विषय में सोचते हैं। उदार भावनाओं का विचार करने वाले होते हैं। हाथ उत्तम होने पर पतली व छोटी उंगलियों वाले व्यक्ति समझदार, विवेक से खर्च करने वाले तथा हर परिस्थिति को अपने नियन्त्रण में रखने वाले होते हैं। ऐसे व्यक्ति अधिक सन्तान पैदा करना पसन्द नहीं करते तथा व्यर्थ में घूमना, इधर-उधर समय बिताना या दूसरों पर निर्भर रहना इनकी पसन्द नहीं होता। ऐसे व्यक्ति वही काम करते हैं जो इन्हें लाभप्रद लगता है। ऐसे व्यक्तियों के पास नकद पैसा अधिक पाया जाता है।

शिक्षा के विषय में सोचते समय ये पहले शिक्षा के मूल्य की ओर ध्यान देते हैं। अत: इस प्रकार की शिक्षा ग्रहण करते हैं, जिसमें आगे चलकर लाभ हो। प्राय: ऐसे व्यक्ति व्यापारिक शिक्षा में प्रवेश करते हैं।

इनके मित्र अधिक नहीं होते। मित्र बनाते समय भी ऐसे व्यक्ति यह ध्यान रखते हैं कि भविष्य में इनसे लाभ ही होना चाहिए। जिन स्थानों पर या जिन व्यक्तियों से इनको हानि होती है, वहां से ये दूर ही रहते हैं। ऐसे व्यक्ति मित्रों से लाभ उठाते हैं।



लम्बी उंगलियां

लम्बी उंगलियों वाले व्यक्ति उदार, शान्त, निश्चिन्त, परिवार की सहायता करने वाले, चरित्रवान व दयालु होते हैं। ऐसे व्यक्ति जगत मित्र होते हैं। ये अपना काम छोड़कर मित्रों के लिए घूमते रहते हैं। भाग्य रेखाएं अधिक होने पर ऐसे व्यक्ति यदि धनी भी हों तो उदार, दानी व दूसरों की सहायता करने वाले होते हैं।
लम्बी उंगलियों वाली स्त्रियां शीघ्र ही दूसरों के प्रभाव में आ जाती हैं, अतः चरित्र सम्बन्धी हानि उठाने का डर रहता है। ऐसी स्त्रियों को पुरुषों से अधिक नहीं मिलना-जुलना चाहिए।

लम्बी उंगलियों वाला व्यक्ति धन की ओर अधिक ध्यान नहीं देता परन्तु बृहस्पति विशेष उन्नत होने पर ऐसे व्यक्ति मोटी रिश्वत खाने वाले होते हैं। उगलियां लम्बी होने के साथ-साथ यदि पतली भी हों तो व्यक्ति काफी बुद्धिमान होता है। लम्बी उंगलियों वाला व्यक्ति अपने कार्य को बहुत ही उत्तरदायित्व के साथ पूर्ण करता है। उंगलियां पतली होने पर ऐसे व्यक्ति नया तरीका निकालकर अपने कार्य की देखभाल करने वाले होते हैं। वास्तव में लम्बी उगलियों वाला व्यक्ति सच्वा मानव कहलाया जा सकता है। शुक्र उठा हुआ होने पर व्यक्ति में कामवासना अधिक होती है, परन्तु लम्बी उंगलियों वाले कामवासना को दबा कर रखते हैं। अत: ऐसे व्यक्तियों को कलंक बहुत कम लगता हैं। ये सफाई पसन्द होते हैं। ऐसे व्यक्ति सम्पति आदि देर से ही बना पाते हैं, क्योंकि धन देर से बचता है। अंगूठा बड़ा होने पर इस गुण में और विशेषता आ जाती है। लम्बी उंगलियां होने पर यदि अंगूठा भी लम्बा हो तो ऐसे व्यक्ति सत्य संकल्प वाले होते हैं।

लम्बी उंगलियां होने पर यदि शनि की उंगली अधिक लम्बी, चन्द्रमा या शनि विशेष उन्नत हो तो ऐसे विरक्त प्रवृत्ति के होते हैं। इन्हें अपने परिवार सन्तान, पत्नी या किसी से भी कोई विशेष लगाव नहीं होता। मानव-मात्र से प्रेम करने वाले होते हैं। ऐसे व्यक्तियों की सहानुभूति कम बुद्धि वाले व्यक्तियों के प्रति अधिक देखी जाती है। ये शान्त स्वभाव ही होते हैं। परिवार में विशेष दायित्वपूर्ण स्थान होने पर ये स्वयं हानि उठा लेते हैं।


मोटी उंगलियां

उंगलियों का मोटा होना कम बुद्धिमान होने का लक्षण है। उंगलियां जिंतनी ही मोटी होंगी व्यक्ति में उतना ही कम बौद्धिक विकास पाया जाता है। ऐसे व्यक्ति वहमी, क्रोधी, दयालु, सरल, तानाशाह, जल्दबाज व चिड़चिड़े होते हैं हाथ दोषपूर्ण होने पर ऐसे व्यक्ति चोर, विशेष क्रोधी, कत्ल करने वाले होते हैं। फौज या मेहनत के कार्य करने वाले जैसे किसान, मजदूर आदि के हाथों में मोटी उंगलियां ही पाई जाती हैं। ऐसे व्यक्ति परिणाम की चिन्ता नहीं करते। क्रोध आने पर या मन में निश्चय होने पर उचित या अनुचित विचारे बिना कार्य कर डालते हैं।

उंगलियां मोटी होने पर यदि अंगूठा छोटा हो तो ऐसे व्यक्ति बहुत जल्दबाज होते हैं। इन्हें जल्दबाजी से हानि ही होती है। भाग्य रेखा अन्य रेखाओं की अपेक्षा मोटी हो तो ऐसे व्यक्ति बुरी तरह से बरबाद हो जाते हैं। अंगूठा कम खुलना इस दोष को और अधिक बढ़ा देता है। भाग्य रेखा दो या दो से अधिक होने पर या भाग्य रेखा की स्थिति जीवन रेखा से दूर होने पर इतनी परेशानी नहीं होती। ऐसे व्यक्ति लिहाज तो करते हैं, परन्तु स्पष्टवक्ता होते हैं, अत: इन्हें कोई श्रेय नहीं मिलता। बृहस्पति की उंगली छोटी होने पर निश्चित ही ऐसा कहा जा सकता है।

मोटी उंगलियों वाले व्यक्ति ईमानदार, अनुशासित व मेहनती होते हैं। नौकर होने पर ये अपना काम समाप्त करने पर ही सांस लेते हैं। बात को बार-बार कहना या सुनना पसन्द नहीं करते, फलस्वरूप घर में बिना बात के झगड़ा खड़ा रहता है। ये सम्मान को बहुत अधिक महत्व देते हैं, अत: अपना इस्तीफा जेब में लिए धूमते हैं। अपनी ईमानदारी के खिलाफ ये कुछ भी नहीं सुन सकते। ये अति भावुक होते हैं। थोड़ी देर में प्रेम व्यवहार व थोड़ी देर में ही कहा-सुनी की नौबत आ जाती है। कोई भी बात मस्तिष्क में आने पर या किसी घटना के घटने पर लम्बे समय तक उस विषय में सोचते रहते हैं। (http://indianpalmreading.blogspot.in)

उंगलियां मोटी व लम्बी, बृहस्पति के नाखून बराबर, अंगूठा चपटा, चौड़ा व लम्बा हो तो ऐसे व्यक्ति क्रोधी व स्पष्टवक्ता होते हैं तथा इनकी आर्थिक स्थिति भी उत्तम होती है। इनके विचार अपनी सन्तान व माता-पिता से नहीं मिलते। इन्हें जायदाद सम्बन्धी मुकद्दमें लड़ने पड़ते हैं और ये लम्बे समय तक चलते हैं। इनकी सन्तान घर छोड़ कर भागती है। उगलियां कम खुलने वाली या लचीली हों तो भागे हुए बच्वे देर से वापस लौटते हैं।



पतली उंगलिया


मोटी उंगलियों की अपेक्षा पतली उंगलियों का होना मानवता व श्रेष्ठ बुद्धि का लक्षण होती हैं। ऐसे व्यक्ति सतर्क, बुद्धिमान, अच्छे-बुरे को सोचकर चलने वाले, हर प्रकार का ज्ञान रखने वाले, किसी चीज की गहराई से छानबीन करने वाले तथा दयालु होते हैं। इनमें मानव सुलभ गुण पाये जाते हैं। ये क्रोधी भी नहीं होते। समय के अनुसार व्यवहार करना इनके चरित्र का प्रमुख गुण है। मजाक भी ये इस प्रकार से करते हैं कि दूसरों को बुरा न लगे अन्यथा चुप ही रहते हैं। उंगलियां जितनी ही पतली होती हैं, व्यक्ति में उतना ही अधिक बौद्धिक विकास देखा जाता है। इनमें वासनात्मक लक्षण होने पर भी ये गलत काम नहीं करते, क्योंकि बदनामी से डरते हैं। पतली होने के साथ-साथ उंगलियां छोटी भी हो तो सोने पे सुहागे का काम करती हैं। पतली उंगलियों वाले व्यक्ति समाज में विशेष स्थान रखते हैं। पत्नी की नौकरी कराना या पत्नी का पुरुषों में बैठना आदि बिल्कुल पसन्द नहीं करते। ऐसे व्यक्ति स्वयं भी अनुशासित होते हैं और दूसरों को भी अनुशासन में रखना पसन्द करते हैं। लेन-देन, व्यवहार, बातचीत सभी कुछ सोच समझकर करने वाले होते हैं। ये एक बार सम्बन्ध बनाने के पश्चात् बिगाड़ते नहीं। हर व्यक्ति से इनके सम्बन्ध स्थायी होते हैं।



उंगलियांपतली व लम्बी होने पर व्यक्ति आदर्शवादी, सदैव दूसरों की हित-कामना करने वाले, व्यवहारिक, मधुर, लेन-देन में स्पष्ट, दूसरों को प्रोत्साहित करने वाले, बीमारी, विद्या व शादी आदि के सम्बन्ध में सहायता, दूसरों के हित के लिए औषधालय, स्कूल आदि की स्थापना करने वाले होते हैं। बृहस्पति की उंगली सूर्य की उंगली से लम्बी हो तो ये अत्यधिक सम्मान प्राप्त करने वाले होते हैं। शनि की उंगली सीधी व लम्बी हो तो प्राचीन शास्त्रों का अध्ययन, संस्था का निर्माण या शास्त्रों का पुनरोद्धार करने वाले होते हैं। सूर्य व शनि की उंगलियां बराबर होने पर ये समाज के लिए धरोहर छोड़ कर जाते हैं। बुध की उंगली सूर्य की उंगली के तीसरे पोर से लम्बी होने पर परिवार व समाज के लिए और अधिक विशेषता उत्पन्न करती है। बुध की उंगली छोटी, टेदी और पतली हो तो व्यक्ति सामान्य से अधिक चालाक होता है।



कोमल या लचीली उंगलियां

जो उंगलियां स्वाभाविक रूप से खुलने पर पीछे की ओर मुड़ जाती हैं तथा नरम होती हैं, उन्हें लचीली उंगलियां कहा जाता है। उंगलियां लचीली होने पर व्यक्ति बुद्धिमान व सहनशील होता है। लचीली उंगलियां मोटी हों तो मोटेपन के कारण दुर्गुणों में कमी हो जाती है। ऐसे व्यक्ति सभी से प्रेम करते हैं, परन्तु यदि किसी के प्रति इनका सद्भाव न रहे तो यह जीवन भर उसकी शक्ल देखना भी पसन्द नहीं करते, सम्बन्ध पूर्णतया समाप्त कर लेते हैं। वैसे ये दयालु स्वभाव कं व उदार होते हैं। इस दशा में यदि मस्तिष्क रेखा में दोष हो या जीवन रेखा का झुकाव चन्द्रमा की ओर हो या जीवन रेखा की कोई शाखा चन्द्रमा पर जाती हो तो इनके परिवार में से कोई न कोई व्यक्ति घर छोड़ कर भागता है या कुछ समय के लिए बिना सूचना दिए कहीं चला जाता है। जीवन रेखा के अन्त में बड़ा द्वीप होने पर भी ऐसा फल कहा जा सकता है। उगलियां पतली व लचीली होने पर घर छोड़कर जाने वाले शीघ्र ही लौट आते हैं।

कठोर या न झुकने वाली उंगलियां

इस प्रकार की उंगलियां व्यक्ति के चरित्र में विचारों की स्थिरता, स्पष्टवादिता, क्रोध व लगन का समावेश करती हैं। हाथ अच्छा होने पर व्यक्ति में गुण और दोषपूर्ण होने पर व्यक्ति में क्रोध, विचारों में विशेष दृढ़ता अर्थात् जिद्द की सूचना देता है। अंगूठा भी यदि झुकने वाला न हो तो ये मन में जो भी निश्चय कर लेते हैं, उसे किसी भी भूल्य पर पूरा करके ही छोड़ते हैं। ये विचारों, व अनुशासन के सख्त होते हैं तथा कोई गलती होने पर माफ नहीं करते। घर में इनका एक छत्र साम्राज्य होता है। किसी में भी इनके सामने बोलने की हिम्मत नहीं होती और न ही यह अपने कार्य में किसी को हस्तक्षेप पसन्द करते हैं हाथ में बुद्धिभता के लक्षण होने पर ये बुद्धिमान व सफल होते हैं तथा मूर्खता व निम्न कोटि के चिन्ह होने पर असफल, क्रोधी, झगड़ालू या इस प्रकार के पाये जाते हैं। अंगूठा यदि खुलता भी कम हो और उंगलियां भी सख्त हों तो ये काम में अड़ने वाले होते हैं। अंगूठा अधिक खुलने पर या लचीला होने पर इस प्रकार के गुणों में कमी हो जाती है अर्थात् थोड़ी बहुत सहनशीलता आदि गुण भी व्यक्ति में आ जाते हैं।



प्रथम उंगली लम्वी



अंगूठे के पास की प्रथम उगली तर्जनी, या बृहस्पति की उंगली कहलाती है। इसके छोटे-बड़े का ज्ञान करने के लिए इसकी तुलना सूर्य की अर्थात् तीसरी उंगली से की जाती है। सूर्य की उंगली बड़ी होने पर यह बड़ी और छोटी होने पर छोटी मानी जाती है। सूर्य की उंगली से आधा इंच या पौन इन्च छोटी होने पर ही यह छोटी मानी जाती हैं।


बृहस्पति की उंगली या प्रथम उंगली सूर्य की उंगली से लम्बी होने पर व्यक्ति में उदारता, सात्विकता, उत्तरदायित्व तथा महत्वाकांक्षा आदि गुण पाये जाते हैं। किए हुए कार्यों का भी इनको श्रेय मिलता है और यश प्राप्त करते हैं। ये सात्त्रिक तथा उत्तम कार्य करने वाले होते हैं। हाथ भारी, मांसल, गुलाबी अर्थात् उत्तम प्रकार का होने पर समाज में उत्तम स्थान ग्रहण करते हैं। इनकी सन्तान भी विशेष योग्य होती है। इनका कोई बच्चा मंत्री या इस प्रकार का पद ग्रहण करता है। नहीं तो समाज में किसी न किसी रूप में विशेष सम्मान तो प्राप्त करता ही है। बृहस्पति की उंगली लम्बी होने पर व्यक्ति धार्मिक व व्यवहारिक होते हैं। ये कोई भी अनैतिक कार्य नहीं करते, ये नहीं चाहते कि कोई भी इनके किए हुए कार्य पर टीका-टिप्पणी करे। अत: वृहस्पति की उंगली लम्बी होना एक विशेष उत्तम गुण है। इनको जीवन साथी का पूर्ण सुख प्राप्त होता है। उसकी आदत व स्वभाव भी ठीक होता है।

प्रथम उंगली छोटी

बृहस्पति की उंगली या प्रथम उंगली सूर्य की उंगली से छोटी होने पर अधिक खराब होती है। पतले या दोषपूर्ण हाथ में बृहस्पति की उँगली अधिक छोटी होने पर व्यक्ति अनैतिक कार्य करने वाले तथा सम्मानहीन होते हैं। दुराचारी, चोर, लफगे व अदमाश व्यक्तियों के हाथ में वृहस्पति की उंगली अधिक छोटी होती है। छोटी से तात्पर्य है, इसका शनि की उंगली के ऊपर के (अन्तिम) पोर के आसपास होना है। जब उंगलियां आपस में सटी हुई हों, समाज में दूषित कर्म करने वालों के हाथों में ऐसे लक्षण होते हैं।

प्रथम उगली छोटी होने पर व्यक्ति साधारणतया स्पष्टवक्ता व क्रोधी होते हैं। विशेष छोटी होने पर अधिक दयालु व उदार होते हैं, परन्तु ये किसी से भलाई नहीं पाते। इनके कार्य की आलोचना की जाती हैं। इनके साथ बैठने वाले भी इनकी आलोचना करते हैं, जिसका कारण व्यक्ति का अधिक स्पष्टवादी होता है। घर के झगड़ों के कारण ऐसे व्यक्ति अक्सर साधु बन जाते हैं। इनके घर में झगड़े का मुख्य कारण स्त्रियाँ होती हैं।



बृहस्पति की उंगली छोटी न होकर यदि तिरछी हो तो भी व्यक्ति को परिवार या सन्तान की परेशानी रहती है। सन्तान या तो नालायक होती है या मां-बाप की परवाह नहीं करती या परिवार कं किसी व्यक्ति से कोई न कोई कलह का कारण बना रहता है। शनि की उंगली का झुकाव बृहस्पति की उंगली की ओर होने पर यदि बृहस्पति की उंगली विशेष छोटी हो और बुध की उंगली तिरछी हो तो व्यक्ति चोरी, बदमाशी आदि के द्वारा पेट भरने वाले होते हैं। शुक्र उठा होने पर स्त्री के चक्कर में रहते हैं। लेकर भाग जाना, उनसे अनैतिक कार्य कराना आदि दोष होते हैं। गदा व्यवसाय जैसे शराब, गाजा, अफीम आदि कं द्वारा गुजारा करते हैं। अन्य दोषपूर्ण लक्षण होने पर और अधिक दोष पाये जाते हैं।



दूसरी उंगली

दूसरी उंगली या शनि की उंगली सूर्य की उंगली से आधा इन्च लम्बी होने पर यह लम्बी मानी जाती है। शनि की उंगली विशेष लम्बी होना उत्तम लक्षण है। ऐसे व्यक्ति संगीतप्रिय, कलाकार, एकांतवासी तथा ईश्वर चिन्तन में रूचि रखने वाले, जानवरों से प्रेम करने वाले, तथा निर्माणकर्ता होने पर सुन्दर वस्तु बनाने वाले, बाग-बगीचे आदि में रूचि रखने वाले होते हैं। शुक्र व चन्द्रमा विशेष उन्नत होने पर या मस्तिष्क रेखा का झुकाव चन्द्रमा की ओर होने पर व्यक्ति में साहित्य, कला, नाच-गान, संगीत सम्बन्धी विशेषता पाई जाती है।

शनि की उंगली सीधी होने पर यदि इसके बीच का पोर अन्य पीरों की अपेक्षा लम्बा हो तो व्यक्ति ज्योतिषी होता है। शनि की उंगली बिल्कल सीधी व लम्बी होने पर व्यक्ति धनी, सरल चित, ईश्वर प्रेमी व एकान्त में रहना पसन्द करते हैं, ईश्वर प्रेमी न होने पर पति-पत्नी एकान्त में रहना पंसद करते हैं। ये सफल होते हैं तथा इन्हें धन सम्बन्धी विशेष रूचि होती है और धनी रहते हैं। साधु होने पर महान सम्मान प्राप्त करते हैं। शनि की उंगली तिरछी होना व्यक्ति को लिए मानसिक अशान्ति का संकेत करती है। शनि की उगली का आधार अन्य उगलियों के बराबर हो तो व्यक्ति को प्रत्येक कार्य में अपेक्षाकृत शीघ्र सफलता प्राप्त होती है। शनि की उंगली लम्बी होने पर शुक्र मुद्रिका उंगलियों से दूर हो तो व्यक्ति गायन, नृत्य तथा साहित्य में रूचि रखता है तथा इनसे लाभ प्राप्त करता है। कभी-कभी ऐसे व्यक्ति न्यायाधीश भी देखें जाते हैं।

मंगल रेखा निर्दोष व पूर्ण होने की दशा में यदि शनि की उंगली लम्बी हो, भाग्य रेखा मोटी हो तो व्यक्ति खेती, बागवानी आदि को व्यापार से अपार धन-सम्पत्ति प्राप्त करता है। शुक्र प्रधान होने पर यदि शनि की उंगली लम्बी हो तो ऐसे व्यक्ति नाचने में रुचि रखते हैं। ये पुरुष होने पर स्त्री के और स्त्री होने पर पुरुष के कपड़े पहनने में विशेष प्रसन्नता का अनुभव करते हैं। हाथ सुन्दर होने पर इस प्रकार की कला से प्रसिद्धि प्राप्त करते हैं। शनि की उंगली पर तिल होना धनी होने का लक्षण है। इनको अग्नि-पथ होता है। ऐसे व्यक्ति पृथ्वी से सम्बन्धित व्यापार जैसे खनन, कोयला आदि करते देखे जाते हैं। (http://indianpalmreading.blogspot.in)

तीसरी उगली

तीसरी उगली या सूर्य की उंगली सीधी होने पर व्यक्ति में आत्मसम्मान, प्रसिद्धि या महत्व की भावना अधिक पाई जाती है। दोनों हाथों में यदि केवल सूर्य की उंगली ही सीधी हो तो ये धन की अपेक्षा सम्मान को अधिक महत्व देते हैं। सूर्य की उंगली विशेष लम्बी होने पर व्यक्ति में भविष्य चिन्तन की वृद्धि हो जाती है, तथा सूर्य की उँगली तिरछी होने पर सम्बन्धियों के कारण से विरोध तथा मन-मुटाव रहता है। इनको सम्बन्धियों की सहायता अधिक्र करनी पड़ती है, नहीं तो उनके विरोध का सामना करना पड़ता है। सूर्य की उंगली बड़ी होने की दशा में व्यक्ति कपड़े आदि की दुकानदारी या कमीशन का कार्य करने वाला होता है तथा शनि की उंगली भी सीधी होने पर ये उत्तम कोटि के साहित्यकार पाए जाते हैं। सूर्य की उंगली पर तिल हो तो व्यक्ति को पहले बदनामी और बाद में प्रसिद्धि प्राप्त होती है। 

सामाजिक कार्य कर्ताओं के हाथ में सूर्य की उंगली उत्तम होती है। सूर्य व बृहस्पति की उंगलियां बराबर होने पर व्यक्ति साधु स्वभाव के होते हैं। यह लक्षण उत्तम कोटि के सन्यासियों में पाया जाता है। ऐसे व्यक्ति सभी से उदासीन होते हैं। न किसी से विशेष प्रेम होता है और न ही वैमनस्य। हाथ में सचरित्रता व ईश्वर प्रेम के विशेष लक्षण होने पर सूर्य की उंगली बृहस्पति की उंगली के बराबर हो तो ऐसे व्यक्ति उत्तम कोटि के साधक होते हैं और ज्ञान मार्ग का अनुसरण करते हैं। इन्हें पूर्ण प्रभु कृपा प्राप्त होती है। (नितिन कुमार पामिस्ट ) 

सूर्य व बृहस्पति की उंगलियां बरावर होने पर यदि शुक्र उठा, जीवन रेखा सीधी या इसी प्रकार के वासनात्मक होने के अन्य कारण हों तो ऐसे व्यक्ति विशेष चरित्रहीन होते हैं। भाग्य रेखा में दोष अर्थात् विशेष मोटी या द्वीपयुक्त, जीवन रेखा सीधी, मस्तिष्क रेखा में शनि के नीचे दोष होने पर वेश्यावृत्ति करने वालों का लक्षण है। सूर्य व बृहस्पति की उंगलियां बराबर होना गृहस्थ सुख में बाधक है। इनके जीवन साथी की मृत्यु हो जाती है या अविवाहित रहते हैं। (नितिन कुमार पामिस्ट )

चौथी उंगली 

चौथी उंगली या बुध की उंगली का अध्ययन हाथ में विशेष महत्व रखता है। अतः हाथ देखते समय इसका अध्ययन भी विशेष भारीकी से करना चाहिए। बुध की उंगली कुछ न कुछ तिरछी अवश्य ही होनी चाहिए। यह उंगली अधिक सीधी होने पर व्यक्ति सरल होते हैं। बुद्धिमान होते हुए भी अवसर के अनुसार आचरण नहीं कर पाते। ये समय के अनुसार अपने आपको ढालने में असमर्थ होते हैं।

बुध की उंगली विशेष सीधी होने से विवाह में रूकावट होती है। ये 29-30 वर्ष की आयु में शादी करते हैं। यदि विवाह रेखा उंगलियों के तथा इदय रेखा के पास हो तो विवाह शीघ्र होता है। बुध की उंगली पर तिल होना व्यक्ति को चोरी से हानि का संकेत है। (नितिन कुमार पामिस्ट )

बुध की उंगली विशेष तिरछी होने पर किसी एक रिश्तेदार से विशेष मन-मुटाव व विरोध रहता है। यदि प्राकृतिक रूप से हाथ खुलने पर बुध की उंगली अन्य उँगलियों से अलग रहती हो तो ऐसे व्यक्ति सम्बन्धियों से उदासीन रहते हैं, उनमें विशेष रूचि नहीं रखते और न ही उनसे विशेष प्रेम होता है। उनसे सहयोग आदि प्राप्त होने का तो प्रश्न ही नहीं उठता। इनके समक्ष कई बार जेल जाने के कारण उपस्थित होते हैं। विशेषतया सूर्य की उंगली की दूसरी गांठ से यह अलग हो तो ऐसा निश्चित कहा जा सकता है।

चौथी या बुध की उंगली (छोटी)

कई बार हाथ में बुध की उंगली विशेष छोटी अर्थात् सूर्य की उंगली के दूसरे पोर के मध्य तक देखी जाती है। बहुत छोटी बुध की उंगली व्यक्ति की उन्नति में रुकावट का कारण बनती है। ऐसे व्यक्तियों की आदत इधर-उधर करने की होती है, यदि ये लेखक हों तो अनेक पुस्तकों से सामग्री की चोरी करके अपनी पुस्तक लिख मारते हैं। यह लक्षण स्त्रियों के हाथ में विशेष दोषपूर्ण लक्षण है। ऐसी स्त्रियां इधर की उधर लगाकर लडाई-झगडा कराने वाली होती हैं तथा बहुत ही आसानी से गृहस्थ जीवन में प्रवेश करक दूसरों के गृहस्थ जीवन को अशान्त कर देती हैं। कई बार बुध की उंगली बहुत ही छोटी देखी जाती है। इसकी लम्बाई लगभग एक या डेढ़ इन्व की होती है। ऐसी उंगली व्यक्ति को बुरी आदत से बचाने का गुण रखती है। बुरी आदत कुछ समय तक होने पर भी ये उनके आदी नहीं होते।

बुध की उंगली छोटी होने के साथ टेढ़ी भी हो तो ऐसे व्यक्ति गुप्तचर होते हैं और अपने कार्य में विशेष दक्ष होते हैं। इन्हें इस कार्य में सम्मान मिलता है। बुध की उंगली छोटी होने पर यदि बृहस्पति की उंगली छोटी हो तो व्यक्ति अपनी जुबान का पाबन्द नहीं होता, परन्तु यदि हृदय व मस्तिष्क रेखाएं समानान्तर हैं तो उपरोक्त दुर्गुण नहीं पाये जाते। ये कई बार या तो अपमान सहन करते हैं या कोई असम्मानजनक कार्य करते हैं।


चौथी या बुध की उंगली (टेढ़ी)

बुध की उंगली तिरछी होने पर व्यक्ति चालाक, समय के अनुसार चलने वाला, अपना काम निकालने में चतुर, दूरदर्शी, कर्त्तव्यनिष्ठ, दूसरों पर निर्भर न रहने वाला, ताकिक व अपना भला-बुरा समझने वाला होता है। ऐसे व्यक्तियों को 32-33 वर्ष की आयु में मानसिक परेशानी होती है। हाथ पतला व रेखाओं में दोष होने पर ऐसे व्यक्तियों पर चोरी या चरित्रहीनता का लांछन लगता है। वैसे भी ये झूठ अधिक बोलने वाले व कामचोर होते हैं। हृदय रेखा में दोष हो या हाथ पतला हो तो व्यक्ति को बिना मतलब झूठ बोलने की आदत होती है। (नितिन कुमार पामिस्ट )

तिरछी बुध की उंगली का नाखून छोटा होने पर व्यक्ति में बौद्धिक विशेषता पाई जाती है। ये गूढ़ से गूढ़ विषय का सार एकदम निकाल लेते हैं। ऐसे व्यक्तियों की बुद्धि सरस्वती या बृहस्पति की तरह प्रखर होती है। बुध की उंगली टेढ़ी होने पर मस्तिष्क रेखा बहुत अच्छी हो तो दूसरों से हानि नहीं होती। उधार में गई हुई या डुची हुई रकम वापस मिल जाती है। ये दिन-प्रतिदिन उन्नति करते हैं किसी का विश्वास करना ये जानते ही नहीं। दूसरों पर निर्भर रहने वाले या विश्वास करने के अन्य लक्षण होने पर कुछ समय तक ये ऐसा जरूर करते हैं, परन्तु बाद में यह बात बिल्कुल समाप्त हो जाती है। बुघ की उंगली टेढ़ी होने पर यदि इसका नाखून भी चौकोर हो और मस्तिष्क रेखा मंगल पर हो तो व्यक्ति उच्च कोटि के तार्किक होते हैं और वकील बनते हैं। ऐसे वकील फौजदारी में अधिक रूचि रखते हैं। मस्तिष्क रेखा चन्द्रमा की ओर जाने की दशा में ये सिविल के मुकद्दमे लेते हैं। यदि बुध की उगली गांठदार हो तो तक उत्तम कोटि का होता है। इनमें झूठी बात को सत्य सिद्ध करने का गुण पाया जाता ।

बुघ की उंगली टेढ़ी होने पर शनि व सूर्य की उंगलियों के बीच में अन्तर होना, मस्तिष्क रेखा का मंगल से निकल कर मंगल क्षेत्र पर जाना, सामने के दांत विशेष बड़े होना, हृदय रेखा मस्तिष्क रेखा पर मिलना या हृदय व मस्तिष्क रेखा एक होना, प्रत्येक उंगली में चार पोरो के चिन्ह होना जेल यात्रा करने के संकेत हैं। कोई एक भी लक्षण होने पर जेल यात्रा का भय होता है। एक से अधिक लक्षण होने पर निश्चित ही जेल यात्रा होती है।

बुध की विशेष टेढ़ी उंगली होने पर यदि हाथ छोटा, मोटा व निम्न कोटि का हो, उंगलियां टेढ़ी-मेढ़ी हों तो व्यक्ति झूठ बोलने वाला व चोर होता है। हृदय रेखा जंजीराकार हो, शनि पर गई हो, हाथ काला हो या भाग्य रेखा आदि से आन्त तक अत्याधिक पतली हो तो भी व्यक्ति चोर व घोरखेबाज होता है।


बुध की उगली विशेष टेढ़ी होने पर व्यक्ति बोलने वाला होता है। साहित्यकारों में बुध की उंगली तिरछी, हृदय रेखा दोषपूर्ण, शुक्र व चन्द्रमा उठे हों तो ये श्रृंगार-साहित्य का निर्माण करते हैं। इस दशा में हाथ में विशेष भाग्य रेखा होना अनिवार्य है। हाथ आदर्शवादी होने पर आदर्श सहित्य का निर्माण होता है। (नितिन कुमार पामिस्ट )



शनि व सूर्य की उंगली (बराबर)


शनि व सूर्य की उंगलियां बराबर या लगभग बराबर होने पर व्यक्ति में विशेष गुणों में वृद्धि करती हैं। इनको आगे होने वाली घटनाओं का पता लग जाता है अर्थात् इनमें अन्तज्ञान विद्यमान होता है। फलस्वरूप जुआ, सट्टा या व्यापार का सट्टा आदि कार्य करने में रूचि रखते हैं। मस्तिष्क रेखा दोषपूर्ण होने पर ये इस कार्य से लाभ नही उटा पाते अन्यथा ऐसे कार्य से इनको अचानक व अत्यधिक घन लाभ होता हैं। शनि व सूर्य की उंगलियां बिल्कुल सीधी होने पर व्यक्ति बहुत धनी, विख्यात् व सम्मान प्राप्त करने वाला होता है। दोनों उगलियां सीधी होने पर हाथ की उतमता सूर्य की भाति प्रकाशमय होती है। दोनों उगलियों के आधार समान होने पर ऐसे व्यक्ति सफल व्यापारी च धनी होते हैं। आधार में समानता से तात्पर्य दोनों उगलियों का आरम्भ लगभग एक सी उचाई से होना होता है। ये उद्योग, एजेन्सी व ठेकेदारी के कार्य में विशेष सफलता प्राप्त करते हैं। निश्चित ही है कि ये लगातार सफलता प्राप्त करते हैं और धनी बने रहते हैं।

शनि व सूर्य की उंगलियां नाखून की ओर से बराबर होने पर दो सूर्य रेखाएं हों, मस्तिष्क रेखा, जीवन रेखा व भाग्य रेखा में त्रिकोण हो तो इनको जुए, सट्टे, लाटरी आदि से अचानक व अत्यधिक धन लाभ होता है। मस्तिष्क रेखा व हृदय रेखा एक होने की दशा में भी अचानक धन प्राप्ति होती है, परन्तु बड़ा सट्टा लगाने पर, शनि व सूर्य की उंगलियां बराबर होने पर यदि अंगूठे के नीचे शुक्र रेखा हो और त्रिकोण से निकली हो तो पैतृक परम्परा या गोद से लाभ होता है। दोनों उंगलियां बराबर होने की दशा में यदि विवाह रेखा निर्दोष होकर विशेष लम्बाई लिए हो और बृहस्पति तक या बृहस्पति की ओर जाती हो तो ससुराल या किसी प्रेमी से धन का लाभ होता है। मस्तिष्क रेखा दोषपूर्ण होने पर इनके अन्तज्ञान से दूसरे लाभ उठाते हैं, स्वयं को इसका लाभ नहीं मिलता। (नितिन कुमार पामिस्ट )




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