Sunday, April 2, 2017

हस्त रेखा देखने की विधि


हस्त रेखा देखने का समय और विधि


 हस्त रेखा विशेषज्ञ व्यक्ति के ठीक सामने बैठे, ताकि प्रकाश ठीक सीधे उसके हाथों पर पड़े। पास में किसी तीसरे व्यक्ति को खड़े होने देना या बैठने देना उचित नहीं है। क्योंकि व्यक्ति का और हस्त रेखा शास्त्री का ध्यान बँट सकता है। भारत में सूर्योदय के समय को विशेष महत्त्व दिया जाता है।

हस्त रेखा देखने की विधि



इसका कारण यह है कि हाथो-पैरों में सुबह के समय रक्त का संचालन अधिक प्रबल रहता है, जिसके फलस्वरूप रेखाएं अधिक आभायुक्त और स्पष्ट होती हैं। कार्य आगे बढ़ाते हुए पहले बहुत सावधानी से यह देखना चाहिए कि हाथ किस प्रकार के हैं, इसके बाद सावधानी से बायां हाथ देखना चाहिए, तब दायीं ओर आना चाहिए। यह देखने के लिए कि उसमें क्या-क्या परिवर्तन और परिवर्धन हुए हैं, और दायें हाथ को अपने निरिक्षण का आधार बना लेना चाहिए।

जिस हाथ का आप निरीक्षण कर रहें हैं, उसे दृढ़ता से अपने हाथों में पकड़ें, रेखा या चिà को तब तक दबाते रहें जब तक उनमें रक्त का प्रवाह न आ जाए। इस तरह आप इनके विकास की प्रवृत्तियों को देख सकेंगे। कुछ कहने से पहले हाथ के हर भाग¼पीछे का भाग, सामने का हिस्सा, नाखून, त्वचा, रंग आदि½ का ठीक से निरीक्षण करें अंगूठे का परीक्षण पहला पड़ाव होना चाहिए।

इसके आगे अंगुलियों पर ध्यान दें- हथेली से उनका अनुपात क्या है, वे छोटी हैं या लम्बी, पतली हैं या मोटी। कुल मिलाकर उनकी श्रेणी निर्धारित करें, यदि वे मिश्रित होंगी तो अकेली उंगली को अलग-अलग श्रेणी में रखते जायें तत्पश्चात~ नाखूनों पर ध्यान दें। इससे स्वभाव या मिजाज का पता चलता है। अन्त से पूरे हाथ को सावधानी से परखकर अपना ध्यान पर्वतों पर ले जायें तथा अब कौन सी रेखा देखी जाय इसका निर्धारित नियम यह है कि जीवन रेखा, एवं स्वास्थ्य रेखा को एक साथ देखना आरम्भ किया जाय। ताकि उसके पश्चात~ मस्तिष्क रेखा, भाग्य रेखा, ह्रदय रेखा आदि का अध्ययन किया जा सके।

हस्त रेखा अध्ययन के समय हस्त रेखा विशेषज्ञ का यह कर्तव्य होता है, कि वे जो कुछ भी बतायें ईमानदारी, सच्चाई तथा पूरी सावधानी से। सीधा सत्य बताने के पहले यह ध्यान रखने का विषय है कि परामर्श कर्ता को किसी भी प्रकार का न ठेस पहुंचे और न ही दु:ख का आभास हो। यह ध्यान रहे कि जैसे आप किसी अत्यन्त संवेदनशील और बेहतर मशीन से पेश आते हैं । उसी तरह सामने बैठी मानवता की अत्यन्त उलझी इकाई से पेश आना उचित है। साथ ही सहानुभूति से परिपूर्ण होना भी आवश्यक है। जिस व्यक्ति  का हाथ देखा जाये उस समय उससे यथा सम्भव बाहरी रुचि भी लें तथा उसके जीवन में प्रवेश कर जायें। अत: आपकी कुल भावना एवं आकांक्षा कल्याण करने की होनी चाहिए। यदि यह भावना आपके कार्य का मूलाधार बन जाये तो यह कार्य आपकेा न थकायेगा, न दु:ख पहुंचायेगा बल्कि शक्ति देगा। इन बातों के अलावा ज्ञान की खोज में कभी धैर्यहीन न हों। कोई भी भाषा आप अल्पकाल में नहीं सीख सकते। उसी तरह आपकेा हस्त रेखा का ज्ञान एक दिन में हासिल होने की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। यदि यह विषम कठिन भी लगे तो हतास न हों बल्कि ध्यान से इस पर गौर करें और शोध कार्य समझ कर निरन्तर लगे रहें। यदि आप इसे ठीक-ठीक पढ़ गये तो यह बात अवश्य समझ में आ जायेगी कि इसमें जीवन के रहस्यों की कुंजी हैं। इसमें पैतृक नियम है, पूर्वजों के पाप-पुण्य, अतीत का कार्य, कार्य का कारण जो चीजें हो चुकी है उनका संतुलन, जो हो रहा है, उसकी छाया-सब विद्यमान है।

नितिन कुमार पामिस्ट 

Cross Ya Dhan Chinha Ka Graho Aur Rakhao Par Prabhaav


Cross Sign Ka Parvato Par Matlab Kya Hota Hai ?

Cross Guru Parvat Pr:- Guru parvat pr cross faldayak hota hai. Aisa vykti prem ke matter mein bhagyashali hota hai. Aise vykti ka vivah acche kul (gharane) mein hota hai. Yadi yah cross index finger ke neeche hai to vykti ka vivah ya prem sambhandh kaafi late 40 ke baad ki umar mein hota hai aur yadi jeevan rekha aur index finger ke beech mein hai to vykti ka vivah 30 ki aayu ke baad mein hota hai aur yadi cross jeevan rekha ke sameep hai to aise vykti ka vivah ya prem sambhandh kishoravastha mein ho jata hai. Yaha pr aapko vivah rekha ko bhi mahtav dena hoga aur cross independent hona chahiye. Guru parvat pr cross hone pr vykti ki vichardara adarshvadi ho jati hai aur vo dharmik karyo mein roochi leta hai lekin yadi cross ko koi avrodh rekha kaat de to cross ka shubh fal ashubh fal mein badal jata hai.





Cross Shani Parvat Pr:- Shani parvat pr cross ashubh fal deta hai.  Aisa vykti dubhagyashali hota hai.  Aisa vykti dharmandh hota hai. Yadi cross middle finger ke neeche ya sameep hai to aisa vykti ko santaan nahi hoti hai aur aisa vykti tantra mantra aur jadu tona karne wala hota hai.(Nitin Kumar Palmist)

Cross Ravi Parvat Pr:- Ravi parvat pr cross hone pr aise vykti ko sarkari naukari aur vykti ko apni prtibha ke khestra mein bhi asafalta ka mooh dekhna padta hai.  Aisa vykti jitana pryas safalta ke liye karta hai usko utni hi nirasha milti hai.

Cross Budh Parvat Pr:- Budh parvat pr cross hone pr aisa vykti jaalsaaj hota hai. Aisa vykti baimaani se paisa banata hai.  Aisa vykti doosaro ko sadaiv dhoka deta hai.

Cross Chandra Parvat Pr:- Chandra parvat pr cross hone pr aise vykti ko paani se bhay rahata hai, madhumah (diabetes) ka rog ho jata hai.  Aisa vykti sadaiv najle, jukaam (sinus) se paresaan rahata hai aur aise vykti ka vivah late hota hai.  Chandra parvat pr cross ka chinha ashubh faldayak hai. (http://indianpalmreading.blogspot.com)

Cross Ketu Parvat Pr:- Jis manushya ke hath mein cross ka chinha ketu parvat pr ho to aise vykti ka bachpan gumnami mein gujrata hai aur wo bachpan mein beemar rahata hai. Aise vykti ko charam rog hone ki sambhavna rahati hai.

Cross Shukar Parvat Pr:- Cross shukar parvat pr adarsh prem ko darshata hai.  Yadi cross jeevan rekha ke sameep ho to aisa vykti sanyasi ban jata hai ya jail jata hai ya phir aise vykti ka sambhandh apne parivar se accha nahi rahata hai.  Shukar parvat pr cross hone pr aise vykti ko guptang se sambhandhit rog ya uski prajanan shakti kam ho jaati hai.

Cross Mangal Parvat Pr:- Cross mangal parvat hone pr vykti krodhi hota hai aur krodh ke chalte wo hatya jaisa dushkaram kar deta hai ya phir aatam-hatya kar leta hai. Aisa vykti karagaar (jail) bhi ja sakta hai.  (Nitin Kumar Palmist)

Cross Rahu Parvat Pr:- Cross Rahu parvat pr hone pr vykti ko yuvakaal mein kaafi dukh dekhne padte hai karan parivar mein kisi ki death ho jana ya phir achanak dhan hani ho jana. Aise vykti ko jeevan ke shuruwat mein kaafi samasyo se gujarana padta hai.

Cross Jeevan Rekha Pr:- Jeevan rekha pr cross hone pr vykti ke sambhandh apne parivar walo se kabhi acche nahi rahate hai. Jeevan rekha ke shuru mein cross accident darshata hai aur beech mein pet (stomach) se sambhandhit bimari darshata hai aur jeevan rekha ke end mein cross hone pr jaanleva bimari darshata hai.


Cross Mastak Rekha Pr:- Mastak Rekha pr cross hone pr manshik chinta aur sir dard ki bimari ho jati hai.  Aise vykti ko sir mein chot lagti hai. Aise vykti ki eyes kamzor ho jati agar surya parvat ke neeche headline pr cross ho to. (Nitin Kumar Palmist)

Cross Hridya Rekha Pr:- Hridya rekha pr cross hone ka matlab hai vykti ka hridya durbal hai.  Aisa vykti dayalu hota hai jiski wajah se wah kai baar dokha khata hai. Aisa vykti chotti si musibat ko dekh kar bahut jaldi ghabra jata hai.

Cross Ravi Rekha Pr:- Aise vykti ko apne karyo aur paryaaso mein safalta nahi milti hai.  Aise vykti ko dhanhani hone ki sambhavna rahti hai aur badnami bhi mil sakti hai.

Cross Bhagya Rekha Pr:- Bhagya rekha ke shuru mein cross hone pr bachpan mein takleefe dekhni padti hai aur yadi bhagya rekha mein cross beech mein hai to dhanhani hoti hai aur yadi aakhir mein hai to aise vykti ka bhagya sath nahi deta hai.

Cross Swasthya Rekha Pr:- Swasthaya rekha pr hone ka matlab hai lambi bimari.  Aisa vykti apne jeevan se nirash aur udas hota hai.

Cross Vivah Rekha Pr:- Vivah rekha pr cross hone pr vivah dukhmay hota hai karan kuch bhi ho sakta hai.

Cross Santan Rekha Pr:- Santaan Rekha pr cross hone pr aise santan jeevit nahi rahati hai.

Cross Mangal Rekha Pr:-  Cross Mangal Rekha par hone par vykti darpok ho jata hai aur aisa vykti sharirik roop se kamzor ho jata hai.

Cross Yatra Rekha Pr:- Cross yatra rekha pr hone ka matalb hai asfal yatra aur accident travel karte waqt.

Nitin Kumar Palmist

अपनी हथेली से जाने अपना रोग


हथेली में विभन्न रोगों के लक्षण

मनुष्य की प्रगति के साथ साथ उसके खान-पान और दिनचर्या में अनियमितताओं के कारण होने वाली विकृतियां उसे रोगग्रस्त बनाती हैं। प्रकृति इन संभावनाओं को प्रत्येक मनुष्य की हथेली में समय से पहले चेतावनी स्वरूप अंकित कर देती हे | इसको जानने के लिए थोड़े अंतराल से एक कुशल हस्तरेखा विशेषज्ञ द्वारा अपनी हथेली का आकलन करवाकर मार्गदर्शन प्राप्त करना चाहिए |

जिनका स्वास्थ्य निर्बल हो, वे तो विशेष रूप से समय-समय पर अपनी हथेली का आकलन करवा कर रोगों की अच्छी बुरी प्रगति को जानकर, उनके निवारक उपाय करें।

एक स्वस्थ व्यक्ति की हथेली सुंदर, गुलाबी, चिकनी, मांसल, नर्म और सुदृढ़ होती है। नाखून भी चौड़े, गुलाबी व सुंदर होते हैं और उनके मूल में अर्धचंद्र होते हैं जो स्वस्थ रक्त संचार के द्योतक होते हैं। उनकी अंगुलियों के नीचे पर्वत (मांसल पैड) और हथेली भी बीच में दबी नहीं होती। हथेली की मूल रेखायें (जीवन, भाग्य, मस्तिष्क, हृदय व सूर्य) अपने सही स्थान में लंबी और एक सी गहरी होती हैं। हथेली का रंग एक सा गुलाबी होता ९ है। रेखाओं पर अशुभ चिह्न-क्रॉस, होते। बहुत रेखाओं का मकड़जाल भी नहीं होता। ऐसा व्यक्ति सारी जिदगी स्वस्थ रहता है।

इसके विपरीत एक अस्वस्थ व्यक्ति की हथेली बेडौल, खुरदरी और सफेदी लिए होती है। हथेली मोटी, अंगुलियां मोटी और सीधी नहीं होती। नाखून मोटे और नीले-सफेद रंग के होते हैं जो धीमी गति से रक्त का संचार दशतेि हैं और व्यक्ति की अस्वस्थता के सूचक होते हैं। हथेली अधिक गर्म या ठंडी होती है। हथेली और पर्वतों पर जाल और द्वीप होते हैं। हथेली पिलपिली और रेखायें बेजान होती हैं। इन पर भी क्रॉस, द्वीप, बिंदु और जंजीर के अशुभ चिह्न होते हैं।
एक बीमार व्यक्ति की हथेली का है। इसमें : -
1. अंगुलियां, हथेली में नीची-ऊंची जुड़ी हैं। हथेली सफेदी लिए है।
2. बृहस्पति और बुध अंगुलियां छोटी हैं। बृहस्पति पर्वत पर आड़ी रेखायें हैं। दोनों पर्वतों पर जाल का चिह है जो उनकी शुभता को नष्ट करता है। व्यक्ति पेट व श्वांस रोगग्रस्त होता है।
3. अंगूठा पतला और छोटा है। उसके हथेली के जोड़ पर टेढ़ी रेखा है जो आत्मविश्वास की कमी और रोगों से लड़ने की क्षमता की कमी दशतिा है। साथ ही धन व संतान सुख कम रहता है।
4. हृदय रेखा के आरंभ में जंजीर है और उससे नीचे की ओर शाखायें निकल रही हैं जो हृदय की दुर्बलता का सूचक है। शनि पर्वत के नीचे द्वीप और उस पर शनि पर्वत से नीचे आती रेखायें दृष्टि की निर्बलता दर्शाती है। अंत में वह बृहस्पति पर्वत के जाल में मिलती है जो हृदय का बढ़ना दर्शाती है और हृदय-आघात की संभावना रहती है।
5. मस्तिष्क रेखा व जीवन रेखा काफी दूर तक जुड़ी है और आरंभ में इन पर जंजीर व द्वीप है। आगे चलकर उसपर बिंदु खड़ी रेखाय और क्रॉस है । अंत में वह चंद्र पर्वत पर गुच्छे में बदल गई है और जाल में मिलती है। यह आरंभ में सर्दी-जुकाम, जीवन के मध्य से सिर में चोट, कमजोरी और अंत में मूत्र व किडनी रोग दर्शाती है। जातक में मनोबल की कमी होती है और वह उदास रहता है।
6. जीवन रेखा आरम्भ से काफी दूर तक मस्तक रेखा से जुडी है और उस में जंजीर और द्वीप है बीच में द्वीप को शुक्र पर्वत से आती रेखा मिलती है और दूसरी जीवन रेखा और मस्तक रेखा को काटती हुई भाग्य रेखा को काटती है और भाग्य रेखा भी मणिबंध के काफी दूर से आरम्भ होती है और हृद्य रेखा तक ही पहुंचती है। बचपन में बीमार रहने के कारण, बुद्धि व विश्वास की कमी से उसने काफी अधिक आयु में कार्य आरंभ किया और अधिक आयु तक कार्यरत नहीं रह पाया। सूर्य रेखा न होने से भी जीवन में धन, मान नहीं मिला |

7. जीवन रेखा को नीचे मंगल पर्वत पर जाल है और उसमें से एक रेखा हृदय रेखा के दूषित भाग में मिलती है तथा अन्य रेखायें हृदय रेखा को काटकर बुध पर्वत तक पहुंचती हैं। यह हृदय और स्नायु प्रणाली के रोग दशतिी है।
8. एक स्वास्थ्य रेखा चंद्र पर्वत से बुध पर्वत तक जाती है जिसमें मस्तिष्क रेखा को काटते समय द्वीप है। यह ऊपरी भाग से छाती का और नीचे वाले भाग से पेट का रोग दर्शाती है। उस पर (द्वीप के उपर) बिंदु भी है जो गला और ज्वर द्वारा शारीरिक कष्ट दशतिा है।

9. दूसरी स्वास्थ्य रेखा बुध पर्वत पर जाल को जीवन रेखा से जोड़ती है जो पेट और स्नायु रोग
दशर्रती है। उत्तवो जीवन रेखा से मिलते के बाद बिंदु है जो बुखार दर्शाता है और उसके बाद में
जीवन रेखा से नीचे की और शाखाये निकल रही हैं जो ढलती उम्र में शारीरिक निर्बलता की
द्योतक हैं।

10 चंद्र पर्वत पर क्रॉस, द्वीप और जाल किडनी और मूत्र प्रणाली कं रोग दर्शाती है । रची की हथेली में यह उसकी प्रजनन प्रणाली को रोगी बनाती है, जिससे वह शारीरिक और मानसिक निर्बलता के कारण कष्ट पाती है। यह आवश्यक नहीं कि प्रत्येक व्यक्ति की हथेली में सभी लक्षण होंगे। आशय यह है कि जो दोष होंगे व्यक्ति उन रोगों से पीड़ित रहेगा।

आजकल वातावरण में अधिक प्रदूषण चिंता का कारण बन गया है और प्रशासन उसको कम करने के लिए पूर्ण प्रयासरत है। इस वायु प्रदूषण क कारण शवांस और छाती के रोगों में वृद्धि की खबरें और आंकड़े दैनिक समाचार पत्रों में विशेष रूप से प्रकाशित किये जा रहे हैं। यह भी सत्य है कि सभी व्यक्ति एक प्रकार के रोग से ग्रसित नहीं होते। यह उनकी रोग प्रतिरोधक शक्ति पर निर्भर होता है। इस संबंध में विभिन्न गला और श्वांस रोगों की संभावना दशतिी हथेली का चिह संलग्न है जिसके ज्ञान से यथोचित प्रतिरोधक उपाय कर सभी लाभ उठा सकते हैं।

इस चित्र में : -

अपनी हथेली से जाने अपना रोग

1. हृदय रेखा का बृहस्पति पर्वत से
लेकर शनि पर्वत के नीचे जंजीर जैसी हो जाना व्यक्ति के फेफड़ों में लंबे संक्रमण रहने से टी. बी. की संभावना दर्शाता है।
2. बृहस्पति पर्वत पर लेटा यव चिह्न के साथ आड़ी -टेढ़ी रेखायें व जाल गले में सूजन व कठमाला और श्वांस संक्रमण से "निमोनिया की संभावना दशतिा है।
3. स्वास्थ्य रेखा पर मस्तिष्क रेखा को काटने को स्थान पर ऊपर व नीचे द्वीप होना शवांस की बीमारी का लक्षण है।
4. ऊपर मंगल पर्वत पर जाल गले के रोग दर्शाता है।
5. जीवन रेखा को नीचे मंगल पर्वत पर जाल व कटा-फटा होना भी गले का रोग दर्शाता है।
6. शनि पर्वत के नीचे मस्तिष्क और हृदय रेखा के बीच कम दूरी अस्थमा का लक्षण होती है।
7. जीवन रेखा व मस्तिष्क रेखा का उद्गम स्थान से कुछ दूरी तक जंजीर की तरह बना होना बचपन में सर्दी खांसी व निर्बल स्वास्थय दर्शाता है । कुछ दूरी तक उनका जुड़ा होना इसकी पुष्टि करता है ।
8. जीवन रेखा के अंदर की और उसकी सहायक व रक्षक मंगल रेखा भी नहीं है ।

नितिन कुमार पामिस्ट




हथेली से जाने अपना व्यवसाय और नौकरी


हस्तरेखा से कैसे जाने की जातक नौकरी करेगा या व्यवसाय ?


जीवन में एक ऐसा पड़ाव भी आता है कि हमें अपने करियर का या व्यवसाय का चुनाव करना पडता है। करियर का चुनाव करते समय अपनी रूचि को अधिक प्राथमिकता दी जाती है। हस्त रेखाओं व ग्रहों की सहायता लेना व्यक्ति को कार्यक्षेत्र में सफल बनाने में काफी सहायक होते हैं। इन प्रश्नों का उत्तर पाने के लिये सर्वप्रथम शनि रेखा फिर सूर्य रेखा, मस्तिष्क रेखा, जीवन रेखा, बुध रेखा तथा अंगूठे के मध्य विभाजित रेखा को देखें। उनसे स्पष्ट उत्तर न मिले तो हथेली, पर्वत तथा उंगलियों के लक्षण देखें। एक लक्षण के आधार पर भविष्यवाणी न करें।


हस्तरेखा से कैसे जाने की जातक नौकरी करेगा या व्यवसाय


रोजगार के लिये शुभ लक्षण
शनि रेखा से तनिक फासले पर समानांतर रेखा आय को दो साधन खताती हे | अत्यंत निकष्ट की समानांतर रेखा को कुठार रेखा कहते हैं। इससे जातक के संघर्ष के समय का पता चलता है। चंद्र पर्वत से शनि रेखा निकल कर शनि पर्वत को जाये तो धन प्राप्ति का साधन नैतिक होता है किंतु इस रेखा का वास्तविक लाभ तब होता है जब रेखा शनि के क्षेत्र में प्रवेश करती है । एक से अधिक शनि रेखाय होने से आय के साधन अधिक होते है । निर्दोष और गोलाकार जीवन रेखा भी हो तथा भारी हाथ हो तो लाभ निश्चित है ।

शनि रेखा शुरुवात में मोती और बाद में पतली हो तो पतली होने समय सौभाग्य का उदय होता है । मोटी शनि रेखा के समाप्त होने का समय दुर्भाग्य का अंत करता है । यदि रेखा आरम्भ में पतली हो तो सौभाग्य बढ़ता है। यदि शनि रेखा न हो और अकेली सूर्य रेखा हो तो यश व परीक्षा आदि अन्य प्रयत्नों से सफलता मिलती है। यदि जीवन रेखा आरम्भ में दो भागों में बंट जाये तो आरंभिक काल कष्टमय बाद में भाग्योदय होता है। जीवन रेखा के टूटनें का समय रोजगार परिवर्तन या निवास परिर्वतन का होता है। हृदय रेखा के ऊपर को त्रिकोण अधिक लाभदायक हैं नीचे अथति मस्तिष्क रेखा की ओर कम लाभदायक हैं। यदि शनि रेखा और जीवन रेखा दूषित हो तो उन त्रिकोणों का लाभ संघर्ष के बाद प्रौढ़ावस्था में मिलता है। मस्तिष्क रेखा टूटी हो तो मानसिक परेशानियों ए के कारण रोजगार में बाधा आती है।

यदि शनि रेखा मस्तिक रेखा से निकले तो बौद्धिक कार्य से लाभ मिलता है। गहरी शनि रेखा हृदय रेखा पर रूको तो साझेदारी हानिकारक होती है। चंद्र पर्वत की मोटी प्रभाव रेखा मोटी शनि रेखा को काट दे तो साझेदारी या विवाह का सम्बन्ध कष्टकारी होता है। जीवन रेखा अधूरी हो तो साझे में कष्ट और साझेदारी करते समय साझेदार की कनिष्ठिका उंगली यदि बहुत लंबी हो या टेढ़ी हो तो जमा पूंजी को खतरा है। हाथ तथा सख्त त्वचा वाले व्यक्ति श्रम के कार्यो में सफलता पाते है । मस्तक रेखा यदि दोनों हाथो में एक जैसे हो तो परिवार में जो काम चल रहा होता है उसकी को अपनाने से लाभ मिलता है । बुध रेखा अच्छी हो व कनिष्ठका अच्छी हो तो व्यापार में लाभ मिलता है । शनि पर्वत पर त्रिकोण हो तो गुप्त विद्याओ में सफलता जैसे - ज्योतिष मंत्र योग व अध्यात्म आदि । बुध पर्वत पर त्रिकोण या चतुष्कोण हो तो जातक अच्छा वक्ता होता है, उसे राजनीति में जाना चाहिये । तर्जनी लंबी हो, गुरु पर्वत पर त्रिकोण हो तो व्यक्ति साफ सुथरी राजनीति करता है, नाम पाते हैं, धन की हानि करते हैं। चन्द्र पर्वत पर त्रिकोण हो तो आध्यात्मिक क्षेत्र में विकास होता है। साथ में मध्यमा लम्बी हो और शनि रेखा ठीक हो तो व्यक्ति एकांतवास करता है। यदि कनिष्ठिका लंबी हो त्तो आध्यात्मिक क्षेत्र उनको व्यापार का साधन होता है। उंगलियां गठीली हों तो अनुसंधान के कार्य में रूचि होती है। उगलियां कोमल हों, गांठ दिखाई न दे तो कलाओं और कल्पना के कार्य में सफल होते हैं, साथ में यदि सूर्य रेखा हो तो लाभ और यश मिलता है। लंबी उंगलियां, लंबी हथेली, लचोली त्वचा के जातक योजना बनाने तथा मस्तिष्क प्रधान कायाँ में सफल होते हैं। रक्षात्मक मंगल से प्रभाव रेखा निकल कर सूर्य को जाये तो राजनीति में सफलता मिलती हैं। गुरु पर्वत पर त्रिशूल हो तो धन-संपत्ति, वाहन का सुख मिलता है।

हस्त रेखाओं के आधार पर व्यवसाय का चुनाव-

1. बुध ग्रह पर तीन या तीन से अधिक खड़ी रेखायें हों, भाग्य रेखा पहले मोटी तथा बाद में पतली हों और मस्तिष्क और जीवन रेखायें लंबी हों तो जातक आयुर्वेद की शिक्षा या मेडिकल की शिक्षा ले सकता है।
2. मस्तिष्क रेखा निदोष होकर मंगल ग्रह पर जाती हो, बुध ग्रह व शनि ग्रह बली हों, हाथ भारी हों, ऐसे व्यक्ति को कानून संबंधी या विज्ञान संबंधी शिक्षा लेनी चाहिये |
3. उगलियां लंबी होने पर मस्तिष्क रेखा विभाजित होकर एक शाखा के चंद्र ग्रह पर जाने, सूर्य व चन्द्र ग्रह के उत्तम होने, भाग्य रेखा के मणिबंध से उदय होकर शनिग्रह तक पहुंचने, जीवन रेखा के गोल होने और अधूरी होने की स्थिति में मस्तिष्क रेखा के उन्नत होने से, गाना-बजाना , पशुपालन , बागवानी , आदि कार्यो में सफलता मिलती है ।
4. गुरु ग्रह प्रधान होने पर सूर्य ग्रह, उत्तम जीवन रेखा, गोल भाग्य रेखा के जीवन रेखा से दूरी पर होने, मस्तिष्क रेखा निदोष या डबल होने पर जातक आई.ए.एस. या पी.सी.एस. अधिकारी बनता है।
5. मस्तिष्क रेखा या उसकी शाखा मंगल पर हो, हाथ सख्त या मुलायम केसा भी हो पर भारी हो, उगलियों के आधार बराबर हों और मंगल, चंद्रमा तथा बुध उन्नत हों तो ऐसे लोग कप्यूटर सम्बन्धी शिक्षा लेते हैं और यदि कोई दोष न हो तो अवश्य सफल होते हैं। लम्बी मस्तिष्क रेखा यदि चन्द्र पर जाये, चन्द्र ग्रह उन्नत हो, हृदय रेखा का अन्त गुरु पर्वत पर हो, भाग्य रेखा मोटी से पतली सूर्य की उंगली के ऊपर वाले पर्व से बड़ी हो तो ऐसा व्यक्ति पत्रकारिता में बहुत सफल होता है।
6. जीवन रेखा गोल, भाग्य रेखा निदीष और मोटी से पतली व मस्तिष्क रेखा दोनों ओर से विभाजित हो तो ऐसे जातक विभिन्न विषयों में शिक्षा प्राप्त करने में सफल होते हैं। वे गाइड या अनुवादक के रूप में सफल होते हैं।
7. हृदय व मस्तिष्क रेखा निर्दोष हो, हृदय रेखा पर त्रिकोण का आकार हो व हाथ उत्तम हो तो वास्तुकला व मकान निर्माण से संबंधित शिक्षा प्राप्त करने में सफल होते हैं। अन्य रेखायें उत्तम होने पर जातक धन-सम्पति स्वयं बनाता है।
8. सूर्य ग्रह उत्तम, उसपर एक से अधिक रेखायें एवं सूर्य उंगली सोधी, बुध की उंगली टेढी तथा चन्द्र और गुरु उत्तम होने पर फैशन डिजाइनिंग, टेलरिंग से संबंधी विषयों में जातक सफल होते हैं।
9. टूटी शनि रेखा के जातक काम बदलते रहते हैं। पतली शनि रेखा मस्तिष्क रेखा पर रुको तो गलत निर्णय के कारण हानि । शनि पर्वत पर चतुष्कोण हो तो धन-संबंधी संकट समाप्त होंगे और धन की प्राप्ति होगी |
10. मस्तिष्क रेखा दोहरी हो, अंगूठा लंबा हो व पीछे की तरफ मुड़ता हो, उगलियां पतली व छोटी हों, गुरु ग्रह व गुरु की उंगली सूर्य से लंबी हो, जीवन रेखा साफ हो तो ऐसे व्यक्तियों की शिक्षा पर काफी पकड़ होती है। ये भाषण देने में माहिर होते हैं।
11. अंगूठा लंबा हो, गुरु की उंगली रेखा साफ-सुथरी हो, मस्तिष्क रेखा शुरू व अंत में विभाजित हो, चंद्रमा उठा हो, अन्य ग्रह भी ठीक हों और हाथ भारी हो तो ऐसे व्यक्तियों की वाणी सम्मोहन का कार्य करती है। इन्हें शिक्षा व बोलने की कला का अच्छा ज्ञान होता है।

नितिन कुमार पामिस्ट



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