Friday, August 17, 2018

Forked Sun Line On Mount Of Sun In Palmistry

Forked Sun Line On Mount Of Sun In Palmistry

Forked Sun Line On Mount Of Sun In Palmistry
If your Sun Line is forked under mount of Sun then it indicates unsuccessful career, failure or success after lots of hardworking.  Some old palmists considered this sign as "Pitra Dosh".

You can read about "Pitra Dosh Remedy In Hindi" and "How To Check Pitra Dosh In HandHow To Check Pitra Dosh In Hand" here.

Double Sun Line Or Multiple Sun Lines In Palmistry

Double Sun Line Or Multiple Sun Lines In Palmistry


Double Sun Line Or Multiple Sun Lines In Palmistry
DOUBLE & MULTIPLE SUN LINE:-
Double sun line denotes knowledge of two fields and success in two fields.  Note:  Both Sun Line must be without any bad sign on it otherwise subject will not get success in both fields.  

But if there are multiple Sun Lines on hand then according to few old palmists that subject is trying to focus on more than one field at same time and because of this reason subject is not able to get success in any field.

Thursday, August 16, 2018

Line from Lower Mars To Sun Mount, Upper Mars, Mercury Mount In Palmistry

Line from Lower Mars To Sun Mount, Mercury Mount In Palmistry



RAHU LINES (WORRY LINES)
Rahu lines are diagonal lines which cut your life, fate, head, heart and sun line. It indicates health and family related hurdles/issues from time to time. Also subject gets loss/cheated by business partner/loss from land or problem in married life.

Line From Upper Mars To Sun Mount In Palmistry

Line From Upper Mars To Sun Mount In Palmistry


Line From Upper Mars To Sun Mount In Palmistry
PURVA PUNYA REKHA:
Line from mount of upper mars towards mount of sun is called purva puyna line.  Auspicious sign on palm, subject gained great fortune as a result of his/her virtuous deeds.  Also shows inclination towards spirituality.  This type of line also shows good success in abroad (name and fame in abroad) and abroad trip but early life is troublesome and stressful.

Line From Lower Mars To Saturn Mount - Palmistry

Line From Lower Mars To Saturn Mount - Palmistry

Line From Lower Mars To Saturn Mount - Palmistry
Line from Lower Mars towards Saturn Mounts are known as accident lines.


ACCIDENT LINES:
Semicircular line from inside of lifeline indicates you are prone to accident, one time near death experience or major accident or troublesome married life.  In woman’s hand if there is no accident or such thing then always chances of ovary, uterus and gynec related issues (in other words late pregnancy).

Cheating Or Betrayal By A Close Friend Or Relative - Palmistry

Cheating By A Close Friend Or Relative - Palmistry

Many times it happens with a person that he is cheated by his own friend, brother, and relative. There are some yog/sign in palm that can be guessed and alert to people.

If you want to read articles written by the famous palmist of India, Nitin Kumar, then search his pamphry blog on Google, "Blog Indian Palm Reading" and go to his blog to read his articles.
Cheating By A Close Friend Or Relative - Palmistry

Signs On Hand denotes Deception Palmistry

1) Line from Mount of Venus cut heart line then always chances that subject will get deception by relative.
2) Line from Upper Mount of Mars cut fate line and sun line denotes subject will get betrayal from hidden enemies and true friend.
3) Line from Mounts of Venus towards Mount of Moon denotes deception by opposite sex.
4) Line from first phalanx of thumb denotes loss from hidden enemy and sometimes enemy attack on subject.
5) Marriage line cross sun line denotes betrayal by life partner.
6) Line from Mount of Moon cut fate line denotes deception by lover.
7) Downward line from headline cut fate line denotes loss of family property due to betrayal by family members.
8) Cross and island on heart line denotes unsuccessful career due to betrayal in love.
 

Wednesday, August 15, 2018

दोस्त या रिश्तेदार से धोखा मिलना - हस्तरेखा विज्ञान

दोस्त या रिश्तेदार से धोखा मिलना - हस्तरेखा विज्ञान 

बहुत बार इंसान के साथ ऐसा होता है की उसको अपने ही दोस्त, भाई, और रिश्तेदार से धोखा मिलता है।  हस्तरेखा में कुछ ऐसे योग है जिन से ये अनुमान लगाया जा सकता है और इंसान को सचेत किया जा सकता है।

यदि आप भारत के प्रसिद्ध हस्तरेखा शास्त्री नितिन कुमार पामिस्ट के लिखे लेख पढ़ना चाहते है तो उनके पामिस्ट्री ब्लॉग को गूगल पर सर्च करें "ब्लॉग इंडियन पाम रीडिंग" और उनके ब्लॉग पर जा कर उनके लिखे लेख पढ़ें । 
दोस्त या रिश्तेदार से धोखा मिलना - हस्तरेखा विज्ञान deception in palmistry
जीवन में धोखा देने वाले योग -

१) हृदय रेखा को शुक्र पर्वत से कोई रेखा आ कर काट दे व्यक्ति को निश्चित ही निकट सम्बन्धी से धोखा मिलता है। 
२) उच्च मंगल से कोई रेखा सूर्य रेखा या भाग्य रेखा को काट दे तो व्यक्ति को घर के भीतर छुपे दुश्मनो से धोखा मिलता है या फिर जिनको वो अपना सच्चा दोस्त मानता है उन से धोखा मिलता है। 
३) शुक्र से आड़ी रेखा चंद्र पर्वत पर जाय तो व्यक्ति विपरीत लिंग से हानि होती है। 
४) अंगूठे के प्रथम पर्व से निकल कर कोई रेखा जीवन रेखा को काट दे तो व्यक्ति को अपनों से धोखा मिलता है और कई बार व्यक्ति पर जान लेवा हमला भी हो जाता है। 
५) विवाह रेखा सूर्य रेखा को काट दे तो जीवनसाथी से धोखा मिलता है। 
६) चंद्र पर्वत से रेखा निकल कर भाग्य रेखा को काट दे तो व्यक्ति को प्रेम में धोखा मिलता है। 
७) मस्तक रेखा से रेखा नीचे की ओर आ कर के भाग्य रेखा को काट दे पैतृक सम्पति में धोखा होता है। 
८) हृदय रेखा पर क्रॉस , द्वीप इत्यादि हो तो व्यक्ति को अपने प्रेम में निराशा मिलने के कारण जीवन में असफलता मिलती है।   

हाथ में त्रिशूल होने के लाभ - हस्तरेखा शास्त्र

हाथ में त्रिशूल होने के लाभ - हस्तरेखा शास्त्र 

हर व्यक्ति अपने हाथ में अच्छे योग चाहता है और उनको अपने हाथो में तलाशता रहता है। इस पोस्ट में आज में आपको एक ऐसे ही अच्छे शुभ चिन्ह के बारें में बताऊंगा। हाथ में बहुत सारे अच्छे और बुरे योग बनते है और गजकेशरी और राजयोग भी बनते है और पितृदोष और मांगलिक दोष भी बनते है जिनके बारें में इस इंडियन पामिस्ट्री ब्लॉग में अलग से पोस्ट लिखी हुई है आप उनको पढ़ सकते है।
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हस्तरेखा में दिये गए त्रिशूल के लाभ -  त्रिशूल अधिकतर कही भी हो यानि किसी भी रेखा या पर्वत पर हो वहा अच्छा ही साबित होता है और व्यक्ति लाभ ही देता है लकिन ऐसी मान्यता है की व्यक्ति को त्रिशूल का लाभ जीवन के अंतिम समय में ही मिलता है।  दोस्तों त्रिशूल के साथ बाकि रेखाओ का अच्छा होना भी जरूरी है। 

१) सूर्य रेखा पर त्रिशूल हो तो व्यक्ति को यश प्राप्त होता है और धन अभाव कभी नहीं रहता है।  
२) गुरु पर्वत पर त्रिशूल हो तो व्यक्ति को सरकार से लाभ और सम्मान मिलता है ऐसा व्यक्ति कुशल राजनायिक , सलाहकार और विदेश भ्रमण करने वाला होता है।
३) स्वास्थ्य रेखा पर त्रिशूल होने पर व्यक्ति को व्यापार में लाभ होता है और सफल कोटि का व्यापारी बनता है।
४) भाग्य रेखा पर त्रिशूल होने से व्यक्ति को गुरु, शनि, और सूर्य तीनो का लाभ मिलता है। ऐसे व्यक्ति समाज कार्यो के कारण विशेष सम्मान प्राप्त होता है। किन्तु भाग्य रेखा शुरू से लेकर अंत तक निर्दोष होनी चाहिए।
५) मस्तक रेखा पर त्रिशूल व्यक्ति को लेखन कार्य में सफलता और अपने मस्तक और दुर्लभ गुणों के कारण समाज में सम्मान प्राप्त होता है।
६) हृदय रेखा पर त्रिशूल व्यक्ति को सामाजिक कार्यो में सम्मान देता है परन्तु ऐसे व्यक्ति को बहुत पारिवारिक कष्ट होता है और पारिवारिक सम्पति को ले कर विवाद होता है।

नितिन कुमार पामिस्ट 

बदनामी और कलंक लगने का योग - हस्तरेखा शास्त्र

बदनामी और कलंक लगने का योग - हस्तरेखा शास्त्र 

हर व्यक्ति बदनामी और कलंकित होने से डरता है तो ऐसे कौन से योग हाथ में होते है जिन से व्यक्ति को अपयश मिलता है। 
बदनामी और कलंक लगने का योग - हस्तरेखा शास्त्र
जैसे आप जानते हो बदनामी बहुत तरह से होती है और बहुत बार व्यक्ति खुद भी बदनामी का कारण होता है :- जैसे रिश्वत लेते गिरफ्तार होना , परस्त्री के साथ पकडे जाना , देश द्रोह के आरोप लगना इत्यादि। इसके अलवा कई बार व्यक्ति को फसा दिया जाता है और उस पर झूठे आरोप मड दिए जाते है। 

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हस्तरेखा में दिये गए बदनामी होने के कुछ महत्वपूर्ण योग -   

१ ) सूर्य रेखा खंडित हो तो व्यक्ति को अपयश मिलता है। ज्यादातर व्यक्ति को फँसा दिया जाता है। 
२) सूर्य रेखा पर द्वीप हो तो व्यक्ति समाज में निंदा का पात्र बनता है और जेल तक चला जाता है। 
३) स्वास्थ्य रेखा पर द्वीप हो तो व्यक्ति दिवालिया हो कर समाज में निंदा प्राप्त करता है। 
४) जीवन रेखा से जुड़ा हुआ स्क्वायर हो तो व्यक्ति जेल जाता है। 
५) गुरु पर्वत पर तिल होने पर व्यक्ति असामाजिक कार्यो में लिप्त होता है और लोकनिंदा प्राप्त करता है। 
६) सूर्य रेखा और सूर्य पर्वत पर काला तिल होने पर व्यक्ति को धनहानि और मानहानि होती है। 
७) भाग्य रेखा टूटी हो और सूर्य रेखा भी दोषयुक्त हो तो सरकार से दंड मिलता है। 
८) भाग्य रेखा पर चतुर्भुज या मंगल के मैदान पर द्वीप हो तो व्यक्ति को धनहानि और मानहानि होती है। 
९) जिस व्यक्ति का शनि पर्वत दब्बा हुआ है वह व्यक्ति असामाजिक कार्यो से धन एकत्रित करता है परन्तु बुरा समय आने पर कलंकित होता है। जैसे आजकल साधु सन्यासी तांत्रिक और कथावाचक भोली भाली जनता को मुर्ख बना कर पैसा बना लेते है पर जब उनका बुरा समय आता है तब वे जेल भी जाते है। 
१०) यदि हृदय रेखा से रेखा निकल कर सूर्य रेखा को काट दे तो व्यक्ति को अपोजिट सेक्स से यानि विपरीत लिंग से बदनामी मिलती है। 
११) सूर्य रेखा को जिस भी पर्वत से कोई रेखा आ कर काट देती है उस पर्वत से सम्बंधित कलंक व्यक्ति को लगता है जैसे यदि सूर्य रेखा को शुक्र पर्वत से कोई रेखा आ कर काट देती है तो बदनामी का कारण पारिवारिक होता है।
१२) विवाह रेखा में दोष है तो निश्चित ही विवाह के चलते या विवाह के कारण ही बदनामी मिलेगी।  यदि विवाह रेखा सूर्य रेखा को काट दे तो निश्चित ही विवाह और जीवनसाथी के कारण व्यक्ति को धनहानि और मानहानि होती है। 

इस प्रकार आप पता लगा सकते है की व्यक्ति को जीवन में अपयश का सामना करना पड़ेगा या नहीं।    

नितिन कुमार पामिस्ट 

हस्तरेखा में अधिक हवस होने का योग - वासना रेखा

वासना रेखा
Hath Mein Sex Ki Rekha | वासना रेखा


हस्तरेखा में अधिक हवस होने का योग  

इस रेखा को सुमन रेखा, Via Lasciva Line भी कहा जाता है! यह रेखा दो प्रकार की होती है पहली स्वास्थ्य रेखा के समान्तर और दूसरी रेखा शुक्र और चन्द्र पर्वत पर अर्धचन्द्राकार के रूप में दोनों पर्वत को जोड़ते हुई।  
वासना रेखा से व्यक्ति के अन्दर कामुकता और दुर्व्यसन की भावना बढ़ जाती है।

अगर वासना रेखा स्वास्थ्य रेखा के समांतर है तो वो स्वास्थ्य रेखा को बल देती है! स्वास्थ्य रेखा के दोष कम करती है लकिन अगर स्वास्थ्य रेखा बिलकुल कमजोर है और वासना रेखा बहुत प्रबल है तो व्यक्ति की कामुकता बढ़ जाती है लकिन उसका स्वास्थ्य अच्छा रहता है। 

यदि वासना रेखा दूसरी प्रकार की है तो व्यक्ति की वासना बहुत जयादा बढ़ी होगी।  ऐसा व्यक्ति अपनी वासना पूरी करने के लिए कुछ भी कर सकता है वो सही गलत नहीं सोचता है।

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जिन लोगो के हाथ में किसी भी प्रकार की वासना रेखा हो वो लोग हमेशा विलासिता का जीवन जीना चाहते है! अगर वासना रेखा जीवन रेखा/भाग्य रेखा को काट दे तो व्यक्ति को बुरी लत लग जाती है जैसे अफीम, चरस आदि की लत लग जाना। 

वासना रेखा के साथ अगर शुक्र मखेला, केतु, चन्द्र, और शुक्र पर्वत भी दूषित हो तो व्यक्ति को कोई ना कोई गुप्त रोग होता है। 

वासना रेखा के साथ हाथ में दूसरी चीजों का भी अध्ययन जरूरी है जैसे अगर वासना रेखा, सूर्य रेखा को काट दे तो व्यक्ति को दण्डित या अपमानित होना पड़ेगा अपनी कामुकता व लत के कारण। 

वासना रेखा पर पाए जाने वाले चिन्ह से आप अनुमान लगा सकते है की व्यक्ति पर क्या प्रभाव पडेगा। 

आप जिस तरह बाकी सभी रेखाओ का अनुमान लगाते है उसी तरह वासना रेखा का भी अनुमान लगा सकते है वासना रेखा का किसी रेखा से मिलना या उसे काटना या वासना रेखा का टूटा होना अलग अलग विचार प्रर्दशित करता है।  आप सभी स्थिति का अनुमान लगा सकते है। 

Tuesday, August 14, 2018

दो विवाह रेखा होने पर तलाक होना या दूसरा विवाह होना - हस्तरेखा ज्ञान

दोहरी विवाह रेखा

Two marriage line on hand parallel marriage line palmistry दो विवाह रेखा होने पर तलाक होना या दूसरा विवाह होना - हस्तरेखा ज्ञान

दो विवाह रेखा होने पर तलाक होना या दूसरा विवाह होना - हस्तरेखा ज्ञान

१) दो विवाह रेखा होने पर क्या हमेशा दो विवाह होते है ?
२) दोहरी विवाह रेखा का मतलब क्या होता है ?

अक्सर लोगो के हाथो में दो विवाह रेखा होती है और वो ये समझ बैठते है की उनका तलाक होगा या दो विवाह होंगे। जबकि ऐसा नहीं होता है विवाह रेखा के साथ आपको भाग्य रेखा पर आय दोष को भी देखना होता है।

अगर दोनों हाथो में दोहरी विवाह रेखा है और भाग्य रेखा पर भी दोष अंकित है तो प्राय: ऐसा देखने को मिलता है की व्यक्ति का तलाक हो जाता है और दूसरा विवाह होता है। लेकिन अगर भाग्य रेखा दोषमुक्त है तो विवाह में तकलीफ रहती है लेकिन तलाक नहीं होता है या अलगाव हो कर रह जाता है।

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व्यक्ति के हाथो में दोनों विवाह रेखा बराबर और समान्तर होनी चाहिए अगर कोई रेखा छोटी है तो ऐसे में दोहरी विवाह रेखा नहीं मानी जा सकती है। दोनों विवाह रेखा गहरी और समान्तर होनी चाहिए।

हमेशा विवाह रेखा के साथ सूर्य रेखा और मुख्यत: भाग्य रेखा को अवश्य पढ़ना चाहिए।  अधिकतर हाथो में अगर विवाह रेखा में दोष है और साथ ही भाग्य रेखा में भी दोष है तो तलाक का योग बनता है और अधिकतर ऐसे में तलाक हो जाता है।

एक से ज्यादा विवाह रेखा होने पर विवाह लेट होता है क्युकी व्यक्ति अपना जीवन साथी का चयन नहीं कर पाता है। ज्यादा विवाह रेखा होने का मतलब ये नहीं होता की अधिक विवाह या अधिक सम्बन्ध होंगे।

इसलिए 2 विवाह रेखा देखते ही तलाक की भविष्यवाणी करना ठीक नहीं होगा पहले हाथ में मौजूद दूसरे दोषो को भी देखना और समझाना चाहिए और फिर भविष्यवाणी करनी चाहिए। 

हस्तरेखा में कुछ महत्वपूर्ण योग

हस्तरेखा में कुछ महत्वपूर्ण योग 
हस्तरेखा में कुछ महत्वपूर्ण योग
१) हस्तरेखा में राजनीतिक योग

परिभाषा : यदि मध्यमा जंगली का अग्र भाग मूकीला हो तथा सूर्य रेखा विकसित और लम्बी हो तो यह योग होता है। अथवा कुष पर्वत पर त्रिकोण का चिह्न हो तब भी यही योग होता है।

फल : जिसके हाथ में यह योग होता हैं वह राजनीति के क्षेत्र में अत्यधिक उन्नति करता है तथा यश प्राप्त करता

२) हस्तरेखा में अन्वेषण योग

परिभाषा : जिसके हाथ में मस्तिष्क रेखा पर सफेद चिन्ह हों तो यह योग होता है ।

फल : जिसके हाथ में यह योग होता हैं बहू नई-नई बस्तुओं की खोज करने वाला तथा सफल आविष्कारक होता
टिप्पणी : इसके अलावा सूर्य और बुध पर्वत विकसित हों तब भी यही योग होता है या दोनों अंगूठे पीछे की ओर बहुत अधिक मुड़े हुए हों या बुध पर्वत हथेली के बाहर की और झुका हुआ हो तो तब भी यह योग बनता है।

३) हस्तरेखा में कानून योग

परिभाषा : यदि शनि रेखा एवं गुरु रेखा विकसित हो अथवा मणिबन्ध से गुरु पर्बत तक कोई रेखा पहुंचती हो तो यह योग होता है।

फल: जिसके हाथ में यह होता है वह कानून को जानने वाला सफल वकील, अथवा श्रेष्ठ न्यायधीश होता हैं।

अंतर्दृष्टि योग - हस्तरेखा ज्ञान

अंतर्दृष्टि योग - हस्तरेखा ज्ञान
अंतर्दृष्टि योग - हस्तरेखा ज्ञान

परिभाषा : यदि मस्तिष्क रेखा पतली तथा लम्बी होकर चन्द्र पर्वत पर पहुँचती हो तो यह योग होता है।

फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह दूसरों के मन को पढ़ने में या बिना पूछे ही दूसरों के मन की भावना
को जानने में सक्षम होता है।

रसायन शास्त्र योग और धार्मिक योग - हस्तरेखा ज्ञान

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१ ) रसायन शास्त्र योग - हस्तरेखा ज्ञान

परिभाषा : बुध क्षेत्र पर बहुत अधिक खड़ी रेखाए हों तो यह योग होता है।
फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह रसायन शास्त्र के क्षेत्र में प्रसिद्ध विद्वान होकर नाम कमाता है ।

२) धार्मिक योग - हस्तरेखा ज्ञान

परिभाषा : यदि मणिबन्ध से कोई रेखा गुरु पर्वत तक जाती हो तथा उगलियों के सिरे नोकीले हों तो धार्मिक योग होता है।

फल : जिसके हाथ में यह योग होता है वह धार्मिक क्षेत्र में उच्च पद को प्राप्त करता है तथा धार्मिक ग्रन्थ लिखकर प्रसिद्धि तथा सम्मान अजित करता है।

मिश्रित हाथ होने का मतलब क्या होता है - हस्तरेखा विज्ञान

मिश्रित हाथ
मिश्रित हाथ होने का मतलब क्या होता है - हस्तरेखा विज्ञान 


mixed hand palmistry


जिस हाथ में कई प्रकार की अंगुलियाँ पाई जाती हैं उसे मिश्रित हाथ कहते हैं। ये हाथ और अंगुलियां किसी एक प्रकार के नहीं होते। अतः इसमें शुभ और अशुभ दोनों गुण विद्यमान होते हैं। ऐसे व्यक्ति एक ओर दयालु होते हैं और दूसरी ओर क्रोधी होना इनका स्वभाव होता है।

बार-2 परिवर्तन इनकी विशेषता होती है। समाज में ऐसे लोगों का कोई सम्मान नहीं होता तथा जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में कठिनता होती है। यदि आप भारत के प्रसिद्ध हस्तरेखा शास्त्री नितिन कुमार पामिस्ट के लिखे लेख पढ़ना चाहते है तो उनके पामिस्ट्री ब्लॉग को गूगल पर सर्च करें "इंडियन पाम रीडिंग ब्लॉग" और उनके ब्लॉग पर जा कर उनके लिखे लेख पढ़ें ।

ऐसे हाथों को किसी एक श्रेणी में नहीं सामिल किया जा सकता। मिश्रित हाथ के स्वामी चतुर तो होते हैं परन्तु बुद्धि का प्रयोग करते समय संयमित नहीं होते हैं। ऐसे लोग कई तरह के कार्य एक साथ ही करते हैं तथा उसे अंजाम देने के समय कदम लड़खड़ा जाता है और नुकसान कर बैठते हैं। ऐसे हाथ की अनामिका अगर बड़ी होती है, तो जुआ, सट्टा, लाटरी आदि कार्य करते हैं। ऐसे लोग कई क्षेत्रों में प्रतिभा स्थापित करते हैं।

स्वतः के विचारों में विभिन्नता होती है तथा दूसरे के विचारों को सहजता से स्वीकार करते हैं। हर प्रकार के कार्य में खुश रहते हैं और जन समूह में ज्यादा तर्क-वितर्क करने से बचते हैं। लेकिन अलग-अलग लोगों से बातें करके सबको उल्लू बना सकते हैं। इनके अंगूठे का आकार छोटा होता है, इनका चित्त स्थिर नहीं होता। प्रत्येक कार्य को अंजाम देने से पूर्व मध्य काल में स्थगित कर देना इनका स्वभाव होता है। परिणाम स्वरूप असफलता ही हाथ आती है और जीवन में निराशापन ज्यादा होता है तथा जीवन में । सफलता के लिए अधिकाधिक संघर्ष होता है।

छोटा हाथ होने का मतलब क्या होता है - हस्तरेखा विज्ञान

छोटा हाथ

छोटा हाथ होने का मतलब क्या होता है - हस्तरेखा विज्ञान 

small hand palmistry

जो हाथ अन्य हाथों की अपेक्षा छोटा हो, वह हाथ छोटा कहलाता है। छोटा हाथ होने पर मस्तिष्क रेखा स्पष्ट और हाथ भारी हो, तो ऐसे लोग बहुत ही कुशाग्र बुद्धि वाले तथा शीघ्र ही उन्नति करने वाले होते हैं। छोटे हाथ वाले अगर भारी हाथ रखते हों, तो बहुत ही चालाकी से काम लेने और बहुत ही सोच-समझ कर खर्च करने वाले होते हैं। ऐसे लोग बेकार अपना समय और पैसा बर्बाद करने वाले नहीं होते हैं।

इनकी संतान भी कुछ इसी प्रकार की होती है। ऐसी महिलाएं भी बहुत सोच-समझ कर खर्च करती हैं, कि वसूली पूरी हो जाए। यदि आप भारत के प्रसिद्ध हस्तरेखा शास्त्री नितिन कुमार पामिस्ट के लिखे लेख पढ़ना चाहते है तो उनके पामिस्ट्री ब्लॉग को गूगल पर सर्च करें "इंडियन पाम रीडिंग ब्लॉग" और उनके ब्लॉग पर जा कर उनके लिखे लेख पढ़ें ।

अगर हाथ भारी हो, तो ऐसे पुरुष भी अपने परिवार पर खर्च करते हैं तथा वे फालतू खर्च नहीं करते। राजनीति में ऐसे लोग बहुत ही सफल होते हैं और अपने नीचे काम करने वाले कर्मचारियों से बखूबी काम लेना जानते हैं। इन्हें सफल प्रशासक भी कहा जाता है। कुल मिलाकर ऐसे हाथों वाले लोग, जिनकी अन्य रेखाएं स्पष्ट, हाथ का रंग गुलाबी, हाथ भारी हो, बहुत सफल होते हैं।

Importance Of Thumb In Palmistry | Thumbs Tells Your Fate

Thumb – The King (Leader) Of Fingers

In fact, thumb is a representative of the full hand, as it is believed that thumb's significance exceeds the significance of all the fingers.

Importance Of Thumb In Palmistry | Thumbs Tells Your Fate

Thumb is the centre of will-power. One can easily determine a person's nature & temperament by studying the thumb, which spells out internal activity of a person, as it has direct connection with human brain. I have described in details, about all the features of thumb in my book “Thumb - The Mirror of Fate". But, here only four types of thumb's classifications are being detailed; as indicated here under –

1. Classification based on the back part of first knuckle of thumb.
2. Conical classification.
3. Classification based on form and shape of the thumb.
4. Classification based on flexibility of the thumb.

Classification based on the back part of first knuckle of thumb

It can be classified and divided into five segments, as per details given here under: 1. Pointed. 2. Conical/conic. 3. Square. 4. Spatulate. 5. Rectangular.

Pointed Thumb

Such type of thumbs is good to look at. Such type of thumbs is wide at the base, round in the middle and become conical as they reach the end.

Such types of nails are generally found in ladies lands. They are soft and tender, beautiful to look at, and represent persons having einotive sentiments. Such natives are idealists, imaginative, gentle and high-class lovers, but they shirk physical labour and activity. They are more inclined to self-contemplation; hence people consider them as selfish but, despite it, they prove as the best friends.

Conical Thumb

This type of thumb is wide at the hand side and round at the top. Such natives have an excellent blend of practicality and imagination. They are fond of good food, dresses, and like all artistic and attractive objects. They are equally capable of mental and physical capability. They also possess self-contemplation and philanthropy. Hence they are social beings.

Square Thumb

Being active and laborious, their creed ties in firm belief in action. They are fully materialise and practical. They do not believe in pseudo pageantry and show off, as they do not have any faith in-lofty ideals and imaginative facets. They are hard working laborious and lead a simple life, and belong to the middle class. They will never blindly follow or pin faith in anything, rather they weigh every situation on their intellectual scale, by means of their logical prowess and intellect, and they themselves decide utility and truth or otherwise of any matter. They have plenty of patience and perseverance, and their chief objective of their life is to earn money, Honesty and frankness are their leading traits.

Spatulate Thumb

This type of thumb is exact total variance of conical thumb that is wide at the top, but squeezed/contracted at the lower portion. The persons, having spatulate thumb, possess hyper mental activity and zeal. Their life is an excellent blend of spiritual and philosophical thinking. They are philosophers who believe in metaphysics. Their imagination is practical and research oriented. They possess a natural trait for inventing something extraordinary. Such natives are seen to be successful religious and spiritual disciplines. If they become active, they can become sports persons of top grade, excellent engineers, scientists and inventors.

Rectangular Thumb

Persons, having such type of thumb are inherent believers in - eating, drinking and be merry, and it is their natural trait, as their life has a materialistic back ground. They possess exceptionally high physical prowess and alacrity. But all their mental and physical labour ends up in acquisition of material comforts, which is their ultimate goal.

Generally such native have neither any desire nor urge for education/ studies - in such a situation their mental development remains scuttled. Resultantly they fall into the company of auto-social elements and thus, become dacoits, murderers, assassinates, criminals and can also fall to the level of fiercest type of animal tendencies. But, if such natives have been brought up and reared in a congenial situation, they can be very active and able workers, high status police officers, military officers and staunchi patriots, provide other positive signs also exist on their palms.

Conical Classification Keeping in view thumb's tendency to stay away from palm of liand, thumbs existing in all the human hands, have been divided particularly into three types, that is - 1. Acute angle. 2. Equal angles (equiangular). 3. Obtuse angle.

The above mentioned are figuratively and forinically can be shown in following shapes, where position of each type of angular thumb has been separately indicated (See the following diagram).

Thumbs which remain glued to the palm, are called 'Acute angle thumbs' and its proximity and expansion remains between 40° to 80°. In the second variety, thumbs are called as “equal angled thumbs', which make an angle of 90° to 95° between the palm and index finger. Under the category those thumbs are reckoned which can expand/extend and twist or bend between 950 and 180°, thus making an obtuse angle between index finger and the thumb. All the said explanations can be easily discerned from the above figure.

Acute Angle Thumbs

This type of thumbs remains adhered to the palm like lump of Earth, and their length is too small. These thumbs can hardly reach upto the lov:er knuckle and first joint (on the lower side) of the index finger. If a person has this type of thumb, he will be a short-stature, small, thick and solid body and they generally belong to the lower middle class. As they are deficient in education they do not have any faith in religion and rituals, and face monetary crunch. They have 110 faith in the existence of religions (Dharma) and also in the existence of God nor do they believe in his reality, bliss, existence and everlasting and truthful traits, rather they will worship dead bodies, spirits, ghosts, mortuaries, and altars departed forefathers etc. they unproductively waste and squander their money in black inagic, totens, magic, spell, charins, witchcraft etc. In short they believe in blend worship and in ancient traditions.

Such type of persons are indolent, lethargic and lewd/amorous. Even in daily dealings they use obscene and unchaste words. They eat prohibited eatables, indulge in unlawful professions, are impractical, and these are the specific traits of such persons. They have often-immoral physical relationships with low-grade women, and it also applies equally in the case of women. If such type of thumbs is found even in the hand of a person, who belongs to a higher caste, he too, will be having all the said bad traits. Such natives are cunning, dishonest and deceits. Generally such persons are born to be slaves and do only labour work. They are so mean and stingy that they will not pay fee even to an astrologer. It may be kept in mind that the said negative will dilute and good qualities will usher in when angle of their thumb extends beyond 40° - that is more expansion of angle and thunb will yield good results and traits in them.

Equal Angle Thumbs

Persons, whose thumbs make an angle from 90° to 95° between the thumb and index finger and stand erect, are handsome, robust, muscular, bony, solid, and are cultured. Such natives are practical, wise, intelligent and educated, and put in more efforts than others. They keep up their promises and stick to their decisions. They have strong revengeful and vindictive tendencies. They will break, but will not yield, submit or compromise. If they make friends with any person, they will even sacrifice their life for them but, if they turn as enemies, they would not hesitate to kill him also.

Such type of natives has dominant “Rajoguna’, which implies they are fast, active, and hard working. In religious and financial matters they represent a blend of traditions and modernity. They are extra haughty, stiff necked and possess self-respect. They are self-willed, free willed and independent, and are easily duped and carried away by others. They are sentimental and in the wake of excitement can do good or lead deed without any hesitation. They are financially and mentally well equipped. They become writers, doctors, lawyers and astrologers of repute and such type of thumbs will be found in their hands.

Obtuse Angle Thumb

As we can easily observe from the figure, such type of thumbs is soft and tender can bend easily and make an obtuse angle. Such persons are tall and highly sentimental. Even in adverse conditions they attain education. They have natural and inherent interest in arts, music, science, medicine, spiritual knowledge and mantras. They have soft and sweet tongue and are well cultured and civilized. In order to find out ultimate truth of life and to examine its viability, they can embrace all the religions. They often continue to change their thing and succeed in life, despite plenty of obstacles. As they are firmly tied to their principles and philosophy, they have a set out goal for their life.

Such natives are “Satoguni”, that is they possess lrigh and noble qualities, but are spending thrift. They are philanthropist, donors, courageous and ascetics. Their noble virtues and decent inclinations can be determined if their thumbs make an angle between 120° and 180°. Here, it may be kept in mind, that length of the thumb should measure upto mid-portion of the last knuckle of the Index finger. Natives, whose thumbs make an obtuse angle, lave lengthier thumbs. If length of the thumb extends to the forepart of the Index finger, such a native is imprudent and idiot, and such a native's excessive good virtues and qualities get converted into defects. Such natives are great men par excellence and can be easily distinguished from other persons.

Classification Based On Shape And Forms Of Thumbs

This type of thumbs is based on a native's shape and mode of thumbs, existent at the time of birth. Foregoing classification was based on the effect of shape on the outer appearance of the thumb, but the present classification is leased on the shape, form and type of thumb, existing at the time of birth. In this context there are ten principle types of thunibs, which can be determined and distinguished from the following diagram.

Type of thumbs, shown in the figure, can be explained as under -

1. Undeveloped thumb. 2. Thick thumb. 3. Slender thumb.
4. Crooked thumb. 5. Flat thumb.
6. Round thumb. 7. Broad thumb.
8. Clubbed thumb. 9. Waisted thumb.
10. Fully developed or a full thumb.

Here under is given a brief description of each of the above mentioned types of thumbs

Undeveloped Thumb

Such types of thumbs remain glued to the palm. The natives, who hav such type of thumb, are bereft of logical powers, imprudent and impractica They have predominant bestial tendency and are cruel in nature. Sinc they are devoid of emotive sentiments, they treat members of the opposit sex in a bestial and inhuman manner. They possess extraordinary physics power. They are generally rank uncultured, uncivilized and uneducated and barbarians.

Thick Thumb

This type of thumbs are so flashy that their phalanxes cannot be ascertained, as they resemble like a peeled banana, which the Westerners have nominated as “Elementary thumb' also. Persons, who have such type of thumbs are of bestial tendencies, remain busy in sex and sex related matters are cruel and dacoits. Their mental power is weak, but physically they are strong, and are also egoistic and arrogant. They are never scared of any danger, spend time in sexual enjoyment, but are careless about their future. Their leading motive being to earn money and remain engrossed in licentiousness and sensual enjoyment.

Slender Thumb

This type of thumb indicates development of artistic faculties, health and alacrity. They are so highly educated that they have immense capability and qualities to write poetry and make artistic objects. But their life proceeds at a snail's pace. They do have one love affair, but their success remains quite doubtful. Money does not stick with such persons.

Crooked Thumb

Such type of thumbs are compressed & crooked and the natives, having such a type of thumb, are cheats, cunning and swindlers. They are violent, short tempered and indiscreet. They are persons of mean mentality and are a stir and blot on the fair image of society. They can never become rich and affluent in life, even whole they earn and accumulate through unfair means. Spiritual knowledge, righteousness and God have no value in their life.

Flat Thumb

In this figure upper roundness of the thumb is flat. Such persons are selfish and narrow-ininded. They are miserly and stingy in spending money, even if they are financially well off. They manage to control their business and families efficiently, but in the field of sociability and friendliness they do not like to meet or mix up with other persons.

Round Thumb

Such types of natives, whose thunbs are round, are sentimental and lovers, but they possess plenty of jealousy and acriinony (malice). They are of cowardly nature, and are clever also. They are fond of eating spicy and saucy eatables, hence resultantly they get excited and angry quite soon. In the wake of intense excitement, they will never think of pros and cons and other gains and losses and resultant fall-out outcome. As they are lend ears to everyone, hence any friendship will then will be harmful.

Broad Thumb

These persons suffer froin gas (wind) and rheumatic disorders. Even though they are practical, it is not possible for them to control their anger. But their anger subsides quickly, after which they repent over their anger. Feud and wrangling is an ongoing trait of their families. From financial and mental viewpoint, they are well off and prosperous, and have an unshakable faith in religion and religious rituals (Karmakând).

Clubbed Thumb

First portion of this type of thumb resembles a club, hence its nomination. Its second portion is comparatively thin, but is thick. Western scholars linanimous in calling this type of thumb as "Murderer's thumb”, Such natives are violent and murders and they are adept in murdering any person with any weapon, due to their innate habit of killing. They are devoid of human sentiments, they indulge in the worst forms of bestiality and killings. Moreover, no murder will induce any type of remorse or repentance in them.

Waisted Thumb

As is evident from the name, this type of thumb is thin at the middle portion, and then it resembles clearly like the waist (of ladies). Such natives are intelligent, fast and of serious native. They acquire high education due to their studious nature. They are cultured and peaceful, serve the society, and are also excellent mediators, as they settle the disputes between two or more persons and pacify both sides. Such types are generally seen to be successful in political, social and religious fields.

Full Thumb

Second knuckle of this type of thumb is fully developed and robust.

Persons, such type of thumbs is simple and does not indulge in cheating. They possess unlimited self-confidence. They are religious, possess financial and intellectual acumen and competence, and also have self respect.

They are speak the truth and are also upright and honest. They will speak in unequivocal and frank tone, and express whatever lies in their mind. They are unmindful of what impact their frank expressions will have on others. In a nutshell, a full thumb is indicative of mental and physical strength of such natives due to which they are completely ambitious persons.

Classification Based on Flexibility of Thumb

This type of classification is based on quantum of flexibility of the thumb and it is directly related to flexibility of first knuckle of the thumb. It can be divided into two types, viz. 1. Stiff or straight thumb 2. Flexible or Bendable thumb


The Stiff Or Straight Thumb

Native having such a type of thumb, have strong will power. They bravely face and encounter adverse situations, and do not lose their courage and tenacity, even when faced with a strong enemy. They have complete control over their sentiments, imaginative power and desires.

They are fully capable of absorbing and concealing secrets of other persons. Due to their self-respect they do not mix-up freely with other persons; and they are never hasty in cultivating friendships. But, once they make friends with anyone, they will persist with such a friendship throughout their life, whatever price they have to pay therefor.

They normally do not give a word to nay one, but once they do so they will stick to their promise and fulfil the same throughout their life, and will


not hesitate to sacrifice their money, body comforts and ideals. They are generally obsessed with pre-concave notions, though they have a stable and healthy ideology and thinking.

It is a confirmed reality that such persons will be murderers, when they have a stiff thumb and all the fingers are intrinsically seen to be bending in wards towards the palm.

Flexible or Bendable Thumb

Natives, having such a type of thumb, are of polite and pacified nature, They do not like, at all, any type of feud, squabbling or wrangling. They are broad-minded. They never hesitate in lending financial and material (or physical) helps to anyone in the hour of need. Due to their syinpathetic and broad-ininded approach, they occupy a highly respectable status in the society.

Such type of natives is given to luxurious and sensual living. In order to satiate their mental urge and desire, they can spend any amount of money to gratify their desires. They are practical, sociable and freely to mix up with others. Even in an alien atmosphere, they will create a homely atmosphere. They take interest in art, literature and acting. They are affectionate and follow a policy of rapport and coordination. They listen carefully and affectionately averments of others, and also give due importance to expressions/opinions of other persons. They are not sticky type of persons, and do not insist on others to follow their ideas and ideals In a word they are like true sports persons. In short, such type of natives are possess a fully develop mental and physical facilities and have also a fully developed personality.







हस्तरेखा ज्ञान क्या है ? ज्योतिष विद्या

हस्तरेखा ज्ञान क्या है ?

हस्तरेखा ज्ञान क्या है ? Hastrekha Kya Hai?

सर्वप्रथम ये बताना आवश्यक है की ये लेख हस्तरेखा पर लिखी पुस्तक "प्रैक्टिकल पामिस्ट्री" से लिया गया है।

हस्त लक्षणों का ज्ञान कितना पुराना है, अनुमान नहीं लगाया जा सकता। ज्योतिष का वर्णन उस सर्वशक्तिमान के नेत्रों के रूप में वेदों में पाया जाता है। हस्तरेखा द्वारा ही देवर्षि नारद ने भक्तों के भाग्योदय किए हैं। महाभारत में उंगलियों को अग्रभाग मोटा होना व्यक्ति के जीवन में अस्थिर होने का लक्षण दर्शाया गया है। संसार के प्रत्येक देश में किसी न किसी प्रकार से ज्योतिष ज्ञान पाया जाता है। व्यक्ति कहीं हाथ की रेखाओं, कहीं शरीर के लक्षणों या कैवले अंगूठे को देखकर जिज्ञासा को शान करता है। पुराणों, शास्त्रों व जनसंकुलन में अनेक शकुनों का पाया जाना भी व्यक्ति की निरन्तर १ अतीतकालीन भविष्य विषयक जिज्ञासा का चिन्ह है।

अत: पता नहीं कब से इस सम्बन्ध में विचार होता रहा है। इसी जिज्ञासा के शमा का परिणाम ही ज्योतिष है, जिसका आधार खगोल के आश्चर्यजनक प्रह, करतल, मस्तके व पादतले की रेखाएं रमले, शकुन व श्वास-क्रिया आदि हैं।  यदि आप भारत के प्रसिद्ध हस्तरेखा शास्त्री नितिन कुमार पामिस्ट के लिखे लेख पढ़ना चाहते है तो उनके पामिस्ट्री ब्लॉग को गूगल पर सर्च करें "इंडियन पाम रीडिंग ब्लॉग" और उनके ब्लॉग पर जा कर उनके लिखे लेख पढ़ें ।

ज्योतिष का ध्येय मानव कल्याण है। अत: परमार्थ को सपर रखकर भविष्य बताना ही उत्तम है, क्योंकि इसके अभ्यास में अनेक रथल ऐसे आते हैं कि हस्तरेखाविद् को व्यक्ति का पूर्ण विश्वास प्राप्त होता है। जिसका अनेक प्रकार से दुरुपयोग भी किया जा सकता है जो कि इस ईश्यीय विद्या का ही दुरूपयोग है। अतः ज्योतिषी को चरित्र, व्यवहार, चाणी के तिपय में विशेष संयम व सतर्कता की आवश्यकता होती है।

इसी के अभाव में आज यह ज्ञान बाजारू बन गया है और अनेक अनर्गल पाते इस विषय में प्रचलित हैं। ज्योतिष का, सही मार्गदर्शन, कार्य को दिशानिर्धारण व भविष्य के विषय में सतर्कता ही केवल उपयोगी है, जिसके फलस्वरूप परिश्रम की बचत व रक्षा की सम्भावना रहती है। वैसे तो ज्योतिष का ध्येय ही मानव कल्याण है, तो भी यह कला व्यक्ति विशेष के जीवन का विश्लेषण करती है।

'एक फल, एक लक्षण' इस कहावत को ज्योतिष विद्या ने नकारते हुए सिद्ध किया है कि एक फल की पुष्टि अनेक लक्षणों से होती है।कई बार हाथ में रेखा या किसी लक्षण-विशेष की उपस्थिति के न होने के कारण, असमंजस का सामना करना पड़ता है। परन्तु एक ही लक्षण पर निर्भर न रहकर एक ओर तो अन्य लक्षणों द्वारा भी उसी फल की प्राप्ति हो जाती है, दूसरी ओर उसी लक्षण की निश्चितता का भी ज्ञान होता है।

इसी कथन को ध्यान में रखकर हाथ में जो कुछ भी देखा जाए, सावधानी से देखा जाना चाहिए ताकि हाथ के सभी गुण, दोष, अन्य लक्षण व रेखाओं में दोष आदि दुष्ट्रिगत हो सकें। हाथों में निम्न लक्षणों का सूक्ष्म निरीक्षण करने से उत्तम फलों की प्राप्ति होती है आरम्भ में कई बार निराशाजनक फलों की प्राप्ति हो सकती है। इसमें हाथ दिखाने वाले का असहयोग या कोई अन्य कारण हो सकता है। परन्तु इससे हतोत्साहित न होकर पुन: प्रयत्न करना श्रेयष्कर होता है। हमें विश्वास है कि आपको सफलता ही नहीं पूर्ण सफलता हाथ लगेगी।

अन्त में यही कहा जा सकता है कि निरन्तर प्रयत्न व अनुभव से प्राप्त ज्ञान ही महत्वपूर्ण है। अतः निरन्तर प्रयत्न के क्रियात्मक अध्ययन ही ज्ञान की कुन्जी है।

Monday, August 13, 2018

हस्तरेखा विज्ञान से मणिबन्ध की सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करें | मणिबंध की गणना| मणिबन्ध पर चिह्न | मणिबन्ध से जाने वाली रेखायें

मणिबन्ध 
हस्तरेखा विज्ञान से  मणिबन्ध की सम्पूर्ण जानकारी इस लेख में दी गयी है।

हस्तरेखा विज्ञान से मणिबन्ध की सम्पूर्ण जानकारी प्राप्त करें  | मणिबंध की गणना| मणिबन्ध पर चिह्न | मणिबन्ध से जाने वाली रेखायें

सर्वप्रथम ये बताना आवश्यक है की ये लेख हस्तरेखा पर लिखी पुस्तक " सामुद्रिक शास्त्र" से लिया गया है।

हाथ जहाँ से आरम्भ होता है वहाँ कलाई पर भीतर की और (हथेली की तरफ़) जो रेखाएँ होती हैं उन्हें संस्कृत में मणिबन्ध कहते हैं । इस स्थान को सामुद्रिक शास्त्र में 'पाणिमूल' या हाथ की जड़ या प्रारम्भ भी कहा। गया है। यदि कलाई का यह भाग मांसल (माँसयुक्त–जिसमें हड्डी दिखाई न दे), पुष्ट, अच्छी सन्धि सहित (अच्छी तरह जुड़ा हुआ अर्थात् दृढ़) हो तो जातक भाग्यशाली होता है। यदि इसके विपरीत हो अर्थात् देखने से यह मालूम हो कि हाथ और बाहू का, जो कलाई के पास जोड़ है वह ढीला, लटकता मणिबन्ध हाथ (चित्र नं० ८) हुआ, असुन्दर कमजोर है और हाथ को हिलाने से वहाँ कुछ आवाज़ होती है (हड्डी का जोड़ पुष्ट न होने के कारण) तो मनुष्य निर्धन होता है और यदि अन्य अशुभ लक्षण हों तो राज-दण्ड का भागी हो या किसी दुर्घटना के कारण हाथ पर आघात लगे । ‘गरुड़ पुराण तथा वाराही संहिता' दोनों के अनुसार मणिबन्ध की हड्डियाँ दिखाई नहीं देनी चाहिए और वह जोड़ दृढ़ होना सौभाग्य का लक्षण है।

इसी स्थान पर हथेली के प्रारम्भ में ही रेखा होती है । ‘समुद्रतिलक' में लिखा है

रेखाभिः पूर्णाभिस्तिसृभिः कर मूलमंकितं यस्य । धन काञ्चन रत्नायुतं श्रीपतिमिव भजति लुब्धं च ।। त्रिपरिक्षेपा व्यक्ती यवमाला भवति यस्य मणिबन्धे । नियतं महार्थ सहितः स सार्वभौमो नराधिपतिः ।।
करमूले यवमाला द्विपरिक्षेपा मनोहरा यस्य ।। मनुजः स राजमंत्री विपुल मतिर्जायते स मतिमान् ।। सुभगैक परिक्षेपा यवमाला यस्य पाणितले स्यात् । भवति धनधान्य युतः श्रेष्ठो जनपूजितो मनुजः ।।

अर्थात् यदि तीन रेसा पूर्ण (कहीं से खण्डित न हों) कलाई के चारों ओर हों तो धन, सुवर्ण, रत्न का स्वामी होता है। यदि इन चारों ओर पूर्ण रहने वाली मणिबन्ध की तीनों रेखाओं में निरन्तर यवमाला (जौ के आकार की लड़ियाँ) स्पष्ट हों तो राजा होता है । यदि कलाई के चारों ओर दो रेखा हों और सुन्दर यवमाला उनमें निरन्तर हो तो ऐसा व्यक्ति अत्यन्त बुद्धिमान और राजा का मंत्री होता है । यदि एक सुन्दर यवमाला-युक्त रेखा कलाई के चारो ओर हो तो ऐसा व्यक्ति धन-धान्य पूर्ण होता है और उसकी लोग प्रतिष्ठा करते हैं। यहाँ तीन बातों पर जोर दिया गया है—प्रथम यह कि केवल रेखा होना पर्याप्त नहीं है, उन रेखाओं में यवमाला (एक जौ से दूसरा जौ जुड़ा हुआ) का चिह्न निरन्तर होना चाहिये ।

दूसरी बात यह कि यह यवमाला सुन्दर होनी चाहिये। अर्थात् जैसे सुन्दर (बराबर एक से) निरन्तर मोती की माला बहुमूल्य होती हैं, किन्तु छोटे-बड़े या कहीं नज़दीक कही दूर ऐसी माला अच्छी नहीं समझी जाती, इसी प्रकार ‘यवमाला' सुन्दर हो। तीसरी बात यह कि यवमाला कलाई के चारों ओर होकेवल हथेली की ओर नहीं । यदि हस्तपृष्ठ पर भी कलाई के स्थान पर यवमाला होगी तभी पूर्ण फल होगा। अन्यथा न्यून फल समझिए।

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‘विवेक विलास' में लिखा है -

मणिबन्धे यवश्रेण्यः तिस्रश्चेत् स नृपो भवेत् ।
यदि ताः पाणिपृष्ठेऽपि ततोऽधिकतरं फलम् ।।

स्त्रियों के मणिबन्ध के विषय में ‘भविष्यपुराण' में लिखा है। कि मणिबन्ध यदि तीन रेखायुत, सम्पूर्ण (बीच में टूटा नहीं) और सुन्दर हो तो ऐसी स्त्री भाग्यशालिनी होती है, और रत्न तथा सुवर्ण-जटित हाथ के आभूषण पहनने वाली होती है।

मणिबन्धोऽव्यवच्छिन्नो रेखात्रयविभूषितः । ददाति न चिरादेव मणिकाञ्चन मण्डनम् ॥

पाश्चात्य मत

मणिबन्ध से रेखाओ का निकलकर उंगलियों की ओर जाना अच्छा माना गया है किन्तु हथेली की कोई रेखा नीचे की ओर मणिबन्ध की ओर आवे तो यह अच्छा नहीं ।

(१) यदि मणिबन्ध पर एक ही रेखा हो और टूटी न हो तो २३-२८ वर्ष तक की आयु जातक की होगी ।

(२) यदि दो रेखा हों तो आयु ४६ से ५६ तक ।

(३) यदि तीन रेखा सम्पूर्ण हों तो ६९ से ८४ वर्ष तक जातक को जीव-योग समझना चाहिये ।

यदि मणिबन्ध की रेखा अच्छी हों किन्तु जीवन-रेखा अच्छी न हो तो भाग्य अच्छा किन्तु स्वास्थ्य अच्छा नहीं रहेगा। | यदि स्त्रियों के हाथ में मणिबन्ध की प्रथम रेखा हथेली की ओर बढ़ी हुई हो और उसी ओर गोलाई लिये हुए हो तो प्रसव कठिनता से होता है ।

यदि मणिबन्ध की तीनों रेखायें सुस्पष्ट, सुन्दर और अच्छे | वर्ण की हों तो जातक दीर्घायु, स्वस्थ और भाग्यशाली होता है ।

यदि सुस्पष्ट न हों तो जातक अपव्ययी होने के कारण धन का संग्रह नहीं कर पाता और यदि अन्य लक्षण भी पाये जायें तो विषय-भोग के कारण स्वास्थ्य-हानि भी करता है ।

यदि प्रथम रेखा (हाथ की ओर से गिनना चाहिये) श्रृंखलाकार हो तो परिश्रम और चिन्तायुक्त जीवन रहता है किन्तु परिणाम में सफलता प्राप्त होती है ।

मणिबन्ध से जाने वाली रेखायें

यदि मणिबन्ध से कोई रेखा निकलकर शुक्रक्षेत्र पर होती हुई बृहस्पति के क्षेत्र पर जावे तो किसी लम्बी यात्रा द्वारा सफलता प्राप्त होती है।

यदि मणिबन्ध से निकलकर दो रेखा शनिक्षेत्र को जावें और यदि ये दोनों रेखा एक-दूसरे को काटें तो दुर्भाग्य प्रकट करती हैं। संभवतः जातक दूर देश को जाकर वापस न आवे ।

यदि मणिबन्ध से निकलकर कोई रेखा सूर्य के क्षेत्र पर जावे तो यात्रा के फलस्वरूप विशिष्ट व्यक्तियों के सम्पर्क में आने से मनुष्य को प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। यदि सूर्यक्षेत्र की बजाय यह रेखा बुधक्षेत्र पर आवे तो अकस्मात् धन-प्राप्ति होती है। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य-रेखा के पास ही यह दिखाई देगी।

मणिबन्ध से निकलकर यदि रेखा चन्द्रक्षेत्र पर आवे तो जलयात्रा अर्थात् समुद्र-पार देशों को मनुष्य जाता है। जितनी रेखा हों उतनी ही यात्रायें समझनी चाहिये । लम्बी रेखा हो तो लम्बी यात्रा, छोटी हो तो छोटी । किन्तु यदि दो रेखा बिलकुल समानान्तर रूप से चन्द्रक्षेत्र पर आवे तो लाभयुक्त होने के साथ-साथ यात्रा में भय भी रहता है ।

यदि मणिबन्ध की तीनों रेखा एक के ऊपर एक-एक ही स्थान पर खंडित हों तो असत्य-भाषण तथा वृथा अभिमान के कारण कष्ट पाता है ।

यदि मणिबन्ध से कोई रेखा निकलकर जीवन-रेखा पर आकर समाप्त हो जावे तो यह प्रकट करता है कि किसी यात्रा में ही जातक की मृत्यु होगी। यदि मणिबन्ध से अस्पष्ट, लहरदार रेखा निकलकर स्वास्थ्य-रेखा को काटे तो जातक आजीवन मन्दभागी रहता है ।

मणिबन्ध पर चिह्न

(१) यदि मणिबन्ध की रेखा सुन्दर हों और प्रथम रेखा के मध्य में ‘क्रॉस' का चिह्न हो तो जीवन के प्रथम भाग में कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा किन्तु बाद का जीवन सुख और शान्ति से व्यतीत होगा।

(२) यदि मणिबन्ध से प्रारम्भ होकर कोई रेखा बृहस्पति के क्षेत्र पर जावे और मणिबन्ध की प्रथम रेखा पर ‘क्रॉस' या कोण का चिह्न हो तो किसी विशेष सफल यात्रा से धन-लाभ प्रकट करता है ।

(३) यदि मणिबन्ध की प्रथम रेखा के मध्य में कोण-चिह्न हो तो वृद्धावस्था में किसी की विरासत पाने से भाग्योदय होता है। यह त्रिकोण चिह्न हो और त्रिकोण के अन्दर ‘क्रॉस' हो तो उत्तराधिकार द्वारा धन-प्राप्ति होती है।

(४) यदि हाथ में अन्य लक्षण उत्तम हों और प्रथम मणिबन्ध रेखा के मध्य में 'तारे' का चिह्न हो तो विरासत से धन-प्राप्ति । यदि यही चिह्न ऐसे हाथ में हो जिसमें असंयम और दुराचार प्रकट होता हो तो यह व्यभिचारी प्रवृत्ति का द्योतक है ।

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सर्वप्रथम ये बताना आवश्यक है की ये लेख हस्तरेखा पर लिखी पुस्तक "वृहद् हस्तरेखा शास्त्र " से लिया गया है।

हाथ देखने की विधि 

सर्वप्रथम हस्तरेखा के मूल सिद्धान्तों को हृदयस्थ कर लेना चाहिये । यह पुस्तक के कई बार पठन और मनन से होगा । जो लोग इस पुस्तक को कहीं से भी खोलकर किसी एक रेखा का फलादेश मिलाने की चेष्टा करेंगे उनका फलादेश बहुत से स्थानों में ग़लत हो जायगा। इसका कारण यह है कि ज्योतिषशास्त्र की भाँति हस्त-रेखा-विज्ञान में भी गुण-दोष की तुलना करना, किस गुण की ओर सब लक्षण झुकते हैं या दोषों की अधिकता है तो, किस दोष का मार्जन (दूर होना) होता है किसका नहीं, यह परमावश्यक है।

ज्योतिषशास्त्र में किसी एक भाव (जैसे धनविचार या मातृ-सुख विचार) का विचार करने के लिये जैसे यह देखा जाता है कि इस भाव का स्वामी किस राशि में है, किस नवांश में है, दशवर्गों में शुभ वर्गों में है या पाप वर्गों में-मित्रवर्गों में या शत्रु वर्गों में, भाव का स्वामी किन ग्रहों से दृष्ट या युत है, वह देखने वाले ग्रह बलवान हैं—शुभ वर्गों में या अशुभ वर्गों में ; किन ग्रहों से स्थान-विनिमय है, अपने अष्टक वर्ग में इस भाव के स्वामी की कितनी शुभ रेखा हैं, सर्वाष्टक वर्ग में इस भाव में कुल कितनी रेखा हैं ; भावेश को काल, दिक्, चेष्टाबल कितना प्राप्त है तथा भाव से नवम-पंचम, द्वितीय-द्वादश या चतुर्थ-अष्टम में कितने और कैसे ग्रह हैं ; भाव का स्थिर-कारक बलवान् है या निर्वल, उसी प्रकार किसी एक रेखा का विचार करते समय निम्नलिखित बातों की ओर सदैव ध्यान रखना चाहिये कि-

यदि आप भारत के प्रसिद्ध हस्तरेखा शास्त्री नितिन कुमार पामिस्ट के लिखे लेख पढ़ना चाहते है तो उनके पामिस्ट्री ब्लॉग को गूगल पर सर्च करें "ब्लॉग इंडियन पाम रीडिंग" और उनके ब्लॉग पर जा कर उनके लिखे लेख पढ़ें ।

(१) दाहिने हाथ में रेखा कैसी है, बायें हाथ में कैसी ।

(२) हाथ का आकार कैसा है, उंगलियाँ मोटी हैं या पतली, उंगलियों में गाँटें निकली हैं या नहीं, उंगलियों के अग्रभाग कैसे हैं, चौकोर, नुकीले या आगे की ओर फैले हुए तथा नाखून कैसे हैं ।

(३) हाथ चुस्त है या ढीला, माँसल है या सूखा, हथेली का रंग कैसा है, लेवी है या चौड़ी, हथेली का माँस सख्त है या मुलायम ।

(४) हाथों के ग्रह-क्षेत्र उन्नत हैं या अवनत, ग्रह-क्षेत्र अपनेअपने उचित स्थान पर हैं या कुछ सरके हुए हैं ।

(५) हाथ में या उंगलियों पर कोई विशेष चिह्न हैं क्या ? यदि हैं तो किस स्थान पर तथा कितने चिह्न हैं।

(६) हाथ में जिस रेखा का विचार कर रहे हैं उस रेखा से मिलते-जुलते हुए हाथ में अन्य लक्षण हैं या उनसे विरुद्ध ।

(७) शरीर तथा मुखाकृति से क्या परिणाम निकलता है। । ये सब बातें ध्यान में तभी रह सकती हैं जव वारम्बार इस पुस्तक का अध्ययन किया जावे और अ नेक हाथ देखे जावें । जिस प्रकार केवल पाकशास्त्र की पुस्तक पढ़ लेने से कोई भोजन बनाने में चतुर नहीं हो जाता उसी प्रकार केवल हस्त-रेखा की एक या दो पुस्तकें पढ़ लेने से मनुष्य फलादेश करने में पूर्ण समर्थ नहीं होता।

इस बात की आवश्यकता है कि अनेक प्रकार के लोगों के हाथ देखे जावे-धनिकों के तथा गरीबों के; अकस्मात् धनी होने वालों के और निरंतर जीवन-भर परिश्रम कर धनिक होने वालों के विद्वानों के तथा मूख के, जो अनेक वर्ष स्कूल में आँवाकर, पैसा खर्च कर मास्टरों के रखने पर भी पढ़ नहीं सके कुलीन पतिव्रता स्त्रियों के तथा अनुचित आचार-विचार वाली स्त्रियों के; स्वस्थ पुरुषों के तथा जीर्ण रोगियों के जिससे एक ही प्रकार के गुण-दोष, सैकड़ों हाथों में देखते-देखते वे गुण-दोष हृदय में खचित हो जावें ।

कहावत है कि ‘शतमारी' वैद्य होता है अर्थात् सैकड़ों-हजारों व्यक्तियों का इलाज करते-करते जब अपनी ग़लती से (गलत निदान और ग़लत औषधि देकर) एक सौ रोगियों को मार चुकता है तब कहीं वैद्य की बुद्धि, ज्ञान और अनुभव परिपक्व होते हैं। उसी प्रकार हजार-दो हज़ार, तीन हजार हाथ देख लेने के बाद अच्छा अनुभव प्राप्त होता है। यदि किसी हाथ में कोई लक्षण देखने में आवे तो नवीन हस्त-परीक्षकों को चाहिये दि उनके अनुमान से जो फलादेश आता है वह जातक के जीवन में घटित हुआ या नहीं यह पूछे । यदि, फल, जिस अवस्था में होना चाहिये, जातक की वह अवस्था बीत चुकी है तो अनुसंधान करना चाहिये कि किस अन्य लक्षण के कारण वह फल घटित नहीं हुआ।

इसके अतिरिक्त देश, काल, पात्र का जिस प्रकार ज्योतिषशास्त्र में पूर्ण विचार किया जाता है उस प्रकार हस्तरेखा-विचार में भी रखना चाहिये । जिन देशों में परस्पर स्त्री-पुरुषों के अन्यथा सम्बन्ध-विशेष होते हैं वहाँ हृदय-रेखा, विवाह-रेखा या शुक्र-क्षेत्र (तथा वहाँ से प्रारम्भ होने वाली प्रभाव रेखाग्रों) का फलादेश भिन्न होता है। इसी प्रकार जहाँ विधवा-विवाह प्रचलित है वहाँ स्त्रियों के भी २-३ विवाह तक बताये जा सकते हैं परन्तु भारतवर्ष में जहाँ सामाजिक वातावरण भिन्न है यदि पाश्चात्य हस्त-परीक्षा सिद्धान्तों को अक्षरशः घटाने का प्रचार किया जाएगा तो परिणाम ठीक नहीं बैठेगा । इस कारण पाश्चात्य हस्त-परीक्षा के केवल मूल सिद्धान्तों को अपनाना चाहिये। जैसे समाज के लोगों की हस्तपरीक्षा करनी है तो उसके अनुसार अपनी बुद्धि से तारतम्य कर फलादेश करना उचित है।

जब हाथ देखते-देखते पर्याप्त अभ्यास हो जाय तब शुद्ध तथा शांत चित्त से ऐसे स्थान में हाथ देखना चाहिये जहाँ अनेक लोगों की भीड़ न हो, कोलाहल न हो। क्या ज्योतिष-शास्त्र, क्या मन्त्रशास्त्र सभी गम्भीर शास्त्रों का अनुशीलन तथा उपयोग करते समय बुद्धि का एकाग्र होना परमावश्यक है। बुद्धि की एकाग्रता होने से अनेक रेखाओं तथा हाथ के अन्य लक्षणों का स्मरण बराबर बना रहता है। इस कारण एक लक्षण का दूसरे लक्षण से बुद्धि तत्काल समन्वय और सामंजस्य कर लेती है। किन्तु जहाँ हाथ देखा जा रहा हो वहाँ अनेक मनुष्य बैठे हों तो हस्त-परीक्षक का ध्यान बट जाता है। इस कारण चित्त में वह एकाग्रता नहीं आने पाती जो परमावश्यक है। जब एकाग्र चित्त का बुद्धि से संयोग होता है तो हृदय में भीतर से स्फूति होती है। उस स्फूति के अनुसार फलादेश किया जाता है। यदि चित्त की एकाग्रता नहीं होती तो स्फूति भी नहीं होती।

शास्त्र का नियम है कि जहाँ हँसी-दिल्लगी या चुहलबाज़ी हो रही हो, जहाँ हस्तपरीक्षा में विश्वास न करने वाले कुतर्की हों, किसी स्थान पर खड़े-खड़े, रास्ते में, घोर रात्रि में, जहाँ पूर्ण प्रकाश न हो वहाँ हस्तपरीक्षा नहीं करनी चाहिये। जो जातक हस्त-परीक्षक से विवाद या बहस करे, बिना आवश्यकता के बीच-बीच में बात कर विघ्न डालता जावे, अभिमानी हो, हस्त-परीक्षक की अवहेलना करे, उसका हाथ न देखे ।

हस्तपरीक्षा कराने वाले को उचित है कि शांत चित्त हो, फलफूल या द्रव्य भेंट कर हस्त-परीक्षक को नमस्कार कर विनीत भाव से शुभाशुभ पूछे ।

शास्त्रों में यह जो लिखा है कि सभा में, विद्वानों के बीच या भूख की मंडली में हाथ न देखे तो इसका कारण यह है कि मुख के बीच में उपहास का भय होता है। अनेक विद्वानों के बीच में हाथ देखने की विधि बैठने से उनके मस्तिष्क का प्रभाव हस्त-परीक्षक पर पड़ता है । इस कारण हस्त-परीक्षक के विचार स्वाभाविक रीति से एकाग्र नहीं हो पाते । विचारों की एकाग्रता के बगैर बुद्धि से शुद्ध संयोग नहीं होता। जिस समय हस्तपरीक्षा की जावे हस्त-परीक्षक के चित्त में क्रोध, भ्रान्ति, उद्वेग, भय, लज्जा, घृणा, अवहेलना या त्वरा नहीं होनी चाहिये ।

यदि हाथ देखते-देखते कौटुम्बिक परिस्थितिवश ऐसा हो जावे (बाहर से कोई मेहमान आ जायें, जिनके आतिथ्य की ओर ध्यान आकृष्ट हो गया या किसी की सहसा बीमारी के कारण चिता का उद्वेग हो जावे) तो हस्तपरीक्षा स्थगित कर किसी दूसरे दिन हस्त-रेखाओं का, शुद्ध तथा अचल चित्त से, विचार करना चाहिए।
हस्त-परीक्षक को उसके तथा अपने स्वरूपानुरूप भेंट देना आवश्यक है, 'रिक्तपाणि' (खाली हाथ) पंडित या ज्योतिषी के पास जाकर फल पूछना शास्त्रीय मर्यादा के विरुद्ध है। इस शास्त्रीय परिपाटी का उल्लंघन करने से फल ठीक नहीं मिलता। इसी कारण लिखा है - ‘हस्तं श्रीफल पुष्पाद्यैः प्रपूर्य विनयान्वितः ।

दाहिना हाथ या बायाँ हाथ -

भारतीय मत यह है कि पुरुषों का दाहिना हाथ तथा स्त्रियों का बायाँ हाथ प्रधान होता है । पाश्चात्य मत इस सम्बन्ध में भिन्न-भिन्न हैं। कुछ पाश्चात्य हस्त-परीक्षक स्त्री-पुरुष दोनों के बायें हाथ को ही प्रधानता देते हैं, कुछ दाहिने को । ईसा से ३५० वर्ष पूर्व सिकन्दर महान् के गुरु सुप्रसिद्ध दार्शनिक एरिस्टोटिल हुए। उन्होंने लिखा है कि हृदय के विशेष समीप होने के कारण 'बायें हाथ का अधिक महत्व है। किन्तु अधिक सम्मत मत यह है कि दाहिने हाथ को प्रधान मानना चाहिये । बायें हाथ में जन्मजात गुण-अवगुण अविकल रूप से रहते हैं । दाहिने हाथ में जन्म के गुण-अवगुणों में जातक ने अपने आचार-विचार-व्यवहार से क्या परिवर्तन उपस्थित किया, यह विशेष स्पष्ट होता है। इस कारण हमारा विचार यह है कि दोनों हाथों की रेखाओं को ध्यानपूर्वक देखकर पुरुषों के दाहिने हाथ तथा स्त्रियों के बायें हाथ को विशेष महत्व देना चाहिये। । दोनों हाथों में एक से लक्षण हों तो उस फल की पुष्टि होती है । इस विषय में यह उल्लेख करना भी आवश्यक है कि बहुत से ऐसे मनुष्यों के हाथ देखने का हमें अवसर प्राप्त हुआ जिनको दाहिने की अपेक्षा बायाँ हाथ विशेष क्रियाशील है-—अर्थात् यदि उनसे कहा जावे कि आप एक गेंद को पूरी ताकत से दाहिने हाथ से फेंकिये और फिर उनसे ही बाय हाथ से गंद फिकवाई जाय तो बायें हाथ से फेकी हुई गेंद अधिक दूर जावेगी । ऐसे व्यक्तियों के बायें हाथ की रेखाओं को विशेष महत्व देने से फलादेश अधिक ठीक बैठा।

समय-हस्तपरीक्षा के लिये प्रातःकाल का समय सबसे उपयुक्त है । हस्त-परीक्षक तथा जातक दोनों का चित्त शांत और स्थिर होता है। शरीर को रात्रि-भर के विश्राम मिल जाने के कारण हाथ का रंग भी विशेष स्वाभाविक रहता है। यदि सवेरे सुविधा न हो तो दोपहर या तीसरे पहर अच्छे प्रकाश में हाथ देखना चाहिए। हाथ को ‘आई ग्लास' से देखने से सूक्ष्म रेखा भी बडी दिखाई देती हैं इसलिये रेखाग्रों का अच्छी प्रकार अनुसंधान हो सकता है। जहाँ रेखा सूक्ष्म हों हथेली के उस भाग को अच्छी तरह दबाने से उन रेखाओं का स्वरूप अच्छी तरह दिखाई देगा।

वास्तव में हाथ को देखने से जो उसके रंग, रूप, लचक, माँसलता, चमक आदि का अनुमान हो सकता है वह उसके चित्र से नहीं । तथापि जहाँ 'हाथ' देखना संभव नहीं वहाँ हाथ के रंग, रूप आदि का विवरण अलग से मँगाकर, हाथ के चित्र से रेखाओं का विचार किया जा सकता हैं ।

हाथ देखने की विधि हाथ का चित्र लेने का प्रकार

हाथ का चित्र लेने का सबसे सुन्दर और सरल प्रकार यह है कि एक मोटे काँच पर छापे की स्याही डालकर उसे रबर के ‘रोलर' से (जैसा छापाखानों में स्याही लगाने के काम में लिया जाता है) घोटना चाहिये । जब सारे ‘रोलर' पर समान रूप से पतली स्याही लग जावे तो जातक के सारे हाथ पर रोलर से ही हल्की-सी स्याही लगा देनी चाहिए। जब स्याही हाथ पर लग जाय तो किसी सफ़ेद कागज पर हाथ की छाप ले ली जाय। हाथ को मध्य भाग कुछ गड्ढेयुक्त होता है इसलिये जिस कागज़ पर हाथ की छाप ली जावे उसके नीचे मध्य भाग में थोड़ी सी रुई की पतली-सी गद्दी रख दी जावे तो हाथ के मध्य भाग की छाप भी अच्छी प्रकार आ जावेगी ।

हाथ की छाप लेते समय अर्थात् जब कागज़ पर हाथ रखा हो एक काली पेंसिल से उंगली, अँगूठे तथा हथेली के आकार स्पष्ट करने के लिये उनके चारों ओर बिलकुल भिड़ाकर रेखा खींचनी चाहिये । इस प्रकार हाथ तथा उंगलियों का आकार पेंसिल से खींची हुई रेखा से स्पष्ट हो जावेगा और करतल की रेखाओं की छाप ज्यों-की-त्यों कागज़ पर आ जावेगी ।

प्रारम्भ में अभ्यास न होने से हाथ की छाप स्पष्ट न अावेगी । किन्तु अभ्यास कर लेने से यह कार्य अत्यन्त सुगम हो जाता है ।

हाथ की छाप एक प्रकार से हाथ का स्थायी ‘रिकार्ड' या नक्शा हो गया। किन्तु इसे सर्वांग सम्पूर्ण वनाने के लिये हाथ की बनावट, हथेली का रंग, आकार, नखों, अँगुष्ठों तथा उंगलियों की बनावट, लम्बाई, मोटाई, पारस्परिक अन्तर, रेखात्रों तथा चिह्नों का विवरण लिख लेने से कोई बात भूलने की गुंजाइश नहीं रहती।

इस पुस्तक में हस्त-रेखा-विज्ञान पर जितने प्रकरण दिये गये हैं। उतने ही शीर्षक बनाकर-विवरण लिखना विशेष सुविधाजनक होता है। फिर सब लक्षणों का संतुलन और समन्वय कर देश, काल, पात्र, परिस्थिति का विचार कर फलादेश करना उचित है ।

जीवन में होने वाली घटनाओ का समय हाथ की रेखाओ से पता लगाना - हस्त रेखा शास्त्र

काल-निर्धारण 

हस्तरेखा विज्ञान से काल-निर्धारण की सम्पूर्ण जानकारी इस लेख में दी गयी है।

जीवन में होने वाली घटनाओ का समय हाथ की रेखाओ से पता लगाना - हस्त रेखा शास्त्र

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सर्वप्रथम ये बताना आवश्यक है की ये लेख हस्तरेखा पर लिखी पुस्तक "प्रैक्टिकल पामिस्ट्री" से लिया गया है।

पीछे के अध्यायों में मैंने हस्त रेखा से संबंधित तथ्य स्पष्ट किए हैं, साथ ही साथ सहायक रेखाओं तथा हस्त चिन्हों के बारे में भी जानकारी प्रस्तुत की है। परन्तु इसके साथ ही यह प्रश्न भी व्यक्ति के दिमाग में स्वाभाविक रूप से पैदा होता है कि जीवन में अमूक घटनाएं घटित होंगी, यह तो हस्तरेखा ज्ञान से स्पष्ट हो जाना है; परन्तु ये घटनाएं किस अवधि में घटित होंगी इसको समझना और जानना भी बहुत जरूरी है।

ब्यक्ति के जीवन में ये प्रश्न निरन्तर चक्कर लगाते रहते हैं कि भाग्योदय कब होगा, किस प्रकार के कार्य से भाग्योदय होगा, भाग्योदय इसी देश में होगी यो विदेश में होगा, विदेश यात्रा कब है नौकरी कब मिलेगी, व्यापारमें स्थिरता कच या सकेगी, व्यापार में कितना लाभ होगा और कब होगा, किस वस्तु या किस कार्य से व्यापार में लाभ सम्भव है, आय वृद्धि कब होगी, नौकरी में प्रमोशन कब होगा, सन्तान सुस कसा मिलेगा, विवाह कब होगा - आदि ऐसी सैकड़ों बातें हैं जो मानव मस्तिष्क में निरन्तर घुमड़ती रहती हैं इन सभी के लिये यह बहुत जरूरी है कि हम काल निर्धारण प्रक्रिया को समझे और उसके माध्यम से भविष्य कथन को स्पष्ट कर सकें।

पीछे के पृष्ठों में मैंने हृदय रेखा, भाग्य रेखा, स्वास्थ्य रेखा, मस्तिष्क रेखा तथा जीवन रेखा आदि के बारे में जानकारी दी है। इनमें जीवन रेखा का सर्वप्रथम अध्ययन जरूरी है। यदि आप भारत के प्रसिद्ध हस्तरेखा शास्त्री नितिन कुमार पामिस्ट के लिखे लेख पढ़ना चाहते है तो उनके पामिस्ट्री ब्लॉग को गूगल पर सर्च करें "ब्लॉग इंडियन पाम रीडिंग" और उनके ब्लॉग पर जा कर उनके लिखे लेख पढ़ें ।

जैसा कि मैं पीछे बता चुका हूं कि अंगूठे और तर्जनी के बीच में से जीवन रेखा प्रारंभ होकर शुक्र पर्वत को घेरती हुई मणिबन्ध तक पहुंचती है। यह जीवन रेखा कहलाती है ।

पहले अभ्यास के लिये किसी घागे के माध्यम से जहां से यह जीवन रेखा प्रारंभ होती हैं वहां से लगाकर जीवन रेखा के अन्तिम स्थल अर्थात् मणिबन्ध की पहली रेखा तक नापिये और इस पूरे धागे को १०० वर्ष का समझकर इसके बराबर १० हिस्से कर लीजिये ।

इस प्रकार एक हिस्सा १८ वर्षों का प्रतिनिधित्व करेगा। इन' १० वर्षों में भी जो दूरी है उसको यदि १० भागों में बाटें तो प्रत्येक भाग एक वर्ष को प्रतिनिधित्व करेगा । यपि ये चिन्ह नजदीक हो सकते हैं, परन्तु यह प्रत्येक चिन्ह एक वर्ष को सूचित कर गा । अभ्यास के बाद चिन्ह लगाने की आवश्यकता ही नहीं रहेगी और हाथ देखकर ही यह अनुमान हो सकेगा कि यह जीवन रेखा कितने वर्ष की प्रनिधित्व करती है। यदि जीवन रेखा बीच में ही समाप्त हो जाती है। तो आयु के उस भाग में जीवन समाप्त समझना चाहिए। इससे यह भली भाँति शात हो सकेगा कि व्यक्ति की आयु कितने वर्ष की है। इसी प्रकार जीवन रेखा पर जहाँ भी क्रॉस का चिन्ह या जहां भी रेखा कमजोर पड़ी है आयु के उस भाग में बहुत बड़ी चौमारी प्रायेगी या मरण तुल्य कष्ट भोगना पड़ेगा, ऐसा समझना चाहिए।

पूरे हाथ में घटनाओं को सूचित करने वाली जीवन रेखा ही है। अन्य जो भी रेखए हैं, उन पर बिन्दु लगा कर उससे एक सीधी रेखा जीवन रेखा की ओर सीबिये, जिस बिन्दु पर खींची हुई रेखा मिलेगी; आयु के उस भाग में ही वह घटना पदित होगी। उदाहरण के लिये भाग्य रेखा के मध्य में कटा हुआ हिस्सा है तो कटे हुए स्थान से यदि हम रेखा खीचें और वह रेखा जीवन रेखा के ४वें वर्ष के बिन्दु से मिलती हो तो इससे यह सिद्ध हो जाता है कि इस व्यक्ति की ४२३ वर्ष में भाग्य-बाधा मायेगी और भाग्य से संबंधित कोई बहुत बड़ा कष्ट उठाना पड़ेगा।

इसी प्रकार आप अन्य रेखाओं पर पाये जाने वाले चिन्हों का फल ज्ञात कर सकते हैं एवं इन घटनाओं को घटित होने का समय भी स्पष्ट कर सकते हैं।

धीरे-धीरे इस संबंध में अभ्यास करना चाहिए । अभ्यास के बाद तो मात्र हथेली पर एक झलक पड़ने पर ही संबंधित घटना और उसका समय ज्ञात हो सकता है।

वस्तुतः एक सफल भविष्यवक्ता एवं हस्तरेखा विशेषज्ञ तभी माना जाता है जबकि बह घटनाओं का समय सही-सही रूप में स्पष्ट कर सके और इसके लिये मैंने ऊपर बिन्दु स्पष्ट कर दिये हैं।

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