Friday, February 2, 2018

सूर्य-रेखा की शाखाएँ - HASTREKHA VIGAN

सूर्य-रेखा की शाखाएँ
(Hast Rekha Mein Surya Rekha)
(१) यदि सूर्य-क्षेत्र पर पहुँचने पर सूर्य-रेखा से निकलकर एक शाखा शनि-क्षेत्र पर और दूसरी बुघ-क्षेत्र पर जाये तो जातक में योग्यता, बुद्धि की गम्भीरता और चतुरता तीनों गुण हैं और उसे धन और प्रतिष्ठा की प्राप्ति होगी। सूर्य रेखा को भाग्य रेखा (Bhagya Rekha) की सहायक रेखा भी कहा जाता है।

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(२) सूर्य-रेखा से निकलकर जो भी शाखाएँ या हल्की छोटी रेखाएँ ऊपर की ओर (उंगलियों की ओर) जावें तो शुभ लक्षण है, शुभ प्रभाव की वृद्धि होती है।

(३) सूर्य-रेखा से निकलकर हल्की-हल्की या नन्ही छोटी रेखाएँ नीचे की ओर प्रावें तो सूर्य-रेखा को कमजोर करती हैं । ऐसे जातक को विशेष परिश्रम करने पर सफलता मिलती है।

(४) यदि सूर्य-रेखा से कोई शाखा निकलकर बृहस्पति के क्षेत्र पर जावे तो जातक में महत्वाकांक्षा और हुकूमत करने की भावना विशेष होती है और उसे इसमें सफलता भी मिलेगी । यदि इस शाखा-रेखा के अन्त में बृहस्पति-क्षेत्र पर तारे का चिह्न हो तो विशेष शुभ लक्षण है। यदि साथ ही सूर्य-रेखा के अन्त पर भूर्यक्षेत्र पर भी तारे का चिह्न हो तो अवश्य ऐसा जातक महान् राज्य का अधिकारी होगा । किन्तु इन शुभ लक्षणों के साथ-साथ हाथ मुलायम हो, शुक्र का क्षेत्र उच्च हो, उंगलियाँ पतली और नुकीली हों तो केवल गायन विद्या में श्रेष्ठता होगी। यदि चन्द्र-क्षेत्र भी उच्च हो तो संगीत में और भी विशिष्टता प्राप्त होगी।

किन्तु यदि उंगलियाँ प्रागे से फैली हुई हों या चतुष्कोण हों तो जातक बाजा बजाने या अन्य कलाओं में सफल होगा। यदि उंगलियों के तृतीय पर्व लम्बे और पुष्ट हों तो कलाप्रियता न होकर केवल रुपया कमाने पर ध्यान होगा ।

(५) यदि सूर्य-रेखा से कोई रेखा निकलकर शनि-क्षेत्र पर जाये तो जातक में बुद्धि-गाम्भीर्य और मितव्ययता प्रादि गुण होंगे। अगर अँगूठा सख्त हो तो जातक बहुत कंजूस भी होगा। यदि शाखा-रेखा के अन्त में, शनि-क्षेत्र पर तारे का चिह्न हो तो विशेष सफलता प्राप्त होती है किन्तु यदि तारे के चिह्न की बजाय वहाँ कोई छोटी प्राड़ी रेखा, बिन्दु, क्रॉस या अशुभ चिह्न हो तो सफलता की बजाय अशुभता और बदनामी ही प्राप्त होगी। यदि शनि-क्षेत्र पर शाखारेखा के पास एक या दो सहायक-रेखा के रूप में रेखाएँ हों तो सफलता का चिह्न है । किन्तु यदि शाखा-रेखा शनि-क्षेत्र के पहुँचने के पहले ही रुक जावे और शनि-क्षेत्र पर कई खड़ी रेखाएँ हों तो जातक अनेक कार्यों में सफलता प्राप्त करने की चेष्टा करता है इस कारण उसे किसी भी कार्य से विशिष्टता प्राप्त नहीं होती । यदि शाखा-रेखा के अन्त में शनि-क्षेत्र पर शुभ लक्षण हो और सूर्य रेखा के अन्त में सूर्य-क्षेत्र पर तारे का चिह्न हो तो विशेष सफलता का द्योतक है।

(६) यदि सूर्य-रेखा से निकलकर कोई शाखा-रेखा बुध के क्षेत्र पर जावे तो बुध-क्षेत्र-सम्बन्धी प्रभाव या सफलता विशेष होती है । यदि उंगलियों के, खासकर कनिष्ठा उंगली का प्रथम पर्व लम्बा हो तो जातक अच्छा लेखक या वक्ता होगा । यदि कनिष्ठा का द्वितीय पर्व लम्बा हो और बुध-क्षेत्र पर कई खड़ी रेखा हों तो जातक ख्याति-प्राप्त डाक्टर होगा । यदि तृतीय पर्व लम्बा हो तो धन-उपार्जन में विशेष सफलता होगी। यदि दोनों शाखाओं के अन्त में तारे का चिह्न हो तो विशेष शुभ लक्षण और सफलता प्रकट होती है। किन्तु यदि बुध-क्षेत्र पर क्रॉस, बिन्दु या बाधा-रेखा का चिह्न हो तो घाटा लगेगा; यदि छोटी उंगली मुड़ी या टेढ़ी हो तो जातक चालाकी और बेईमानी का भी उपयोग करेगा ।

(७) यदि सूर्य-रेखा से कोई शाखा-रेखा निकलकर मंगल-क्षेत्र पर जाये तो जातक में उत्साह, प्रात्म-शक्ति और साहस विशेष होता है। मंगल-क्षेत्र पर शाखा-रेखा के अन्त में तारे प्रादि का शुभ चिह्न हो तो शुभ-परिणाम । यदि अशुभ चिह्न हो तो अशुभ परिणाम होता है।

(८) यदि चन्द्र-रेखा से कोई रेखा निकलकर सूर्य-रेखा में योग करे तो जातक में कल्पना-शक्ति विशेष होती है। यदि उंगलियाँ चिकनी हों और अग्रभाग नुकीले हों तो काव्य लिखने में विशेष यश मिलेगा । किन्तु यदि सूर्य-रेखा के अन्त में शुभ चिह्न हों तभी शुभ परिणाम समझना चाहिए। अशुभ-चिह्न हों तो अशुभ परिणाम ।

(९) यदि सूर्य-क्षेत्र से कोई रेखा निकलकर शुक्र-क्षेत्र पर जावे तो शुक्र-क्षेत्र-सम्बन्धी (ललित कला, गायन प्रादि) सफलता होती है। यदि सूर्य-रेखा के अन्त में प्रशुभ-चिह्न हों तो उलटे हानि ही होती है ।

(१०) यदि सूर्य-रेखा से कोई शाखा में विलीन हो जाये और शीर्ष-रेखा सुन्दर, सुस्पष्ट और बलवान हो तो जातक को अपनी दिमागी ताकत की वजह से सफलता और यश प्राप्त होंगे । (नितिन पामिस्ट)

(११) यदि सूर्य-रेखा से कोई शाखा निकलकर हृदय-रेखा में विलीन हो जाये तो जातक को शराफत और भलाई के कारण अनेक मित्रों और सम्बन्धियों की सहायता से सफलता मिलेगी ।

पढ़ें - सूर्य रेखा का महत्व और धन, यश की प्राप्ति

कन्या विवाह में बाधा निवारक गौरी मंत्र (Mantra For Unmarried Girls)


1. कन्या विवाह में बाधा निवारक गौरी मंत्र

Jaldi Shadi Hone Ke Upay


Aajkal ladkiyo ki umar bad rahi hai aur shadi nahi ho rahi hai karan manpasand ladka nahi milna lekin jaise jaise ladki ki umar badti jaati hai maa-baap ki chinta badti jaati hai.

Beti ko accha ghar aur manpasand pati mil jaay ye har mata-pita ka spana hota hai.

Bahut baar kundli mein kuch aise yog ban jatey hai ki ladki ka vivah samay par nahi ho pata hai.

Agar aapki ladki ki bhi shaadi ki umar ho chuki hai ya phir aapki beti shaadi ki umar paar kar chuki hai aur phir usko ladka nahi mil raha hai to aap ye upay karein aapko jaldi hi result milega aur aapki beti ki shadi kahi na kahi pakki ho jaaygi.

Ek baat dhyan rakhein shadi late ho lekin shadi acche ghar mein ho aur aapki beti sukhi rahein wo sabse important hai isliye kosheesh ye karein ki beti ko accha ghar miley bajaay iske ki shaadi jaldi karne ke chakkar mein kisi bhi insaan ke palley apni beti ko bandh aur aapki beti wapis ghar aa kar bait jaay isliye accha ye hi hai ki aap apni beti ke liye acha rista dekhein bhaley hi late ho shadi.

1. कन्या विवाह में बाधा निवारक गौरी मंत्र

कात्यायनी महामये
महा योगिन्यधिश्वरी !
नन्द गोप सुतं देवी
पतिं मे कुरुते नम: !!

कन्या को चाहिये की वह नहा धोकर प्रतिदिन इस मंतर का 108 बार जाप करे !

2. मांगलिक योग का उपाय (Remedies for Manglik Yoga)

अगर किसी का विवाह कुण्डली के मांगलिक योग के कारण नहीं हो पा रहा है, तो ऎसे व्यक्ति को मंगल वार के दिन चण्डिका स्तोत्र का पाठ मंगलवार के दिन तथा शनिवार के दिन सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए. इससे भी विवाह के मार्ग की बाधाओं में कमी होती है.


3. गाय को रोटी देना

जिन व्यक्तियों को शीघ्र विवाह की कामना हों उन्हें गुरुवार को गाय को दो आटे के पेडे पर थोडी हल्दी लगाकर खिलाना चाहिए. तथा इसके साथ ही थोडा सा गुड व चने की पीली दाल का भोग गाय को लगाना शुभ होता है.







लाजवर्त : 


लाजवर्त को धारण करने के बाद व्यक्ति पर राहु, शनि और केतु का दुष्प्रभाव खत्म हो जाता है । शनि , राहु और केतु के प्रकोप से बचाता है और दुर्भागय को दूर कर के व्यक्ति को सफलता दिलाता है । व्यक्ति पर बुरी नजर, काला जादू , टोने - टोटके का प्रभाव नहीं होता है । लाजवर्त कोई भी व्यक्ति धारण कर सकता है और सिद्ध कर के भेजा जाता है । भारत के सभी राज्यों के शहरो और गाँवों में कोरियर या स्पीड पोस्ट से भेजने की सुविधा है और भारत के बाहर विदेश में भी भेजने की सुविधा है ।

Laajwart Benefits : 

Lajwart nullify the malefic effects of Planet Saturn, Rahu & Ketu and protects from black magic, and evil eye. Removes Depression and laziness. Gives good success in career and in business. You will get energized Lajwart by courier at your home. You need to wear Lajwart in your right hand's middle finger in silver ring on Saturday. Male and female both can wear it. No side effect of Lajwart.  


लाजवर्त पत्थर के लाभ :

लाजवर्त तीनो क्रूर ग्रहो (शनि, राहु और केतु ) के दोषो और दुष्प्रभावो को खत्म करता है । 

यदि आपको शनि की साढ़ेसाती चल रही है तो आप लाजवर्त धारण कर सकते है और लाभ प्राप्त कर सकते है ।   

यदि किसी व्यक्ति द्वारा घर पर या आप पर कुछ किया-कराया हुआ अनुभव होता हो या फिर घर में वास्तुदोष हो तो लाजवर्त को धारण करने से लाभ मिलता है । 

काला जादू ख़त्म करता है और बुरी नज़र से बचाव करता है |

यदि आपको केतु और राहु की महादशा या अन्तर्दशा चल रही है तो आप लाजवर्द धारण कर सकते है और लाभ प्राप्त कर सकते है । 

नौकरी और व्यवसाय में आ रही अड़चनो को दूर करता है । 

पितृ दोष को खत्म करता है ।  

लाजवर्त विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभदायक है । लाजवर्त विद्यार्थी का आत्म विश्वास बढ़ा देता है और विद्यार्थी की शिक्षा में एकाग्रता भी बढ़ जाती है । 

लाजवर्त को धारण करने के बाद धीरे धीरे आपके व्यवसाय में तरक्की होती है | यदि व्यवसाय काला जादू या टोना - टोटका की वजह से मंदा चल रहा है तो आपको लाजवर्त धारण करने से लाभ अवश्य मिलेगा ।   

अगर घर में बरकत नही होती है तो बरकत होने लगती है | 

अगर आपके शत्रु ज़्यादा है या आपका शत्रु आपको परेशान करता है या आप पर जादू टोना करवाता है तो आपका उसके किए हुए जादू टोना से बचाव करता है और आपके शत्रु को परास्त करता है | आपका शत्रु आपके सामने शक्तिहीन हो जाता है | 

लाजवर्त को धारण कर ने से डिप्रेशन/तनाव दूर होता है । और सेहत अच्छी होती है ।  

लाजवर्त  राहु, केतु और शनि द्वारा आ रही बाधाओ को दूर करता है और व्यक्ति को सफलता मिलने लगती है |

लाजवर्त को धारण करने के बाद व्यक्ति का दुर्घटना और एक्सीडेंट से बचाव रहता है । 

यदि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है तो आपको लाजवर्त धारण कर ने से लाभ अवश्य मिलेगा ।   

आपको लाजवर्त शनिवार को चाँदी की अंगूठी में बनवा के सीधे हाथ की मध्यमा उंगली (middle finger) में धारण करना है | 

आपको लाजवर्त कौरीयर सर्विस या स्पीड पोस्ट से भेजा जायगा और ट्रॅकिंग नंबर दिया जायगा |

सवाल और उनके जवाब :- 


सवाल: लाजवर्त को कैसे धारण करें ? 
जवाब: आपको लाजवर्त शनिवार को चाँदी की अंगूठी में बनवा के सीधे हाथ की मध्यमा उंगली (middle finger) में धारण करना है | 


सवाल: लाजवर्त (Lajwart) कैसे मिलेगा ? 
जवाब: आपको अपने घर का पता देना है और आपके घर के पते पर लाजवर्त (Lajward) कौरीयर सर्विस या स्पीड पोस्ट ( डाक ) से भेजा जायगा और ट्रॅकिंग नंबर और रसीद दी जाएगी | आपको लाजवर्त 5-6 दिन में मिल जाएगा । 


सवाल: पेमेंट कैसे करना है ? या पैसे कैसे भेजने है ? 
जवाब: आपको पैसे नीचे दिए गए SBI बैंक खाते में भेजने या जमा करवाने है |

सवाल:  क्या लाजवर्त (Lazward) को कोई भी राशि या लग्न वाला व्यक्ति धारण कर सकता है ?
जवाब :  हाँ । 

सवाल :  क्या लाजवर्त मिलने के बाद पेमेंट कर सकते है ?
जवाब :  ये सुविधा (COD) उपलब्ध नहीं है इसलिए आपको पहले मेरे अकाउंट में पेमेंट करना होगा और फिर आपको लाजवर्त भेजा जाएगा ।  



Price :

Lajwart Gemstone Rs. 600/- (No extra shipping charges) लाजवर्त की कीमत सिर्फ Rs. 600/- है और भेजने का कोई शुल्क नहीं है ।


SBI Bank: 
(State Bank of India)

Nitin Kumar Singhal
A/c No.: 35109551560
IFSC CODE: SBIN0003258
Branch: Shastri Nagar
City: Jodhpur, Rajasthan.


ORDER NOW

आप मुझको ईमेल भी कर सकते है और व्हाट्सप्प पर भी संपर्क कर सकते है । 

Email ID: nitinkumar_palmist@yahoo.in

 


यदि आप लाजवर्त खरीदना चाहते है तो व्हाट्सप्प पर संपर्क करें । 
WHATSAPP: 8696725894

पार्सल ट्रैकिंग कैसे करें :-

अपने पार्सल का स्टेटस जानने के लिए या क्लिक करें । इस इंडिया पोस्टल विभाग की वेबसाइट पर आपको जो रसीद दी गयी है उस रसीद पर जो नंबर (ट्रैकिंग कोड) लिखा है उसको डालना है और ट्रैकिंग कोड डाल कर एंटर करने पर आपको आपके पार्सल की पूरी जानकारी मिल जाएगी की वह आपको कब तक मिल जाएगा और अभी कहा तक पंहुचा है ।

Tracking Website: http://www.indiapost.gov.in/speednettracking.aspx



उदहारण के तौर पर आप ये ट्रैकिंग नंबर: ER855949383IN डाल कर चेक कर सकते है । ये ट्रैकिंग नंबर डालने पर आपको जानकारी प्राप्त होगी की इस पार्सल को जोधपुर से 01/10/2015 को बुक किया गया था और व्यक्ति को 03/10/2015 को नई दिल्ली में अपने घर पर मिल गया है । 


कालसर्प दोष का उपाय - Kaal Sarp Dosh Ka Upay



Kalsarp Dosh Ke Upay Aur Totke


Kalsarp Dosh yadi aapki kundli mein hai to samajh lijiye aapko jeevan mein kaafi muskilo ka saamna karna padega.


Kalsarp dosh ke karan shaadi mein deri, santan hone mein deri, naukari na milna, naukari permanent na hona, baar baar naukari choot jana, naukari na lagna, lakh kosheesh karne ke baad bhi sarkari naukari nahi lag pati hai.

Kalsarp dosh jis bacche ki kundli mein hai uski padai mein rukawat aati hi hai aur uski padai beech mein hi choot jaati hai ya phir wo ek baar mein koi exam clear nahi kar pata hai.

Kalsarp dosh wala vykti adalat aur court case mein bhi fas jata hai aur court ke chakkar lagata rahta hai.

Ab kalsarp dosh agar kundli mein hai to uska ilaaj yani upay kya hai ?

 Kaalsarp dosh ke bahut upay hai lekin yaha par hum aapko ek bahut hi saral upay de rahein jisko karne se aapki shadi mein aa rahi rukwat, naukri nahi lag rahi to lag jaaygi, ityadi sabhi tarah ki samasya jo ki kalsarp ki wajah se hai wo door ho jaaygi.

कालसर्प दोष का उपाय :


जब जन्मकुंडली  में  राहु और केतु के मध्य सभी ग्रह आ जाते  है तो यह दोष बनता है।

अमावस्या के दिन 3 जटा वाले नारियल 1  किलो कोयले ले जा कर बहते पानी में डाले।

पहले एक-एक कर नारियल डाले फिर एक साथ सभी कोयले डाल दे ! फिर अपने घर वापिस आ जाय। 

ऐसा लगातार तीन अमावस्या को करना है।

Kaal Sarp Dosh Ka Upay

Jab janamkundli mein rahu aur ketu ke beech mein sabhi garah aa jaatein hai to ya dosh banta hai.

Amavasya ke din 3 jata wale nariyal, 1 kilo kacche koyle le jakar bahate paani mein daalein.

Pahle ek-ek kar ke nariyal daaley, phir ek sath sabhi koyle daal de.  Phir apne ghar wapis aa jaay.  Aisa lagataar teen amavasya ko karein.


Najar Dosh Ke Liye Ghode Ki Naal Ka Totka


Najar Dosh Mein Ghode Ki Naal Ka Prayog


Najar Dosh Ke Liye Ghode Ki Naal Ka Totka


Aapke ghar mein najar lagi hui hai to ghode ki naal mukhya darwaze par laga dijiye aapko aaram milega.


Najar dosh mein ghode ki naal ki mahatavpoorna bhoomika hai. 


Aksar aisa dekha jata hai ki makaan, dukaan, sanstaan ke mukhya dwaar pr naal lagi hui hoti hai.  


Horse ki leg ki naal buri najaro ke prabhaav se bachati hai lekin is karya ke liiye kisi bhi ghode ki naal prabhavi nahi hoti hai prbhavi vidhan ka totka is prakaar hai:-


Ghode Ke Naal Ki Pryog Vidhi Is Prakaar Hai:


Kaale Ghode (black horse) ke naal najar va tok mein visesh prbhavshali hoti hai.  


Shanivar ya mangalwar ko kaale ghode ki naal nikalwakar laay phir usko gangajal se dhokar shudh kar le aur naal ka mooh upar ki taraf karke darwaze pr tok de.


Is baat ka vishesh dhyan rakhe ki darwaje ka mukhya dwaar poorav ya paschim disha ki taraf ho to shukarwar ko hi thoke.  Najar dosh se mukhti milegi.


Ghode ki naal shani prakop aur shani dosh aur shani ki dasha mein bhi labhdhayak hoti hai.


Isliey jin logo ko najar dosh hai ya shani ki sade saati chal rahi hai wo log ghode ki naal apne ghar ya office ke main gate par jaoor lagwa kar labh prapt karein.


Agar ghar mein vastu dosh hai to bhi aap ghode ki naal ka pryog kar sakte hai us se bhi vastu dosh khatham hote hai.


Pehly asani se mil jaati thi real ghode ki naal but aaj kal nakli milti hai so aap online mat mangwana kyuki wo nakli hoti hai.


Aap apne kisi parichit se hi lena.  Jaha par ghode paale jaate hai ya kisi ghode ke malik se hi lena taaki aapko benefit ho.


Ye dhyan rakhna hoga ki ghoda kala ho bhura ya safed color ka na ho warna us ghode ki naal fayda nahi karegi.


Aapko black ghode ki naal hi kaam mein leni hai taaki aapke upar se black magic aur shani dosh khatham ho jaay aur aapko safalta milne lag jaay. 



Improve Your Sun Line By Reciting आदित्यहृदयम्‌ ( Aditya Hridaya Stotra ) Palm Reading

Hath Mein Surya Rekha Ka Kamzor Hona


Hath Mein Surya Rekha Ka Kamzor Hona

Aapki surya rekha kamzor hai ya phir tooti-footi hai ya phir doshyukt hai to aapko "aditiya hridyam srotam" ka path karna bahut jaroori hai uske bina aapko safalta nahi milegi.

Kamzor surya rekha ke karan vykti ko naukri nahi milti hai.

Kamzor surya rekha ke karan insaan ko tarakki nahi milti hai.

Kamzor surya rekha ke karan aadmi ka jeevan bina matlab ka rah jata hai usko koi bhi dusara insan importance nahi deta hai.

Jiske hath mein surya rekha nahi hoti hai wo insan sirf nokar ki tarah puri jindgi majdoori hi karta hai aur malik ki chamchagiri mein hi pura jeevan nikal deta hai.

Agar aapke hath mein surya rekha nahi hai ya phir surya rekha khrabh hai us par island bana hua hai to aapko "aditiya hridhyam stortam" ka path daily jaoor karna chahiye.

Is path karne se aapko safalta milne lagegi aur kuch hi samay ke andar aapko apne hath mein ek nai rekha teesari ungli ke neeche banti hui nazar aane lagegi.  Wo surya rekha hi hogi aur aapko safalta milne lagegi.

Agar aapki koi bhi samasya hai jaise marriage, career, naukari, astrology, black magic, tona totka, parivar, dushman, business, ya aur koi bhi samasya hai to neeche di gayi post ko padein yaha par sabhi tarah ki problem ka solution aur upay diya gaya hai.


॥अथ आदित्यहृदयम्‌॥


ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम्‌।
रावणं चाग्रतो दृष्ट्वा युद्धाय समुपस्थितम्‌॥१॥
दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम्‌।
उपागम्याब्रवीद्राममगस्त्यो भगवानृषिः॥२॥

Rama, exhausted and about to face Ravana ready for a fresh battle was lost deep in contemplation.
The all knowing sage agastya who had joined the gods to witness the battle spoke to Rama thus .. 1,2
राम राम महाबाहो शृणु गुह्यं सनातनम्‌।
येन सर्वानरीन्वत्स समरे विजयिष्यसि॥३॥
Oh Rama, mighty-armed Rama, listen to this eternal secret
Which will help you destroy all your enemies in battle. 3
आदित्यहृदयं पुण्यं सर्वशत्रुविनाशनम्‌।
जयावहं जपेन्नित्यं अक्षय्यं परमं शिवम्‌॥४॥
This holy hymn dedicated to the Sun deity will result in destroying all enemies
And bring you victory and never ending supreme bliss. 4
सर्वमङ्गलमाङ्गल्यं सर्वपापप्रणाशनम्‌।
चिंताशोकप्रशमनं आयुर्वर्धनमुत्तमम्‌॥५॥
This hymn is supreme and is a guarantee of complete prosperity and is the destroyer of sin,
Anxiety, anguish and is the bestower of longevity. 5
रश्मिमंतं समुद्यन्तं देवासुरनमस्कृतम्‌।
पूजयस्व विवस्वन्तं भास्करं भुवनेश्वरम्‌॥६॥
Worship the One, possessed of rays when he has completely risen, held in reverence by the devas and asuras and who is the Lord of the universe by whose efflugence all else brighten. 6
सर्वदेवात्मको ह्येष तेजस्वी रश्मिभावनः।
एष देवासुरगणाँल्लोकान्‌ पाति गभस्तिभिः॥७॥
He indeed represent the totality of all celestial beings. He is self-luminous and sustains all with his rays. He nourishes and energizes the inhabitants of all the worlds and the race of Devas and Asuras. 7
एष ब्रह्मा च विष्णुश्च शिवः स्कन्दः प्रजापतिः।
महेन्द्रो धनदः कालो यमः सोमो ह्यपां पतिः॥८॥
He is Brahma, Vishnu, Shiva, Skands, Prajapati.
He is also Mahendra, Kubera, Kala, Yama, Soma and Varuna. 8
पितरो वसवः साध्या ह्यश्विनौ मरुतो मनुः।
वायुर्वह्निः प्रजाप्राण ऋतुकर्ता प्रभाकरः॥९॥
He is the Pitrs, Vasus, Sadhyas, Aswini Devas, Maruts, Manu,
Vayu, Agni, Prana and, being the source of all energy and light, is the maker of all the six seasons. 9
आदित्यः सविता सूर्यः खगः पूषा गभस्तिमान्‌।
सुवर्णसदृशो भानुर्हिरण्यरेता दिवाकरः॥१०॥ or भानुर्विश्वरेता
He is the son of Aditi, creator of the universe, inspirer of action, transverser of the heavens. He is the sustainer, illumination of all directions, the golden hued brilliance and is the maker of the day. 10
हरिदश्वः सहस्रार्चिः सप्तसप्तिर्मरीचिमान्‌।
तिमिरोन्मथनः शंभुस्त्वष्टा मार्ताण्ड अंशुमान्‌॥११॥ or मार्तण्ड
He is the Omnipresent One who pervades all with countless rays. He is the power behind the seven sense organs, the dispeller of darkness, bestower of happiness and prosperity, the remover of misfortunes and is the infuser of life. 11
हिरण्यगर्भः शिशिरस्तपनो भास्करो रविः।
अग्निगर्भोऽदितेः पुत्रः शङ्खः शिशिरनाशनः॥१२॥
He is the primordial being manifesting as the Trinity. He ushers in the Day and is the teacher (of Hiranyagarbha),
The fire-wombed, the son of Aditi, and has a vast and supreme felicity. He is the remover of intellectual dull-headedness. 12
व्योमनाथस्तमोभेदी ऋग्यजुःसामपारगः।
घनवृष्टिरपां मित्रो विन्ध्यवीथी प्लवङ्गमः॥१३॥
He is the Lord of the firmament, dispeller of darkness. Master of all the vedas,
He is a friend of the waters and causes rain. He has crossed the Vindya range and sports in the Brahma Nadi. 13
आतपी मण्डली मृत्युः पिङ्गलः सर्वतापनः।
कविर्विश्वो महातेजाः रक्तः सर्वभवोद्भवः॥१४॥
He, whose form is circular and is colored yellow, is intensely absorbed and inflicts death.
He is the destroyer of all and is the Omniscient one being exceedingly energetic sustains the universe and all action. 14
नक्षत्रग्रहताराणामधिपो विश्वभावनः।
तेजसामपि तेजस्वी द्वादशात्मन्नमोऽस्तु ते॥१५॥
He is the lord of stars, planets and all constellations. He is the origin of everything in the universe
And is the cause of the lustre of even the brilliant ones. Salutations to Thee who is the One being manifest in the twelve forms of the Sun. 15
नमः पूर्वाय गिरये पश्चिमायाद्रये नमः।
ज्योतिर्गणानां पतये दिनाधिपतये नमः॥१६॥
Salutations to the Eastern and western mountain,
Salutations to the Lord of the stellar bodies and the Lord of the Day. 16
जयाय जयभद्राय हर्यश्वाय नमो नमः।
नमो नमः सहस्रांशो आदित्याय नमो नमः॥१७॥
Salutations to the One who ordains victory and the prosperity that follows. Salutations to the one possessed of yellow steeds and to the thousand rayed Lord, and to Aditya. 17
नम उग्राय वीराय सारङ्गाय नमो नमः।
नमः पद्मप्रबोधाय मार्ताण्डाय नमो नमः॥१८॥ or मार्तण्डाय
Salutations to the Terrible one, the hero, the one that travels fast.
Salutations to the one whose emergence makes the lotus blossom and to the
fierce and omnipotent one. 18
ब्रह्मेशानाच्युतेशाय सूर्यायादित्यवर्चसे।
भास्वते सर्वभक्षाय रौद्राय वपुषे नमः॥१९॥
Salutations to the Lord of Brahma, shiva and Achyuta, salutations to the
powerful and to the effulgence in the Sun that is both the illuminator and
devourer of all and is of a form that is fierce like Rudra. 19
तमोघ्नाय हिमघ्नाय शत्रुघ्नायामितात्मने।
कृतघ्नघ्नाय देवाय ज्योतिषां पतये नमः॥२०॥
Salutations to he transcendental atman that dispels darkness, drives away all fear, and destroys all foes. Salutations also to the annihilator of the ungrateful and to the Lord of all the stellar bodies. 20
तप्तचामीकराभाय वह्नये विश्वकर्मणे। or हरये विश्वकर्मणे
नमस्तमोऽभिनिघ्नाय रुचये लोकसाक्षिणे॥२१॥
Salutations to the Lord shining like molten gold, to the transcendental fire, the fire of supreme knowledge, the architect of the universe, destroyer of darkness and salutations again to the efflugence that is the Cosmic witness. 21
नाशयत्येष वै भूतं तदेव सृजति प्रभुः।
पायत्येष तपत्येष वर्षत्येष गभस्तिभिः॥२२॥
Salutations to the Lord who destroys everything and creates them again.
Salutations to Him who by His rays consumes the waters, heats them up and sends them down as rain. 22
एष सुप्तेषु जागर्ति भूतेषु परिनिष्ठितः।
एष एवाग्निहोत्रं च फलं चैवाग्निहोत्रिणाम्‌॥२३॥
Salutations to the Lord who abides in the heart of all beings keeping awake when they are asleep. He is both the sacrificial fire and the fruit enjoyed by the worshippers. 23
वेदाश्च क्रतवश्चैव क्रतूनां फलमेव च।
यानि कृत्यानि लोकेषु सर्व एष रविः प्रभुः॥२४॥
The Sun is verily the Lord of all action in this universe. He is verily the vedas, the sacrifices mentioned in them and the fruits obtained by performing the sacrifices. 24
॥फलश्रुतिः॥
एनमापत्सु कृच्छ्रेषु कान्तारेषु भयेषु च।
कीर्तयन्‌ पुरुषः कश्चिन्नावसीदति राघव॥२५॥
Raghava, one who recites this hymn in times of danger, during an affliction or when lost in the wilderness and having fear, he will not lose heart (and become brave). 25
पूजयस्वैनमेकाग्रो देवदेवं जगत्पतिम्‌।
एतत्‌ त्रिगुणितं जप्त्वा युद्धेषु विजयिष्यसि॥२६॥
Raghava, worship this Lord of all Gods and the Universe with one-pointed devotion. Recite this hymn thrice and you will win this battle. 26
अस्मिन्क्षणे महाबाहो रावणं त्वं वधिष्यसि।
एवमुक्त्वा तदाऽगस्त्यो जगाम च यथागतम्‌॥२७॥
O mighty armed one, you shall slayRavana this very moment.
Having spoken thus, Agastya returned his original place. 27
एतच्छ्रुत्वा महातेजा नष्टशोकोऽभवत्तदा।
धारयामास सुप्रीतो राघवः प्रयतात्मवान्‌॥२८॥
Raghava became free from worry after hearing this.
He was greatly pleased and became brave and energetic. 28
आदित्यं प्रेक्ष्य जप्त्वा तु परं हर्षमवाप्तवान्‌।
त्रिराचम्य शुचिर्भूत्वा धनुरादाय वीर्यवान्‌॥२९॥
Gazing at the sun with devotion, He recited this hymn thrice and experienced bliss.
Purifying Himself by sipping water thrice, He took up His bow with His mighty arms. 29
रावणं प्रेक्ष्य हृष्टात्मा युद्धाय समुपागमत्‌।
सर्व यत्नेन महता वधे तस्य धृतोऽभवत्‌॥३०॥
Seeing Ravana coming to fight,
He put forth all his effort with a determination to destroy Ravana. 30
अथ रविरवदन्निरीक्ष्य रामं मुदितमनाः परमं प्रहृष्यमाणः।
निशिचरपतिसंक्षयं विदित्वा सुरगणमध्यगतो वचस्त्वरेति॥३१॥
Then knowing that the destruction of the lord of prowlers at night (Ravana) was near, Aditya, who was at the center of the assembly of the Gods, looked at Rama and exclaimed 'Hurry up' with great delight. 31

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Benefits Of Aditiya Hridyam Strotam:

The Aditya Hridaya Stotra is a very powerful prayer in praise of Surya or the Sun, it is a prayer which was recited by Rama before his epic battle with Ravana. Recitation of this prayer removes all obstacles in life including diseases and eye troubles, trouble from enemies and all worries and tensions.



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