Wednesday, February 7, 2018

उंगली और हथेली के पर्व हस्त रेखा विज्ञान

हाथ में चार उंगलियां होती हैं तथा प्रत्येक उंगली किसी एक ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है।  · तर्जनी उंगली - गुरु  · मध्यमा - शनि   · अनामिका - सूर्य    · कनिस्ठिका - बुध

उंगली और हथेली के पर्व हस्त रेखा विज्ञान

हाथ में चार उंगलियां होती हैं तथा प्रत्येक उंगली किसी एक ग्रह का प्रतिनिधित्व करती है।

· तर्जनी उंगली - गुरु

· मध्यमा - शनि

· अनामिका - सूर्य

· कनिस्ठिका - बुध

तर्जनी उंगली
यह उंगली व्यक्ति की महत्वाकांक्षा, अहम एवं नेतृत्व की क्षमता को दर्शाती है। इस उंगली से व्यक्ति के भाग्य एवं कार्य क्षेत्र के बारे मे जानकारी मिलती है। तर्जनी उंगली की सामान्य लंबाई मध्यमा के ऊपरी भाग के मध्य तक होती है। यदि यह उंगली सामान्य से अधिक लंबी होती है तो व्यक्ति में नेतृत्व की क्षमता बहुत होती है। इसके विपरीत इसके छोटे होने पर व्यक्ति सामान्यत: दूसरों के मार्गदर्शन में ही कार्य करता है या वह अकेले की कार्य करना पसंद करता है तथा स्वयं का ही कुछ कार्य करता है। इस उंगली का लंबा होने पर व्यक्ति का गुरु प्रबल होता है।

यदि तर्जनी उंगली सामान्य से अधिक लंबी हो, तो व्यक्ति में लापरवाही और तानाशाही बढ़ जाती है। जब यह छोटी हो तो व्यक्ति में ये विशेषताएं लुप्त होती हैं। यदि यह उंगली विकृत है तो व्यक्ति चालाक, स्वार्थी और पाखंडी होता है।

जब तर्जनी उंगली का पहला खंड लंबा हो तो व्यक्ति राजनीति, धर्म, और शिक्षण क्षेत्रों में कुशल होते हैं। यदि उंगली का दूसरा खंड लंबा हो तो व्यक्ति व्यापारी होता है और उंगली का तीसरा खंड लंबा हो तो ऐसे व्यक्ति विभिन्न प्रकार के व्यंजन के शौकीन होते हैं।

गुरु पर्वत तर्जनी उंगली से नीचे होता है। पूर्ण विकसित गुरु पर्वत वाले व्यक्ति लोक नेतृत्व की आकांक्षा, नीति से पूर्ण एवं स्वाभिमानी होते हैं। ऐसे व्यक्ति शासन एवं नेतृत्व में कुशल होते हैं। विकसित गुरु पर्वत व्यक्ति को महत्वाकांक्षी बनाता है। यह लोग धन से अधिक अपने ओहदे को महत्व देते हैं। ऐसे लोग अच्छे सलाहकार होते हैं। यह लोग कानून के दायरे में रह कर कार्य करते हैं। ऐसे लोग अनेक तरह के व्यंजन खाने के शौकीन होते हैं और अपने परिवार से मोह करते हैं।

अधिक विकसित गुरु पर्वत व्यक्ति को अहंकारी, दिखावटी, क्रूर और इर्ष्यालु बनाता है। ऐसे लोग अधिक खर्चीले होते हैं।

यदि गुरु पर्वत अर्द्धविकसित हो तो व्यक्ति में गुरु संबंधित बुनियादी प्रवृत्ति विकसित नहीं होती है।

मध्यमा उंगली
इस उंगली को शनि की उंगली भी कहा जाता है तथा यह व्यक्ति की सचाई, ईमानदारी एवं अनुशासन को दर्शाती है। यदि यह उंगली सामान्य लंबाई की होती है यानि अन्य उंगलियों से लंबी परंतु बहुत अधिक लंबी नहीं तो व्यक्ति जिम्मेदार एवं गंभीर व्यक्तित्व का धनी होता है एवं महत्वाकांक्षी होता है। यदि यह उंगली सामान्य से अधिक लंबी हो तो वह व्यक्ति अकेले में रहना पसंद करता है। तथा वह व्यक्ति किसी गलत कार्य मे भी फंस सकता है। जिस व्यक्ति कि मध्यमा उंगली छोटी होती है वह व्यक्ति लापरवाह एवं आलसी होता है।

यदि शनि की उंगली का प्रथम खंड लंबा हो तो व्यक्ति का झुकाव धार्मिक ग्रंथ और रहस्यवादी कला के अध्ययन की ओर होता है। यदि मध्यमा का द्वितीय खंड लंबा हो तो व्यक्ति का व्यवसाय संपत्ति संबंधी, रसायन, जीवाश्म ईंधन या लोहा मशीनरी से संबंधित होता है, जब तीसरा खंड लंबा हो तो दर्शाता है कि व्यक्ति चालाक, स्वार्थी और दुराचार में युक्त रहता है।

शनि पर्वत मध्यमा उंगली से नीचे होता है। शनि पर्वत दार्शनिक विचारों को दर्शाता है। शनि पर्वत पूर्ण विकसित होने पर व्यक्ति ज्ञानी, गंभीर एवं विचार शील होता है। वह सोच-विचार कर कुछ कार्य आरंभ करता है एवं उसकी इंद्रियां उसके नियंत्रण में रहतीं हैं।

अनामिका
इस उंगली को अपोलो रिंग या सूर्य कि उंगली कहा जाता है। यह उंगली व्यक्ति की प्रसिद्धि की इच्छा, बुद्धिमत्ता एवं रचनात्मक क्षमता को दर्शाती है। यदि यह उंगली तर्जनी उंगली से अधिक लंबी हो तो यह उंगली सामान्य से अधिक लंबी होती है। इस प्रकार के व्यक्तियों मे जोखिम उठाने की अद्भुत क्षमता होती है। ये रचनात्मक क्षमता के धनी होते हैं। इनका संबंध फैशन या फिल्म क्षेत्र से भी हो सकता है। जिनकी अनामिका उंगली तर्जनी से छोटी होती है वे अपनी स्थिति से संतुष्ट होते हैं तथा उनमें अधिक नाम एवं प्रसिद्धि की इच्छा नहीं होती है। तर्जनी उंगली से छोटी अनामिका उंगली बहुत कम हाथों में पाई जाती है।

सूर्य पर्वत अनामिका उंगली के नीचे होता है। सूर्य पर्वत उन्नत हो तो सफलता का प्रतीक होता है। ऐसे व्यक्ति यश एवं प्रतिष्ठा से संतृप्त होते हैं। परिश्रम एवं कुशाग्र बुद्धि से जीवन मे सफलता प्राप्त करते हैं। ऐसे व्यक्ति भौतिक एवं व्यसायिक क्षेत्रों मे सफल होते हैं। वह धार्मिक होता है परंतु धर्मांध नहीं होता है। वह अपनी योग्यता एवं अयोग्यता को भली भांति जानता है। शीघ्र क्रोध करता है एवं शीघ्र ही शांत भी हो जाता है।

कनिष्ठिका
इस उंगली को बुध की उंगली कहा जाता है। इस उंगली के माध्यम से व्यक्ति की वाकपटुता, ज्ञान, बुद्धि एवं चातुर्य का पता चलता है। यदि इस उंगली की ऊंचाई अनामिका उंगली के प्रथम भाग का जहां अंत होता है वहां तक होती है तो इसकी लंबाई सामान्य है इससे छोटी होने पर यह सामान्य से छोटी मानी जाएगी। जिस व्यक्ति की कनिष्टिका सामान्य से छोटी होती है उनमें अभिव्यक्ति की क्षमता की कमी होती है तथा वे हीन भावना का शिकार होते हैं। उन्हें अपनी भावनाओं एवं शब्दों पर नियंत्रण नहीं होता है। उनके व्यवहार मे बचपना होता है तथा जब यह उंगली सामान्य से अधिक लंबी होती है तब व्यक्ति की अभिव्यक्ति की क्षमता अद्भुत होती है। उनका आई क्यू सामान्य से अधिक होता है तथा वे अच्छे लेखक एवं वक्ता साबित होते हैं। कनिष्ठिका उंगली का निचला भाग मोटा होने पर व्यक्ति विलासिता पूर्ण एवं आरामदायक जीवन जीना पसंद करता है।

बुध पर्वत कनिष्ठिका के नीचे होता है। बुध पर्वत पूर्ण उन्नत होने पर व्यक्ति प्रखर बुद्धि, गंभीर विचार, आकर्षक भाषण एवं लेखन शैली का धनी होता है। ऐसे व्यक्ति व्यवसाय एवं विज्ञान क्षेत्रों मे सफल होते हैं। ऐसा व्यक्ति प्रत्येक शक्तिशाली कार्य क्षेत्र मे विजयी होता है। नानाविध कार्य वह कुशलता पूर्वक सम्पन्न करता है।

हाथ का अंगूठा
हाथ का अंगूठा किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देता है। हाथ का अंगूठा व्यक्ति की इच्छा शक्ति एवं जीवन शक्ति दर्शाता है। हाथ के अंगूठे के मुख्यतः दो भाग होते हैं। प्रथम भाग इच्छा शक्ति एवं द्वितीय भाग उस व्यक्ति की तर्क क्षमता दिखाता है। अंगूठे का द्वितीय भाग प्रथम भाग से बड़ा होना चाहिए क्योंकि कोई भी निर्णय तर्क से लिया जाना ही उचित होता है। हाथ का अंगूठा बिलकुल सीधा हो तो वह व्यक्ति कठोर एवं जिद्दी होता है। ऐसे व्यक्तियों पर विश्वास किया जा सकता है परंतु इनका स्वभाव जिद्दी होने से इनके अधिक मित्र नहीं बन सकते हैं। अत्यधिक लचीले अंगूठे वाले व्यक्ति खर्चीले होते हैं एवं इन पर आसानी से विश्वास नहीं किया जा सकता है। स्वभाव में लचीलापन होने से इनके बहुत मित्र होते हैं परंतु ये किसी ज़िम्मेदारी का कार्य अधिक कार्य कुशलता से करने में समर्थ नहीं होते हैं क्योंकि इन का किसी एक निर्णय पर डटा रहना बहुत कठिन होता है।

यदि हाथ का अंगूठा केवल 60 डिग्री का कोण खुलते समय बनाता है तो वह व्यक्ति समझदार एवं कार्यकुशल होता है। यदि 90 डिग्री का कोण बनाता है तो व्यक्ति अपने कार्य में जोखिम उठाने की क्षमता रखता है परंतु सदैव विवेकपूर्ण निर्णय लेता है। यदि हाथ का अंगूठा 90 डिग्री से 120 डिग्री तक खुलता है तो व्यक्ति बिना सोचे-समझे अत्यधिक जोखिम उठा सकता है। जिस व्यक्ति का अंगूठा कटि के आकार को होता है वह तर्क-वितर्क में निपुण होता है परंतु शारीरिक रूप से कुछ कमजोर हो सकता है।

अंगूठे का अग्र भाग यदि कोनिकल हो तो व्यक्ति बुद्धिमान एवं रचनात्मक क्षमता से परिपूर्ण होता है। ऊपर से चौड़ा अंगूठा होने पर व्यक्ति जिद्दी होता है। अंगूठे का अग्र भाग यदि चौकोर हो तो व्यक्ति कानून का ज्ञाता होता है तथा वास्तविकता को ध्यान मे रख कर निर्णय लेता है।

यदि हम अंगूठे को अलग कर दे तो चार उंगलियों के कुल बारह भाग होते हैं। ये बारह भाग बारह राशियों का प्रतिनिधित्व करते हैं। तर्जनी उंगली के ऊपरी भाग से गिनती आरंभ करने पर मेष राशि तर्जनी उंगली के प्रथम भाग , वृष राशि तर्जनी उंगली के मध्य भाग एवं मिथुन राशि तर्जनी उंगली के निम्न भाग पर आएगी। इसी प्रकार कर्क राशि मध्यमा के प्रथम भाग, सिंह राशि मध्य भाग एवं कन्या राशि निम्न भाग पर आएगी। अनामिका के प्रथम भाग पर तुला राशि, मध्य भाग पर वृश्चिक एवं अंतिम भाग पर धनु राशि होगी एवं कनिष्ठिका के प्रथम भाग पर मकर राशि, मध्य भाग पर कुम्भ एवं अंतिम भाग पर मीन राशि होगी।

इसी प्रकार हथेली मे सात पर्वत होते हैं। ये सात पर्वत सात ग्रहों का प्रतिनिधित्व करते हैं। हाथ का बढ़ा हुआ मास पिंड करतल पर पर्वत के स्वरूप को धारण करता है। करतल पर पूर्ण विकसित पर्वत व्यक्ति के उच्च चरित्र निर्माण मे सहायक होते हैं। अधोगत पर्वत व्यक्ति के उच्च गुणों को संकुचित करता है।

मंगल पर्वत
मंगल पर्वत के दो स्थान हैं। पहला स्थान जीवन रेखा के ऊपरी स्थान के नीचे एवं दूसरा इसके विपरीत हृदय रेखा एवं मस्तिष्क रेखा के बीच में स्थित है। पहला स्थान शारीरिक अवस्था तथा दूसरा स्थान मानसिक अवस्था का द्योतक है। साहस, बल एवं शक्ति आदि का आकलन प्रथम पर्वत से होता है। यदि मंगल का प्रथम क्षेत्र सुंदर एवं उन्नत हो तो व्यक्ति सेना में या इसी प्रकार के उच्च पद पर आसीन होता है। वह एक सफल अधिकारी सिद्ध होता है। दूसरे पर्वत से व्यक्ति के धैर्य, शौर्य, संयम, क्षमा आदि गुणों का पाता चलता है। पहला पर्वत शारीरिक क्षमता एवं दूसरा पर्वत मानसिक क्षमताओं को दर्शाता है। विकसित मंगल पर्वत वाले व्यक्तिओं के व्यक्तित्व अत्यंत प्रभावशाली होता है। ये लोग जल्दबाजी में निर्णय लेने और आक्रामक स्वभाव वाले होते हैं। मंगल ग्रह अगर विकसित हो तो लोग अक्सर आर्मी या सशस्त्र बल के साथ जुड़े होते हैं। ऐसे लोग अपने उद्देश्यों के प्रति दृढ़ संकल्प रहते हैं। इनका सबसे बड़ा दोष इनमें आवेग और आत्म नियंत्रण की कमी है। ऐसे व्यक्तियों को आत्म -नियंत्रण का अभ्यास करना चाहिए और सभी प्रकार की मदिरा और उत्तेजक पदार्थों से दूर रहना चाहिए। यदि मंगल पर्वत अधिक विकसित है तो व्यक्ति मे मंगल संबंधित विशेषताएं बढ़ती हैं। ऐसे लोग अत्यंत शक्तिशाली बन जाते हैं और अपनी शक्ति के द्वारा वह कमजोरों का शोषण करते हैं। अक्सर ऐसे लोग समाज विरोधी गतिविधियों जैसे चोरी, डकैती, लूट आदि मे शामिल होकर अत्यंत क्रूर बन जाते हैं। कम विकसित मंगल पर्वत व्यक्ति को कायर बनाता है। लेकिन वह बहादुर होने का दावा करता है। जब अवसर की मांग और समय आता है, तो वह अपने कदम वापस ले लेता है।

चन्द्र पर्वत
चन्द्र पर्वत हाथ में बुध पर्वत के नीचे चन्द्र पर्वत स्थित होता है। चन्द्र पर्वत पूर्णतः उन्नत होने पर व्यक्ति बहुत गुणवान एवं कल्पनाशील होते हैं। कल्पना के द्वारा ही वे अपनी प्रतिभा को नई दिशा देते हैं। ये लोग संगीत, काव्य, वस्तु, ललितकला आदि मे प्रवीण होते हैं। ऐसे लोग विपरीत परिस्थिति को भी अनुकूल बनाने का सामर्थ्य रखते हैं। पूर्ण विकसित चंद्र पर्वत व्यक्ति को कला प्रेमी बनाता है। ऐसे लोग कलाकार, संगीतकार, लेखक बनते हैं। ऐसे व्यक्ति मजबूत कल्पनाशक्ति के गुणी होते हैं। यह लोग अति रुमानी होते हैं लेकिन अपनी इच्छाओं के प्रति आदर्शवादी होते हैं। शुक्र पर्वत की तरह इनमें भावुकता या कामुकता वाला स्वभाव नहीं होता है।

पूर्ण विकसित चंद्र पर्वत व्यक्ति को भावनाओं में बहने वाला और किसी को उदास न देखने वाला होता है। प्रायः यह लोग वास्तविकता से परे कल्पना प्रधान और अच्छे लेखक और कलाकार होते हैं। प्रतिकूल परिस्थितियों में ऐसे लोग उन्मादी और तर्कहीन व्यवहार करते हैं। इसके अतिरिक्त ये निर्णय लेने में अधिक समय लेने वाले और अत्यधिक महत्वाकांक्षी होते हैं।

अति विकसित चंद्र पर्वत व्यक्ति को आलसी और सनकी बनाता है। ऐसे व्यक्ति कल्पना से पूर्ण और वास्तविकता से दूर रहते हैं। कभी कभी, यह एक हल्के रूप में विकसित हो कर एक प्रकार का पागलपन भी हो सकता है।

यदि चंद्र पर्वत अविकसित है, तो व्यक्ति मे अच्छी कल्पना का अभाव, दूरदर्शिता का अभाव, नए और रचनात्मक विचारों का अभाव रहता है, यह लोग क्रूर और स्वार्थी होते हैं।

शुक्र पर्वत
शुक्र पर्वत समान्यतः उच्च गुणों का बोधक है। इससे स्वास्थय, सौन्दर्य,प्रेम,दया,सहानुभूति आदि मनोभावों का ज्ञान होता है। इस पर्वत का अत्यधिक उन्नत होने पर व्यक्ति विलासी, कमी और व्यभिचारी भी हो सकता है।

हथेली पर अंगूठे के आधार पर स्थित पर्वत, शुक्र पर्वत कहलाता है। यह अनुग्रह, आकर्षण, वासना और सौंदर्य की उपस्थिति या अनुपस्थिति को दर्शाता है। यह प्रेम और साहचर्य की इच्छा और सौंदर्य की हर रूप में पूजा करने को भी दर्शाता है। अति विकसित शुक्र पर्वत लोगों को सुन्दर और विपरीत सेक्स के प्रति आकर्षित करता है। मित्रों का साथ इन्हें बहुत पसंद होता है। अच्छा कपड़ों एवं अच्छा खाने के शौकीन होते हैं। स्वभाव से स्पष्टवादी होते हैं। पूर्ण विकसित शुक्र पर्वत चुंबकीय व्यक्तित्व के धनी बनाता है ऐसे व्यक्ति विपरीत सेक्स के बीच लोकप्रिय होते हैं। ये लोग जिज्ञासु प्रवृत्ति के होते हैं लेकिन जब यह किसी से प्यार करते हैं तो उनके प्रति पूर्णतः समर्पित होते हैं।

हाथ पर अति विकसित शुक्र पर्वत व्यक्ति में इंद्रिय सुख की इच्छा प्रबल कर देता है। ऐसे लोग प्रेम संबंधों में स्वार्थी होते हैं और सदैव शारीरिक सुख की इच्छा रखते हैं। इसके विपरीत कम विकसित शुक्र पर्वत व्यक्ति को सुस्त एवं कठोर बनाता है। सौन्दर्य एवं भौतिकता के प्रति इनमे कम आकर्षण होता है।

Hastrekha Gyan Aur Parvat

हस्तरेखा से जाने आपकी कार्यक्षमता और प्रतिभा

कार्यक्षमता एवं प्रतिभा


मस्तिष्क रेखा से उदय तथा शनि पर्वत की ओर वृत्ताकार रूप में जाती हुई भाग्य रेखा-ंपरिश्रम भरा जीवन।


  • मणिबंध का पहला वलय जंजीरदार कठोर परिश्रम और सावधानी का जीवन परन्तु अन्ततः सफलता प्राप्त होती हैं।   
  •  मस्तिष्क रेखा से उदय तथा शनि पर्वत की ओर वृत्ताकार रूप में जाती हुई भाग्य रेखा-ंपरिश्रम भरा जीवन। 
  •  गहरी हथेली तथा मुडी उंगलियों के साथ सूर्य रेखा प्रतिभा का दुरुपयोग। 
  •  फीकी या हल्के से रंग की सूर्य रेखा कलात्मक प्रतिभा परन्तु कार्यान्वित करने की अपर्याप्त शक्ति। 
  •  सूर्य रेखा दोनों हाथों में स्पष्ट, साथ में सूर्य पर्वत पर एक तारे का चिह्न प्रतिभा द्वारा ख्याति। 
  •  अच्छी सूर्य रेखा परन्तु साथ में दो लहरदार अनियमित रेखायें सूर्य पर्वत पर पथ भ्रष्ट। 
  •  दूसरी उंगली पर त्रिकोण तन्त्र विज्ञान द्वारा प्रतिभा।
  •  अन्तः प्रेरणा रेखा का उदय द्वीप के साथ अन्तदृष्टि की प्रतिभा।
  •  बहुत विकसित सूर्य पर्वत, प्रखर प्रतिभा।
  •  दोनों हाथों में अच्छी सूर्य रेखा, साथ में सूर्य पर्वत पर एक गहरी स्पष्ट रेखा लाभप्रद प्रतिभा।  
  •  सूर्य पर्वत पर दो लहरदार विषम रेखायें, साथ में अच्छी सूर्य रेखा पथ भ्रष्ट प्रतिभा।   
  •  मस्तिष्क रेखा के अन्त में बुध पर्वत पर च-सजय़ती हुई रेखा नकल उतारने की प्रतिभा।  
  •  नर्म जोड़ तथा छोटा अंगूठा, साथ में चन्द्र पर्वत पर जाली काव्य प्रतिभा।
  •  अनामिका उंगली चपटाकार अग्रभाग सहित और दृ-सजय़ सूर्य पर्वत भाग्य रेखा से एक शाखा बुध पर्वत की ओर नाटकीय प्रतिभा। 
  •  बहुत दृ-सजय़ और सीधी मस्तिष्क रेखा साथ में निकृष्ट हृदय रेखा ओर पतली उंगली उसकी दूसरी उंगलियों की अपेक्षा लम्बी, अर्थव्यवस्था की प्रतिभा। 
  •  तीसरी उंगली लम्बे पर्व के साथ कला में परिश्रम प्रतिभा तथा सामान्य बुद्धि का मिश्रण। 
  •  चैथी उंगली कनिष्ठा, लम्बे दूसरे पर्व के साथ परिश्रम तथा व्यापारिक क्षमता। 
  •  सूर्य पर्वत पर दो रेखायें-ंसच्ची प्रतिभा, परन्तु साधारण सफलता।
  •  सूर्य पर्वत सूर्य रेखा के साथ ही एक नक्षत्र परिश्रम से भारी ख्याति।
  •  सूर्य पर्वत, शुक्र का चिह्न, बुरे हाथ में, प्रतिभा का दुरुपयोग।

हस्तरेखा ज्योतिष की जानकारी | Hast Rekha Jyotish Ki Jankari

हाथ का रंग रूप और उंगलिया -  हस्तरेखा

हाथ का रंग रूप और उंगलिया -  हस्तरेखा

प्रथम अध्याय में हम बनावट के अनुसार हाथों की आकृति को तीन भागों में विभक्त कर आये हैं जिनका यथा स्थान वर्णन भी किया जा चुका है। अब हम उसी प्रकार उगलियों से सम्बन्धित लक्षणों का वर्णन, जिसके बिना हस्त-परिचय-ज्ञान अधूरा सा रह जाता है सर्व साधारण के लिये पूर्ण रूप से करेंगे।

अभी तक देखने में यही आया है कि समस्त जगतीमय हाथों की बनावट रूप और रंग के अनुसार केवल तीन ही भागों में विभक्त कर सकते हैं। जिसके लिये अतिशय-अनुसन्धान की आवश्यकता नहीं होती । देखने से ही प्रत्यक्ष पता चल जाता है।

(१) पहले नम्बर पर वही हाय आते हैं जिनका रंग गुलाबी होता ।
(२) दूसरे नम्बर पर वह हाथ आते हैं जिनका रंग लाल होता है।
(३) तीसरे नम्बर पर वह हाथ आते हैं जिनका रंग सफेदी लिये लाल होता है ৷

अब हम उपयुक्त तीनों प्रकार के हाथों का वर्णन गुण, कर्म और स्वमाव के लक्षणों के अनुसार इस प्रकार करेंगे कि पाठकों को यह भली भाँति विदित हो जायगा कि मनुष्य के हाथों की प्राकृतिक बनावट के साथसाथ उसके रंग, गुण और लक्षणों का उसके जीवन पर कसा प्रभाव पड़ता है।

यदि प्रेक्षक हाथ देखते समय धर्य और शान्ति से काम ले तो उसको, किसी भी हाथ को देखकर उसके जीवन का सारांश वर्णन करने में कोई भी कठिनाई प्रतीत नहीं होगी। इसलिये प्रत्येक हस्त प्रेक्षक को प्रारम्भ में बड़े ही अभ्यास तथा परिश्रम की आवश्यकता है। नितिन कुमार पामिस्ट

(१) जिन हाथों का रंग गुलाबी होता है उनके दर्श-स्पर्श से ही ज्ञात हो जाता है कि वे अतिशय कोमल, मुलायम तथा हल्के होते हैं। जो कि किसी भी प्रकार के परिश्रमरत या मेंहनती कार्य को करने में सर्वथा असमर्थ ही रहते हैं। ऐसा मनुष्य आराम तलब, सुस्त तथा दीर्घ सूत्री होता है।

जो कि आपत्ति की सम्भावना से ही घबरा जाता है। किसी भी भावी विपति का संकल्प ही उसके हाथ पैर फुला देता है। दम फूलना, हाथ पैरों में कम्पन, हृदय में धड़कन आदि उसके स्वभाविक गुण हैं। इस कारण वे कार्य कुशल होते हुए भी सफलता नहीं पाते। ऐसे व्यक्ति अधिकतर देवाराधक, धार्मिक तथा समाज सेवी प्रकृति के होते हैं। उनकी मिलनसारी उनके बहुत से कार्यों के करने में बहुत ही सहायक होती है।

ये लोग समाज में प्रधान या सभापति का आसन ग्रहण करते हैं और छोटे बड़े सभी को उत्तम सलाह देते हैं। ऐसे मनुष्यों के शत्रु बहुत ही कम तथा मित्रों की संख्या बहुत होती है। नितिन कुमार पामिस्ट

(२) जिन हाथों का रंग लाल सुर्ख अथवा रक्तिम होता है वे दबाने में अत्यन्त सख्त या कठोर प्रतीत होते हैं। ऐसे व्यक्ति बड़े ही परिश्रमी, विपति का सामना बड़े ही साहस के साथ हृदय में धैर्य और शान्ति धारण कर करते हैं। ये लोग बड़े ही चुस्त, चालाक तथा फुर्तीले होते हैं।

जो कि अपनी मेहनत के कारण अपने जीवन के अधिकतर कार्यों में सफल होते देखे गये हैं या देखे जाते हैं। एसे व्यक्ति दुखों को तथा मुसीबतों को अपना पथ प्रदर्शक समझ कर ही अपने कार्यों को दुगुचे उत्साह से करते हैं। ये लोग अपने उत्सवों को बड़े ही उल्लास तथा उत्साह से मनाते हैं। ये किसी-किसी के सच्चे मित्र तथा प्रत्यक्ष शत्रु भी होते हैं। इन्हें क्रोध बहुत ही जल्दी आता है किन्तु अपनी बात के पक्के होते हैं।

इनके मित्रों की संख्या न्यून तथा शत्रुओं की संख्या अधिक होती है। ये तनिक सी बात पर झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। ये धर्म को अपने सुभीते के अनुसार ही मानते हैं। समाज सेवा कर्तव्य समझ कर नहीं किन्तु नामवरी के लिए खूब करते हैं।

(३) तीसरे नम्बर पर वह हाथ आते हैं जिनका रंग न गुलाबी है और न सुर्ख ही बल्कि सफेदी लिए होते हैं। ऐसे हाथों वाले व्यक्ति किसी विशेष गुण से प्रभावित न होकर सभी गुणों के अन्तर्गत विचरण करते हैं। ऐसे व्यक्ति बहुत ही कम शिक्षित होते हैं और जो पढ़ जाते हैं बड़े ही चुस्त, चालाक तथा स्वार्थी प्रतीत होते हैं। बातों में किसी को बोलने नहीं देते। यद्यपि ऐसे व्यक्ति व्यापारी, दस्तकार कलाकार, कवि लेखक आदि सभी कार्य करने वालों में पाए जाते हैं फिर भी मजदूर पेशा अघिकतर होते है।

व्यापारी आदमियों के हाथ मुलायम और मजदूरों के हाथ बड़े ही सख्त तथा कठोर होते है। जो कि किसी प्रकार की भी उन्नति न करके छोटे-छोटे कार्यों को करके ही अपना पेट पालते है। पत्थर तोड़ना, सड़क कूटना झल्ली ढोना, मिट्टी उठाना आदि कार्य करके जीवन यापन करते हैं।

जिनको पेट पूजा के अतिरिक्त किसी दूसरे की पूजा की आवश्यकता ही नहीं होती । ये लोग अनपढ़ होने पर भी अपनी प्रान्तीय भाषा में अच्छे-अच्छे लोक गीत अपनी मंडली में बड़े ही उत्साह के साथ गाया करते हैं। इनके जीवन का ध्येय अपने ही समाज या समूह में नम्बदारी ले लेने के अतिरिक्त कोई और विशेषता नहीं रखता। ये उन्नति-अवनति से बहुत दूर सांसारिक बन्धनों के अति निकट रहते हैं।

इनके मित्र-शत्रु समान ही होते हैं। कुछ लोग कार्य व्यस्तता के कारण शान्त ही बने रहते हैं और कुछ कार्य न होने के कारण आपसी झगड़ों में बड़ा उत्साह दिखाते हैं। नितिन कुमार पामिस्ट

उपयुक्त सभी प्रकार के हाथों का अच्छे और बुरे प्रभाव से प्रभावित होना उनसे सम्बन्धित ग्रह स्थानों तथा उगलियों के शुभअशुभ प्रभाव से बहुत कुछ समझाया जा सकता है। अब हम सर्व प्रथम उगलियों के प्रभाव का ही विशेष रूप से वर्णन कर अपनी वर्णन शैली का सम्पादन करेंगे। यह बात प्रत्यक्ष रूप से सभी जानते हैं कि प्रत्येक हाथ में चार उगली तथा पांचवाँ अँगूठा होता है किन्तु ऐसा भी देखने में आता है कि किसी-किसी हाथ में चार उगली दो अँगूठे या एक अँगूठा पाँच उगली सब मिलाकर कुल संख्या छे भी हो जाती है।

यद्यपि यह बात सैकड़ों हजारों में एक आध ही जगह देखने को मिलती है जिसका कोई विशेष प्रभाव जीवन पर अच्छा या बहुत ही बुरा पड़ता दिखाई नहीं पड़ता। इसलिये हम इस विषय को विशेष रूप से तूल न देकर चार ही उगलियों तथा एक ही अँगूठे का वर्णन कर अपने लक्ष पर पहुंचेगे।

९. यहाँ यह बात विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है कि हथेली से जुड़ी हुई उगलियों का विशेष सम्बन्ध हथेली से होते हुए भी मस्तिष्क से कहीं अधिक है। पोरुओं पर भी किसी भारी वस्तु का दबाव पड़ जाने पर मस्तिष्क धमनियों पर इसका गहरा प्रभाव पड़ता है और अचानक सिर में चक्कर आ जाता है।


जिस कारण एक प्रकार का विशेष भय हृदय में बैठ जाता है। जिससे कार्य करने में रूचि नहीं रहती। कभीकभी अत्यधिक दबाव पड़ जाने से हृदय की गति तक रुक जाती है और रक्त संचालन, गति विरोध हो जाने के कारण कितने ही व्यक्ति उन्मादी या पागल होते देखे गये हैं। ये ही उंगलियाँ साधारण रूप से प्रत्येक हाथ में चार होती है। जिनके नाम इस प्रकार निम्नांकित किये जाते है।


(१ ) तर्जनी (Index Finger)
(२ ) मध्यमा (Middle Finger)
(३ ) अनामिका (Ring Finger)
(४ ) कनिष्टिका (Little Finger)

(१) तर्जनी उंगली-वह उगली कहलाती है जो कि अँगूठे के सबसे समीप है। इसको प्रथम उँगली भी कहते हैं। इसके नीचे गुरु या बृहस्पति देवता निवास करते हैं। इसलिए इसे गुरु या बृहस्पति की उगली भी कहा जाता है। संस्कृत में इसे तर्जनी नाम इसलिये दिया गया है कि यह तर्जन कार्य में सबसे आगे रहती है।

जैसे किसी को डाटना हो या पथ का प्रदर्शन करना हो तो तर्जनी उगली ही सर्व प्रथम मार्ग दर्शक बनेगी। इसीलिये इसे तर्जनी नाम दिया गया है।

(२) मध्यमा उगली—तर्जनी के साथ वाली उँगली को मध्यमा उगली कहते हैं। इसके मूल में शनि देव निवास करते हैं। इसलिये इसे शनि की उगली भी कहा जाता है। वास्तव में यह मध्य में होने के कारण संस्कृत में मध्यमा कहलाती है। क्योंकि इसको अँगूठे तर्जनी, अनामिका तथा कनिष्टिका का मध्य भाग प्राप्त है । इसकी स्थिति मध्य में होने के कारण मध्यमा कहलाती है। नितिन कुमार पामिस्ट

(३) अनामिका उंगली-तीसरी उगली जो मध्यमा के साथ है अनामिका कहलाती है। इसके मूल में रवि या सूर्य का निवास स्थान है। इसलिये इसे रवि उगली भी कहते हैं।


अनामिका का अर्थ बिना नाम वाला है इसलिये इसे संस्कृत में अनामिका नाम दिया गया है। वास्तव में इस उंगली का कोई भी नाम न होने के कारण इसे अनामिका नाम से पुकारा जाता है।

(४) कनिष्टिका उंगली-अनामिका के साथ वाली चौथी उगली की कनिष्टिका कहते हैं इसके मूल में बुध देवता निवास करता है। इसलिये इसे बुध की उगली भी कहते हैं। कनिष्टिका का अर्थ छोटा होने के कारण इसे संस्कृत में कनिष्टिका नाम दिया गया है।


यह वास्तव में यथा नाम तथा गुण होने के कारण कनिष्टिका कहलाती है। यह सभी उगलियों से छोटी होने के कारण कनिष्टिका नाम से पुकारी जाती है । नितिन कुमार पामिस्ट

अब हम तर्जनी से लेकर कनिष्टिका तक का वर्णन अपने पाठ्य-क्रम के अनुसार क्रमशः निम्नांकित करेंगे ।
प्रथम तर्जनी उंगली-इसको अंग्रेजी में Index Finger या Finger of Jupiter जिसका अधिपति या स्वामी गुरु या बृहस्पति कहलाता है। संसार के ९५ प्रतिशत हाथों में इसकी लम्बाई
अनामिका की लम्बाई से अर्थात् Ring Finger या The Finger of Apollo से छोटी होती है फिर भी २ या ५ प्रतिशत हाथों में इसकी लम्बाई अनामिका या रवि उगली के समान या उससे बड़ी होती है।

जिन हाथों में गुरु या बृहस्पती की उगली अनामिका या रवि उगली से बड़ी होती है वे लोग घमण्डी, चरित्रवान, सौन्दर्य शक्ति के उपासक तथा किसी भी कार्य या बात का उत्तरदायित्व लेने वाले तथा सदैव प्रसन्न रहने वाले होते हैं। यदि तर्जनी उगली की लम्बाई मध्यमा ऊँगली अर्थात Middle Finger या Finger of Saturn के समान या उससे बड़ी हो तो मनुष्य बड़ा ही आराम तलब तथा खेल तमाशों में दिलचस्पी लेने वाला होता है।

ऐसे व्यक्ति का अहभाव या घमण्ड बढ़कर उसके ही निरादर का कारण बन जाता है। ऐसे मनुष्य सदा ही बढ़-चढ़कर बातें करने वाले खुशामद पसन्द होते हैं। धर्म से उनकी रूचि हट जाती है और हठ धर्म में बढ़ जाती है। और यदि उगली नोकीली हुई तो ऐसे मनुष्य धर्म से एकदम विमुख हो जाते हैं। वे दूसरों पर सदा हुकूमत ही चलाने की सोचा करते है और अपने मातहत काम करने वालों को तकलीफ देने के आदी होते हैं।

इसलिये ऐसे व्यक्ति सादे-सीधे रहने पर भी कुछ विश्वसनीय घमण्डी होते हैं। जिस कारण उनसे कोई भी प्रसन्न नहीं रहता। किन्तु उनके सम्मुख उनकी सत्य बात भी लोग कहते हुए हिचकते हैं। वे कायदे कानून की पर्वाह कम करते हैं कि वे दूसरों पर शासन करने के लिये ही पैदा हुए हैं। उनकी यह अनाधिकार चेष्टा कभी-कभी उन्हें नीचा दिखाये बिना नहीं रहती, जिसका उन्हें बहुत दुख तथा अफसोस होता है।

किन्तु वे अपने स्वाभाविक गुण के कारण अपने धैर्य तथा हिम्मत को कम नहीं होने देते । यही विशेषता उन्हें जीवन में जीने के लिये बाध्य करती है। यदि तर्जनी मध्यमा'उगली से छोटी हुई तो साधारण जीवन व्यतीत होता है और यदि यह अनामिका उगली से छोटी हुई तो मनुष्य काफी से ज्यादह चुस्त तथा चालाक होता है। वह किसी भी कार्य का उत्तरदायित्व अपने ऊपर न लेकर अपने कार्य को सदैव दूसरों से कराकर यशस्वी होता है।

यदि तर्जनी उगली एक दम उतार-चढ़ाव की ढलवाँ हो तो मनुष्य अनेक प्रकार के भोजन करने वाला होता है। वह गरीब हो या अमीर अपनी हैसियत के मुताबिक, खाते समय भाँतिभाँति की सब्जियाँ तथा पदार्थ खाना पसन्द करता है। न जुड़ने पर रूखा सूखा अनिच्छा से खाकर पेट तो भर लेता है किन्तु प्रसन्न नहीं रहता। उसके कपड़े फटे ही क्यों न हों किन्तु साफ होने चाहिये वे तभी पहन सकते है। उनकी कुछ ऐसी प्रकृति होती है। नितिन कुमार पामिस्ट

द्वितीय मध्यमा उंगली :- इस उंगली को अंग्रेजी में Middle Finger या finger of Saturn कहते है और प्रायः यह ऊँगली अनामिका और तर्जनी की अपेक्षा कुछ बड़ी ही होती है। इसका किसी हद तक इन दोनों उँगलियों की अपेक्षा कुछ बड़ा रहना ही मनुष्य जीवन के लिये हितकर है। क्योंकि हाथ में यही उँगली मनुष्य के भाग्य की प्रतीक होती है और कहा भी है बड़ी उंगली बड़ा भाग, छोटी उँगली छोटा भाग।

किन्तु इसका 3 इन्च से उन दोनों की अपेक्षा अधिक लम्बा होना छोटे होने की अपेक्षा अधिक खतरनाक होता है। इसकी लम्बाई 3 इन्च तक बढ़ जाना और तर्जनी तथा अनामिका का उससे काफी छोटा रह जाना उस मनुष्य के दुख, भय, उदासी तथा स्वार्थादि अवगुणों का बढ़ जाना प्रत्यक्ष रूप से प्रकट करता है।

इसके अतिरिक्त 3 इन्च लम्बाई का बढ़ जाना ही सर्व साधारण में अनेक शुभ गुणों के बड़ जाने का एक मात्र शुभ लक्षण प्रत्यक्ष दिखाई देता है। ऐसा मनुष्य बुद्धिमानी से शासनशक्ति प्राप्त करता है। और अपने शुभ विचारों द्वारा सदैव उन्नति की ओर अग्रसर रहता है । वह सदा मितव्ययता का ध्यान रखकर कार्य सम्पन्न करता है।

परिश्रम तथा शान्ति से कार्य करने वाला वह व्यक्ति कभी कुत्सित विचारों का दास नहीं होता है। जब मध्यमा उंगली उक्त कथित दोनों उँगलियों की अपेक्षा ३ इन्च लम्बी होती है तो उसका प्रभाव मनुष्य को क्रान्तिकारी, विप्लवकारी-कातिल-हत्यारा अथवा जंगल में रहने वाला उदासीन, अवधूत कापालिक तथा आत्महनन या खुदकशी करने वाला बना देती है।

यह उँगली मनुष्य की भाग्य विधाता मानी जाती है फिर भी इसका यह अर्थ नहीं हो जाता कि उँगली के शुभ या अशुभ प्रभाव के सम्मुख दूसरे शुभ या अशुभ चिन्हों तथा रेखाओं का इसके विपरीत कोई प्रभाव ही नहीं होता, वास्तव में ऐसी बात नहीं है। सब ही शुभ तथा अशुभ चिन्ह अथवा रेखायें बलवान होने पर इसके विरुद्ध भी अपना अच्छा-बुरा, शुभ-अशुभ तथा मिला-जुला सभी प्रकार का अपना प्रभाव दिखाती है।

उंगली, चिन्ह तथा रेखाओं की विशेष प्रवृत्ति जिधर होगी मनुष्य उधर ही जायगा और उसी कार्य में सफलता प्राप्त करेगा। तिसपर भी मध्यमा उँगली का आवश्यकता से अधिक लम्बा होना प्रत्येक अवगुण का सहायक है। इसलिये भाग्य रेखा का मध्यमा उँगली के तृतीय पोरुए तक आना, जो कि हथेली से जुड़ा होता है, उसके दुर्भाग्य को प्रदर्शित करता है। इसलिये किसी भी उँगली तथा रेखा का जरूरत से अधिक बढ़ जाना लाभप्रद होने के स्थान पर हानि ही करता है। यह बात प्रेक्षक को अवश्य ही ध्यानपूर्वक देख लेना चाहिये ।

तृतीय अनामिका उंगली -जिसकी अंग्रेजी में Ring-Finger या The Finger of Apollo भी कहते है अधिकतर हाथो में मध्यमा या शनि की उंगली से छोटी और तर्जनी या वृहस्पति की अँगुली से बड़ी होती है। किन्तु कहीं-कहीं इसके विपरीत भी दिखाई देता है। और यह अँगुली लम्बाई में मध्यमा अँगुली के समान और किसी हाथ में तर्जनी से छोटी भी दृष्टिगोचर होती है।

अनामिका उगली का छोटा या बड़ा किसी प्रकार के विशेष गुण और प्रभाव को प्रदर्शित करता है । इस उगली का तर्जनी से बड़ा होना अत्यन्त शुभ लक्षण है। यह मनुष्य में बुद्धिमानी, दया, चालाकी और रसास्वादन का शौक पैदा करती है। यशकीर्ति, धन-सम्पति, मिलनसारी आदि प्रदान करती है और मनुष्य को अच्छे शुभ तथा घार्मिक कार्यों में सफलता प्रदान करती है और जब यह उगली शनि की उगली के बराबर होती है तो मनुष्य को वृष्ट, प्रमत उन्मत्त, असावधान, जुआरी, सट्टेबाज तथा रेस और शर्त पर धन लगाने वाला बना देती है।

ऐसा मनुष्य परिणाम सोचे बिना ही कोई भी कार्य करने लगता है। अनामिका का तर्जनी से किसी भी रूप में छोटा होना और खास तौर पर तब जबकि वह उगली टेड़ी या मरोड़ी हुई के समान दिखाई देती ही विशेष रूप से निम्नांकित अवगुणों से परिपूर्ण होती है। जिन हाथों में उपर्युक्त लक्षणों से युक्त यह उगली होती है वे व्यक्ति विशेष रूप से असभ्य, रूखे, गवारों जैसी बात करने वाले, निर्लज्ज, धृष्ट, कलकित तथा अपयश के भागी होते हैं।

किसी भी हाथ में अनामिका का लम्बाई में मध्यमा के समान होना और तर्जनी उगली से छोटा होना, ये दोनों ही बातें किसी भी व्यक्तिगत जीवन के लिये अत्यन्त ही अशुभ फलदायक है ।

इस उगली का सीवा तथा सुडौल होना बहुत ही शुभ फलदायक है। अवगुणों से रहित तथा गुणों से युक्त होने पर और रवि रेखा के शुभ प्रभाव दिखाने पर मनुष्य को प्रत्येक कार्य में सफलता मिलती है। इन गुणों के साथ-साथ यदि अनामिका का झुकाव, कनिष्टिका उगुली की ओर हो तो व्यापार में अच्छी सफलता प्राप्त होती है। इसके विरुद्ध होने पर विफलता तथा बदनामी का सामना करना पड़ता है।

यह उगली यदि बृहस्पति उगली से कुछ बड़ी हो और शनि उगली से कुछ छोटी होने पर ही शुभ फल देती है और ऐसा व्यक्ति धामिक, देवाराचक मिलनसार, समाजसेवी तथा उपकारी होता है। इन शुभ गुणों के कारण ही वह जीवन के प्रथम भाग में ही सफलता प्राप्त कर लेता है और आजीवन उसका उपभोग करता है। नितिन कुमार पामिस्ट

चतुर्थ कनिष्टिका उगली :-इसकी अंग्रेजी में Little Finger या The Finger of Mercury भी कहते है और ये सभी उगलियों से लम्बाई में छोटी होने के कारण ही कनिष्टका कहलाती है। कनिष्टिका अर्थ छोटा है। यद्यपि यह उगली सबसे छोटी है फिर भी गुणों के प्रभाव में शायद सबसे ही बड़ी है।

यह अलग-अलग हाथों में अलग-अलग लम्बाई तथा स्थूल की पायी जाती है। यह छोटी-बड़ी तथा मध्यम, तीन प्रकार की होती है जिनका प्रभाव भी पृथक-पृथक है जिस कनिष्टिका की लम्बाई अनामिका के नाखून के आरम्भिक से ऊपर या उसके बराबर तक पहुँचती है सबसे शुभ प्रभाव दिखाती है। कहने का तात्पर्य यह है कि इसका लम्बा होना एक शुभ लक्षण है। जिन मनुष्यों के हाथों में यह लक्षण होता है वे बड़े ही अच्छे साहित्यकार तथा अनुसन्धानकर्ता होते हैं। ऐसे लोग अच्छे व्यापारी, उत्तम कोटि के कलाकार तथा दस्तकार भी होते हैं।

ऐसे व्यक्ति अधिकतर पड़े लिखे तथा बुद्धिमान होते हैं। अभाग्यवश, धनाभाव या सामाजिक कुरीतियों के कारण यदि वे साक्षर न भी हो पाय तो भी वे अवश्य ही किसी विषय के मर्मज्ञ होंगे ऐसा समझना चाहिए । किसी किसी हाथ में कनिष्ठका की लम्बाई अनामिका के दूसरे पोरुए के ऊपर बाले भाग की दूसरी रेखा तक पहुँचती है। यह भी एक अत्यन्त शुभ लक्षण है जिसका होना सफलता प्राप्त करने के लिये अत्यन्त आवश्यक है।

इस शुभ चिन्ह के प्रभाव के कारण मनुष्य, अधिकार, प्रतिष्ठा, सामथ्र्य महात्म्य, कार्य शक्ति, बुद्धिमता, प्राकृतिक ज्ञान-विज्ञान से सम्पन्न रहता है। इसके लिये केवल यही आवश्यक नहीं है कि इन गुणों से विभूषित मनुष्य किसी घन सम्पन्न या बड़े घर में ही पैदा हीं बल्कि छोटे मनुष्यों में भी इसका प्रभाव प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है।

जो क्लर्क, दफ्तरी, चपरासी इस गुण से विभूषित हैं वे बड़े ही मिलनसार तथा अपने कार्य को बड़ी ही मेहनत, दिलचस्पी तथा योग्यता से करते हैं। ये लोग अपने अफसरों के इशारे को ही समझकर कार्य को उसकी इच्छानुसार अन्जाम देते हैं। इनका स्वभाव शान्त तथा वैर्य धारण करने वाला होता है। इनमें दोष यह है कि ये लोग चरित्र की सफाई के साथ कपड़ों की सफाई पर विशेष ध्यान नहीं देते। जिन हाथों में इसकी लम्बाई अनामिका के मध्य पोरुए के मध्य तक मुश्किल से पहुँचती है उन मनुष्यों में उपयुक्त गुणों का लोप प्राय: होता है ।

यद्यपि ऐसे व्यक्ति बहुत कम देखने में आते है फिर भी जो हैं उनमें निम्नलिखित अवगुण विशेष रूप से पाये जाते हैं जबकि एक रेखा हृदय रेखा से उठकर कनिष्टिका उगली के तृतीय पोरुए की दूसरी रेखा तक चली जाय । ऐसा व्यक्ति चोरी जारी, डकैती, जेब कतरना, ठगी करना, भटियापन करना, धोखा देना आदि कार्य में बड़ा ही सफल होता है। कनिष्टिका उगली का आवश्यकता से अधिक छोटा होना अत्यन्त ही दुख का कारण हो जाता है। ऐसा मनुष्य अच्छी सभा सोसाइटी तथा समाज से बहिष्कृत ही रहता है ।

किन्तु निकृष्ट समाज मंडली में वही प्रधान चुना जाता है। सफल जीवन व्यतीत करने के लिये कनिष्टिका उ'गली का लम्बा होना अत्यन्त आवश्यक है ।

नितिन कुमार पामिस्ट

Hand Lakeer Se Bimari Dekhna In Hindi

Hand Lakeer Se Bimari Dekhna In Hindi

हस्तरेखा और बीमारिया 

हस्तरेखा शास्त्र (Hast Rekha Shastra) मानव के सम्पूर्ण स्वभाव के साथ आन्तरिक व बाहरी शारीरिक क्षमताओं और स्वास्थ्य की भी जानकारी देने में मददगार होता है।

आज मनुष्य अनेकों रोगों से ग्रसित है भयभीत है उसे हमेशा यह भय व्याप्त रहता है कि कहीं मुझे अमुक रोग न हो जाए। उस परिस्थिति में व्यक्ति अपने हाथ के द्वारा होने वाले रोगों की पूर्व जानकारी प्राप्त कर सकता है।

प्रस्तुत लेख हस्तरेखा ज्ञान पर आधारित है इसका अध्ययन करने के पहले निम्न अंगो पर भी ध्यान देना आवश्यक होगा।

1.  केवल एक चिन्ह लक्षण को देखकर अमुक रोग हो जाएगा ऐसा निर्णय करना हमेशा उचित नहीं रहता है।
2.  यहाँ दिए गए लक्षणों को अच्छी तरह से परखने के बाद ही निर्णय लेना उचित होगा।
3. विशेष परिस्थिति में अच्छे ज्योतिर्विद के द्वारा अवश्य सलाह लें। (Nitin Kumar Palmist)

शारीरिक दुर्बलता-

1. यदि नाखून पतले हों तथा जीवन रेखा फीकी हो साथ ही वह जंजीरदार होकर नीचे की ओर झुकी हुई हो।

2. ज्यादातर कोमल हाथ दुर्बलता का सूचक होता है।

3, शनि पर्वत पर अधिक गहरापन आन्तरिक व्यक्तियों को क्षीण करता है। यदि इसके साथ ही सूर्य पर्वत शनि पर्वत की ओर झुका हो तो मेहनती नहीं बनने देता है।

4, हाथ के मध्य में अधिक गहराई हो, हाथ वर्गाकार हो, शनि पर्वत दबा हो, गुरु पर्वत अधिक उठा हो तो शारीरिक स्थूलता होती है। आन्तरिकरूप से शरीर कमजोर होता है। सूर्य पर्वत पर दोष होने पर शरीर  जल्दी थक जाता है।

बचपन में दुर्बलता-

यदि गुरु रेखा बहुत अधिक मोटी हो और गुरु पर्वत के नीचे जंजीरदार हो गई हो।

वंशानुगत रोग-

वंशानुगत रोगों में गुरु व सूर्य का सम्बन्ध अधिक पाया जाता है। गुरु पूर्वजों का कारक होता है यदि इस पक्ष पर जन्मकुण्डली की सहायता ली जाए तो इस पक्ष में स्पष्ट  जानकारी मिल जाती है। गुरु को ही मधुमेह रोग का कारक माना जाता है।

1. जीवनरेखा के आरम्भ स्थल पर ही द्वीप का चिन्ह हो तो वंशानुगत रोग होते हैं।

2. गुरु पर्वत के दूषित होने पर भी वंशानुगत रोग होते हैं।

3. सूर्य पर्वत पर अशुभ चिन्ह वंशानुगत रोग कारक होते हैं।

4. मस्तिक रेखा द्वीप से प्रारम्भ हो।

             

Hast Jyotish - Mounts & Lines - Rog Hast Rekha


LINES ON HAND ( HATH KI REKHA )

रोगी और रोग की पहचान हस्तरेखा 
यदि जीवन रेखा जंजीरनुमा हो आरम्भ में तो व्यक्ति बचपन में बीमार रहता है।

यदि जीवन रेखा जंजीरनुमा हो आरम्भ में तो व्यक्ति बचपन में बीमार रहता है।


यदि भाग्य रेखा आरम्भ में टुकड़ो में हो या बाधा रेखाओ से कटी हो तो व्यक्ति का स्वास्थ्य बचपन में अच्छा नहीं होता है।


यदि जीवन रेखा और मस्तक रेखा काफी दूर तक एक साथ मिली हो तो ऐसे व्यक्ति का स्वास्थ्य बचपन में अच्छा नहीं होता है।


यदि जीवन रेखा के आरम्भ में बड़ा द्वीप हो तो ऐसे व्यक्ति का स्वास्थ्य भी बचपन में अच्छा नहीं होता है।


यदि व्यक्ति के हाथ में ये उपरोक्त चिन्ह या निशान है लेकिन उसको बचपन में किसी भी प्रकार कि बीमारी नहीं हुई हो तो उसको बचपन में किसी न किसी पारिवारिक समस्या का सामना करना पड़ा होगा, ज्यादातर ऐसे व्यक्तियो को अपने माता पिता का प्रेम व सहयोग नहीं मिलता है अर्थात इनकी परवरिश दूसरे ही करते है। ऐसे व्यक्तियो का आरम्भिक जीवन कठिन होता है।



1) The line of Life - Jeevan Rekha

2) The line of Head - Mastak Rekha
3) The line of Heart - Hridya Rekha
4) The line of Fate - Bhagya Rekha
5) The line of Sun - Surya Rekha
6) The line of Marriage - Vivah Rekha
7) The line of Intuition - Atinendriya Rekha
8) The line of Health - Swasthya Rekha
9) The line of Mars - Mangal Rekha
10) The Girdle of Venus - Shukar Valay
11) The Rascette - Manibandh



MOUNTS ON HAND ( HATH PAR GRAH )


यदि भाग्य रेखा आरम्भ में टुकड़ो में हो या बाधा रेखाओ से कटी हो तो व्यक्ति का स्वास्थ्य बचपन में अच्छा नहीं होता है।


1) Mount of Jupiter - Guru Parvat
2) Mount of Saturn - Shani Parvat
3) Mount of Sun - Surya Parvat
4) Mount of Mercury - Budh Parvat
5) Mount of Upper Mars - Ucch Mangal Parvat
6) Mount of Lower Mars - Nimn Mangal Parvat
7) Mount of Venus - Shukar Parvat
8) Mount of Luna - Chandra Parvat
9) Plain of Mars - Mangal Ka Maidan
10) Mount of Dragon's Head - Rahu Parvat
11) Mount of Dragon's Tail - Ketu Parvat

Hath Ki Rekha Se Kaise Pata Chalta Hai Ki Kitane Bacche Honge | Hast Rekha


हाथ में संतान का योग बताने वाली संतान रेखाय


हाथ में संतान का योग बताने वाली संतान रेखाय

संतान रेखा ( Santan Rekha In Hindi)

पश्चिमी देशों में कनिष्ठिका की जड पर स्थित बुध पर्वत पर बनी आड़ी रेखाओं को विवाह रेखाए और उन आड़ी रेखाओं पर खड़ी रेखाओं को संतान रेखाए कहा गया है। कितु हमारे अनुभव के अनुसार इन रेखाओं से संतान संबंधी प्रश्नों के राही उत्तर नहीं मिलते हैं।

भारतीय सामुद्रिक शास्त्र में हाथ में अंगूठे वाले क्षेत्र को पितृ क्षेत्र कहा गया है। अंगूठे की जड पर शुक्र पर्वत की स्थित इस तथ्य का अनुमोदन करती है क्योंकि शुक्र पर्वत व्यक्ति में काम भाव (सेक्स) का अनुपात बताता है और यही भाव संतानोत्पति का कारक है। अत अगूठे की जड पर स्थित शुक्र पर्वत पर खड़ी रेखाएं संतान संबधी प्रश्नों का सही उत्तर देती हैं।

ये रेखाएं यदि स्पष्ट और लबी हों तो स्वस्थ और दीर्घायु संतान का संकेत देती हैं) लूटी-फूटी रेखाए अस्वस्थ संतान को इयोतक होती हैं। कई बार ऐसा भी देखा गया है कि हाथ में संतान रेखाए तो होती हैं कितु जातक को संतान सुख प्राप्त नहीं होता। इसके दो कारण हो सकते हैं। पहला यह कि जातक में प्रजनन शक्ति तो होती है, कितु वह परिवार नियोजन के किसी उपाय द्वारा संतान पैदा करना नहीं चाहता। दूसरा यह कि जातक में प्रजनन शवित होती हैं कितु उसके जीवन साथी की प्रजनन शवित बाधित होती है।

इस बाधा का पता लगाने के लिए हाथ के चंद्र पर्वत को देखना चाहिए। यदि चन्द्र पर्वत के निचले भाग पर दूटी फूटी रेखाए या क्रास हो तो उसको उपयुक्त उपचार के लिए चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। कमी किसमें हैं, इसका पता लगाने के लिए पति और पत्नी दोनों के हाथ देखने चाहिए।

इनके अतिरिक्त हाथ के कुछ और लक्षणो रो भी संतान सबंधी प्रश्नो व्ले उत्तर मिलते हैं, यथा कलाई की निकटतम मणिबंध रेखाएं संपष्ट हो तो संतान की संभावना होती हैं। यदि ऊपरी मणिबध रेखा ऊपर की और धनुषाकार अवस्था में उठी हुई हो तो संतानोत्पति में बाधा आती है।

शुक्र पर्वत को अंगूठे से अलग करने वाली जोड़ रेखा स्पष्ट द्वीपों की माला के समान हो तो संतान की संभावना होती हैं।

शुक्र पर्वत दबा हुआ हो तो संतान उत्पति में बाधा होती है। इस बाधा के निवारण के लिए मूगा, माणिक्य या लाल रंग का कोई अन्य रत्न अंगूठी में जड़वा कर पहनना चाहिए और प्रतिदिन संतान गोपाल स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
संतान रेखा पर द्वीप हो तो संतान का स्वास्थय खराब रहता है या रहता है या वह संतान कमज़ोर होती है।

संतान रेखा पर द्वीप होना हस्तरेखा 

संतान रेखा पर द्वीप हो तो संतान का स्वास्थय खराब रहता है या रहता है या वह संतान कमज़ोर होती है।

यदि द्वीप संतान रेखा के अंत में है तो ऐसे में गर्भपात हो जाता है या फिर संतान जीवित नहीं रहती है।

Putra Aur Santan Prapti Ke Rekha Kaha Hoti Hai Hast Rekha

संतान रेखा



हस्तरेखा में संतान रेखा का परिचय 


संतान रेखायें वे होती है जो विवाह रेखा के अन्त में उसके उपरी भाग में ऊपर की ओर जाती है। विवाह रेखा पर खड़ी और सीधी रेखा स्वस्थ पुत्र और टेडी रेखा और कमजोर रेखा पुत्री का संकेत देती है। 

योगी, साधु सन्यासी, मठाधीश और शती लोगों के हाथ में विवाह और संतान रेखा के स्थान पर शिष्यों और पूज्य को क्रमशः माना जाता है।

संतान के सम्बन्ध में विचार करते समय हाथ के अन्य भागों की परीक्षा भी आवश्यक है। कभी-ंकभी यह रेखा इतनी सूक्ष्म होती है कि इसके परीक्षण के लिए मैग्नीफाइंग कांच की मदद लेनी पड़ती है।

इस सम्बन्ध में कुछ और बातें ध्यान रखने योग्य हैं। 

  •  रेखा के पतले भाग में द्वीप हो तो संतान आरम्भ में निर्बल होगी बाद में यही रेखा स्पष्ट होगी तो स्वस्थ्य हो जायेगें। 
  •  यदि रेखा के अन्त में द्वीप चिह्न हो तो बच्चा जीवित नहीं रहता।
  •  यदि संतान रेखा उतनी ही स्पष्ट हो जितनी कि उसके पत्नी की है तो जातक बच्चों को बहुत प्यार करता है और उसका स्वभाव बहुत ही स्नेही होता है।
  •  यदि हृदय रेखा बुध क्षेत्र पर दो या तीन रेखाओं में विभाजित होकर शाखा स्पष्ट होवे तो वह व्यक्ति संतान युक्त होता है। 

ONLINE PALMISTRY READING




SEND ME YOUR PALM IMAGES FOR DETAILED AND PERSONALIZED
PALM READING




Question: I want to get palm reading done by you so let me know how to contact you?


Answer: Contact me at Email ID: nitinkumar_palmist@yahoo.in.

Question: I want to know what includes in Palm reading report?

Answer: You will get detailed palm reading report covering all aspects of life. Past, current and future predictions. Your palm lines and signs, nature, health, career, period, financial, marriage, children, travel, education, suitable gemstone, remedies and answer of your specific questions. It is up to 4-5 pages.



Question: When I will receive my palm reading report?

Answer: You will get your full detailed palm reading report in 9-10 days to your email ID after receiving the fees for palm reading report.



Question: How you will send me my palm reading report?

Answer: You will receive your palm reading report by e-mail in your e-mail inbox.



Question: Can you also suggest remedies?

Answer: Yes, remedies and solution of problems are also included in this reading.


Question: Can you also suggest gemstone?

Answer: Yes, gemstone recommendation is also included in this reading.


Question: How to capture palm images?

Answer: Capture your palm images by your mobile camera
(Take image from iphone or from any android phone) or you can also use scanner.


Question: Give me sample of palm images so I get an idea how to capture palm images?

Answer: You need to capture full images of both palms (Right and left hand), close-up of both palms, and side views of both palms. See images below.






Question: What other information I need to send with palm images?

Answer: You need to mention the below things with your palm images:-

  • Your Gender: Male/Female

  • Your Age:

  • Your Location:

  • Your Questions:

Question: How much the detailed palm reading costs?

Answer: Cost of palm reading:


  • India: Rs. 600/-

  • Outside Of India: 20 USD
( For instant palm reading in 24 hours you need to pay extra Rs. 500 or 15 USD )
(India: 600 + 500 = Rs. 1100/-)
(Outside Of India: 20 + 15 = 35 USD)

Question: How you will confirm that I have made payment?


Answer: You need to provide me some proof of the payment made like:

  • UTR/Reference number of transaction.

  • Screenshot of payment.

  • Receipt/slip photo of payment.

Question: I am living outside of India so what are the options for me to pay you?

Answer: Payment options for International Clients:

International clients (those who are living outside of India) need to pay me 20 USD via PayPal or Western Union Money Transfer.

  • PayPal (PayPal ID : nitinkumar_palmist@yahoo.in)
    ( Please select "goods or services" instead of "personal" )

  • Western Union: Contact me for details.

Question: I am living in India so what are the options for me to pay you?

Answer: Payment options for Indian Clients:

  • Indian client needs to pay me 600/- Rupees in my SBI Bank via netbanking or direct cash deposit.

  • SBI Bank: (State Bank of India)

Nitin Kumar Singhal
A/c No.: 61246625123
IFSC CODE: SBIN0031199
Branch: Industrial Estate

City: Jodhpur, Rajasthan.
  • ICICI BANK:
(Contact For Details)

Email ID: nitinkumar_palmist@yahoo.in






Client's Feedback - August 2018



If you don’t have your real date of birth then palmistry is there to help you for future life predictions.  Our palm lines, signs, mounts and shapes which are very useful in predicting the person’s life. We can predict your future from the lines and signs of your both palms. We can predict your future by studying your palm lines and signs. There is no need to send us your date of birth , time of birth , place of birth etc . Palm told the personality ,future ups and downs thus a experienced palmist can guide you to deal with upcoming challenges with vedic remedies.