Tuesday, March 6, 2018

द्वीप चिन्ह का ग्रह क्षेत्रों तथा रेखाओं पर प्रभाव | Island On Lines & Mounts Of Hand In Hindi

द्वीप चिन्ह का ग्रह क्षेत्रों तथा रेखाओं पर प्रभाव | Island On Lines & Mounts Of Hand In Hindi

द्वीप चिन्ह का ग्रह क्षेत्रों तथा रेखाओं पर प्रभाव | Island On Lines & Mounts Of Hand In Hindi


द्वीप चिन्ह एक साधारण-सा चिन्ह है जो कि सर्व साधारण हाथों में अक्सर मिल जाया करता है किन्तु इसका प्रभाव सभी हाथों में असाधारण रूप से पाया जाता है।  बस गनीमत यही है कि यह चिन्ह जिस रेखा के जितने भाग को घेरता है, आयु गणना के हिसाब से वर्षों में उतने ही वर्षों तक दुष्प्रभाव रखता है जितने कि स्थान को घेरता है।

इसका प्रभाव आजीवन न रहकर इस द्वीप चिन्ह की लम्बाई-चौड़ाई के हिसाब से ही उतने ही वर्षों तक रहता है । यह चिन्ह अधिकतर पैतिक या वंश परम्परागत होने वाले रोगों, बुराईयों तथा कुप्रभावों को प्रदर्शित करता है। किन्तु यह कोई अकाट्य नियम ही नहीं बन जाता बल्कि अपने स्वयं पर भी इसका प्रभाव अत्यधिक रूप से पड़ता है। जो कि अपने क्रमानुसार हम पहले क्षेत्रों पर तत्पश्चात् छोटी-बड़ी रेखाओं पर वर्णन कर अपना मार्ग प्रशस्त करेगे । आशा है पाठकगण इससे सम्चित लाभ उठाकर कृतार्थ करेंगे ।

द्वीप गरु क्षेत्र पर :--यदि किसी मनुष्य के हाथ में द्वीप का चिन्ह स्पष्ट रूप से गुरु क्षेत्र पर दिखाई देता हो तो समझना चाहिये कि उस मनुष्य में उच्चाभिलाषाओं तथा अहंभाव, गर्व या आत्मिक विश्वास की बहुत कमी हो जाती है और उस मनुष्य को अपनी कार्य शक्ति पर विश्वास न रहने के कारण सफलता बहुत ही कम मिलती है। ऐसा मनुष्य अपने को निस्तेज समझ बैठने के कारण किसी भी सामूहिक कार्य में हिस्सा नहीं लेता जिससे उसकी सभी भावनाएँ दम घुटे के समान अपूर्ण रह जाती हैं।

द्वीप शनि क्षेत्र पर :-शनि क्षेत्र पर द्वीप का चिन्ह किसी भी मनुष्य के हाथ में एक पूर्ण रूप से अभाग्यपूर्ण लक्षण है जोकि उसे पगपग पर कष्ट पहुँचाया करता है। ऐस मनुष्य अचानक दैवी प्रकोप का आखेट होकर धन-जन से शून्य हो जाता है और दर-दर की ठोकरें खाता फिरता है।

द्वीप रवि क्षेत्र पर :-जिस मनुष्य के हाथ में द्वीप का चिन्ह रवि क्षेत्र पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है वह मनुष्य लाख प्रयत्न करने पर भी अपने प्राकृतिक कलात्मक कार्यों में सफल नहीं होता। उसकी दस्तकारी की प्रशंसा नहीं होती। वह सदैव हतोत्साह ही रहता है। ये पोस्ट नितिन कुमार पामिस्ट द्वारा इंडियन पामिस्ट्री ब्लॉग में प्रकाशित की गयी है। परिश्रम करने पर सफलता कम मिलती है। ऐसा मनुष्य ईर्षालु प्रकृति का हो जाता है। इसका स्थाई प्रभाव उस मनुष्य को पनपने नहीं देता और वह आदमी पित्तादि के बढ़ जाने अथवा बिगड़ जाने के कारण सदैव उदास, निराश तथा रोगी-सा रहता है। 

द्वीप बुध क्षेत्र पर :-जिस मनुष्य के बुध क्षेत्र पर द्वीप का चिन्ह स्पष्ट रूप से दिखाई देता हो तो वह मनुष्य व्यापार तथा वैज्ञानिक विद्याभ्यास में बहुत ही कम सफलता पाता है और सफलता प्राप्ति के लिए सदैव बेचन-सा रहता है। धनवान होने के लिए तथा व्यापारिक सफलता प्राप्त करने के लिये एक के बाद दूसरा, तीसरा, चौथा कार्यारम्भ करता है फिर भी सफल नहीं होता और यही हाल पढ़ाई-लिखाई तथा वैज्ञानिक आविष्कारों के बारे में रहता है जिनमें भी सफलता प्राप्त न होने के कारण सदैव विफल प्रयास रहना पड़ता है ।

द्वीप प्रजापति क्षेत्र पर :--प्रजापति क्षेत्र पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाला द्वीप उस मनुष्य को परिश्रम रहित, क्रियाहीन तथा कमजोर हृदय बना देता है। ऐसा मनुष्य कार्य की महत्ता से ही घबरा जाता है और कोई भी कार्य नहीं कर पाता। उसकी शूरवीरता, शान्ति, धैर्य तथा उत्साह सभी उड़ जाते हैं और वह डरपोक हो जाता है ।।

द्वीप वरुण क्षेत्र पर :–यदि वरुण क्षेत्र पर द्वीप चिन्ह स्पष्ट रूप से दिखाई देता हो तो मनुष्य विद्याभ्यास से वंचित रह जाता है। उसकी वाणी निस्तेज-सी रहती है। वह कोई भी दायित्व कार्य का भार अपने ऊपर नहीं लेता । सामूहिक कार्यों उत्सवों, जल्सों में वक्रता करते ही उसे लज्जा-सी आने लगती है।

द्वीप चन्द्र क्षेत्र पर :-जिस मनुष्य के हाथ में चन्द्र क्षेत्र पर द्वीप का चिन्ह स्पष्ट रूप से दिखाई देता हो तो वह मनुष्य कल्पना शक्ति के क्षीण हो जाने वाले मानव के समान निस्तेज हो जाता है। अपनी दार्शनिकताको खोकर पग-पग पर पछताता है। प्राकृतिक दृश्यों तथा सौन्दर्य से उसे कोई स्नेह नहीं रहता। वह श्रृंगारिक कविता  से अश्लीलता पर उतर आता है।

द्वीप केतु क्षेत्र पर :-केतु क्षेत्र पर द्वीप चिन्ह का होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण लक्षण है । ऐसा मनुष्य धनाभाव के कारण के कारण पढ़ लिख नही पाता और बचपन में अनेक रोगों से ग्रसित रहने के कारण दुर्बल शरीर, उदास तथा निराश रहता है।

द्वीप शुक्र क्षेत्र पर :-द्वीप चिन्ह का शुक्र क्षेत्र पर स्पष्ट दिखाई देना एक अत्यन्त अशुभ लक्षण है। यह चिन्ह जिस पुरुष के हाथ में भी होगा उसी को अपने प्रेमपात्र का वियोग सहना पडेगा । यदि ऐसा व्यक्ति किसी को प्रेम करेगा तो अवश्य ही निराश होना पड़ेगा। यदि प्रेम का प्रस्ताव चलेगा तो अवश्य ही ट्ट जायगा। ये पोस्ट नितिन कुमार पामिस्ट द्वारा लिखी गयी है जो की भारत के प्रसिद्ध हस्तरेखा शास्त्री है और आप उनके और भी लेख उनके ब्लॉग इंडियन पल्मिस्ट्री ब्लॉग पर पढ़ सकते है।यो इस द्वीप का थोड़ा-सा भी सम्बन्ध जीवन रेखा से होगा तो अवश्य है। उसके विवाह या प्रेम सम्बन्ध में अड़चनें डालने वाले उसके ही इ मित्र तथा रिश्तेदार होंगे, जोकि उसके साथ शत्रुता का व्यवहार कर अभीष्ट सिद्ध करेंगे । ऐसा मनुष्य कामासक्त, लम्पट तथा इन्द्रिय लोलुप लेता है।

द्वीप मंगल क्षेत्र पर :-मंगल क्षेत्र पर द्वीप चिन्ह का स्पष्ट रूप से दृष्टिगोचर होना उस मनुष्य की शारीरिक तथा मानसिक दुर्बलता को प्रत्यक्ष रूप से प्रकट करता है। ऐसा मनुष्य पुलिस से डरने वाला और बहादुरी के समय पीछे हट जाने वाला होता है और व्यर्थ को अपनी बड़ाई स्वयं करने वाला होता है। ऐसा मनुष्य दिल का कमजोर तथा डरपोक होता है ।

द्वीप राहु क्षेत्र पर :-राहु क्षेत्र पर द्वीप का चिन्ह होना पूर्ण रूप से दुर्भाग्यपूर्ण लक्षण है जोकि मनुष्य को आवश्यकता के समय उसकी भरी जवानी में धन जन तथा कर्म से हीन कर देता है । ऐसा मनुष्य धनभाव के कारण सदैव आपत्ति में फंसा रहता है और जीवन से निराश रहता है।

द्वीप इंद्रा क्षेत्र पर होः इन्द्र क्षेत्र पर क्षेत्र पर स्पष्ट रूप से दिखाई देने ला झोप हि मनुष्य को प्रौढावस्था को खराब करता है। उसका सूद इकर्स से कर श क को जोर रत रहने लगता है। ऐसे इतके विचार दूषित हो जाने से वह अपने परायों को दृष्टि में गिर जाता है और अपयश के भागो इन जाता है और वह हताश पागल की भाँति बाते करता है।

द्वीप चिन्ह का प्रभाव छोटी-बड़ी रेखाओं पर 

यू तो सभी चिन्ह अपना कुछ न कुछ शुभाशुभ प्रभाव किसी भी हाथ पर होने से उसके जीवन पर रखते हो हैं फिर भी द्वीप चिन्ह हाथ में विशेष रूप से रेखाओं के प्रभाव को दुषित करने के लिए विशेष रूप से उल्लेखनीय है। द्वीप चिन्ह को प्रत्येक रेखा पर आयु विभाग के हिसाब से गणित करके प्रत्येक रेखा को दूषित प्रभाव उसके जीवन पर किस समय क्या असर डालेगा और उससे क्या-क्या हानियाँ होंगी ।

इन सभी बातों पर संकेतात्मक दृष्टि से प्रकाश डालकर उस मनुष्य को आगामी भय से पूर्णतया सचेत कर देना चाहिये ताकि वह मनुष्य आने वाले खतरे से सावधान हो जाय और उपचार द्वारा अथवा अपनी इच्छा शक्ति की प्रबलता द्वारा उसके दूषित फल को यदि पूर्णतया रोकने में समर्थ न भी हो सके तो हल्का अवश्य ही कर दे। क्योंकि आत्मिक शक्ति के बलवान हो जाने पर संसार में कोई काम असम्भव नहीं रहता और न कोई वस्तु अप्राप्य ही रहती है जैसा कि हम पहले संकेत कर आये हैं।

इसलिये किसी भी मनुष्य को केवल सन्देहात्मक बातों पर ही आधारित न रहकर अपने उत्थान के लिए भी सदैव प्रयत्नशील अवश्य ही रहना चाहिए । भाग्य में चाहे जो कुछ भी लिखा हो अवश्य होगा किन्तु यह याद रखना चाहिये कि प्रेक्षक भाग्य विधाता नहीं है इसलिए बताने में भूल हो सकती है जो कि अनजान श्रोता के लिए पतन का कारण बन सकती है।

द्वीप जीवन रेखा पर :—साधारणतया जीवन रेखा पर द्वीप का होना किसी वंश परम्परागत होने वाले रोग की सूचना देता है जोकि पैत्रिक धरोवर के रूप में उस आदमी को प्राप्त होता है । इसलिए आमतौर पर ऐसे व्यक्ति का स्वास्थ्य खराब ही रहता है। जबकि द्वीप चिन्ह जीवन रेखा के उद्गम स्थान के साथ ही दो, तीन या चार लगातार मिले हों, तो उस मनुष्य का जन्म सन्दिग्धपूर्ण रहस्यमय होता है। यह स्पष्ट रूप से दिखाई देने वाला द्वीप चिन्ह उस मनुष्य को जार योग से उत्पन्न होने के लिए बाध्य करता है। यह बात कहते समय किसी भी प्रेक्षक या पामिस्ट को बड़ी ही सावधानी से कार्य करना चाहिए ।

स्पष्ट रूप से न पूछ कर समयानुसार बड़ी ही होशियारी से यह बात पुष्ट करनी चाहिए ताकि कलह उत्पन्न न हो इसके अतिरिक्त यदि यह द्वीप जीवन रेखा के किसी और स्थान पर उपस्थित हो तो विशेष समय पर किसी विशेष बीमारी का होना प्रदर्शित करता है। यदि द्वीप चिन्ह के पास जीवन रेखा टूटकर अलग हो गई हो तो उस समय किसी खास बीमारी के पश्चात् उसकी मृत्यु प्रदर्शित करता है।

यदि जीवन रेखा पर द्वीप हो और स्वास्थ्य रेखा लहरदार, जंजीरदार, श्रृंखलित तथा किसी और प्रकार से दूषित हो तो उस मनुष्य को अजीर्ण, कुपच, मन्दाग्नि, जिगर तिल्ली में खराबी आदि रोग उत्पन्न कर उसके स्वास्थ्य को खराब करता है। यदि जीवन रेखा के ऊपरी भाग । ये पोस्ट नितिन कुमार पामिस्ट द्वारा लिखी गयी है जो की भारत के प्रसिद्ध हस्तरेखा शास्त्री है और आप उनके और भी लेख उनके ब्लॉग इंडियन पल्मिस्ट्री ब्लॉग पर पढ़ सकते है। में द्वीप का चिन्ह अंकित हो तो मनुष्य के फेफड़ों में सूजन, नजला, पसली आदि में घड़कन और निचले भाग में मन्दाग्नि गुर्दे में दर्द, मूत्राशय में पीड़ा के साथ-साथ गुदा रोग भी रहता है। जीवन रेखा के अन्त में स्पष्ट द्वीप चिन्ह किसी लम्बी बीमारी के पश्चात् मृत्यु की सूचना देता है।

द्वीप शीष रेखा पर:–यदि किसी के हाथ में मस्तक या शीष रेखा पर द्वीप का चिन्ह स्पष्ट रूप से दिखाई देता हो तो उस मनुष्य के वंशपरम्परागत होने वाले मस्तिष्क सम्बन्धी रोग की ओर संकेत करता है । उसका मस्तिष्क कमजोर होने के साथ-साथ, सिरदर्द, आधाशीशी, जो कि सुयोदय के साथ बङ्गता और सूर्यास्त पर स्वयं ही घट जाता है, जा, जुकाम आदि रोगों के साथ घटता बढ़ता रहता है।

यदि द्वीप चिन्ह अनामिका उगली के नीचे मस्तक रेखा पर विद्यमान् हो और साथ हो मस्तक रेखा भी सूर्य क्षेत्र के नीचे टूट रही हो तो किसी विशेष दुर्घटना वश सिर पर चोट आने का प्रत्यक्ष लक्षण दिखाई देता है। यदि जीवन रेखा पूर्ण न हो तो मुत्यु भी हो सकती है । मस्तक रेखा के आरम्भ में द्वीप चिन्ह होने से किसी के बचपन में और मध्य में होने में, उसके यौवन में और अन्त में उसको अन्तिमावस्था में मस्तिष्क सम्बन्धी रोग, उन्माद या पागलपन आदि रोग उत्पन्न करता है । 

प्रजापति हर्शल क्षेत्र पर द्वीप का चिन्ह किसी की हत्या कराता है। शनि क्षेत्र के नीचे मस्तक रेखा पर द्वीप चिन्ह बात, शल. रोग पैत्रिक सम्पत्ति के रूप में देता है। ऐसा मनुष्य ग्गा बहरा हो सकता है। यदि शीष रेखा पर कई द्वीप चिन्ह हों तो मनुष्य का सदैव सिर चकराता रहता है । और यदि भाग्य वश उस मनुष्य के नाखन भी चौड़े हुए तो यह रोग और भी गुरुतर हो जाता है। ऐसे 'मनष्य को कभी-कभी आँतों का राजयक्षमा या टी. बी. रोग भी उत्पन्न हो जाता है।

द्वीप हृदय रेखा परः-हृदय रेखा का द्वीप चिन्ह किसी भी मनुष्य के पैत्रिक हृदय कमजोरियों की ओर आकर्षित करता है, और उसको इन्द्रिय सुख से पृथक रखता है, जिसका प्रभाव उसके हृदय पर बहुत बुरा पड़ता है। यदि यह द्वीप चिन्ह हृदय रेखा पर शनि क्षेत्र के नीचे पड़ा हो तो किसी का कलुषित प्रेम उसको उन्नति में बाधक रहता है, और वह अपने प्रेमपात्र से अवश्य ही धोखा खाता है और उसे दिल हिलने की बीमारी या हदय स्पन्दन बढ़ जाने का रोग होता है, और यदि यह द्वीप चिन्ह रवि क्षेत्र के नीचे हृदय रेखा पर हो तो उस मनुष्य का हृदय तो कमजोर होता ही है, इसके साथ-साथ नेत्र पीड़ा तथा पित्त रोग अवश्य ही लगा रहता है। ये पोस्ट नितिन कुमार पामिस्ट द्वारा इंडियन पामिस्ट्री ब्लॉग में प्रकाशित की गयी है। उसकी आँखें कमजोर होती हैं । इसके अतिरिक्त यदि दो तीन द्वीप चिन्ह हृदय रेखा पर विद्यमान् हों तो ऐसा मनुष्य प्रेम के सम्बन्ध में अधीर, उतावला तथा निराश प्रेमी होता है । 

उसको शीघ्रपतन, प्रमेह, मधुमेह आदि बहुत से वीर्य विकार के अनेक रोग उत्पन्न हो जाते हैं । ऐसी दशा में यदि भाग्य रेखा पर भी द्वीप चिन्ह हो तो ऐसा मनुष्य विषयासक्त होने के साथ-साथ अपने प्रेम-पात्र को धोखा देकर उसका प्रेम पाने की इच्छा रखता है। जोकि न तो पूर्ण होती है और न समाप्त ही होती है। यदि यही द्वीप चिन्ह बुध क्षेत्र के नीचे हृदय रेखा पर हो तो उस मनुष्य का प्रेम घनादि के लालच में पड़कर छूट जाता है या स्त्री-पुरूष का क्रय विक्रय होकर कठिनता से विवाह सम्बन्ध स्थापित होता है।

दीप रवि रेखा परः—जिस मनुष्य के दाहिने हाथ की सूर्य रेखा पर द्वीप का चिन्ह स्पष्ट रूप से दिखाई देता हो तो वह मनुष्य, अपवाद । द्वारा किसी बड़ी अपकीति तथा बदनामी को प्राप्त होता है । व्यापार में हानि तथा नौकरी में कलंक लगता है। ऐसा मनुष्य धन-हानिमान-हानि को प्राप्त होकर दुश्चरित्रता को प्राप्त होता है । यदि यह द्वीप चिन्ह रवि रेखा के आरम्भ में ही स्पष्ट रूप से दिखाई देता हो तो वह मनुष्य या स्त्री पाप या अधर्म द्वारा किये गए प्रेमी के सम्बन्ध से लाभ उठाते हैं। उनकी उन्नति जार पुत्र अथवा हरामी बच्चे की उत्पत्ति होने के पश्चात् होती है।

यदि भाग्य और रवि दोनों रेखाएँ एक द्वीप से ऊपर को बढ़ रही हों तो उस मनुष्य की मृत्यु इच्छानुसार स्पष्ट देश में प्रसन्न मुख होती है। यदि जीवन रेखा और इस सूर्य रेखा पर द्वीप का चिन्ह एक अवस्था में वर्ष गणना के अनुसार पड़ता हो तो उस मनुष्य की मृत्यु एक लम्बे नेत्र रोग के पश्चात् अथवा किसी बड़ी बीमारी के पश्चात् बड़ी तकलीफ पाकर होती है । ये पोस्ट नितिन कुमार पामिस्ट द्वारा इंडियन पामिस्ट्री ब्लॉग में प्रकाशित की गयी है। रवि रेखा पर स्पष्ट तथा लम्बा द्वीप चिन्ह पाहे जिस स्थान पर पड़े मनुष्य को धन, यश, कीर्ति सम्बन्धी तकलीफ देता है । इसमें सन्देह करने को स्थान नहीं है कि यदि द्वीप' चिन्ह जीवन, मस्तक तथा सूर्य रेखाओं को सम्मिलित रूप से एक, दो, तीन स्थानों पर स्पर्श करता हो तो उस मनुष्य को उस आयु में अपने सभीपि इष्ट मित्र, भाई बन्धु, माता-पिता आदि में से किसी न किसी की मृत्यु का सम्वाद अवश्य ही सुनने को मिलता है। इन तीनों रेखाओं पर होप चिन्ह का होना अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण अशुभ लक्षण है।

द्वीप भाग्य रेखा परः–यदि किसी मनुष्य की भाग्य रेखा पर' द्वीप चिन्ह लम्बा, साफ, स्पष्ट रूप से दिखाई देता हो तो उस मनुष्य का धनजन सम्बन्धी भारी नुकसान होता है। ऐसा मनुष्य सांसारिक व्यवहार कुशल न होने के कारण किसी भी भौतिक पदार्थ के पाने में सफल नहीं होता। वह ज्यों-ज्यों भाग्य को बनाने की चिन्ता करता है, भाग्योन्नति के लिए अग्रसर होता है, त्यों-त्यों उलझनों में फंसकर 'निरन्तर हानि ही उठाता है और सदैव अपने ही आदमियों तथा सम्बन्धियों द्वारा ही धोखा खाता है ।

भाग्य रेखा के प्रारम्भ में द्वीप 'चिन्ह बाल्यावस्था में, मध्य भाग का द्वीप चिन्ह यौवन में तथा अन्तिम भाग का द्वीप चिन्ह वृद्धावस्था में उसके दुर्भाग्य को प्रदर्शित कर दुदिन दिखलाता है और धन जन से हीन कर दुर्गति करवाता है। यदि 'यह द्वीप’ चिन्ह आय और भाग्य रेखा के मिलने पर हो तो निश्चय ही मृत्यु करवाता है, और यदि शीष और भाग्य रेखा के मिलन पर हो तो मस्तिष्क के साथ साथ धन सम्बन्धी दुर्घटना करता है। यह चिन्ह यदि हृदय भाग्य रेखा के मिलन पर हो तो हृदय रोग के साथ-साथ दुर्भाग्यपूर्ण प्रेम सम्बन्ध कराता है जिसमें घन-जन दोनों की ही हानि होती हैं। 

यदि चन्द्र प्रभाविक रेखा के सम्बन्ध से भाग्य रेखा पर द्वीप का चिन्ह बनता हो तो उस मनुष्य की अपनी स्त्री तथा किसी दूसरी स्त्री के सम्बन्ध में आने से कोई भारी धन सम्बन्धी दुर्घटना होती । मनुष्य को अपने ही प्रियजन तथा स्वजन स्त्री समुदाय से अ कष्ट उठाना पड़ता है जोकि उसकी अपनी ही मूर्खता के होता है। ऐसा मनुष्य जन साधारण की आखों में गिरकर प जाता है ।

द्वीप स्वास्थ्य रेखा परः-स्वास्थ्य रेखा पर द्वीप का चिन्ह होना छि सख्त बीमारी का द्योतक है । जिस मनुष्य के हाथ में यह चिन्ह हो । साथ ही उसके नाखून चन्द्र रहित लम्बे हों तो निश्चय ही उस मनुष्य को सीना कमजोर तथा फेफड़े दुर्बल होते हैं जिससे उसको वात रोग, निमो निया, हब्बाडब्बा तथा पसिलियाँ चलते का रोग होता है। नजला जुकाम आदि बहुत पीड़ित करते हैं। इस द्वीप चिन्ह के साथ-साथ यदि उस मनुष्य के नाखून चौड़ाई में लम्बाई से अधिक हों तो उस मनुष्य को गले सम्बन्धी रोग जैसे टोन्सिल बढ़ना, काक बढ़ जाना, कण्ठमालादि रोग उत्पन्न हो जाना, वायु रोगों के साथ-साथ नजला जुकाम लगा रहना आदि रोग हो जाते हैं।

यदि स्वास्थ्य रेखा पर द्वीप' चिन्ह आयु रेखा के स्पर्श के समय बने तो सख्त बीमारी अथवा मृत्यु सूचना देता है । मस्तक रेखा के साथ द्वीप चिन्ह बने तो उन्माद, सिर दर्द, सिर में रसौली आदि होते हैं । हृदय रेखा पर इसके सम्बन्ध से द्वीप’ चिन्ह बने तो, दिल धड़कना, रक्त विकार रक्तचाप, आदि रोग होते हैं। इसका सूर्य रेखा के साथ द्वीप चिन्ह बने तो, अपकीति और कार्य में विफलता प्रदान करता है। भाग्य रेखा के साथ पूर्वावत प्रभाव ही रहता है । प्रभाविक रेखा के साथ स्वास्थ्य रेखा का द्वीप चिन्ह होना मनुष्य में ईर्षा को उढ़ाता तथा उसके प्रभाव को सर्व साधारण में क्षीण करता है। केतु क्षेत्र पर इसका बड़ा द्वीप मनुष्य को मूर्छ, मृगी, बेहोशी आदि रोगों के साथ-साथ चलतेचलते सोने वाला रोग उत्पन्न कर देता है।

द्वीप विवाह रेखा पर :-विवाह रेखा पर द्वीप' चिन्ह का स्पष्ट रूप से दिखाई देना किसी भी विवाह सम्बन्ध में दो सहयोगी मित्रो का आपस में द्वन्द युद्ध प्रदर्शित करता है। यदि यह चिन्ह स्त्री के हाथ में हो तो पुरुष की और पुरुष हाथ में स्त्री को मृत्यु सूचित करता है।  विवाह रेखा द्वीप से कोई रेखा आगे बढ़कर हृदय रेखा को स्पर्श करती हो अथवा विवाह रेखा द्वीप को कोई शाख मस्तक रेखा को स्पर्श हो और बढ़कर सूर्य रेखा को काटती हो तो ऐसा विवाह से अपयश लोकाचार तथा बदनामी के कारण नहीं होता। यदि विवाह रेखा के आरम्भ में द्वीप’ चिन्ह हो और शेष रेखा निर्दोष हो तो विवाह बड़ी ही प्रारम्भिक आपत्तियों के बाद हो जाता है।

यदि द्वीप चिन्ह विवाह रेखा के मध्य में हो तो विवाह के पश्चात् मनुष्य पर विपत्तियों आया करती हैं और अन्त में होने पर उस विवाह का अन्त खराब होता है और वह मनुष्य अपने अन्तिम समय में दुर्दिन देखता है। यदि आदि मध्य-अवसान तीनों जगह विवाह रेखा पर द्वीप हो तो विवाह नहीं होता । यदि सन्तान रेखाओं पर द्वीप चिन्ह हो तो सन्तान ही नहीं होती और यदि हो गई तो बच्चों की दशा अत्यन्त शोचनीय तथा नाजुक होती है, जिनकी मृत्यु अनिवार्य है।

द्वीप मंगल रेखा पर :-मंगल रेखा पर द्वीप का चिन्ह एक अशुभ लक्षण है जोकि मनुष्य के सभी गुणों को अवगुणों में बदल देता है। उसकी शारीरिक शक्ति क्षीण तथा हृदय कमजोर हो जाती है। ऐसा मनुष्य क्रियाहीन होकर परिश्रम से डरने लगता है। उसकी बुद्धि मलिन तथा दूषित हो जाती है। ऐसा मनुष्य किसी आवेशपूर्ण लड़ाई झगड़े में उत्तेजना पाकर मृत्यु को प्राप्त होता है।

द्वीप चन्द्र रेखा पर :--चन्द्र रेखा पर द्वीप का चिन्ह मनुष्य की मानसिक शक्ति को क्षीण करके जलोदर रोग से पीड़ित करता है। ऐसा मनुष्य पानी से बहुत डरता है। स्नान नहीं करता, नजले जुकाम से पीड़ित रहता है। जिसकी मृत्यु अधिकतर जलचर या पानी द्वारा हो होती है।

द्वीप प्रभाविक रेखा पर - जिस मनुष्य के हाथ में अभाविक रेखा पर द्वीप का चिन्ह होता है उसका सर्व साधारण के ऊपर से भाव ३३ जाता है। उसका विश्वास कोई नहीं करता। इसलिये वह अपना पवन अपनी ही आँखों से देखता है। समाज में उसका कोई आदर नहीं करता। इसमें उसका कोई दोष नहीं होता कि इस दौर के प्रभाव से वह मनुष्य कुछ निन्द्य कर्म कर बैठता है और अपनो कति प्रतिभा खोकर अपयश तथा बदनामी मोल ले लेता है। ।

द्वीप यात्रा रेखा पर  - यात्री रेखाओं पर दीप चिन्ह यात्रा में खतरा पैदा करता है। स्थल यात्रा रेखा पर होप चिन्ह, सोहर माहौ, ऐन, जैन, बस, बाइक आदि दुर्घटना से मत्य सूचना देता है और जल यात्रा रेखा पर, तैरने, नाव के इजने तथा जलपोत को दुर्भमा से भुत्यु सुचित करता है।

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नितिन कुमार पामिस्ट 

Kisi Ko Apne Vash Me Karna | Vashikaran Totke Aur Upay

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कुछ विशिष्ट टोटके - गंडे तावीज और टोने-टोटके

उच्चाटन का प्रयोग बताने से पहले इसका अर्थ स्पष्ट कर देना - रहेगा। सामान्य भाषा में जिसे हम ‘जी उचट जाना' कहते हैं, वही उच्च इसके अनेक प्रकार होते हैं। किसी भी काम में जी न लगना, मन-मस्ति अस्त-व्यस्त होना, पागलों की तरह का आचरण करना।

• पेड़ पर से कौए के घोंसले को लाकर जला लें। इस राख को जिसके सिर डाला जाएगा उसका उच्चाटन हो जाएगा।

• थूहर के कांटों का चूर्ण, वानर की टट्टी और कलिहारी की जड़ का चूर्ण बनाकर जिसके सिर पर डाला जाएगा वह वश में हो जाएगा। गोरोचन और ताड़ के बीजों को किसी भी वशीकरण मंत्र से अभिमंत्रित करके जिसके भी सिर पर डाला जाएगा वह वश में हो जाएगा। • महुए का बांदा अगर विशाखा नक्षत्र में प्राप्त कर लिया जाए तो यह शक्ति में वृद्धि करता है।

• अगर कोई व्यक्ति अपनी दाईं भुजा पर कनेर का बांदा अनुराधा नक्षत्र में अभिमंत्रित कर बांध ले तो उसके विरोधी शांत हो जाते हैं। इसी नक्षत्र में रोहित वृक्ष का बांदा मुख में धारण करने से वह ओझल हो जाता है। अगर थूहर का बांदा धारण किया जाए तो साधक को वाकसिद्धि की प्राप्ति होती है। अगर इसी नक्षत्र में कपित्थ वृक्ष का बांदा मुंह में रखा जाए तो शस्त्र-स्तंभन हो जाता है।

• बिल्व के वृक्ष का बांदा अश्विनी नक्षत्र से पूर्व निमंत्रण के द्वारा लाकर बांह पर बांधा जाए तो विद्या भी सिद्ध हो जाती है। • कपाल का बांदा भरणी नक्षत्र में धारण करने से साधक को सिद्धि प्राप्त हो जाती है।

• नीलोफर, भौरे के पंख, पोखरमूल, तगर, श्वेत वोंटली, इनका चूर्ण डालने पर वशीकरण होता है।

• स्त्री अगर पति को वशीभूत करना चाहे तो अपने रज को शुद्ध गोरोचन में। मिलाकर मस्तक पर तिलक करें। उल्लू का सिर, मैनसिल और हरताल, इन तीनों को आपस में पीसकर एक गुटिका तैयार कर लें। इसे कुछ दिनों तक पास में रखने से रात्रि में भी आंख देखने में समर्थ हो जाती हैं।

• उल्लू के पांव की हड्डी को शत्रु के घर में गाड़ देने से उसका सर्वनाश हो जाएगा। उल्लू की पीठ के के बालों को उखाड़कर अभिषिक्त कर, उन्हें चांदी के तावीज़ में रखकर भुजा पर बांध लेने से शत्रु पर विजय प्राप्त होती है।

• स्वाभाविक रूप से अर्थात जिसे मारा न जाए, उसका अरिथर्वल एक रात्मक है। इसे बालक के गले में पहनाने से उसे टोने-टोटके की पीड़ा कभी होती। श्वेत ओंगा पौधे की जड़ का माथे पर तिलक कर लेने से किसी का भी सम्मोहन हो, समाप्त हो जाता है।

• विष्णुकांता, भंगरा, गोखरू और गोरोचन को पीसकर गोली बना लें। इस गोली को घिसकर तिलक करना भी वशीकरण का प्रयोग है। पुरुष ग्त्री के वशीकरण के लिए लाजवंती, मुलेहली और कमलगट्टे को पीसकर अपने वीर्य के साथ मिलाकर तिलक करें। रति के अंत में पुरुष अपने बाएं हाथ से अपना वीर्य लेकर स्त्री के बाएं पगतलुए में लगा दे तो वह रत्री दूसरे को नहीं चाहती। 

• गोरख मुण्डी गोखरू और बिनौला को गाय के मूत्र में मिलाकर सुखाकर भूत-प्रेतग्रस्त रोगी को इसकी धूनी देने से भूत-प्रेतग्रस्त रोगी के भूत भाग जाते• लाजवंती की जड़ छल्ला बनाकर कमर में बांधने से आंत उतरने का रोग ठीक | हो जाता है। इसके लिए शनिवार का दिन उपयुक्त है। कलिहारी की जड़, ओंगा की जड़ और इंद्रायण की जड़, इन तीनों का चूर्ण जननेंद्रिय में रखने से मासिक धर्म खुल जाता है। 

• मस्तिष्क की सक्रियता बढ़ाने के लिए लाल सुलेमानी हकीक धारण करना उपयुक्त रहता है। 

• आंवले की जड़ आश्लेषा नक्षत्र में दाईं भुजा पर धारण करने से व्यक्ति को कोई भय नहीं रहता। 

• हीरा अथवा फिरोजा पहनने वाले को विषैले जंतुओं का कोई भय नहीं रहता। आश्लेषा नक्षत्र में धामी की जड़ हाथ में धारण करने से व्यक्ति को सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिल जाती है। 

• बांस की जड़ जलाकर उसे कान पर धारण करने से भय मिट जाता है। निर्गुण्डी की जड़ अथवा मोर-पंख घर में रख देने से सर्प कभी भी घर में प्रवेश नहीं करता। लहसुन की गांठ का भी यही उपयोग है। रवि-पुष्य योग में प्राप्त सफेद चादर की जड़ लाकर दाईं भुजा पर बांधने से वन्य पशुओं का भय नहीं रहता, साथ ही अग्नि-भय से भी छुटकारा मिल जाता है। केवड़े की जड़ कान पर धारण करने से शत्रु भय मिट जाता है।


• कन्या का विवाह गुरु ग्रह की निर्बलता के कारण विलम्ब से होता है। अगर लड़की की कुंडली में गुरु मकर राशि का हो अथवा शनि के साथ हो पापग्रहों की दृष्टि हो तो गुरु निर्बल कहे जाएंगे। ऐसी स्थिति में बड़े का के साथ समय बीतने पर विवाह सम्पन्न होता है, अतः लड़की के पिता चाहिए कि लड़की को 5 रत्ती का पुखराज या 9 रत्ती का सुनहरा विधान (चांदी 62 प्रतिशत, तांबा 26 प्रतिशत और सोना 12 प्रतिशत) में जडवाक बाएं हाथ की प्रथम उंगली में गुरुवार को उत्तर की तरफ मुख करके पहना दें। साथ ही 7 रत्ती का फिरोजा चांदी में मढ़वाकर शुक्रवार को लड़की के बाएं हाथ की कनिष्ठिका उंगली में दक्षिण की तरफ मुख करके पहना दें। विवाह बिना कष्ट के सम्पन्न हो जाएगा। अगर कन्या की सप्तमेश निर्बल हो तो उस ग्रह की अंगूठी कन्या को तुरंत पहना देनी चाहिए।

• अगर बिना कुंडली मिलान के विवाह हो रहा है वह प्रेम विवाह है या कोई अन्य प्रकार की विवशता है, तब आप निम्न उपाय करें। 

• कन्या को फेरों से पहले पीले रंग का डोरा पांच गांटें (पांच सौगंध मानकर) लगाकर हाथ में बांध दें। यह डोरा चूड़े (कंगना) को स्पर्श करता रहे। विदा के समय गंगाजल में थोड़ी शुद्ध हल्दी डालकर कन्या के सिर से उतारकर उसके आगे फेंक दें और पीला डोरा खोल लें। यह डोरा माता पार्वती के चरणों में रखवा दें। जीवन सुखी रहेगा। 

• कृतिका नक्षत्र में लोहे की अंगूठी पहनने से भूत-प्रेत, जादू-टोने का भय नहीं रहता। यह अंगूठी रक्षात्मक होती है। रवि-पुष्य योग में काले धतूरे की जड़ को धारण करने से भय दूर हो जाता है। रवि-पुष्य योग में ही गुरुच की माला बनाकर धारण करने से कभी सर्प-दंश का भय नहीं रहता।

अगर किसी को मिर्गी आदि का कोई रोग हो तो गधे के अगले दाएं पैर का नाखून लेकर अपनी उंगली में धारण करना चाहिए। 

• गोरखमुंडी के हरे पौधे के रस की मालिश करने से सारी पीड़ा मिट जाती है। सर्प द्वारा काटे गए व्यक्ति की नाक में अगर कलिका की जड़ का बारीक चूर्ण किसी नली की सहायता से पहुंचाया जाए तो व्यक्ति ठीक हो जाता है। 

• गधे का दांत अगर किसी के सिरहाने रख दिया जाए तो अनिद्रा रोग दूर हो जाता है। संभोगरत गधे की पूंछ के बाल प्राप्त करके, उन्हें अपनी जंघा में। बांधने वाला व्यक्ति शीघ्रपतन की व्याधि से मुक्त हो जाता है। 

• किसी भी प्रकार का ज्चर हो, श्वेत ओंगा की पत्तियों को पीसकर और गुड़ में मिलाकर खाने से वह दूर हो जाता है। 

• रांगे की अंगूठी पहनने से मोटापा कम होता है।

• गोरखमुंडी के पौधे को सुखाकर उसका चूर्ण बनाएं। प्रातः-सायं दूध के साथ उसका सेवन करने से बल की प्राप्ति होती है।

• चकोंडा के पौधे की जड़ हस्त नक्षत्र में लाकर दाईं भुजा पर धारण की जाए साधक अजेय होता है। रवि-पुष्य योग में चमेली की जड़ को तावीज (यंत्र) रखकर, भुजा पर बांध लिया जाए तो इसको धारण करने वाला शत्रओं को पराजित करने में समर्थ हो जाता है।

• देशी पान का पत्ता रविवार को श्मशान भूमि पर पीसकर ले आएं। गर्भवती स्त्री की नाभि पर लगा दें तो प्रसव बिना कष्ट होता है। 

• पत्नी पति से या पति पत्नी से नाराज हो गया हो तो खुबी का पुष्प शहद में मिलाकर खिलाने से (एक माशा के बराबर) पुनः मेल-मिलाप हो जाता है। 

• रुद्राक्ष के पांच दाने लाल डोरे में पहनने से रक्तचाप ठीक रहता है। नागफनी की जड़ को बालक के गले में बांधने से जिगर व तिल्ली के रोग समाप्त हो जाते हैं। 

• राई को आक के दूध से युक्त करके हवन करने से शत्रु अंधा हो जाता है। पलाश की समिधा में राई को घी से होमने से एक सप्ताह में ब्राह्मण को गुड़ राई को होम कर क्षत्रिय को, दही राई से वैश्य को और नमक राई को होम कर शूद्र को वश में कर सकता है। पानी भरे घड़े में राई के पत्ते डालकर इस जल को अभिमंत्रित करके जिस भी किसी व्यक्ति को स्नान कराया जाएगा उसकी दरिद्रता, रोग नष्ट हो जाते हैं। 

•  राई के फूल, चंदन, प्रियंगु, नागकेसर, मैनसिल, नागर, इन सब पदार्थों को चूर्ण करके अभिमंत्रित करके सिर पर डालने से वशीकरण होता है। । 

• लाल गुलाब के फूल को पीसकर सिरदर्द या किसी भी प्रकार का दर्द क्यों न हो, माथे पर लगाने से तुरंत आराम मिलता है। जले-कटे घावों पर भी इसका लेप तत्काल पीड़ा का हरण करता है। 

• राई को पीसकर उससे पुतली बनाकर पुरुष पर प्रयोग करना हो तो दाएं पैर | से और स्त्री पर प्रयोग करना हो तो बाएं पैर से उसमें छेद करते हुए हवन करना चाहिए। छेदन का क्रम इस प्रकार है—पहले पैर, फिर भुजा, फिर सिर, फिर दूसरी भुजा, फिर कबंध, फिर दूसरा पैर। यह हवन भी राई की लकड़ियों | में ही करना होता है। कड़वे तेल और नीम के पत्ते से मिली राई का हवन शत्रु का नाम लेकर करने से शत्रु ज्वरग्रस्त हो जाता है। इसी प्रकार राई और नमक का हवन करने से शत्रु के फोड़े हो जाते हैं। 

• गूलर की लकड़ी की चार अंगुल लम्बी कील बनाकर शत्रु के घर में गाड़ दें, उसका उच्चाटन हो जाएगा।
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Kisi Ko Apne Vash Me Karna | Vashikaran Totke Aur Upay

Putra Prapti Aur Santan Sukh Ke Chamatkari Upay

Putra Prapti Aur Santan Sukh Ke Chamatkari Upay


Putra Prapti Aur Santan Sukh Ke Chamatkari Upay

मां बाप बनकर संतान सुख प्राप्त करने की इच्छा हर दंपत्ति को होती है, संतान सुख की प्राप्ति ईश्वर का वरदान होता है, लेकिन आज भी ऐसे कई दंपत्ति है जो संतान सुख से वंचित हैं I वह डॉक्टर से इलाज कराते हैं फिर भी उन्हें संतान सुख प्राप्त नहीं होता है, यहां कुछ उपाय बताए गए हैं, जिन्हें डॉक्टर से इलाज कराने के साथ-साथ करने से संतान सुख की प्राप्ति होती है I यह उपाय पति पत्नी दोनों को मिल कर सच्चे मन से, विश्वास और श्रद्धा के साथ करने हैं-

१). पुराना गुड़ भूमि में दबाने से संतान सुख की प्राप्ति होती है। अगर संतान जन्म लेते ही जीवित नहीं रहती है या गर्भपात हो जाता है तो भी ये उपाय कारगर साबित होता है और दम्पति को संतान सुख मिलता है।

२ ). हर गुरुवार गुड़ का दान भिखारियों को करें और जिस दिन पुत्र हो जाय उस दिन मीठे की जगह नमकीन का दान करें.

३). अगर परिवार में संतान होते ही मर जाती हो तब गर्भवती हो जाने के दिन से ही उस स्त्री के बाजु पर चमकीला लाल धागा बांधा। बच्चे के जन्म के पश्चात इस धागे को बच्चे के बाजु पर बांध देना चाहिए और उसके पश्चात बच्चे की माता की बाह में चमकीला धागा बांधा जाय यह "रक्षक डोरा" कहलाता है। अपने भोजन में से कुछ भाग पहले अलग रख लेना चाहिए तथा भोजन के बाद गोमाता को खिला देना चाहिए। ऐसा करने से परिवार आगे बढ़ता है।

४). अगर शादी के कई सालों तक संतान नहीं हो रही है तो मदार की जड़ शुक्रवार को उखाड़ लें। उसे स्त्री की कमर में बांध दें।

५). स्त्री गेहूं के आटे की लोई बनाकर उसमें भीगी चने की दाल और थोड़ी सी हल्दी मिलाकर रोजाना गाय को खिलाएं। जल्द ही आपके आंगन में किलकारियां गूंजेगीं।

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