दाम्पत्य जीवन में दरार वास्तु उपाय


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दाम्पत्य जीवन में दरार के कारण और वास्तु उपाय

प्रत्येक व्यक्ति का यह स्वप्न होता है कि परिणय सूत्र के बंधन में बंधने के उपरान्त उसका जीवन हर्ष, उल्लास व सुखों से भरपूर हो, उसका एक सुन्दर सा घर हो, अपने बच्चों के साथ मिलकर आनन्दमय जीवन यापन करे। लेकिन सभी विवाहितों के साथ ऐसा नहीं होता । विवाहोपरान्त या घर परिवर्तन को पश्चात् पति-पत्नी के सम्बन्धों में दरारें धीरे धीरे उत्पन्न होने लगती हैं।
दाम्पत्य जीवन में दरार

बात-बात पर तू-तू में-मैं झगड़े, मनमुटाव एक-दूसरे में प्रेम होने के उपरान्त सभी पारस्परिक दूरियां बढ़ने लगती हैं। बाहरी रूप से तो पति-पत्नी एक ही छत के नीचे रहते हैं परन्तु फिर भी यह एक साथ नहीं होते हैं। शास्त्रों में पति को परमेश्वर तथा पत्नी को गृहलक्ष्मी अद्धांगिनी बताया गया है। लेकिन अर्थयुग में ऐसा न तो देखा जाता है और न ही पाया जाता है। पति-पत्नी के आपसी रिश्ते में कड़वाहट से तलाक तक के अवसर आते रहते हैं। ऐसा अनेक कारणों से हो सकता है, जिसमें हमारे कर्म और भाग्य दोनों ही सम्मिलित हैं।

परन्तु वास्तुदोष की इसमें अहम भूमिका होती है जिसे नजर अन्दाज न किया जाये तो समाधान अवश्य निकल सकता है।

वैवाहिक समस्याएं-
1. एक-दूसरे की अच्छाईयों से अधिक बुराईयां अथवा कमियों पर ध्यान देना |
2. वैवाहिक जीवन में किसी तीसरे व्यक्ति का प्रवेश ।
3. शारीरिक सम्बन्धों में सन्तुष्टि का न मिल पाना ।
4. विश्वास में कमी आना, अपने जीवन साथी पर सन्देह रखना तथा चिड़चिड़ापन रहना ।
5. पारस्परिक झगड़े से डिप्रेशन में आ जाना व क्रोध करना।
6. सम्बन्धों में मधुरता के स्थान पर अति कटुता का होना।
7. उदासीन व निष्क्रिय होना अथवा एक-दूसरे का ख्याल न रखना, लापरवाह रहना |
8. आपस में सहनशीलता का धीरे-धीरे समाप्त होना ।
9. कलह होना, मार-पीट होना, लड़ाई-झगड़ा करना और एक दूसरे को प्रताड़ित करना।

कारण -
1. बेडरूम में 2-3 अथवा अधिक औरतों वाली तस्वीर लगाना ।
2. शयनकक्ष में मन्दिर बनवाना ।
3 दिनचयाँ के सभी कार्य बेडरूम में ही करना तथा बेडरूम को ही अाफिस बना लेना |
4. शयनं कक्ष मे ही अध्ययनं कक्षं बना लेना | टी.वी. रूम बना कर उदासी भरे गीत संगीत सुनना।

उपरोक्त कारणों से ही दाम्पत्य जीवन दु:खद रहता है ।
वास्तु टिप्स-
1. बेड पर दो गददे बिछाना।
2. बेड के अन्दर जूते-चपल, बर्तन व किताबें रखना ।
3. सोते व बैठते समय सिर के। ऊपर बीम होना अथवा शयन कक्ष में दर्पण लगा होना ।
4. तड़क-भड़क वाले (कलर स्कीम) रंगों का अधिक प्रयोग करना |

निवारण—
1 फगस्वे का डबल हैपीनेस सिम्बल घर में अवश्य लगायें ।
2. कूल अर्थात् हल्के रंगों का प्रयोग करें।
3. शादी की सालगिरह और जन्म दिन इत्यादि मनाएं एवं एक-दूसरे के पसन्द के उपहारों का आदान प्रदान करें। भोजन एक साथ खाएं तथा खिलाएं इससे पारस्परिक प्रेम में वृद्धि होती है। 4. शादी की एलबम तथा अन्य तस्वीरे समय-समय पर देखते रहें। अपने फोटोग्राफ्स को उत्तर-पूर्व में लगाये ।
5. सोते समय सिर दक्षिण दिशा में रखें, यदि सम्भव हो तो दक्षिण दिशा में पैर करके न सोयें। 6. शयनं कक्ष दक्षिण–पशिचम, · दक्षिण और पश्चिम में ही बनायें।
7 शयन कक्ष में दर्पण न लगायें, यदि सम्भव न हो तो दर्पण को कपड़े से ढक दें।
8. बेडरूम में आंसू बहाने वाली, पेन्टिंग मत लगायें। इससे नीरसता बढ़ती है।
9. शयन कक्ष में जल से सम्बन्धित कोई चित्र लगायें । पर्वत का चित्र लगा सकते हैं।
10. शयन कक्ष के अन्दर, किताबें, सामान, खराब इलेक्ट्रानिक सामान दवाईयां इत्यादि न रखें।

" वास्तु—सम्मत अन्य उपाय—
1. घर का मुख्य द्वार किसी भी स्थिति में किसी दूसरे बड़े द्वार अथवा बिजली, टेलीफोन के खम्भे और सामूहिक कचरा पेटी के सामने नहीं होना चाहिए ।
2. मुख्य द्वार पर गणेश जी अथवा अपने किसी ईष्ट देव की 6 इंच की मूर्ति लगाना शुभ रहता है।
3. घर का उत्तरी-पूर्वी कोना (ईशान कोण) वास्तु पुरूष के मुख का स्थान होता है | वह सदेव स्वच्छ रहना चाहिए ।
4 घर की ऊंचाई ईशान कोण से नैऋत्य कोण में अधिक होनी चाहिए ।
5. घर का पानी सदैव उत्तर-पूर्व या पूर्व-उत्तर की ओर ही बहना चाहिए।
6. घर का ईशान कोण ईश्वर का स्थान माना जाता है। यहां मन्दिर या पूजा स्थान बनना चाहिए। इस स्थान में शौचालय भूलकर भी नहीं बनायें अन्यथा अनर्थ की आशंका सदैव रहेगी। इस स्थान को सदैव स्वच्छ रखें।
7. घर का प्रवेश द्वार उत्तरी-पूर्व, उत्तर अथवा पूर्व में होना ही श्रेष्ठ होता है। घर के बिलकुल मध्य में मुख्य द्वार कभी नहीं होना चाहिए। यह कुल नाश का प्रतीक होता है।
8. घर का मुख्य द्धार इस प्रकार निर्मित कराये कि उस पर किसी की छाया न पड़े।

उपरोक्त उपाय अपनाने से घर में वास्तुदोष से बचाव रहता हैं जिससे जीवन खुशहाल रहता है और निरन्तर सफलता भी मिलती है।

नितिन कुमार पामिस्ट


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