Ungliyo Ki Lambai Ka Fal - Hastrekha
Vibhinn Ungliyo Ki Lambai Ka Phal:-
1. Tarjani (Index Finger):- Swami Brishpati hai-
(1) Lambi - Naitritva aur Shasan ki abhilasha.
(2) Bahut Lambi - Tanashahi, nridayi, ahamwadi
(3) Chotti - Jimmedari se bachna, heenbhavna ka shikaar
(4) Tedi - Swabhimaan ki kami (Nitin Kumar Palmist)
2. Madhyama (Middle Finger):- Swami Shani hai-
(1) Lambi - Satark, Durdharshi. (Nitin Kumar Palmist)
(2) Bahut Lambi - Nirashawadi, dukhi, vivah mein vilambh, Aatam-hatya ki vichardhaar
(3) Chotti - Samay ki barbaadi karna, utsahheen hona (Nitin Kumar Palmist)
(4) Tedi - Mansik asantulan, avsaad
(1) Lambi - Kala (art) aur shahitya mein roochi.
(2) Bahut Lambi - Juaari, lottery, satta mein paisa lagane wala vykti.
(3) Chotti - Kala se dhan prapt karne ki ikchaa
(4) Tedi - Dusaro ki mahnet (kala) ko apni batane wala, banawati insaan
4. Kanishatha (Little Finger):- Swami Budh hai-
(1) Lambi - Bahumukhi partibha (multi-talented), pragati.
(2) Bahut Lambi - Shilpkaari ki prapati.
(3) Chotti - Jaldbaaz
(4) Tedi - Thag, Jhoot bolne wala, farebi
Yadi Kanishata ungli Anamika ungli ke teesare por (phalange) ke madhya tak pahooch jaay to vykti ko kabhi bhi dhan ki kami nahi hoti hai. (Nitin Kumar Palmist)
Yadi Budh parvat accha hai aur pehla por lamba hai to vykti ko kanoon ke kshetra (field) mein safalta milti hai aur doosara por bada hai to chikitsa ke kshetra mein safalta milti hai aur yadi teesara por lamba hai to vykti ko vypaar ke kshetra mein safalta milti hai.
Ungliyo Ke Beech Mein Khaali Jagah Ka Fal:-
Ungliyo ko aapas mein sata kar aankho ke saamne rakhkar dekhne se unke madhya kuch kuch khaali jagah dikhai deti hai.
Yadi khaali jagah hai to vykti kharchila hoga aur uske pass dhan nahi judega jabki aapas mein sati hone pr vykti kanjoos parvati ka hota hai aur dhan jodne mein mahir hota hai.
(1) Tarjani aur Madhyama Ke beech doori - Vykti swatantra vicharo ka hota hai aur ahamwaadi hota hai. (Nitin Kumar Palmist)
(2) Madhyama aur Anamika ke beech doori - Doordharshita ki kami.
(3) Anamika aur Kanshitha ke beech doori - Acchi vyaparik yogyata aur swatantra vichardhara. (Nitin Kumar Palmist)
Charo ungliyo ke beech jagah ho to vykti paramparao ko todne wala, swatantra aur khule vichar wala aur bhavishya ki chinta nahi karne wala hota hai jabki yadi sabhi ungliya chipki hui ho to theek iska ulta hota hai.
1. अंगूठा, हथेली पर स्थित तर्जनी के साथ मिलकर समकोण बनाता है, या
2. अंगूठा, हथेली पर स्थित तर्जनी के साथ मिलकर अधिक कोण बनाता है, या
3. अंगूठा, हथेली पर स्थित तर्जनी के साथ मिलकर न्यूनकोण बनाता है।
उपरोक्त तीनों तरह के कोणों के सिवा अन्य कोण की संभावना ही नही है। इन तीनों कोणों के आधार पर जो अंगूठे एवं तर्जनी के संबंध बनते हैं, ज्योतिष या सामुद्रिक शास्त्र के आधार पर ज्ञात फलाफल एक-दूसरे से भिन्न होते हैं :
1. अंगूठे एवं तर्जनी के बीच समकोण का फलाफल : जो अंगूठे तर्जनी से मिलकर समकोण बनाते हैं वे देखने में सुंदर, सुदृढ़ जान पड़ते हैं। वे पीछे की ओर झुके नहीं होते।
यही ऐसे अंगूठे की पहचान है। ऐसे जातक जिनके अंगूठे ऐसे समकोण बनाते हैं, वे अपने किए परिश्रम पर अधिक भरोसा करते हैं, इनमें कार्यक्षमता अधिक होती है। करने से पहले किसी कार्य या योजना के बारे में ज्यादा बात करना या बात बनाना वे पसंद नहीं करते।
वे तुरंत आने-जानेवाले गुस्से के शिकार होते हैं। न बिगड़ते देर न गले मिलते। क्रोध में भी अहित या अनिष्ट नहीं कर बैठते हैं बल्कि क्रोधावस्था में क्षोभ से भरे गुस्से में मौन हो जाते हैं।
हाँ, कभीकभी इन्हें अपनी हठवादिता का शिकार होकर परेशानी उठानी पड़ती है। प्रतिशोध की भावना भी थोड़ी ज्यादा होती है इनके स्वभाव में।
वे वर्षों बाद तक भी प्रतिशोध लेने की भावना में डूबे रहते हैं। वे टूटना जानते हैं पर जीते जी झुकने को कभी तैयार नहीं होते। जो मन में ठान लेते हैं उसे पूरा करके ही छोड़ते हैं।
2. अंगूठा एवं तर्जनी के बीच अधिक कोण का फलाफल : जो अंगूठा तर्जनी से मिलकर अधिक कोण बनाते हैं वे देखने में सुंदर, लंबाई लिए कुछ पतले होते हैं।
कुछ विद्वान ऐसे अंगूठे को सात्विक अंगूठे की संज्ञा देते हैं। ऐसे अंगूठे वाले जातक सुशील, कलाकार, संगीत में रुचि रखनेवाले एवं रचनात्मक कार्यों को करनेवाले होते हैं।
ऐसे जातक ने अपने बालपन के दिन भले संघर्षपूर्ण गुजारे हों लेकिन बाद में अपने परिश्रम के सहारे सबकुछ अनुकूल बना लेते हैं। इनके जीवन में सफलता का आधार इनकी इच्छाशक्ति (Will Power) होती है। ऐसे कोण बनानेवाले अंगूठे की लंबाई यदि बहुत अधिक हो तो शुभ फलदायी नहीं होते।
यदि अंगूठे का सिरा तर्जनी के मध्य खण्ड के बीच से भी अधिक आगे तक बढ़ा हो तो जातक मूर्ख होते हैं। इनका जीवन असफल होता है। अंगूठे की लंबाई समुचित होने पर जातक बुद्धिमान, चालाक और कलाओं के प्रेमी होते हैं।
स्वभाव से समाजसेवी होते हैं। कुछ परिश्रम से ही सही पर ये सफल जीवन व्यतीत करते हैं। नितिन कुमार पामिस्ट
3. अंगूठा एवं तर्जनी के बीच बने न्यूनकोण का फलाफल इस तरह से न्यूनकोण बनानेवाले अंगूठे की लंबाई अपेक्षाकृत कम होती है।
देखने में सुंदर इसे नहीं कहा जा सकता। ऐसे अंगूठा वाले जातक आलस्य एवं निराशावाद के शिकार होते हैं।
यात्रा आदि इनकी रुचि के विषय नही होते हैं। ऐसे व्यक्ति अनेक व्यसनों के शिकार होते हैं, परिणामत: आय से अधिक व्यय होने पर अर्थ की दृष्टि से तंगी में रहते हैं।
पैसे हाथ में आते ही शाहखर्च बन जाते हैं। अपने से निम्न जाति की स्त्रियों के प्रति इनका आकर्षण एवं संपर्क होता है।
अतएव भोगी के रूप में काम क्षेत्र में इनकी बदनामी भी अवश्य होती है। वैसे ये धार्मिक स्वभाव के तो नहीं होते पर भूतप्रेत जैसे चमत्कार दिखलानेवाली आत्मा, प्रेतात्मा या देवी-देवता के प्रति कुछ झुकाव होता है।
नितिन कुमार पामिस्ट



