हस्तरेखा शास्त्र में हथेली पर बना क्रॉस चिन्ह एक महत्वपूर्ण चिन्ह माना जाता है। पारंपरिक हस्तरेखा के अनुसार क्रॉस चिन्ह परेशानी, बाधा, खतरा, हानि और जीवन में आने वाली कठिन परिस्थितियों का संकेत दे सकता है। क्रॉस किस पर्वत, रेखा, उंगली या उसके किस भाग पर बना है, इसके अनुसार इसका फलित अर्थ अलग-अलग माना जाता है।
हस्तरेखा में क्रॉस चिन्ह क्या है?
हस्तरेखा में जब दो रेखाएँ एक-दूसरे को काटकर क्रॉस का आकार बनाती हैं, तो उसे क्रॉस चिन्ह कहा जाता है। पारंपरिक हस्तरेखा में क्रॉस को विशेष महत्व दिया जाता है, खासकर जब यह किसी प्रमुख रेखा को स्पर्श किए बिना स्वतंत्र रूप से बना हो।
क्रॉस का फलित अर्थ उसके स्थान के अनुसार बदलता है। इसलिए हथेली पर क्रॉस चिन्ह देखते समय उसके पर्वत, रेखा और आसपास के चिन्हों को भी साथ में देखना आवश्यक माना जाता है।
हस्तरेखा में पर्वतों पर क्रॉस चिन्ह का अर्थ
1. गुरु पर्वत पर क्रॉस
गुरु पर्वत पर क्रॉस पारंपरिक हस्तरेखा के अनुसार सिर में चोट या किसी कठिन परिस्थिति का संकेत माना जाता है। साथ ही इसे सुखी वैवाहिक जीवन से भी जोड़ा जाता है।
2. शनि पर्वत पर क्रॉस
शनि पर्वत पर क्रॉस को पारंपरिक हस्तरेखा में स्वास्थ्य संबंधी परेशानी, संतान संबंधी बाधा तथा गंभीर स्वभाव की ओर संकेत करने वाला माना जाता है।
3. सूर्य पर्वत पर क्रॉस
सूर्य पर्वत पर क्रॉस को सफलता में बाधा और असफलता के कारण मानसिक परेशानी या निराशा से जोड़ा जाता है।
4. बुध पर्वत पर क्रॉस
बुध पर्वत पर क्रॉस को पारंपरिक हस्तरेखा में छल, कपट, झूठ या गलत कार्यों की प्रवृत्ति से जोड़ा जाता है। यदि क्रॉस बुध की पहली पोर पर हो तो विवाह में देरी या अविवाहित रहने का संकेत माना जाता है, जबकि तीसरी पोर पर क्रॉस को षड्यंत्रकारी स्वभाव से जोड़ा जाता है।
5. निम्न मंगल पर्वत पर क्रॉस
यदि निम्न मंगल पर्वत पर क्रॉस हो और शनि पर्वत के नीचे मस्तक रेखा भी दोषपूर्ण हो, तो पारंपरिक हस्तरेखा में इसे स्वास्थ्य संबंधी परेशानी का संकेत माना जाता है। महिलाओं के हाथ में इसे दांतों और गर्भावस्था के समय स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से भी जोड़ा गया है।
6. गुरु पर्वत के नीचे निम्न मंगल पर क्रॉस
निम्न मंगल पर्वत पर, गुरु पर्वत के नीचे क्रॉस को पारंपरिक हस्तरेखा में हिंसक परिस्थिति से खतरे का संकेत माना जाता है।
7. चंद्र पर्वत पर क्रॉस
चंद्र पर्वत पर क्रॉस को पारंपरिक हस्तरेखा में पानी से संबंधित दुर्घटना तथा स्वास्थ्य संबंधी परेशानी से जोड़ा जाता है।
8. अन्य पर्वतों पर क्रॉस
बुध पर्वत के नीचे ऊपरी मंगल पर्वत पर क्रॉस को शत्रुओं से खतरे का संकेत माना जाता है। चंद्र पर्वत के निचले भाग पर क्रॉस को मूत्राशय या गुर्दे से संबंधित परेशानी से जोड़ा जाता है। शुक्र पर्वत पर क्रॉस और दोषपूर्ण मस्तक रेखा होने पर इसे कमजोर स्मरण शक्ति से संबंधित माना जाता है।
हस्तरेखा की प्रमुख रेखाओं पर क्रॉस का अर्थ
9. हृदय रेखा पर क्रॉस
सूर्य पर्वत के नीचे हृदय रेखा पर क्रॉस को पारंपरिक हस्तरेखा में आंखों से संबंधित चोट या परेशानी का संकेत माना जाता है।
10. शनि पर्वत के नीचे हृदय रेखा पर क्रॉस
शनि पर्वत के नीचे हृदय रेखा पर क्रॉस को गुर्दे, हर्निया तथा पुरुषों में अंडकोष से संबंधित परेशानी से जोड़ा जाता है। महिलाओं के हाथ में इसे मातृत्व या प्रसव के समय परेशानी से संबंधित माना जाता है।
11. शुक्र पर्वत पर अंगूठे के पास क्रॉस
अंगूठे के पास शुक्र पर्वत पर क्रॉस को पारंपरिक हस्तरेखा में हिंसक परिस्थिति या संघर्ष का संकेत माना जाता है।
12. शुक्र पर्वत पर क्रॉस
शुक्र पर्वत पर क्रॉस को प्रेम संबंधों में असफलता या प्रेम जीवन में बाधा का संकेत माना जाता है।
13. विवाह रेखा पर क्रॉस
यदि क्रॉस विवाह रेखा पर बना हो, तो पारंपरिक हस्तरेखा के अनुसार वैवाहिक जीवन में गंभीर परेशानी का संकेत माना जाता है।
14. जीवन रेखा के पास क्रॉस
जीवन रेखा के पास क्रॉस को रिश्तेदारों के साथ विवाद या पारिवारिक संबंधों में परेशानी से जोड़ा जाता है।
15. भाग्य रेखा और जीवन रेखा के बीच क्रॉस
यदि भाग्य रेखा और जीवन रेखा के बीच क्रॉस बना हो, तो पारंपरिक हस्तरेखा में रिश्तेदारों के कारण करियर या कार्यक्षेत्र में बाधा का संकेत माना जाता है।
16. चंद्र पर्वत पर भाग्य रेखा के नीचे क्रॉस
चंद्र पर्वत पर भाग्य रेखा के नीचे क्रॉस को पारंपरिक हस्तरेखा में यात्रा के दौरान परेशानी या यात्रा में अपेक्षित सफलता न मिलने का संकेत माना जाता है।
17. मस्तक रेखा पर क्रॉस
मस्तक रेखा पर क्रॉस को पारंपरिक हस्तरेखा में सिर से संबंधित चोट या कठिन परिस्थिति का संकेत माना जाता है।
18. सूर्य रेखा पर क्रॉस
यदि सूर्य रेखा पर क्रॉस बना हो, तो पारंपरिक हस्तरेखा के अनुसार यह सफलता, प्रसिद्धि और मान-सम्मान में बाधा का संकेत माना जाता है।
19. भाग्य रेखा पर क्रॉस
भाग्य रेखा पर क्रॉस को पारंपरिक हस्तरेखा में करियर में बाधा, हानि और निराशा से जोड़ा जाता है।
20. चतुष्कोण में स्वतंत्र क्रॉस - मिस्टिक क्रॉस
यदि चतुष्कोण में एक स्वतंत्र क्रॉस बना हो और वह मस्तक रेखा या हृदय रेखा को स्पर्श न करता हो, तो उसे Mystic Cross कहा जाता है। पारंपरिक हस्तरेखा के अनुसार ऐसा चिन्ह रखने वाले व्यक्ति की रुचि गूढ़ विषयों, धार्मिक दर्शन, ज्योतिष, हस्तरेखा और आध्यात्मिक विषयों में हो सकती है।
अंगूठे और उंगलियों पर क्रॉस चिन्ह का अर्थ
अंगूठा
पहली पोर: पारंपरिक हस्तरेखा में इसे चरित्र और भोग-विलास से संबंधित प्रवृत्तियों से जोड़ा जाता है। दो क्रॉस होने पर विलासिता और भौतिक सुखों की अधिक इच्छा का संकेत माना जाता है।
दूसरी पोर: इसे वैवाहिक जीवन में अतिरिक्त संबंधों की ओर झुकाव से जोड़ा जाता है।
गुरु की उंगली
पहली पोर: अंधविश्वास या धार्मिक विचारों से संबंधित संकेत माना जाता है।
दूसरी पोर: साहित्यिक सफलता का संकेत माना जाता है।
तीसरी पोर: अविश्वसनीय या अस्थिर स्वभाव से जोड़ा जाता है।
शनि की उंगली
पहली पोर: असामाजिक या अनैतिक कार्यों की प्रवृत्ति का संकेत माना जाता है।
दूसरी पोर: अत्यधिक साहस या जोखिम लेने की प्रवृत्ति से जोड़ा जाता है।
तीसरी पोर: संतान संबंधी बाधा का संकेत माना जाता है।
सूर्य की उंगली
पहली पोर: संवेदनशील और कलात्मक स्वभाव का संकेत माना जाता है।
दूसरी पोर: असंतुष्ट स्वभाव से जोड़ा जाता है।
तीसरी पोर: निराशा और बेचैनी की प्रवृत्ति का संकेत माना जाता है।
बुध की उंगली
पहली पोर: चोरी करने की प्रवृत्ति का संकेत माना जाता है।
दूसरी पोर: कार्य में असफलता का संकेत माना जाता है।
तीसरी पोर: बेईमानी या गलत कार्यों की प्रवृत्ति से जोड़ा जाता है।
हस्तरेखा में क्रॉस चिन्ह का सही फलित
हस्तरेखा में क्रॉस चिन्ह का फलित अर्थ केवल एक चिन्ह देखकर निर्धारित नहीं किया जाता। पारंपरिक हस्तरेखा के अनुसार क्रॉस किस पर्वत, रेखा, उंगली या पोर पर है, उसके साथ आसपास की रेखाओं और पर्वतों की स्थिति को भी देखना चाहिए। इसी प्रकार पूरे हाथ की बनावट और प्रमुख रेखाओं को देखकर फलित को अधिक स्पष्ट माना जाता है।



