जिस स्त्री या पुरुष के हाथ में विवाह रेखा द्विजिह्व या फोर्क वाली हो तो उस स्त्री की अपने पति से, पुरुष की अपनी पत्नी के सदैव ही विचारों की प्रतिकूलता के कारण अनबन ही रहेगी और जीवन के अधिकतर भाग में विरह वेदना का शिकार रहना पड़ेगा।
ये दोनों कभी भी मिलें इनमें विचार विनिमय कभी न होगा फिर भी नितान्त त्याग की भावना कभी जागृत न होगी चाहे लड़ाई झगड़ा किसी हद तक क्यों न पहुँच जाय ।
यदि यही चिन्ह विवाह रेखा पर बुध क्षेत्र के बाहर की ओर साफ तौर पर दिखाई देता हो तो उस मनुष्य के विवाह के प्रस्ताव या संबन्ध आ-आकर नहीं होते यानी के संबन्ध के होने में अनेक बाधायें उपस्थित हो जाती हैं और विवाह नहीं हो पाता।



