यदि मंगल के प्रथम क्षेत्र पर यह चिह्न हो तो उसके शत्रु बहुत भयानक रूप से जातक का विरोध करते हैं। यदि मंगल का क्षेत्र अति उच्च हो तो जातक स्वयं भी बड़ा झगड़ालू होता है और स्वयं जातक को चोट लगने या भय की आशंका होती है। यदि मंगल के द्वितीय क्षेत्र पर हो तो करीब-करीब उपर्युक्त किन्तु विशेष भयानक फल होता है । यदि यह क्रॉस बेढंगा-सा बना हो तो जातक की स्वभाव की तीव्रता के कारण आत्महत्या की ओर भी प्रवृत्ति होती है।
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