हस्तरेखा शास्त्र में मंगल पर्वत पर बनने वाले क्रॉस का विशेष महत्व माना गया है। यह चिन्ह शत्रु, साहस, क्रोध, झगड़े और जीवन में आने वाली बाधाओं का संकेत देता है।
मंगल के दोनों पर्वतों पर क्रॉस होना हस्तरेखा ज्ञान
यदि मंगल के प्रथम क्षेत्र (Lower Mars) पर यह चिन्ह हो, तो उसके शत्रु बहुत भयानक रूप से जातक का विरोध करते हैं। यदि मंगल का क्षेत्र अत्यधिक उभरा हुआ (उच्च) हो, तो जातक स्वयं भी झगड़ालू स्वभाव का हो सकता है। ऐसे व्यक्ति को चोट लगने या किसी प्रकार के भय की आशंका बनी रहती है।
यदि मंगल के द्वितीय क्षेत्र (Upper Mars) पर क्रॉस का चिन्ह हो, तो उपर्युक्त फल लगभग समान होते हैं, किंतु परिणाम अधिक गंभीर और भयानक हो सकते हैं।
यदि यह क्रॉस बेढंगा या असमान आकार का बना हो, तो जातक के स्वभाव की अत्यधिक तीव्रता के कारण आत्मघाती प्रवृत्ति भी उत्पन्न हो सकती है। इसलिए ऐसी रेखाओं का सूक्ष्म अध्ययन आवश्यक होता है।
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हस्तरेखा में मंगल पर्वत पर क्रॉस का चिन्ह व्यक्ति के साहस, क्रोध, शत्रुओं और संघर्षपूर्ण जीवन की ओर संकेत करता है। सही भविष्यवाणी के लिए संपूर्ण हथेली का विश्लेषण आवश्यक है।


