सूर्य रेखा को बार रेखा (छोटी आडी रेखा) द्वारा काटा जाना | Hast Rekha Gyan

सूर्य रेखा को बार रेखा (छोटी आडी रेखा) द्वारा काटा जाना  | Hast Rekha Gyan


सूर्य रेखा को बार रेखा (छोटी आडी रेखा) द्वारा काटा जाना  

जब भी सूर्य रेखा को कोई आडी रेखा काट देती है तो यह ईर्ष्या का संकेत है।  यदि बार रेखा पतली है तो ईर्ष्या के कारण हस्तछेप मामूली रहेगा लेकिन यदि बार रेखा गहरी है तो ऐसे ईर्ष्या व्यक्ति को नुकसान पहुंचा सकती है। 

यदि  बार रेखा एक से अधिक है (आड़ी तिरछी) तो व्यक्ति से ईर्ष्या करने वाले अधिक रहेंगे और वह हमेशा ईर्ष्या करने वाले शत्रुओ का निशाना बनता रहेगा।  इस ही वजह से व्यक्ति की तरक्की नहीं हो पाती है और जीवन में अधिक  रुकावट आती है क्युकी दुश्मन समय-समय पर नुकसान पहुंचाते रहते है। 

वह बहुत बार ऐसे व्यक्ति का ध्यान किसी भी एक कार्य में केंद्रित नहीं होता है इस वजह से उसको असफलता का मुँह देखना पड़ता है। 

इसके लिए व्यक्ति को गेहू का दान करना चाहिए और  सूर्य देवता की पूजा करनी चाहिए और माणक धारण करना चाहिए। 



सूर्य रेखा का अर्थ तथा पूरा विवरण ( Surya Rekha/Sun Line ) | Hast Rekha Gyan


surya rekha sun line
सूर्य रेखा (The Line of The Sun)

सूर्य रेखा ऊर्ध्वगामी रेखा है, जो सूर्य क्षेत्र पर समाप्त होती है। इसे Line of the Sun, Line of Success Line of Brilliancy, Line of Apollo, प्रतिभा रेखा, सफलता रेखा, यश रेखा, धर्म रेखा, पुण्य रेखा, विद्या रेखा, विवेक रेखा, ज्ञान रेखा, प्रतिष्ठा रेखा एवं ऐश्वर्य रेखा आदि नामों से भी जाना जाता है। सूर्य रेखा मूलतः भाग्य रेखा की सहायक रेखा है। इसके द्वारा जातक की सफलता, विद्या, विवेक, यश, सौभाग्य, प्रतिष्ठा व आर्थिक स्थिति आदि का विचार किया जाता है। सूर्य रेखा और भाग्य रेखा के विषयों में काफ़ी समानता है। दोनों ही रेखाएं जीवन की प्रगति या सफलता की परिचायक हैं। भाग्य रेखा जातक के आर्थिक भाग्य को निर्धारित करती है, किन्तु सूर्य रेखा प्रतिष्ठापूर्ण भाग्योदय की परिचायक है, अर्थात् सूर्य रेखा का सम्बन्ध भी भाग्य रेखा की तरह भाग्य से ही है।


अन्तर केवल इतना है कि सूर्य रेखा भौतिक समृद्धि की अपेक्षा यश, कीर्ति, मान व प्रतिष्ठामूलक भाग्य पर विशेष रूप से केन्द्रित होती है, जबकि भाग्य रेखा भौतिक जीवन की प्रगति का निदर्शन कराती है।  सूर्य रेखा के प्रभाव एवं गुणों में भी हाथ की बनावट के अनुसार भिन्नता आ जाती है। ऐसा देखा गया है कि दार्शनिक, कोनिक और अत्यन्त नुकीले हाथों में यह स्पष्ट और गहरे रूप से अंकित होती है, किन्तु ऐसे हाथों में उतनी प्रभावशाली नहीं होती, जितनी कि वर्गाकार, चमसाकार या निम्न श्रेणी के हाथों में होती है।  ये लेख भारत के प्रसिद्ध हस्तरेखा शास्त्री नितिन कुमार पामिस्ट द्वारा लिखा गया है अगर आप उनके दवारा लिखे सभी लेख पढ़ना चाहते है तो गूगल पर इंडियन पाम रीडिंग ब्लॉग को सर्च करें और उनके ब्लॉग पर जा कर उनके लिखे लेख पढ़ें । इसलिए सूर्य रेखा की प्रकृति व प्रभाव आदि का विश्लेषण करते समय हाथ की बनावट का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। भाग्य रेखा के गुणों और प्रभावों का समुचित लाभ तभी मिलता है, जब मस्तिष्क रेखा और अंगूठा सबल हो तथा हाथ के अन्य लक्षण भी अनुकूल हों, अन्यथा यह प्रभावहीन हो जाती है।

अभी सिर्फ लेख प्रकाशित किया जा रहा है लेकिन चित्र जल्दी ही प्रकाशित किये जायेँगे।

(1) सूर्य रेखा का आरम्भ - हस्तरेखा विज्ञान विश्वकोश

1. शुक्र क्षेत्र से आरम्भ होने वाली सूर्य रेखा: यदि सूर्य रेखा का आरम्भ जीवन रेखा के भीतर शुक्र क्षेत्र से हो (चित्र-581), तो जातक का आरम्भिक जीवन घर-परिवार वालों के प्रभाव में गुजरता है। उसे अपने आरम्भिक जीवन में घर-परिवार द्वारा संचित सामाजिक प्रतिष्ठा का लाभ मिलता है।

2. जीवन रेखा से निकलने वाली सूर्य रेखा : जीवन रेखा से निकलने वाली सूर्य रेखा (चित्र-582) कलाप्रियता, साहित्यिक अभिरुचि और व्यक्तिगत प्रयासों से अर्जित सफलता की परिचायक होती है। यदि अंगुलियां लम्बी हों, तो जातक पूर्ण रूप से सौन्दर्योपासक होगा। ऐसे लोग घर-परिवार से सहायता प्राप्त कर स्वयं को योग्य बनाते हैं और इच्छित क्षेत्र में सफल होते है। वे जीवन, व्यवसाय, विवाह व स्वास्थ्य के मामले में खुशनसीब होते हैं।

3. नेप्च्यून क्षेत्र से निकलने वाली सूर्य रेखा : यदि सूर्य रेखा का आरम्भ नेप्च्यून क्षेत्र से हो (चित्र-583), तो बौद्धिक योग्यता, ख्याति और समृद्धि प्रदान करती है, किन्तु यदि सूर्य रेखा का आरम्भ मणिबन्ध की तीसरी अन्तिम रेखा से हो, तो इन गुणों में कमी आ जाती है।

4. चन्द्र क्षेत्र से आरम्भ होने वाली सूर्य रेखा : यदि सूर्य रेखा चन्द्र क्षेत्र से निकले (चित्र-584), तो विशिष्टता और सफलता दूसरों के ऊपर निर्भर होती है, किन्तु कुछ विद्वानों का मत है कि ऐसी रेखा वाले जातकों को अपनी योग्यता के अनुसार ही सफलता मिलती है। ऐसे लोग जनता के सम्पर्क में रहने के कारण लोकप्रिय होते हैं और अपने परिवार के बाहर के लोगों से उन्हें सहायता मिलती है।प्रायः महिलाओं की सहायता से भी उन्हें उन्नति मिलती है। यह योग नेताओं, अभिनेताओं व कलाकारों के हाथों में पाया जाता है।

5. निम्न मंगल क्षेत्र से निकलने वाली सूर्य रेखा : यदि सूर्य रेखा निम्न मंगल क्षेत्र से निकले (चित्र-585), तो जातक को बहुत कठिन परिश्रम से ही सफलता मिलती है। सौभाग्य ऐसी रेखा वालों की बिलकुल सहायता नहीं करता और न ही उन्हें विरासत में धन, सम्पत्ति व जमीन-जायदाद का लाभ होता है।

6. उच्च मंगल क्षेत्र से निकलने वाली सूर्य रेखा : यदि सूर्य रेखा का आरम्भ उच्च मंगल क्षेत्र से हो (चित्र-586), तो जातक को शौर्य-प्रदर्शन के क्षेत्र में सफलता मिलती है। वह सेना में उच्च पद प्राप्त करके मान व प्रतिष्ठा प्राप्त करता है।

7.मंगल के मैदान से आरम्भ होने वाली सूर्य रेखा : यदि सूर्य रेखा का आरम्भ मंगल के मैदान यानी करतल के मध्य से हो (चित्र-587), तो जातक को अत्यन्त परिश्रम, विकट कठिनाइयों और संघर्षों के पश्चात् सफलता मिलती है। ऐसी रेखा वाले लोग जीवन के आरम्भिक दिनों में असहाय स्थिति में रहते हैं। उनका आरम्भिक जीवन गुमनामी व गरीबी की विकट परिस्थितियों से गुजरता है कि उनके भीतर आत्मचेतना होती है। भाग्य की भीषण आंधी भी उनकी महत्त्वाका योग्यता व उत्कण्ठा के चिराग को बुझा नहीं पाती है और पच्चीस से की उम्र होते-होते वे सफलता के सूर्य की तरह चमचमा उठते हैं, फिर भी उनका संघर्ष समाप्त नहीं होता। संघर्ष तो आजीवन चलता रहता है।

8. भाग्य रेखा से आरम्भ होने वाली सूर्य रेखा : यदि सूर्य रेखा भाग्य रेखा से निकले (चित्र-588), तो यह अत्यन्त शुभ लक्षण माना जाता है। इस योग के भाग्य रेखा से सफलता में वृद्धि होती है और जातक को विशिष्ट ख्याति पदोन्नति और राजयोग की प्राप्ति होती है। इस स्थिति में सफलता अप्रत्याशित, असाधारण और विस्मयजनक ढंग से प्राप्त होती है।

9. मस्तिष्क रेखा से आरम्भ होने वाली सूर्य रेखा : यदि सूर्य रेखा का आरम्भ मस्तिष्क रेखा से हो (चित्र-589), तो जातक को केवल अपनी बौद्धिक योग्यता और निजी प्रयत्नों से सफलता और प्रतिष्ठा प्राप्त होती है, किन्तु यह सफलता उसे पैंतीस वर्ष के बाद जीवन के दूसरे भाग में मिलती है। यह योग लेखकों, वैज्ञानिकों व शोधकर्ताओं के हाथों में होता है।

10. हृदय रेखा से आरम्भ होने वाली सूर्य रेखा : यदि सूर्य रेखा का आरम्भ हृदय रेखा से हो (चित्र-590), तो जातक अत्यन्त कलाप्रिय व साहित्यिक अभिरुचि वाला होता है। सौन्दर्य और प्रेम का उसके हृदय पर गहरा प्रभाव पड़ता है। ऐसी रेखा वाले लोगों को जीवन के अन्तिम भाग में लगभग पचास वर्ष की आयु में सफलता मिलती है। ऐसे लोगों को वृद्धावस्था में सुख मिलता है।

11. बुध रेखा से आरम्भ होने वाली भाग्य रेखा : यदि भाग्य रेखा का आरम्भ बुध रेखा से हो (चित्र-591), तो जातक में व्यापारिक योग्यता होती है। वह व्यापार, विज्ञान एवं वाक्पटुता से सम्बन्धित क्षेत्र में सफल होता है।

12. यूरेनस क्षेत्र से आरम्भ होने वाली सर्य रेखा: इदय व मस्ति रेखा के बीच वृहत् आयत या यूरेनस क्षेत्र से निकलने वाली सूर्य रेखा चित्र-592) जातक के आवेगात्मक स्वभाव की परिचायक होती है, इसलिए हाथ के अन्य लक्षण शुभ होने पर कीर्ति एवं अशुभ होने पर अपकीर्ति मिलती है। जिन व्यक्तियों के हाथों में ऐसी रेखा मौजूद होती है, वे चालीस से पैंतालीस वर्ष की आयु में सफलता प्राप्त करते हैं, लेकिन उनकी सफलता कठिन परिश्रम, बौद्धिक योग्यता और आत्मविश्वास का परिणाम होती है।

13. विभिन्न क्षेत्रों से आरम्भ होने वाली सूर्य रेखाएं : भाग्य रेखा की तरह सूर्य रेखा भी ऊर्ध्वगामी रेखा है। करतल की किसी भी रेखा या क्षेत्र से निकलकर सूर्य क्षेत्र की ओर जाने वाली रेखाएं सूर्य रेखा कहलाती हैं। ऐसी रेखाओं का होना अत्यन्त शुभ और सौभाग्यशाली लक्षण है।

14. हृदय रेखा के ऊपर सूर्य क्षेत्र से निकलने वाली सूर्य रेखा: यदि सूर्य रेखा हृदय रेखा के ऊपर सूर्य क्षेत्र में अंकित हो, तो जीवन में सुख और सफलता इतने विलम्ब से मिलती है कि उसका कोई अर्थ ही नहीं रह जाता (चित्र-593)।

(2) सूर्य रेखा का समापन

1. त्रिशूल चिह्न में समाप्त होने वाली सूर्य रेखा : यदि सूर्य रेखा सूर्य क्षेत्र में त्रिशुल की आकृति की तरह समाप्त हो (चित्र-594), तो धन, यश द मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।

यदि ऐसी सूर्य रेखा की तीनों शाखाएं विभिन्न क्षेत्रों-बुध, शनि व सूर्य क्षेत्र की ओर चली जायें और समान रूप से स्पष्ट हों (चित्र-595), तो बहुत अधिक धनलाभ होता है और यश भी मिलता है। इस योग में शनि क्षेत्र के प्रभाव से अचल सम्पत्ति, भूमि व मकान आदि भी प्राप्त होता है।

यदि सूर्य रेखा के अन्त में सूर्य क्षेत्र में त्रिशूल हो और उसकी दोनों बाहरी शाखाएं अन्दर की ओर लौटकर झुक जायें (चित्र-596), तो यह योग अशुभ फल देता है तथा धनहानि और असफलता का सामना करना पड़ता है।

2. अत्यन्त पतली सूर्य रेखा : यदि सूर्य रेखा अपने आरम्भिक स्थान पर मोटो हो और समापन स्थान की ओर जैसे-जैसे बढे, वैसे-वैसे पतली होती जाये तथा अन्त में अत्यन्त क्षीण हो जाये (चित्र-597) तो उसका प्रभाव भी धीरे-धीरे समाप्त होता रहता है। ऐसी रेखा उम्र की वृद्धि के साथ सतत घटने वाले जातक के यश, धन और प्रभाव की परिचायक होती है।

3. बहुत सी रेखाओं के रूप में सूर्य रेखा का समापन : यदि सूर्य रेखा अपने मापन स्थान पर अनेक छोटी-छोटी शाखाओं (गोपुच्छाकार) में विभक्त हो जाये (चित्र-598), तो वह अपना प्रभाव खो देती है, क्योंकि जातक की रुचि किसी एक विषय पर केन्द्रित न होकर अनेक विषयों की ओर परिवर्तित होगी, जिससे उसकी सफलता सन्दिग्ध हो जायेगी।

4. बिन्दु चिह्न पर समाप्त होने वाली सूर्य रेखा : यदि भाग्य रेखा का अन्त किसी स्पष्ट व गहरे बिन्दु चिह्न पर हो (चित्र-599), तो उसकी सफलता और समृद्धि अन्त में धूल में मिल जाती है।

5. गहरी आड़ी रेखा में समाप्त होने वाली सूर्य रेखा : यदि भाग्य रेखा के अन्त में गहरी आड़ी रेखा हो (चित्र-600), तो जातक के जीवन की प्रगति अचानक अवरुद्ध हो जाती है, जिसके प्रभाव से व्यक्ति के जीवन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।

6. सूर्य रेखा के अन्त में दो समानान्तर रेखाएं : यदि सूर्य रेखा सूर्य क्षेत्र तक जा पहुचे और उसके अगल-बगल दो समानान्तर सीधी रेखाएं भी उपस्थित हों (चित्र-601), तो यश और अति विशिष्ट सफलता की प्राप्ति होती है।

यदि इस योग में सहायक रेखाएं लहरदार हों (चित्र-602), तो रेखाओं का शुभ प्रभाव कम हो जाता है और व्यक्ति की प्रतिभा का सदुपयोग नहीं होता तथा उसके विचार अस्थिर और भ्रमित हो जाते हैं।

7. सूर्य रेखा के अन्त तक समानान्तर चलती प्रभाव रेखाएं : शुक्र या चः क्षेत्र से निकलकर सूर्य रेखा के समानान्तर सूर्य क्षेत्र की ओर जाने वाली रेखाएं (चित्र-603) उत्तरदान या वसीयत में प्राप्त सम्पत्ति का संकेत देती चन्द्र क्षेत्र की प्रभाव रेखा अप्रत्याशित रूप से मिली वसीयत की और शुक्र क्षेत्र की प्रभाव रेखा रिश्तेदारों से मिली वसीयत की पुष्टि करती है।

8. बृहस्पति क्षेत्र में समाप्त होने वाली सूर्य रेखा : यदि सूर्य रेखा अपने मूल स्थान से मुड़कर बृहस्पति क्षेत्र में समाप्त हो (चित्र-604), तो अधिकार और नेतृत्व (राजनीति) के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है। इस प्रकार का योग बहुत कम हाथों में पाया जाता है।

9. शनि क्षेत्र में समाप्त होने वाली सूर्य रेखा : यदि सूर्य रेखा शनि क्षेत्र की ओर मुड़कर समाप्त हो (चित्र-605), तो यह एक अशुभ योग माना जाता है, क्योंकि प्रतिभा का स्थान सूर्य क्षेत्र है और शनि क्षेत्र निराशा की भावना को जन्म देता है। इसलिए कार्य के प्रति उत्साह की अपेक्षा निराशा की भावना विकसित होने लगती है। फलतः जातक को सफलता मिलती भी है, तो वह सूर्य क्षेत्र पर पहुंचने वाली सूर्य रेखा की अपेक्षा बहुत कम होती है।

10. बुध क्षेत्र में समाप्त होने वाली सूर्य रेखा : यदि सूर्य रेखा बुध क्षेत्र पर समाप्त हो चित्र-606). तो जातक हर कार्य धन-प्राप्ति के दृष्टिकोण से करता है। ऐसे लोग ख्याति की अपेक्षा धन को अधिक महत्त्व देते हैं। वे भौतिकतावादी विचारों के होते हैं और व्यापार में अत्यन्त सफल होते हैं।

11. दो लहरदार शाखाओं के रूप में सूर्य रेखा का अन्त : यदि सूर्य रेखा का अन्त दो लहरदार शाखाओं के रूप में हो (चित्र-607), तो जातक की सारी महत्त्वाकांक्षाएं मिट्टी में मिल जाती हैं।

12. सूर्य क्षेत्र में समाप्त होने वाली सूर्य रेखा : यदि सूर्य रेखा का समापन सूर्य क्षेत्र में हो (चित्र-608), तो जातक अत्यन्त संवेदनशील, कलात्मक अभिरुचि वाला एवं प्रभावशाली व्यक्तित्व का धनी होता है। यदि ऐसी रेखा के साथ मस्तिष्क रेखा सीधी हो व अंगूठा भी दृढ़ हो, तो जातक यश, धन, उच्च पद व सम्मान प्राप्त करता है।

13. सूर्य रेखा के अन्त में नक्षत्र चिह्न : यदि सूर्य क्षेत्र पर समाप्त होने वाली सूर्य रेखा के अन्त में नक्षत्र चिह्न हो (चित्र-609), तो जातक को धन, प्रसिद्धि व मान-सम्मान सब कुछ मिलता है, किन्तु उसके मन में शान्ति नहीं होती। उसे अपने कार्यों में सफलता काफ़ी विलम्ब से मिलती है। तब तक उसका स्वास्थ्य बिगड़ जाता है। जब धन, यश प्राप्त होता है, तब मन की शान्ति और शारीरिक सुख समाप्त हो जाता है। सूर्य क्षेत्र का नक्षत्र चिह्न विपुल धन व भौतिक वैभव देता है, किन्तु मन की शान्ति, तृप्ति और चैन हर लेता है।

3. सूर्य रेखा की शाखाएं

1. यदि सूर्य रेखा में ऊपर की ओर उठती हुई कई शाखाएं हों, जिससे उसका स्वरूप वृक्ष की तरह बन गया हो (चित्र-610), तो यह असाधारण सफलता का चिह्न है। सौभाग्य ऐसे लक्षण वाले लोगों के चरण चूमता है।

2. सूर्य रेखा से निकलकर नीचे की ओर जाने वाली शाखाएं (चित्र-611) असफलता, निराशा तथा अवनति की सूचक होती हैं।

3. यदि सूर्य रेखा अपने समाप्ति-स्थान पर दो शाखाओं में विभक्त हो गयी हो और दोनों ही शाखाएं स्पष्ट, गहरी और सूर्य क्षेत्र में मौजूद हों, तो जातक को किन्हीं दो क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण सफलता मिलती है (चित्र-612)। ऐसी रेखा वाले व्यक्तिं एक से अधिक क्षेत्रों में काम करने की योग्यता रखते हैं।

4. यदि सूर्य रेखा से एक से अधिक दोषयुक्त, टूटी-फूटी या लहरदार व कटी हुई ऊर्ध्वगामी शाखाएं निकल रही हों (चित्र-613), तो एकाग्रता की कमी के कारण कलात्मक एवं बौद्धिक कार्यों में जातक को असफलता का सामना करना पड़ेगा।

5. यदि सूर्य रेखा के अन्तिम बिन्दु से निकलने वाली एक शाखा बुध क्षेत्र की ओर तथा दूसरी शनि क्षेत्र को जाये (चित्र-614), तो जातक में विवेक, बुद्धि और चतुराई के गुणों का सम्मिश्रण होता है, जिसके बल पर जातक यश और समृद्धि प्राप्त करता है। ऐसी रेखा वाले व्यक्ति सन्तुलित विचारों के होते हैं।

6. यदि सूर्य रेखा से निकलने वाली कोई शाखा बुध क्षेत्र की ओर जाये (चित्र-615), तो बुध क्षेत्र के गुणों से जातक का स्वभाव प्रभावित होता है। वह विज्ञान व व्यापार के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करता है। उसमें चतुराई, व्यापारिक योग्यता व वैज्ञानिक बुद्धि होती है।

7. यदि सूर्य रेखा की कोई ऊर्ध्वगामी रेखा शनि क्षेत्र में चली जाये (चित्र-616), तो गम्भीर अध्ययन, अनुसन्धान एवं निगूढ़ विद्याओं के क्षेत्र में जातक सफलता प्राप्त करता है।

8. यदि सूर्य रेखा की कोई शाखा चन्द्र क्षेत्र में प्रवेश करती हो (चित्र-617) तो जातक की कल्पना शक्ति बढ़ जाती है। उसे साहित्य, संगीत, मनोविज्ञान, रहस्य विज्ञान व निगूढ़ विद्या के क्षेत्रों में सफलता मिलती है। ऐसे लोग विदेशयात्रा या विदेश व्यापार में भी सफल होते हैं।

9. सर्य रेखा से निकलकर उच्च मंगल के क्षेत्र में प्रवेश करने वाली सर्य रेखा की शाखा जातक को आत्मविश्वास, आत्मस्वतन्त्रता और बहादुरी का गुण प्रदान करती है (चित्र-618), जिससे वह सेना या शौर्य-प्रदर्शन के क्षेत्रों में सफल होता है।

10. यदि सूर्य रेखा की कोई शाखा शुक्र क्षेत्र में प्रवेश करे (चित्र-619), तो जातक कलात्मक और स्निग्ध भावनाओं से सम्बन्धित विषयों की ओर आकृष्ट होता है। ऐसे लोग ललित कलाओं के प्रति विशेष दिलचस्पी रखते है।

11. यदि सूर्य रेखा की कोई शाखा भाग्य रेखा से मिल जाये (चित्र-620), तो यह एक अत्यन्त भाग्यवर्धक योग माना जाता है। ऐसी स्थिति में जातक को अप्रत्याशित सफलता के साथ-साथ विशिष्ट सम्मान भी मिलता है।

12 यदि सूर्य रेखा की शाखा मस्तिष्क रेखा से मिल जाये, तो बौद्धिक कार्यों में सफलता की सम्भावना रहती है (चित्र-621)। ऐसी रेखा वाले लोग बुद्धिजीवी होते हैं।

13. यदि सूर्य रेखा की शाखा हृदय रेखा से मिलती हो (चित्र-622), तो जातक को उसके प्रेम सम्बन्धों के कारण सम्मान मिलता है। वह अपने प्रेम सम्बन्धों का उपयोग कर सफलता प्राप्त करता है।

14. यदि सूर्य रेखा की कोई शाखा बुध रेखा से मिल जाये (चित्र-623), तो व्यापार एवं वाक्पटुता से सम्बन्धित क्षेत्रों में सफलता मिलती है और जातक को सम्मान तथा धन की प्राप्ति होती है। ऐसे लोग विज्ञान व चिकित्सा के क्षेत्रों में भी कार्य करते हैं और धन तथा यश प्राप्त करते हैं।

4. भाग्य रेखा एवं सूर्य रेखा का आपसी सम्बन्ध

यह पहले ही बताया जा चुका है कि भाग्य रेखा और सूर्य रेखा दोनों ही सफलता प्रदान करने वाली रेखाएं हैं, किन्तु भाग्य रेखा धन और जीवन-वृत्ति की सफलता का बोध कराती है, जबकि सूर्य रेखा मान, प्रतिष्ठा व प्रमुखता की अचानक व अप्रत्याशित वृद्धि करती है। जिस प्रकार सूर्य के निकलने से सम्पूर्ण अंधेरा व टिमटिमाते हुए तारे, यहां तक कि चन्द्रमा भी क्षीण और निर्बल हो जाता है, उसी प्रकार सूर्य रेखा की उपस्थिति से जातक की भाग्य रेखा में वर्णित भाग्य भी जीवन की विषमताओं व अंधेरों को नष्ट करता हुआ अचानक क्षितिज में चमक उठता है और जातक के ऊपर अनायास ही सबकी निगाहें पड़ने लगती हैं। उसकी कीर्ति व यशगाथाएं सूर्य की किरणों की भांति शीघ्र ही सर्वत्र बिखर जाती हैं।

सूर्य रेखा का समुचित विस्तार एवं उपस्थिति बहुत कम हाथों में देखने को मिलती है। अधिकांश हाथों में सूर्य रेखा या तो अनुपस्थित रहती है या अत्यन्त छोटी और अस्पष्ट होती है। सूर्य रेखा उन गरीब लोगों के हाथों में भी गायब रहती है, जिनका अस्तित्व समाज स्वीकार नहीं करता। वे निर्धनता, विपन्नता, विषमता की परिस्थितियों में मात्र अपना पेट-पालन करते हैं। उनके जीवन में कोई चमक-दमक नहीं होती। उनका जीवन मनुष्य का होते हुए भी पशुवत् होता है। इसके विपरीत जिन लोगों के हाथों में सूर्य रेखा होती है, वे प्रसन्नचित्त, उत्साही व आकर्षक व्यक्तित्व वाले होते हैं।  ये लेख भारत के प्रसिद्ध हस्तरेखा शास्त्री नितिन कुमार पामिस्ट द्वारा लिखा गया है अगर आप उनके दवारा लिखे सभी लेख पढ़ना चाहते है तो गूगल पर इंडियन पाम रीडिंग ब्लॉग को सर्च करें और उनके ब्लॉग पर जा कर उनके लिखे लेख पढ़ें । वे चाहे कलाकार न हों, फिर भी कलाप्रिय अवश्य होते हैं और सुन्दरता के बीच रहना पसन्द करते हैं। कभी-कभी वे भाग्यवश अनेक दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों व संघर्षों का सामना करते हैं, फिर भी अपने कार्यक्षेत्र में प्रमुख, असाधारण, अग्रणी और बहुचर्चित एवं लोकप्रिय होते हैं।

सूर्य रेखा बहुत कम हाथों में होती है, जबकि भाग्य रेखा अधिकांश हाथों में मौजूद रहती है। इसके अलावा दोनों ही रेखाएं ऊर्ध्वगामी और लगभग समान प्रकृति की होती हैं। इसलिए अनेक विद्वानों ने भाग्य रेखा को प्रधान रेखा के रूप में स्वीकार करते हुए सूर्य रेखा को उसकी सहायक रेखा का दर्जा दिया है। जिस व्यक्ति के हाथ में भाग्य रेखा और सूर्य रेखा दोनों स्पष्ट और सुन्दर हों, निश्चय ही वह समाज और राष्ट्र का अद्वितीय व असाधारण व्यक्ति होगा, परन्तु यदि भाग्य रेखा निर्बल हो तथा सूर्य रेखा शक्तिशाली हो, तो जातक की आर्थिक स्थिति बहुत वैभवपूर्ण नहीं होगी, फिर भी उसका जीवन वैभवपूर्ण और यशस्वी होगा।

यदि भाग्य रेखा अनुपस्थित हो, परन्तु सूर्य रेखा मौजूद हो, तो ऐसी स्थिति में सूर्य रेखा ही भाग्य रेखा का काम करती है और जातक को कोई कमी नहीं होती। यदि सूर्य रेखा बिलकुल न हो, परन्तु भाग्य रेखा प्रबल हो, तो जातक धनी होते हुए भी यशस्वी, लोकप्रिय व वैभवपूर्ण नहीं होगा।

निष्कर्षतः भाग्य रेखा की अपेक्षा सूर्य रेखा की उपस्थिति जीवन की सफलता, यश, वैभव आदि को अधिक सुनिश्चित और सुस्पष्ट करती है। इसलिए कभी-कभी ऐसा भी देखा जाता है कि वे व्यक्ति, जिनके हाथों में निर्बल भाग्य रेखाएं हों, वे भी सूर्य रेखा के बल पर अपने से अधिक योग्य लोगों से सफलता की बाजी मार ले जाते हैं, जबकि निर्बल सूर्य रेखा और सबल भाग्य रेखा वाले लोग सफलता, सौभाग्य व प्रतिष्ठा के मामले में पीछे रह जाते हैं।

भाग्य रेखा धन उतना नहीं देती, जितना कि मान, प्रतिष्ठा और यश प्रदान करती है। यही कारण है कि अच्छी सूर्य रेखा वाली वेश्या भी अपने क्षेत्र में अधिक प्रसिद्धि प्राप्त करती है। इसलिए सूर्य रेखा का अध्ययन और फलकथन जातक के स्तर, कार्यक्षेत्र व हाथ की बनावट आदि के आधार पर किया जाना चाहिए। वर्गाकार हाथों में छोटी-सी सूर्य रेखा भी सांसारिक सफलताओं, जैसे धन व यश आदि को प्रदान करने में सक्षम होती है। दार्शनिक व कलात्मक हाथों में यह रेखा साहित्य एवं कला के क्षेत्र में उत्कृष्ट सफलता और यश देती है, जबकि निकृष्ट प्रकार के हाथों में अच्छी सूर्य रेखा भी जातक को चोर, डकैत, हत्यारा, अपराधी व देशद्रोही के रूप में व्यापक स्तर पर कुख्याति दिलाती है, किन्तु इन सब सफलताओं की सीमा को निर्धारित करने के लिए जातक के जीवन-स्तर की स्थिति पर विचार करना बहुत आवश्यक है।

इस सन्दर्भ में विद्वानों का मत है। कि “यदि कोई व्यक्ति संसद् सदस्य है, तो बलवान् सूर्य रेखा उसे मन्त्री या प्रधानमन्त्री भी बना सकती है। यदि कोई अधिकारी है, तो उच्च-से-उच्च पद तक पहुंच सकता है। यदि कोई व्यापारी है, तो वह व्यापार के क्षेत्र में प्रमुख बन सकता है, परन्तु यदि कोई साधारण मजदूर है, तो यही समझना चाहिए कि वह मजदूरों का प्रमुख-मेट या ठेकेदार बन सकता है। यद्यपि ऐसे भी बहुत से उदाहरण पाये जाते हैं, जब फैक्ट्री का एक साधारण कर्मचारी अपनी योग्यता द्वारा उसका स्वामी बन जाता है। कई देशों के ऐसे राष्ट्रपति हुए हैं, जिन्होंने अपना कैरियर सड़कों पर समाचार-पत्र बेचकर आरम्भ किया था।

ऐसे व्यक्तियों के हाथों में सूर्य रेखा का प्रबल प्रभाव अवश्य रहा होगा और हाथ के अन्य लक्षण भी अत्यन्त शुभ रहे होंगे, परन्तु याद रहे कि अत्यन्त संघर्ष के बाद अप्रत्याशित व उत्कृष्ट सफलता प्राप्त करने वालों के हाथों में सूर्य रेखा प्रायः करतल के मध्य मंगल के मैदान से आरम्भ होती है। विश्वविख्यात उद्योगपति हेनरी फोर्ड, अब्राहम लिंकन आदि इसी श्रेणी के व्यक्ति थे।

यदि सूर्य रेखा भाग्य रेखा की अपेक्षा अधिक गहरी और स्पष्ट हो, तो जातक को अपने पुरखों के महान् नाम का बोझ ढोना पड़ता है। सामान्यतः ऐसे लोग, जो अति प्रतिनि अक्तियों के दज होते हैं, उनमें यह क्ष दादा जाता है।

यदि भाग्य रेखा से निकलकर कोई शाखा सूर्य रेखा को स्पर्श करे, तो यह सफल विवाह का संकेत है, किन्तु जब ऐसो शाखा सूर्य रेखा को काटकर आगे निकल जाती है, तो वैवाहिक सम्बन्ध टुट जाता है।

यदि भाग्य रेखा को अगामी शाखा सूर्य रेखा के साथ मिलकर ऊपर को ओर बढने लगे चित्र-624, तो जातक को देना प्रयास, अचानक हो भाग्यवश धनलाभ या सौभाग्य की प्राप्ति होती है। इस लाभ या सौभाग्य को प्राप्त करने में व्यक्ति का अपना कोई व्यक्तिगत प्रयास नहीं होता बङि केसी ते को अन्य किसी अप्रत्याशित घटना या संयोग के कारण भाग्यवश उसे यह असर मिलता है। इस योग में समय की गणना भाग्य रेखा से निकलने वाली शाखा के उदगम स्थान के आधार पर करनी चाहिए।

इसके विपरीत यदि सूर्य रेखा की ऊगामी शाखा भाग्य रेखा से लेकर चित्र-625,तो जातक को मिलने वाली भौतिक सफलता के साथ-साथ विशिष्टता और लोकप्रियता मिलेगी तथा उसके विचारों और कार्यों माजिक आस्था तथा मान्यता प्राप्त होगी। यह एक अत्यन्त सौभाग्यशाली योग है।

सूर्य रेखा भाग्य रेखा की सहायक रेखा होती है। इसलिए जिस अवस्था में भाग्य रेखा टूटी हुई हो, उसी अवस्था में सूर्य रेखा स्पष्ट और सुन्दर हो (चित्र-626), तो जातक का वह जीवनकाल भाग्य रेखा के टूटे रहने पर भी यश और मान से परिपूर्ण होगा। भाग्य रेखा के खण्डित होने पर, उसके पास कोई सहायक समानान्तर रेखा थोड़ी दूर चलकर खण्डित होने के दोष का जितना निवारण करती है, उसकी अपेक्षा स्वतन्त्र व स्पष्ट सूर्य रेखा का काम कहीं अधिक है।

5. सूर्य रेखा की प्रकृति एवं दोहरी रेखाएं

जिन व्यक्तियों के हाथों में सूर्य रेखा होती है, वे अपने चारों ओर के वातावरण के सम्बन्ध में अत्यन्त सचेष्ट होते हैं। वे गन्दे या घुटन उत्पन्न करने वाले वातावरण को पसन्द नहीं करते। यह रेखा कलाप्रिय स्वभाव की परिचायक मानी जाती है। सूर्य रेखा वाले जातकों को वही वातावरण एवं वही वस्तु प्रिय लगती है, जो देखने में सुन्दर हो। जिनके हाथों में सूर्य रेखा नहीं होती, उन्हें इस बात की परवाह नहीं होती कि उनकी बैठक की सजावट कैसी है, क़ायदे के परदे लगे हैं या नहीं, कालीन का रंग एवं अन्य सजावट अनुकूल है या नहीं?

यदि अनामिका अंगुली तर्जनी से अधिक लम्बी हो, तो जातक में रिस्क लेने व जुआ खेलने की प्रवृत्ति उत्पन्न हो जाती है। यदि सूर्य रेखा सुस्पष्ट हो, तो उसे जुए में सफलता मिलती है और धनलाभ भी होता है, परन्तु यदि अनामिका तर्जनी अंगुली के बराबर हो, तो जातक में यही धुन होगी कि धनी होते हुए भी और धन-संग्रह करता जाये। यदि अनामिका अंगुली असामान्य रूप से लम्बी हो और टेढ़ी-मेढ़ी भी हो, तो जातक किसी भी उपाय से, चाहे वह अच्छा हो या बुरा हो, धन प्राप्त करने का प्रयास करेगा। यह अशुभ बनावट चोरों और अन्य अपराधियों के हाथों में पायी जाती है, जो धन प्राप्त करने के लिए। भयानक-से-भयानक कर्म कर गुजरते हैं। यदि इस स्थिति में मस्तिष्क रेखा करतल में बहुत ऊंचाई पर स्थित हो और अन्त में ऊपर की ओर मुड़ गयी हो, तो यह अवगुण और भी अधिक बढ़ जाता है।

यदि हाथ में एक से अधिक सूर्य रेखाएं मौजूद हों, तो जातक अत्यन्त कलाप्रिय स्वभाव का होता है। यदि ऐसी दो या तीन रेखाएं एक-दूसरे के बिलकुल समानान्तर हो, तो जातक को दो-तीन क्षेत्रों में सफलता मिलती है (चित्र-627)। निबल और पतली अनेक सर्य रेखाओं की उपस्थिति से विचारधारा और कार्यशक्ति अनेक क्षेत्रों में बंट जाती है, जिससे सफलता की सम्भावना कम हो जाता है। इसलिए अनेक निर्बल रेखाओं की अपेक्षा एक या दो स्पष्ट सूर्य रेखाओं का होना शुभ और उत्तम माना जाता है, किन्तु भाग्य रेखा के सम्बन्ध में सिद्धान्त अलग हैं। 

अकेली शाखाहीन भाग्य रेखा जातक के जीवन में एकरसता लाती है और हानि पहुंचाती है। करतल को मध्य भाग उभरा हुआ हो, तो सूर्य रेखा का प्रभाव बढ़ जाता है, किन्तु यदि करतल के मध्य में गड्डा हो, तो सूर्य रेखा प्रभावहीन हो जाती है।

6. सूर्य रेखा के दोष

1. अस्पष्ट या धुंधली सूर्य रेखा : यदि हाथ में सूर्य रेखा न हो या बिलकुल अस्पष्ट या धुंधली हो, तो जातक कितना भी परिश्रम करे, उसकी योग्यता और विचारों को महत्ता नहीं मिलती।यह सम्भव है कि ऐसे लोग सम्मान के अधिकारी व योग्यतासम्पन्न हों, परन्तु यश से वंचित रह जाते हैं। कभी-कभी ऐसे लोगों की मृत्यु के पश्चात् क़द्र होती है, किन्तु जीवित रहते ये अपनी योग्यता का फल नहीं भोग पाते।

2. गहरी और चौड़ी सूर्य रेखा : गहरी और चौड़ी सूर्य रेखा वाले जातक सुन्दरता के प्रति शीघ्रता से आकृष्ट होते हैं, किन्तु उनमें रचनात्मक कार्य करने की क्षमता कम होती है तथा उनका ध्यान विचलित होता रहता है। उनमें एकाग्रता का अभाव होता है।

3. श्रृंखलाकार सूर्य रेखा : सूर्य रेखा में उपस्थित द्वीप चिह्न जातक की प्रतिष्ठा का नाश कर देता है। श्रृंखलाकार रेखा द्वीप चिह्नों से मिलकर बनी होती है। इसलिए यह सफलता व सौभाग्य को बाधित कर देती है। ऐसी रेखा का न होना ही ठीक है।

4. लहरदार सूर्य रेखा : लहरदार सूर्य रेखा (चित्र-629) विचारों और लक्ष्यों के प्रति जातक के अस्थिर विचारों को प्रकट करती है। यदि ऐसी रेखा के साथ मस्तिष्क रेखा और अंगूठा श्रेष्ठ हो, तो सफलता की सम्भावना बढ़ जाती है।

5. अनामिका के तीसरे पर्व तक जाने वाली सूर्य रेखा : यदि सूर्य रेखा अपने समापन स्थान को पार करती हुई अनामिका के तीसरे पर्व में प्रवेश कर जाये (चित्र-630), तो जातक प्रतिष्ठा के लिए अतिवादी स्वभाव का हो जाता है। उसके लिए जीवन में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण तथ्य प्रतिष्ठा बन जाती है और वह प्रतिष्ठा की प्राप्ति के लिए अपने जीवन की अन्य पारिवारिक व सामाजिक जिम्मेदारियां भूल जाता है। यहां तक कि अपने जीवन की आहुति देकर भी प्रतिष्ठा और मान-सम्मान प्राप्त करने का प्रयास करता है। ऐसे लोग बहुत ही अहवादी, आत्मनिष्ठ व आत्मकेन्द्रित स्वभाव के होते हैं और जीवन में प्रगति की हर चीज़ को अपनी प्रतिष्ठा के तराजू में तौलते हैं। यदि हाथ के अन्य लक्षण अशुभ हो, तो जातक कुख्यात होकर भी अपनी आकांक्षा को पूरी करने से नहीं घबराता।

6. आड़ी रेखाओं से कटी हुई सूर्य रेखा : यदि सूर्य रेखा अनेक छोटी-छोटी जाड़ी रेखाओं से कटी हुई हो (चित्र-631). तो जातक की कलात्मक जीवन प्रगति या करियर को शत्रुता रखने वाले प्रतिद्वन्द्वी बाधित करते हैं। यदि ऐसी आड़ी रेखाएं सूर्य रेखा के बिलकुल आरम्भ में हों, तो यह समझना चाहिए कि माता-पिता से सम्बन्धित शत्रु जातक को हानि पहुंचाने का प्रयास करते हैं, किन्तु यदि आड़ी रेखाएं भाग्य रेखा के मध्य, ऊपर या अन्त में हों, तो प्रतिस्पर्धी स्वयं जातक के ही शत्रु होंगे।

यदि शनि क्षेत्र से आने वाली कोई आड़ी रेखा सूर्य क्षेत्र में सूर्य रेखा को काट दे (चित्र-632), तो जातक गरीबी के कारण अपनी सफलता से वंचित रह जाता है, अर्थात् आर्थिक असमर्थता के कारण उसकी जीवन-प्रगति में बाधा उत्पन्न होती है। ऐसा योग प्रायः साहित्यकारों व संगीतकारों के हाथों में होता है। किन्तु यदि ऐसी रेखा बुध क्षेत्र से आकर सूर्य रेखा को काट दे (चित्र-633), तो जातक का उसके चञ्चल व ऐय्याश स्वभाव के कारण असफलता का सामना करना पड़ता है। यदि इस योग में बध क्षेत्र अधिक विकसित, उभरा हुआ व दोषपूर्ण हो तथा कानाष्ठका अंगुली भी टेढी हो तो जातक के कुटिल स्वभाव के कारण उसका सफलता में बाधा उत्पन्न होती है। याद उच्च मंगल के क्षेत्र से निकलकर कोई आडी रेखा सूर्य रेखा को काट दे 3-634), तो शत्रुओं के द्वारा उत्पन्न की गयी विषम परिस्थितियों के समाधान
में धनहानि होती है।

यदि उच्च मंगल क्षेत्र से निकलने वाली कोई वलयाकार आड़ी रेखा सूर्य क्षेत्र में सूर्य रेखा को काटकर शनि क्षेत्र की ओर बढ़ जाये (चित्र-635), तो जातक की अनेक महत्त्वाकांक्षाएं धूल में मिल जाती हैं, जबकि इनकी पूर्ति के लिए वह हर सम्भव साधनों व शक्तियों का उपयोग करता है।

7. सूर्य रेखा का खण्डित होना:- यदि सूर्य रेखा बीच में टूटी हुई हो, तो जातक को आर्थिक और प्रतिष्ठा से सम्बन्धित क्षति या दुर्भाग्य का सामना करना पड़ता है। यदि बायें हाथ में सूर्य रेखा खण्डित हो, तो परिवार वालों को आर्थिक क्षति होती है। यदि दाहिने हाथ में सूर्य रेखा टूट जाये, तो स्वयं जातक को आर्थिक क्षति होती है।

ऐसी सूर्य रेखा जो बीच में खण्डित हो जाये और उसकी ऊर्ध्वगामी शाखा कटान बिन्दु के थोड़ी नीचे से आरम्भ हो (चित्र-636), तो यह जातक द्वारा अपनी इच्छा से किये गये प्रतिष्ठा एवं कार्यक्षेत्र में परिवर्तन का संकेत है। यदि ऊर्ध्वगामी रखाखण्ड स्पष्ट हो और सूर्य क्षेत्र तक पहुंच जाये, तो इसे शुभ व सौभाग्यशाली लक्षण मानना चाहिए। इसमें न तो आर्थिक हानि होती है और न ही प्रतिष्ठा पर कोई बुरा प्रभाव पड़ता है।

यदि सूर्य रेखा वृहत् आयत अर्थात मस्तिष्क रेखा और हृदय रेखा के बीच में कटी हुई हो (चित्र-637), तो सफलता की अच्छी सम्भावना रहती है।

यदि सूर्य रेखा वृहत् आयत में टूटी हुई हो और शुक्र क्षेत्र में जाने वाली प्रभाव रेखा कटान बिन्दु के पास उसे स्पर्श करे, चित्र-638 तो यह जातक द्वारा अपने विचारों की मान्यता के लिए किये जाने वाले संघर्ष में मिली असफलता का संकेत है।

7. सूर्य रेखा में विभिन्न चिह्न

1. वर्ग चिह्नः यदि सूर्य रेखा में वर्ग चिड़ हो चित्र को मान-प्रतिष्ठा को हानि पहुंचाने का प्रयत्न करने वाले उसके विरोध और शत्रुओं से उसकी रक्षा होती है और धनहानि भी नहीं होती हुई रेड के में वर्ग चिह्न हो, तो सभी दोषों का निवारण होता है।

2. त्रिकोण चिहः सूर्य रेखा से जुड़ा हुआ हुदय रेखा के शत कि हो (चित्र-640), तो उस समयावधि में जातक को खुशी और प्रतिष्ठा मिलती है। यह योग सुखी और समृद्धिशाली जीवन का भी परिचायक है।

3. क्रॉस चिह: यदि सूर्य रेखा पर बुध क्षेत्र की ओर ऊस क्षेत्र हो (चित्र-641), तो जातक में यापारिक योग्यता की कमी होती है जैसे - असफलता मिलती है।

यदि क्रॉस का चित्र शनि क्षेत्र की ओर हो चित्र (642) तो जातक गंभीर स्वभाव का व पवित्र मन वाला होता है। उसकी प्रवर्ति धार्मिक भावनाओ की और होती है।

यदि शनि क्षेत्र की ओर क्रास चिह्न हो, चन्द्र और शनि क्षेत्र दूषित हत्या मस्तिष्क रेखा चन्द्र क्षेत्र की ओर अधिक झुकी हुई हो (चित्र-543, तो जातक को धार्मिक उन्माद का खतरा रहता है। यदि शनि क्षेत्र की ओर से देह हों, तो यह प्रवृत्ति अधिक तीव्र होती है। यदि सूर्य रेखा का अन्त क्रास हि से हो (चित्र-644), तो जातक को अपने गलत निर्णयों के कारण कलकित होना पड़ता है व उसकी प्रतिष्ठा अन्त में धूल में मिल जाती है।

4. बिन्दु चिह्न : यदि सूर्य रेखा और हृदय रेखा के काटने के स्थान प्रकला बिन्दु हो (चित्र-645), तो उस अवस्था में जातक के दृष्टिहीन होने की सम्भावना होती है।

5. नक्षत्र चिह्न :सूर्य रेखा पर नक्षत्र चिह्न का होना (चित्र-65 इयत शुभ लक्षण है। इसके होने से जातक को प्रतिभा, सुख, सौभाग्य, सफलता, इन व ख्याति की प्राप्ति होती है।

यदि सूर्य रेखा के आरम्भ, अन्त या अन्य स्थानों पर नक्षत्र चिङ्ग हो, तो अत्यन्त शुभ होता है, किन्तु यदि यूरेनस क्षेत्र में सूर्य रेखा पर नक्षत्र चिह्न हो क्षेत्र तो यह किसी बड़ी विपत्ति का परिचायक है। यूरेनस क्षेत्र में सूर्य रेखा के ऊपर नक्षत्र चिह्न का होना अशुभ लक्षण है।

यदि सूर्य रेखा से निकलने वाली किसी शाखा में नक्षत्र चिह्न हो, तो यह भी एक अत्यन्त शुभ लक्षण है। नक्षत्र चिह्नयुक्त सूर्य रेखा की शाखा जिस ग्रह क्षेत्र की ओर जाती है या जिस रेखा से मिलती है, उसी के शुभ गुणों को द्विगुणित कर देती है (चित्र-648)।

6. द्वीप चिह्न : यदि सूर्य रेखा में द्वीप चिह्न हो (चित्र-649), तो जातक के धन व मान-प्रतिष्ठा को अत्यधिक हानि पहुंचती है, वह पदच्युत हो जाता है और कलंकित जीवन व्यतीत करता है। यदि द्वीप के अदृश्य हो जाने या उसकी अवधि समाप्त हो जाने पर बाद की रेखा सबल हो, तो जातक अपनी खोयी हुई प्रतिष्ठा और पद को पुनः प्राप्त कर लेता है तथा उसके ऊपर लगा हुआ कलंक धुल जाता है

यदि सूर्य रेखा के अन्त में द्वीप चिह्न हो (चित्र-650), तो यह एक अशुभ संकेत है। जातक को अन्तिम समय में अन्धकारपूर्ण जीवन व्यतीत करना पड़ता है, उसकी समृद्धि और प्रतिष्ठा को हानि पहुंचती है।

यदि सूर्य रेखा के आरम्भ में द्वीप चिह्न हो (चित्र-651),तो जातक को अनुचित प्रेम सम्बन्धों के कारण जीवन में सफलता मिलती है। यह योग किसी उच्च स्थिति के व्यक्ति के जारज पुत्र के उज्ज्वल भविष्य का सूचक है। यदि द्वीप चिह्न के बाद सूर्य रेखा स्पष्ट और सुन्दर हो, तो जातक वैभवपूर्ण व सुद जीवन व्यतीत करता

यदि सर्य रेखा के बीच में द्वीप चिह्न हो और जीवन रेखा दोषयुक्त हो (चित्र-652), तो आंख की बीमारी का संकेत मिलता है।

यदि सूर्य रेखा के बीच में द्वीप चिह्न हो और शुक्र क्षेत्र से निकलने वाली प्रभाव रेखा द्वीप चिह्न के पहले जुड़ गयी हो (चित्र-653), तो पारिवारिक जीवन में कोई कलंक लगने व प्रतिष्ठा या धनहानि होने का खतरा रहता है।

9. आड़ी रेखा
यदि सर्य रेखा किसी आड़ी रेखा से कटी हुई हो, तो प्रतिष्ठा व धनहानि का संकेत देती है। यदि सूर्य रेखा को विवाह रेखा आकर काट दे या उसे बढ़ने से रोक दे (चित्र-654), तो जातक को विवाह के कारण प्रतिष्ठा और धनहानि सहनी पड़ती है और वह पदच्युत हो जाता है।

चित्र समय के आभाव के चलते प्रकाशित नहीं किए जा सके है लेकिन जल्द ही किए जाएंगे । 


नितिन कुमार पामिस्ट

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Aaj har insan paresan hai aur samasya khatham hone ki bajaay badti jaa rahi hai (insan pehly se hi paresan tha aur upar se "corona" jaisi mahamari aa gayi "ek to kodh aur upar se khujli" wali baat ho gayi).  Insan pehly hi dukhi aur iski wajah se aur dukhi ho gaya.  Aaj sabki aajeevika par bahut farak pad gaya hai aur is wajah se bhi gherlu hinsa aur samajik tana bana toot raha hai.

Aapko yaha par ek bahut hi aasan aur upyogi totka diya jaa raha hai jo aapko holika dahan ke dauran karna hai aur isko karne ke baad aapki manokamna puri hogi aur aapki samasya ka ant hoga.

Aapko ek nariyal le lena hai (jatayukt) hath mein aur holika ki 11 parikarma karni hai aur har parikarma karte waqt aapko apne man (heart) mein apni prathana bolni hai aur phir wo nariyal aapko holika (holi dahan ki agni mein) daal dena hai aur phir waha se raakh le aani hai aur us raakh ko apne pass laal kapde ki thaili mein daal kar kahi par bhi rakh lena ya locker mein rakh lena jaha par aap paise rakhte hai ya phir apne ghar ke mandir mein rakh lena hai aur usko agli (next) holika dahan tak apne pass rakhna hai aur agali holika dahan mein us ko daal dena aur isi tarah se nai (new) bana kar apne pass rakh leni hai.


फिंगर प्रिंट्स हस्तरेखा | Finger Prints (Gylph) Palmistry

फिंगर प्रिंट्स हस्तरेखा | Finger Prints (Gylph) Palmistry

फिंगर प्रिंट्स हस्तरेखा | Finger Prints Palmistry

ग्लिफ आकृति (Glyph Patterns) फिंगर प्रिंट्स कोरोलॉजी में विज्ञान और कला का संगम है। इसमें समाहित पांचों तत्व उस संवाद चिकित्सा (Dialogue therapy) के सदृश्य हैं, जिसमें परामर्श, अनुशिक्षण (Coaching) पूर्वी एवं पश्चिमी हस्त रेखा शास्त्र, चिकित्सीय स्पर्श (Therapeutic touch) और अंतर्ज्ञान सम्मिलित हैं। परामर्श चिकित्सा (Counselling therapy) के रूप में हाथों की विशेषताओं को समझने एवं व्याख्या करने के लिए पांचों तत्वों वाला कीरोलॉजी 'तत्वों की भाषा' की ओर ध्यान खींचता है। हाथों की बनावट, आकृति एवं चिन्हों के आधार पर कीरोलॉजर्स लोगों के स्वभाव एवं प्रवृत्ति, व्यक्तित्व, भावनात्मक स्थिति, आवश्यकता, संवेदनशीलता, सामंजस्य स्थापित करने की कुशलता, व्यावसायिक योग्यता और अभिवृत्ति को पहचानने का प्रयास करते हैं।

पृथ्वी, जल, अग्नि और वायु इन सभी तत्वों के कुछ विशेष सिद्धांत और हस्ताक्षर हैं। हाथों की विशेषताओं को तत्वों के साथ जोड़ा गया है ताकि हमारे जीवन की शारीरिक, भावनात्मक, व्यावसायिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक पहलू की समझ को और विकसित किया जा सके। हमारे फिंगर प्रिंट और ग्लिफ (Glyph) पूर्व निर्धारित, अपरिवर्तनीय, निश्चित चिन्ह हैं। इनकी अपनी अलग विशिष्टता होती है। ये ऊर्जा के ऐसे प्रवेश द्वार हैं, जिनके द्वारा हम अपनी वास्तविक प्रतिक्रियाओं को अपेक्षाकृत सही ढंग से समझ और व्यक्त कर सकते हैं। इस अध्याय में हम छः। प्रमुख फिंगर प्रिंट्स (Glyphs) की व्याख्या करेंगे।

प्रकार - तंबूनमा मेहराब, चक्र, सामान्य मेहराब, संयुक्त लूप, त्रिकोणीय त्रिज्या, सामान्य लूप

प्रत्येक फिंगर प्रिंट (Glyph) के विशेष लक्षण

त्रिकोणीय त्रिज्या (Tri-radius) त्वचा पर एक मेड़ (Ridge) सी रचना है। यह तीन दिशाओं से आकर, आपस में एक बिंदु के पास मिलते है। ये तीनों भाग किसी की तरह प्रतीत होते हैं। यह त्रिज्या-गठन अन्य सभी ज्ञात फिंगर प्रिंट्स के साथहैं। उंगली के पहले पोर पर जिस प्रकार का चिन्ह दिखाई देता है, उसके अनम तत्व-अधिपति भी होता है। यह शासक या अधिपति विश्लेषण को परिष्कृत करने का प्रकार करता है, जैसे हाथ पर अन्यत्र कोई भी चिन्ह करता है।

1. सामान्य/सरल मेहराब (Plain Arch) (पृथ्वी तत्व द्वारा शासित)- यह मेहराब उंगली के एक ओर से दूसरी ओर को पार करता है। इसमें कोई भी। त्रिकोणीय त्रिज्या (Tri-radius) नहीं होती। ये मेहराब साधारण पहाड़ियों के समान दिखाई देते हैं। पृथ्वी तत्व वाले ठोस, भरोसेमंद और मंथर गति वाले होते । हैं। यदि आप अधिक मेहराब वाले हैं तो आप सहयोग देने वाले, विश्वसनीय भरोसेमंद, गंभीर और घरेलू प्रकृति के हैं।

2. नुकीले/तंबू जैसे मेहराब (Tented Arch) (अग्नि तत्व द्वारा शासित)यह मेहराब एक केंद्रीय रूप से स्थित त्रिकोणीय-त्रिज्या के ऊपर दिखाई देता है।। यह देखने में एक खंभे के सहारे खड़े टेंट या ज्वालामुखी वाले पहाड़ के जैसा। दिखाई देता है। यदि आपकी उंगलियों पर एक से अधिक नुकीले मेहराब हैं तो । आप स्वभाव से तीक्ष्ण, उत्साही और बेचैन हैं। आपको अक्सर अपने गुस्से पर काबू पाने के लिए शांत वातावरण की आवश्यकता पड़ती है।

3. चक्र (Whorl) (वायु तत्व द्वारा शासित)- यह किसी स्पाइरल या लक्ष्य केन्द्र । (Bull's eye) की तरह दिखाई देता है और दो त्रिकोणीय त्रिज्याएं हर चक्र को सहारा देती हैं। वायु तत्व सिद्धांत रूप में अलगाव, फासला और संचार से जुड़ा। है। यदि आपके हाथ में कई चक्र हैं तो आप प्रवृत्ति से स्वतंत्र, मौलिक और । व्यक्तिवादी हैं, आप समूह से हटकर काम करना पसंद करते हैं। आपका व्यक्तित्व रेगिस्तान में खड़े अकेले पेड़ के समान होता है। आप चीजों का निरीक्षण, विश्लेषण कर अकेले सबसे अच्छा काम करते हैं, दूसरों को विश्वास में लेकर काम करने का स्वभाव नहीं होता।

4. सामान्य लूप/फंदा (Loop) (जल तत्व द्वारा शासित) लूप पानी की एक छोटी बूंद की तरह दिखाई देते हैं। सामान्य लूप उंगली के पहले पोर पर एक ही ओर अंदर से बाहर की। ओर बहता सा दिखाई देता है। यह निशान अधिकांश उंगलियों। पर दिखाई देता है और इसे एक त्रिकोणीय त्रिज्या का सहारा प्राप्त होता है। जल द्वारा शासित होने के कारण संवेदनशीलता, आसानी से सामंजस्य स्थापित करना और मिलकर चलना सामान्य लप वालों की प्रवृत्ति होती है। यदि हाथ में कई सामान्य लूप हों तो व्यक्ति भावनात्मक, कल्पनाशील, सहजता से अनुकूलन करने वाले और प्रतिक्रियाशील होते हैं। ऐसे व्यक्ति समूह के साथ रहना और उसमें विलय के इच्छक होते हैं।

5. संयुक्त लूप (Composite loop) (जल तत्व द्वारा शासित)यिन/यांग की तरह ही, दो लूप एक दूसरे जुड़े होते हैं और दो त्रिकोणीय त्रिज्याओं का सहारा पाते हैं। यदि आप संयुक्त या सम्मिश्रित लूप वाले हैं, तो आपके अंदर भावनात्मक उथल-पुथल, आंतरिक संघर्ष और अस्थिरता बनी रहेगी। आप एक कूटनीति और न्यायप्रिय व्यक्ति हैं और पूर्वाग्रह एवं पक्षपात को नापसंद करते हैं। आप अत्यधिक संवेदनशील और अंतर्ज्ञानी (Intuitive) हैं।

6. मयूर नेत्र के सदृश (Peacock's eye) (जल एवं वाय तत्वों द्वारा शासित)- एक चक्र एक लूप के अंदर होता है, चक्र के आसपास का क्षेत्र अश्रु की बूंद के समान दिखाई देता है। एक त्रिकोणीय त्रिज्या इसे सहारा देती है। परंपरागत रूप से इसका होना सौभाग्यशाली माना जाता है। ऐसे फिंगर प्रिंट वाले व्यक्ति सूक्ष्मदर्शी होते हैं, उनमें गहन अवलोकन की अच्छी क्षमता होती है। नक्शा, रूपरेखा, डिजाइन आदि में उनकी रुचि होती है। उनमें आत्मरक्षा की विकसित भावना होती है और ये अपनी सुरक्षा पर कोई आंच नहीं आने देते। 

कोई भी फिंगर प्रिंट अकेला कोई प्रभावशाली परिणाम नहीं दे सकता। दसों उंगलियों के फिंगर प्रिंट को देखकर ही कोई उचित परिणाम निकाला जा सकता है।

फिंगर प्रिंट्स भी हाथ के अन्य चिन्हों के समान ही हैं और इन्हें हमेशा समग्र रूप में पूरे। हाथ से जोड़कर देखना चाहिए। (उदाहरण के लिए एक सुन्दर हृदय रेखा, वायु-प्रधान हाथ पर जल-प्रधान हाथ से भिन्न अर्थ दिखाएगी।) 

फिंगर प्रिंट्स जन्म के पूर्व मिले वे अपरिवर्तनीय चिन्ह हैं, जिन्हें किसी व्यक्ति के जीवन की। क्षमता के मानचित्र के रूप में पढ़ा जा सकता है। 

(Glyphs) फिंगर प्रिंटस का एक अन्य श्रेणी में विवरण 

1. सामान्य मेहराब (सीप)- हावी होने की प्रवृत्ति, शंकालु, जिद्दी, और संकोची स्वभाव, पाचन की कमजोरी, दोषपूर्ण रक्त की स्थिति। 

2. नुकीले, तंबू जैसे मेहराब- ध्वनि के प्रति संवेदनशील, संगीत के शौकीन, अतिसंवेदनशील और तनावग्रस्त प्रवृत्ति। 

3. सामान्य लूप (शंख)- बहुमुखी प्रतिभा, मानसिक एवं भावनात्मक रूप से लचीले।

4. चक्र- कार्य और विचार में स्वतंत्र, मौलिक विचार वाले किन्तु स्वभाव से शंकालु। ये लोग अपनी आवश्यकता पड़ने पर पारंपरिक बन जाते हैं। ये दूसरों के साथ अपनी योजना साझा नहीं करते, गुप्त रवैया अपनाते हैं। यदि अंगूठे पर चक्र हो तो यह सौभाग्य, अच्छा जीवनसाथी और सुखी जीवन दर्शाता है।

5. सम्मिश्रित लूप- यिन-यांग की प्रकार का संयुक्त मेहराब। व्यावहारिक एवं भौतिक मानसिकता की ओर झुकाव। भावनाओं को सैद्धांतिक रूप से धीरे-धीरे समझने के कारण मन में भ्रम की स्थिति मोटापे की संभावना।


उंगलियों और अंगूठे पर विभिन्न फिंगर प्रिंट्स (Glyphs)

1. यदि अंगूठे की पहली गांठ पर 'यव' हो और पहले पोर पर चक्र हो, तो व्यक्ति को पैतृक संपत्ति 'मिलती है। यदि चक्र के स्थान पर लूप हो तो व्यक्ति को पैतृक संपत्ति का लाभ नहीं मिलता।

2. तर्जनी के पहले पोर पर चक्र: मित्रों से सहायता।

3. मध्यमा के पहले पोर पर चक्र: आध्यात्मिक उन्नति एवं गूढ़ ज्ञान में प्रवीणता। यदि चक्र के स्थान पर लूप हो, तो धन के मामले में भाग्यशाली नहीं होते।

4. अनामिका के पहले पोर पर चक्र: सामाजिक संपर्क से लाभ। यदि यह एक लूप हो, तो सार्वजनिक हित पर खर्च का संकेत। कनिष्ठा के पहले पोर पर चक्र: तैयार माल के लेन-देन में लाभ। लूप यहां हानि का संकेत है। किसी भी उंगली के पहले पोर पर चक्र, संबंधित पर्वत की शक्ति बढ़ाता है।

(Glyph) फिंगर प्रिंट का एक अन्य विवरण

चक्र- यह आजादी-पंसद, स्वाभिमानी, हठधर्मी और आत्मनिर्भर व्यक्ति का संकेत है। चक्र प्रायः माननीयों और बड़े व्यवसायी लोगों के हाथों पर पाया जाता है। यह कभी 'जी हजूरी' करने वाले या अधीनस्थ कर्मचारियों की उंगलियों पर शायद ही पाया जाता हो।

लूप- इसे बहुमुखी प्रतिभा का प्रतीक कहा जाता है जो बुध-प्रधान होते है- तेज दिमाग, एवं त्वरित भावनात्मक प्रतिक्रियाएं। ऐसे फिंगर प्रिंट किसी विषय के विशेषज्ञ के बजाए हरफन मौला व्यक्तियों के हाथ पर ज्यादा पाए जाते हैं।

उच्च मेहराब- ऐसा पैटर्न लूप की तरह ही, त्वरित और प्रतिक्रियाशील दिमाग का संकेत है। ऐसे लोग प्रायः अतिसंवेदनशील होते हैं, संभवतः तीक्ष्ण और तनावग्रस्त प्रवृत्ति वाले। उच्च मेहराब अक्सर उत्कृष्ट कलाकार और संगीत प्रिय लोगों के हाथों पर पाए जाते हैं।

हल्का /सामान्य/छोटा मेहराब (Low Arch) - उच्च मेहराब वालों के ठीक विपरीत ये लोग हमेशा अपनी व्यक्तिगत भावनाओं पर काबू रखते हैं। ऐसे लोग किसी भी चीज को प्रत्यक्ष देखकर भी उसके महत्व को स्वीकार करने में कठिनाई महसूस करते हैं, और चीजों को कमतर देखने की इनकी सहज प्रवृत्ति इन्हें शंकालु बनाती है, उलझन में डालती है। ऐसे लोग प्रत्यक्ष रूप में अशिष्टता की हद तक सचेत, सतर्क रहते हैं, जबकि वास्तव में स्नेही और आत्मीयजन होते हैं।

संयुक्त/सम्मिश्रित लूप- इस प्रकार का फिंगर प्रिंट चक्र या लूप के आपसी विरोध से बना दिखाई देता हैं। इसे दोहरे व्यक्तित्व का सूचक कहा जा सकता है। सम्मिश्रित निशान वालों का मन सबसे ज्यादा एवं जल्दी बदलता है। परिस्थितियां इन्हें हमेशा ही सिद्धांतों एवं नियमों को ताक पर रखने की प्रवृत्ति देती हैं। ये लोग इरादतन झूठ नहीं बोलते, लेकिन ऐसे लोग कोरा आश्वासन देने और तुरन्त ही पलट जाने में माहिर होते हैं। 

क्योंकि कोई भी 'एक' प्रकार का विवरण फिंगर प्रिंट्स (Glyph) के सभी आयामों के लिए पर्याप्त नहीं है, हमने तीन अलग-अलग प्रकार से विवरण देने का प्रयास किया है। सामूहिक रूप से ये विवरण फिंगर प्रिंटस के अर्थ को बेहतर और करीब से समझने में मदद करते हैं।

SIGNS OF DIVORCE AND SEPARATION, TALAAK PALMISTRY

SIGNS OF DIVORCE AND SEPARATION




There are so many signs and indications that tell whether the person would be having Divorce or Separation. But when you predict this type of thing you should not be telling it directly.

You should always convey it indirectly because predicting this with accuracy needs a lot of experience and practice. Some common major indications about Divorce and Separation are:

1. If a branch of Fate Line is raised from Mount Of Rahu or middle of Mount Of Rahu or Mount Of Ketu and conjunct with Heart Line then it indicates love converting into marriage but the person could get Divorce or may have Extramarital Affair. You should also consider Marriage Line. (fig-9A) If a branch of Fate Line is raised from Mount Of Rahu and cuts the Heart Line then it indicates love not converting in marriage or if converts then the person will get Divorced after a short period of time. (fig-9B)

2. If a big fork in Marriage Line then this indicates trouble in Married Life and Divorce but if the fork is not big then it would indicate Separation for some time.  (fig-10)

3. If Marriage Line is cut by any Influence Line then it indicates Separation from partner due to any reason. (fig-11)

4. If two strong Marriage Lines are running parallel then it also indicates Divorce.  Person will have two marriages.  (fig-12)

5. If a branch of Life Line is cut by an Influence Line which is raised from inside of Life Line and goes to Mount Of Saturn then it indicates Divorce. (fig-13)

6. If an Influence Line raised from inside of Life Line goes to Mount Of Saturn and gets forked there then it indicates sad Married Life or Divorce.  (fig-14)

7.  An Influence Line turned towards Mount Of Venus which runs parallel to the Life Line indicates Separation.  (fig-15)

8. An Influence Line raised from a line running parallel to Life Line joins Heart Line indicates Divorce.  (fig-16)

9.  Branch of Life Line cut by Influence Lines coming from inside of Life Line indicates Divorce.  (fig-17)


10.  If Marriage Line slopes down towards Heart Line but not touch the Heart Line then it indicates always quarrels between the couple.  (fig-18)

There are so many other signs and indications but I have given here the most common which you find in hands but sometimes it is noted that even with these indications a person has good Married Life and he may have some other problems.  So you need a lot of practice on these.

Hand Image Of Famous South Indian Actress Palmistry


 Hand Image Of Samantha Akkineni Palmistry

Indication of Delay In Progress On Hand Palmistry

 

Indication of Delay In Progress On Hand Plamistry

Indication of Delay In Progress On Hand Palmistry


Mount of Saturn is the main Mount in palmistry for delay (delay in marriage, career, and each aspect of life, etc).

If there are small horizontal lines (like ladder) underneath Mount of Saturn (middle finger) then it indicates late success, delay in marriage, late pregnancy, join pain, many obstacles in early life, etc.  

Good & Bad Signs On Mount Of Venus | Overdeveloped Mount Of Venus & Flat Mount of Venus - Palmistry

 

Good & Bad Signs On Mount Of Venus | Overdeveloped Mount Of Venus & Flat Mount of Venus - Palmistry

Good & Bad Signs On Mount Of Venus | Overdeveloped Mount Of Venus & Flat Mount of Venus - Indian Palmistry


Depressed Or Flat Mount Of Venus

Result:- If Mount of Venus is flat/short/depressed then it denotes lack of energy, less interest in sex, infertility, cautious and listless or sometimes subject is suffering from sexual dysfunction, ED, sexual disorder due to over-masturbation ( means subject is thinking a lot about sex but not able to perform in real life or not able to get partner for him).  In women's hand it also denotes infertility, late conceive and gynecological diseases.

Vast Or Overdeveloped Mount Of Venus

If Mount of Venus is overdeveloped, big and fleshy then it denotes success in abroad, venereal disease, oversexed, money-minded, lots of travel, always desire for change, spend majority of life away from birthplace, love to travel and inclination towards luxury, and sometimes bad habits or addiction related to alcohol or drugs, etc .

Special Or Good & Bad Sign On Mount of Venus
 

Star On Mount Of Venus

Result: Increase of sensual thoughts, and inclination towards luxurious life, good financial success after marriage, and success in love, etc.


Island On Mount Of Venus

Result: Health problems due to bad habits mostly related to sex, etc and bad marriage.


Circle On Mount Of Venus

Result: Health problems (weak constitution) mostly in old age.


Cross On Mount Of Venus

Result: Obstacles in life by relatives and infertility and bad marriage.


Square On Mount Of Venus

Result: Control on sexual desire and protect the subject from defamation through opp. sex.


Triangle On Mount Of Venus

Result: Gentlemen who gives more importance to person than money and sex in relationship.


Trident On Mount Of Venus

Result: Rich and wealthy.


Mole On Mount Of Venus

Result: Chances of STD, many relationships, but subject is rich and wealthy.


Grille On Mount Of Venus

Result: Subject is not able to control on his sexual desire and gives more importance to sex than person in relationship, involved in many relationships.


Swastika On Mount Of Venus

Result: Secret donation, works for humanity, rich and wealthy, etc.


Read Here - Description About All Mounts Indian Palmistry

The line of Intuition | Line Of Psychic

Minor Lines - The line of Intuition | Line Of Psychic
This line would rarely be found on square or spatulate hands as this is more in tune with the conic or psychic hand. It is like a semicircular segment lying on the mount of the Moon and sort of connecting it to the mount of Mercury. It is nearly in the same position as the line of Mercury but it distinguishes itself by its curved formation. It indicates a person keenly sensitive to his surroundings and influences.

Such a person has an intuitional (beyond reason or logic) feeling of presentiment pertaining to others. Such people receive uncanny vibrations from others and their judgement of people or places or happenings turns out to be true.

If one is conscious of it one can develop this attribute, otherwise it can also fade away with time. A deep, well-marked line of intuition indicates strong intuition, well utilized by successful mediums and clairvoyants. A broken or defective line shows only a limited or unreliable intuitive power.

The Judgement of Personality Through Fingers, Thumb and Lines | Indian Palmistry

The Judgement of Personality Through Fingers, Thumb and Lines | Indian Palmistry

The Judgement of Personality
Through Fingers, Thumb and Lines...

(a) If the fingers are flexible but the thumb is stiff and straight, the person can give without much attachment. If the thumb is flexible and the fingers are stiff, one will give emotional and verbal sympathies but not any material help.

(b) If the finger of Jupiter is long, but the mount of Jupiter depressed, the person has a false sense of superiority. If the Jupiter finger is crooked or badly formed, it will show an anti-social tendency.

(C) The third finger (Sun), when slightly longer than the first, creates a balance between
ambition and self-contentment. When crooked or ill-formed, it shows lack of nobility.

(d) When the little finger is crooked and leans towards the third finger, the person is a liar. When the ring finger and the middle finger bend towards each other, the person becomes irresponsible. When the middle finger is crooked or ill-formed and its tip is not straight, a person becomes unbalanced in behaviour.

(e) A short Heart Line shows a low-grade mentality.

(f) A person with thick hands and hard consistency will react violently to any provocative
situation.

(h) A supple thumb, rounded fingertips, the Head Line composed of islands, the Heart line chained and straight and a big island in the Health line are signs of loose morals and a flirtatious woman. Sex criminals have thick hands with soft consistency accompanied by other bad signs. A passionate person has thick hand with hard consistency.

(i) Anti-social/criminal tendencies are shown by the presence of a heavy thumb, coarse texture of skin, a raised Simian line, rayed and red-coloured mounts of Moon Venus, soft palm, short nails, cross in the plain of Mars, the Head line absence of Fate or other lines going towards fingers from the base of the palm.

(j) Jupitarian, Apollonian and Venusian are not criminal types. The Saturnian is a
a criminal type. A Mercurian is on the border line of shrewdness and disho A Lunarian is susceptible to untruth and a Martian to violence.

(k) A short, stiff, deformed or clubbed thumb, excess of whorls on fingers, a crooked little fingers crooked and or close to each other, stiff, coarse hands and skin, quadrangle, palm longer than fingers, short space between the thumb and the first finger, the Head line defective under the mount of Saturn, short distance between the fingers and the Heart line - two or more of the above signs show criminal tendencies.

(l) A cuning and unscrupulous person has the first finger small, the Heart line short and or broken, a supple thumb, a girdle of Venus, and one or two thick lines from the mount of Venus to the mount of Moon, cutting the Life line, causing him emotional excitement.

(m) A corrupt person has an ill-formed girdle of Venus in both the hands, and short or defective lines of Head and Heart.

(n) A miser has a thumb close to the fingers, which are bent inward, and the quadrangle in the palm is narrow.

(o) A violent person has a clubbed thumb, thick hard hands, raised mount of Mars, short lines of Head and Heart, and a large cross in the big triangle in the centre of the palm.

(p) A tactful person has long fingers, with waist-like base phalanges and the second knots prominent. The finger of Saturn is long and straight. All the lines on the palm are good and faultless, and there is a triangle on the Life Line.

(q) A homosexual generally has a girdle of Venus and a short, straight Heart line, supple thumb, long fingers but a short finger of Jupiter and the lines of Head and Life joined together in the beginning.

(r) A benevolent person has soft hands, long nails and fingers, wide quadrangle in the
palm and a good Heart line.

(s) A thief has hard, thick, heavy hands, the first phalange of the thumb clubbed, the mounts of Venus and Mars raised, a cross in the big triangle in the centre of the palm and a star or grille on the mount of Mercury and/or Mars.

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If you are from USA, or from outside of India then you need to pay 20 dollars (you will get report in 10 days) but if you want to get report in one day/24 hours then you need to pay 35 dollars.

Question: I want to get palm reading done by you so let me know how to contact you?
Answer: Contact me at Email ID: nitinkumar_palmist@yahoo.in.


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Answer: You will get detailed palm reading report covering all aspects of life. Past, current and future predictions. Your palm lines and signs, nature, health, career, period, financial, marriage, children, travel, education, suitable gemstone, remedies and answer of your specific questions. It is up to 4-5 pages.



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Answer: You will get your full detailed palm reading report in 9-10 days to your email ID after receiving the fees for palm reading report.



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Answer: You will receive your palm reading report by e-mail in your e-mail inbox.



Question: Can you also suggest remedies?

Answer: Yes, remedies and solution of problems are also included in this reading.


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Answer: Yes, gemstone recommendation is also included in this reading.


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(Take image from iphone or from any android phone) or you can also use scanner. 



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Answer: You need to capture full images of both palms (Right and left hand), close-up of both hands and side views of both palms. See images below.



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Question: How much the detailed palm reading costs?

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Option 2 - Palm reading report delivery time 1 day (24 hours)
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Question: I am living in India so what are the options for me to pay you?

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