Saturday, July 30, 2016

Myth About Short Life Line

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Short Life Line—Only reaching the center of the palm? A short life line, contrary to popular myth, does not mean a short life. The length of the life line is related more to a person's energy levels than to time or the length of life.

When short and thick, it indicates intense energy but a relatively incident-free life. This may mean a monotonous life, but it can also show that the subject has ceased to accept the challenges of life, and has become somewhat withdrawn or self-absorbed.

If the line is short and thin, faded or broken, poor health and withdrawal of social life may be the subjects challenge (see Figure 30).

Anyone who's practiced palm reading for a significant period of time knows that a short Life Line does not mean a short life. Never. Modern palm readers do not read the length of the Life Line as an indicator of length of life.

Thursday, July 28, 2016

Mount of Moon | Mount of Luna | Palmistry | Meanings | Position | Location

The Mount of Moon

  The Mount of Moon, also known as the Mount of Luna, is located on the palm of the hand at its base, on the little finger side of the hand.

   The mount of Moon represents:

Interest in poetry
Inclination towards the occult
Love of luxury
Influence of women (on men's hands)
Feminine health problems (in women's hands)

A well-developed mount of Moon indicates a highly imaginative person with creative qualities.

A cross on the mount of Moon shows health problems.

A star on the mount of Moon, while indicating vivid imagination, also portends travel dangers or danger of drowning.

A triangle on the mount of Moon accentuates imaginative qualities.

An island shows health problems, as does a spot.

A grille on the mount of Moon indicates a tendency to worry'.

A circle portends fear of drowning.

A square on the mount of Moon protects from travel dangers.

Tuesday, July 26, 2016

जीवन रेखा से व्यक्ति की आयु जानना

आप सभी के मन में इस प्रकार के सवाल अवश्य आते होंगे की क्या मैं अल्पायु हूँ ? मेरी आयु कितनी होगी ? मैं कितने वर्ष तक जियूँगा ?

जीवन रेखा से व्यक्ति की आयु जानना

हस्तरेखा की पुस्तकों में बताया गया होता है की यदि व्यक्ति की हृदय रेखा छोटी हो तो व्यक्ति अल्पायु होता है, यदि मस्तक रेखा छोटी हो तो व्यक्ति अल्पायु होता है, व जीवन रेखा छोटी हो तो व्यक्ति अल्पायु होता है , यदि जीवन रेखा के अंत में क्रोस हो तो व्यक्ति की आकस्मिक मृत्यु होती है ! इस प्रकार के कई योग हस्तरेखा की पुस्तकों में बताये गए होते, जिनमे कोई भी सत्यता नहीं होती है !

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अक्सर लोग इन पुस्तकों को पढ़कर चिंता में डूब जाते है की शायद इश्वर ने उनको कम उम्र दी है अपितु ऐसा नहीं होता है ! जीवन रेखा के छोटी होने पर कलाई (मणिबंद) से आती हुई भाग्य रेखा जीवन रेखा का कार्य करती है! जीवन रेखा से व्यक्ति की आयु का अनुमान लगाना कदापि उचित नहीं है ! जीवन रेखा से व्यक्ति के स्वास्थ्य और पारिवारिक परिस्थितियो में आने वाले उतार-चढाव का अनुमान लगाया जाता है !

यहाँ पर होलीवुड के प्रसिद्ध कलाकार गेरी कोलमन के हाथ का चित्र दिखाया जा रहा है आप देख सकते है की उनकी जीवनरेखा कलाई तक पहुच रही है व स्पष्ट है लेकिन गेरी कोलमन का निधन 42 वर्ष की आयु में ही हो गया था !

death from life line

short life death line

यहाँ पर होलीवुड की प्रसिद्ध कलाकार जेड गूडी के हाथ का चित्र दिखाया जा रहा है आप देख सकते है की उनकी जीवनरेखा 50-55 की आयु पर समाप्त हो रही है व ऐसी स्थिति में भाग्य रेखा जीवन रेखा का कार्य करती है लेकिन जेड गूडी का निधन सिर्फ 28 वर्ष की उम्र हो गया था !

hand predict death from short life line

यहाँ पर तमिल फिल्मो की प्रसिद्ध कलाकार सोंदार्या के हाथ का चित्र दिखाया जा रहा है आप देख सकते है की उनकी जीवनरेखा कलाई के समीप समाप्त हो रही है लेकिन सोंदार्या का निधन सिर्फ 28 वर्ष की उम्र हो गया था !

आप अनुमान लगा सकते है की अच्छी जीवन रेखा होने के पश्चात भी इन कलाकारों की मृत्यु कम उम्र में ही हो गयी व इसके विपरीत ऐसे लोग भी होते है जिनकी जीवन रेखा छोटी होते हुए भी वे लम्बी आयु प्राप्त करते है उसका कारण जीवन रेखा के पास से निकलती हुई भाग्य रेखा जीवन रेखा का कार्य करती है !

अर्थात, जीवन रेखा से आयु का अनुमान लगाना कदापि उचित नहीं है !

-नितिन कुमार

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Monday, July 25, 2016

Marriage line On Sadhu/Gay/Hijra/Eunuch Hand Indian Palmistry

Marriage line On Sadhu/Gay/Hijra/Eunuch Hand Indian Palmistry

Marriage Line is also called Line of Affection.  Marriage line does not necessarily show marriage it may only indicate attachment to someone male or female.  In other words this line can indicate anyone whom you consider a friend or loved one.  Marriage line is often found on unmarried person, celibates, saints (sadhu), and kinnar, bisexual, hinjda, eunuchs, and in such cases indicates strong friendship.  So every marriage line does not necessarily represent marriage but it does represent an affection that you have felt or feel for someone.    Keywords: Trans Man


Crooked Middle Finger

Bent Middle Finger

Crooked Middle Finger Leaning Left or Right No matter the middle finger is crooked, or leaning left or right, such a person is emotionally unstable. He is not able to control his self emotions. He smiles now but will be upset the next minute.  A crooked middle finger indicates an evil disposition or imbecility. A crooked middle finger signifies a person full of self pity.

Sunday, July 24, 2016

Parallel Marriage lines (Affection In Relationship)

Double/Parallel Marriage Lines:-

Everybody needs affection in relationship.  If two parallel lines run concurrently alongside each other and their respective lengths also correspond, it should be deduced that the native will have equal love for both the ladies: remember, in all the cases, the deepest and lengthiest affection line will be taken as the final line of affection.

The Venus Lines - Palmistry

The lines on the mount of Venus are known as Venus lines. Mostly, these arc vertical lines concentric to the line of life. The Venus lines represent relationships with the people around a person: friends, relatives etc. Vertical lines represent helpful relationships. Horizontal lines represent antagonistic: interference from people.

The more vertical lines there are, the more friends one will have and these indicate one's popularity in the social whirl. Persons devoid of lines on the Venus mount have very few friends. They do not need and do not get the affection of others. The Venus lines may be called the lines of personal contact. Venus lines starting from the line of life indicate sexual relationships.

The more prominent of the vertical Venus lines represent family attachment, usually towards one's siblings. The line of Mars should be clearly distinguished from the vertical Venus lines.  chinese palm reading

Saturday, July 23, 2016

The Line of Intuition or the Line of Moon

The line of intuition is the line starting from the lower part of the mount of Moon and going up to the mount of Mercury or negative Mars in a gentle curve (see diagram). This line, if present, indicates a strong gift of intuition. It is found in the hands of persons with unusual powers of the mind, extra-sensory perceptions and clairvoyance.  Hand Reading Money Line

Friday, July 22, 2016

जज (न्यायाधीश) का हाथ - हस्तरेखा

जज (न्यायाधीश) का हाथ- जिसके हाथ की अंगुलियाँलंबी व कोणदार हो और हृदय व मस्तिष्क केि रेखा के मध्यम भाग में चतुष्कोण होवे। बुध की अंगुली की प्रथम पौरलम्बी हो और गुरू की अंगुलीसीधी हो, सूर्यका पर्वतउतम उठाहुआ होदह मनुष्यकुशल, सार्थक, दयावान, न्यायाधीश तथा न्याय नीति का अच्छा ज्ञाता होता हैं।

Thursday, July 21, 2016

परिवार में सुख-चैन की कमी होना ( Parivar Mein Sukh Nahi Hona )

परिवार में सुख-चैन का नहीं होना :-

यदि आपके परिवार में कलह रहती है और सुख का आभाव है तो आप ये उपाय कीजिये आपको लाभ होगा ।

मंगलवार को सूर्यास्त के समय कुछ कच्चे कोयले जलाकर अंगारे बना ले और उन्हें किसी बर्तन में रखकर के उन पर लोबान  या देसी कपूर या गूगल को डाल दे और जो धुंआ निकले उस धुंए को सारे घर में घुमा दे और अंत में कोयले को घर के बाहर किसी स्थान पर डाल आए । ऐसा आपको तीन माह प्रत्येक मंगलवार को करना है । आपके परिवार में बरकत होने लगेगी और आपस में मन-मुटाव कम होगा और घर में शांति बनेगी ।

यदि परिवार पर कर्ज ज्यादा है तो ऋणहर्ता गणेश स्तोत्र , राम रक्षा स्त्रोत नियमित पडें और हनुमान जी की पूजा नियमित करें । 

Parivar Mein Sukh Chen Ka Nahi Hona:-  

Yadi aapke parivar mein kalah rahti hai aur sukha ka aabhav hai to aap ye upay kijiye aapko labh hoga.1

Mangalawar  ko suryast ke samay kuch kacche koyle jalakar ke angare bana le aur unhe kisi bartan mein rakhkar ke un pr lobaan ya deshi kapoor ya google ko daal de aur jo dunha nikle us dunhe ko sareein ghar mein ghuma de aur ant mein koyle ko ghar ke bahar kisi isthan pr daal aay.  Aisa aapko een mah prteyek mangalwar ko karna hai.  Aapke parivar mein barkat hone lagegi aur apas mein manutav kam hoga aur ghar mein shanti bangegi.

Yadi parivar pr karj jyada hai to hrinharta ganesh strot, ram raksha strot niymit pade aur hanuman ji ki puja vidhi poorvak kijiye.

सूर्य मुद्रिका ( Surya Mudrika )

सूर्य मुद्रिका

यह मुद्रिका धार्मिक प्रवृत्ति, साहित्यिक एवं व्यक्तिगत प्रतिभा का लक्षण है। सूर्य रेखा भी हाथ में होने पर यह अधिक उत्तम फल प्रदान करती है। दो सूर्य रेखाएं होने पर ऐसे व्यक्ति अत्यन्त प्रतिभाशाली और सतोगुणी देवता की उपासता करने वाले, प्रेमी व धार्मिक विचारों के होते हैं।

बुध या सूर्य के नीचे हृदय रेखा में द्वीप या अन्य दोष होने पर सूर्य मुद्रिका भी दोषपूर्ण हो तो व्यक्ति चाहे अन्धे ही क्यों न हों, अति प्रतिभाशाली होते हैं। सूर्य मुद्रिका टूटी व उंगलियों के पास होने पर इसके फलों में कमी देखी जाती है। अन्यथा यह हाथ में उत्तम लक्षण है।

डमरू (Damaru/Petllet Drum/Two headed Drum) In Palmistry


यह मस्तिष्क व हृदय रेखा के बीच में एक बड़ा गुणा का निशान होता है, जो बड़े अफसरों, ज्योतिषियों, अध्यात्मिक गुण सम्पन्न व्यक्तियों या किसी संस्था के पदाधिकारियों के हाथों में पाया जाता है। ऐसे व्यक्ति धनी व प्रतिष्ठित होते हैं। दोषपूर्ण होने पर यह भीख मांगने का लक्षण है। यदि यह चिन्ह दोनों आोर रेखाओं से न मिला अर्थात् स्वतन्त्र हो तो ऐसे व्यक्ति मन्त्रशक्ति था ज्योतिष विद्या में ख्याति प्राप्त करते हैं और इस विद्या के माध्यम से विपुल धन भी अर्जित करते हैं। इसका विशेष फल उसी दशा में होता है, जबकि इसकी स्थिति ठीक शनि के नीचे हो, नहीं तो कवल घुटनों में चोट आदि का भय रहता है।

लहरदार मस्तक रेखा

लहरदार मस्तक रेखा

टेड़ी-मेडी मस्तिष्क रेखा, टेड़ी-मेड़ी ही होती है। दोषपूर्ण मस्तिष्क रेखा के सारे फल यहां भी लागू होते हैं ।
विशेषतया किसी भी आदत के पक्के होने पर, ऐसे व्यक्ति वह आदत छोड़ने में कठिनाई महसूस करते हैं। इनका कोई भी कार्य लम्बे समय तक ठीक नहीं चल पाता। ऐसा देखा गया है कि इनके काम छः महीने ठीक और छः महीने खराब चलते हैं। ऐसे व्यक्ति मौसमी कार्य जैसे गन्ने का क्रेशर, भट्टा, अनाज का श्रेशर, चूने की भट्टी, बर्फ के कारखाने आदि के कार्य करते हैं। (नितिन पामिस्ट)

जंजीराकार मस्तिष्क रेखा

जंजीरदार मस्तक रेखा

इस प्रकार की मस्तिष्क रेखा द्वीप से मिलकर बनी हुई दिखाई देती है। यहां भी दोषपूर्ण मस्तिष्क रेखा के सभी लक्षण लागू होते हैं।

ऐसे व्यक्ति स्वभाव से चिड़चिड़े, कठोर व अपने ही मिजाज के होते हैं। इनका अपने मस्तिष्क पर नियन्त्रण नहीं होता। काम जिम्मेदारी से करने पर भी स्वभाव के कारण श्रेय नहीं मिलता, क्योंकि ये कार्य करके बखान करते हैं। ऐसे व्यक्ति ठोकर लगने पर भी नहीं सम्भलते। होशियार होते हैं साथ ही जिद्दी भी और रूखा व स्पष्ट बोलने की आदत होती है, फलस्वरूप देर से सफल होते हैं तथा इनके सम्बन्ध भी स्थाई नहीं होते और चिड़चिड़ेपन के कारण प्रत्येक कार्य में रुकावट आती है।

जंजीराकार मस्तिष्क रेखा होने पर यदि जीवन रेखा टूटी हुई हो, बुध की उंगली तिरछी एवं भाग्य रेखा मोटी हो तो ऐसे व्यक्ति घोखेबाज होते हैं। दूसरों को फसाकर अपना काम निकालते हैं और लेकर देना नहीं जानते। ऐसे व्यक्तियों से अधिक आत्मीयता व व्यवहार हमेशा हानिकारक होते हैं। यह वायदे के बिल्कुल पक्के नहीं होते, आजकल करते रहते हैं, न ही साफ जवाब देते हैं, न ही मना करते हैं और न उस काम को करते ही हैं।

इनको अधिक गम या खुशी होने पर स्नायु दोष हो जाता है। मस्तिष्क पर बोझ पड़ने, अघिक पूजा करने व ठेस लगने आदि से मस्तिष्क में विकार उत्पन्न हो जाते हैं। मस्तिष्क रेखा जंजीर की तरह व बुध या सूर्य के नीचे अन्य रेखाओं में भी दोष हो या लाल हो तो सिर में दर्द व आंखों में खराबी होती है। यह दोष वास्तव में वंशानुगत होता है, परिवार में कई व्यक्तियों को ऐसा रोग देखा जाता है। स्त्रियों में ऐसा रोग, अधिक सन्तान या गर्भपात होने से होता है।

मस्तक रेखा के प्रारम्भ में द्वीप होना

मस्तक रेखा के प्रारम्भ में द्वीप होना

इस द्वीप का निर्णय करना कठिन होता है क्योंकि किन्हीं अन्य रेखाओं में उलझे होने, जोड़ अधिक होने या अन्य कारणों से यह अन्य रेखाओं से मिल जाता है। अत: ध्यान पूर्वक देखकर ही इसका निर्णय लेना चाहिए। (नितिन पामिस्ट )

ऐसे व्यक्ति आपत्ति के समय शीघ्र घबरा जाते हैं तथा पढ़ने में कमजोर एवं मिजाज के चिड़चिड़े होते हैं। यह द्वीप बड़ा होने पर मस्तिष्क रेखा में यदि कोई दूसरा भी दोष हो तो एकदम भोंदू होते हैं। इस अवस्था में, यदि भाग्य रेखा स्वतन्त्र रूप से निकली हो तथा मोटी हो तो ऐसे व्यक्ति व्यवहार के अच्छे नहीं होते। ये किसी की नहीं सुनते और मनमानी करते हैं व माता-पिता के साथ सहयोग नहीं करते। मित्रों में रहना, अधिक खर्च करना, जिम्मेदारी महसूस न करना, घर में सद्-व्यवहार न करना आदि दोष ऐसे व्यक्तियों में पाये जाते हैं। कई बार तो ये दोष बहुत अधिक बढ़ जाते हैं। (नितिन पामिस्ट )

मस्तिष्क रेखा के आरम्भ में द्वीप और उससे कोई रेखा निकल कर बृहस्पति या जीवन रेखा की ओर जाती हो तो यह लक्षण शिक्षा में थोड़ी बहुत रुकावट करता है। इस प्रकार के द्वीप से गले, कान या कान के ऊपर, मस्तिष्क का ऑपरेशन अवश्य होता है। कभी-कभी इस द्वीप से डिम्बाश्य या अण्डकोष में या तो रोग होता है या ये अग अविकसित होते हैं।

मस्तिष्क रेखा में सूर्य के नीचे द्वीप

मस्तिष्क रेखा में सूर्य के नीचे द्वीप

यह द्वीप मस्तिष्क रेखा में सूर्य की उंगली के नीचे पाया जाता है। यह व्यक्ति की आंख में रोग का लक्षण है। यदि हृदय रेखा में भी सूर्य की उंगली के नीचे कोई द्वीप हो या वहां बाहर से कोई रेखा आकर हदय रेखा को छूती हो तो निश्चित ही आंखों में दोष हो जाता है। यह द्वीप यदि गोलाकार अर्थात् वृत्त के आकार का हो तो व्यक्ति अन्धा हो जाता है। ऐसे व्यक्ति की आंख में बाहर से आकर कोई चीज लगती है। सूर्य व शनि की उंगली के बीच मस्तिष्क रेखा में बड़ा द्वीप हो तो इस आयु में व्यक्ति के मस्तिष्क पर बड़ा भार पड़ता है या तो ये उदासीन हो जाते हैं या पागल अन्यथा मस्तिष्क में रसौली या खून का जमाव होकर लकवा हो जाता है। यह देखने की बात है कि द्वीप के दोनों ओर की रेखाएं मस्तिष्क रेखा जैसी या मौलिक मोटाई से कुछ कम मोटी होनी चाहिए। (नितिन पामिस्ट )

मस्तिष्क रेखा के अन्त में द्वीप होना

मस्तक रेखा पर द्वीप

मस्तिष्क रेखा के अन्त में अर्थात् बुध के नीचे द्वीप हो तो यह व्यक्ति के जिगर में खराबी करता है। इस प्रकार का कष्ट 52-53 वर्ष की आयु के पश्चात् ही बढ़ता है। मस्तिष्क रेखा में द्वीप न होकर कोई त्रिकोण का आकार बनता हो तो यह चलते समय सांस फूलना या फेफड़ों में खराबी होने के लक्षण है। यह द्वीप केवल स्वास्थ्य के लिए ही फल बताता है ।

मस्तिष्क रेखा के अन्त में यदि बड़ा द्वीप हो तो व्यक्ति के किसी न किसी से अनैतिक सम्बन्ध रहते हैं। ऐसे सम्बन्ध कभी जीवन के आरम्भ में 30-32 वर्ष की आयु में भी देखे जाते हैं लेकिन अन्त में तो निश्चित ही होते हैं। यह लक्षण रखैल रखने का है। (नितिन पामिस्ट )

ऐसे व्यक्तियों की आखों में भी किसी न किसी प्रकार का रोग रहता है। यहां यह बात विशेष रूप से देखने की है कि ये द्वीप ऐसी रेखाओं से मिलकर बनते हैं जिनकी मोटाई मौलिक मस्तिष्क रेखा से कुछ ही कम होती है। इस दशा में मस्तिष्क रेखा की कोई शाखा बुध वाले भंगल पर गई हो तो ऐसे सम्बन्ध किसी नजदीकी से होते हैं। यह अवश्य कहा जा सकता है कि ऐसे व्यक्ति रखैल या उप-पत्नी रखते हैं।

हृदय रेखा पर सूर्य पर्वत के नीचे द्वीप होना

द्वीप हृद्य रेखा पर होने का मतलब 

यह द्वीप भी आंखों के दोषों को निश्चित करता है। शनि के पर्वत पर अधिक रेखाएं या मस्तिष्क रेखा में शनि के नीचे द्वीप होने पर अवश्य ही आंखों में दोष होता है। सूर्य के नीचे हृदय रेखा में द्वीप दूर की नजर के लिए अच्छा नहीं माना जाता । अतिशय-कामुकता; पित्त या जिगर दोषपूर्ण होने के कारण आंखों में खराबी पाई जाती है। इसी लक्षण से सिर में भारीपन भी रहता है। एक बात विशेष ध्यान रखने की है कि हदय रेखा में दोष होने पर मस्तिष्क रेखा निर्दोष हो तो कुछ समय के लिए ही आंखों में दोष पैदा होते हैं। कालान्तर में आख्चे ठीक हो जाती हैं। सूर्य के नीचे हृदय रेखा में दोप के साथ यदि मस्तिष्क रेखा में भी दोष हो तो सिर दर्द के कारण डर रहता है। ऐसे व्यक्तियों को साइनस का रोग पाया जाता है। इन्हें नाक से दूध पीना, सूत्र-नेति करना, बादाम रोगन पीना लाभकर रहता है। ऐसे व्यक्तियों को पेट में खराबी, नजला-जुकाम आदि का उपचार यथा समय व यथा शक्ति कराना चाहिए। (नितिन पामिस्ट)

स्त्रियों में आखों के दोष, प्रजनन के समय में कोई गड़बड़, अधिक रक्त स्राव, दौरे या सिर में चोट लगने से होता है। हाथ में अधिक दोष जैसे प्रत्येक रेखा में विशेघ दोष, मस्तिष्क रेखा अधिक दोषपूर्ण या जीवन रेखा टूटी हो तो मस्तिष्क में रसौली या कैंसर होने के कारण आखें खराब हो जाती हैं। हृदय रेखा टूट कर मस्तिष्क रेखा पर मिलने पर मस्तिष्क रेखा में सूर्य के नीचे दोष हो तो अधिक रोने के कारण आखों में दोष होता है। सूर्य या बुध के नीचे कोई वृत्ताकार द्वीप चाहे यह कई रेखाओं के द्वारा ही बना हो या बाहर की ओर से कोई रेखा सूर्य या बुध के नीचे छूती हो और मस्तिष्क रेखा में दोष व जीवन रेखा के आरम्भ में दोष हो तो पूर्णतया अन्धा होने का लक्षण कई बार हृदय रेखा पर त्रिकोण का आकार भी बुध या सूर्य के नीचे देखा जाता है । यह आकार निर्दोष दृदय रेखा पर होता है। वास्तव में यह द्वीप होता है और आरबों में विशेष दोष का लक्षण है। हदय रेखा में नीचे की ओर होने पर यह अधिक प्रभावशाली होता है।

हृदय रेखा मंगल से निकलने पर यदि सूर्य के नीचे द्वीप हो तो भी आंखों में दोष होता है। यह दोष पित्त के कारण आख्झें खराब होने का लक्षण है। ऐसे व्यक्तियों के घर में तिरछा देखने वाले (भैगे), एक आख बन्द करके देखने वाले या सूर्य-मुखी व्यक्ति होते हैं। सन्तान पर भी इसका प्रभाव देखा जाता है। ऐसे व्यक्तियों के चरित्र में किसी न किसी प्रकार का दोष भी होता है। हदय रेखा, सूर्य के नीचे द्वीपयुक्त होने से सन्तान की आंखें कमजोर होती हैं। हाथ पतला ". होने पर अधिकतर बच्चों को चश्मे का प्रयोग करना पड़ता है और भारी हाथ होने पर एक या दो चश्मे लगाते हैं। यदि मस्तिष्क रेखा में कोई दोष नहीं हो तो कुछ समय के लिए ऐसा होकर आंखें ठीक हो जाती हैं।

मंगल ग्रह हस्तरेखा

मंगल पर्वत हस्तरेखा

मंगल ग्रह का स्थान हाथ में दो जगह होता है। एक तो अंगूठे के पास बृहस्पति के नीचे, दूसरा बुध की उंगली के पास बुध के नीचे। पहला स्थान यदि बड़ा हो तो अकारात्मक होता है और उसका महत्व अधिक हो जाता है। यदि व्यक्ति का जन्म 21 मार्च और 21 अप्रैल के बीच में हो और यदि 28 अप्रैल तक हो। कुछ हद तक होता है। वर्ष का यह भाग भचक में मंगल का भाव सकारात्मक कहलाता है। (नितिन पामिस्ट )

दूसरा स्थान नकारात्मक होता है और उसका महत्व अधिक होता है। यदि व्यक्ति का जन्म 21 अक्टूबर और 21 नवम्बर कॊ बीच में हो और यदि जन्म 28 नवम्बरं तक हो तो कुछ हद तक होता है वर्ष का यह भाग भचक में मंगल का भाव नकारात्मक कहलाता है।

मंगल का सम्बन्ध व्यक्ति के साहस, क्रोध, धैर्य, निष्ठा, खेती, पेट विकार आदि से है। अत: मंगल उठा होने पर उपरोक्त गुण पाये जाते हैं। परन्तु पेट में विकार रहता है। जो व्यक्ति प्राय: राजसेवा में होते हैं, उनके हाथ में उठा हुआ मंगल होता है। ऐसे व्यक्ति अति निष्ठावान होते हैं। अतः राज्यसेवा में उनका स्थान सेना, पुलिस, जल सेना या इस प्रकार के पदों पर होता है। उनकी उंगलियां भी मोटी देखी जाती हैं। ये मस्तिष्क का प्रयोग कम ही करते हैं। साथ ही जिद्दी, क्रोधी, साहसी, लगन वाले आदि होते हैं। स्पष्टवक्ता होते हैं और गलत बात को भी सहन नहीं करते। हदय रेखा का अन्त वृहस्पति पर हो तो ऐसे व्यक्ति महान, साहसी, सत्यवादी, आन पर मरने वाले व कई भाषाओं के ज्ञात होते हैं। ऐसे व्यक्तियों के हाथ गुलाबी होते हैं। इनके मकान या सम्पति पर झगड़ा पाया जाता है। (नितिन पामिस्ट )

मंगल अधिक उठा होने पर व्यक्ति को विवाह में रुकावट होती है। विवाह देर से होता है या सम्बन्ध होकर टूटता है। ऐसे व्यक्तियों को मूंगा पहनना चाहिए। मंगल उठा होने पर इसका विशेष फल 1 12, 4, 8, 12, 14, 28 व 48 वर्ष में देखा जाता है। (नितिन पामिस्ट )

मंगल उत्तम होने पर व्यक्ति यदि भावुक भी हो तो आत्महत्या जैसी घटनाएं नहीं करता। मस्तिष्क रेखा में दोष होने पर व्यक्ति स्पष्टत्रक्ता, झगड़ालू, बेहद चिड़चिड़े व क्रोधी स्वभाव के होते हैं। मस्तिष्क रेखा सुन्दर होने पर साहसी, बर्दाश्त न करने वालं होते हैं। ऐसे व्यक्ति दबते नहीं। सत्य का अन्तत: पालन करते हैं। जुबान के पक्के होते हैं, सच्चे व स्वाभिमानी होते हैं। परन्तु मस्तिष्क रेखा अधिक सुन्दर होने पर ये बेहद चालाक देखे जाते हैं। इनका मकान ऊची जगह पर होता है तथा यह कार्य भी समतल भूमि से ऊंचे पर ही करते हैं।

मंगल पर क्रास होने पर बवासीर हो जाती है। यदि मस्तिष्क रेखा में शनि की नीचे दोष हो तो निश्चय ही ऐसा कहा जा सकता है। मस्तिष्क रेखा में अन्य दोष होने पर ये अपनी स्मृति को कमजोर समझते हैं। विशेष दोष होने पर बड़ी आयु में इनकी स्मृति कमजोर भी हो जाती है।

मंगल पर काला या लाल दाग होने पर इनकी मृत्यु विष से होने की सम्भावना होती हैं।

मंगल पर तारा होने पर क्रोध अधिक आता है और झगड़ों में मार-पीट व चोट लगती है। मस्तिष्क रेखा में दोष हो तो यह भी सम्भावना होती है कि इनके हाथ से किसी की हत्या हो जाये।

मंगल पर अधिक रेखाएं होने पर भेंट में गैस, स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाता हैं। फलस्वरूप धातु विकार होते हैं। सिर में दर्द रहता है। चन्द्रमा उन्नत हो तो ऐसा निश्चय ही होता है। सर्दी का असर नाक व गले में बना रहता है। (नितिन पामिस्ट )

मंगल पर चतुष्कोण होने पर जेल का डर भी होता है। कई बार जेल यात्रा भी करनी पड़ती है।

मंगल पर त्रिकोण होने पर उच्चकोटि के गणितज्ञ होते हैं। इन्हें सेना या शोध कार्य में सम्मान मिलता है।

Wednesday, July 20, 2016

मस्तक रेखा का निकास बृहस्पति पर्वत से होना

मस्तक रेखा का निकास बृहस्पति पर्वत से होना  

बृहस्पति ग्रह आत्मसम्मान, महत्तकांक्षा, प्रौदता व शासन का प्रतीक है। हाथ में बृहस्पति उन्नत होने पर व्यक्ति सचरित्र, महत्वाकांक्षी तथा शासकीय प्रवृति के होते हैं। इसी प्रकार जिन लोगों की मस्तिष्क रेखा बृहस्पति से निकलती है, उन व्यक्तियों में स्वभावतः ही उपरोक्त सभी गुण आ जाते हैं। ऐसे व्यक्ति पुरुषार्थ से जीवन बनाते हैं (चित्र-67) तथा स्वयं के गुणों में निरन्तर वृद्धि करने वाले होते हैं। इनकी मस्तिष्क शब्द कोष होता है व ग्रहण-शक्ति अच्छी होती है। ये बैद्धिक त्रुटियां नहीं करते। संयोगवश यदि कोई गलती कभी कर जाएं तो पुनरावृति का तो प्रश्न ही नहीं उठता। महत्वाकांक्षा की विशेष भावना इनमें पाई जाने के कारण अध्ययन के समय ये गुट बना कर रहते हैं: रुढिवादिता इन्हें बिल्कुल पसन्द नहीं होती, अतः अपने परिवार वालों से इनका विरोध बना रहता है। अध्ययन में तो ये निपुण होते हैं, परन्तु मेहनती नहीं होते।

ऐसे व्यक्तियों की उंगलियां मोटी हों तो आत्म-सम्मान के कारण झगड़े आदि रहते हैं तथा मस्तिष्क रेखा की कोई शाखा मंगल पर जाती हो तो कत्ल जैसे लांछन भी जीवन में लगते हैं। यह सब, सम्मान अथवा महत्वाकांक्षा के कारण ही होता है। (नितिन कुमार पामिस्ट )

सुधारवादी दृष्टिकोण के कारण इनके चरित्र में धीरे-धीरे सुधार होता जाता है। यदि मस्तिष्क रेखा में कोई दोष जैसे लाल या काली न हो तो समय आने पर ऐसे व्यक्ति स्वयं पैरों पर खड़े हो जाते हैं। उगलियां पतली होने पर उपरोक्त दोषपूर्ण फल नहीं होते। ये स्वाभिमानी होते हैं, झुकना पसन्द नहीं करते और छोटी सी बात को भी बहुत महसूस करते हैं। कभी-कभी यहां तक नौबत आती है कि छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा कर बैठते हैं। यदि इनकं गृहस्थ-सम्बन्ध में जरा भी त्रुटि हो तो छोटी सी बात पर ही अपमान महसूस कर जाते हैं जैसे यदि पत्नी विना कहे कहीं चली जाए तो ये उसे लेने जाएं, ऐसा प्रश्न ही नहीं उठता। थोड़ा भी विरोध आपस में होने पर, दूसरे को ही झुकना पड़ता है। ऐसी स्त्रियां रोने में तेज, अड़ने वाली, शुरू में डरने वाली तथा बाद में बहादुर होती हैं। ----- इन्हें छोटे काम करने में लज्जा अनुभव होती है।  कभी-कभी आत्मसम्मान की मात्रा यहां तक बढ़ जाती है कि यदि गलत बात मुंह से निकल जाए तो उसी पर अड़ जाते हैं। छोटा काम नहीं करने के कारण स्थायित्व देर से प्राप्त होता है क्योंकि जब तक इनकी रुचि का कार्य नहीं मिलता, तब तक ये अपने आपको स्थायी महसूस नहीं करते और लगातार काम बदलने की सोचते रहते हैं। ऐसे व्यक्तियों की भाम्य रेखा चन्द्रमा से निकली हो तो स्त्री लोलुप होते हैं। (नितिन कुमार पामिस्ट )

ये मिलनसार व दृढ़ निश्चयी भी होते हैं। जिससे इनका परिचय या मित्रता हो जाती हैं, जीवन भर निभाते हैं, मित्रता होती भी अधिक व्यक्तियों से है। स्वयं से कोई गलती या अपराध होने पर क्षमा मांगने में देर नहीं करते और यदि कोई व्यक्ति गलती करके इनसे क्षमा मांगे तो क्षमा भी कर देते हैं। ऐसे व्यक्तियों की दृदय रेखा व मस्तिष्क रेखा यदि एक-दूसरे के समानान्तर हो तो बदले की भावना रहती हैं, जिसके पीछे पड़ते हैं, उन्हें जड़ से उखाड़ देते हैं। परोपकारी, व्यवहारिक व मानवोचिन गुण होने के साथ ही जैसे के साथ तैसा व्यवहार करने वाले होते हैं।

 ऐसे व्यक्ति झगड़े में कम पड़ते हैं और यदि किसी झगड़े में आ भी जाते हैं तो उसका निपटारा भी स्वयं ही कर देते हैं। मुकद्दमें लड़ने में यदि डिकरी भी हो जाए तो ऐसे व्यक्ति उन्हें क्षमा मांगने पर छोड देते हैं। पैसा देने या अन्य कोई वायदा ये करते हैं तो उसका पूर्णतया पालन करते हैं, चाहें अपना काम बन्द करके भी करना पड़े। अत: बाजार में इनकी साख होती है। मस्तिष्क रेखा समानान्तर होने पर ये लम्बे  समय तक किसी बात को नहीं भूल सकते और अवसर आने पर बदला लिए बगैर नहीं छोड़ते। 

ऐसे व्यक्ति अपने शत्रु को जान से नहीं मारते, जीवित रखकर मुकाबला करते हैं या अहसान से मारते हैं। उत्तरदायित्व अधिक अनुभव करने के कारण ऐसे व्यक्ति उस समय तक विवाह नहीं करते जब तक ये अपने पैरों पर खड़े न हो जाएं। अतः अपनी शादी तक रोक देते हैं तथा आदर्श पसन्द या अन्य किसी करण से इनकी शादी में कई बार विध्न पड़ता है।

मस्तक रेखा का जीवन रेखा से निकालना

मस्तक रेखा का निकास जीवन रेखा से जुड़ा हुआ होना 

इस लक्षण में, मस्तिष्क व जीवन रेखा आपस में अधिक दूर तक जुड़ी अर्थात् सम्मिलित या उलझी हुई नहीं होनी चाहिए। अधिक दूरी की परिभाषा हम लगभग डेढ़ इंच में करते हैं। डेढ़ इंच जुड़ी होने पर मस्तिष्क रेखा जीवन से अलग होती हो तो इसका फल दोषपूर्ण होता है, जबकि जीवन रेखा से मस्तिष्क रेखा का विना अधिक जोड़ के निकास गुणकारी है। इस प्रकार की मस्तिष्क रेखा केवल छूकर जीवन रेखा से निकलती है ।

 ऐसे व्यक्ति समझदार, प्रत्येक कार्य को सोच-समझकर करने वाले, जिम्मेदार तथा क्रियात्मक होते हैं और शीघ्र निर्णय लेते हैं। उपरोक्त लक्षण अधिक रेखा वाले हाथों में हो तो विचार करने व उसे क्रियान्वित  करने में कुछ समय अवश्य लतते है परन्तु क्रियतमक हाथ में सदैव ही शीघ्र निर्णय कर लिए जाते हैं। अधिक रेखा वाले व्यक्ति भी एक से अधिक भाग्य रेखा, अगूंठा ब उँगलियां पतली व छोटी, दोनों और द्विजिव्हाकार मस्तिष्क रेखा होने पर शीघ्र न ठीक निर्णय लेने वाले होते हैं। ये स्वतन्त्र निर्णय लेने वाले व उत्तरदायित्व निभाने वाले होते हैं। फलस्वरूप ऐसे व्यक्ति जीवन - में प्रगति करते हैं।  ( नितिन कुमार पामिस्ट )

स्त्रियों के हाथ में यह लक्षण होने पर तथा हाथ भी कोमल हो तो प्रत्येक दूसरे वर्ष में सन्तान हो जाती है। जीवन और मस्तिष्क रेखा दोष रहित हो तो पति-पत्नी का आपस में बहुत प्रेम रहता है, हृदय रेखा भी निर्दोष या दोहरी हो तो साथी के जरा भी रुखा बोलने पर इन्हें बहुत दु:ख होता है। अन्त तक इनकं सम्बन्ध मधुर बने रहते हैं और जीवन सुखी रहता है। एक दूसरे का विछोह इन्हें किसी भी मूल्य धर सहन नहीं होता। 

इस प्रकार से छूकर निकलने वाली मस्तिष्क रेखा सीधी मंगल की ओर जाती हो, राधा जीवन रेखा गोलाकार व भाग्य रेखा पतनी हो या हाथ भारी हो तो व्यक्ति अतुल सम्पति पैदा करता है और अपने वंश में नए साधनों के द्वारा ऐश्वर्य और प्रतिभा उत्पन्न करता है। ( नितिन कुमार पामिस्ट )

ऐसी मस्तिष्क रेखा जो चन्द्रमा की ओर जाए एवं जीवन रेखा गोलाकार हो, हाथ चौडा, भारी हो, छोटा व सुन्दर हो तो ऐसे व्यक्ति अत्यन्त व्यवहार कुशल होते हैं। इनके धन व सम्मान में वृद्धि होती रहती है। अभिवृद्धि को प्राप्त होते हैं। ऐसे व्यक्ति महामानव होते हैं, हृदय रेखा सुन्दर होकर शनि के नीचे पूर्ण होती हो अथवा बृहस्पति को छ्ती हो तो देवतुल्य सम्मान प्राप्त करते हैं व बहुचर्चित होते हैं। केवल छूकर निकली हुई मस्तिष्क रेरज्ञा बुध या सूर्य की ओर जाती हो और जीवन रेखा भी गोलाकार हो तो ऐसे व्यक्ति लेखन अथवा सम्पक स्थापित करने में चमत्कारिक सफलता प्राप्त करते हैं।

मस्तक रेखा का निकास ( जीवन रेखा से अलग )

मस्तक रेखा का जीवन रेखा से अलग हो कर निकालना 

इस प्रकार की मस्तिष्क रेखा बृहस्पति पर्वत के नीचे, जीवन रेखा से अलग होकर आरम्भ होती है। इस की दूरी अधिक से अधिक 1/4 इन्च या 1/6 इन्च होती है। इससे अधिक दूर निकली हुई मस्तिष्क रेखा का फल अच्छा नहीं होता। यह जितनी नजदीक से निकली होती है और जीवन रेखा से अलग होती है तो अच्छी मानी जाती है। यदि ऐसी मस्तिष्क रेखा, चतुष्कोण या किसी रेखा से बिना जुड़ी हो तो अति उत्तम होती है ।

जीवन रेखा से बृहस्पति पर जाने वाली शाखा के द्वारा अथवा जीवन रेखा से निकली भाग्य रेखा के द्वारा जुड़ी होने पर दोषपूर्ण नहीं मानी जाती। ऐसी मस्तिष्क रेखा जीवन रेखा के निकास के पास से ही निकलती हो तो यह अतुलनीय होती हैं, परन्तु ऐसा कम ही देखा जाता । (नितिन कुमार पामिस्ट)

ये व्यक्ति स्वतन्त्र विचारों के, बुद्धिमान, शीघ्र विश्वास करने वाले व आरम्भ में शीघ्र घबराने वाले होते हैं। मध्यायु के पश्चात् घबराने का दोष इनमें नहीं रहता। इस लक्षण के साथ उगलियों की लम्बाई भी अधिक हो तो विश्वास की मात्रा बढ़ जाती है, जोकि भाग्योदय में रुकावट बन कर सामने आती हैं। वदि भाग्य रेखा, मस्तिष्क रेखा पर रुकी हो तो ऐसे व्यक्ति कई बार घोखा खाते हैं। ये शर्मातु. अधिक एहसान मानने व लिहाज करने वाले होते** और स्पष्ट रूप से किसी बात को नहीं कहते। किसी को उधार देकर मांगते नहीं, जिन पर विश्वास करते हैं, उसे परिवार का सदस्य मान लेते हैं। अत: ये जब भी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर करते हैं, हानि उठाते हैं। ऐसे व्यक्तियों को 35 वर्ष की आयु तक साझे में व्यापार नहीं करना चाहिए और यदि परिस्थितिवश करना भी पड़े तो दूसरे साझियों के साथ सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए अन्यथा लाभ के बदले हानि ही हाथ लगेगी।

 ऐसे हाथों में यदि रेखाएं कम हों या हाथ कौणिक अर्थात उंगलियां अंगूठे की ओर झुकी हुई हों तो जल्दबाज होते हैं। फलस्वरूप सावधानी से कार्य न करने की कारण हानि उठाते हैं परन्तु स्थायित्व प्राप्त करने के पश्चात ये पूर्ण आत्म विश्वासी सिद्ध होते हैं। ऐसी स्त्रियां स्पष्ट वक्ता, हिम्मतवाली, व निडर होती हैं। यदि भाग्य रेखा हृदय रेखा पर रुकी हो व उंगलियां लम्बी हो तो दूसरे के प्रभाव में शीघ्र आती हैं। यदि कोई व्यक्ति थोड़ी भी सहानुभूति से बात करे तो उस पर पूर्ण विश्वास कर लेती हैं। (नितिन कुमार पामिस्ट)

 ऐसे व्यक्ति चरित्र में विश्वास करते हैं, अपने मन में दूसरे का प्रभाव होने पर भी इन्हें चरित्र-दोष नहीं होता। इनक अच्छे मित्र होते हैं व यथासम्भव मित्रता निभाते हैं, किसी से बदला लेने की भावना नहीं होती। यदि विशेष रूप से स्त्रियों के हाथ में जीवन रेखा में दोष हो तो थोड़ी-सी बात में बुरी तरह घबरा जाती हैं, जैसे पति का रात देर से घर आना या कोई समाचार अचानक सुनना आदि। मस्तिष्क रेखा, जीवन रेखा से अलग होकर निकले तो व्यक्ति बचपन में अधिक बीमार होते हैं व जलने से या ऊपर से गिर कर बच जाना इत्यादि घटनाएं होती हैं। यदि जीवन रेखा में विशेष दोष हो तो बचपन में निमोनिया, पाचन शक्ति च जिगर खराब रहता है तथा उपरोक्त रोगों के कारण कई बार बहुत अधिक बीमार हो जाते हैं। 

मस्तिष्क रेखा गोलाकार हो तो निमोनिया कई बार होता है। ऐसे बच्चे शरारती एवं प्रखर बुद्धि वाले होते हैं। मस्तिष्क रेखा द्विभाजित होने पर होशियार एव उत्तम विद्यार्थी सिद्ध होते हैं। यह मस्तिष्क रेखा मंगल पर या उसकी ओर जाए तो इनकी छाती पर तिल होता है। 

यह इनकी किसी योग्य सन्तानक होने का लक्षण है। ऐसे व्यक्ति नौकरी अवश्य करते हैं। कर्ज नहीं ले सकते, क्योंकि इससे इनके मस्तिष्क में तनाव रहता हैं। साझे में काम भी इन्हें अच्छा नहीं लगता। 

ऐसा देखा जाता है कि कुछ रोग जैसे दमा, हृदय रोग आदि एक पीढ़ी से दूसरी पीड़ी में चलते जाते हैं। यदि मस्तिष्क रेखा जीवन रेखा से अलग हो तो स्वयं को ऐसे रोग होने पर भी सन्तान की ये रोग नहीं लगते। ऐसे व्यक्ति की मस्तिष्क रेखा द्विभाजित हो तो जैसे-जैसे चिन्ता करते हैं, भारी होते जाते हैं और सफलता मिलती जाती है। काम करने में चतुर होते हैं। उंगलियां जितनी पतली होती हैं, यह सफलता व बुद्धिमत्ता का लक्षण होता है। जीवन रेखा गोलाकार होने पर ऐसे व्यक्ति यथा शक्ति अपने प्रभाव से व धन से दूसरों की सहायता करते देखे जाते हैं। इस लक्षण के साथ मस्तिष्क रेखा मोटी-पतली होने पर अधिक सोने वाले होते हैं। खाना खाने के बाद आलस्य आता है, हाथ कोमल हो तो आलसी होने के कारण अधिक सोने की आदत होती है। 

मस्तिष्क रेखा जीवन रेखा से अधिक दूर होकर निकली हो अर्थात इसकी दूरी जीवन रेखा से 34 इन्व या उससे अधिक हो तो यह व्यक्ति में अति आत्मविश्वास, जिसे हम पमण्ड कहते हैं, पैदा करती है। ऐसे व्यक्ति लापरवाह होते हैं, अपने जीवन निर्माण की भी चिन्ता नहीं करते। ये स्वछन्द विचारों की होते हैं व किसी की परवाह न करना, बात काटने पर निरादर कर देना, इनके लिए कोई विशेष बात नहीं होती। शनि की उंगली लम्बी या शनि उन्नत हो तो व्यक्ति एकान्त पसन्द होता है, भाग्य रेखा भी शनि पर हो तो झगड़ा तथा विरोध पसन्द नहीं होता। ऐसे व्यक्ति विरोधियों से दूर जाकर खुले में मकान बनाकर रहते हैं। परवाह कम करने से ऐसे पति-पत्नी में मनोमालिन्य बना रहता है, वे न तो एक-दूसरे का पक्ष ले सकते हैं और न तारीफ ही कर सकते हैं, फलस्वरूप अनायास ही विरोध रहता है। इनकी स्पष्टवादिता या कटुवाकशक्ति नौकरी में भी झगड़े का कारण बनती है। इनका गला सूखता है व नोंद कम आती है। स्वी के हाथ में यह लक्षण होने पर इन्हें शादी के बाद परेशानी होती है। ऐसे व्यक्तियों में आत्मविश्वास देर से पैदा होता है। यदि शुक्र भी उन्नत हो तो जीवन में सफलता भी देर से मिलती है।

शनि पर्वत के नीचे मस्तक रेखा पर दोष होना

शनि पर्वत के नीचे मस्तक रेखा पर दोष होना 

यह दोष विशेषतया व्यक्ति को स्वास्थ्य के विषय में विचारणीय है। इनकी कई अन्य फल भी होते हैं, परन्तु दूसरी रेखाओं के साथ समन्वय करने पर स्वास्थ्य के विषय में इस दोष के चिन्तन का परिणाम बहुत ही ठोस निकलता है। यह एक महत्वपूर्ण लक्षण है तथा जीवन के प्रत्येक पहलू पर प्रभाव डालता हैं। यदि मस्तिष्क रेखा में दोष है तो जीवन की हर घटना पर इसका प्रभाव पड़ता है । 

शनि की नीचे मस्तिष्क रेखा में दोष होने की साथ, यदि जीवन रेखा के प्रारम्भ अर्थात् बृहस्पति के नीचे दोष हो तो व्यक्ति के कन्धे या आस-पास के भाग में कोई न कोई बीमारी पाई जाती है। यदि जीवन रेखा के बिल्कुल आरम्भ में ही कोई दोष हो तो गले पर इसका प्रभाव पड़ता है। जीवन रेखा के मध्य में दोध होने पर व्यक्ति की पट, भोजन नली, आतें तथा रीढ़ की हड्डी में इसका प्रभाव पड़ता है। जीवन रेखा के उत्तरार्द्ध में इसका प्रभाव व्यक्ति के फेफड़ों, हदय आदि पर पड़ता है, अर्थात् उपरोक्त अंगों में बीमारी पाई जाती है। हाथ में कहीं भी नेष्ट लक्षण होने के साथ यदि मस्तिष्क रेखा में शनि के नीचे दोष हो तो उसके ------- उपरोक्त लक्षणों के आधार पर बताए गए दोषों की पुष्टि की जा सकती है। हृदय रेखा में यदि शनि के नीचे और मस्तिष्क रेखा में शनि के ऊपर कोई दोष होने पर गुर्दा, हर्निया, अपैन्डिक्स, दांत रोग एवं अण्डकोषों में जीमारी पाई जाती है। स्त्रियों में यह लक्षण दांत एवं गर्भाशय विकार का लक्षण है। हृदय रेखा टूटी होने पर यदि मस्तिष्क रेखा में शनि के नीचे दोष हो तो हृदय रोग होता है और शुक्र या चन्द्रमा उठा होने पर मानसिक विकृति हो जाती है। इसी प्रकार स्वास्थ्य की विषय में सोचते समय हमें मस्तिष्क रेखा को दोष का प्रभाव अवश्य रेखा में होने पर उसका फल कई गुना बढ जाता है एवं उस रोग की निश्चितता का अनुमान होता है।

मस्तिष्क रेखा में शनि के नीचे दोष होने पर व्यक्ति का जिगर एवं पैनक्रियाज ग्रन्थियों की कार्यशक्ति कमजोर होती है। इन्हें अधिक बैठकर काम नहीं करना चाहिए तथा अपने जिगर का पूर्ण ध्यान रखना चाहिए, नहीं तो मधुमेह होने की पूर्ण सम्भावना होती है। शनि के नीचे मस्तिष्क रेखा में झुकाव व जीवन रेखा थोड़ी भी सीधी होने पर ऐसा होता है। स्वयं को तथा परिवार में भी किसी को यह रोग पाया जाता है। इसी से रक्त-चाप, जलोदर, जालीदार फोड़ा, पेशाब अधिक तथा गरम आना, शरीर में दर्द, वायु प्रबल होना, पिण्डलियों में दर्द, बेहोशी, आधाशीशी दर्द जैसा कष्ट होता है। ऐसे व्यक्तियों को चिकनाई वाले पदार्थ नहीं पचते, अतः इनसे बचते रहना चाहिए। (नितिन कुमार पामिस्ट)

कोमल हाथों में रोग शीघ्र तथा कठोर हाथ में देर से होते हैं। रोग का कारण व्यक्ति अपने पूर्व कर्म को मानता है और भाग्य को ही इस विषय में दोष देता है। शनि के नीचे मस्तिष्क रेखा से कोई रेखा निकल कर नीचे की ओर जाती हो तो व्यक्ति की ऐडी में दर्द, गुप्तांग में भगन्दर रोग होते हैं। ऐड़ी क दर्द का कारण हड्डी बढ़ना होता है। ऐसे व्यक्तियों को अधिक नमक पसन्द होता है और उसी कारण हड्डी बढ़ जाती है। शनि के नीचे मस्तिष्क रेखा में तिल हो तो व्यक्ति के गुप्तांग में फोड़ा होता है, वैसे ही मस्तिष्क रेखा में कहीं भी तिल हो तो बड़ी आयु में लकवे का लक्षण है। 

स्वी के हाथ में उपरोक्त लक्षण के साथ जीवन रेखा के आरम्भ में दोष होने पर गर्भपात के कारण सन्तान की सम्भावना देर से होती है। यदि जीवन रेखा सीधी भी हो तो प्रजनन कष्टमय होता है। जीवन रेखा अधूरी होने पर तो निश्चित रूप से ऐसा कहा जा सकता है। इस दशा में व्यक्ति का जिगर किसी न किसी रूप में दोष पूर्ण पाया जाता है तथा बहुत सम्भावना होती है कि उसकी मृत्यु जिगर दोष से ही हो, आयु लम्बी हो तो निश्चय ही ऐसा होता है। (नितिन कुमार पामिस्ट)

मस्तिष्क रेखा में शनि के नीचे द्वीप या अन्य दोष होने पर, तथा चन्द्र की ओर एकदम झुकी होने पर एवं शुक्र पर्वत उठा हो तो मस्तिष्क में विकार आ जाता है।

नाख़ून (Nails On Hand)


नाख़ून व्यक्ति की अनेक मनोवृत्तियाँ और रोगों के विषय में महत्वपूर्ण सूचना देते हैं। अत: हाथ को देखते समय नाखूनों का अध्ययन भी बहुत आवश्यक है। नाखूनों का अध्ययन उनको रंग, रूप लम्बाई, मोटाई, आकार और अन्य बनावट को विषय में सूक्ष्म रूप से कर लेना चाहिए। इस लक्षण से हमें कई विशेष जानकारियां मिलती हैं। प्रत्येक नाखून अपना विशेष महत्त्व रखता है। ग्रह या उंगली के लक्षण देखते समय नाखून का लक्षण भी उससे मिलाना आवश्यक हो जाता है।

नाखूनों के रंग

 श्वेत नाखून व्यक्ति में स्नायु-दोष का लक्षण है। इनका रक्त-चाप कम होता है। इन्हें सिर दर्द रहता है। यदि सिर के पिछले भाग में लगातार दर्द रहता हो तो ऐसे व्यक्तियों को लकचा होने का डर रहता है। स्नायु-विकार होने के समय नाखूनों का रंग बिल्कुल सफेद हो जाता है। कई बार इस प्रकार का रंग व्यक्ति में किसी दूसरी आत्मा का प्रभाव होने पर भी देखा जाता है, इनकी नींद कम आती है और मबराते अधिक हैं।

 हृदय रोग होने पर नाखूनों का रंग सफेद होता है। बीमारी की अवस्था में खून की कमी होने पर नाखून पतले हो जाते हैं और दबाने पर दब जाते हैं। हृदय रोग से ग्रस्त व्यक्ति के नाखून ऊबड़-खाबड़ तथा प्रेत-बाधा या अल्प-निद्रा रोग में ये कंवल सफेद होते हैं। आकार में विकार नहीं आता। चलने-फिरने से हृदय में पीड़ा का अनुभव करने वालों के नाखून हल्के सफेद होते हैं। इस रोग को एन्जायना कहते हैं। हृदय में छेद होने पर नाखून बीच में से ऊंचा हो जाता है। (नितिन कुमार पामिस्ट)

नाखून का रंग लाल होने पर व्यक्ति क्रोधी होता है। इनके शरीर में पित्त का प्रभाव अधिक होता है। इनकी कोई आदत नहीं डालनी चाहिए अन्यथा ये उसके आदी हो जाते हैं और छोड़ने में कठिनाई होती है। इन्हें खट्टी वस्तुएं नहीं खानी चाहिए। अघिक गरम पेय पदार्थ भी इनक स्वास्थ्य को हानि पहुंचाते हैं। लाल नाखून वाले व्यक्ति क्रोधी होते हैं। साथ में अन्य क्रोध के लक्षण होने पर ये विशेष क्रोधी पाये जाते हैं। 

अधिक धूम्रपान करने वालों के नाखून धुएं जैसे हो जाते हैं। यह रक्त में निकोटीन बढ़ जाने का लक्षण होता हैं। ऐसे लक्षण का प्रभाव हृदय पर पड़ता है। इनकी धूम्रपान कम कर देना चाहिए या बन्द कर देना चाहिए अन्यथा शरीर में कई रोग घर कर लेते है ।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

 लम्बे नाखून

 ऐसे व्यक्ति सीधे-सादे तथा भावुक होते हैं, इन्हें किसी भी विषय में तीव्र रूचि नहीं होती है। शरीर के अनुपात से लम्बे होने पर ऐसे व्यक्तियों की कमर मे दर्द रहता है। इन्हें मियादी बुखार बार-बार होता है। भाग्य रेखा गहरी होने पर यदि नाखून विशेष लम्बे हों तो कैंसर, ट्यूमर, गॉल ब्लेडर (पित्ताशय) में पथरी आदि की सम्भावना रहती है।  (

छोटे नाखून

छोटे नाखून व्यक्ति में बुद्धिमत्ता व सतर्कता का लक्षण है। ऐसे व्यक्ति जल्दबाज होते हैं परन्तु, बुद्धिमान होने के कारण सफल ही रहते हैं। बचपन में इनका गला खराब रहता है। इनकी प्रबन्ध शक्ति अच्छी होती है।

चौड़े नाखून

चौड़े नाखून वाले व्यक्ति खुले दिल के, बुद्धिमान व सावधान होते हैं। खुले दिल के होने के साथ-साथ इनमें किसी बात को बहुत बारीकी से जानने का गुण होता है। ये जुबान के सच्चे होते हैं। मगर लम्बे समय तक एक काग नहीं कर सकते। उपाय अपाय की सोच कर कार्य करने वालों के नाखून चौड़े होते हैं। इनके स्वभाव • | में थोड़ी गर्म पायी जाती है, परंतु अबायोस ही किसी व्यक्ति से बिगाडते नहीं। इनकी छाती में दर्द की शिकायत रहती है। कभी-कभी रीद की हड्डी में भी दर्द रहता है, जिसका कारण झटका लगना होता है। अधिक चौडे और फैले हुए नाखून होने पर व्यक्ति की मस्तिष्क की नस फटने का डर रहता है। चौड़े नाखून यदि सख्त भी हों तो ऐसे व्यक्ति क्रोधी होते हैं।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

पतले नाख़ून 

 नाखूनों की मोटाई कम होने पर नाखून पतले कहे जाते हैं। ऐसे व्यक्ति का स्वास्थ्य कमजोर रहता है। मस्तिष्क में काम का दबाव होने से इनके सिर में दर्द रहने की शिकायत रहती है। इनका स्वभाव भूलने का होता है। ये आलसी होते हैं और नीद अधिक आती है। शरीर में दर्द और भूख की शिकायत भी इन्हें होती है। खट्टे च चटपटे पदार्थों में यह विशेष रूचि रखते हैं।

 मोटे नाखून 

नाखूनों का मोटा या मजबूत होना अच्छे स्वास्थ्य के चिन्ह हैं। सुदृढ़ नाखून वाले व्यक्ति शरीर व स्वास्थ्य के सुदृढ़ होते हैं। इन्हें लम्बे समय तक रहने वाली बीमारियां नहीं होती।

नाखूनों में चन्द्र

नाखूनों के पीछे की ओर सफंद भाग देखा जाता है, यह अर्ध-चन्द्राकार होता है। ऐसे व्यक्तियों का भार अवश्य बढ़ता है। भाग्य रेखा पतली होने के समय से इनका भार बढ़ना आरम्भ हो जाता है और जिस समय तक यह चन्द्र दिखाई देते रहते हैं, भार बढ़ता ही रहता है। जीवन रेखा सीधी होने पर व्यक्ति अधिक मोटा हो जाता है। अधिक बड़ा चन्द्र व्यक्ति में हृदय की कमजोरी का लक्षण है, इनको घबराहट बहुत होती है। अर्ध चन्द्र व अपूर्ण रेखा भी शरीर का भार बढने का लक्षण है।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

चन्द रहित नाखून

नाखून छोटे अर्थात कम लम्बे होने पर उनमें सफेद चन्द्र का अभाव होता है। ये भी दुर्बल-स्नायु के होते हैं व हृदय कमजोर होता है। परन्तु यदि नाखून मोटे व दबाने पर सख्त हों तो उपरोक्त रोगों का भय नहीं रहता।

नाखूनों में दाग

नाखूनों में सफेद दाग भी स्नायु दुर्बलता का लक्षण है। ऐसे व्यक्ति प्रेमी और साधारण झूठ बोलने वाले होते हैं। बचपन में अधिक वीर्यपात के कारण भी नाखूनों में इस प्रकार के दाग हो जाते हैं। सूर्य की उंगली पर सफेद दाग होने पर व्यक्ति को सम्मान लाभ होता है। धृहस्पति पर लेखन सम्बन्धी त्र शनि पर धन सम्बन्पी लाभ होता है।

नाखूनों में काले दाग व्यक्ति की मृत्यु की सूचना देते हैं। इनको मस्तिष्क में शीघ्र ठेस पहुंचती है। स्त्री मरने, सन्तान भाग जाने या उसकी मृत्यु होने, पर धन नाश होने या सम्मान पर प्रहार होने पर नाखूनों में काले दाग पैदा हो जाते हैं।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

नाखूनों में काले दाग शारीरिक कष्ट का चिन्ह हैं। यदि ऐसे दागू नाखून के आरम्भ अर्थात् चन्द्र के स्थान पर हों तो मृत्यु जैसे कष्ट का सूचक है।

नालीदार (रेखायुक्त) नाखून

प्राय: नाखूनों में नालियां बन जाती हैं। ये नालियां नाखूनों के बीव गहराई हो जाने का परिणाम होती हैं। लम्बे समय तक पेट में गैस या कब्ज रहने के पश्चात् इस प्रकार की नालियां बनती हैं। मस्तिष्क रेखा शनि के नीचे दोषपूर्ण होने पर अंगूठे के नाखून में इस प्रकार की नालियां या रेखाएं मधुमेह का निश्चित लक्षण है। (

नारवून में कभी-कभी काली धारियां भी देखी जाती हैं। ऐसे व्यक्तियों को पेट में गैस बनती है तथा आगे चल कर इन्हें गुर्दे के रोग हो जाते हैं। अंगूठे में इस प्रकार का काली धारी होने पर व्यक्ति को सिर में दर्द की शिकायत रहकर उसके मस्तिष्क
की कोई छोटी नाड़ी फट जाती है, उसी के फलस्वरूप इस प्रकार काली धारी अंगूठे के नाखून में बनती है। यह धारी कुछ मोटी व स्पष्ट होती है। ऐसे व्यक्तियों को गुर्दे के रोग होने का डर रहता है। धारियां छूने पर चिकनी तथा नालियां खुरदरी अनुभव होती हैं।

लम्बे संकरे नाखून

जब नाखून बहुत संकरे हों तो रीद की कमजोरी की ओर संकेत करते हैं। यदि वे बहुत बड़े व पतले हों तो यह समझना चाहिए कि रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो गयी है और शरीर निर्बल हो गया है।

भद्दे नाखून

कुछ व्यक्तियों के नाखून कटे-फटे से अथवा भद्दे-से होते हैं। थे ऊथट-खाबड़ से दिखाई देते हैं। इन्हें पेशाव में फास्फेट जाता है। चित्र-14 इन्हें रोगों की सम्भावना रहती है। खून की कमी इसमें प्रधान कारण है। कई बार नाखूनों के अन्त में अर्थात् बाहर की ओर धुंधली काली-सफेद-सी धारी दिखाई देती है। ऐसे व्यक्तियों को हृदय रोग हो जाता है।  (नितिन कुमार पामिस्ट)


यदि नाखून बहुत चपटे दिखाई दें और ऊपरी अन्त पर मांस से उखड़े नजूर आयें तो पक्षाघात का खतरा होता है। यह खतरा और भी अधिक हो जाता है यदि वे सीप की आकार के होकर मूल स्थान की दिशा में नुकीले हों। जब इन नाखूनों में चन्द्र के कोई चिन्ह न हों तो यह समझना चाहिए कि रोग बढ़ गया है। (

चतुष्कोणाकार नाखून

नाखूनों की लम्बाई व चौड़ाई बराबर होने पर ऐसे व्यक्ति उन्नति करने वाले होते हैं, परन्तु प्रारम्भिक जीवन में इन्हें संघर्ष का सामना करना पड़ता है। इनका लाभ और हानि बराबर होता है, परन्तु सन्तान के कार्य करने के पश्चात् विशेष सफलता मिलती है। इनकी मनोवृति मिली-जुली होती है। ऐसे व्यक्ति अच्छी बातों को ग्रहण करने वाले होते हैं, परन्तु क्रोध आने पर गुणों की टोपी उतार कर अलग रख देते हैं। बड़ी उम्र में इनका क्रोध बहुत कम हो जाता है। इस प्रकार स्नेह में भी ये व्यक्ति अविचारी पाए जाते हैं। आचार व व्यवहार में समान होते हैं। महसूस भी करते हैं और हसते भी हैं। इनका गला थोड़ा बहुत खराब होता है। वृद्धावस्था में नजला या कफ का प्रभाव देखा जाता है। ये साधारणतया शरीर से ठीक रहते हैं।

त्रिकोणाकार नाखून

कभी-कभी नाखून की बनावट त्रिकोणाकार देखी जाती है। ऐसे नाखून आगे से चौड़े तथा पीछे की ओर बहुत नुकीले हो जाते हैं। इस प्रकार नाखून की आकृति त्रिकोणाकार जैसी बन जाती है। ऐसे व्यक्ति बुद्धिमान, हँसमुख व जल्दबाज होते हैं। त्रिकोणाकार नाखून होना व्यक्ति की मानसिक दक्षता का लक्षण है। इनको गले व नाक के रोग देखे जाते हैं।

बृहस्पति या प्रथम उंगली का नाख़ून

हाथ में प्रथम उगली या बृहस्पति का नाखून व्यक्ति की मानसिक प्रवृत्तियों का मुख्य लक्षण है। बृहस्पति की दोनों उंगलियों के नाखून छोटे-बड़े अवश्य ही होने चाहिए. नहीं तो व्यक्ति की ग्रहण शक्ति कम होती है। जितना ही अधिक अन्तर बृहस्पति की दोनों उंगलियों के नाखूनों में होता है, उतना ही व्यक्ति भाग्यशाली, समझदार व चालाक होता है और उन्नति भी अधिक करता है।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

वृहस्पति के दोनों नाखून सम होने पर व्यक्ति सीधा होता है। इनमें ग्रहण शक्ति कम होती है। किसी भी बात को देर से समझते हैं और वृहस्पति का नाखून छोटा होने पर व्यक्ति में प्रबन्ध शक्ति अधिक होती है। मस्तिष्क रेखा एक से अधिक होने पर या मस्तिष्क रेखा दोनों ओर से शाखाकार होने पर ये उद्योगपति या बड़े प्रबन्धक होते हैं। बृहस्पति का नाखून गोल होने पर व्यक्ति के गले में दोष पाया जाता है। अन्य दोष होने पर इनकी सांस की नली का दमा हो जाता है।

शनि या दूसरी उंगली का नाखून

शनि का नाखून चौकोर, सुन्दर व छोटा होने पर व्यक्ति में मानव सुलभ गुणों की विशेषता पाई जाती है। ये पेड़-पौधों व पशु-पक्षियों सहित जीव मात्र से प्रेम करते हैं खेती, बागवानी व फुलवारी का इन्हें विशेष शौक होता है। ये व्यक्ति अध्यात्म व दर्शन में रूचि रखते हैं।

सूर्य या तीसरी उंगली का नाखून

सूर्य या तीसरी उंगली का नाखून चौकोर होने पर ऐसे व्यक्ति दस्तकार होते हैं। चौड़ा होने पर इनकी रूचि साहित्य की ओर जाती है।

बुध या चौथी उंगली का नाखून

इंसान की मानसिक रूचि व चरित्र की जानकारी के विषय में बुध की उंगली का नाखून विशेष महत्व रखता है। बुध का नाखून छोट, चौकोर व सुन्दर होने की या साहित्य में रूचि रखता है। ऐसे बच्चे क्या, क्यों, कैसे, इस प्रकार के प्रश्न करने वाले होते हैं। बुध का नाखून छोटा होने पर राजनीति में विशेष रूचि होती है तथा हाथ में अन्य लक्षण होने पर चुनाव लड़ता है। ये सफल राजनीतिज्ञ होते हैं।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

अंगूठे का नाखून

दोनों हाथों में एक जैसा हो तो व्यक्ति वंश परम्परा के अनुसार जीवन यापन करते हैं। बायें हाथ में अंगूठे का नाखून यड़ा व दायें का छोटा हो तो नये ढंग से जीवन निर्माण करते हैं। दायें हाथ में बड़ा व बायें में छोटा होने पर संघर्षशील होते हैं व अपना कमाया हुआ धन विश्वास व स्नेह के कारण दूसरों की सहायता में खर्च करने वाले होते हैं। ये 35 वर्ष के बाद धन-सम्पत्ति व सम्मान प्राप्त करते हैं तथा एकाग्रता से कार्य करने वाले होते हैं। ये स्वयं तथा समाज क लिए विशेष उदार होते हैं। जबकि दायें हाथ में नाखून छोटा होने पर व्यक्ति चालाक व निजी स्वार्थ आगे रखते हैं। दायां हाथ कता होने के कारण अधिकतर व्यक्तियों के इसी हाथ के नाखून बड़े होते हैं।

दो या अधिक नाखूनों का समन्वय

बुध व शनि का नाखून छोटा व चौकोर होने पर व्यक्ति में धार्मिक गुणों का अधिक समावेश होता है। इस सम्बन्ध में व्यक्ति विशेष ख्याति प्राप्त करता है तथा लेखक होने पर सत्-साहित्य का निर्माण करता है। बुध व वृहस्पति की उंगलियों कं नाखन छोटे व चौकोर हों तो व्यक्ति में व्यवहार व चरित्र सम्बन्धी गुण अधिक पाये जाते हैं। बुध व सूर्य का नाखून छोटा व चौकोर होने पर व्यक्ति रसायन व आयुर्वेद के ज्ञात होते हैं।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

नाखून का महत्व शोध या मनोविज्ञान की दृष्टि से केवल सुन्दर व उत्तम हाथ में होता है। निकृष्ट हाथों में निकृष्ट कोटि के गुण पाये जाने के कारण नाखूनों का विशेष महत्व नहीं होता। उस समय अंगूठे के नाखूनों से केवल व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक प्रवृत्तियों व रोग के विषय में जाना जाता है।




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Answer: You will receive your palm reading report by e-mail in your e-mail inbox.

Question: Can you also suggest remedies?

Answer: Yes, remedies and solution of problems are also included in this reading.

Question: Can you also suggest gemstone?

Answer: Yes, gemstone recommendation is also included in this reading.

Question: How to capture palm images?

Answer: Capture your palm images by your mobile camera or you can also use scanner.

Question: Give me sample of palm images so I get an idea how to capture palm images?

Answer: You need to capture full images of both palms (Right and left hand), close-up of both palms, and side views of both palms. See images below.

Question: What other information I need to send with palm images?

Answer: You need to mention the below things with your palm images:- 

  • Your Gender: Male/Female 
  • Your Age: 
  • Your Location: 
  • Your Questions: 

Question: How much the detailed palm reading costs?

Answer: Cost of palm reading:

  • India: Rs. 600/- 
  • Outside Of India: 20 USD

( For instant palm reading in 24 hours you need to pay extra Rs. 500 or 15 USD ) 
(India: 600 + 500 = Rs. 1100/-)
(Outside Of India: 20 + 15 = 35 USD) 

Question: How you will confirm that I have made payment?

Answer: You need to provide me some proof of the payment made like:

  • UTR/Reference number of transaction. 
  • Screenshot of payment. 
  • Receipt/slip photo of payment.

Question: I am living outside of India so what are the options for me to pay you?

Answer: Payment options for International Clients:

International clients (those who are living outside of India) need to pay me 20 USD via PayPal or Western Union Money Transfer.

  • PayPal (PayPal ID :
    ( Please select "goods or services" instead of "personal" )
  • PayPal direct link for $20 (You will get reading in 9/10 days) - PayPal Payment 20 dollars
    PayPal direct link for $35 (You will get reading in 24 hours) - PayPal Payment 35 dollars
  • Western Union: Contact me for details.

Question: I am living in India so what are the options for me to pay you?

Answer: Payment options for Indian Clients:

  • Indian client needs to pay me 600/- Rupees in my SBI Bank via netbanking or direct cash deposit.

  • SBI Bank: (State Bank of India)
       Nitin Kumar Singhal
       A/c No.: 61246625123
       IFSC CODE: SBIN0031199
       Branch: Industrial Estate
       City: Jodhpur, Rajasthan. 

      (Contact For Details)

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In this palmistry website you will find palmistry articles in both Hindi and English languages with pictures, figures and diagrams. If you are interested in palmistry and want to become an expert then this blog will be helpful for you and guide you how to read palms.

You can learn basics of palmistry, lines on hand, signs on hand, and you can learn about Indian Palmistry here.

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Client's Feedback - SEPTEMBER 2017

If you don’t have your real date of birth then palmistry is there to help you for future life predictions.  Our palm lines, signs, mounts and shapes which are very useful in predicting the person’s life. We can predict your future from the lines and signs of your both palms. We can predict your future by studying your palm lines and signs. There is no need to send us your date of birth , time of birth , place of birth etc . Palm told the personality ,future ups and downs thus a experienced palmist can guide you to deal with upcoming challenges with vedic remedies.