Thursday, February 23, 2017

स्वप्नफल ( Subah Ke Sapne Ka Phal )



स्वप्न फलदर्पण


स्वप्नों के अर्थ

प्रत्येक प्राणीमात्र के हृदय में एक अदृश्य चेतना शक्ति निहित रहती है। यह चेतना शक्ति भविष्य में होने वाली शुभ या अशुभ घटनाओं का संकेत स्वानों के माध्यम से मानव की देती है।

"स्वप्नशास्त्र' एक प्राचीन विद्या है। संपूर्ण विश्व इस विद्या को मानता है| समय-समय पर अनेक विद्वानों ने स्वानों का विश्लेषण करके कुछ सिद्धांत तैयार किये हैं। इन सिद्धांतों के आधार पर स्वप्नों के शुभ या अशुभ अर्थ लगाये जाते हैकिंतु स्वप्नशास्त्र पर कोई प्रामाणिक ग्रंथ आज की तारीख में उपलब्ध नहीं है।

स्वप्नशास्त्र इतना जटिल एंव विशाल है कि उस पर कोई ग्रंथ लिखना आसान नहीं है । जीवन में जितने और जिस प्रकार के स्वप्न दिखाई देते है उन सबको लिपिबद्ध करना संभव नहीं है। स्वप्न एक ऐसा चलचित्र है कि जिसका कोई प्रारंभ या अंत नहीं है| एक व्यक्ति के देखे सभी स्वप्नों को लिपिबद्ध करना महत् कठिन कार्य है। तो फिर करोड़ों लोगों द्वारा देखे सपनों को अक्षरबद्ध करना कैसे संभव है? अतः हमारे प्राचीन महर्षियों ने स्वप्नशास्त्र के विषय में जो सिद्धांत या मार्गदर्शन किया है उस आधार पर ही हमारे स्वप्न का विश्लेषण करना आवश्यक हो जाता है। प्राचीन ऋषि-मुनियों द्वारा बताये कुछ स्वप्न मार्गदर्शक सिद्धांत निम्नानुसार है। नितिन कुमार पामिस्ट

१ एक ही रात में मनुष्य अनेक शुभ एवं अशुभ स्वप्न देखता है। अनेक वस्तु एवं दृश्य स्वप्न में वह देखता है। संपूर्ण स्वप्न की घटना, प्रसंग एवं वस्तुओं का विश्लेषण करने के बाद ही स्वप्न का फल निश्चित किया जाना चाहिए।

जो घटना या जो प्रसंग स्वप्न के अंत में दिखायी दे उसके अनुसार स्वप्नफल निश्चित करें ऐसा महर्षि कहते हैं।

२. कोन से स्वपन फलदायी होते है और कोन से निरथर्क किस विषय में देखें स्वपन का फल कब मिलेगा इसकी जानकारी भी स्वपन फल दर्पण है । नितिन कुमार पामिस्ट

३. अशुभ फलदायक स्वप्न दिखें तो स्वपन देखने के बाद पुनः निद्राधीन होना शुभ होता है । तत्काल नींद से जागने के बाद वह स्वपन दुसरो को बताय तो वह स्वपन निष्फल होगा या उसका कुप्रभाव काम होगा ।

४. शुभ स्वपन उषाकाल में दिखाई दे तो तुरंत नींद से जागे पुनः सोये नहीं । यह स्वपन किसी को न बताय । दुसरो को सपना न बताना से उसका अधिक शुभफल प्राप्त होता है । नितिन कुमार पामिस्ट

५. कुछ दृश्य शुभ होते हैं पर वे सपने में देखने पर अशुभ हो जाते है। प्रत्यक्ष जीवन में अशुभ सिद्ध होने वाले सपने स्वप्न में शुभ हो जाते हैं। उदाहरणार्थ स्वर्ण को मरा देखना, मृत व्यक्ति दिखना, अपने शरीर पर जख्म होते देखना, रक्त बहते देखना, ये स्वपन शुभ होते हैं। हंसना, नाचना, गाना आदि देखना अशुभ होता है।
६. एकाध दृश्य के शुभ एवं अशुभ दोनों फल प्राप्त होते है। घटना या परतु किस संदर्भ में दिखायी दी यह बात ऐसे प्रसंग में महत्व की है। स्वयं की मृत्यु देखना शुभ है कि दूसरों की मृत्यु देखना अशुभ है। सफेद फूल देखना शुभ किंतु कपास के सफेद फूल देखना अशुभ है। कमल पुष्म देखना शुभ किंतु वह प्राप्त होना अशुभ है। स्त्री स्वप्न में किस स्वरूप में दिखाणी देती है उस स्वरूप पर उसका फल निर्भर रहेगा। नितिन कुमार पामिस्ट
७. सपने सच या झूठ? इस प्रश्न को लेकर वाद-विवाद व्यर्थ है। स्वप्न की हर बात सही आने के सैकड़ो उदाहरण है । स्वप्न की बात सत्य होने के भी अनुभव है । अधिकांश सपने झूठे भी होते हैं। रात के प्रथम या तीसरे प्रहर में देखे गये सपने नये प्रतिशत शूने साषित होते हैं। स्वप्न देखकर पुनः निद्रिस्त होना या दूसरों को स्वप्न की बात बताने से नये प्रतिशत सपने स्वत: प्रभावहीन हो जाते हैं।
इसके अलावा आपने स्वयं कोई घटना देखी, सुनी या उसका विचार किया अथवा आप स्वयं शारीरिक एवं मानसिक रोगी हो, दुखी हो, चिंतातुर कामातुर हो या नशीले पदार्थ के सेवन से नशे में हो तो ऐसी हालत में देखे सपने सच नहीं होते।
ऐसे भी कुछ सपने होते हैं जिनका संदर्भ समझ में नहीं आता। फलस्वरूप उनके फलित के विषय में कुछ कहो नहीं जा सकता। सारांश सपने सच होते है कि उनका प्रमाण अल्प होता है ।
८. स्वानों का विश्लेषण करना यह एक कठिन कार्य है। चलचित्र के समान काफी देर तक देखे स्वप्नों का विश्लेषण करना असंभव नहीं अपितु कठिन अवश्य है। इस दीर्घकाल में अनेक घटनायें एवं दृश्य देखे जाते है उन सबका तारतम्य देखना आवश्यक है। नीति-निर्धारण के सिद्धांतानुसार विद्वान सपनों का अर्थ बता सकते है। समझिये कि सपने में सुंदर नवयौवन खिलता हुआ कमलपुष्प बच्चों के साथ दांपत्य, राजा एवं राजदरबार का दृश्य देखा और नीद खुल गयी तो इन सपनों का क्या मतलब होगा ? नितिन कुमार पामिस्ट
ऐसे सपनों का विश्लेषण निम्न प्रकार से हो सकता है।
अ. स्वरूप सुंदर स्त्री, कमल पुष्प, बच्चे के साथ दांपत्य, राजा और राजदरबार ये दृश्य स्वानविज्ञान के अनुसार शुभ हैं। आर्थिक लाभ, राज सम्मान एवं प्रतिष्ठा देने वाले है। यही कारण है कि यह स्वप्न शुभ फलदायी हैं।
ब. उपरोक्त स्वप्न का विश्लेषण इस तरह से भी किया जा सकता है-सुंदर तरुणी का दर्शन , पत्नी समागम , दांपत्य सुख का प्रतीक है । खिलते हुए कमल पुष्प का दर्शन बीज अंकुरण एवं प्रजनन का संकेत है। दांपत्य के साथ बच्चे का दर्शन पुत्रसुख एवं संतति प्राप्ति का संकेत है तो राजसिंहासन का दृश्य राज्यकृपा एवं अधिकार प्राप्ति का प्रतीक है।
स तरह स्वप्न विज्ञान का मूलभूत सिद्धांत ध्यान में लेकर स्वप्न की सत्य-असत्यता का शुभ-अशुभत्व निश्चित करना चाहिए।
सपना : आग जलाकर भोजन बनाना
यदि कोई चूल्हे या भट्टी की जलती आग में खाने का कोई सामान बनाते हुए देखे तो उसे बहुत प्रसन्न होना चाहिये । यदि वह व्यापारी है तो बहुत लाभ हो । नौकर है तो वेतन बढ़ जाये, अकारण खर्च न बढ़ेंगे और हर प्रकार का संतोष प्राप्त होगा । यदि आग जलाते हुए सपने में कपड़ा जल जाए तो कई प्रकार के दु:ख मिले, अखिों को किसी प्रकार की पीड़ा या रोग हो ।

सपना : आँख देखना
यदि कोई अपने हाथो की हथेलियों में आँख देखता है तो उसका फल यह है कि देखने वाले को नकद धन की प्राप्ति होगी, परेशानियों, दुःख , बीमारियों दूर हों और हर प्रकार से प्रसन्नता व सुख प्राप्त होगा ।

सपना : इतर लगाना सुंघना
अच्छे कामों का पुण्य प्राप्त हो, मनचाही स्त्री से निकटता मिले, संसार में इज्जत मिलें ख्याति पाये ।

सपना : इम्तहान पास करना
काम पूरा होगा, प्रेमिका मिले, यश और धन का लाभ ।

सपना : इश्तहार पढ़ना
कुछ खो जाये, झूठे व्यापारी से हानि हो, कष्ट सिले ।

सपना : इन्द्र धनुष देखना
अन्न सस्ता हो, खुशहाली देश में फैले, गम दूर हों।

सपना : इकरार करते देखना
किसी को झूठा दिलासा न दे । सत्य वचन कहे तो खुशी हो ।

सपना : इडली सांभर खाते देखना
परदेशियों से सुख, अपनों से दुख मिले ।

सपना : इष्ट मित्र को देखना
खुश देखे तो दु:ख पाए । रोता देखें तो सुख का संकेत है ।

सपना : ईधन देखना
गुनाह में फँस जाए, व्यापार में हानि हो ।

सपना : साइन बोर्ड देखना
लाभ हो । व्यापार करें तो सुख , नौकरी करें तो कष्ट ।


सपना : सेमल का पेड़ देखना
धन पाये किन्तु शीघ्र व्यय हो जाय, डर बना रहे।

सपना : सुनहरा रंग देखना
खुशी होगी, कहीं से आशा के विपरीत धन मिले |

सपना : साइकिल चलाना देखना
हर कार्य में सफलता किन्तु भय रहें, उन्नति शीघ्र हो ।

सपना : सिलाई मशीन देखना
पत्नी सुघड़ घर में आये, विगड़े काम बनें, प्रेमिका से अनबन हो ।

सपना : सुपारी देखना
दोस्ती और भाई-चारा बढ़े । खुशी हो, ब्याह हो या पुत्र जन्मे ।

सपना : सौंठ देखना
स्वास्थ्य की बेहतरी किन्तु धन का मिलना नहीं के बराबर ।

सपना : सुदर्शन चक्र देखना
यदि कोई पाप करते हैं या कोई अधर्म करते हैं छोड़ दें यह कृष्ण भगवान के क्रोध का प्रतीक है।


सपना : सर्दी लगना सपने में
मेहनत की कमाई का भोजन मिले खुशी होगी ।

सपना : संडासी पिलास देखना
माल कमाए ब्यय न करे, सुखी रहे, सफलता प्राप्त करे ।

सपना : सावन देखना
बहार जीवन पर छाए, घर में पानी देखें तो दु:ख, खेतों में देखे तो खुशहाली ।

सपना : सुम्बा देखना लोहे का देखना
कुंवारी युवती से काम सुख, इरादा पूरा हो ।

सपना : सिगरेट बीड़ी सिगार पीना देखना
हर तरह का सुख मिले, पैसा वाहियात बातों में बरबाद करे ।

सपना : सूद देते लेते देखना
देते हुए देखे तो गरीबी घेर ले, लेते देखें तो हराम का धन मिलो ।

सपना : सुतली कमर में बांधते हुए देखना
गरीबी आय , लेकिन संघर्ष से खुशाली पाय ।
सपना : सिनेमा देखना
कोई बुरी आदत घेर ले , अकारण समय गवाय ।


सपना : डरकर भागना देखना

मुसीबतें दूर हो जायेंगी, मन की अभिलाषा पूरी होगी । कोई दु:ख भय न रहेगा । बुरे काम छूट ਸਰੇ । जायेंगे । यदि शराब, जुआ, रण्डीबाजी या कोई बुरा । काम करते की लत हो तो छोड़ने का प्रयास करो ।



सपना : डाल देखना

वृक्ष की डालें हवा में झूलती देखें तो लाभ हो, खुशी का समाचार मिले, पुत्र की प्राप्ति हो । शादी हो जाये, प्रेमिका से भेंट हो जाये । रूठा यार मान जाये ।



सपना : डलिया देखना

मनोकामना पूरी होगी, किसी ऐसे साधन से लाभ होगा जिसके विषय में कभी सोचा तक नहीं होगा। |



सपना : डाकिया डाकखाना लेटर वक्स देखना

शुभ सूचना आए, चिरायु हो, किसी बिछड़े यार का पत्र कुशलता का आये ।



सपना : डोली पर कुत्ता सवार हो।
आपके नगर का हाकिम नीच है उसकी दोस्ती और दुश्मनी दोनों में बुराई है इसलिए सावधान रहे ।

सपना : डाकू देखना
दुश्मन से डर है कोशिश करो की मामला बात चीत से तय हो जाय , कोई ऐसा मित्र भी दुश्मन हो सकता है जिस पर बहुत भरोसा हो । बेटी बहन जवान है तो शीघ्र विवाह का प्रयास करना चाहिए अपनी पत्नी पर नजर रखना आवश्यक है ।

सपना : सरसों देखन
धन का लाभ होगा । व्यापार करने का लाभ, नौकरी में प्रगति, आशा के विपरीत शुभ समाचार मिले ।

सपना : सर देखना
सुन्दर बालों में भरा सर देखना अच्छा सपना है ख़ुशी और उन्नति मिलेगी । किसी का सर कटा हे। देखने वाले को अपनों से जुदाई मिल । दुख और परेशानी में फसना पड़े । यदि अपना फटा हुआ सर देखे तो गम उठाये, बिगाडु हो, हानि हो या बुरा समाचार मिले । अपने सर के साथ किसी पशु पक्षी को देखे तो जिस पशु पक्षी को देख वैसी ही फुर्ती और शक्ति पाए। किसी जानवर का सर कटा हुआ देखे तो काम सफल हो, मनोकामना सिद्ध हो । किसी के सर पर बैठते देखे तो धर्म कर्म और संसार दोनों में सफलता और समृद्ध पाए । सर में तेल डालते देख तो यदि तल कम है तो कोई बात नहीं, तेल ज्यादा है तो परेशानी हो सकती है। सर के बाल झड़ते देख तो कर्ज अदा हो जाए। दु:ख जाता रहे । अपने बाल मुडते हुए देख तो कई तरह का खतरा हो । अपने सर के बाल कटे हुए देखें तो पति पत्नी में तलाक हो या मनमुटाव हो जाय । अपना सर कटा हुआ अपने हाथो में देखें तो कोई लाटरी या गड़ा हुआ धन मिलने की आशा है । यदि नाइ से अपना सर मुडवांटे देखें तो घर में लड़ाई दंगा हो । अपना सर बहुत बड़ा देखें तो विध्वान बने और ख्याति प्राप्त करें ।

सपना : सांप देखना
यदि साँप को मार दिया है या पकड़ लिया देखा है तो विजय मिले । आशा के विपरीत धन मिले । यदि सांप से डर गया है तो दुश्मन से खतरा है कोई मित्र ही शत्रु का रूप धारण कर सकता । साँप को घर में देख तो पत्नी से बेवफाई का डर है, लेकिन उसे पत्नी से लड़ना नहीं चाहिए। उसे समझाना चाहिये । साँप से बातें करता देखें तो दुश्मन से लाभ हो । साँप न्योले की लड़ाई देख तो चिंता और लड़ाई या अदावत से हो । साँप का मांस खाता देखें तो उसका फल यह है कि माल बहुत हाँथ आये, लेकिन खर्च बहुत होकर समाप्त हो जाये । साँप के दांत दिखाई दें तो रिश्तेदारों से सावधान रहे, कोई भी हानि पहुँचा सकता है। साँप को छत से गिरता देखा जाय तो सरकार से परेशानी हो या घर में बीमारी आये ।

सपना : सरैया देखना
सरैया तारो के जमघट को कहते यदि सपने में देखे तो हर वक्त का कष्ट दूर हो मनोकामना पूरी हो शुभ समाचार मिले ।

सपना : हलुवा खाना, हरीरा पीना
आयु लम्बी हो । स्वास्थ्य मिले । कई प्रकार की मिठाइयों के विषय में भी यही ताबीर बड़ों ने बताई है, भोजन खूब मिले और तंगी दूर हो जाये । कोई चिन्ता रहे तो दूर हो ! रूठा हुआ हो तो मान जाये । खोया हुआ मिल जाए ।

सपना : हुरम (मस्जिद) की नींव डालना
हर उद्देश्य प्राप्त हो, संमृद्धि ओर खुशहाली मिले नेक काम करके इज्जत पाये । हरप शरीक (काबा शरीक में जाना और गुसुल करता देखे तो संसार का हर भय उससे दूर हुआ ।

सपना : हक तआला (खुदा बन्द करीम) को हिसाब करते देखना
जो घर में हो खुशी प्राप्त करे । यात्रा पर हो तो शांति से वापसी हो । खुशी कई प्रकार से प्राप्त हो ।

सपना : हजरे अजदत को चूमना
किसी बुजुर्ग से नसीहत पाकर बुजुर्ग बने, नेकी पाये, हर अच्छे काम में सफलता पाये । इज्जत पाये ।

सपना : हज करते देखना
दिल की आरजू पूरी हो । हर प्रकार का सुख, नेकनामी और बड़ाई हासिल हो । दुश्मन का भय मन में न रहे। जो नेक इरादा करे उसमें सफलता पाये । खुदा की रहमत रहे ।


सपना : उपहार देखना
उपहार यदि मनपसंद हो तो पत्नी अत्यंत सुन्दर और मनपसन्द मिले । पहलौटी में पुत्र प्राप्त हो । मनोकामना पूरी हो ।

सपना : दूज का चन्द्रमा देखना
बड़ी पदवी पाये, पुत्र प्राप्त हो, कई प्रकार के शुभ समाचार मिलें, मन को चैन मिले ।

सपना : हाला देखना
सूर्य, चाँद या तारों के गिर्द जो घेरा होता है उसे हाला कहते हैं, बहुत धन पाये, सेवक और सेविकाओं पर क्रोध आये, हर बात पर स्वभाव कड़ा रहे।

सपना : हार या माला देखना
अन्य किसी के गले में देखें तो प्रेम हो, अपने गले में देखे तो खुशी प्राप्त हो ।

सपना : हल्दी देखना
गाँठ देखे तो सुख हो, पिसी देखे तो रंज पाये ।

सपना : हरियावल देखना
सुहाना सपना है मन प्रसन्न होगा ।

सपना : हरियाली देखना
शुभ समाचार बेतार द्वारा आये । धन के लाभ हो ।

सपना : हड्डी देखना
शुभ समाचार पाये, चिरायु हो ।

सपना : टब देखना
स्वपन में टब देखना मतलब पारिवारिक समस्या का हल होना ।
स्वपन में टब में नहाना मतलब दुर्भाग्य की पूर्व सूचना ।
स्वप्न में स्त्री का टब में नहाना - वह गर्भवती बनेगी ।
स्वप्न में अविवाहित स्त्री टब में नहाये तो- विवाह कार्य में असफलता।
स्वप्न में व्यापारी टब में नहाये तो - व्यापार में अड़चनें उपस्थित होंगी।

सपना : टेनिस देखना
स्वप्न में टेनिस खेलना - खर्च में बढ़ोतरी होना।
स्वप्न में व्यापारी टेनिस खेले तो - व्यापार में काफी धन मिलेगा।

सपना : टेकडी देखना
स्वप्न में टेकडी पर चढ़ना पर ऊपर तक नहीं पहुचना - अथक परिश्रम के बाद भी यश न पर ऊपर तक न पहुचन मिलना।
स्वप्न में टेकड़ी चढ़ जाना - परीक्षा में सफलता सभी कार्य सफल
स्वप्न में टेकडी चढ़ने में अपयश - प्रेमप्रकरण में असफलता ।

सपना : टांगा (तांगा) देखना
स्वप्न में टांगे में बैठना, स्वयं टांगा - प्रवास होगा अंगीकृत कार्य में सफलता प्राप्त होगी।

सपना : टोपी हैट देखना
स्वप्न में टोप-हैट खरीदे तो वन में कटा-दूटा टोप पहने तो दरिद्रता का सकत।

सपना : टोपी उतारना देखना
स्वप्न में सिर से टोपी उतारना - विश्वासघात होगा |
स्वप्न में टोपी मिलना – विवाह सूचक योग।
स्वप्न में टोपी जलन = मृत्यु को सूचना ।

Wednesday, February 22, 2017

हस्त रेखा की उत्पत्ति और इतिहास

हस्त रेखा की उत्पत्ति और इतिहास


हस्त रेखा की उत्पत्ति और इतिहास


जिन मनीषियों ने हस्तविज्ञान की खोज की, उसे समझा और व्यवहारिक रूप दिया, उनकी विद्वता के ठोस प्रमाण आज भी मौजूद हैं। भारत के ऐतिहासिक युग के स्मारक हमें बताते हैं कि रोम और यूनान की स्थापना से वषो पूर्व इस देश के मनीषियों ने ज्ञान का इतना अमूल्य भण्डार एकत्र कर लिया था कि उसकी सराहना समूचे विश्व में हुआ करती थी, और इन्हीं विद्वानों में हस्त रेखा विज्ञान के जन्म दाता भी थे, उन्ही के बनाये हुए सिद्धान्त अन्य देशों में पहुँचे।

हस्तरेखा से सम्बन्धित अब तक जितने भी प्राचीन ग्रंथ पाये गये हैं उनमें वेद एवं सामुदिक शास्त्र सबसे प्राचीन धर्म ग्रंथ  है। यही वेद और शास्त्र यूनानी सभ्यता और ज्ञान का मूल श्रोत था।

अत्यन्त प्राचीन युग में इस विज्ञान का प्रचलन चीन, तिब्बत, ईरान, और मिश्र जैसे देशों में आरम्भ हुआ लेकिन इन देशों में इसमें जो सहयोग स्पष्टता और एकरूपता हमें दिखायी देती है वह वास्तव में भारतीय सभ्यता की देन है। संसार भर में भारतीय सभ्यता को सर्वाधिक उच्च और विवेक पूर्ण माना जाता रहा है। जिसे हम हस्त रेखा विज्ञान या कीरोमेंसी कहते हैं वह भारत के अलावा यूनान में भी पला और पनपा यूनानी शब्द कीर का अर्थ है, जो हाथ से विकसित हुआ हो।

उन्नीसवीं शताब्दी में उत्पीड़न की अग्नि में भी सुरक्षित रहकर फीनिक्स ने इस ज्ञान की सुरक्षा के निरन्तर प्रयास किये और जिस विज्ञान को अन्धविश्वास घोषित किया जा चुका था, वह एक बार फिर सत्य बनकर सामने आया। इस प्रकार के अनेक प्रमाण हैं जो इसकी सत्यता को साबित करते हैं कि यह एक सत्य और प्रमाणिक विज्ञान है।

ईशा से 423 वर्ष पूर्व यूनानी दार्शनिक एनेक्सागोरस कीरोमेंन्सी का उपयोग ही नहीं बल्कि शिक्षा भी देता था। इन्ही की तरह अरस्तू विलसाइड, कार्डमिस, पिल्लनी थे, जो हिस्पेनस को इस विज्ञान पर एक पुस्तक लिखकर भेंट की थी, उसमें लिखा था- यह ग्रन्थ  एक ऐसा अध्ययन है जो जिज्ञासु और सुविकसित मस्तिष्क वाले व्यक्ति के पढ़ने योग्य है।

इन विद्वानों ने जब मानव का अध्ययन किया तो मानव के चेहरे उसकी नाक, कान, आँख आदि की स्वाभाविक स्थिति भली भांति पहचान लिया। इसी प्रकार मानव की हथेली में बनी मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा की जानकारी प्राप्त करके उनकी स्वाभाविक स्थिति को मान्यता प्रदान की। इस विज्ञान की खोज और अध्ययन में उन विद्वानों ने जो साधना की, जो समय लगाया उसी के कारण वे हथेली की रेखाओं और चित्रो को  ये नाम दे सकें। जिस रेखा को मानसिकता का सम्बन्धी समझा उसे मस्तिष्क रेखा का नाम दिया। स्नेह से सम्बधित रेखा को हृदय  रेखा तथा जीवन की अवधि से सम्बन्धित रेखा को जीवन रेखा का नाम दिया इसी प्रकार चिà और पर्वत के भी उन्हीं के अनुरुप नाम दिये।


रेखा विज्ञान की सत्यता


किसी विषय के बारे में तभी विश्वास होता है, जब उसे अंतरात्मा द्वारा देख या समझ लिया जाय। एक अणु को भी अपने अस्तित्व में अध्ययन के अयोग्य ठहराना उचित नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति  यह धारणा बना ले कि हस्त विज्ञान विचारणीय विषय नहीं है तो यह उसका कोरा भzम होगा। क्योंकि अनेक बड़ी-बड़ी अत्यन्त महत्वपूर्ण सच्चाइयां और वास्तविकताएं जिन्हें कभी नगण्य समझा जाता था वे अब असीमित शक्ति का साधन बन गयी हैं। 

हस्तविज्ञान के अध्ययन में और उसे विकसित करने में अनेक दार्शनिक और वर्तमान काल के वैज्ञानिकों ने भी इस ओर ध्यान दिया है। जब हम मनुष्यों की क्रियाशीलता और उसके पूरे शरीर पर प्रभाव के बारे में विचार करते हैं तो यह जानकर आश्चर्य नहीं होता, कि जिन्हे वैज्ञानिकों ने पहले प्रमाणित किया था कि मानव मस्तिष्क और उसके हाथों के बीच जितने भी स्नायु हैं, उतने शारीरिक व्यवस्था में और कहीं भी नहीं हैं। मनुष्य जब हाथों से कुछ करता है तो मस्तिष्क भी सोंचना आरम्भ कर देता है। भिन्न-भिन्न प्रकार के स्वभाव, संस्कार, प्रति और मानसिक स्थिति के व्यक्तियों के हाथों में भिन्न-भिन्न अन्तर होता है। 

संसार में अनेक आश्चर्यजनक सच्चाइयां हैं, शताब्दियों के कालचक्र ने इस विज्ञान पर धूल जमा दी थी लेकिन मानव के विवेक ने उसे पुन: खोज निकाला और अब इस विज्ञान की सच्चाई पर विश्वास होने लगा है। यह प्रमाणित हो गया है कि हाथ की रेखाएँ एक ऐसा अमिट सत्य है जो  व्यक्ति के जीवन और उसकी प्रति को स्पष्ट रुप से प्रकट कर देती है। आज भौतिक युग में जो लोग इस विज्ञान की सच्चाई के प्रभाव को जानना चाहते हैं। उन्हें यह याद रखना चाहिए कि हमें यह विज्ञान शताब्दियों पूर्व प्राप्त हुआ था और वह विज्ञान आज भी अभीष्ट सिद्ध है। 

हस्त रेखा और भविष्य 


मानव जाति में कदाचित ही कोई ऐसा  व्यक्ति होगा, जो अपने अतीत का भलीभांति अध्ययन करने के बाद यह अनुभव न करता हो कि उसके विकसित जीवन के कितने वर्ष या कितना भाग उसके अपने और माता-पिता के अनभिज्ञता के कारण बेकार ही बीत चुके हैं। अपने बारे में पूरा-पूरा ज्ञान प्राप्त करने के बाद ही हम स्वयं को नियन्त्रित करने में सक्षम और समर्थ हो सकेंगे। साथ ही अपनी उन्नति करके मानव जाति की उन्नति कर सकेंगे। हस्त विज्ञान का स्वयं को पहचानने से सीधा सम्बन्ध है। इस विज्ञान की उत्पत्ति पर विचार करने के लिए हमें विश्व इतिहास के प्रारम्भिक काल में लौटना होगा।

 आदि काल के मनीषियों का स्मरण करना होगा जिन्होंने विश्व के महान साम्राज्यों सभ्यताओं, जातियों और राजवंशों को नष्ट हो जाने के बाद भी अपने इस भण्डार को सुरक्षित रखा। विश्व इतिहास के प्रारम्भिक काल का अध्ययन करने पर हमें ज्ञात होगा कि हस्त विज्ञान से सम्बन्धित सामागzी इन्हीं मनिषियों की धरोहर थी। सभ्यता के उस आदिकाल केा मानव इतिहास में आर्य सभ्यता के नाम से पुकारा जाता है। हस्त रेखा विज्ञान के मूल विन्दुओं को जांचते-परखते समय हमें प्रतीत होने लगता है कि हाथों की रेखाओं का यह विज्ञान विश्व के पुरातन विज्ञान में से एक है। इतिहास साक्षी है कि भारत के उत्तर-पश्चिमी प्रान्तों की जोशी नामक जाति न जाने किस काल से हस्त रेखा विज्ञान को व्यवहार में लाती रही है।

स्थूल या सूक्ष्म गतिविधि को संचालित करने वाले स्नायु जिनसे ठीक वैसी ही सलवटें या रेखाएँ बनती हैं। उनका निर्माण प्रमुखरूप से गतिशील देशों से होता है। लेकिन सम्भवत: उनमें कुछ अन्य ऐसे तन्तु भी होते हैं जो अर्जित या अन्र्तनिहित प्रवृत्तियों के मिश्रित प्रभावों का कम्पनों द्वारा सम्प्रेषण करते हुए और उनका जीवन रेखा के प्रभावित होने वाले भाग से मुख्य रेखा या उसकी शाखा के जोड़ पर क्राश चिन्ह बनाते हुए दोनों का सम्बन्ध स्थापित करते हैं। कुछ कोशिकाओं की ऐसी वृत्ति है जिनके कारण उनमें आगामी घटनाओं का प्रभाव उत्पन्न हो जाता है। शायद कम्पन्न उत्पन्न हो जाता है। कोशिकाओं में उत्पन्न कम्पन्न अपने साथ जुड़े तर्क प्रक्रियाओं में लगे कोणों में कोई गतिविधि तो उत्पन्न नहीं करवा सकता लेकिन उनमें चेतनात्मक कम्पन्न अवश्य जगा देता है और इन कम्पनों का सम्पेशन हाथ पर बने विभिन्न आकार-प्रकार के चिàों के साथ में अंकित हो जाता है।नितिन कुमार पामिस्ट 

एक तर्कयुä जीवन के रुप में मनुष्य का हाथ विशेष रुप से विकाश की उच्च स्थिति का द्योतक है। उसकी गति से क्रोध प्रेम आदि प्रवृत्तियों का ज्ञान होता है। यह गति स्थूल अथवा सूक्ष्म होती है, इसलिए उससे हाथं पर बड़ी या छोटी सलवटें या रेखाएं बनती है। नितिन कुमार पामिस्ट 

चिकित्सा विज्ञान से कान का रक्त अर्बुद काफी समय पहले जाना जा चुका है, यह कान के Åपरी भाग में विभिन्न आकार में बनता है, यह फिर उपरी भाग के फूल जाने से उसी की शक्ल में बन जाता है। जिसमें रक्त अर्बुद होता है, यह अर्बुद अक्सर पागलों के कान में ही बनता है सामान्य रुप से उन लोगों के कान में जिनका पागलपन पैतृक होता है। इस बात का विशेष अध्ययन पेरिस में किया गया। विज्ञान अकादमी के तमाम परीक्षणों के जो परिणाम निकले उनसे सिद्ध हो गया कि केवल कान की परख करके वर्षो पहले भविष्यवाणी की जा सकती है। इसलिए यह तर्क सिद्ध हो चुका है कि जब केवल कान की जांच-परख करके सही-सही भविष्यवाणी की जा सकती है, तो क्या हाथों का निरीक्षण करके अन्य भविष्यवाणी करना असम्भव है? हाथ के विषय में स्नायु मण्डल और उनके गति संचालन को देखते हुए यह माना जा चुका है कि हाथ ही पूरे मानव शरीर का सर्वाधिक विचित्र अंग है, और हाथ का मस्तिष्क के साथ सबसे ज्यादा गहरा सम्बन्ध है।


किन्हीं दो हाथों पर अंकित रेखाएं और चिन्ह कभी भी एक जैसे नहीं पाये जाते। इसके अलावा जुड़वा बच्चों की हस्तरेखा में भी परस्पर अन्तर पाया जाता है। यह भी पाया गया है कि हाथ की रेखाएँ किसी परिवार की किसी विशिष्ट प्रवृत्ति केा स्पष्ट कर देती है और आने वाली पीढ़ियों में यह प्रवृत्ति निरन्तर बनी रहती है, लेकिन यह भी देखा गया है कि कुछ बच्चों के हाथ पर अंकित रेखाओं की स्थिति में अपने माता-पिता से कोई समानता नहीं होती। अगर गहराई से अध्ययन किया जाय, तो इस सिद्धान्त के अनुसार वे बच्चे अपने माता-पिता से पूरी तरह भिन्न होते हैं।नितिन कुमार पामिस्ट 


 एक प्रचलित धारणा है कि हाथ की रेखाओं पर व्यक्ति के कार्यों का गहरा प्रभाव पड़ता है। वे उनके अनुसार ही चलती रहती हैं। लेकिन सच्चाई इसके विल्कुल विपरीत है, शिशु के जन्म के समय ही उसके हाथ की चमड़ी मोटी और कुछ सख्त हो जाती है, अगर व्यक्ति के हंथेली की चमड़ी को पुल्टिस या किसी अन्य साधनों से मुलायम बना दिया जाये तो उसपर अंकित चित्र किसी भी समय देखे जा सकते हैं। इनमें अधिकांश चिन्ह उसकी हथेली पर जीवन के अंतिम क्षण तक बने रहते हैं। नितिन कुमार पामिस्ट 

इस संदर्भ में हाथ में विद्यमान कोषाणुओं पर ध्यान देना अत्यन्त महत्वपूर्ण है। मैरनर ने अपनी पुस्तक हाथ की रचना और विधान में लिखा है कि हाथ के इन कोषाणुओं का अर्थ बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह अद~भुत आणविक पदार्थ अंगुलियों की पोरों में और हाथ की रेखाओं में पाये जाते हैं, तथा कलाई तक पहुंचते पहुँचते-2 लुप्त हो जाते हैं। यह शरीर के जीवित रहने की अवधि में कुछ विशेष कम्पन्न भी उत्पन्न करते हैं तथा जैसे जीवन समाप्त होता है यह रुक जाते हैं। नितिन कुमार पामिस्ट 


अब हम हाथों की चमड़ी, स्नायु और स्पर्श करने की अनुभूति पर ध्यान देते हैं। सर चाल्र्सवेल ने चमड़ी के सम्बन्ध में लिखा है- चमड़ी त्वरित स्पर्श अनुभूति का महत्त्वपूर्ण अंश है। यही वह माध्यम है जिसके द्वारा बाहरी प्रभाव हमारे स्नायुओं तक पहुंचते हैं। उंगलियों के सिरे इस अनुभूति की व्यवस्थाओं का श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं। नाखून उंगलियों को सहारा देते हैं और लचीले गांठे  के प्रभाव को बनाये रखने के लिए ही उसके सिरे बने हैं। उनका आकार चौड़ा और ढालनुमा है। यह बाहरी उपकरणों का एक महत्त्वपूर्ण भाग है। इसकी लचक और भराव इसे प्रशंसनीय ढंग से स्पर्श के अनुकूल ढालते हैं। यह एक अद~भुद~ सत्य है कि हम जीभ से नाड़ी नहीं देख सकते, लेकिन उंगलियों से देख सकते हैं। गहराई से निरीक्षण करने पर हमें मालूम होता है, उंगलियों के सिरों में उन्हें स्पर्श के अनुकूल ढालने के लिए उनका विशेष प्रावधान है। जहां भी अनुभूति की आवश्यकता अधिक स्पष्ट होती है, वहीं हमें त्वचा की छोटी-छोटी घुमावदार मेड़ें-सी महसूस होती हैं। इन मेड़ों की इस अनुकूलता में आन्तरिक सतह पर दबी हुई प्रणालिकाएं होती हैं जो पौपिला कहलाने वाली त्वचा की कोमल और मांसल प्रक्रियाओं को टिकाव और स्थापन प्रदान करती हैं। जिनमें स्नायुओं के अन्तिम सिरों का आवास होता है। इस प्रकार स्नायु पर्याप्त सुरक्षित होते हैं और साथ ही साथ इतने स्पष्ट भी दिखाई देते हैं कि लचीली त्वचा द्वारा उन्हें सम्पेषित प्रभावों को ग्रहण कर सकें और इस प्रकार स्पर्श अनुभूति को जन्म दे सकें।

नितिन कुमार पामिस्ट 

हस्त रेखा विशेषज्ञ का दायित्व

हस्त रेखा विशेषज्ञ का दायित्व

हस्त रेखा विशेषज्ञ का दायित्व


 वकील, डाक्टर और हस्तरेखा विशेषज्ञ तीनों का एक काम है कि उनके पास जो व्यक्ति जाता है, वह अपने किसी समस्या को लेकर पहुंचता है। डाक्टर अनेक प्रकार से रोगी का परीक्षण करता है, वह जानता है कि भयंकर रोग है। फिर भी वह उसे नहीं बतलाता और रोगी को आश्वासन देता है कि वह ठीक हो जायेगा। रोगी भयंकर बीमारी के बाबजूद अपनी बलवती आशा से सफलता प्राप्त करने में समर्थ हो जाता है तथा अनेक रोगी ठीक भी हो जाते हैं। 

उनमें स्वयमेव अपनी शक्ति पर विश्वास बढ़ जाता है, अपनी शक्ति, साहस, उत्साह के बल पर कार्य में जुट जाता है। ऐसी स्थिति में आपके चुम्बकीय शब्द अपूर्व शक्ति लेकर उस वातावरण में कम्पन्न पैदा कर देते हैं। हस्त रेखा विशेषज्ञ को अपने विषय से सम्बन्धित शास्त्र का पूरा ज्ञान होना जरुरी है। जो कुछ उसने सुन रखा है, जो उसके ध्यान में आया है, उसे बताने की जरुरत नहीं है। शास्त्रोक्त ज्ञान के आधार पर जो उसने खोजा था, जो सिद्धान्त उसने बनाये थे, उसके आधार पर रेखा, चिन्ह , देश, काल, अवस्थानुसार परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए भविष्यवाणी करनी चाहिए। बालक विद्या का प्रश्न करेगा, लड़की विवाह से सम्बन्धी पश्न पूछ सकती है। वृद्ध वैंक वैलेंस पूछ सकता हैं। इसलिए भविष्यवाणी करने में जल्दी न करें। 

हस्तरेखा देखते समय पुरुषों को उनकी उन्नति के वर्ष, नया कारबार, बिमारियों से सर्तकता रखने का समय, विवाह, लाभ, हानि, सन्तान, एवं चारित्रिक गुण आदि विशेषत: बताने चाहिए। 

स्त्रियों को पति का सुख, पुत्र के भाग्योदय का वर्ष, उनके द्वारा होने वाले धर्म-कर्म, कथा, दान, पुण्य, सुख, दुख, पति प्रेम की विचारणीय बातों का वर्णन विशेष रुप से करना चाहिए। एक पामिस्ट सही मायने में लोगों को चेतावनी भी देता है, सुझाव भी देता है और घटनाओं से आगाह कराता है, ताकि भविष्य में होनेवाली घटनाओं से लाभ उठाया जा सकंे और समय का सही उपयोग कर सकें, क्योंकि मानव को भविष्य इसलिए रोचक लगता है कि शेष जिंदगी भविष्य की गोद में बितानी है। जब हस्त रेखा देखकर भविष्य बताने की बारी आती है, तो अनेक बातों का ख्याल रखना होता हैं। नितिन कुमार पामिस्ट 

जैसे- भोजन के तीन घंटे बाद जब हाथ ज्यादा ठंडा हो, न ज्यादा गरम तथा ज्यादा छोटे बालकों का हाथ न देखा जाये। इसके अतिरिक्त आयु, देश, वातावरण को ध्यान में रखते हुए हाथ देखा जाय। केवल एक रेखा देखकर किसी भी निर्णय पर नहीं पहुँचना चाहिए। समस्त रेखाओं, चिन्ह  और पर्वतों का अध्ययन करें उनके आधार पर ही कुछ कहना उचित होगा। व्यायाम करने के बाद, मदिरा, मिठाई, लेने के बाद हाथ न देखा जाय, क्योंकि इस समय इंदिzयां उत्तेजनायुक्त होती हैं। इस कारण नाड़ियों एवं करतल का स्वाभाविक तत्व समाप्त हो जाता है। इसके अलावा रेखाओं का रंग भी बदल जाता है।  नितिन कुमार पामिस्ट 

हाथ देखने का समय सूर्योदय से 2 घंटे बाद का समय अधिक उचित होता है। अधिक गर्मी एवं अधिक शर्दी के समय भी हाथ देखना अनुचित होता है कारण कि हाथों का रंग प्रभावित होगा। अत: इन बातों का ख्याल रखना ही सफलता की सीढ़ी है।

 नितिन कुमार पामिस्ट 

हाथों में बीमारियों के लक्षण

हाथों में बीमारियों के लक्षण




लम्बे पतले, मुड़े हुए नाखून, मस्तिष्क रेखा छोटे-छोटे द्वीपों में क्षय रोग (टी.वी.) की प्रवृत्ति।

छोटे नाखून, साथ में टूटी मस्तिष्क रेखा त्रिकोण में क्रास, जिसके सिरे धब्बेदार हों- मिरगी का रोग।

हृदय रेखा, शनि पर्वत के नीचे टूटी हुई, दो खंड एक दूसरे के ऊपर गम्भीर हृदय रोग।

निकृष्ट हाथ में चन्द्र  पर्वत पर तारक चिन्ह अति गम्भीर हिस्टीरिया का रोग।

ह्रदय  रेखा की एक शाखा चन्द्र पर्वत तक जाती हुई तारक चिन्ह में अन्त -वंशागत पागलपन।

उर्ध्व मंगल पर्वत पर चन्द्र चिन्ह -हिंसात्मक पागलपन का रोग।

मोटी तथा नम दीखने वाली त्वचा, साथ में चन्द्र पर्वत पर तारक चिन्ह -गुर्दे का रोग।

नीली अथवा पीली रंग की ह्रदय  रेखा, लहरदार मस्तिष्क रेखा अथवा बदरंग, साथ में इस पर नीला धब्बा लहरदार स्वास्थ्य रेखा-यकृत रोग।

छोटे-छोटे खण्डों में टूटी मस्तिष्क रेखा या छोटे वर्गों के आकारों में -स्मृतिनाश का रोग।

जीवन रेखा पर काले धब्बे से उदित शाखा-स्नायविक रोग।

नाखून मध्य लम्बाई के, परन्तु पतले और छोटे मस्तिष्क रेखा पर द्वीप त्रिकोण का तीसरा कोण विकृत , साथ में छोटी-छोटी रेखायें जीवन रेखा को काटती हुई-स्नायुशूल का रोग।

जीवन रेखा से उदित एक रेखा शनि पर्वत पर त्रिकोण में समाप्त प्लूरिसी का रोग।

लम्बी तथा लहरदार âदय रेखा, साथ में स्वास्थ्य रेखा लहरदार और उंगलियों के दूसरे पर्व की अपेक्षा लम्बे -दांत का रोग।

चमकीली मुलायम त्वचा, जीवन रेखा के अन्त पर शाखापुंज सूक्ष्म रेखायें, ह्रदय  रेखा के उदय पर नीचे को काट कर जाती हुई रेखा-वायु (गैस) का रोग।

मस्तिष्क रेखा टूटी, जुड़ी अथवा जंजीरदार तथा मस्तिष्क रेखा को काटती हुई और उसके नीचे को निकलती छोटी रेखायें। स्वास्थ्य रेखा, मस्तिष्क रेखा के पास लाल रंग की -निरन्तर सिर दर्द का रोग।

चन्द्र  पर्वत पर की ओर, अत्यधिक भरा हुआ, चन्द्र  पर्वत के आर-पार एक गहरी रेखा, साथ में उसे काटती हुई एक रेखा। जीवन रेखा के अन्तिम सिरे पर शाखापुंज जिसकी एक शाखा चन्द्र  पर्वत की ओर जाती हुई-गठिया का रोग।

मस्तिष्क रेखा, हृदय  की ओर उठती हुई, साथ में स्वास्थ्य रेखा, जीवन रेखा से उदित -दौरों की प्रवृत्ति, मूर्छा रोग।

मस्तिष्क रेखा पर बृहस्पति पर्वत के नीचे धब्बे-बहरेपन का रोग।

दोनों हाथों में मंगल रेखा के अन्त पर चन्द्र  पर्वत की दिशा में शाखापुंज जीवन रेखा से उदित रेखा चन्द्र  पर्वत पर तारक चिन्ह  में समाप्त -मद्यपान से रोग।

जीवन रेखा पर वृत्त अथवा धब्बा हृदय  रेखा पर वृत्त तथा स्वास्थ्य रेखा पर क्रास स्वास्थ्य रेखा के समीप त्रिकोण में स्टार (तारक) चिन्ह । सूर्य रेखा तथा ह्रदय  रेखा के मिलन बिन्दु पर काला धब्बा-अन्धेपन का रोग।

ह्रदय  रेखा से चन्द्र  पर्वत को जाती हुई दो लम्बी रेखायें -पक्षाघात। 

चन्द्र  पर्वत पर की ओर अत्यधिक विकसित-नजले का रोग।

चन्द्र  पर्वत पर एक तारक चिन्ह परन्तु यात्रा रेखा पर नहीं-जलोदर रोग।

जीवन रेखा मस्तिष्क रेखा से अलग होते समय कटी और टूटी हुई, मस्तिष्क रेखा उसी दण्ड रेखा द्वारा कटती हुई, साथ में शनि पर्वत के नीचे चतुर्भुज में क्रास- डिपथीरिया का रोग।


निकृष्ट मस्तिष्क रेखा, साथ में अंगूठा बहुत छोटा- बुद्धि जड़ता।

मस्तिष्क रेखा पर गहरे धब्बे, साथ में जीवन तथा स्वास्थ्य रेखायें तंग तथा गहरे रंग की। स्वास्थ्य रेखा मध्य में पतली तथा सरल-ज्वर की प्रवृत्ति। नितिन कुमार पामिस्ट 

हृदय  रेखा मस्तिष्क रेखा की ओर बढती हुई, साथ में अपूर्ण अस्पष्ट स्वास्थ्य रेखा-ज्वर।

जीवन रेखा पर एक बहुत छोटा सा वर्ग, साथ में अन्दर क्रास-बुखार।

जीवन रेखा पर छोटा सा वर्ग, साथ में अन्दर क्रास प्राय: टाइफाइड बुखार।

लहरदार स्वास्थ्य रेखा और निकृष्ट यदि साथ में जीवन रेखा पर द्वीप हो, यदि हाथ भी नम हों तो दमें का रोग।

नितिन कुमार पामिस्ट 

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