Wednesday, February 22, 2017



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हस्त रेखा की उत्पत्ति और इतिहास

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हस्त रेखा की उत्पत्ति और इतिहास


हस्त रेखा की उत्पत्ति और इतिहास


जिन मनीषियों ने हस्तविज्ञान की खोज की, उसे समझा और व्यवहारिक रूप दिया, उनकी विद्वता के ठोस प्रमाण आज भी मौजूद हैं। भारत के ऐतिहासिक युग के स्मारक हमें बताते हैं कि रोम और यूनान की स्थापना से वषो पूर्व इस देश के मनीषियों ने ज्ञान का इतना अमूल्य भण्डार एकत्र कर लिया था कि उसकी सराहना समूचे विश्व में हुआ करती थी, और इन्हीं विद्वानों में हस्त रेखा विज्ञान के जन्म दाता भी थे, उन्ही के बनाये हुए सिद्धान्त अन्य देशों में पहुँचे।

हस्तरेखा से सम्बन्धित अब तक जितने भी प्राचीन ग्रंथ पाये गये हैं उनमें वेद एवं सामुदिक शास्त्र सबसे प्राचीन धर्म ग्रंथ  है। यही वेद और शास्त्र यूनानी सभ्यता और ज्ञान का मूल श्रोत था।

अत्यन्त प्राचीन युग में इस विज्ञान का प्रचलन चीन, तिब्बत, ईरान, और मिश्र जैसे देशों में आरम्भ हुआ लेकिन इन देशों में इसमें जो सहयोग स्पष्टता और एकरूपता हमें दिखायी देती है वह वास्तव में भारतीय सभ्यता की देन है। संसार भर में भारतीय सभ्यता को सर्वाधिक उच्च और विवेक पूर्ण माना जाता रहा है। जिसे हम हस्त रेखा विज्ञान या कीरोमेंसी कहते हैं वह भारत के अलावा यूनान में भी पला और पनपा यूनानी शब्द कीर का अर्थ है, जो हाथ से विकसित हुआ हो।

उन्नीसवीं शताब्दी में उत्पीड़न की अग्नि में भी सुरक्षित रहकर फीनिक्स ने इस ज्ञान की सुरक्षा के निरन्तर प्रयास किये और जिस विज्ञान को अन्धविश्वास घोषित किया जा चुका था, वह एक बार फिर सत्य बनकर सामने आया। इस प्रकार के अनेक प्रमाण हैं जो इसकी सत्यता को साबित करते हैं कि यह एक सत्य और प्रमाणिक विज्ञान है।

ईशा से 423 वर्ष पूर्व यूनानी दार्शनिक एनेक्सागोरस कीरोमेंन्सी का उपयोग ही नहीं बल्कि शिक्षा भी देता था। इन्ही की तरह अरस्तू विलसाइड, कार्डमिस, पिल्लनी थे, जो हिस्पेनस को इस विज्ञान पर एक पुस्तक लिखकर भेंट की थी, उसमें लिखा था- यह ग्रन्थ  एक ऐसा अध्ययन है जो जिज्ञासु और सुविकसित मस्तिष्क वाले व्यक्ति के पढ़ने योग्य है।

इन विद्वानों ने जब मानव का अध्ययन किया तो मानव के चेहरे उसकी नाक, कान, आँख आदि की स्वाभाविक स्थिति भली भांति पहचान लिया। इसी प्रकार मानव की हथेली में बनी मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा की जानकारी प्राप्त करके उनकी स्वाभाविक स्थिति को मान्यता प्रदान की। इस विज्ञान की खोज और अध्ययन में उन विद्वानों ने जो साधना की, जो समय लगाया उसी के कारण वे हथेली की रेखाओं और चित्रो को  ये नाम दे सकें। जिस रेखा को मानसिकता का सम्बन्धी समझा उसे मस्तिष्क रेखा का नाम दिया। स्नेह से सम्बधित रेखा को हृदय  रेखा तथा जीवन की अवधि से सम्बन्धित रेखा को जीवन रेखा का नाम दिया इसी प्रकार चिà और पर्वत के भी उन्हीं के अनुरुप नाम दिये।


रेखा विज्ञान की सत्यता


किसी विषय के बारे में तभी विश्वास होता है, जब उसे अंतरात्मा द्वारा देख या समझ लिया जाय। एक अणु को भी अपने अस्तित्व में अध्ययन के अयोग्य ठहराना उचित नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति  यह धारणा बना ले कि हस्त विज्ञान विचारणीय विषय नहीं है तो यह उसका कोरा भzम होगा। क्योंकि अनेक बड़ी-बड़ी अत्यन्त महत्वपूर्ण सच्चाइयां और वास्तविकताएं जिन्हें कभी नगण्य समझा जाता था वे अब असीमित शक्ति का साधन बन गयी हैं। 

हस्तविज्ञान के अध्ययन में और उसे विकसित करने में अनेक दार्शनिक और वर्तमान काल के वैज्ञानिकों ने भी इस ओर ध्यान दिया है। जब हम मनुष्यों की क्रियाशीलता और उसके पूरे शरीर पर प्रभाव के बारे में विचार करते हैं तो यह जानकर आश्चर्य नहीं होता, कि जिन्हे वैज्ञानिकों ने पहले प्रमाणित किया था कि मानव मस्तिष्क और उसके हाथों के बीच जितने भी स्नायु हैं, उतने शारीरिक व्यवस्था में और कहीं भी नहीं हैं। मनुष्य जब हाथों से कुछ करता है तो मस्तिष्क भी सोंचना आरम्भ कर देता है। भिन्न-भिन्न प्रकार के स्वभाव, संस्कार, प्रति और मानसिक स्थिति के व्यक्तियों के हाथों में भिन्न-भिन्न अन्तर होता है। 

संसार में अनेक आश्चर्यजनक सच्चाइयां हैं, शताब्दियों के कालचक्र ने इस विज्ञान पर धूल जमा दी थी लेकिन मानव के विवेक ने उसे पुन: खोज निकाला और अब इस विज्ञान की सच्चाई पर विश्वास होने लगा है। यह प्रमाणित हो गया है कि हाथ की रेखाएँ एक ऐसा अमिट सत्य है जो  व्यक्ति के जीवन और उसकी प्रति को स्पष्ट रुप से प्रकट कर देती है। आज भौतिक युग में जो लोग इस विज्ञान की सच्चाई के प्रभाव को जानना चाहते हैं। उन्हें यह याद रखना चाहिए कि हमें यह विज्ञान शताब्दियों पूर्व प्राप्त हुआ था और वह विज्ञान आज भी अभीष्ट सिद्ध है। 

हस्त रेखा और भविष्य 


मानव जाति में कदाचित ही कोई ऐसा  व्यक्ति होगा, जो अपने अतीत का भलीभांति अध्ययन करने के बाद यह अनुभव न करता हो कि उसके विकसित जीवन के कितने वर्ष या कितना भाग उसके अपने और माता-पिता के अनभिज्ञता के कारण बेकार ही बीत चुके हैं। अपने बारे में पूरा-पूरा ज्ञान प्राप्त करने के बाद ही हम स्वयं को नियन्त्रित करने में सक्षम और समर्थ हो सकेंगे। साथ ही अपनी उन्नति करके मानव जाति की उन्नति कर सकेंगे। हस्त विज्ञान का स्वयं को पहचानने से सीधा सम्बन्ध है। इस विज्ञान की उत्पत्ति पर विचार करने के लिए हमें विश्व इतिहास के प्रारम्भिक काल में लौटना होगा।

 आदि काल के मनीषियों का स्मरण करना होगा जिन्होंने विश्व के महान साम्राज्यों सभ्यताओं, जातियों और राजवंशों को नष्ट हो जाने के बाद भी अपने इस भण्डार को सुरक्षित रखा। विश्व इतिहास के प्रारम्भिक काल का अध्ययन करने पर हमें ज्ञात होगा कि हस्त विज्ञान से सम्बन्धित सामागzी इन्हीं मनिषियों की धरोहर थी। सभ्यता के उस आदिकाल केा मानव इतिहास में आर्य सभ्यता के नाम से पुकारा जाता है। हस्त रेखा विज्ञान के मूल विन्दुओं को जांचते-परखते समय हमें प्रतीत होने लगता है कि हाथों की रेखाओं का यह विज्ञान विश्व के पुरातन विज्ञान में से एक है। इतिहास साक्षी है कि भारत के उत्तर-पश्चिमी प्रान्तों की जोशी नामक जाति न जाने किस काल से हस्त रेखा विज्ञान को व्यवहार में लाती रही है।

स्थूल या सूक्ष्म गतिविधि को संचालित करने वाले स्नायु जिनसे ठीक वैसी ही सलवटें या रेखाएँ बनती हैं। उनका निर्माण प्रमुखरूप से गतिशील देशों से होता है। लेकिन सम्भवत: उनमें कुछ अन्य ऐसे तन्तु भी होते हैं जो अर्जित या अन्र्तनिहित प्रवृत्तियों के मिश्रित प्रभावों का कम्पनों द्वारा सम्प्रेषण करते हुए और उनका जीवन रेखा के प्रभावित होने वाले भाग से मुख्य रेखा या उसकी शाखा के जोड़ पर क्राश चिन्ह बनाते हुए दोनों का सम्बन्ध स्थापित करते हैं। कुछ कोशिकाओं की ऐसी वृत्ति है जिनके कारण उनमें आगामी घटनाओं का प्रभाव उत्पन्न हो जाता है। शायद कम्पन्न उत्पन्न हो जाता है। कोशिकाओं में उत्पन्न कम्पन्न अपने साथ जुड़े तर्क प्रक्रियाओं में लगे कोणों में कोई गतिविधि तो उत्पन्न नहीं करवा सकता लेकिन उनमें चेतनात्मक कम्पन्न अवश्य जगा देता है और इन कम्पनों का सम्पेशन हाथ पर बने विभिन्न आकार-प्रकार के चिàों के साथ में अंकित हो जाता है।नितिन कुमार पामिस्ट 

एक तर्कयुä जीवन के रुप में मनुष्य का हाथ विशेष रुप से विकाश की उच्च स्थिति का द्योतक है। उसकी गति से क्रोध प्रेम आदि प्रवृत्तियों का ज्ञान होता है। यह गति स्थूल अथवा सूक्ष्म होती है, इसलिए उससे हाथं पर बड़ी या छोटी सलवटें या रेखाएं बनती है। नितिन कुमार पामिस्ट 

चिकित्सा विज्ञान से कान का रक्त अर्बुद काफी समय पहले जाना जा चुका है, यह कान के Åपरी भाग में विभिन्न आकार में बनता है, यह फिर उपरी भाग के फूल जाने से उसी की शक्ल में बन जाता है। जिसमें रक्त अर्बुद होता है, यह अर्बुद अक्सर पागलों के कान में ही बनता है सामान्य रुप से उन लोगों के कान में जिनका पागलपन पैतृक होता है। इस बात का विशेष अध्ययन पेरिस में किया गया। विज्ञान अकादमी के तमाम परीक्षणों के जो परिणाम निकले उनसे सिद्ध हो गया कि केवल कान की परख करके वर्षो पहले भविष्यवाणी की जा सकती है। इसलिए यह तर्क सिद्ध हो चुका है कि जब केवल कान की जांच-परख करके सही-सही भविष्यवाणी की जा सकती है, तो क्या हाथों का निरीक्षण करके अन्य भविष्यवाणी करना असम्भव है? हाथ के विषय में स्नायु मण्डल और उनके गति संचालन को देखते हुए यह माना जा चुका है कि हाथ ही पूरे मानव शरीर का सर्वाधिक विचित्र अंग है, और हाथ का मस्तिष्क के साथ सबसे ज्यादा गहरा सम्बन्ध है।


किन्हीं दो हाथों पर अंकित रेखाएं और चिन्ह कभी भी एक जैसे नहीं पाये जाते। इसके अलावा जुड़वा बच्चों की हस्तरेखा में भी परस्पर अन्तर पाया जाता है। यह भी पाया गया है कि हाथ की रेखाएँ किसी परिवार की किसी विशिष्ट प्रवृत्ति केा स्पष्ट कर देती है और आने वाली पीढ़ियों में यह प्रवृत्ति निरन्तर बनी रहती है, लेकिन यह भी देखा गया है कि कुछ बच्चों के हाथ पर अंकित रेखाओं की स्थिति में अपने माता-पिता से कोई समानता नहीं होती। अगर गहराई से अध्ययन किया जाय, तो इस सिद्धान्त के अनुसार वे बच्चे अपने माता-पिता से पूरी तरह भिन्न होते हैं।नितिन कुमार पामिस्ट 


 एक प्रचलित धारणा है कि हाथ की रेखाओं पर व्यक्ति के कार्यों का गहरा प्रभाव पड़ता है। वे उनके अनुसार ही चलती रहती हैं। लेकिन सच्चाई इसके विल्कुल विपरीत है, शिशु के जन्म के समय ही उसके हाथ की चमड़ी मोटी और कुछ सख्त हो जाती है, अगर व्यक्ति के हंथेली की चमड़ी को पुल्टिस या किसी अन्य साधनों से मुलायम बना दिया जाये तो उसपर अंकित चित्र किसी भी समय देखे जा सकते हैं। इनमें अधिकांश चिन्ह उसकी हथेली पर जीवन के अंतिम क्षण तक बने रहते हैं। नितिन कुमार पामिस्ट 

इस संदर्भ में हाथ में विद्यमान कोषाणुओं पर ध्यान देना अत्यन्त महत्वपूर्ण है। मैरनर ने अपनी पुस्तक हाथ की रचना और विधान में लिखा है कि हाथ के इन कोषाणुओं का अर्थ बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह अद~भुत आणविक पदार्थ अंगुलियों की पोरों में और हाथ की रेखाओं में पाये जाते हैं, तथा कलाई तक पहुंचते पहुँचते-2 लुप्त हो जाते हैं। यह शरीर के जीवित रहने की अवधि में कुछ विशेष कम्पन्न भी उत्पन्न करते हैं तथा जैसे जीवन समाप्त होता है यह रुक जाते हैं। नितिन कुमार पामिस्ट 


अब हम हाथों की चमड़ी, स्नायु और स्पर्श करने की अनुभूति पर ध्यान देते हैं। सर चाल्र्सवेल ने चमड़ी के सम्बन्ध में लिखा है- चमड़ी त्वरित स्पर्श अनुभूति का महत्त्वपूर्ण अंश है। यही वह माध्यम है जिसके द्वारा बाहरी प्रभाव हमारे स्नायुओं तक पहुंचते हैं। उंगलियों के सिरे इस अनुभूति की व्यवस्थाओं का श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं। नाखून उंगलियों को सहारा देते हैं और लचीले गांठे  के प्रभाव को बनाये रखने के लिए ही उसके सिरे बने हैं। उनका आकार चौड़ा और ढालनुमा है। यह बाहरी उपकरणों का एक महत्त्वपूर्ण भाग है। इसकी लचक और भराव इसे प्रशंसनीय ढंग से स्पर्श के अनुकूल ढालते हैं। यह एक अद~भुद~ सत्य है कि हम जीभ से नाड़ी नहीं देख सकते, लेकिन उंगलियों से देख सकते हैं। गहराई से निरीक्षण करने पर हमें मालूम होता है, उंगलियों के सिरों में उन्हें स्पर्श के अनुकूल ढालने के लिए उनका विशेष प्रावधान है। जहां भी अनुभूति की आवश्यकता अधिक स्पष्ट होती है, वहीं हमें त्वचा की छोटी-छोटी घुमावदार मेड़ें-सी महसूस होती हैं। इन मेड़ों की इस अनुकूलता में आन्तरिक सतह पर दबी हुई प्रणालिकाएं होती हैं जो पौपिला कहलाने वाली त्वचा की कोमल और मांसल प्रक्रियाओं को टिकाव और स्थापन प्रदान करती हैं। जिनमें स्नायुओं के अन्तिम सिरों का आवास होता है। इस प्रकार स्नायु पर्याप्त सुरक्षित होते हैं और साथ ही साथ इतने स्पष्ट भी दिखाई देते हैं कि लचीली त्वचा द्वारा उन्हें सम्पेषित प्रभावों को ग्रहण कर सकें और इस प्रकार स्पर्श अनुभूति को जन्म दे सकें।

नितिन कुमार पामिस्ट 


हस्त रेखा विशेषज्ञ का दायित्व

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हस्त रेखा विशेषज्ञ का दायित्व

हस्त रेखा विशेषज्ञ का दायित्व


 वकील, डाक्टर और हस्तरेखा विशेषज्ञ तीनों का एक काम है कि उनके पास जो व्यक्ति जाता है, वह अपने किसी समस्या को लेकर पहुंचता है। डाक्टर अनेक प्रकार से रोगी का परीक्षण करता है, वह जानता है कि भयंकर रोग है। फिर भी वह उसे नहीं बतलाता और रोगी को आश्वासन देता है कि वह ठीक हो जायेगा। रोगी भयंकर बीमारी के बाबजूद अपनी बलवती आशा से सफलता प्राप्त करने में समर्थ हो जाता है तथा अनेक रोगी ठीक भी हो जाते हैं। 

उनमें स्वयमेव अपनी शक्ति पर विश्वास बढ़ जाता है, अपनी शक्ति, साहस, उत्साह के बल पर कार्य में जुट जाता है। ऐसी स्थिति में आपके चुम्बकीय शब्द अपूर्व शक्ति लेकर उस वातावरण में कम्पन्न पैदा कर देते हैं। हस्त रेखा विशेषज्ञ को अपने विषय से सम्बन्धित शास्त्र का पूरा ज्ञान होना जरुरी है। जो कुछ उसने सुन रखा है, जो उसके ध्यान में आया है, उसे बताने की जरुरत नहीं है। शास्त्रोक्त ज्ञान के आधार पर जो उसने खोजा था, जो सिद्धान्त उसने बनाये थे, उसके आधार पर रेखा, चिन्ह , देश, काल, अवस्थानुसार परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए भविष्यवाणी करनी चाहिए। बालक विद्या का प्रश्न करेगा, लड़की विवाह से सम्बन्धी पश्न पूछ सकती है। वृद्ध वैंक वैलेंस पूछ सकता हैं। इसलिए भविष्यवाणी करने में जल्दी न करें। 

हस्तरेखा देखते समय पुरुषों को उनकी उन्नति के वर्ष, नया कारबार, बिमारियों से सर्तकता रखने का समय, विवाह, लाभ, हानि, सन्तान, एवं चारित्रिक गुण आदि विशेषत: बताने चाहिए। 

स्त्रियों को पति का सुख, पुत्र के भाग्योदय का वर्ष, उनके द्वारा होने वाले धर्म-कर्म, कथा, दान, पुण्य, सुख, दुख, पति प्रेम की विचारणीय बातों का वर्णन विशेष रुप से करना चाहिए। एक पामिस्ट सही मायने में लोगों को चेतावनी भी देता है, सुझाव भी देता है और घटनाओं से आगाह कराता है, ताकि भविष्य में होनेवाली घटनाओं से लाभ उठाया जा सकंे और समय का सही उपयोग कर सकें, क्योंकि मानव को भविष्य इसलिए रोचक लगता है कि शेष जिंदगी भविष्य की गोद में बितानी है। जब हस्त रेखा देखकर भविष्य बताने की बारी आती है, तो अनेक बातों का ख्याल रखना होता हैं। नितिन कुमार पामिस्ट 

जैसे- भोजन के तीन घंटे बाद जब हाथ ज्यादा ठंडा हो, न ज्यादा गरम तथा ज्यादा छोटे बालकों का हाथ न देखा जाये। इसके अतिरिक्त आयु, देश, वातावरण को ध्यान में रखते हुए हाथ देखा जाय। केवल एक रेखा देखकर किसी भी निर्णय पर नहीं पहुँचना चाहिए। समस्त रेखाओं, चिन्ह  और पर्वतों का अध्ययन करें उनके आधार पर ही कुछ कहना उचित होगा। व्यायाम करने के बाद, मदिरा, मिठाई, लेने के बाद हाथ न देखा जाय, क्योंकि इस समय इंदिzयां उत्तेजनायुक्त होती हैं। इस कारण नाड़ियों एवं करतल का स्वाभाविक तत्व समाप्त हो जाता है। इसके अलावा रेखाओं का रंग भी बदल जाता है।  नितिन कुमार पामिस्ट 

हाथ देखने का समय सूर्योदय से 2 घंटे बाद का समय अधिक उचित होता है। अधिक गर्मी एवं अधिक शर्दी के समय भी हाथ देखना अनुचित होता है कारण कि हाथों का रंग प्रभावित होगा। अत: इन बातों का ख्याल रखना ही सफलता की सीढ़ी है।

 नितिन कुमार पामिस्ट 


हस्तरेखा में दोषी रेखाओं के उपाय

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हस्तरेखा में दोषी रेखाओं के उपाय



 कभी-कभी कुछ हाथों में पर्वत व रेखाएं दोषी होती हैं या किसी कारणवश उसका विपरीत फल मिलने की आशंका होती है। उन दोषों से मुक्त होने के उपाय भी जानना आवश्यक है, अन्यथा हस्त परीक्षा का कोई लाभ नहीं होगा। इसी क्रम में अंगुलियों की मुद्रा  द्वारा अनेक दोषी रेखाओं से लाभ हासिल किया जा सकता है। तपस्वी लोग तपस्या के अवस्था में अपने अंगुलियों को विशेष स्थिति में रखते हैं जिसे हम मुद्रा  कहते हैं। मुद्राओ  का उद्देश्य  मस्तिष्क के कुछ केन्दों की अतिरिक्त शक्ति को दुसरे केन्द तक पहुंचा कर लाभ देना होता है।

ह्रदय रेखा का दोष निवारण
यदि ह्रदय  रेखा दोषपूर्ण हो तो व्यक्ति को रक्तचाप और ह्रदय  रोग की बिमारी होती है। ऐसी अवस्था में जातक अनेक प्रकार के औषधि उपाय भी करता है परन्तु उसे लाभ नहीं होता ऐसी स्थिति में ह्रदय  रेखा के दोष को समाप्त करने के लिए कनिष्ठा अंगुली को छोड़कर अन्य तीनों अंगुलियों के सिरों को अंगूठे के सिरे से मिलाएं तो यह मुद्रा  बनती है।

 इस मुद्रा का नित्य अभ्यास करने से अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। यह मुद्रा प्रात:काल करने से अधिक लाभ मिलता है।


मस्तिष्क रेखा का दोष निवारण
 यदि मस्तिष्क रेखा दोषपूर्ण हो तो जातक को स्नायु से संबंधी अनेक बिमारी उत्पन्न करती है। ऐसी स्थिति में परस्पर तर्जनी और अंगूठा को मिलाकर मुद्रा बनायें, इसे चिन्मुद्रा कहते हैं। यह मुद्रा  करने से गुरु पर्वत का दोष भी नष्ट हो जाता है। यह मुद्रा  प्रतिदिन प्रात:काल एवं सायंकाल में 15 मिनट करना चाहिए।


जीवन रेखा का दोष निवारण
यदि जीवन रेखा दोषपूर्ण हो तो जातक के जीवन में अनेक दुर्घटना एवं शारिरीक बिमारी उत्पन्न करती है। ऐसी स्थिति में कनिष्ठा और अनामिका को अंगूठे से मिलाकर मुद्रा  बनायें। इस मुद्रा  को करने से शुक्र पर्वत, मंगल पर्वत, जीवनरेखा, बुधरेखा आदि का दोष नष्ट होता है तथा जातक को अच्छा फल मिलता हैं ।

शनि दोष निवारण
यदि शनि पर्वत में या शनि रेखा में दोष हो तो तर्जनी को मोड़कर उसे शुक्र पर्वत पर लगायें। शेष सभी अंगुलियां और अंगूठा अलग रखें। यह मुर्दा  शनि रेखा एवं शनि पर्वत के दोष को नष्ट करती है तथा अनेक बिमारियों से रक्षा करती है।

बुध दोष निवारण
 यदि बुध रेखा अथवा बुध पर्वत में कोई दोष हो तो उसके निवारण हेतु बायें हाथ की तर्जनी का शिरा दांयें हाथ के तर्जनी और मध्यमा से जोड़े । यह मुद्रा करने से बुध दोष नष्ट होता है। पेट अथवा शरीर के किसी भाग में गैस इकठी होने पर भी इस मुद्रा  द्वारा लाभ पाया जा सकता है।


 प्रस्तुत मुद्राय बारी-बारी से दोनों हाथों द्वारा करना चाहिए। यदि रेखाओं में दोष न हो तो भी इन मुद्राओं  को दो-चार मिनट अभ्यास करने से इसका लाभ शरीर में अनेक बिमारियों का शमन करके शक्ति प्रदान करता है।

नितिन कुमार पामिस्ट 


हाथों में बीमारियों के लक्षण

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हाथों में बीमारियों के लक्षण




लम्बे पतले, मुड़े हुए नाखून, मस्तिष्क रेखा छोटे-छोटे द्वीपों में क्षय रोग (टी.वी.) की प्रवृत्ति।

छोटे नाखून, साथ में टूटी मस्तिष्क रेखा त्रिकोण में क्रास, जिसके सिरे धब्बेदार हों- मिरगी का रोग।

हृदय रेखा, शनि पर्वत के नीचे टूटी हुई, दो खंड एक दूसरे के ऊपर गम्भीर हृदय रोग।

निकृष्ट हाथ में चन्द्र  पर्वत पर तारक चिन्ह अति गम्भीर हिस्टीरिया का रोग।

ह्रदय  रेखा की एक शाखा चन्द्र पर्वत तक जाती हुई तारक चिन्ह में अन्त -वंशागत पागलपन।

उर्ध्व मंगल पर्वत पर चन्द्र चिन्ह -हिंसात्मक पागलपन का रोग।

मोटी तथा नम दीखने वाली त्वचा, साथ में चन्द्र पर्वत पर तारक चिन्ह -गुर्दे का रोग।

नीली अथवा पीली रंग की ह्रदय  रेखा, लहरदार मस्तिष्क रेखा अथवा बदरंग, साथ में इस पर नीला धब्बा लहरदार स्वास्थ्य रेखा-यकृत रोग।

छोटे-छोटे खण्डों में टूटी मस्तिष्क रेखा या छोटे वर्गों के आकारों में -स्मृतिनाश का रोग।

जीवन रेखा पर काले धब्बे से उदित शाखा-स्नायविक रोग।

नाखून मध्य लम्बाई के, परन्तु पतले और छोटे मस्तिष्क रेखा पर द्वीप त्रिकोण का तीसरा कोण विकृत , साथ में छोटी-छोटी रेखायें जीवन रेखा को काटती हुई-स्नायुशूल का रोग।

जीवन रेखा से उदित एक रेखा शनि पर्वत पर त्रिकोण में समाप्त प्लूरिसी का रोग।

लम्बी तथा लहरदार âदय रेखा, साथ में स्वास्थ्य रेखा लहरदार और उंगलियों के दूसरे पर्व की अपेक्षा लम्बे -दांत का रोग।

चमकीली मुलायम त्वचा, जीवन रेखा के अन्त पर शाखापुंज सूक्ष्म रेखायें, ह्रदय  रेखा के उदय पर नीचे को काट कर जाती हुई रेखा-वायु (गैस) का रोग।

मस्तिष्क रेखा टूटी, जुड़ी अथवा जंजीरदार तथा मस्तिष्क रेखा को काटती हुई और उसके नीचे को निकलती छोटी रेखायें। स्वास्थ्य रेखा, मस्तिष्क रेखा के पास लाल रंग की -निरन्तर सिर दर्द का रोग।

चन्द्र  पर्वत पर की ओर, अत्यधिक भरा हुआ, चन्द्र  पर्वत के आर-पार एक गहरी रेखा, साथ में उसे काटती हुई एक रेखा। जीवन रेखा के अन्तिम सिरे पर शाखापुंज जिसकी एक शाखा चन्द्र  पर्वत की ओर जाती हुई-गठिया का रोग।

मस्तिष्क रेखा, हृदय  की ओर उठती हुई, साथ में स्वास्थ्य रेखा, जीवन रेखा से उदित -दौरों की प्रवृत्ति, मूर्छा रोग।

मस्तिष्क रेखा पर बृहस्पति पर्वत के नीचे धब्बे-बहरेपन का रोग।

दोनों हाथों में मंगल रेखा के अन्त पर चन्द्र  पर्वत की दिशा में शाखापुंज जीवन रेखा से उदित रेखा चन्द्र  पर्वत पर तारक चिन्ह  में समाप्त -मद्यपान से रोग।

जीवन रेखा पर वृत्त अथवा धब्बा हृदय  रेखा पर वृत्त तथा स्वास्थ्य रेखा पर क्रास स्वास्थ्य रेखा के समीप त्रिकोण में स्टार (तारक) चिन्ह । सूर्य रेखा तथा ह्रदय  रेखा के मिलन बिन्दु पर काला धब्बा-अन्धेपन का रोग।

ह्रदय  रेखा से चन्द्र  पर्वत को जाती हुई दो लम्बी रेखायें -पक्षाघात। 

चन्द्र  पर्वत पर की ओर अत्यधिक विकसित-नजले का रोग।

चन्द्र  पर्वत पर एक तारक चिन्ह परन्तु यात्रा रेखा पर नहीं-जलोदर रोग।

जीवन रेखा मस्तिष्क रेखा से अलग होते समय कटी और टूटी हुई, मस्तिष्क रेखा उसी दण्ड रेखा द्वारा कटती हुई, साथ में शनि पर्वत के नीचे चतुर्भुज में क्रास- डिपथीरिया का रोग।


निकृष्ट मस्तिष्क रेखा, साथ में अंगूठा बहुत छोटा- बुद्धि जड़ता।

मस्तिष्क रेखा पर गहरे धब्बे, साथ में जीवन तथा स्वास्थ्य रेखायें तंग तथा गहरे रंग की। स्वास्थ्य रेखा मध्य में पतली तथा सरल-ज्वर की प्रवृत्ति। नितिन कुमार पामिस्ट 

हृदय  रेखा मस्तिष्क रेखा की ओर बढती हुई, साथ में अपूर्ण अस्पष्ट स्वास्थ्य रेखा-ज्वर।

जीवन रेखा पर एक बहुत छोटा सा वर्ग, साथ में अन्दर क्रास-बुखार।

जीवन रेखा पर छोटा सा वर्ग, साथ में अन्दर क्रास प्राय: टाइफाइड बुखार।

लहरदार स्वास्थ्य रेखा और निकृष्ट यदि साथ में जीवन रेखा पर द्वीप हो, यदि हाथ भी नम हों तो दमें का रोग।

नितिन कुमार पामिस्ट 


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Answer: You will receive your palm reading report by e-mail in your e-mail inbox.



Question: Can you also suggest remedies?

Answer: Yes, remedies and solution of problems are also included in this reading.


Question: Can you also suggest gemstone?

Answer: Yes, gemstone recommendation is also included in this reading.


Question: How to capture palm images?

Answer: Capture your palm images by your mobile camera or you can also use scanner.


Question: Give me sample of palm images so I get an idea how to capture palm images?

Answer: You need to capture full images of both palms (Right and left hand), close-up of both palms, and side views of both palms. See images below.



Question: What other information I need to send with palm images?

Answer: You need to mention the below things with your palm images:- 



  • Your Gender: Male/Female 
  • Your Age: 
  • Your Location: 
  • Your Questions: 

Question: How much the detailed palm reading costs?

Answer: Cost of palm reading:


  • India: Rs. 600/- 
  • Outside Of India: 20 USD

( For instant palm reading in 24 hours you need to pay extra Rs. 500 or 15 USD ) 
(India: 600 + 500 = Rs. 1100/-)
(Outside Of India: 20 + 15 = 35 USD) 

Question: How you will confirm that I have made payment?

Answer: You need to provide me some proof of the payment made like:

  • UTR/Reference number of transaction. 
  • Screenshot of payment. 
  • Receipt/slip photo of payment.

Question: I am living outside of India so what are the options for me to pay you?

Answer: Payment options for International Clients:

International clients (those who are living outside of India) need to pay me 20 USD via PayPal or Western Union Money Transfer.

  • PayPal (PayPal ID : nitinkumar_palmist@yahoo.in)
    ( Please select "goods or services" instead of "personal" )
  • PayPal direct link for $20 (You will get reading in 9/10 days) - PayPal Payment 20 dollars
    PayPal direct link for $35 (You will get reading in 24 hours) - PayPal Payment 35 dollars
  • Western Union: Contact me for details.

Question: I am living in India so what are the options for me to pay you?


Answer: Payment options for Indian Clients:

  • Indian client needs to pay me 600/- Rupees in my SBI Bank via netbanking or direct cash deposit.

  • SBI Bank: (State Bank of India)
       Nitin Kumar Singhal
       A/c No.: 61246625123
       IFSC CODE: SBIN0031199
       Branch: Industrial Estate
       City: Jodhpur, Rajasthan. 



  • ICICI BANK: 
      (Contact For Details)

Email ID: nitinkumar_palmist@yahoo.in



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