Wednesday, February 22, 2017

Hand Reading Image Of Rahul Gandhi Palmistry


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Hand Reading Image Of Jayalalitha Palmistry





हस्त रेखा की उत्पत्ति और इतिहास


हस्त रेखा की उत्पत्ति और इतिहास


हस्त रेखा की उत्पत्ति और इतिहास


जिन मनीषियों ने हस्तविज्ञान की खोज की, उसे समझा और व्यवहारिक रूप दिया, उनकी विद्वता के ठोस प्रमाण आज भी मौजूद हैं। भारत के ऐतिहासिक युग के स्मारक हमें बताते हैं कि रोम और यूनान की स्थापना से वषो पूर्व इस देश के मनीषियों ने ज्ञान का इतना अमूल्य भण्डार एकत्र कर लिया था कि उसकी सराहना समूचे विश्व में हुआ करती थी, और इन्हीं विद्वानों में हस्त रेखा विज्ञान के जन्म दाता भी थे, उन्ही के बनाये हुए सिद्धान्त अन्य देशों में पहुँचे।

हस्तरेखा से सम्बन्धित अब तक जितने भी प्राचीन ग्रंथ पाये गये हैं उनमें वेद एवं सामुदिक शास्त्र सबसे प्राचीन धर्म ग्रंथ  है। यही वेद और शास्त्र यूनानी सभ्यता और ज्ञान का मूल श्रोत था।

अत्यन्त प्राचीन युग में इस विज्ञान का प्रचलन चीन, तिब्बत, ईरान, और मिश्र जैसे देशों में आरम्भ हुआ लेकिन इन देशों में इसमें जो सहयोग स्पष्टता और एकरूपता हमें दिखायी देती है वह वास्तव में भारतीय सभ्यता की देन है। संसार भर में भारतीय सभ्यता को सर्वाधिक उच्च और विवेक पूर्ण माना जाता रहा है। जिसे हम हस्त रेखा विज्ञान या कीरोमेंसी कहते हैं वह भारत के अलावा यूनान में भी पला और पनपा यूनानी शब्द कीर का अर्थ है, जो हाथ से विकसित हुआ हो।

उन्नीसवीं शताब्दी में उत्पीड़न की अग्नि में भी सुरक्षित रहकर फीनिक्स ने इस ज्ञान की सुरक्षा के निरन्तर प्रयास किये और जिस विज्ञान को अन्धविश्वास घोषित किया जा चुका था, वह एक बार फिर सत्य बनकर सामने आया। इस प्रकार के अनेक प्रमाण हैं जो इसकी सत्यता को साबित करते हैं कि यह एक सत्य और प्रमाणिक विज्ञान है।

ईशा से 423 वर्ष पूर्व यूनानी दार्शनिक एनेक्सागोरस कीरोमेंन्सी का उपयोग ही नहीं बल्कि शिक्षा भी देता था। इन्ही की तरह अरस्तू विलसाइड, कार्डमिस, पिल्लनी थे, जो हिस्पेनस को इस विज्ञान पर एक पुस्तक लिखकर भेंट की थी, उसमें लिखा था- यह ग्रन्थ  एक ऐसा अध्ययन है जो जिज्ञासु और सुविकसित मस्तिष्क वाले व्यक्ति के पढ़ने योग्य है।

इन विद्वानों ने जब मानव का अध्ययन किया तो मानव के चेहरे उसकी नाक, कान, आँख आदि की स्वाभाविक स्थिति भली भांति पहचान लिया। इसी प्रकार मानव की हथेली में बनी मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा की जानकारी प्राप्त करके उनकी स्वाभाविक स्थिति को मान्यता प्रदान की। इस विज्ञान की खोज और अध्ययन में उन विद्वानों ने जो साधना की, जो समय लगाया उसी के कारण वे हथेली की रेखाओं और चित्रो को  ये नाम दे सकें। जिस रेखा को मानसिकता का सम्बन्धी समझा उसे मस्तिष्क रेखा का नाम दिया। स्नेह से सम्बधित रेखा को हृदय  रेखा तथा जीवन की अवधि से सम्बन्धित रेखा को जीवन रेखा का नाम दिया इसी प्रकार चिà और पर्वत के भी उन्हीं के अनुरुप नाम दिये।


रेखा विज्ञान की सत्यता


किसी विषय के बारे में तभी विश्वास होता है, जब उसे अंतरात्मा द्वारा देख या समझ लिया जाय। एक अणु को भी अपने अस्तित्व में अध्ययन के अयोग्य ठहराना उचित नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति  यह धारणा बना ले कि हस्त विज्ञान विचारणीय विषय नहीं है तो यह उसका कोरा भzम होगा। क्योंकि अनेक बड़ी-बड़ी अत्यन्त महत्वपूर्ण सच्चाइयां और वास्तविकताएं जिन्हें कभी नगण्य समझा जाता था वे अब असीमित शक्ति का साधन बन गयी हैं। 

हस्तविज्ञान के अध्ययन में और उसे विकसित करने में अनेक दार्शनिक और वर्तमान काल के वैज्ञानिकों ने भी इस ओर ध्यान दिया है। जब हम मनुष्यों की क्रियाशीलता और उसके पूरे शरीर पर प्रभाव के बारे में विचार करते हैं तो यह जानकर आश्चर्य नहीं होता, कि जिन्हे वैज्ञानिकों ने पहले प्रमाणित किया था कि मानव मस्तिष्क और उसके हाथों के बीच जितने भी स्नायु हैं, उतने शारीरिक व्यवस्था में और कहीं भी नहीं हैं। मनुष्य जब हाथों से कुछ करता है तो मस्तिष्क भी सोंचना आरम्भ कर देता है। भिन्न-भिन्न प्रकार के स्वभाव, संस्कार, प्रति और मानसिक स्थिति के व्यक्तियों के हाथों में भिन्न-भिन्न अन्तर होता है। 

संसार में अनेक आश्चर्यजनक सच्चाइयां हैं, शताब्दियों के कालचक्र ने इस विज्ञान पर धूल जमा दी थी लेकिन मानव के विवेक ने उसे पुन: खोज निकाला और अब इस विज्ञान की सच्चाई पर विश्वास होने लगा है। यह प्रमाणित हो गया है कि हाथ की रेखाएँ एक ऐसा अमिट सत्य है जो  व्यक्ति के जीवन और उसकी प्रति को स्पष्ट रुप से प्रकट कर देती है। आज भौतिक युग में जो लोग इस विज्ञान की सच्चाई के प्रभाव को जानना चाहते हैं। उन्हें यह याद रखना चाहिए कि हमें यह विज्ञान शताब्दियों पूर्व प्राप्त हुआ था और वह विज्ञान आज भी अभीष्ट सिद्ध है। 

हस्त रेखा और भविष्य 


मानव जाति में कदाचित ही कोई ऐसा  व्यक्ति होगा, जो अपने अतीत का भलीभांति अध्ययन करने के बाद यह अनुभव न करता हो कि उसके विकसित जीवन के कितने वर्ष या कितना भाग उसके अपने और माता-पिता के अनभिज्ञता के कारण बेकार ही बीत चुके हैं। अपने बारे में पूरा-पूरा ज्ञान प्राप्त करने के बाद ही हम स्वयं को नियन्त्रित करने में सक्षम और समर्थ हो सकेंगे। साथ ही अपनी उन्नति करके मानव जाति की उन्नति कर सकेंगे। हस्त विज्ञान का स्वयं को पहचानने से सीधा सम्बन्ध है। इस विज्ञान की उत्पत्ति पर विचार करने के लिए हमें विश्व इतिहास के प्रारम्भिक काल में लौटना होगा।

 आदि काल के मनीषियों का स्मरण करना होगा जिन्होंने विश्व के महान साम्राज्यों सभ्यताओं, जातियों और राजवंशों को नष्ट हो जाने के बाद भी अपने इस भण्डार को सुरक्षित रखा। विश्व इतिहास के प्रारम्भिक काल का अध्ययन करने पर हमें ज्ञात होगा कि हस्त विज्ञान से सम्बन्धित सामागzी इन्हीं मनिषियों की धरोहर थी। सभ्यता के उस आदिकाल केा मानव इतिहास में आर्य सभ्यता के नाम से पुकारा जाता है। हस्त रेखा विज्ञान के मूल विन्दुओं को जांचते-परखते समय हमें प्रतीत होने लगता है कि हाथों की रेखाओं का यह विज्ञान विश्व के पुरातन विज्ञान में से एक है। इतिहास साक्षी है कि भारत के उत्तर-पश्चिमी प्रान्तों की जोशी नामक जाति न जाने किस काल से हस्त रेखा विज्ञान को व्यवहार में लाती रही है।

स्थूल या सूक्ष्म गतिविधि को संचालित करने वाले स्नायु जिनसे ठीक वैसी ही सलवटें या रेखाएँ बनती हैं। उनका निर्माण प्रमुखरूप से गतिशील देशों से होता है। लेकिन सम्भवत: उनमें कुछ अन्य ऐसे तन्तु भी होते हैं जो अर्जित या अन्र्तनिहित प्रवृत्तियों के मिश्रित प्रभावों का कम्पनों द्वारा सम्प्रेषण करते हुए और उनका जीवन रेखा के प्रभावित होने वाले भाग से मुख्य रेखा या उसकी शाखा के जोड़ पर क्राश चिन्ह बनाते हुए दोनों का सम्बन्ध स्थापित करते हैं। कुछ कोशिकाओं की ऐसी वृत्ति है जिनके कारण उनमें आगामी घटनाओं का प्रभाव उत्पन्न हो जाता है। शायद कम्पन्न उत्पन्न हो जाता है। कोशिकाओं में उत्पन्न कम्पन्न अपने साथ जुड़े तर्क प्रक्रियाओं में लगे कोणों में कोई गतिविधि तो उत्पन्न नहीं करवा सकता लेकिन उनमें चेतनात्मक कम्पन्न अवश्य जगा देता है और इन कम्पनों का सम्पेशन हाथ पर बने विभिन्न आकार-प्रकार के चिàों के साथ में अंकित हो जाता है।नितिन कुमार पामिस्ट 

एक तर्कयुä जीवन के रुप में मनुष्य का हाथ विशेष रुप से विकाश की उच्च स्थिति का द्योतक है। उसकी गति से क्रोध प्रेम आदि प्रवृत्तियों का ज्ञान होता है। यह गति स्थूल अथवा सूक्ष्म होती है, इसलिए उससे हाथं पर बड़ी या छोटी सलवटें या रेखाएं बनती है। नितिन कुमार पामिस्ट 

चिकित्सा विज्ञान से कान का रक्त अर्बुद काफी समय पहले जाना जा चुका है, यह कान के Åपरी भाग में विभिन्न आकार में बनता है, यह फिर उपरी भाग के फूल जाने से उसी की शक्ल में बन जाता है। जिसमें रक्त अर्बुद होता है, यह अर्बुद अक्सर पागलों के कान में ही बनता है सामान्य रुप से उन लोगों के कान में जिनका पागलपन पैतृक होता है। इस बात का विशेष अध्ययन पेरिस में किया गया। विज्ञान अकादमी के तमाम परीक्षणों के जो परिणाम निकले उनसे सिद्ध हो गया कि केवल कान की परख करके वर्षो पहले भविष्यवाणी की जा सकती है। इसलिए यह तर्क सिद्ध हो चुका है कि जब केवल कान की जांच-परख करके सही-सही भविष्यवाणी की जा सकती है, तो क्या हाथों का निरीक्षण करके अन्य भविष्यवाणी करना असम्भव है? हाथ के विषय में स्नायु मण्डल और उनके गति संचालन को देखते हुए यह माना जा चुका है कि हाथ ही पूरे मानव शरीर का सर्वाधिक विचित्र अंग है, और हाथ का मस्तिष्क के साथ सबसे ज्यादा गहरा सम्बन्ध है।


किन्हीं दो हाथों पर अंकित रेखाएं और चिन्ह कभी भी एक जैसे नहीं पाये जाते। इसके अलावा जुड़वा बच्चों की हस्तरेखा में भी परस्पर अन्तर पाया जाता है। यह भी पाया गया है कि हाथ की रेखाएँ किसी परिवार की किसी विशिष्ट प्रवृत्ति केा स्पष्ट कर देती है और आने वाली पीढ़ियों में यह प्रवृत्ति निरन्तर बनी रहती है, लेकिन यह भी देखा गया है कि कुछ बच्चों के हाथ पर अंकित रेखाओं की स्थिति में अपने माता-पिता से कोई समानता नहीं होती। अगर गहराई से अध्ययन किया जाय, तो इस सिद्धान्त के अनुसार वे बच्चे अपने माता-पिता से पूरी तरह भिन्न होते हैं।नितिन कुमार पामिस्ट 


 एक प्रचलित धारणा है कि हाथ की रेखाओं पर व्यक्ति के कार्यों का गहरा प्रभाव पड़ता है। वे उनके अनुसार ही चलती रहती हैं। लेकिन सच्चाई इसके विल्कुल विपरीत है, शिशु के जन्म के समय ही उसके हाथ की चमड़ी मोटी और कुछ सख्त हो जाती है, अगर व्यक्ति के हंथेली की चमड़ी को पुल्टिस या किसी अन्य साधनों से मुलायम बना दिया जाये तो उसपर अंकित चित्र किसी भी समय देखे जा सकते हैं। इनमें अधिकांश चिन्ह उसकी हथेली पर जीवन के अंतिम क्षण तक बने रहते हैं। नितिन कुमार पामिस्ट 

इस संदर्भ में हाथ में विद्यमान कोषाणुओं पर ध्यान देना अत्यन्त महत्वपूर्ण है। मैरनर ने अपनी पुस्तक हाथ की रचना और विधान में लिखा है कि हाथ के इन कोषाणुओं का अर्थ बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह अद~भुत आणविक पदार्थ अंगुलियों की पोरों में और हाथ की रेखाओं में पाये जाते हैं, तथा कलाई तक पहुंचते पहुँचते-2 लुप्त हो जाते हैं। यह शरीर के जीवित रहने की अवधि में कुछ विशेष कम्पन्न भी उत्पन्न करते हैं तथा जैसे जीवन समाप्त होता है यह रुक जाते हैं। नितिन कुमार पामिस्ट 


अब हम हाथों की चमड़ी, स्नायु और स्पर्श करने की अनुभूति पर ध्यान देते हैं। सर चाल्र्सवेल ने चमड़ी के सम्बन्ध में लिखा है- चमड़ी त्वरित स्पर्श अनुभूति का महत्त्वपूर्ण अंश है। यही वह माध्यम है जिसके द्वारा बाहरी प्रभाव हमारे स्नायुओं तक पहुंचते हैं। उंगलियों के सिरे इस अनुभूति की व्यवस्थाओं का श्रेष्ठ प्रदर्शन करते हैं। नाखून उंगलियों को सहारा देते हैं और लचीले गांठे  के प्रभाव को बनाये रखने के लिए ही उसके सिरे बने हैं। उनका आकार चौड़ा और ढालनुमा है। यह बाहरी उपकरणों का एक महत्त्वपूर्ण भाग है। इसकी लचक और भराव इसे प्रशंसनीय ढंग से स्पर्श के अनुकूल ढालते हैं। यह एक अद~भुद~ सत्य है कि हम जीभ से नाड़ी नहीं देख सकते, लेकिन उंगलियों से देख सकते हैं। गहराई से निरीक्षण करने पर हमें मालूम होता है, उंगलियों के सिरों में उन्हें स्पर्श के अनुकूल ढालने के लिए उनका विशेष प्रावधान है। जहां भी अनुभूति की आवश्यकता अधिक स्पष्ट होती है, वहीं हमें त्वचा की छोटी-छोटी घुमावदार मेड़ें-सी महसूस होती हैं। इन मेड़ों की इस अनुकूलता में आन्तरिक सतह पर दबी हुई प्रणालिकाएं होती हैं जो पौपिला कहलाने वाली त्वचा की कोमल और मांसल प्रक्रियाओं को टिकाव और स्थापन प्रदान करती हैं। जिनमें स्नायुओं के अन्तिम सिरों का आवास होता है। इस प्रकार स्नायु पर्याप्त सुरक्षित होते हैं और साथ ही साथ इतने स्पष्ट भी दिखाई देते हैं कि लचीली त्वचा द्वारा उन्हें सम्पेषित प्रभावों को ग्रहण कर सकें और इस प्रकार स्पर्श अनुभूति को जन्म दे सकें।

नितिन कुमार पामिस्ट 

हस्त रेखा विशेषज्ञ का दायित्व


हस्त रेखा विशेषज्ञ का दायित्व

हस्त रेखा विशेषज्ञ का दायित्व


 वकील, डाक्टर और हस्तरेखा विशेषज्ञ तीनों का एक काम है कि उनके पास जो व्यक्ति जाता है, वह अपने किसी समस्या को लेकर पहुंचता है। डाक्टर अनेक प्रकार से रोगी का परीक्षण करता है, वह जानता है कि भयंकर रोग है। फिर भी वह उसे नहीं बतलाता और रोगी को आश्वासन देता है कि वह ठीक हो जायेगा। रोगी भयंकर बीमारी के बाबजूद अपनी बलवती आशा से सफलता प्राप्त करने में समर्थ हो जाता है तथा अनेक रोगी ठीक भी हो जाते हैं। 

उनमें स्वयमेव अपनी शक्ति पर विश्वास बढ़ जाता है, अपनी शक्ति, साहस, उत्साह के बल पर कार्य में जुट जाता है। ऐसी स्थिति में आपके चुम्बकीय शब्द अपूर्व शक्ति लेकर उस वातावरण में कम्पन्न पैदा कर देते हैं। हस्त रेखा विशेषज्ञ को अपने विषय से सम्बन्धित शास्त्र का पूरा ज्ञान होना जरुरी है। जो कुछ उसने सुन रखा है, जो उसके ध्यान में आया है, उसे बताने की जरुरत नहीं है। शास्त्रोक्त ज्ञान के आधार पर जो उसने खोजा था, जो सिद्धान्त उसने बनाये थे, उसके आधार पर रेखा, चिन्ह , देश, काल, अवस्थानुसार परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए भविष्यवाणी करनी चाहिए। बालक विद्या का प्रश्न करेगा, लड़की विवाह से सम्बन्धी पश्न पूछ सकती है। वृद्ध वैंक वैलेंस पूछ सकता हैं। इसलिए भविष्यवाणी करने में जल्दी न करें। 

हस्तरेखा देखते समय पुरुषों को उनकी उन्नति के वर्ष, नया कारबार, बिमारियों से सर्तकता रखने का समय, विवाह, लाभ, हानि, सन्तान, एवं चारित्रिक गुण आदि विशेषत: बताने चाहिए। 

स्त्रियों को पति का सुख, पुत्र के भाग्योदय का वर्ष, उनके द्वारा होने वाले धर्म-कर्म, कथा, दान, पुण्य, सुख, दुख, पति प्रेम की विचारणीय बातों का वर्णन विशेष रुप से करना चाहिए। एक पामिस्ट सही मायने में लोगों को चेतावनी भी देता है, सुझाव भी देता है और घटनाओं से आगाह कराता है, ताकि भविष्य में होनेवाली घटनाओं से लाभ उठाया जा सकंे और समय का सही उपयोग कर सकें, क्योंकि मानव को भविष्य इसलिए रोचक लगता है कि शेष जिंदगी भविष्य की गोद में बितानी है। जब हस्त रेखा देखकर भविष्य बताने की बारी आती है, तो अनेक बातों का ख्याल रखना होता हैं। नितिन कुमार पामिस्ट 

जैसे- भोजन के तीन घंटे बाद जब हाथ ज्यादा ठंडा हो, न ज्यादा गरम तथा ज्यादा छोटे बालकों का हाथ न देखा जाये। इसके अतिरिक्त आयु, देश, वातावरण को ध्यान में रखते हुए हाथ देखा जाय। केवल एक रेखा देखकर किसी भी निर्णय पर नहीं पहुँचना चाहिए। समस्त रेखाओं, चिन्ह  और पर्वतों का अध्ययन करें उनके आधार पर ही कुछ कहना उचित होगा। व्यायाम करने के बाद, मदिरा, मिठाई, लेने के बाद हाथ न देखा जाय, क्योंकि इस समय इंदिzयां उत्तेजनायुक्त होती हैं। इस कारण नाड़ियों एवं करतल का स्वाभाविक तत्व समाप्त हो जाता है। इसके अलावा रेखाओं का रंग भी बदल जाता है।  नितिन कुमार पामिस्ट 

हाथ देखने का समय सूर्योदय से 2 घंटे बाद का समय अधिक उचित होता है। अधिक गर्मी एवं अधिक शर्दी के समय भी हाथ देखना अनुचित होता है कारण कि हाथों का रंग प्रभावित होगा। अत: इन बातों का ख्याल रखना ही सफलता की सीढ़ी है।

 नितिन कुमार पामिस्ट 

हाथों में बीमारियों के लक्षण


हाथों में बीमारियों के लक्षण




लम्बे पतले, मुड़े हुए नाखून, मस्तिष्क रेखा छोटे-छोटे द्वीपों में क्षय रोग (टी.वी.) की प्रवृत्ति।

छोटे नाखून, साथ में टूटी मस्तिष्क रेखा त्रिकोण में क्रास, जिसके सिरे धब्बेदार हों- मिरगी का रोग।

हृदय रेखा, शनि पर्वत के नीचे टूटी हुई, दो खंड एक दूसरे के ऊपर गम्भीर हृदय रोग।

निकृष्ट हाथ में चन्द्र  पर्वत पर तारक चिन्ह अति गम्भीर हिस्टीरिया का रोग।

ह्रदय  रेखा की एक शाखा चन्द्र पर्वत तक जाती हुई तारक चिन्ह में अन्त -वंशागत पागलपन।

उर्ध्व मंगल पर्वत पर चन्द्र चिन्ह -हिंसात्मक पागलपन का रोग।

मोटी तथा नम दीखने वाली त्वचा, साथ में चन्द्र पर्वत पर तारक चिन्ह -गुर्दे का रोग।

नीली अथवा पीली रंग की ह्रदय  रेखा, लहरदार मस्तिष्क रेखा अथवा बदरंग, साथ में इस पर नीला धब्बा लहरदार स्वास्थ्य रेखा-यकृत रोग।

छोटे-छोटे खण्डों में टूटी मस्तिष्क रेखा या छोटे वर्गों के आकारों में -स्मृतिनाश का रोग।

जीवन रेखा पर काले धब्बे से उदित शाखा-स्नायविक रोग।

नाखून मध्य लम्बाई के, परन्तु पतले और छोटे मस्तिष्क रेखा पर द्वीप त्रिकोण का तीसरा कोण विकृत , साथ में छोटी-छोटी रेखायें जीवन रेखा को काटती हुई-स्नायुशूल का रोग।

जीवन रेखा से उदित एक रेखा शनि पर्वत पर त्रिकोण में समाप्त प्लूरिसी का रोग।

लम्बी तथा लहरदार âदय रेखा, साथ में स्वास्थ्य रेखा लहरदार और उंगलियों के दूसरे पर्व की अपेक्षा लम्बे -दांत का रोग।

चमकीली मुलायम त्वचा, जीवन रेखा के अन्त पर शाखापुंज सूक्ष्म रेखायें, ह्रदय  रेखा के उदय पर नीचे को काट कर जाती हुई रेखा-वायु (गैस) का रोग।

मस्तिष्क रेखा टूटी, जुड़ी अथवा जंजीरदार तथा मस्तिष्क रेखा को काटती हुई और उसके नीचे को निकलती छोटी रेखायें। स्वास्थ्य रेखा, मस्तिष्क रेखा के पास लाल रंग की -निरन्तर सिर दर्द का रोग।

चन्द्र  पर्वत पर की ओर, अत्यधिक भरा हुआ, चन्द्र  पर्वत के आर-पार एक गहरी रेखा, साथ में उसे काटती हुई एक रेखा। जीवन रेखा के अन्तिम सिरे पर शाखापुंज जिसकी एक शाखा चन्द्र  पर्वत की ओर जाती हुई-गठिया का रोग।

मस्तिष्क रेखा, हृदय  की ओर उठती हुई, साथ में स्वास्थ्य रेखा, जीवन रेखा से उदित -दौरों की प्रवृत्ति, मूर्छा रोग।

मस्तिष्क रेखा पर बृहस्पति पर्वत के नीचे धब्बे-बहरेपन का रोग।

दोनों हाथों में मंगल रेखा के अन्त पर चन्द्र  पर्वत की दिशा में शाखापुंज जीवन रेखा से उदित रेखा चन्द्र  पर्वत पर तारक चिन्ह  में समाप्त -मद्यपान से रोग।

जीवन रेखा पर वृत्त अथवा धब्बा हृदय  रेखा पर वृत्त तथा स्वास्थ्य रेखा पर क्रास स्वास्थ्य रेखा के समीप त्रिकोण में स्टार (तारक) चिन्ह । सूर्य रेखा तथा ह्रदय  रेखा के मिलन बिन्दु पर काला धब्बा-अन्धेपन का रोग।

ह्रदय  रेखा से चन्द्र  पर्वत को जाती हुई दो लम्बी रेखायें -पक्षाघात। 

चन्द्र  पर्वत पर की ओर अत्यधिक विकसित-नजले का रोग।

चन्द्र  पर्वत पर एक तारक चिन्ह परन्तु यात्रा रेखा पर नहीं-जलोदर रोग।

जीवन रेखा मस्तिष्क रेखा से अलग होते समय कटी और टूटी हुई, मस्तिष्क रेखा उसी दण्ड रेखा द्वारा कटती हुई, साथ में शनि पर्वत के नीचे चतुर्भुज में क्रास- डिपथीरिया का रोग।


निकृष्ट मस्तिष्क रेखा, साथ में अंगूठा बहुत छोटा- बुद्धि जड़ता।

मस्तिष्क रेखा पर गहरे धब्बे, साथ में जीवन तथा स्वास्थ्य रेखायें तंग तथा गहरे रंग की। स्वास्थ्य रेखा मध्य में पतली तथा सरल-ज्वर की प्रवृत्ति। नितिन कुमार पामिस्ट 

हृदय  रेखा मस्तिष्क रेखा की ओर बढती हुई, साथ में अपूर्ण अस्पष्ट स्वास्थ्य रेखा-ज्वर।

जीवन रेखा पर एक बहुत छोटा सा वर्ग, साथ में अन्दर क्रास-बुखार।

जीवन रेखा पर छोटा सा वर्ग, साथ में अन्दर क्रास प्राय: टाइफाइड बुखार।

लहरदार स्वास्थ्य रेखा और निकृष्ट यदि साथ में जीवन रेखा पर द्वीप हो, यदि हाथ भी नम हों तो दमें का रोग।

नितिन कुमार पामिस्ट 

Shaadi Aur Mohabbat Ki Rekha (Prem Rekha)



marriage line shadi ki rekha se jaan sakte ho ki kab shadi hogi


Vivah Ki Rekha Jo Batati hai Shadi Kab Hogi Aur Kaise Hogi ?

Har insan apni shaadi ko le kar ki utsuk rahta hai. Hum sabhi log janana chahate hai ki humra vevahik jeevan kaisa rahega, kaisa hoga humra jeevan shaati.



Adikhtar ladkiya shaadi ko le kar bahut chintit rahati hai. Indian girls palmistry or astrology articles ko search karti rahati hai aur palmist aur astrologer se ye nahi poochna bhoolti ki unka hone wala life partner kitana maal-daar hoga.



Aaj kal young generation mein love marriage ko le kar hod macchi hui hai jyadatar yuva log love marriage karna chahate hai isliye adikhansh boys and girls yahi poochte hai ki unke haath mein love marriage ka yog hai ya nahi ? Dekhiye love marriage ya prem vivah ka chalan sirf Asia mein hi hai bahar ke mulko mein love marriage ka chalan nahi hai ya bahut kam hai.



Mera manana hai ki shaadisuda jindgi acchi honi chahiye phir chahe love marriage ho ya arrange marriage agar shaadi ke baad naubat divorce ke aa jaay to aise love marriage kisi kaam ki nahi waise ab humare desh India mein bhi divorce ka chalan bad gaya hai kuch saalo pehaly log divorce lena sahi nahi mante the lekin aaj kal shaadi ke kuch hi saal baad log divorce le lete hai jis ki jyadatar wajah hoti hai ladki ka apne sasural mein adjust na ho pana kyuki aaj kal joint family mein koi bhi adjust nahi hona chahata hai sabko nuclear family matlab choti family chahiye "hum do humare do".

Aap chahe kitane hi bade vidhwan astrologer ya pandit se kundli milaan, match-matching karwa le lekin yadi lekin yadi unko joint family mein rahana pada to unke beech ghit-pit honi hi hai aur parivar mein kalesh hona hi hai kyuki aaj kal ladke ladkiyo ko joint family mein rahana pasand nahi hota hai. Aaj kal shaadi mein samasya ki doosari wajah hai aurat ka khud ka kamana (jo ki acchi baat hai) lekin is wajah se aise logo ki shaadisuda aur parivarik jindgi mein kaafi tanaav dekha jata hai jabki jin logo ki patni housewife hoti hai unki shaadisuda jeevan mein kam tanaav dekhne ko milta hai. Halaki ye sab bhagaya ki baat hai kyu ki "mange miley na bheekh , bin mange miley moti ".

Har insaan ke hath mein kuch yog hote hai jo batate hai ki is adami ki shadisuda jindgi kaise rahegi ?


Khushhaal Shaadi Hone Ke Yog

1. Jis kisi insaan ke haath mein shaadi ki rekha seedhi aur lambi hai to aap kah sakte hai ki is insaan ki shaadi acchi rahegi. Vivah Rekha ko koi rekha kaate nahi aur na hi koi cross vivah rekha pr ho.

2. Yadi vivah rekha surya rekha se mil jaay to aise vykti ko vivah ke paschaat maan-samaan prapt hota hai aur dhan laabh hota hai.

3. Yadi jeevan rekha pr dhanush bana ho to aise vykti ko sasuraal se accha paisa milta hai.

4. Yadi chandra parvat se stri rekha bhagya rekha ko mil jaay to aise vykti ko vivah ke baad dhan laabh hota hai wa wo tarakee karta hai.

5. Yadi acchi vivah rekha ke saath acchi bhagya rekha aur surya rekha ho to vykti nischit hi vivah ke paschat tareeki karta hai.

6. Yadi vivah rekha pr trishul ho to vykti ka vivah doosari caste mein hota hai lekin vivah shaandaar hota hai.


Dukhi Vevahik Jeevan Ke Yog

1. Yadi vivah rekha mein fork ho to samajh lijiye ki vivah se vykti santoosth nahi hoga aur wo divorce lene ki sochta hoga.

2. Yadi vivah rekha bahut chotti hai to samajh lijiye ki vevahik jeevan accha nahi hai, kalahpoorna hai.

3. Yadi vivah rekha pr cross ya island ya koi doosara bad sign bana hua hai to samajh lijiye vevahik jeevan khraab hai.

4. Yadi vivah rekha surya rekha ko kaat de vykti ko maanhani aur dhanhani uttani padti hai vivah ke paschaat.




Prem Vivah Ke Yog
1. Jab bhi chandra parvat se rekha nikal kar bhagaya rekha ko milti hai tab vykti ka prem vivah hota hai.

2. Hridya rekha ki branch guru parvat pr sheedhi chali jaay tab bhi vykti ka prem vivah hota hai.


Talak Ya Divorce Ke Yog

1. Jab bhi bhagya rekha se branch nikal kar hridya rekha ko kaatti hai tab talaak hota hai.

2. Jab bhi Venus Mount se rekha nikal kar vivah rekha ko kaatti hai tab talaak hota hai. Kya dosri shadi ka yog hai?

3. Jab bhi vivah rekha mein bada fork banta hai tab talaak hota hai.

4. Talak desh aur samaaj pr bhi nirbhar karta hai jaise islamic shadi ka tarika aur talaak aur hindu shadi ka tarika aur talak alag alag tarah se hota hai. Aap talaak se se bachne ke liye shadi ke liye wazifa ya upay kr sakte hai. 


(Keywords: suhagraat ka tarika in islam, pregnant hone ka tarika, suhagraat ka tarika in islam, shadi kya hai?)


Yaha meine kuch general ya basic signs bataye hai jo palmistry mein divorce, love marriage, aur happy marriage or bad marriage ko batate hai kyuki kaafi log roman hindi mein janana chahate the aur request kar rahe the. Aap in sabhi signs ki figure is post mein dekh sakte hai :- Relationship & Breakup In Palmistry

कन्या विवाह में बाधा निवारक गौरी मंत्र (Mantra For Unmarried Girls)





1. कन्या विवाह में बाधा निवारक गौरी मंत्र

कात्यायनी महामये
महा योगिन्यधिश्वरी !
नन्द गोप सुतं देवी
पतिं मे कुरुते नम: !!

कन्या को चाहिये की वह नहा धोकर प्रतिदिन इस मंतर का 108 बार जाप करे !

2. मांगलिक योग का उपाय (Remedies for Manglik Yoga)

अगर किसी का विवाह कुण्डली के मांगलिक योग के कारण नहीं हो पा रहा है, तो ऎसे व्यक्ति को मंगल वार के दिन चण्डिका स्तोत्र का पाठ मंगलवार के दिन तथा शनिवार के दिन सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए. इससे भी विवाह के मार्ग की बाधाओं में कमी होती है.


3. गाय को रोटी देना

जिन व्यक्तियों को शीघ्र विवाह की कामना हों उन्हें गुरुवार को गाय को दो आटे के पेडे पर थोडी हल्दी लगाकर खिलाना चाहिए. तथा इसके साथ ही थोडा सा गुड व चने की पीली दाल का भोग गाय को लगाना शुभ होता है.






लाजवर्त : 


लाजवर्त को धारण करने के बाद व्यक्ति पर राहु, शनि और केतु का दुष्प्रभाव खत्म हो जाता है । शनि , राहु और केतु के प्रकोप से बचाता है और दुर्भागय को दूर कर के व्यक्ति को सफलता दिलाता है । व्यक्ति पर बुरी नजर, काला जादू , टोने - टोटके का प्रभाव नहीं होता है । लाजवर्त कोई भी व्यक्ति धारण कर सकता है और सिद्ध कर के भेजा जाता है । भारत के सभी राज्यों के शहरो और गाँवों में कोरियर या स्पीड पोस्ट से भेजने की सुविधा है और भारत के बाहर विदेश में भी भेजने की सुविधा है ।

Laajwart Benefits : 

Lajwart nullify the malefic effects of Planet Saturn, Rahu & Ketu and protects from black magic, and evil eye. Removes Depression and laziness. Gives good success in career and in business. You will get energized Lajwart by courier at your home. You need to wear Lajwart in your right hand's middle finger in silver ring on Saturday. Male and female both can wear it. No side effect of Lajwart.  


लाजवर्त पत्थर के लाभ :

लाजवर्त तीनो क्रूर ग्रहो (शनि, राहु और केतु ) के दोषो और दुष्प्रभावो को खत्म करता है । 

यदि आपको शनि की साढ़ेसाती चल रही है तो आप लाजवर्त धारण कर सकते है और लाभ प्राप्त कर सकते है ।   

यदि किसी व्यक्ति द्वारा घर पर या आप पर कुछ किया-कराया हुआ अनुभव होता हो या फिर घर में वास्तुदोष हो तो लाजवर्त को धारण करने से लाभ मिलता है । 

काला जादू ख़त्म करता है और बुरी नज़र से बचाव करता है |

यदि आपको केतु और राहु की महादशा या अन्तर्दशा चल रही है तो आप लाजवर्द धारण कर सकते है और लाभ प्राप्त कर सकते है । 

नौकरी और व्यवसाय में आ रही अड़चनो को दूर करता है । 

पितृ दोष को खत्म करता है ।  

लाजवर्त विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभदायक है । लाजवर्त विद्यार्थी का आत्म विश्वास बढ़ा देता है और विद्यार्थी की शिक्षा में एकाग्रता भी बढ़ जाती है । 

लाजवर्त को धारण करने के बाद धीरे धीरे आपके व्यवसाय में तरक्की होती है | यदि व्यवसाय काला जादू या टोना - टोटका की वजह से मंदा चल रहा है तो आपको लाजवर्त धारण करने से लाभ अवश्य मिलेगा ।   

अगर घर में बरकत नही होती है तो बरकत होने लगती है | 

अगर आपके शत्रु ज़्यादा है या आपका शत्रु आपको परेशान करता है या आप पर जादू टोना करवाता है तो आपका उसके किए हुए जादू टोना से बचाव करता है और आपके शत्रु को परास्त करता है | आपका शत्रु आपके सामने शक्तिहीन हो जाता है | 

लाजवर्त को धारण कर ने से डिप्रेशन/तनाव दूर होता है । और सेहत अच्छी होती है ।  

लाजवर्त  राहु, केतु और शनि द्वारा आ रही बाधाओ को दूर करता है और व्यक्ति को सफलता मिलने लगती है |

लाजवर्त को धारण करने के बाद व्यक्ति का दुर्घटना और एक्सीडेंट से बचाव रहता है । 

यदि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है तो आपको लाजवर्त धारण कर ने से लाभ अवश्य मिलेगा ।   

आपको लाजवर्त शनिवार को चाँदी की अंगूठी में बनवा के सीधे हाथ की मध्यमा उंगली (middle finger) में धारण करना है | 

आपको लाजवर्त कौरीयर सर्विस या स्पीड पोस्ट से भेजा जायगा और ट्रॅकिंग नंबर दिया जायगा |

सवाल और उनके जवाब :- 


सवाल: लाजवर्त को कैसे धारण करें ? 
जवाब: आपको लाजवर्त शनिवार को चाँदी की अंगूठी में बनवा के सीधे हाथ की मध्यमा उंगली (middle finger) में धारण करना है | 


सवाल: लाजवर्त (Lajwart) कैसे मिलेगा ? 
जवाब: आपको अपने घर का पता देना है और आपके घर के पते पर लाजवर्त (Lajward) कौरीयर सर्विस या स्पीड पोस्ट ( डाक ) से भेजा जायगा और ट्रॅकिंग नंबर और रसीद दी जाएगी | आपको लाजवर्त 5-6 दिन में मिल जाएगा । 


सवाल: पेमेंट कैसे करना है ? या पैसे कैसे भेजने है ? 
जवाब: आपको पैसे नीचे दिए गए SBI बैंक खाते में भेजने या जमा करवाने है |

सवाल:  क्या लाजवर्त (Lazward) को कोई भी राशि या लग्न वाला व्यक्ति धारण कर सकता है ?
जवाब :  हाँ । 

सवाल :  क्या लाजवर्त मिलने के बाद पेमेंट कर सकते है ?
जवाब :  ये सुविधा (COD) उपलब्ध नहीं है इसलिए आपको पहले मेरे अकाउंट में पेमेंट करना होगा और फिर आपको लाजवर्त भेजा जाएगा ।  



Price :

Lajwart Gemstone Rs. 600/- (No extra shipping charges) लाजवर्त की कीमत सिर्फ Rs. 600/- है और भेजने का कोई शुल्क नहीं है ।


SBI Bank: 
(State Bank of India)

Nitin Kumar Singhal
A/c No.: 35109551560
IFSC CODE: SBIN0003258
Branch: Shastri Nagar
City: Jodhpur, Rajasthan.


ORDER NOW

आप मुझको ईमेल भी कर सकते है और व्हाट्सप्प पर भी संपर्क कर सकते है । 

Email ID: nitinkumar_palmist@yahoo.in

 


यदि आप लाजवर्त खरीदना चाहते है तो व्हाट्सप्प पर संपर्क करें । 
WHATSAPP: 8696725894

पार्सल ट्रैकिंग कैसे करें :-

अपने पार्सल का स्टेटस जानने के लिए या क्लिक करें । इस इंडिया पोस्टल विभाग की वेबसाइट पर आपको जो रसीद दी गयी है उस रसीद पर जो नंबर (ट्रैकिंग कोड) लिखा है उसको डालना है और ट्रैकिंग कोड डाल कर एंटर करने पर आपको आपके पार्सल की पूरी जानकारी मिल जाएगी की वह आपको कब तक मिल जाएगा और अभी कहा तक पंहुचा है ।

Tracking Website: http://www.indiapost.gov.in/speednettracking.aspx



उदहारण के तौर पर आप ये ट्रैकिंग नंबर: ER855949383IN डाल कर चेक कर सकते है । ये ट्रैकिंग नंबर डालने पर आपको जानकारी प्राप्त होगी की इस पार्सल को जोधपुर से 01/10/2015 को बुक किया गया था और व्यक्ति को 03/10/2015 को नई दिल्ली में अपने घर पर मिल गया है । 


शुक्रवलय - HASTREKHA VIGAN



शुक्र मुद्रिका (शुक्रवलय)

शनि व सूर्य को एक साथ घेरने वाली रेखा को शुक्र मुद्रिका कहते हैं। यह हाथ में विशेष लक्षण माना जाता है। ऐसे व्यक्ति धनी व रसिक होते हैं। इनकी प्रकृति वासनात्मक होती है। शुक्र मुद्रिका टूटी-फूटी या उंगलियों के पास हो तो चरित्र दोष का लक्षण मानी जाती है। हाथ में अन्य वासना वृद्धि के लक्षण होने पर टूटी या उगलियों के पास होने वाली शुक्र मुद्रिका इसमें कई गुना वृद्धि करती है। (नितिन पामिस्ट )



उंगलियां मोटी, हृदय रेखा उंगलियों के पास, हृदय रेखा जंजीराकार, शुक्र पर जाली, जीवन रेखा सीधी, मस्तिष्क रेखा में शनि के नीचे द्वीप व चन्द्रमा पर अधिक रेखाएं होने पर दोषपूर्ण शुक्र मुद्रिका वाले व्यक्ति वासना के कीड़े होते हैं। कामान्धता में उचित, अनुचित का विचार नहीं करते। (नितिन पामिस्ट )

शुक्र मुद्रिका निर्दोष व उंगलियों से दूर होने पर व्यक्ति साहित्य सृजन में रूचि लेने वाले उच्च कोटि के लेखक होते हैं। ऐसे लेखक अपने ही मूड में होते हैं। दस दिन लिखते हैं और चार दिन की छुट्टी करते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि इनका कार्य निरन्तर नहीं चलता । इन्हें कोई न कोई बीमारी भी देखने में आती है। (नितिन पामिस्ट )

शुक्र मुद्रिका हृदय रेखा उंगलियों के पास होने पर यदि मंगल रेखा हो या शुक्र से कोई रेखा आकर भाग्य रेखा पर मिलती हो या भाग्य रेखा में निदष प्रभावित रेखा हो, तो व्यक्ति को पुरूष होने पर स्त्री और स्त्री होने पर पुरूष से लाभ होता है। यह भी कहा जा सकता है कि ऐसे व्यक्तियों का विवाह दूसरों के द्वारा ही किया जाता है। ऐसे पुरूष स्त्री की कमाई खाने वाले होते हैं। हाथ पतला, काला या दोषपूर्ण होने पर अपनी स्त्री से भी अनैतिक कार्य कराने वाले होते हैं।

चतुष्कोण - HASTREKHA VIGAN


चतुष्कोण ( स्क्वायर )

चार रेखाओं से मिलकर बनी आकृति को चतुष्कोण कहते हैं। स्वतन्त्र होने पर ही यह उत्तम माना जाता है। चतुष्कोण सदैव ही रक्षा करते हैं। अत: जिस रेखा या ग्रह पर इसकी स्थिति होती है, उससे सम्बन्धी दोष से रक्षा करता है।




चतुष्कोण में दोष होने पर संकटों से रक्षा करता है। परन्तु दोष न होने पर यह गुणों में वृद्धि व लाभ का लक्षण है। किसी भी रेखा में दोष होने पर वह दोष चतुष्कोण से ढका हुआ हो तो उसका फल केवल आभास मात्र ही होता है, अर्थात् समस्याएं तो आती हैं, परन्तु हानि नहीं होती।

निर्दोष रेखा में चतुष्कोण उस आयु में धन-सम्पति या प्रेम, जैसी भी दशा हो, वृद्धि कर देता है। बृहस्पति पर चतुष्कोण बीमारी, सम्मान, गले के रोग, अचानक आने वाले खतरे और जूहर आदि मसलों में रक्षा करता है। ( नितिन पामिस्ट )

ऐसे व्यक्ति को ससुराल से लाभ होता है। सूर्य पर यह प्रतिष्ठा बढ़ाने वाला व कलंक मिटाने और नेत्र ज्योति को निर्दोष रखने वाला होता है। बुध पर चतुष्कोण अपकीर्ति या किसी षडयन्त्र से रक्षा का संकेत है। यह वक्तृत्व या लेखन शक्ति में वृद्धि करता है। चन्द्रमा पर चतुष्कोण जल से रक्षा और धार्मिक रूचि का लक्षण है। चन्द्रमा पर अधिक रेखाएं होने पर व्यक्ति को बेहोशी, जलोदर, हिस्टीरिया, स्वप्नदोष आदि रोग पाये जाते हैं। परन्तु चन्द्रमा पर चतुष्कोण होने पर इन रोगों से रक्षा होती है। मृत्यु के कारण नहीं बनते। शुक्र पर चतुष्कोण होने पर वीर्य, जिगर, स्वास्थ्य-रक्षा व पारिवारिक सम्बन्धों में मधुरता का लक्षण है। ऐसे व्यक्ति स्वास्थ्य की परवाह करते हैं और अपने परिवार में सद्भावना से रहते हैं। इनकी स्मरणशक्ति उत्तम होती है।


जीवन रेखा में अन्दर की ओर चतुष्कोण मुकद्दमे बाजी का लक्षण है। जीवन रेखा मे जितने ही चतुष्कोण भीतर की ओर होते हैं व्यक्ति को उतने ही मुकदमे लड़ने पड़ते हैं। बाहर की ओर चतुष्कोण होने पर उस आयु में रोग, दुर्घटनाओं आदि में रक्षा होती है। जीवन रेखा के अन्त में चतुष्कोण हो तो अन्तिम आयु में स्वास्थ्य ठीक रहता है। मंगल रेखा में दोष होने पर यदि चतुष्कोण हो तो जीवन साथी के स्वास्थ्य या उसकी मृत्युभय से रक्षा का चिन्ह है। अंगूठे के मंगल पर यह चिन्ह होने पर पेट विकार व चिड़चिड़े स्वभाव से रक्षा करता है। ऐसे व्यक्ति मेल-जोल से रहते हैं और इन्हें सम्पति के झगड़ों में विजय प्राप्त होती है।

बुघ के नीचे वाले मंगल पर यह चिन्ह सरकार या किसी अन्य के द्वारा हड़प की गई सम्पति वापस मिल जाती है। ( नितिन पामिस्ट )

मस्तिष्क रेखा में दोष होने पर यदि चतुष्कोण से आच्छादित हो तो उस समय
परेशानी तो आती है, परन्तु रक्षा हो जाती है। इस प्रकार का संकट स्वास्थ्य, धन या अन्य किसी भी प्रकार का हो सकता है। दोष न होने पर यदि मस्तिष्क रेखा में चतुष्कोण हो तो उस समय नये कार्य से लाभ होता है या धन की बरबादी से रक्षा होती है। इस आयु में परिवार का कोई सदस्य अस्वस्थ रहता है, परन्तु विशेष दोष जैसे मृत्यु नहीं होती है। मस्तिष्क रेखा के अन्त में चतुष्कोण होने पर मस्तिष्क में अन्त तक विकार नहीं आता ।

भाग्य रेखा का चतुष्कोण व्यक्ति को धन लाभ कराता है या इस प्रकार की हानि से रक्षा करता है। जिस आयु में चतुष्कोण भाग्य रेखा के दोनों ओर हो तो सम्पत्ति जीवन में महत्व रखती है और चतुष्कोण के आकार की ही होती है। हृदय रेखा पर चतुष्कोण, मानसिक ठेस, हदय रोग आदि से रक्षा करता है। यही चतुष्कोण यदि शनि के नीचे हो तो ऐसे व्यक्ति को दांत के रोग होते हैं और बिजली या आग से रक्षा होती है। शनि क्षेत्र में चतुष्कोण धन में वृद्धि व संचय का लक्षण है। मंगल क्षेत्र में होने पर झगड़ों से रक्षा व निश्चितता का लक्षण है।

गुरु पर्वत पर भाग्य-रेखा का अंत होना


भाग्य-रेखा का अंत गुरु पर्वत पर होना

या तो भाग्य-रेखा हाथ के बीच में ही समाप्त हो जाती है या फिर शनि-क्षेत्र तक जाती है । शनि-क्षेत्र तक जाने के कारण इसे बहुत से लोग शनि-रेखा भी कहते हैं किन्तु बहुत से हाथों में यह शनि-क्षेत्र को जाकर बृहस्पति के क्षेत्र को चली जाती है ।

यदि भाग्य-रेखा हथेली के मध्य तक प्राकर बृहस्पति के क्षेत्र पर चली जाए तो जातक के हृदय में बहुत उच्च महत्वाकांक्षा तथा उसकी सफलता प्रकट करती है।

२ानि मुद्रिका - HASTREKHA VIGAN


२ानि मुद्रिका हस्तरेखा

शनि की उंगली के नीचे पाई जाती है। सुन्दर व दोष रहित होने पर यह मुद्रिका आध्यात्मिक प्रगति का लक्षण है। ऐसे व्यक्ति शिव उपासना में रूचि लेते हैं। इनकी रूचि आयु के साथ बढ़ती रहती है और अन्तिम आयु में गहनता को प्राप्त होती है। शनि मुद्रिका टूटी हुई होने पर आग व बिजली से भय रहता है।



यह मुद्रिका शनि की उंगली के पास व अधूरी हो तो व्यक्ति का वंश विधवा से विवाह के पश्चात् चलता है। इस प्रकार की अधूरी शनि मुद्रिका भील आदि जातियों के हाथों में अघिक देखी जाती है।

दोषयुक्त स्वास्थ्य रेखा - HASTREKHA VIGAN



स्वास्थ्य-रेखा पर दोष-चिह्न

यदि स्वास्थ्य-रेखा पतली हो तो भी यही सूचित होता है कि यकृत अपना काम अच्छी तरह कर रहा है। रेखा का गहरा होना अधिक प्रच्छा लक्षण है। उसकी बराबरी पतली रेखा नहीं कर सकती । किन्तु स्वास्थ्य-रेखा दोष-युक्त हो (टूटी, लहरदार, बिन्दु, द्वीप-युक्त प्रादि) तो अस्वास्थ्य प्रकट होता है ।


(१) यदि स्वास्थ्य-रेखा चौड़ी और उथली हो तो उसका जिगर बहुत मजबूत नहीं होगा । थोड़ी सी ही बदपरहेजी से सिरदर्द, मंदाग्नि, अपच, जलन प्रादि होंगे ।


(२) यदि स्वास्थ्य-रेखा शृङ्खलाकार हो तो जिगर और पेट की खराबी प्रकट होगी। ऐसे व्यक्तियों को गॉल्स्टोन , यकृतशोथ प्रादि रोग होते हैं। ऐसे व्यक्ति न केवल बीमार रहते हैं बल्कि उनका दिमाग भी गमगीन और उत्साहशून्य होता है। ऐसे लोग शक्की और चिड़चिड़े स्वभाव के होते हैं । इस कारण व्यापारिक सफलता भी उन्हें नहीं मिलती ।

लहरदार स्वास्थ्य रेखा - HASTREKHA VIGAN




लहरदार स्वास्थ्य रेखा

यदि स्वास्थ्य-रेखा लहरदार हो। यदि स्वास्थ्य-रेखा लहरदार हो तो यह सूचित करती है कि ऐसा जातक लम्बे अरसे तक कुछ-कुछ बीमार रहेगा । जिगर की खराबी से पचासों रोग होते हैं और जो भी लम्बा रोग जातक को हो उसकी जड़ में-मूल कारण जिगर की खराबी होगी।

यदि जातक पर शनि का प्रभाव अधिक हो तो वात-विकार या गठिया-रोग होगा। स्नायु की दुर्बलता के कारण अन्य रोग भी हो सकते हैं । लहरदार स्वास्थ्य-रेखा होने से अनेक प्रकार के पित्त ज्वर-मलेरिया प्रादि होते हैं। जिन पर सूर्य का अधिक प्रभाव हो और स्वास्थ्य-रेखा लहरदार हो तो पाचनशक्ति की खराबी के कारण उनको हृदयरोग की शंका होगी। ऐसे व्यक्तियों को उचित है कि वे अपने पेट और जिगर को ठीक हालत पर लावें, हृदय-रोग प्रपने-प्राप ठीक हो जावेगा।

यदि मंगल का प्रभाव प्रधिक होगा तो पेट की अंतड़ियों में शोय हो जावेगा। जब कभी भी स्वास्थ्यरेखा प्रच्छी न हो तो, हाथ के अन्य लक्षणों से तुलना कर यह विचार करना चाहिए कि क्या रोग होगा ।

हाथ में तलाक का योग - HASTREKHA VIGAN



हाथ में तलाक का योग 

यदि विवाह की रेखा हथेली के अंदर की और मुड़ती हुई दो  रेखाओ में बट जाय और उनमे से एक रेखा अंगूठे के गद्देदार स्थान तक पहुचे तो उस व्यक्ति का तलाक होता है ।

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Vivah Aur Algaav

विवाह और अलगाव - HASTREKHA VIGAN


विवाह और अलगाव 




यदि विवाह रेखा आगे चलकर दो भागो में बट जाय तो जाल ले की पति पत्नी बिमा तलाक लिए एक दूसरे से अलग हो जाएंगे । पति पत्नी एक दूसरे से दुखी हो कर के कानून और दुनिया की नजर में तो पति-पत्नी होते है पर वास्तिविक जिंदगी में दोनों के बीच सभी रिस्ते टूट चुके होते है ।

सूर्य रेखा को काटती हुई विवाह रेखा - HASTREKHA VIGAN



सूर्य रेखा को काटती हुई विवाह रेखा
यदि विवाह की रेखा सफलता की रेखा को काटती हुई निकलती हो तो उसको अर्थ है की विवाह के कारण उस व्यक्ति की सामाजिक मान-मर्यादा को काफी चोट पहुचेंगी और उसे धन की हानि के साथ साथ अपयश भी मिलेग।

पर्वत और उन पर पाई जाने वाली बीमारीया - HASTREKHA VIGAN



बीमारी, पर्वतों से बीमारी के लक्षण कहाँ और कैसे होगे तथा उनकी प्रकृति क्या होगी इसका निर्णय पर्वतों की स्थिति देख कर की जा सकती है। सामान्य रूप में निम्नलिखित पर्वत अपने सामने अंकित बीमारी की सूचना प्रमुखता से देते हैं। जैसे:-


1.बृहस्पति- अधिक ऊँचा रक्तविकार, फोड़े-पुंशी, हड्डी के रोग, आग से जलना तथा निम्नस्तर का उत्साहहीनता, दब्बूपन, भोजन ज्यादा, गैस से मूछ हाजमा खराब, द्वीप होनें पर धूम्रपान से फेफड़े खराब, शुक्र से सम्बन्धित होनें पर टी0 बी0 (कामुकता) के कारण लिवर खराब और जॉन्डिस ।

2. शनि- दबा हुआ डिप्रेशन, घाव, टाँग में तकलीफ, हड्डी रीढ़ की तकलीफ, गठिया शिराओं में तकलीफ, गैस्ट्रिक, महिलाओं में चन्द्र से सम्बन्धित होनें पर हिस्टिरिया तथा अति उच्च पर आत्महत्या की प्रवृत्ति।

3.सूर्य- आँख की तकलीफ, गठिया, बुखार, भावुकता के कारण एलर्जी। हृदय रोग

4 . मंगल - रक्तविकार , ऑपरेशन , अग्निभय , चोरी , एक्सीडेंट , एलर्जी , दमा, अंतड़ियों के रोग।

5. बुध- फोड़ा, हाजमा, बाहरी तौर पर निराशा । (नितिन पामिस्ट)

6. चन्द्र- किडनी, स्नायुरोग, पथरी, पेशाब की जलन, हिस्टिरिया, जलोदर, जलभय वातविकार, नींद में चलना ।

7. शुक्र- अधिक्तर छूत का गेग, यौन-रोग, वृद्धावस्था में पेशाब से सम्बन्धित होनें पर।

8.राहु- आँत, पेट, अचानक मृत्यु। (नितिन पामिस्ट )

9. केतु- चर्म रोग, सफेद दाग, रक्त विकार ।



भाग्य रेखा का अन्त शनि पर


भाग्य रेखा का अन्त शनि, बृहस्पति या सूर्य पर होता है। शनि पर गई हुई भाग्य रेखा दोष रहित हो तो बहुत उत्तम मानी जाती है । विशेष भाग्य रेखा के साथ हाथ गुलाबी और भारी हो। भाग्य रेखा चन्द्रमा या शनि क्षेत्र से निकलने की दशा में यह विशेष उत्तम व सुख और सौभाग्य का लक्षण है। इस लक्षण से हाथ के मूल्यांकन में वृद्धि हो जाती है । (चित्र-112) (नितिन पामिस्ट )

शनि पर गई हुई भाग्य रेखा होने पर यदि हाथ कुछ कठोर हो व शनि नीचे से नुकीला या ऊपर से उन्नत हो तो व्यक्ति की रुचि बगीचे, खेती आदि में होती है। शनि की उंगली होने पर तो ऐसा अवश्य ही होता है। यह भाग्य रेखा मोटी भी हो तो घर में खेती का कार्य होता है। बायें हाथ में भाग्य रेखा मोटी होने पर व्यक्ति के वंश तथा दायें हाथ में होने पर स्वयं का खेती का योग होता है, दोनों ही हाथों में भाग्य रेखा गहरी हो व हाथ अच्छा हो तो वंशानुगत कृषि कार्य पाया जाता है। शनि मुद्रिका होने पर भी खेती या खनन सम्बन्धी कार्य करते हैं। ऐसे व्यक्ति भूमि में खोद कर कुछ निकालने, पत्थर की रोड़ी बनाने या मिटटी या रेत आदि का कार्य करते हैं।


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Client's Feedback - DECEMBER 2017



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