Wednesday, September 27, 2017





नाख़ून (Nails On Hand) | Hastrekha
नाख़ून

नाख़ून व्यक्ति की अनेक मनोवृत्तियाँ और रोगों के विषय में महत्वपूर्ण सूचना देते हैं। अत: हाथ को देखते समय नाखूनों का अध्ययन भी बहुत आवश्यक है। नाखूनों का अध्ययन उनको रंग, रूप लम्बाई, मोटाई, आकार और अन्य बनावट को विषय में सूक्ष्म रूप से कर लेना चाहिए। इस लक्षण से हमें कई विशेष जानकारियां मिलती हैं। प्रत्येक नाखून अपना विशेष महत्त्व रखता है। ग्रह या उंगली के लक्षण देखते समय नाखून का लक्षण भी उससे मिलाना आवश्यक हो जाता है।

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नाखूनों के रंग

 श्वेत नाखून व्यक्ति में स्नायु-दोष का लक्षण है। इनका रक्त-चाप कम होता है। इन्हें सिर दर्द रहता है। यदि सिर के पिछले भाग में लगातार दर्द रहता हो तो ऐसे व्यक्तियों को लकचा होने का डर रहता है। स्नायु-विकार होने के समय नाखूनों का रंग बिल्कुल सफेद हो जाता है। कई बार इस प्रकार का रंग व्यक्ति में किसी दूसरी आत्मा का प्रभाव होने पर भी देखा जाता है, इनकी नींद कम आती है और मबराते अधिक हैं।

 हृदय रोग होने पर नाखूनों का रंग सफेद होता है। बीमारी की अवस्था में खून की कमी होने पर नाखून पतले हो जाते हैं और दबाने पर दब जाते हैं। हृदय रोग से ग्रस्त व्यक्ति के नाखून ऊबड़-खाबड़ तथा प्रेत-बाधा या अल्प-निद्रा रोग में ये कंवल सफेद होते हैं। आकार में विकार नहीं आता। चलने-फिरने से हृदय में पीड़ा का अनुभव करने वालों के नाखून हल्के सफेद होते हैं। इस रोग को एन्जायना कहते हैं। हृदय में छेद होने पर नाखून बीच में से ऊंचा हो जाता है। (नितिन कुमार पामिस्ट)

नाखून का रंग लाल होने पर व्यक्ति क्रोधी होता है। इनके शरीर में पित्त का प्रभाव अधिक होता है। इनकी कोई आदत नहीं डालनी चाहिए अन्यथा ये उसके आदी हो जाते हैं और छोड़ने में कठिनाई होती है। इन्हें खट्टी वस्तुएं नहीं खानी चाहिए। अघिक गरम पेय पदार्थ भी इनक स्वास्थ्य को हानि पहुंचाते हैं। लाल नाखून वाले व्यक्ति क्रोधी होते हैं। साथ में अन्य क्रोध के लक्षण होने पर ये विशेष क्रोधी पाये जाते हैं। 

अधिक धूम्रपान करने वालों के नाखून धुएं जैसे हो जाते हैं। यह रक्त में निकोटीन बढ़ जाने का लक्षण होता हैं। ऐसे लक्षण का प्रभाव हृदय पर पड़ता है। इनकी धूम्रपान कम कर देना चाहिए या बन्द कर देना चाहिए अन्यथा शरीर में कई रोग घर कर लेते है ।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

 लम्बे नाखून

 ऐसे व्यक्ति सीधे-सादे तथा भावुक होते हैं, इन्हें किसी भी विषय में तीव्र रूचि नहीं होती है। शरीर के अनुपात से लम्बे होने पर ऐसे व्यक्तियों की कमर मे दर्द रहता है। इन्हें मियादी बुखार बार-बार होता है। भाग्य रेखा गहरी होने पर यदि नाखून विशेष लम्बे हों तो कैंसर, ट्यूमर, गॉल ब्लेडर (पित्ताशय) में पथरी आदि की सम्भावना रहती है। 

छोटे नाखून

छोटे नाखून व्यक्ति में बुद्धिमत्ता व सतर्कता का लक्षण है। ऐसे व्यक्ति जल्दबाज होते हैं परन्तु, बुद्धिमान होने के कारण सफल ही रहते हैं। बचपन में इनका गला खराब रहता है। इनकी प्रबन्ध शक्ति अच्छी होती है।

चौड़े नाखून

चौड़े नाखून वाले व्यक्ति खुले दिल के, बुद्धिमान व सावधान होते हैं। खुले दिल के होने के साथ-साथ इनमें किसी बात को बहुत बारीकी से जानने का गुण होता है। ये जुबान के सच्चे होते हैं। मगर लम्बे समय तक एक काग नहीं कर सकते। उपाय अपाय की सोच कर कार्य करने वालों के नाखून चौड़े होते हैं। इनके स्वभाव • | में थोड़ी गर्म पायी जाती है, परंतु अबायोस ही किसी व्यक्ति से बिगाडते नहीं। इनकी छाती में दर्द की शिकायत रहती है। कभी-कभी रीद की हड्डी में भी दर्द रहता है, जिसका कारण झटका लगना होता है। अधिक चौडे और फैले हुए नाखून होने पर व्यक्ति की मस्तिष्क की नस फटने का डर रहता है। चौड़े नाखून यदि सख्त भी हों तो ऐसे व्यक्ति क्रोधी होते हैं।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

पतले नाख़ून 

 नाखूनों की मोटाई कम होने पर नाखून पतले कहे जाते हैं। ऐसे व्यक्ति का स्वास्थ्य कमजोर रहता है। मस्तिष्क में काम का दबाव होने से इनके सिर में दर्द रहने की शिकायत रहती है। इनका स्वभाव भूलने का होता है। ये आलसी होते हैं और नीद अधिक आती है। शरीर में दर्द और भूख की शिकायत भी इन्हें होती है। खट्टे च चटपटे पदार्थों में यह विशेष रूचि रखते हैं।

 मोटे नाखून 

नाखूनों का मोटा या मजबूत होना अच्छे स्वास्थ्य के चिन्ह हैं। सुदृढ़ नाखून वाले व्यक्ति शरीर व स्वास्थ्य के सुदृढ़ होते हैं। इन्हें लम्बे समय तक रहने वाली बीमारियां नहीं होती।


नाखूनों में चन्द्र



नाखूनों के पीछे की ओर सफंद भाग देखा जाता है, यह अर्ध-चन्द्राकार होता है। ऐसे व्यक्तियों का भार अवश्य बढ़ता है। भाग्य रेखा पतली होने के समय से इनका भार बढ़ना आरम्भ हो जाता है और जिस समय तक यह चन्द्र दिखाई देते रहते हैं, भार बढ़ता ही रहता है। जीवन रेखा सीधी होने पर व्यक्ति अधिक मोटा हो जाता है। अधिक बड़ा चन्द्र व्यक्ति में हृदय की कमजोरी का लक्षण है, इनको घबराहट बहुत होती है। अर्ध चन्द्र व अपूर्ण रेखा भी शरीर का भार बढने का लक्षण है।  (नितिन कुमार पामिस्ट)



चन्द रहित नाखून



नाखून छोटे अर्थात कम लम्बे होने पर उनमें सफेद चन्द्र का अभाव होता है। ये भी दुर्बल-स्नायु के होते हैं व हृदय कमजोर होता है। परन्तु यदि नाखून मोटे व दबाने पर सख्त हों तो उपरोक्त रोगों का भय नहीं रहता।



नाखूनों में दाग

नाखूनों में सफेद दाग भी स्नायु दुर्बलता का लक्षण है। ऐसे व्यक्ति प्रेमी और साधारण झूठ बोलने वाले होते हैं। बचपन में अधिक वीर्यपात के कारण भी नाखूनों में इस प्रकार के दाग हो जाते हैं। सूर्य की उंगली पर सफेद दाग होने पर व्यक्ति को सम्मान लाभ होता है। धृहस्पति पर लेखन सम्बन्धी त्र शनि पर धन सम्बन्पी लाभ होता है।

नाखूनों में काले दाग व्यक्ति की मृत्यु की सूचना देते हैं। इनको मस्तिष्क में शीघ्र ठेस पहुंचती है। स्त्री मरने, सन्तान भाग जाने या उसकी मृत्यु होने, पर धन नाश होने या सम्मान पर प्रहार होने पर नाखूनों में काले दाग पैदा हो जाते हैं।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

नाखूनों में काले दाग शारीरिक कष्ट का चिन्ह हैं। यदि ऐसे दागू नाखून के आरम्भ अर्थात् चन्द्र के स्थान पर हों तो मृत्यु जैसे कष्ट का सूचक है।

नालीदार (रेखायुक्त) नाखून

प्राय: नाखूनों में नालियां बन जाती हैं। ये नालियां नाखूनों के बीव गहराई हो जाने का परिणाम होती हैं। लम्बे समय तक पेट में गैस या कब्ज रहने के पश्चात् इस प्रकार की नालियां बनती हैं। मस्तिष्क रेखा शनि के नीचे दोषपूर्ण होने पर अंगूठे के नाखून में इस प्रकार की नालियां या रेखाएं मधुमेह का निश्चित लक्षण है।

नारवून में कभी-कभी काली धारियां भी देखी जाती हैं। ऐसे व्यक्तियों को पेट में गैस बनती है तथा आगे चल कर इन्हें गुर्दे के रोग हो जाते हैं। अंगूठे में इस प्रकार का काली धारी होने पर व्यक्ति को सिर में दर्द की शिकायत रहकर उसके मस्तिष्क
की कोई छोटी नाड़ी फट जाती है, उसी के फलस्वरूप इस प्रकार काली धारी अंगूठे के नाखून में बनती है। यह धारी कुछ मोटी व स्पष्ट होती है। ऐसे व्यक्तियों को गुर्दे के रोग होने का डर रहता है। धारियां छूने पर चिकनी तथा नालियां खुरदरी अनुभव होती हैं।


लम्बे संकरे नाखून



जब नाखून बहुत संकरे हों तो रीद की कमजोरी की ओर संकेत करते हैं। यदि वे बहुत बड़े व पतले हों तो यह समझना चाहिए कि रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो गयी है और शरीर निर्बल हो गया है।



भद्दे नाखून



कुछ व्यक्तियों के नाखून कटे-फटे से अथवा भद्दे-से होते हैं। थे ऊथट-खाबड़ से दिखाई देते हैं। इन्हें पेशाव में फास्फेट जाता है। चित्र-14 इन्हें रोगों की सम्भावना रहती है। खून की कमी इसमें प्रधान कारण है। कई बार नाखूनों के अन्त में अर्थात् बाहर की ओर धुंधली काली-सफेद-सी धारी दिखाई देती है। ऐसे व्यक्तियों को हृदय रोग हो जाता है।  (नितिन कुमार पामिस्ट)



चपटे

यदि नाखून बहुत चपटे दिखाई दें और ऊपरी अन्त पर मांस से उखड़े नजूर आयें तो पक्षाघात का खतरा होता है। यह खतरा और भी अधिक हो जाता है यदि वे सीप की आकार के होकर मूल स्थान की दिशा में नुकीले हों। जब इन नाखूनों में चन्द्र के कोई चिन्ह न हों तो यह समझना चाहिए कि रोग बढ़ गया है।

चतुष्कोणाकार नाखून

नाखूनों की लम्बाई व चौड़ाई बराबर होने पर ऐसे व्यक्ति उन्नति करने वाले होते हैं, परन्तु प्रारम्भिक जीवन में इन्हें संघर्ष का सामना करना पड़ता है। इनका लाभ और हानि बराबर होता है, परन्तु सन्तान के कार्य करने के पश्चात् विशेष सफलता मिलती है। इनकी मनोवृति मिली-जुली होती है। ऐसे व्यक्ति अच्छी बातों को ग्रहण करने वाले होते हैं, परन्तु क्रोध आने पर गुणों की टोपी उतार कर अलग रख देते हैं। बड़ी उम्र में इनका क्रोध बहुत कम हो जाता है। इस प्रकार स्नेह में भी ये व्यक्ति अविचारी पाए जाते हैं। आचार व व्यवहार में समान होते हैं। महसूस भी करते हैं और हसते भी हैं। इनका गला थोड़ा बहुत खराब होता है। वृद्धावस्था में नजला या कफ का प्रभाव देखा जाता है। ये साधारणतया शरीर से ठीक रहते हैं।

त्रिकोणाकार नाखून

कभी-कभी नाखून की बनावट त्रिकोणाकार देखी जाती है। ऐसे नाखून आगे से चौड़े तथा पीछे की ओर बहुत नुकीले हो जाते हैं। इस प्रकार नाखून की आकृति त्रिकोणाकार जैसी बन जाती है। ऐसे व्यक्ति बुद्धिमान, हँसमुख व जल्दबाज होते हैं। त्रिकोणाकार नाखून होना व्यक्ति की मानसिक दक्षता का लक्षण है। इनको गले व नाक के रोग देखे जाते हैं।

बृहस्पति या प्रथम उंगली का नाख़ून

हाथ में प्रथम उगली या बृहस्पति का नाखून व्यक्ति की मानसिक प्रवृत्तियों का मुख्य लक्षण है। बृहस्पति की दोनों उंगलियों के नाखून छोटे-बड़े अवश्य ही होने चाहिए. नहीं तो व्यक्ति की ग्रहण शक्ति कम होती है। जितना ही अधिक अन्तर बृहस्पति की दोनों उंगलियों के नाखूनों में होता है, उतना ही व्यक्ति भाग्यशाली, समझदार व चालाक होता है और उन्नति भी अधिक करता है।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

वृहस्पति के दोनों नाखून सम होने पर व्यक्ति सीधा होता है। इनमें ग्रहण शक्ति कम होती है। किसी भी बात को देर से समझते हैं और वृहस्पति का नाखून छोटा होने पर व्यक्ति में प्रबन्ध शक्ति अधिक होती है। मस्तिष्क रेखा एक से अधिक होने पर या मस्तिष्क रेखा दोनों ओर से शाखाकार होने पर ये उद्योगपति या बड़े प्रबन्धक होते हैं। बृहस्पति का नाखून गोल होने पर व्यक्ति के गले में दोष पाया जाता है। अन्य दोष होने पर इनकी सांस की नली का दमा हो जाता है।

शनि या दूसरी उंगली का नाखून

शनि का नाखून चौकोर, सुन्दर व छोटा होने पर व्यक्ति में मानव सुलभ गुणों की विशेषता पाई जाती है। ये पेड़-पौधों व पशु-पक्षियों सहित जीव मात्र से प्रेम करते हैं खेती, बागवानी व फुलवारी का इन्हें विशेष शौक होता है। ये व्यक्ति अध्यात्म व दर्शन में रूचि रखते हैं।

सूर्य या तीसरी उंगली का नाखून

सूर्य या तीसरी उंगली का नाखून चौकोर होने पर ऐसे व्यक्ति दस्तकार होते हैं। चौड़ा होने पर इनकी रूचि साहित्य की ओर जाती है।

बुध या चौथी उंगली का नाखून

इंसान की मानसिक रूचि व चरित्र की जानकारी के विषय में बुध की उंगली का नाखून विशेष महत्व रखता है। बुध का नाखून छोट, चौकोर व सुन्दर होने की या साहित्य में रूचि रखता है। ऐसे बच्चे क्या, क्यों, कैसे, इस प्रकार के प्रश्न करने वाले होते हैं। बुध का नाखून छोटा होने पर राजनीति में विशेष रूचि होती है तथा हाथ में अन्य लक्षण होने पर चुनाव लड़ता है। ये सफल राजनीतिज्ञ होते हैं।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

अंगूठे का नाखून

दोनों हाथों में एक जैसा हो तो व्यक्ति वंश परम्परा के अनुसार जीवन यापन करते हैं। बायें हाथ में अंगूठे का नाखून यड़ा व दायें का छोटा हो तो नये ढंग से जीवन निर्माण करते हैं। दायें हाथ में बड़ा व बायें में छोटा होने पर संघर्षशील होते हैं व अपना कमाया हुआ धन विश्वास व स्नेह के कारण दूसरों की सहायता में खर्च करने वाले होते हैं। ये 35 वर्ष के बाद धन-सम्पत्ति व सम्मान प्राप्त करते हैं तथा एकाग्रता से कार्य करने वाले होते हैं। ये स्वयं तथा समाज क लिए विशेष उदार होते हैं। जबकि दायें हाथ में नाखून छोटा होने पर व्यक्ति चालाक व निजी स्वार्थ आगे रखते हैं। दायां हाथ कता होने के कारण अधिकतर व्यक्तियों के इसी हाथ के नाखून बड़े होते हैं।

दो या अधिक नाखूनों का समन्वय

बुध व शनि का नाखून छोटा व चौकोर होने पर व्यक्ति में धार्मिक गुणों का अधिक समावेश होता है। इस सम्बन्ध में व्यक्ति विशेष ख्याति प्राप्त करता है तथा लेखक होने पर सत्-साहित्य का निर्माण करता है। बुध व वृहस्पति की उंगलियों कं नाखन छोटे व चौकोर हों तो व्यक्ति में व्यवहार व चरित्र सम्बन्धी गुण अधिक पाये जाते हैं। बुध व सूर्य का नाखून छोटा व चौकोर होने पर व्यक्ति रसायन व आयुर्वेद के ज्ञात होते हैं।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

नाखून का महत्व शोध या मनोविज्ञान की दृष्टि से केवल सुन्दर व उत्तम हाथ में होता है। निकृष्ट हाथों में निकृष्ट कोटि के गुण पाये जाने के कारण नाखूनों का विशेष महत्व नहीं होता। उस समय अंगूठे के नाखूनों से केवल व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक प्रवृत्तियों व रोग के विषय में जाना जाता है।




शनि पर्वत के नीचे मस्तक रेखा पर दोष होना | Hast Rekha
शनि पर्वत के नीचे मस्तक रेखा पर दोष होना 
यह दोष विशेषतया व्यक्ति को स्वास्थ्य के विषय में विचारणीय है। इनकी कई अन्य फल भी होते हैं, परन्तु दूसरी रेखाओं के साथ समन्वय करने पर स्वास्थ्य के विषय में इस दोष के चिन्तन का परिणाम बहुत ही ठोस निकलता है। यह एक महत्वपूर्ण लक्षण है तथा जीवन के प्रत्येक पहलू पर प्रभाव डालता हैं। यदि मस्तिष्क रेखा में दोष है तो जीवन की हर घटना पर इसका प्रभाव पड़ता है । 
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शनि की नीचे मस्तिष्क रेखा में दोष होने की साथ, यदि जीवन रेखा के प्रारम्भ अर्थात् बृहस्पति के नीचे दोष हो तो व्यक्ति के कन्धे या आस-पास के भाग में कोई न कोई बीमारी पाई जाती है। यदि जीवन रेखा के बिल्कुल आरम्भ में ही कोई दोष हो तो गले पर इसका प्रभाव पड़ता है। जीवन रेखा के मध्य में दोध होने पर व्यक्ति की पट, भोजन नली, आतें तथा रीढ़ की हड्डी में इसका प्रभाव पड़ता है। जीवन रेखा के उत्तरार्द्ध में इसका प्रभाव व्यक्ति के फेफड़ों, हदय आदि पर पड़ता है, अर्थात् उपरोक्त अंगों में बीमारी पाई जाती है। हाथ में कहीं भी नेष्ट लक्षण होने के साथ यदि मस्तिष्क रेखा में शनि के नीचे दोष हो तो उसके ------- उपरोक्त लक्षणों के आधार पर बताए गए दोषों की पुष्टि की जा सकती है। हृदय रेखा में यदि शनि के नीचे और मस्तिष्क रेखा में शनि के ऊपर कोई दोष होने पर गुर्दा, हर्निया, अपैन्डिक्स, दांत रोग एवं अण्डकोषों में जीमारी पाई जाती है। स्त्रियों में यह लक्षण दांत एवं गर्भाशय विकार का लक्षण है। हृदय रेखा टूटी होने पर यदि मस्तिष्क रेखा में शनि के नीचे दोष हो तो हृदय रोग होता है और शुक्र या चन्द्रमा उठा होने पर मानसिक विकृति हो जाती है। इसी प्रकार स्वास्थ्य की विषय में सोचते समय हमें मस्तिष्क रेखा को दोष का प्रभाव अवश्य रेखा में होने पर उसका फल कई गुना बढ जाता है एवं उस रोग की निश्चितता का अनुमान होता है।

मस्तिष्क रेखा में शनि के नीचे दोष होने पर व्यक्ति का जिगर एवं पैनक्रियाज ग्रन्थियों की कार्यशक्ति कमजोर होती है। इन्हें अधिक बैठकर काम नहीं करना चाहिए तथा अपने जिगर का पूर्ण ध्यान रखना चाहिए, नहीं तो मधुमेह होने की पूर्ण सम्भावना होती है। शनि के नीचे मस्तिष्क रेखा में झुकाव व जीवन रेखा थोड़ी भी सीधी होने पर ऐसा होता है। स्वयं को तथा परिवार में भी किसी को यह रोग पाया जाता है। इसी से रक्त-चाप, जलोदर, जालीदार फोड़ा, पेशाब अधिक तथा गरम आना, शरीर में दर्द, वायु प्रबल होना, पिण्डलियों में दर्द, बेहोशी, आधाशीशी दर्द जैसा कष्ट होता है। ऐसे व्यक्तियों को चिकनाई वाले पदार्थ नहीं पचते, अतः इनसे बचते रहना चाहिए। (नितिन कुमार पामिस्ट)


कोमल हाथों में रोग शीघ्र तथा कठोर हाथ में देर से होते हैं। रोग का कारण व्यक्ति अपने पूर्व कर्म को मानता है और भाग्य को ही इस विषय में दोष देता है। शनि के नीचे मस्तिष्क रेखा से कोई रेखा निकल कर नीचे की ओर जाती हो तो व्यक्ति की ऐडी में दर्द, गुप्तांग में भगन्दर रोग होते हैं। ऐड़ी क दर्द का कारण हड्डी बढ़ना होता है। ऐसे व्यक्तियों को अधिक नमक पसन्द होता है और उसी कारण हड्डी बढ़ जाती है। शनि के नीचे मस्तिष्क रेखा में तिल हो तो व्यक्ति के गुप्तांग में फोड़ा होता है, वैसे ही मस्तिष्क रेखा में कहीं भी तिल हो तो बड़ी आयु में लकवे का लक्षण है। 

स्वी के हाथ में उपरोक्त लक्षण के साथ जीवन रेखा के आरम्भ में दोष होने पर गर्भपात के कारण सन्तान की सम्भावना देर से होती है। यदि जीवन रेखा सीधी भी हो तो प्रजनन कष्टमय होता है। जीवन रेखा अधूरी होने पर तो निश्चित रूप से ऐसा कहा जा सकता है। इस दशा में व्यक्ति का जिगर किसी न किसी रूप में दोष पूर्ण पाया जाता है तथा बहुत सम्भावना होती है कि उसकी मृत्यु जिगर दोष से ही हो, आयु लम्बी हो तो निश्चय ही ऐसा होता है। (नितिन कुमार पामिस्ट)

मस्तिष्क रेखा में शनि के नीचे द्वीप या अन्य दोष होने पर, तथा चन्द्र की ओर एकदम झुकी होने पर एवं शुक्र पर्वत उठा हो तो मस्तिष्क में विकार आ जाता है।




मस्तक रेखा का निकास ( जीवन रेखा से अलग ) | Hast Rekha

मस्तक रेखा का जीवन रेखा से अलग हो कर निकालना 

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इस प्रकार की मस्तिष्क रेखा बृहस्पति पर्वत के नीचे, जीवन रेखा से अलग होकर आरम्भ होती है। इस की दूरी अधिक से अधिक 1/4 इन्च या 1/6 इन्च होती है। इससे अधिक दूर निकली हुई मस्तिष्क रेखा का फल अच्छा नहीं होता। यह जितनी नजदीक से निकली होती है और जीवन रेखा से अलग होती है तो अच्छी मानी जाती है। यदि ऐसी मस्तिष्क रेखा, चतुष्कोण या किसी रेखा से बिना जुड़ी हो तो अति उत्तम होती है ।

जीवन रेखा से बृहस्पति पर जाने वाली शाखा के द्वारा अथवा जीवन रेखा से निकली भाग्य रेखा के द्वारा जुड़ी होने पर दोषपूर्ण नहीं मानी जाती। ऐसी मस्तिष्क रेखा जीवन रेखा के निकास के पास से ही निकलती हो तो यह अतुलनीय होती हैं, परन्तु ऐसा कम ही देखा जाता । (नितिन कुमार पामिस्ट)

ये व्यक्ति स्वतन्त्र विचारों के, बुद्धिमान, शीघ्र विश्वास करने वाले व आरम्भ में शीघ्र घबराने वाले होते हैं। मध्यायु के पश्चात् घबराने का दोष इनमें नहीं रहता। इस लक्षण के साथ उगलियों की लम्बाई भी अधिक हो तो विश्वास की मात्रा बढ़ जाती है, जोकि भाग्योदय में रुकावट बन कर सामने आती हैं। वदि भाग्य रेखा, मस्तिष्क रेखा पर रुकी हो तो ऐसे व्यक्ति कई बार घोखा खाते हैं। ये शर्मातु. अधिक एहसान मानने व लिहाज करने वाले होते** और स्पष्ट रूप से किसी बात को नहीं कहते। किसी को उधार देकर मांगते नहीं, जिन पर विश्वास करते हैं, उसे परिवार का सदस्य मान लेते हैं। अत: ये जब भी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर करते हैं, हानि उठाते हैं। ऐसे व्यक्तियों को 35 वर्ष की आयु तक साझे में व्यापार नहीं करना चाहिए और यदि परिस्थितिवश करना भी पड़े तो दूसरे साझियों के साथ सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए अन्यथा लाभ के बदले हानि ही हाथ लगेगी।

 ऐसे हाथों में यदि रेखाएं कम हों या हाथ कौणिक अर्थात उंगलियां अंगूठे की ओर झुकी हुई हों तो जल्दबाज होते हैं। फलस्वरूप सावधानी से कार्य न करने की कारण हानि उठाते हैं परन्तु स्थायित्व प्राप्त करने के पश्चात ये पूर्ण आत्म विश्वासी सिद्ध होते हैं। ऐसी स्त्रियां स्पष्ट वक्ता, हिम्मतवाली, व निडर होती हैं। यदि भाग्य रेखा हृदय रेखा पर रुकी हो व उंगलियां लम्बी हो तो दूसरे के प्रभाव में शीघ्र आती हैं। यदि कोई व्यक्ति थोड़ी भी सहानुभूति से बात करे तो उस पर पूर्ण विश्वास कर लेती हैं। (नितिन कुमार पामिस्ट)

 ऐसे व्यक्ति चरित्र में विश्वास करते हैं, अपने मन में दूसरे का प्रभाव होने पर भी इन्हें चरित्र-दोष नहीं होता। इनक अच्छे मित्र होते हैं व यथासम्भव मित्रता निभाते हैं, किसी से बदला लेने की भावना नहीं होती। यदि विशेष रूप से स्त्रियों के हाथ में जीवन रेखा में दोष हो तो थोड़ी-सी बात में बुरी तरह घबरा जाती हैं, जैसे पति का रात देर से घर आना या कोई समाचार अचानक सुनना आदि। मस्तिष्क रेखा, जीवन रेखा से अलग होकर निकले तो व्यक्ति बचपन में अधिक बीमार होते हैं व जलने से या ऊपर से गिर कर बच जाना इत्यादि घटनाएं होती हैं। यदि जीवन रेखा में विशेष दोष हो तो बचपन में निमोनिया, पाचन शक्ति च जिगर खराब रहता है तथा उपरोक्त रोगों के कारण कई बार बहुत अधिक बीमार हो जाते हैं। 

मस्तिष्क रेखा गोलाकार हो तो निमोनिया कई बार होता है। ऐसे बच्चे शरारती एवं प्रखर बुद्धि वाले होते हैं। मस्तिष्क रेखा द्विभाजित होने पर होशियार एव उत्तम विद्यार्थी सिद्ध होते हैं। यह मस्तिष्क रेखा मंगल पर या उसकी ओर जाए तो इनकी छाती पर तिल होता है। 

यह इनकी किसी योग्य सन्तानक होने का लक्षण है। ऐसे व्यक्ति नौकरी अवश्य करते हैं। कर्ज नहीं ले सकते, क्योंकि इससे इनके मस्तिष्क में तनाव रहता हैं। साझे में काम भी इन्हें अच्छा नहीं लगता। 

ऐसा देखा जाता है कि कुछ रोग जैसे दमा, हृदय रोग आदि एक पीढ़ी से दूसरी पीड़ी में चलते जाते हैं। यदि मस्तिष्क रेखा जीवन रेखा से अलग हो तो स्वयं को ऐसे रोग होने पर भी सन्तान की ये रोग नहीं लगते। ऐसे व्यक्ति की मस्तिष्क रेखा द्विभाजित हो तो जैसे-जैसे चिन्ता करते हैं, भारी होते जाते हैं और सफलता मिलती जाती है। काम करने में चतुर होते हैं। उंगलियां जितनी पतली होती हैं, यह सफलता व बुद्धिमत्ता का लक्षण होता है। जीवन रेखा गोलाकार होने पर ऐसे व्यक्ति यथा शक्ति अपने प्रभाव से व धन से दूसरों की सहायता करते देखे जाते हैं। इस लक्षण के साथ मस्तिष्क रेखा मोटी-पतली होने पर अधिक सोने वाले होते हैं। खाना खाने के बाद आलस्य आता है, हाथ कोमल हो तो आलसी होने के कारण अधिक सोने की आदत होती है। 

मस्तिष्क रेखा जीवन रेखा से अधिक दूर होकर निकली हो अर्थात इसकी दूरी जीवन रेखा से 34 इन्व या उससे अधिक हो तो यह व्यक्ति में अति आत्मविश्वास, जिसे हम पमण्ड कहते हैं, पैदा करती है। ऐसे व्यक्ति लापरवाह होते हैं, अपने जीवन निर्माण की भी चिन्ता नहीं करते। ये स्वछन्द विचारों की होते हैं व किसी की परवाह न करना, बात काटने पर निरादर कर देना, इनके लिए कोई विशेष बात नहीं होती। शनि की उंगली लम्बी या शनि उन्नत हो तो व्यक्ति एकान्त पसन्द होता है, भाग्य रेखा भी शनि पर हो तो झगड़ा तथा विरोध पसन्द नहीं होता। ऐसे व्यक्ति विरोधियों से दूर जाकर खुले में मकान बनाकर रहते हैं। परवाह कम करने से ऐसे पति-पत्नी में मनोमालिन्य बना रहता है, वे न तो एक-दूसरे का पक्ष ले सकते हैं और न तारीफ ही कर सकते हैं, फलस्वरूप अनायास ही विरोध रहता है। इनकी स्पष्टवादिता या कटुवाकशक्ति नौकरी में भी झगड़े का कारण बनती है। इनका गला सूखता है व नोंद कम आती है। स्वी के हाथ में यह लक्षण होने पर इन्हें शादी के बाद परेशानी होती है। ऐसे व्यक्तियों में आत्मविश्वास देर से पैदा होता है। यदि शुक्र भी उन्नत हो तो जीवन में सफलता भी देर से मिलती है।




मस्तक रेखा का जीवन रेखा से निकालना | Hast Rekha

मस्तक रेखा का निकास जीवन रेखा से जुड़ा हुआ होना 


इस लक्षण में, मस्तिष्क व जीवन रेखा आपस में अधिक दूर तक जुड़ी अर्थात् सम्मिलित या उलझी हुई नहीं होनी चाहिए। अधिक दूरी की परिभाषा हम लगभग डेढ़ इंच में करते हैं। डेढ़ इंच जुड़ी होने पर मस्तिष्क रेखा जीवन से अलग होती हो तो इसका फल दोषपूर्ण होता है, जबकि जीवन रेखा से मस्तिष्क रेखा का विना अधिक जोड़ के निकास गुणकारी है। इस प्रकार की मस्तिष्क रेखा केवल छूकर जीवन रेखा से निकलती है ।

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 ऐसे व्यक्ति समझदार, प्रत्येक कार्य को सोच-समझकर करने वाले, जिम्मेदार तथा क्रियात्मक होते हैं और शीघ्र निर्णय लेते हैं। उपरोक्त लक्षण अधिक रेखा वाले हाथों में हो तो विचार करने व उसे क्रियान्वित  करने में कुछ समय अवश्य लतते है परन्तु क्रियतमक हाथ में सदैव ही शीघ्र निर्णय कर लिए जाते हैं। अधिक रेखा वाले व्यक्ति भी एक से अधिक भाग्य रेखा, अगूंठा ब उँगलियां पतली व छोटी, दोनों और द्विजिव्हाकार मस्तिष्क रेखा होने पर शीघ्र न ठीक निर्णय लेने वाले होते हैं। ये स्वतन्त्र निर्णय लेने वाले व उत्तरदायित्व निभाने वाले होते हैं। फलस्वरूप ऐसे व्यक्ति जीवन - में प्रगति करते हैं।  ( नितिन कुमार पामिस्ट )

स्त्रियों के हाथ में यह लक्षण होने पर तथा हाथ भी कोमल हो तो प्रत्येक दूसरे वर्ष में सन्तान हो जाती है। जीवन और मस्तिष्क रेखा दोष रहित हो तो पति-पत्नी का आपस में बहुत प्रेम रहता है, हृदय रेखा भी निर्दोष या दोहरी हो तो साथी के जरा भी रुखा बोलने पर इन्हें बहुत दु:ख होता है। अन्त तक इनकं सम्बन्ध मधुर बने रहते हैं और जीवन सुखी रहता है। एक दूसरे का विछोह इन्हें किसी भी मूल्य धर सहन नहीं होता। 

इस प्रकार से छूकर निकलने वाली मस्तिष्क रेखा सीधी मंगल की ओर जाती हो, राधा जीवन रेखा गोलाकार व भाग्य रेखा पतनी हो या हाथ भारी हो तो व्यक्ति अतुल सम्पति पैदा करता है और अपने वंश में नए साधनों के द्वारा ऐश्वर्य और प्रतिभा उत्पन्न करता है। ( नितिन कुमार पामिस्ट )

ऐसी मस्तिष्क रेखा जो चन्द्रमा की ओर जाए एवं जीवन रेखा गोलाकार हो, हाथ चौडा, भारी हो, छोटा व सुन्दर हो तो ऐसे व्यक्ति अत्यन्त व्यवहार कुशल होते हैं। इनके धन व सम्मान में वृद्धि होती रहती है। अभिवृद्धि को प्राप्त होते हैं। ऐसे व्यक्ति महामानव होते हैं, हृदय रेखा सुन्दर होकर शनि के नीचे पूर्ण होती हो अथवा बृहस्पति को छ्ती हो तो देवतुल्य सम्मान प्राप्त करते हैं व बहुचर्चित होते हैं। केवल छूकर निकली हुई मस्तिष्क रेरज्ञा बुध या सूर्य की ओर जाती हो और जीवन रेखा भी गोलाकार हो तो ऐसे व्यक्ति लेखन अथवा सम्पक स्थापित करने में चमत्कारिक सफलता प्राप्त करते हैं।




मस्तिष्क रेखा में सूर्य के नीचे द्वीप | Hast Rekha

मस्तिष्क रेखा में सूर्य के नीचे द्वीप

sun mount island palmistry

यह द्वीप मस्तिष्क रेखा में सूर्य की उंगली के नीचे पाया जाता है। यह व्यक्ति की आंख में रोग का लक्षण है। यदि हृदय रेखा में भी सूर्य की उंगली के नीचे कोई द्वीप हो या वहां बाहर से कोई रेखा आकर हदय रेखा को छूती हो तो निश्चित ही आंखों में दोष हो जाता है। यह द्वीप यदि गोलाकार अर्थात् वृत्त के आकार का हो तो व्यक्ति अन्धा हो जाता है।

ऐसे व्यक्ति की आंख में बाहर से आकर कोई चीज लगती है। सूर्य व शनि की उंगली के बीच मस्तिष्क रेखा में बड़ा द्वीप हो तो इस आयु में व्यक्ति के मस्तिष्क पर बड़ा भार पड़ता है या तो ये उदासीन हो जाते हैं या पागल अन्यथा मस्तिष्क में रसौली या खून का जमाव होकर लकवा हो जाता है। यह देखने की बात है कि द्वीप के दोनों ओर की रेखाएं मस्तिष्क रेखा जैसी या मौलिक मोटाई से कुछ कम मोटी होनी चाहिए। (नितिन पामिस्ट )




जज (न्यायाधीश) का हाथ - हस्तरेखा
sign of judge advocate

जज (न्यायाधीश) का हाथ- जिसके हाथ की अंगुलियाँलंबी व कोणदार हो और हृदय व मस्तिष्क केि रेखा के मध्यम भाग में चतुष्कोण होवे। बुध की अंगुली की प्रथम पौरलम्बी हो और गुरू की अंगुलीसीधी हो, सूर्यका पर्वतउतम उठाहुआ होदह मनुष्यकुशल, सार्थक, दयावान, न्यायाधीश तथा न्याय नीति का अच्छा ज्ञाता होता हैं।





डमरू (Damaru/Petllet Drum/Two Headed Drum) In Palmistry

palmistry damru


डमरू

यह मस्तिष्क व हृदय रेखा के बीच में एक बड़ा गुणा का निशान होता है, जो बड़े अफसरों, ज्योतिषियों, अध्यात्मिक गुण सम्पन्न व्यक्तियों या किसी संस्था के पदाधिकारियों के हाथों में पाया जाता है। ऐसे व्यक्ति धनी व प्रतिष्ठित होते हैं। दोषपूर्ण होने पर यह भीख मांगने का लक्षण है। यदि यह चिन्ह दोनों आोर रेखाओं से न मिला अर्थात् स्वतन्त्र हो तो ऐसे व्यक्ति मन्त्रशक्ति था ज्योतिष विद्या में ख्याति प्राप्त करते हैं और इस विद्या के माध्यम से विपुल धन भी अर्जित करते हैं। इसका विशेष फल उसी दशा में होता है, जबकि इसकी स्थिति ठीक शनि के नीचे हो, नहीं तो कवल घुटनों में चोट आदि का भय रहता है।





सूर्य मुद्रिका ( Surya Mudrika ) | Hast Rekha
सूर्य मुद्रिका

यह मुद्रिका धार्मिक प्रवृत्ति, साहित्यिक एवं व्यक्तिगत प्रतिभा का लक्षण है। सूर्य रेखा भी हाथ में होने पर यह अधिक उत्तम फल प्रदान करती है। दो सूर्य रेखाएं होने पर ऐसे व्यक्ति अत्यन्त प्रतिभाशाली और सतोगुणी देवता की उपासता करने वाले, प्रेमी व धार्मिक विचारों के होते हैं।


surya mudrika jyotish
बुध या सूर्य के नीचे हृदय रेखा में द्वीप या अन्य दोष होने पर सूर्य मुद्रिका भी दोषपूर्ण हो तो व्यक्ति चाहे अन्धे ही क्यों न हों, अति प्रतिभाशाली होते हैं। सूर्य मुद्रिका टूटी व उंगलियों के पास होने पर इसके फलों में कमी देखी जाती है। अन्यथा यह हाथ में उत्तम लक्षण है।




Indications of Sharp And Weak Memory on Hand


Sharp Memory

a) The Head line terminates on the percussion with a good line of Mercury.
b) The Head line is straight and clear.
c) The line of Hepatica is short and fine.
d) The index finger and the little finger are both conical.
e) A strong thumb with a good single Sun line or a double Head line.

Weak Memory

a) Broken head line. 
b) The line of Liver is wavy. 
c) The first phalange of the thumb is bendable. 
d) The Head line and the Life line are mixed under Jupiter to a little distance . 
e) The line of Mars starts from the point of the Life line. 

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Marriage Line Touching Heart & Brain Line After Being Punctured By Other Lines (Mental Tension & Lunacy Caused By Marriage) - Palm Reading

Marriage line crossed head line and heart line

If marriage-line is transversed/intersected or punctured by a vertical line, and its one branch or a suddenly emerging line intersects brain-line or heart-line and also if a sign of star or an island also touches this line, then it should be taken for granted that marital life will be like hell and also replete with miseries, tribulations and troubles. 

This factor can also become a contributory factor in causing mental festivity and trouble to the native(s) (see fig. 344) Similarly the said chance-line can also vitiate and adversely impact other mounts and sites too. If this line touches the lifeline, then marital problems and hurdles will adversely cast damaging effect upon native's health, and ultimately it might cause danger to his/her life even. Hence, it is essential that this line and its various impacts should be thoroughly studied before any prediction is made. 

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Triangle (Trikon/Tribhuj) On Mount of Mercury Indian Palmistry
triangle on mount of mercury

Triangle On Mount Of Mercury

It is a good sign which adds to the diplomacy and cleverness of a Mercurian. It shows a great orator who keeps his audience off their feet.

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Nitin Kumar




Triangle On Head Line Under Mount Of Mercury Palmistry
Triangle On Head Line Under Mount Of Mercury Palmistry
Triangle On Head Line Underneath Little Finger

If there is a triangle underneath Mount of Mercury on Head Line then it indicates subject will get success in science, good business skill and research field. 

Triangle is always favorable if it found in the palms.  The triangle can refer to intellectual success or material gain.  An independently formed triangle is the best formation.  But even a triangle formed by a crossing of lines will show favorable effects to an appreciable degree.

The clearer and better formed the triangle, the greater the benefits.

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Marriage Line & Disease Palmistry


1. If there is an island on end of the Marriage Line and the island touches the Heart Line then it indicates that person if male will suffer from venereal diseases and if female will suffer from gynec problems.

2. If Marriage Line is cut by Influence Line from Mount of Venus then it indicates menstrual problems.

3. If there is a Grille on Life Line outside on Mount of Rahu then it indicates abortion or miscarriage.


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Fingers and Disease Indian Palmistry

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Fingers and Disease Palmistry


The index finger has relations with the lungs, throat, spleen and gallbladder. Any deformity or abnormal development  of index finger positively indicates troubles of these organs.


The abnormal middle finger indicates diseases of abdomen and organic defects of liver.


The weak ring finger denotes faulty action of kidneys.


The malformed little finger indicates troubles of gonads, ovaries and uterus particularly when the third phalange is abnormal.

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Nitin Kumar





Signs of Widowhood on Hand Palmistry



SIGNS OF WIDOWHOOD ON HAND



1. If there is a cross or star on the Influence Line rising from Life Line and running close to the Mount Of Venus then it indicates widowhood.

2. The Marriage Line drops down to the Heart Line and there is a cross in the end of dropping Marriage Line or a black spot on the Marriage Line indicates widowhood.

3. Branch of Heart Line cutting Fate Line meets the Head Line indicates loss of partner.

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St. Andrews Cross Palmistry
StAndrew's cross

As you know, cross is an inauspicious sign but gives good results on Mount of Jupiter and as St. Andrew's cross.

StAndrew's crossThe StAndrew's cross. A cross at the bottom of the life line which touches both it and the fate line is called the StAndrew's cross. StAndrew's cross is found on the hands of people who have saved the life of others.





Madhuri Dixit Palm Image Palmistry

Madhuri Dixit (born 15 May 1967), also known by her married name Madhuri Dixit Nene, is an Indian actress who is known for her work in Hindi cinema. Dixit has been praised by critics for her acting and dancing skills. She has received six Filmfare Awards, four for Best Actress, one for Best Supporting Actress and one special award. She has been nominated for the Filmfare Award for Best Actress a record fourteen times. She was awarded the Padma Shri, India's fourth-highest civilian award, by the Government of Indiain 2008.


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Bharat Sagar Jain Spiritual Leader Palm Image Palmistry
Jain Spiritual Leader





मस्तक रेखा ज्ञान हस्तरेखा

मस्तक रेखा
आप जब भी मस्तिस्क रेखा से फलादेश करे तो यह अतिआवश्यक है की आप दोनों हाथो की मस्तक रेखा को देखकर ही फलादेश करे।  यहाँ बताये गए मस्तक रेखा के सभी योग से फलादेश करते समय इस नियम का पालन करे फिर ही फलादेश करे।

मस्तक की रेखा

1. यदि हाथ में छोटी मस्तक रेखा हो तो उसका मतलब कम उम्र या यह नहीं की व्यक्ति के पास दिमाग नहीं है या फिर कोई मानसिक विकृति है। मंदबुधि लोगो के हाथ में भी मस्तक रेखा निर्दोष और बड़ी होती है। छोटी मस्तक रेखा वाला व्यक्ति भी जीवन में अपने मस्तिष्क के बल पर सभी उच्चाई प्राप्त कर सकता है ! मस्तक रेखा से व्यक्ति की सोच व कार्यशैली का अनुमान लगाया जाता है।

2. मस्तक रेखा ज्यादातर लोगो के हाथो में जीवन रेखा के साथ जुड़कर ही प्रारंभ होती है लेकिन कई लोगो के हाथो में अलग से कुछ दूरी बना कर भी प्रारंभ होती है।

3. मस्तक रेखा यदि जीवन रेखा के साथ मिलकर प्रारंभ होती है तो उसका अर्थ होता है ऐसा व्यक्ति किसी भी कार्य को बहुत सोच समझ कर करता है ! ऐसा व्यक्ति हमेशा सतर्क रहता है। ऐसा व्यक्ति व्यर्थ की चिंता बहुत करता है।

4. मस्तक रेखा यदि जीवन रेखा के अन्दर से अर्थार्थ निम्न मंगल पर्वत से जीवन रेखा को काटते हुए निकले तो ऐसे व्यक्ति का स्वाभाव झगडालू व ईर्ष्यालु होता है।  ऐसे व्यक्ति को बचपन में सर पर चोट लगने की सम्भावना रहती है।

5. मस्तक रेखा यदि जीवन रेखा के साथ मिलकर हथेली के मध्य तक जाती है तो ऐसा व्यक्ति हमेशा कार्य को कल पर टालने वाला होता है ! ऐसे व्यक्ति का मन अस्थिर होता है।  ऐसे लोग स्वाभाव से शर्मीले, अंतर्मुखी व एकांतप्रिय होते है ! ऐसे व्यक्ति दिल के कमज़ोर होते है।  ऐसे व्यक्ति को आँख, नाक और कान से संभंधित बीमारी होने की सम्भावना ज्यादा रहती है।

6. यदि मस्तक रेखा गुरु पर्वत से प्रारंभ होती है तो ऐसा व्यक्ति बहुत महत्वकांक्षी होता है।  ऐसे व्यक्ति न्यायप्रिय होते है व जल्दबाज होते है।

7. यदि मस्तक रेखा और जीवन रेखा के बीच अंतर ज्यादा होता है तो ऐसे व्यक्ति की विचारधारा स्वतंत्र होती है।  ऐसे व्यक्ति की बहुत कम लोगो से ही बन पाती है।  ऐसे व्यक्ति का स्वभाव बहुत जिद्धि और लापरवाह होता है।  ऐसे व्यक्ति किसी भी व्यक्ति के दवाब में रहना पसंद नहीं करते।

8. यदि मस्तक रेखा से निकल कर कोई शाखा गुरु पर्वत पर जाती है तो ऐसे व्यक्ति कला-साहित्य में रुचि रखते है।  ऐसे व्यक्ति अहंकारी होते है।

9. मस्तक रेखा यदि गुरु पर्वत के नीच खंडित हो तो व्यक्ति को उच्चाई से गिर कर चोट लगने का खतरा रहता है।  गुरु पर्वत से संभंधित बीमारी व तकलीफ होने की सम्भावना रहती है।

10. यदि मस्तक रेखा शनि पर्वत के नीचे खंडित हो तो व्यक्ति को किसी धारदार वस्तु या हथियार से सर में चोट लगने का खतरा रहता है वह शनि पर्वत से संभंधित बीमारी व तकलीफ होने की सम्भावना रहती है।

11. यदि मस्तक रेखा सूर्य पर्वत के नीचे खंडित हो तो व्यक्ति को अक्स्मात चोट लगने व ज्यादा अवसाद के चलते मस्तक में रक्त का दवाब बढ़ जाने के कारण से मस्तक की नस का फट जाना।  वह सूर्य पर्वत से संभंधित बीमारी व तकलीफ होने की सम्भावना रहती है।

12. यदि मस्तक रेखा बुध पर्वत के नीचे खंडित हो तो व्यक्ति को व्यपारिक व पारिवारिक अवसाद का सामना करना पड़ता है। वह बुध पर्वत से संभंधित बीमारी व तकलीफ होने की सम्भावना रहती है।

13. यदि मस्तक रेखा बुध पर्वत की और मुड जाय तो ऐसा व्यक्ति विज्ञान और खोज कार्यो में रुचि लेता है।

14. यदि मस्तक रेखा सूर्य पर्वत की और मुड जाय तो ऐसा व्यक्ति कला और साहित्य में रुचि लेता है।

15. यदि मस्तक रेखा लहरदार, द्वीपयुक्त व जंजीरदार हो तो ऐसे व्यक्ति को सर सम्बंधित रोग होता है व ऐसा व्यक्ति अस्थिर विचारधारा वाला होता है व सदैव चिंतित रहता है।

16. यदि मस्तक रेखा और हृदय रेखा आपस में बहुत पास - पास हो तो दमा और मस्तिस्क-ज्वर होने की सम्भावना रहती है।

17. मस्तक रेखा अगर चन्द्र पर्वत पर चली जाय तो व्यक्ति की विचारधारा कल्पनाशील होती है।

18. यदि हाथ में दोहरी मस्तक रेखा हो उसका अर्थ ये नहीं की व्यक्ति के पास दो मस्तक होंगे लेकिन ऐसा व्यक्ति हमेशा दुविधा में रहता है।

19. यदि मस्तक रेखा पुष्ट व लम्बी हो जो हथेली को सीधे पार करती हुई हो तो ऐसे व्यक्ति की याददास्त बहुत तेज होती है !


-नितिन कुमार
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Swami Vivekanand Palmistry - Hast Rekha



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 स्वामी विवेकानन्द- Spiritual Leader 
स्वामी विवेकानन्द ( बांग्ला: স্বামী বিবেকানন্দ) (जन्म: १२ जनवरी,१८६३ - मृत्यु: ४ जुलाई,१९०२) वेदान्त के विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु थे। उनका वास्तविक नाम नरेन्द्र नाथ दत्त था। उन्होंने अमेरिका स्थित शिकागो में सन् १८९३ में आयोजित विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व किया था। भारत का आध्यात्मिकता से परिपूर्ण वेदान्त दर्शन अमेरिका और यूरोप के हर एक देश में स्वामी विवेकानन्द की वक्तृता के कारण ही पहुँचा। उन्होंने रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी अपना काम कर रहा है। वे रामकृष्ण परमहंस के सुयोग्य शिष्य थे। उन्हें प्रमुख रूप से उनके भाषण की शुरुआत "मेरे अमरीकी भाइयो एवं बहनों" के साथ करने के लिये जाना जाता है।  उनके संबोधन के इस प्रथम वाक्य ने सबका दिल जीत लिया था।

कलकत्ता के एक कुलीन बंगाली परिवार में जन्मे विवेकानंद आध्यात्मिकता की ओर झुके हुए थे। वे अपने गुरु रामकृष्ण देव से काफी प्रभावित थे जिनसे उन्होंने सीखा कि सारे जीव स्वयं परमात्मा का ही एक अवतार हैं; इसलिए मानव जाति की सेवा द्वारा परमात्मा की भी सेवा की जा सकती है। रामकृष्ण की मृत्यु के बाद विवेकानंद ने बड़े पैमाने पर भारतीय उपमहाद्वीप का दौरा किया और ब्रिटिश भारत में मौजूदा स्थितियों का पहले हाथ ज्ञान हासिल किया। बाद में विश्व धर्म संसद 1893 में भारत का प्रतिनिधित्व करने, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए कूच की। विवेकानंद के संयुक्त राज्य अमेरिका, इंग्लैंड और यूरोप में हिंदू दर्शन के सिद्धांतों का प्रसार किया , सैकड़ों सार्वजनिक और निजी व्याख्यानों का आयोजन किया। भारत में, विवेकानंद को एक देशभक्त संत के रूप में माना जाता है और इनके जन्मदिन को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।




लाल किताब में राहु का प्रत्येक भाव के लिए उपाय (Lal Kitab Remedies for Rahu in each house)


आमतौर पर वैदिक ज्योतिष में जब ग्रह कमजोर या अशुभ स्थिति (Debilitated and inaspicious position of planets) मे़ होता है तो उसका उपाय किया जाता है.

परन्तु लाल किताब के अनुसार ग्रह चाहे शुभ स्थिति में हो या अशुभ उसका उपाय करने से जहाँ उसके फल में स्थायित्व रहता (Result intact in Lal Kitab) हेंवही दूसरी तरफ अशुभ ग्रह का उपाय करने से उसके दूष्प्रभाव की शान्ति होती हैइस लेख के माध्यम से राहु ग्रह के प्रत्येक भाव मेँ स्थित होनेपर उसके उपाय की जानकारी दी गई हैप्रत्येक व्यक्ति जिनका राहु जिस-भाव में स्थित है वह यहाँ दी गई सूची के आधार पर उपाय कर सकता है.

प्रथम भाव में स्थित राहु के उपाय (Remedies of in Rahu first house)

1) गले में चाँदी धारण करें.

2) जौ दूध में धोकर जल में प्रवाहित करें.

3) रात में सिरहाने सौंफ रखकर सोएं.

4) गूड़ गेहुं ताम्बे का दान करें.

द्वितीय भाव में स्थित राहु के उपाय (Remedies of Rahu in second house

1) ठोस चांदी अपने पास रखें.

2) दो किलो सिक्के के टुकडे चलते पानी में डालें.

3) चाँदी की गोली गले में पहनें.

4) घर में मन्दिर की स्थापना न करें.

तृ्तीय भाव में स्थित राहु के उपाय (Remedies of Rahu in third house)

1) हाथी का खिलौना घर में न रखें.

2) हाती दाँन्त घर में न रखें.

चतुर्थ भाव में स्थित राहु के उपाय (Remedies of Rahu in fourth house

1) गंगा जल से स्नान करें.

2) चाँदी के चार गोली सफेद कपडा में बाँधकर अपने पास रखें.

3) जौ में जौ से चार गुना दूध मिलाकर जल में प्रवाहित करें.

4) माता की सेवा करें.

पंचम भाव में स्थित राहु के उपाय (Remedies of Rahu in fifth house) 

1) हाथी दाँत घर में न रखें.

2) चाँदी का हाथी चाँदी की कटोरी में जल डालकर रखें.

3) भोजन रसोई घर में ही करें.

4) अपनी पत्नी से दुबारा शादी करें.

5) कीकर की दातुन करें.

6) मीठी वाणी बोले.

छटे भाव में स्थित राहु के उपाय (Remedies of Rahu in sixth house)

1) काले रंग का कुत्ता पालें.

2) भाई को अपनी साथ रखें.

3) सिक्के की गोली अपने पास रखें.

4) शराब, अण्डा, मांस से परहेज करें.

सप्तम भाव में स्थित राहु के उपाय (Remedies of Rahu in seventh house

1) चांदी का चौकर टुकडा़ अपनी जेब में रखें.

2) कुत्ता पालें.

3) किसी के साथ भी साझेदारी न करें.

4) चार बोतल शराव खोलकर चलती पानी में डालें.

5) अपने वजन के बराबर जौ दूध में धोकर चलते पानी में डालें.

अष्टम भाव में स्थित राहु के उपाय (Remedies of Rahu in eighth house)


1) चाँदी का चौकोर टुकडा़ अपने पास रखें.

2) रात को सिरहाने सौफ , देसी खाण्ड रखें.

3) बेईमानी और गलत कामो से दूर रहें.

4) बिजली के सामान का कारबार न करें.

5) जल में सिक्का प्रवाहित करें.

6) मन्दिर में बादाम चढाकर आधे घर में रखें, बाद में उसे बहते पानी में प्रवाहित करें.

नवम भाव में स्थित राहु के उपाय (Remedies of Rahu ninth house)


1) पिता के साथ रहें व उनकी सेवा करें.

2) ईमानदारि की कमाई खाएं

3) कुत्ता पाले.

4) ससुराल से अच्छे सम्बन्ध रखें.

5) नीले व काले रंग का कपडा न दे.

6) बिजली का सामान मुफ्त न लें.

7) धर्म - कर्म करते रहें.

दशम भाव में स्थित राहु के उपाय (Remedies of Rahu in tenth house)

1) सिर ढककर रखें.

2) शराव, अण्डा, मांस सेवन न करें.]

3) रात को दूध न पीये.

4) अन्धों को अपने हाथ से भोजन खिलाएं.

एकादश भाव में स्थित राहु के उपाय (Remedies of Rahu in eleventh house)

1) शराव, अण्डा, मांस से परहेज रहें.

2) पिता की सेवा करें व उनके साथ रहें.

3) सोना अपने पास रखें.

4) जौ, सिक्का, नारियल बहते पानी में प्रवाहित करें.

5) गरीबो को पैसा दान में देते रहें.

6) निले रंग का कपडा़ ना पहने ना अपना पास रखें

7) लोहे का कडा, छल्ला या चेन पहनें.

8) मन्दिर में प्रतिदिन जाया करें.

द्वादश भाव में स्थित राहू के उपाय (Remedies of Rahu in twelveth house)

1) नशीली वस्तुओं का सेवन न करें.

2) रात में सिरहाने खाण्ड या सौफ रखकर सोएं.

3) रसोई घर ही भी खाना खाएं.

इस प्रकार लाल किताब के अनुसार राहु के उपाय (Remedies of Rahu in Lal Kitab) करने से तुरन्त लाभ मिलता हैं

नोट 

1) एक समय में केवल एक ही उपाय करें.

2) उपाय कम से कम 40 दिन और अधिक से अधिक 43 दिनो तक करें.

3) उपाय में नागा ना करें यदि किसी करणवश नागा हो तो फिर से प्रारम्भ करें.

4) उपाय सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक करें.

5) उपाय खून का रिश्तेदार ( भाईपितापुत्र इत्यादिभी कर सकता है.

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Indian Palmistry Blog - Brief summery of Indian Palmistry (Hindi name of lines and signs)- Pradhan Rekhae Aur Unke Naam (Main Lines) - 1. Jeevan Rekha (Line of Life) 2. Mastisk Rekha (Line of Head) 3. Hridya Rekha (Line of Heart) 4. Surya Rekha (Line of Sun) 5. Bhagya Rekha (Line of Fate) 6. Swastaya Rekha (Line of Health) - Gaun Rekahe Aur Unke Naam (Secondary Lines) - 1. Mangal Rekha (Line of Mars) 2. Vasana Rekha/Suman (Line of Via Lascivia) 3. Vivah Rekha (Line of Marriage) 4. Atinindhriya Rekha/Chandra Rekha (Line of Intution) 5. Putra-Putri Rekhae/Santan Rekhae (Line of Sons and Daughters) 6. Bhai-bahan Rekha (Line of brothers and sisters) 7. Mitra Rekhae (Line of Friends) 8. Bandhav Rekhae (Lines of Relatives) 9. Yatra Rekahe (Lines of Travels) 10. Manibhandh Rakhae (Lines of Bracelates)(Nitin Kumar Palmist) 11. Diksha Rekha/Guru mudrika/Bhrihaspati chandrika (Ring of Soloman) 12. Shani Chandrika (Ring of Saturn) 13. Surya Chandrika (Ring of Sun) 14. Budh Chandrika (Ring of Mercury) 15. Shukra Mekhela (Girdle of Venus) 16. Vidhya Rekhae (Line of education) 17. Nikrist Rekahe (Worst Lines) 18. Prabhavik Line (Line of Influence) 19. Rahu Rekha (Line of Worry) 20. Aadi Rekhae (Vertical lines) 21. Khadi Rekhae (Horizontal lines) 22. Sahayak Rekha (Supporting Line) 23. Urdho Rekhae (All the lines ascend towards the fingers) 24. Kapi Rekha (Triangle in the end of the Life, Head, Heart, Sun and Fate Lines) 25. Sarpa Rekha (Wavy Line) 26. Kuthara Rekha (Sword like sign) 27. Machhli/Macchli Rekha (Fish tail/Fish Sign/Fish Line) 28. Khandhit Rekha (Split Line) 29. Yavmala (Chained line) 30. Gopuch Rekha (Cow tail) 31. Dweeshakayukt Rekha (Forked Line) 32. Janjirdaar Rekha (Crossed line) 33. Siddidaar Rekha (Ladder type line) 34. Kamsutra Rekha/Kamshakti Rekha (Lust Line) - Haath Pr Chinha Aur Unke Naam - 1. Gunaak Chinha(Cross Sign) 2. Nakhastra/Tara Chinha(Star Sign) 3. Trikon Chinha (Trangle Sign) 4. Varg/Chatuskaun Chinha (Square Sign) 5. Dweep Chinha (Island Sign) 6. Macchli/Matsya Chinha (Fish Sign) 7. Jaal Chinha (Grill Sign) 8. Magarmacch Chinha (Crocodile Sign) 9. Shankh Chinha (Conch Sign) 10. Khstara/Dandh/Dhvaja/Chanwar/Pataka Chinha (Flag Sign) 11. Sinhasan Chinha(Throne Sign ) 12. Dhanush Chinha (Bow Sign) 13. Kamal Chinha (Lotus Sign) 14. Parvat Chinha (Rock Sign) 15. Bhala Chinha (Spear Sign) 16. Talwar Chinha (Sword Sign) 17. Mayur Chinha (Peacock Sign) 18. Ghada Chinha (Pot Sign) 19. Darpan Chinha (Mirror Sign) 20. Trishul Chinha (Trident Sign) 21. Ped Chinha (Tree Sign) 22. Mandir Chinha (Temple Sign) 23. Swastik Chinha

Indian Palm Reading Blog (Palmistry Blog/Website) - You can learn about Lines on Hand : Marriage Line, Fate Line, Sun Line, Life Line, Heart Line, Head Line. Signs on Hand : Girdle of Venus, Trident, Trishul, Fish sign, Temple Sign, Rajyog, Triangle, Square, Island, Mole, Til, Cross and Flag Sign. You can learn Vedic or Hindu Palmistry, Hastrekha, Hast Rekha, Hastrekha Shastra, Hastrekha Gyan in this Astrology-Palmistry Blog. Free Palm Reading articles available in both English and Hindi. Also Vashikaran Totke and Mantra or Lal Kitab Totke and Upay available in both English and Hindi. Try and Tested Totke for any problem like "Apne Pyar Ko Pane Ka Totka" , "Naukari Pane Ka Mantra" , etc.