Thursday, February 8, 2018

Hath Ki Rekha Ka Bhavishya In Hindi

            हस्त रेखा का स्वरूप 

सबसे पहले हमें यह बात अच्छी तरह जान लेनी चाहिए कि विभिन्न प्रकार के हाथों पर पाई जाने वाली विभिन्न रेखाओं को मिलाकर देखे जाने वाले अर्थ आज की नहीं बल्कि उस पुरातन काल की बातें हैं जब यह विज्ञान उन लोगों के हाथों में था जिन्होंने इसके विकास के लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया।


सबसे पहले हमें यह बात अच्छी तरह जान लेनी चाहिए कि विभिन्न प्रकार के हाथों पर पाई जाने वाली विभिन्न रेखाओं को मिलाकर देखे जाने वाले अर्थ आज की नहीं बल्कि उस पुरातन काल की बातें हैं जब यह विज्ञान उन लोगों के हाथों में था जिन्होंने इसके विकास के लिए अपना जीवन अर्पित कर दिया। 

अब जिस प्रकार चेहरे पर नाक या होठों के सहज स्थान की पहचान की गई, उसी प्रकार हाथ का अध्ययन करते हुए एक ऐसा समय आया जब मस्तिष्क रेखा और जीवन रेखा की स्थिति के अनुसार पहचान की जाने लगी। इस प्रकार का निर्धारण मूल रूप से किस प्रकार खोज निकाला गया। उसका विवेचन हमारे कार्यक्षेत्र में नहीं हैं, लेकिन इन निर्धारणों के सत्य को प्रमाणित किया जा सकता है और सरसरी तौर पर कोई भी व्यक्ति हाथ का स्वयं निरीक्षण करके इसे स्वीकार कर लेगा। 

इस क्षेत्र में यह प्रमाणित होता है कि मस्तिष्क रेखा पर बने कुछ चिह्न एक या किसी दूसरी मानसिक विशेषता को बताते हैं, या जीवन-ंउचयरेखा पर बने विशेष चिह्नों का सम्बन्ध जीवन की लघुता या दीर्घता से है, तो यह स्वीकार करना तर्कहीन नहीं हो सकता कि इसी प्रकार के निरीक्षण से रोग, आरोग्य, पागलपन और मृत्यु आदि की भविष्यवाणी भी की जा सकती है। अगर और जोर देकर कहा जाए, तो यह भी सही-ंउचयसही बताया जा सकता है कि जीवन के किस पड़ाव पर पहुँचकर उसका विवाह होगा।  

मेरा इस सम्बन्ध में तर्क यह है कि निश्चय ही मनुष्य के पास स्वतन्त्र इच्छाशक्ति है, लेकिन कुछ सीमाओं तक है। ठीक उसी प्रकार जिस प्रकार जीवन के अन्य क्षेत्रों की सीमाएं होती हैं-ंउचय जिस प्रकार मनुष्य की शक्ति की, उसके कद या ऊंचाई की, उसकी आयु की या इसी प्रकार अन्य बातों की। 

स्वतन्त्र इच्छा शक्ति किसी सिलिन्डर के दोलन की तरह है, जो दोलन निर्माण या जीवन के आरम्भिक शाश्वत यन्त्र को चलायमान रखता है।   

क्या हमारे जीवन को बनाने और नियन्त्रित करने वाले किसी अदृश्य, नियम, या किसी रहस्यमय कारण अथवा शक्ति में विश्वास करना कठिन है? यदि एक बार भी हमें ऐसा प्रतीत हो तो भी हमें उन अनेक बातों पर विचार करना चाहिए जिनका आधार उनसे कम ठोस है। 

लेकिन हम उन पर विश्वास करते आये हैं। यदि हम स्थिर विचार करें तो हमें स्वीकार करना पड़ेगा, कि अनेक धर्म, विचार, धारणाएँ और सिद्धान्त हैं जिनके प्रति न केवल जनसमूह के मन में आस्था है बल्कि बुद्धिजीवियों के ठोस विश्वास के भी केन्द्र रहे हैं।  इस प्रकार मनुष्य अपने भाग्य का निर्माता भी है और दास भी है। 

वह केवल अपने अस्तित्व या अपनी विद्वता से ऐसे विधान सक्रियता में लाता है जिनकी प्रतिक्रिया उस पर होती है और उसके माध्यम से दूसरों पर होती है। जो वर्तमान है वह अतीत का परिणाम है और जो भविष्य में होने वाला है उसका कारण भी वर्तमान है।  

विगत जीवन के कर्म ही वर्तमान को प्रभावित करते हैं, और वर्तमान के कर्म भविष्य पर अपना प्रभाव डालते हैं। मानव जीवन का यही क्रम है, जो सृष्टि के आरम्भ से चला आ रहा है और जब तक सृष्टि है यह क्रम इसी प्रकार चलता रहेगा। हम जिस मत का अनुपालन और अनुमोदन कर रहे हैं, वह समाज के सभी वर्गोंे के लिए उपयुक्त होगा। 

अपनी निःस्वार्थ भावनाओं द्वारा लोगो ंको ऊंचा उठायेगा और उनके दृष्टिकोण को उदार तथा विस्तृत बनायेगा। हठधर्मिता के स्थान पर उन्हें सत्य की सच्चाई दिखाई देगी।  


दूसरी ओर प्रारम्भ या भाग्यवाद पर सच्ची आस्था रखने वाला व्यक्ति अपने हाथों को रोककर प्रतीक्षा नहीं करेगा। वह उनसे काम लेगा। सन्तोष और तत्परता से अपने काम में जुट जाएगा यही विश्वास लेकर कर्मपथ पर अग्रसर होगा।   

उपर्युक्त बातों से आपको ज्ञात हो गया होगा की हस्तरेखा विज्ञान तथा निगू-सजय़ विज्ञान किस प्रकार स्वयं को जीवित रख पाने में समर्थ रहा है हमने देखा है कि कठोर नियमों वाला भौतिक विज्ञान ऐसे तथ्य प्रस्तुत करता है जो हस्तरेखा विज्ञान के पक्ष में जाते हैं। 

यह विषय जनसाधारण की भलाई का ही साधन है। क्योंकि इसके सिद्धान्त मानव जाति को अपनी जिम्मेदारियों को सम-हजयने में समर्थ बनाते हैं, इनके द्वारा हमें भविष्य के सम्बन्ध में चेतावनी मिलती है। इस विज्ञान में सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण गुण यह है कि यह स्वयं को पहचानने में सहायक सिद्ध होता है। 

इसकी सच्चाई और यथार्थता के कारण हमें इसे प्रोत्साहन देना चाहिए और अधिक समृद्ध करना चाहिए। इसे सीखना और दूसरों को सिखाना चाहिए उसे और उपयोगी बनाने के लिए उसका समर्थन करना चाहिए।


सौजन्य  - सरल हस्तरेखा पुस्तक 

Hastrekha Vigyan Aur Fate Line

Aap Ki Janam Kundli Aap Ke Hatho Ki Rekha Mein Hai

 हस्तरेखा में भाग्य, यश, उन्नति, और अवनति 

मणिबन्ध का पहला वलय जंजीरदार, परन्तु सम तथा निर्बाध सूर्य रेखा त्रिकोण के निचले भाग से उदित, साथ में अच्छी भाग्य रेखा-श्रमपूर्ण जीवन के पश्चात सफल भाग्योदय।

भाग्य यश उन्नति अवनति

सूर्य रेखा जीवन रेखा की जड़ से उदित होकर बृहस्पति पर्वत पर तारक चिन्ह में समाप्त - भाग्य की सूचक।

मणिबन्ध का पहला वलय जंजीरदार, परन्तु सम तथा निर्बाध सूर्य रेखा त्रिकोण के निचले भाग से उदित, साथ में अच्छी भाग्य रेखा-श्रमपूर्ण जीवन के पश्चात सफल भाग्योदय।

तर्जनी उंगली के दूसरे पूर्व पर एक या दो क्रास चतुर्भुज के अन्दर से बुध पर्वत को एक पुष्ट रेखा। गहरी सूर्य रेखा, साथ में दोनों हाथों में पुष्ट बृहस्पति पर्वत-बड़े लोगों की मित्रता से लाभ।

बृहस्पति तथा शनि पर्वतों के बीच में से उठती हुई ह्रदय रेखा शनि पर्वत सुविकसित तथा किरणविहीन चन्द पर्वत पर कोई चित्र अथवा संयोग रेखा नहीं -नकारात्मक सुख की सूचक।

कनिष्ठा उंगली की जड़ से एक रेखा बुध पर्वत को जाती हुई - बड़े लोगों की मित्रता से सम्मान।

भाग्य रेखा चन्द पर्वत से उदित तथा बृहस्पति क्षेत्र से आरम्भ हृदय रेखा में लोप-अप्रत्याशित सत्ता की सूचक।

अंगूठा हाथ में बहुत नीचे-सामान्य प्रतिभा।

सूर्य पर्वत पर एक क्रास, भाग्य रेखा शाखाओं के साथ मणिबन्ध से आरम्भ-विफलताओं की सूचक।

जीवन रेखा से मणिबन्ध को जाती हुई छोटी-छोटी रेखायें-जीवन में निराशा की द्योतक।

शनि पर्वत के नीचे मस्तिष्क तथा जीवन रेखा का मिलन दूसरी उंगली के पहले पर्व पर तारक चित्र घातक घटनायें।

दोनों हाथों में जीवन रेखा का अन्त का क्रास-श्रृंखला में, साथ में निकृष्ट भाग्य रेखा सूर्य पर्वत बहुत सी छोटी-छोटी शाखाओं में काटता हुआ पर्वत के समीप सूर्य रेखा छोटी-छोटी रेखा श्रृंखला में समाप्त-असफलता।

शुक्र वलय, पुष्ट परन्तु सूर्य पर्वत के नीचे गहरी खड़ी रेखा से कटा हुआ तीसरी उंगली की जड़ से उठती हुई बहुत सी रेखायें पहले पर्व तक जोड़ों को काटती हुई-स्त्रियों के कारण असफलतायें।

बुध पर्वत पर तारक चिà, साथ में निम्न बृहस्पति पर्वत-अपमान एवं असफलता।

सूर्य पर्वत पर एक पुष्ट तथा तारक चिà में समाप्त रेखा, साथ में दोनों हाथों में स्पष्ट सूर्य रेखा-प्रतिभा से ख्याति लाभ।

त्रिकोण के निचले भाग ¼अन्दर½ पर एक क्रास-जीवन के उत्तरी भाग में भाग्यशाली घटनाएं।

अच्छी भाग्य रेखा, साथ में सूर्य पर्वत पर तारक चित्र  सूर्य पर्वत पर साधारण खड़ी रेखायें यदि दोनों हाथों में स्पष्ट और अनकटी हों -संयोग से ख्याति लाभ।

ह्रदय तथा मस्तिष्क रेखायें बृहस्पति पर्वत के नीचे शाखापुंजदार, बुध पर्वत पर एक गहरी रेखा। शुक्र पर्वत से लेकर बुध पर्वत की एक रेखा। 

एक गहरी खड़ी रेखा बृहस्पति पर्वत पर-अच्छे भाग्य की परिचायक।

सूर्य रेखा एक ही लम्बाई की तीन सम शाखाओं में समाप्त एक बुध पर्वत की ओर तथा एक शशि पर्वत की ओर-ख्याति और सम्मान।

पुष्ट मंगल रेखा की उपस्थिति और स्वास्थ्य रेखा के साथ-साथ गौण रेखा के रूप में उत्तम बुध रेखा -बहुत अधिक सुख।

तीसरी उंगली के तीसरे पर्व पर एक सरल रेखा शनि पर्वत पर एक स्पष्ट रेखा जिसमें से पर की किरणें उठ रही हों। मणिबन्ध के प्रथम वलय के रूप में एक बिना टूटी रेखा-सामान्य प्रकार के सुख।

मणिबन्ध पर बहुत सी शाखायें मणिबन्ध से ही सूर्य पर्वत को एक सरल रेखा चतुर्भुज में एक तारक चित्र तीसरी उंगली की जड़ से पहले पर्व की एक रेखा-सम्मान तथा उच्च स्ािान।

जीवन रेखा से मस्तिष्क रेखा के मध्य को उठती हुई शाखायें, ये सम्मान तथा धन भारी संघर्ष के पश्चात प्राप्त।

मस्तिष्क रेखा से एक रेखा बृहस्पति पर्वत पर तारक चित्र में समाप्त असाधारण सफलता।

भाग्य रेखा दोनों हाथों में त्रिकोण के अन्दर से उठती हुई साथ में स्पष्ट लम्बी मस्तिष्क रेखा-शुभ सहायक अवसर।

जीवन रेखा का अन्त शाखापुंज में, कलाई के पास नीचे एक महत्वपूर्ण परिवर्तन वाली घटनायें।

भाग्य रेखा चन्द पर्वत से उदित और स्पष्ट तथा सीधी शनि पर्वत को-दूसरे के सनकीपन से धन का लाभ।

स्पष्ट सूर्य रेखा बृहस्पति पर्वत पर एक तारक चित्र अनामिका उंगली की जड़ से उदित पहले पर्व के जोड़ पर समाप्त रेखा-प्रसिद्धि की सूचक।

भाग्य रेखा बृहस्पति पर्वत से आरम्भ अथवा भाग्य रेखा बृहस्पति पर्वत पर समाप्त-सम्पूर्ण आकांक्षापूर्ति।

सौजन्य  - सरल हस्तरेखा पुस्तक 

Hastrekha Vigyan Aur Sampatti

Aap Ki Ungliya Hi Aapki Janam Kundli Hai | उंगलियां दर्पण हस्तरेखा



हाथ की उंगलियां एवं हथेली में स्थित विभिन्न ग्रहों के पर्वत व्यक्ति के विचारों एवं भावनाओं को दर्शाते हैं। मनुष्य के विचार एवं भावनाएं सत्व, राजस एवं तमस गुणों का मिश्रण होते हैं।

हाथ की उंगलियां
 एवं हथेली में स्थित विभिन्न ग्रहों के पर्वत व्यक्ति के विचारों एवं भावनाओं को दर्शाते हैं। मनुष्य के विचार एवं भावनाएं सत्व, राजस एवं तमस गुणों का मिश्रण होते हैं। सत्व गुण की मुख्य विशेषता ज्ञान एवं सहनशीलता है। अन्य विशेषताएं करुणा, विश्वास, प्रेम, आत्म-नियंत्रण, समझ, शुद्धता धैर्य, और स्मृति हैं। राजस की मुख्य विशेषता गतिविधि एवं प्रवृत्ति है। अन्य विशेषताएं महत्वाकांक्षा, गतिशीलता, बेचैनी, जल्दबाजी, क्रोध, ईर्ष्या, लालच, और जुनून है। तमोगुण की मुख्य विशेषता है जड़ता या मूढ़ता। अन्य विशेषताएं सोच या व्यवहार, लापरवाही, आलस, भुलक्कड़पन, हिंसा और आपराधिक विचार हैं।

मनुष्य के विचारों में किस गुण की प्रधानता है इसका निर्धारण उस मनुष्य की हाथ के हथेलियों मे स्थित विभिन्न ग्रहों के पर्वत एवं उंगलियों को देखकर किया जा सकता है। हस्तरेखा विज्ञान के अनुसार हाथ की हथेली को मुख्यतः तीन भागों मे विभाजित किया जाता है। ये तीन भाग सत्व, राजस एवं तमस गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं। हथेली के अग्र भाग मे स्थित गुरु, शनि, सूर्य एवं बुध के पर्वत जो कि क्रमशः तर्जनी, मध्यमा, अनामिका एवं कनीष्टिका उंगलियों के ठीक नीचे स्थित होते हैं। मनुष्य के सात्विक गुणों को दर्शाते है। मंगल का उच्च पर्वत एवं मंगल का निम्न पर्वत जो हथेली के मध्य भाग में स्थित होते हैं राजसिक तत्व का प्रतिनिधित्व करते हैं। शुक्र एवं चंद्रमा के पर्वत हथेली के निचले भाग मे स्थित होते हैं। ये मनुष्य के तामसिक गुणों का प्रतिनिधित्व करते हैं। जिस ग्रह का पर्वत जितना उभरा हुआ होगा व्यक्ति में उस ग्रह से संबन्धित गुण उतने ही अधिक होंगे।

हाथ की उंगलियों में सत्व, राजस एवं तमस गुण क्रमश उंगली के ऊर्ध्व, मध्य एवं निम्न भाग दर्शाते हैं। उंगलियों के ये भाग अंग्रेजी में फैलैंगक्स के नाम से जाने जाते हैं। व्यक्ति थ की हथेलियों एवं उंगलियां को देखकर उसके व्यक्तित्व, आचार, विचार एवं व्यवहार के बारे में बहुत कुछ पता लगाया जा सकता है।

उंगलियों का निचला भाग जो कि हथेली से जुड़ा हुआ होता है व्यक्ति की महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है। यह भाग व्यक्ति के भौतिक, आर्थिक स्तर, उसके खान-पान, रहन-सहन, सामाजिक स्तर आदि के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देते हैं। उंगली के इस भाग से शरीर एवं बुद्धि के सामंजस्य का अध्ययन किया जाता है। उंगलियों का मध्य भाग व्यक्ति की व्यावहारिकता एवं उसके आस-पास के वातावरण से उसके सामंजस्य का आभास होता है। उंगली के इस भाग से व्यक्ति के कार्य क्षेत्र एवं व्यवसाय के बारे में भी जानकारी मिलती है। उंगलियों के ऊर्ध्व भाग से व्यक्ति की नियमबद्धता, दूरदर्शिता, कार्यकुशलता, सदाचरण एवं नैतिक मूल्यों का पता चलता है।

जिन व्यक्तियों की उंगलियों के तीनों भाग बराबर होते हैं उनका व्यक्तित्व आमतौर पर संतुलित होता है। जब एक व्यक्ति की उंगलियों के ऊर्ध्व एवं मध्य भाग बराबर होते हैं तब उस व्यक्ति की संकल्प शक्ति एवं निर्णय लेने की क्षमता मे सामंजस्य होता है। यदि ऊर्ध्व भाग अन्य दो भागों से बड़ा होता है तो संकल्प शक्ति की कमी का कारण व्यक्ति अपनी इच्छाओं एवं आकांक्षाओं की पूर्ति में कमी पाता है। संकल्प शक्ति की कमी के कारण सही निर्णय लेने की क्षमता भी प्रभावित होती है एवं व्यक्ति अपनी इच्छाओं तथा आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए सही निर्णय नहीं ले पाता है।

यदि उंगलियों का मध्य भाग अन्य दो भागों से अधिक लंबा है तो व्यक्ति की तार्किक क्षमता एवं बौद्धिक क्षमता प्रबल होती है। परंतु उसकी संकल्प शक्ति एवं कार्य के प्रति एकाग्रता मे कमी कारण सफलता मिलने मे देरी हो सकती है। ऐसे व्यक्ति दूसरों की सफलता देखकर ईर्ष्या की भावना से भी ग्रस्त हो सकते हैं। क्योंकि बुद्दिमत्ता में अन्य व्यक्तियों से कम न होने पर भी वे उनके जीतने सफल नहीं होते हैं। परंतु इसका प्रमुख कारण यह है कि उनकी संकल्प शक्ति एवं इच्छा शक्ति मे कमी है और इसे केवल मेहनत एवं कठिन परिश्रम से ही जीता जा सकता है।

यदि उंगलियों का निम्न भाग अन्य दो भागों से अधिक लंबा होता है तो आप विवेक पूर्ण एवं परिस्थिति के अनुसार निर्णय लेने में समर्थ हैं। ऐसे व्यक्ति भावुक प्रकृति के होते हैं। वे अपना समय, पैसा एवं सलाह जरूरतमंदों के लिए खर्च करने के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। इसके लिए यदि उन्हे आलोचना भी सहनी पड़े तो वे उसके लिए तैयार रहते हैं।

हाथ की उंगलियों की स्थिति जिस व्यक्ति की पूर्ण रूप से व्यस्थित होती है वे व्यक्ति जीवन में बहुत सफल होते हैं। लंबी एवं पतली उंगलियों वाले व्यक्ति भावुक होते हैं जबकि मोटी उंगलियों वाले व्यक्ति मेहनती होते हैं। जिन व्यक्तियों की उंगलियां कोण के आकार की होती हैं वे अत्यधिक संवदेनशील होते हैं तथा अपनी वेषभूषा एवं सौन्दर्य का विशेष ध्यान रखते हैं। जिन व्यक्तियों की उंगलियां ऊपर से नुकीली होती हैं वे आध्यात्मिक प्रवृत्ति के होते हैं तथा इनकी कल्पना शक्ति अद्भुत होती है। स्वभाव से ये नम्र होते हैं।

जिन व्यक्तियों की उंगलिया ऊपर से चौकोर होती हैं वे व्यावहारिक,तर्कसंगत एवं नम्र होते हैं। ये परम्पराओं एवं रूढ़िवादिता में विश्वास रखते हैं। जिनकी उंगलियां स्पैचुल के आकार की होती हैं वे व्यक्ति साहसी, यथार्थवादी एवं घूमने के शौकीन होते हैं। ये कार्य करने के शौकीन होते है एवं अनेक विषयों के ज्ञाता होते हैं। इस तरह के व्यक्ति वैज्ञानिक, इंजिनियर या कार्य कुशल तकनीशियन होते हैं।

जिन व्यक्तियों की उंगलियां सीधी होती हैं वे व्यक्ति ईमानदार, शालीन एवं न्यायसंगत होते हैं। जीवन में अच्छी तरक्की करते हैं। जिन व्यक्तियों की उंगलियां गांठदार होती हैं वे बहुत व्यावहारिक एवं अच्छे नियोजक होते है। वे स्पष्टवक्ता होते है। लंबी उंगलियों वाले व्यक्ति शिक्षा में रुचि रखते हैं एवं अच्छे विश्लेषक होते हैं।

जिस हाथ में उंगलियों की स्थिति अव्यवस्थित होती है विशेष तौर पर जब कनिस्ठिका उंगली जो कि बुध की उंगली के नाम से जानी जाती है बहुत छोटी होती है तब व्यक्ति में आत्मविश्वास की कमी पाई जाती है।

उंगलियों की आकृति धनुषाकार होने पर व्यक्ति का व्यक्तित्व संतुलित होता है तथा वह व्यक्ति बहुत विचारशील होता है।

Hastrekha Vigyan Aur Ungliya

Aap Ka Angutha Hi Aapki Janam Kundli Hai | अंगुष्ठ दर्पण हस्तरेखा

किसी भी काम को ठीक ढंग से पूर्ण करने के लिए हथेली में अंगूठा सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अंगूठे की मदद से ही हम किसी भी वस्तु पर अपनी पकड़ मजबूत बना सकते हैं। जिस प्रकार दैनिक कार्यों में अंगूठे का महत्व है, ठीक उसी प्रकार हस्तरेखा ज्योतिष में भी अंगूठे की अहमियत है।


किसी भी काम को ठीक ढंग से पूर्ण करने के लिए हथेली में अंगूठा सर्वाधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। अंगूठे की मदद से ही हम किसी भी वस्तु पर अपनी पकड़ मजबूत बना सकते हैं। जिस प्रकार दैनिक कार्यों में अंगूठे का महत्व है, ठीक उसी प्रकार हस्तरेखा ज्योतिष में भी अंगूठे की अहमियत है।

हस्तरेखा ज्योतिष किसी भी व्यक्ति के स्वभाव और भविष्य को जानने की एक सटीक और प्रचलित विद्या है। हाथों की रेखाओं और हथेली की बनावट के साथ ही उंगलियों और अंगूठे की बनावट को देखकर भी इंसान के चरित्र की बातें मालूम की जा सकती हैं।


- इंसान का अंगूठा तीन भागों में विभक्त रहता है। प्रथम ऊपर वाला भाग यदि अधिक लंबा हो तो व्यक्ति अच्छी इच्छा शक्ति वाला होता है। वह किसी पर निर्भर नहीं होता। ऐसे अंगूठे वाले लोग किसी भी कार्य को पूरी स्वतंत्रता के साथ करना पसंद करते हैं और इन्हें सफलता भी प्राप्त हो जाती है।

- यदि किसी व्यक्ति की हथेली में अंगूठे के पहले पर्व पर बहुत सी खड़ी रेखाएं होती हैं तो वह ईमानदार और भरोसेमंद होता है।

- यदि अंगूठे के पहले पर्व पर आड़ी रेखाएं होती हैं तो व्यक्ति को जीवन में महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। ऐसे लोगों को धन संबंधी कार्यों में कभी भी परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ता है।

- जिन लोगों की हथेली में अंगूठे के पहले पर्व पर तीन खड़ी रेखाएं होती हैं उनकी इच्छा शक्ति प्रबल होती है और इनका दिमाग भी बहुत तेज चलता है।

- जिन लोगों के हथेली के अंगूठे के पहले पर्व पर क्रॉस का निशान होता है वे बहुत अधिक खर्चीले होते हैं। ये लोग अधिक व्यय के कारण परेशानियों का सामना करते हैं।

- अंगूठा का मध्य भाग यदि अधिक लंबा हो तो व्यक्ति की तर्क शक्ति काफी उन्नत होती है। तर्क शक्ति के कारण इन लोगों का दिमाग भी काफी तेज चलता है। अपनी बुद्धि के बल पर इन्हें समाज में मान-सम्मान प्राप्त होता है।

- यदि अंगूठे के दूसरे पर्व पर गोलाकार निशान हो तो व्यक्ति बहुत अधिक बहस करने वाला होता है।

यदि किसी व्यक्ति की हथेली में अंगूठे के दूसरे पर्व पर तीन खड़ी रेखाएं होती हैं तो व्यक्ति की तार्किक शक्ति का अच्छी रहती है। जबकि यहां आड़ी रेखाएं होती हैं तो व्यक्ति कुतर्क करने वाला हो सकता है।

- यदि किसी व्यक्ति की हथेली में अंगूठे के दूसरे पर्व पर त्रिभूज का निशान बना हो तो व्यक्ति विज्ञान के क्षेत्र में कार्य करने वाला होता है।

- यदि किसी व्यक्ति की हथेली में अंगूठे के दूसरे पर्व पर जाली का निशान बना हो तो व्यक्ति चरित्र का अच्छा नहीं माना जाता है। सामान्यत: ऐसे लोग बेईमान भी हो सकते हैं।

- हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार जो लोग बुद्धिमान और चतुर होते हैं उनका अंगूठा सुंदर और आकर्षक होता है। ये लोग किसी भी काम को चतुराई के साथ पूर्ण करते हैं और लाभ भी कमाते हैं।

- अंगूठे का अंतिम भाग और शुक्र पर्वत (अंगूठे एकदम नीचे वाले भाग से लगा हुआ शुक्र पर्वत होता है।) के पास वाला भाग अधिक लंबा हो तो व्यक्ति अति कामुक होता है।

- ऐसे अधिकांश लोग जिनकी हथेली में अंगूठा छोटा, बेडोल और सामान्य से अधिक मोटा होता है, वे सामान्यत: असभ्य और दूसरों का निरादर करने वाले होते हैं। ऐसे लोग कई बार क्रूर भी हो जाते हैं और दूसरों को नुकसान भी पहुंचा सकते हैं।

- जिस व्यक्ति का अंगूठा सामान्य से ज्यादा लंबा और हथेली के साथ मजबूती से जुड़ा हुआ होता है वह सर्वगुण संपन्न होता है। इन लोगों में घर-परिवार और समाज के बीच घुल-मिलकर रहने के सभी गुण होते हैं। इन्हें उचित मान-सम्मान प्राप्त होता है।

- जो लोग अधिक कल्पनाशील होते हैं सामान्यत: उनकी हथेली में अंगूठा लचीला होता है। लचीला अंगूठा आसानी से पीछे की ओर मुड़ जाता है। ऐसे लोग अधिक खर्चीले भी होते हैं। इन्हें हर काम को कलात्मक ढंग से करना पसंद होता है।

- जो अपनी दोनों हथेलियों के अंगूठों को उंगलियों में दबाकर कर रखते हैं, ऐसे अधिकांश लोग डरपोक होते हैं। ऐसा करने वाले व्यक्ति में आत्म विश्वास की कमी होती है। ये लोग हर कार्य को डरते-डरते करता है। इन्हें कार्यों में सफलता मिलने में भी संदेह रहता है।

- हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार सामान्यत: जिन लोगों का अंगूठा अधिक मोटा होता है उनका स्वभाव अच्छा नहीं माना जाता है।

- चपटे अंगूठे वाले लोग निराशजनक स्वभाव वाले होते हैं। जबकि जिन लोगों के अंगूठे अधिक चौड़े होते हैं वे क्रोधी स्वभाव के होते हैं।
- जिन लोगों का अंगूठा बड़ा होता है वे कलात्मक स्वभाव के होते हैं और जिन लोगों का अंगूठा पतला होता है वे अपने स्वभाव के कारण घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान प्राप्त करते हैं।

हस्तरेखा ज्योतिष के अनुसार जिन लोगों की हथेली में सामान्य से छोटे अंगूठा होता है वे लोग निर्बल हो सकते हैं। ऐसे लोगों की कार्य क्षमता काफी कम होती है और हर कार्य को बहुत धीरे-धीरे करते हैं।

हस्तरेखा के अनुसार दोनों हाथों की गहराई से जांच करने के बाद ही सटीक भविष्यवाणी की जा सकती हैं। यहां बताए  गए अंगूठे के प्रभाव हथेली की अन्य स्थितियों से प्रभावित हो सकते हैं। अत: यह बात ध्यान रखने योग्य है।


Hastrekha Vigyan Aur Angootha - Hastrekha Angutha - Hastrekha Angoota


त्रिशूल चिन्ह (Benefit Of Trishul Sign In Indian Palmistry)

त्रिशूल चिन्ह के फायदे 

यदि हाथ में किसी भी रेखा पर त्रिशूल पाया जाता है तो वह उस रेखा के गुणों को दुगना कर देता है ! यदि त्रिशूल सूर्य रेखा पर पाया जाता है तो व्यक्ति को अपार सफलता मिलती है |

जिस व्यक्ति के हाथ में त्रिशूल होता है वो भाग्यशाली होता है लेकिन वो त्रिशूल किस लाइन पर है वो भी बहुत महत्व रखता है।

सूर्य रेखा पर है तो व्यक्ति के बल्ले-बल्ले है ऐसे व्यक्ति को खूब मान सम्मान मिलता है और सुपरस्टार की लाइफ होती है।

गरीब घर में पैदा होने के बाद भी अच्छी जिंदगी जीता है।  एक ही माँ की तीन संतान है जिनका जन्म गरीब घर में हुआ लेकिन जिसके त्रिशूल सूर्य रेखा पर है वो तरक्की कर लेता है और अच्छी जिंदगी जीता है जबकि दो भाई वही रह जाते है। 

भिखारी के हाथ में तो वक्त जरूर करवट लेगा और वो एक दिन काफी अच्छी पोजीशन प्राप्त कर लेगा मतलब पूरी जिंदगी भिखारी नहीं रहेगा।

अब अगर भाग्य रेखा पर त्रिशूल है तो व्यक्ति के आय के साधन हमेशा चालू रहते है और कही न कही से आय होती रहती है। जमीन जायदाद खूब होती है।

अगर हृदय रेखा पर है तो व्यक्ति को धोखे खूब मिलते है। पारिवारिक कलह होती है प्रॉपर्टी को ले कर और ऐसा व्यक्ति समाज कल्याण में अपनी प्रॉपर्टी दान करता है।

मस्तक रेखा पर होने पर व्यक्ति कलाकार, लेखक लेकिन कन्फ्यूज्ड दिमाग का होता है वो एक जगह नहीं टिक सकता है।

अत: यदि हाथ में किसी भी रेखा पर त्रिशूल पाया जाता है तो वह उस रेखा के गुणों को दुगना कर देता है।  यदि त्रिशूल सूर्य रेखा पर पाया जाता है तो व्यक्ति को अपार सफलता मिलती है।  परन्तु यदि त्रिशूल की शाखा दोषयुक्त है तो त्रिशूल के प्रभाव में कमी आ जाती है। त्रिशूल सदैव अखंडित होना चाहिए और निर्दोष होना चाहिए तभी उसका सही सही फल मिलता है।

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Trishul Wala Bhagyashali Hota Hai

-नितिन कुमार

विवाह आयु की गणना का तरीका (Marriage Calculator In Palmistry)

विवाह आयु की गणना का तरीका
(Method To Calculate Age Of Marriage By Hand)

कनिष्का (छोटी ऊँगली) के तीसरे पर्व की जड़ में एक बिंदु लगा दे व दूसरा बिंदु हृदय रेखा पर सामने लगा दे अब इन दोनों बिन्दुओ को एक सीधी रेखा से खीचकर मिला दे।

Hath Ki Lines Se Vivah Ki Age Kaise Calculate Karte Hai 

कनिष्का (छोटी ऊँगली) के तीसरे पर्व की जड़ में एक बिंदु लगा दे व दूसरा बिंदु हृदय रेखा पर सामने लगा दे अब इन दोनों बिन्दुओ को एक सीधी रेखा से खीचकर मिला दे।  अब आप इस दूरी को 60 वर्ष का मान लीजिये।  अब यदि इस दूरी के ठीक मध्य में एक बिंदु लगा दे तो वो 30 वर्ष की आयु होगी।  अब यदि मध्य बिंदु और हृदय रेखा की दूरी के ठीक मध्य एक और बिंदु लगा दिया जाय तो वो 15 वर्ष की आयु होगी ! इसी प्रकार यदि मध्य बिंदु और कनिष्का ऊँगली के जड़ के बिंदु की दूरी के ठीक मध्य में एक बिंदु लगा दिया जाय तो वो 45 वर्ष की आयु होगी।  इसी प्रकार आप बिंदु लगा कर एक-एक वर्ष का अनुमान निकाल सकते है। 


अब आप बहुत आसानी से अनुमान लगा सकते है की व्यक्ति का विवाह किस आयु में होना चाहिए ! यदि विवाह रेखा मध्य बिंदु से नीचे है तो आप बता सकते है की विवाह 30 वर्ष की आयु से पहले होना चाहिए उसी प्रकार यदि विवाह रेखा मध्य बिंदु के ऊपर है तो आप बता सकते है की विवाह 30 वर्ष के पश्चात ही होगा। 

यहाँ पर इस बात का ध्यान रखना होगा की विवाह रेखा वो ही मानी जायगी जो स्पष्ट और लम्बी हो।  आपको इसके लिए काफी हाथो का परीक्षण करना होगा क्योकि जैसा मैं पहले बता चुका हूँ की "हस्तरेखा का मुख्य सिद्धांत यह है की फलादेश करते समय व्यक्ति के लिंग, देश, काल और जाती/धर्म का ध्यान रखना आवश्यक है, क्यों की व्यक्ति के जीवन पर इनका विशेष प्रभाव होता है"। आप खुद जानते है की विवाह को लेकर प्रत्येक देश, जाती, धर्म व समाज में विभिन्नता पाई जाती है। 


हाथ में विवाह के अन्य योग भी होते है। 

Bhagya Rekha In Hand In Hindi Hast Rekha

भाग रेखा का भाग्य रेखा से निकलना
भाग रेखा का भाग्य रेखा से निकलना

अनेकों हाथों में भाग्य रेखा मुख्य भाग्य रेखा से निकलती हुई देखी जाती है।

यह एक उत्तम लक्षण होने पर अचानक भाग्योदय होने का सूचक है। जिस आयु में यह रेखा भाग्य रेखा से निकलती है, कोई न कोई उत्तम कार्य किया जाता है जो कि पूरे जीवन को स्थायी कर जाता है। इस आयु से व्यवित स्वतन्त्र रूप से जीवन यापन भी आरम्भ कर देता है। {चित्र-108) (नितिन पामिस्ट)

भाग्य रेखा से भाग्य रेखा निकलने या भाग्य रेखा के होते हुए दूसरी भाग्य रेखा होने या शनि क्षेत्र या चन्द्रमा से भाग्य रेखा निकलने पर यह जरूरी नहीं कि जिस आयु में भाग्य रेखा निकलती है, उसी आयु में लाभ भी हो, इसका फल जीवन में उससे पहले या बाद में या आयु भर मिलता रहता है। किन्तु मस्तिष्क रेखा, सूर्य रेखा या जीवन रेखा से निकली भाग्य रेखा का चमत्कार उसी आयु में प्रकट होता है, जिसमें यह निकलती है। (नितिन पामिस्ट)

भाग्य रेखा से निकल कर भाग्य रेखा पहली भाग्य रेखा के साथ चलती हो या भाग्य रेखा के साथ कोई दूसरी भाग्य रेखा बिल्कुल सटी हुई हो तो उस आयु में कोई समानान्तर यौन सम्बन्ध या विवाह होता है। ऐसी भाग्य रेखा शुक्र उन्नत नहीं हो तो उस आयु में कार्य में उन्नति का लक्षण है, परन्तु जीवन व मस्तिष्क रेखा निर्दोष हो और हृदय रेखा की कोई शाखा मस्तिष्क रेखा पर नहीं मिलनी चाहिए। शुक्र सम होने पर दोहरे आय के साधन होते हैं, परन्तु शुक्र उन्नत होने पर दो स्त्रियां रखने का लक्षण हैं।


भाग्य रेखा का हृदय रेखा से नेिकलना
भाग्य रेखा का हृदय रेखा से नेिकलना

अनेक हाथों में भाग्य रेखा. हृदय रेखा से निकल कर शनि पर जाती है। देखा जाता है कि इसके साथ मुख्य भाग्य रेखा भी व्यक्ति के हाथ में होती है। मुख्य भाग्य रेखा में कोई दोष जैसे मस्तिष्क या हृदय रेखा पर रुकना आदि हो तो व्यक्ति 35-40 या 50 वर्ष अर्थात् मुख्य भाग्य रेखा की आयु बीतने पर ही उन्नति करते हैं। हृदय रेखा से भाग्य रेखा निकलने पर इसका फल 50 वर्ष की आयु के पश्चात प्राप्त होता है। हाथ में श्रेष्ठ मुख्य भाग्य रेखा होने पर, ऐसी भाग्य रेखाएं भी हो तो व्यक्ति विदेश व्यापार, विदेश यात्रा या नए कार्य क द्वारा लाभान्वित होता है। ऐसी भाग्य रेखाएं हाथ में अधिक भी देखी जाती हैं। ये रेखाएं जितनी पतली और सुडौल होती
हैं, उत्तम मानी जाती हैं (चित्र-109)

शनि पर इस प्रकार की रेखाएं अधिक संख्या में हों, और कटी-फटी हों तो व्यक्ति को गठिया रोग व अल्पायु में दांत खराब हो जाते हैं। भाग्य रेखा, हृदय रेखा से निकल कर शनि स्थान पर जाती हो तो ऐसे व्यक्ति जीवन के उत्तरार्ध में उन्नति करते हैं। उसके बाद जीवन में सुख रहता है परन्तु हाथ उत्तम व जीवन रेखा घुमावदार होनी चाहिए। ये पहले भी उन्नति तो करते हैं परन्तु अधिक प्रगति इसके बाद ही होती है। जितनी भाग्य रेखाएं हृदय रेखा से निकली होती हैं, उतने ही व्यापार या आय के साधन होते हैं। चिञ-109


शनि के नीचे हृदय रेखा से भाग्य रेखा निकली हो तो ठेकेदारी, सटटा या आढत का काम जरूर होता है। ये भाग्य रेखाएं सम्पति होने का निश्चित लक्षण हैं। जमीदारों व ऊंचे ओहदेदारों के हाथों में ऐसे चिन्ह होते हैं। शनि के नीचे त्रिकोण की आकृति इन भाग्य रेखाओं द्वारा बनती हो तो उस आयु में व्यक्ति सम्पति निर्माण करता है।


भाग्य रेखा का सूर्य रेखा से निकलना
भाग्य रेखा का सूर्य रेखा से निकलना

कई बार सूर्य रेखा से भाग्य रेखा निकल कर शनि स्थान पर जाती हुई देखी जाती हैं। हाथ का आकार सुन्दर हो तो यह बहुत ही अच्छा लक्षण है। ऐसे व्यक्तियों का भाग्योदय अचानक होता है तथा ये जीवन में ऐसा कोई कार्य करते हैं जिससे इनकी प्रसिद्धि होती है (चित्र-110)

जीवन रेखा गोलाकार व मस्तिष्क रेखा निर्दोष होने पर धन कमाने का नया साधन आरम्भ होता है और इसके बाद इनका जीवन पहले से सुगम हो जाता है। जो कार्य इस आयु में आरम्भ होता है, उसमें बड़ी सफलता मिलती है। इसकी उत्तमता हाथ पर निर्भर करती है। इस विषय में आयु का निर्णय भाग्य रेखा की उस आयु से लगाना चाहिए, जहां से यह रेखा. सूर्य रेखा से निकलती है। मस्तिष्क रेखा से पहले निकलने पर 35 वर्ष से पहले तथा मस्तिष्क रेखा और
हृदय रेखा के बीच से निकलने पर 35 वर्ष के पश्चात ही भाग्योदय होता है।


मस्तिष्क या जीवन रेखा से भाग्य रेखा निकलने पर, यदि सूर्य रेखा से भाग्य रेखा निकलती हो तो उस-उस आयु में यह लाभ होता है। (नितिन पामिस्ट )


भाग्य रेखा का मस्तिष्क रेखा से निकलना

भाग्य रेखा का मस्तिष्क रेखा से निकलना

कई बार भाग्य रेखा, मस्तिष्क रेखा से उदय होकर शनि की ओर जाती है। देखा जाता है कि ऐसे भाग्य रेखा भी होती है। चमसाकार, समकोण, आदर्शवादी हाथों में तो भाग्य रेखा की आवश्यकता ?’ ही नहीं होती, ऐसे हाथ भाग्य रेखा के न होने पर भी उसी प्रकार फल देते हैं (चित्र-104)।

हाथ में मुख्य भाग्य रेखा न होने पर केवल मस्तिष्क रेखा से ही भाग्य रेखा का उदय हो तो यह
बहुत ही महत्व की हो जाती है। यदि हाथ व अन्य लक्षण ठीक हो तो पहले की भाँत सुचारू रूप से के निकलने की आयु से ही करते हैं। इसका फल 35 वर्ष के पश्चात् व उस आयु से होता है, जिसमें यह रेखा मस्तिष्क रेखा से निकलती है। (नितिन पामिस्ट)

हाथ में यह उत्तम लक्षण माना जाता है। ऐसे व्यक्ति अपने ही मस्तिष्क और अपने ही ढंग से कार्य करके धन व प्रतिष्ठा प्राप्त करते हैं। हाथ में दूसरे लक्षण भी ठीक हों तो बहुत ही योग्य और प्रगतिशील सिद्ध होते हैं तथा विलक्षण व मिलनसार होते हैं। जिस आयु में मस्तिष्क रेखा से यह रेखा निकलती है, उस आयु से भाग्योदय होकर व्यक्तिगत उन्नति का मार्ग प्रशस्त हो जाता है। उस आयु में ये कोई ऐसा कार्य करते हैं, जो इन्हें बहुत सफल बना देता है। इस समय से पहले कोई विशेष सफलता नहीं मिलती। ऐसे हाथों में दूसरी भाग्य रेखा भी हो तो पहले भी इन्हें सब प्रकार के सुख प्राप्त होते हैं परन्तु नई भाग्य रेखा के उदय की आयु से विशेष प्रगति करते हैं। (नितिन पामिस्ट )


भाग्य रेखा का अन्त शनि पर


भाग्य  रेखा का अन्त शनि पर

भाग्य रेखा का अन्त शनि, बृहस्पति या सूर्य पर होता है। शनि पर गई हुई भाग्य रेखा दोष रहित हो तो बहुत उत्तम मानी जाती है । विशेष भाग्य रेखा के साथ हाथ गुलाबी और भारी हो। भाग्य रेखा चन्द्रमा या शनि क्षेत्र से निकलने की दशा में यह विशेष उत्तम व सुख और सौभाग्य का लक्षण है। इस लक्षण से हाथ के मूल्यांकन में वृद्धि हो जाती है । (चित्र-112) (नितिन पामिस्ट )


शनि पर गई हुई भाग्य रेखा होने पर यदि हाथ कुछ कठोर हो व शनि नीचे से नुकीला या ऊपर से उन्नत हो तो व्यक्ति की रुचि बगीचे, खेती आदि में होती है। शनि की उंगली होने पर तो ऐसा अवश्य ही होता है। यह भाग्य रेखा मोटी भी हो तो घर में खेती का कार्य होता है। बायें हाथ में भाग्य रेखा मोटी होने पर व्यक्ति के वंश तथा दायें हाथ में होने पर स्वयं का खेती का योग होता है, दोनों ही हाथों में भाग्य रेखा गहरी हो व हाथ अच्छा हो तो वंशानुगत कृषि कार्य पाया जाता है। शनि मुद्रिका होने पर भी खेती या खनन सम्बन्धी कार्य करते हैं। ऐसे व्यक्ति भूमि में खोद कर कुछ निकालने, पत्थर की रोड़ी बनाने या मिटटी या रेत आदि का कार्य करते हैं।


चन्द्रमा से निकलने वाली भाग्यरेखा - HAST REKHA VIGAN
चन्द्रमा से निकलने वाली भाग्यरेखा - HAST REKHA VIGAN

चन्द्रमा से निकलने वाली भाग्यरेखा

यह एक महत्वपूर्ण लक्षण है। इसमें भाग्य रेखा जीवन रेखा से अधिक दूर होती है। सिद्धान्तत: यदि इसमें कोई दोष न हो तो जीवन रेखा से दूर होने के कारण उत्तम भाग्य रेखा मानी जाती है (चित्र-106)। हृदय या मस्तिष्क रेखा पर न रुकी हो और चलते हुए जीवन रेखा के पास न गई हो अन्यथा कष्ट कारक सिद्ध होती है। साथ ही यह पतली भी होनी चाहिए। निर्दोष अवस्था में यह बहुत उत्तम लक्षण माना जाता है। यहां भी जीवन रेखा से शनि के नीचे कोई छोटी भाग्य रेखा निकलना आवश्यक है, इस प्रकार की भाग्य रेखा का फल उसी आयु से आरम्भ होता है, जिससे कि यह शनि क्षेत्र में प्रवेश करती है। (नितिन पामिस्ट)

चन्द्रमा से निकलने वाली भाग्य रेखा प्राय: चित्र-106 जीवन रेखा के पास देखी जाती है। इस दशा में यह खराब फल देती है। यदि यह मस्तिष्क रेखा पर विशेषतया सूर्य के नीचे रुकती हो तो ज्यादा खराब फल देती है। ऐसे व्यक्ति 44 वर्ष की आयु तक स्थायित्व प्राप्त नहीं कर पाते।
अनेक काम बदलने के बाद भी हानि उठाते हैं। हृदय रेखा पर रुकने पर भी व्यक्ति को स्थायित्व देर से मिलता है क्योंकि ये निजी हितों के प्रति लापरवाह होते हैं और दूसरों के प्रभाव में शीघ्र ही आते हैं। अत: देर से ही अपने पैरों पर खड़े हो पाते हैं।

चन्द्रमा से भाग्य रेखा निकलने पर निर्दोष होकर, यदि शनि पर गई हो तो ऐसे व्यक्ति मस्त स्वभाव के होते हैं व अंगूठा सख्त या कम खुलने वाला हो तो मनमानी करने वाले होते हैं। इनकी निर्णय शक्ति उत्तम होती है परन्तु यदि हाथ में अधिक रेखाएं हो तो अधिक देर तक सोचने की प्रवृत्ति होती है और निर्णय भी स्पष्ट महीं होता। ऐसे व्यक्तियों को दूसरों से स्वाभाविक ही सहायता मिलती है । (नितिन पामिस्ट)

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