Monday, February 19, 2018

Which Palm Should Be Seen First - How To Learn Palmistry

Which Palm Should Be Seen First - How To Learn Palmistry

A palmist should see both the palms if lines are not very clear in one palm in that case second palm should be studied. An independent or right handed person, male/female's right hand should always be seen first.


A palmist should see both the palms if lines are not very clear in one palm in that case second palm should be studied. An independent or right handed person, male/female's right hand should always be seen first. 

Whereas these person, male or female who are dependent, disabled or lefty their left hand should be seen first. Sachin Tendulkar is a lefty (left hander) so his left hand should be seen first. Kiran Bedi is a powerful and an independent lady, So her right palm should be seen first. It is generally a trend that ladies left hand should be seen first because they are beautiful.

It is only a misconception. While examining a palm the first priority should be given to the structure, color, fingers, thumb, nails of the palm. After that main line in the palm and planet should be studied. Before (interpretation), remember your favorite deity. As it enhances self confidence, steadiness and energy for absolute powers.

Mount Of Mars In Palmistry In Hindi | Hast Rekha

जीवन रेखा के प्रारंभिक स्थान के नीचे, इसी रेखा से घिरे हुए शुक्र स्थान के ऊपर फैला हुआ भाग मंगल का पर्वत कहलाता है।



मंगल क्षेत्र  (Mars) - Hastrekha


हथेली में मंगल के दो स्थान माने गए हैं :

(1) जीवन रेखा के प्रारंभिक स्थान के नीचे, इसी रेखा से घिरे हुए शुक्र स्थान के ऊपर फैला हुआ भाग मंगल का पर्वत कहलाता है।

(ii) मंगल के प्रथम क्षेत्र के ठीक विपरीत दिशा में हथेली के किनारे पर हृदय और मस्तिष्क रेखा के बीच का स्थान मंगल का दूसरा क्षेत्र माना गया है।

संक्षेप में मंगल का प्रथम क्षेत्र जातक को शारीरिक रूप से प्रभावित करता है और दूसरा क्षेत्र जातक को मानसिक रूप से प्रभावित करता है। यदि प्रथम क्षेत्र सुविकसित हो तो जातक संघर्ष करनेवाला होता है।

हिंसा और क्रोध की भावना प्रकट होते देर नहीं लगती। ऐसे जातक अपने को उन्मुक्त समझते हैं।


अपने कार्य में किसी का हस्तक्षेप या अपने ऊपर किसी का नियंत्रण इन्हें स्वीकार नहीं होता। ये नेतृत्व करने की क्षमता रखते हैं और मात्र इसी गुण के कारण सामान्य बुद्धि के होने पर भी उच्च एवं उच्चतम पद तक पहुँचकर अपने उत्तरदायित्व को संभाल लेते हैं। अपने उद्देश्य की पूर्ति में किसी बाधा की परवाह नहीं करते। हठी बन जाते हैं। उनका निर्णय पत्थर की लकीर होता है। बनाई गई योजना को पूरा किए बिना चैन नहीं होता।

वे अपने गुरुजनों या अभिन्न मित्र तक के विचारों को भी टालने में नहीं हिचकते यदि उन्हें स्वयं नहीं जैच रहा हो। अपने कार्य एवं विचारों में दखल देखकर विरोध करने के प्रसंग में लड़ाई-झगड़ा भी करना पड़े तो ये चूकते नहीं हैं। क्रोध इनका अस्थायी होता है। अभी आया, अभी गया। कभी-कभी तो ये क्षणभर बाद ही अपने किए पर पश्चाताप करने लगते हैं।

यह सब मंगल के प्रथम क्षेत्र के विकसित होने का प्रभाव है। ऐसे जातक की यदि मस्तिष्क रेखा सुंदर सुस्पष्ट नहीं हो तो स्पष्ट है कि सोचने-समझने की क्षमता कम होगी। परिणामतः जातक क्रोध का शिकार बनकर समय-समय पर संकट में धिर जाता है। उन्हें अपने आप पर नियंत्रण नहीं होता।

ऐसा भी होता है कि स्वयं क्रोध में जल रहे होते हैं, पर सामने से जीवन की दिशा को ही बदलनेवाला अवसर निकल जाता है। ऐसे जातक अपने जीवन में प्रेम और गृहस्थी के क्षेत्र में सुखी नहीं माने जाते। ऐसा योगायोग कम ही होता है ऐसे जातक को कि उसके दांपत्य जीवन में दरार न पड़े। नितिन कुमार पामिस्ट

यदि ऐसी दरार न भी पड़े तो फिर पुत्र या पुत्रों के साथ अवश्य पड़ती है। पिता और पुत्र के बीच दूरी होती है। यदि सभी पुत्रों से न भी हो तो कम से कम प्रथम पुत्र का मानसिक विचार तो अवश्य ही भिन्न होता है। इन्हें ज्वर एवं रकतदोष की शिकायत की संभावना रहती है। मस्तिष्क की मिगी आदि जैसी बीमारी होने की संभावना रहती है।

सिरदर्द, दंतरोग आदि के भी शिकार हो सकते हैं। यदि मस्तिष्क रेखा टूटी जैसी हो तो वृद्धावस्था में ही सही लेकिन मूच्छा, चक्कर आदि जैसे कष्ट होते ही हैं। इन्हें प्रारंभ से ही अपने आपको नियंत्रण में रखने का अभ्यास करना चाहिए। नशासेवन इनके लिए विशेष अहितकर है। यद्यपि नशासेवन इनकी कमजोरी होती है।

शांतिपूर्ण नीद इनके लिए सेवनीय है। मनोरंजन के लिए कुछ क्षण निकालना इनके लिए हितकर होता है। नितिन कुमार पामिस्ट

यदि जातक क्रोध जैसे दुर्गुण पर नियंत्रण रख सकें तो जीवन में अपने लक्ष्य पर पहुँचने में सफल होते हैं। मंगल का प्रथम क्षेत्र यदि अति विकसित हो तो जातक स्वभाव से दुराचारी, अत्याचारी, झगड़ालू और अपनी सही-गलत बातों में अनुचित समर्थन पाने का प्रयास करता है। यदि झुकाव शुक्र की पर्वत की ओर हो तो बनावटी या व्यर्थ का आडंबर प्रदर्शन में रुचि रखता है। स्वयं डरपोक स्वभाव के होने पर भी दूसरों के सामने बहादुरी का प्रदर्शन करता है।

मंगल पर्वत पर क्रॉस (Cross X) का चिहन दिखलाई दे तो उस व्यक्ति की मृत्यु निश्चय ही युद्ध में या चाकू लगने से होती है। यदि स्पष्ट किसी क्रास का चिहन न हो और आड़ी-तिरछी रेखाओं से जालसदृश रचना बनी हो तो मृत्यु दुर्घटना से होगी।

यदि द्वितीय क्षेत्र का मंगल विकसित हो, जैसा कि प्रारंभ में ही कहा गया है, तो इसका स्थान प्रथम क्षेत्र के सामने विपरीत दिशा में हदय और मस्तिष्क रेखा के बीच में होता है। यह पर्वत जिस जातक के हाथ में विकसित होता है वह प्रथम क्षेत्र विकसित वाले जातक से पूर्णतः भिन्न, विपरीत होता है।

जहाँ प्रथम क्षेत्र वाले जातक शारीरिक रूप से निडर, जोशीले, क्रोधी एवं आवेशपूर्ण होते हैं, वहीं द्वितीय क्षेत्र वाले लड़ाई-झगड़े से दूर रहना चाहते हैं, रक्तपात देखना या करना इनके वश की बात नहीं। नितिन कुमार पामिस्ट

हाँ, इसका अर्थ यह नहीं कि ये लड़ते नहीं है। लड़ते हैं ये भी पर मानसिक रूप से। बुद्धि की लड़ाई में ये प्रथम क्षेत्र वाले को बहुत पीछे छोड़ देते हैं। ये बातों को सही ढंग से कहने या तर्कयुक्त बहस के जरिए ही अपनी समस्या को सुलझाने में सफल होते हैं। प्रथम क्षेत्र वालों की तुलना में हठी ये भी कम नहीं होते, पर अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए कभी तलवार उठाने के पक्ष में नहीं होते।

अपने प्रतिस्पर्धी के साथ भी ये हाँ में हाँ मिलाते रहते हैं, पर अवसर पाते ही अपना उल्लू सीधा कर प्रतिस्पधी या विरोधी को पराजित कर देते हैं। ये अच्छे संगठनकर्ता होते हैं।

ये युद्धकर्ता नहीं, युद्ध के संयोजक होते हैं। अपनी योजना में सफल होने के लिए हर तरह की कूटनीति का प्रयोग करते हैं। चाहे इन्हें अपने विरोधी के प्रति विश्वासघात ही क्यों न करना पड़े, ये नहीं हिचकते। यदि हथियार के रूप में इन्हें इस्तेमाल करने के लिए तलवार और विष दिया जाए तो ये विष ही पसंद करेंगे क्योंकि तलवार इनके वश की बात नहीं होती। ऐसे जातक रहस्यपूर्ण आकर्षण के केंद्र होते हैं। अतः ये अपने इस गुण का दूसरों पर जाने-अनजाने प्रयोग भी करते हैं।

ये सफल सम्मोहक (Hypnotist) हो सकते हैं और गुप्त विद्या के ज्ञाता भी। ये इनके रुचि का विषय होते हैं। यदि मस्तिष्क रेखा सुंदर सुस्पष्ट हो एवं सोचविचार की क्षमता अच्छी हो तो ये अपने उपरोक्त गुणों का उपयोग लोगों की भलाई में ही करते हैं। ऐसे जातक सफल चिकित्सक या वैज्ञानिक हो सकते हैं।

क्योंकि प्रथम क्षेत्र वाले यदि शारीरिक शक्ति वाले होते हैं तो द्वितीय क्षेत्र वाले मानसिक शक्ति से संपन्न होते हैं। इनमें मानसिक शक्ति की तेजी इतनी अधिक होती है कि जिस कार्य का प्रशिक्षण पाते हैं वही काम कर नहीं पाते, क्योंकि प्रशिक्षण समाप्त होते-होते इनके विचार ही बदल जाते हैं। जहाँ लाभ ही लाभ दिखता था, वहाँ अब कोई आकर्षण ही नहीं होता।

यही कारण है कि अपने गुणों से संपन्न होने के बावजूद जीवन को ठीक से संवारने में जातक सफल नहीं हो पाता। पर हाँ, यदि मस्तिष्क रेखा बलवान हो तो जातक अपने सुलझे विचारों से किनारा ढूंढ़ लेता है एवं ऐसे दुर्गुणों से बच जाता है। सफलता प्राप्त कर लेता है। नित्य व्यवसाय नही बदलता।

अनुकरणशीलता ऐसे जातक में विचित्र तरह की होती है। चाहे अच्छी संगति की हो या बुरे की। जिस वातावरण में होते हैं उसी में बुरी तरह से रैंग जाते हैं। ये अपने अणुओं से भी आगे हो जाते हैं। बुरी संगति में होते हैं तो कुकर्मों में आगे बढ़ जाते हैं। अच्छी संगति में होते हैं तो सद्गुणों में आगे निकल जाते हैं। नितिन कुमार पामिस्ट

प्रौढ़ावस्था के बाद पाचनक्रिया में कुछ गड़बड़ी एवं गुरदे में दोष उत्पन्न होने की संभावना रहती है। मोटापा के भी शिकार हो सकते हैं। इन्हें यथासाध्य अश्लील वातावरण एवं पुस्तकों से दूर रहना चाहिए।

नितिन कुमार पामिस्ट

Mount Of Moon In Palmistry In Hindi | Hastrekha

चंद्र पर्वत या चंद्र क्षेत्र शुक्र पर्वत के विपरीत भाग में, हथेली के मूल स्थान पर , मस्तिष्क रेखा के अंतिम सिरे से नीचे माना गया है।

चंद्र (Moon) क्षेत्र - Hastrekha Shastra



चंद्र पर्वत या चंद्र क्षेत्र शुक्र पर्वत के विपरीत भाग में, हथेली के मूल स्थान पर , मस्तिष्क रेखा के अंतिम सिरे से नीचे माना गया है। यह क्षेत्र जिनमें (जिनके हथेली पर) विकसित होते हैं उनमें कल्पना शक्ति, आवेशपूर्ण कलात्मक प्रकृति, इनमें कल्पना बहुत अधिक होती है। जो कुछ भी बोलते हैं या करते हैं उनमें कल्पना का आधार होता है।


ये रोमांटिक स्वभाव के तो होते हैं पर वहाँ आदर्शवादी सिद्धांत को ध्यान में रखते हैं। वासना के शिकार नहीं होते। किसी भी काम में इन्हें पिटेपिटाए सिद्धांतों का प्रयोग पसंद नही होता।

ये अपने कल्पना से रचेरचाए तर्क से युक्त बुद्धि का प्रयोग कर आमूल परिवर्तन चाहते हैं जो कि वस्तुत: प्रशंसनीय भी प्रमाणित होता है।

ये आविष्कार, कला एवं संगीत के क्षेत्र में भी रुचि तो रखते हैं पर गुप्त विद्याओं एवं किसी भी तरह के रहस्यों के प्रति इनका आकर्षण अपेक्षाकृत अधिक होता है। जानेमाने हस्तरेखाविदों के अनुसार चंद्र क्षेत्रप्रधान व्यक्ति में चंद्र के समान आकर्षण शक्ति होती है। जैसे चंद्रमा के चारों ओर तारे बिखरे हुए चंद्रमा की शोभा बढ़ाते हैं ठीक वैसे ही अन्य व्यक्ति इस चंद्रप्रधान व्यक्ति की प्रतिष्ठा बढ़ाते हैं।

ऐसे जातक में यह आकर्षण शक्ति तब और अधिक बढ़ जाती है जब चंद्रमा आकाश में अपने पूर्ण कलाओं से देदीप्यमान होता है। ये विचार से उच्च होते हैं।

दूसरों की भलाई से कभी नहीं हिचकते। किसी व्यक्तिगत की अपेक्षा सार्वजनिक कार्यों की ओर अधिक रुचि होती है। स्वभाव से दयालु एवं भावनाप्रधान होने से लोगों की भलाई तो करते हैं, पर कभी-कभी यह भलाई भी इन्हें कलंकित कर बदनामी का रास्ता प्रशस्त कर देती है।

फिर भी ये भलाई करने से बाज नहीं आते, क्योंकि ये स्वभाव से धार्मिक भी होते हैं। यदि चंद्र क्षेत्र अति विकसित हो तो फिर कलकित होते हैं।

जातक कल्पना की दुनियाँ में इस तरह विचरण करने लगते हैं कि पागलपन तक की संज्ञा दे दी जाती है। रोमांस के क्षेत्र में आदर्श के सिद्धांत वासना के शिकार हो जाते हैं। अपने-पराए का विचार भी नहीं रह जाता। नितिन कुमार पामिस्ट

आस्तिकता धर्म में विश्वास के बदले धमाँधता या धमौमतता का रूप ले लेती है। इन्हें जलभय रहता है, अत: जलयात्रादि से यथासाध्य बचने का प्रयास करना चाहिए।

स्नायविक शिथिलता, हृदय की धड़कन, हृदय की दुर्बलता, पक्षाघात जैसे रोगों के अतिरिक्त गठिया, पाचनसंस्थान के रोग, यकृत आदि की खराबी की भी संभावना रहती है।

नितिन कुमार पामिस्ट

Jeevan Rekha In Palmistry In Hindi | Hastrekha

हस्तरेखा में जीवन रेखा का परिचय 

हस्त रेखा पद्धति में अंगूठे के तीसरे पोर को घेरने वाली रेखा आयु रेखा कहलाती है। अगर यह रेखा दोनों हाथों में स्पष्ट रूप से गोलायी युक्त हो तो आयु का निश्चित प्रमाण भली प्रकार आंका जा सकता है।

जीवन या आयु रेखा

हस्त रेखा पद्धति में अंगूठे के तीसरे पोर को घेरने वाली रेखा आयु रेखा कहलाती है। अगर यह रेखा दोनों हाथों में स्पष्ट रूप से गोलायी युक्त हो तो आयु का निश्चित प्रमाण भली प्रकार आंका जा सकता है। 

यहां एक प्रश्न बड़ा रोचक सामने आता है कि जीव के साथ कर्म भी बुरी तरह चिपका होता है । ऐसी स्थिति में भाग्य को कैसे जाना जाय तो यह जानना भी आवश्यक हो जाता है कि कर्म भी दो प्रकार के होते हैं, निवार्य और अनिवार्य यानी जिसका निवारण हो सके और दूसरा जो जरुरी है। 

जैसे-ं2 कभी-ं2 किसी हाथ में संतान रेखा नहीं होने से यह स्पष्ट है कि उसके भाग्य में संतान नहीं है परन्तु उससे सम्बन्धी निवार्य कर्म करने से यानी किसी प्रकार का अनुष्ठान, उपाय आदि करने से उसे पुत्र या पुत्री की प्राप्ति होती है।

भारतीय शास्त्रों और धर्म ग्रंथों में इसके अनेक प्रमाण पाये गये हैं। जैसे महाराजा दशरथ का तीन विवाह हुआ। परन्तु संतान न होने से वे उसका निवार्य कर्म किये जिसका नाम पुत्रेष्टि यज्ञ था। भारतीय दर्शन कर्म को प्रधान मानता है, कर्म करना और आगे प्रगति करना मनुष्य का लक्ष्य है, इसमें हस्तरेखा अत्यन्त सहायक है।

भारतीय पौर्वात्य पद्धति में इस आयु रेखा को पितृ रेखा भी कहते हैं। यह 11 प्रकार की मानी गयी हैः-ंगज रेखा, सगू-सजय़ देहा, विगू-सजय़ देहा, परगू-सजय़ देहा, निगू-सजय़ देहा, अतिलक्ष्मी सुख भोग दात्री, कुबुद्धिकारी, सर्वसौख्य विनाशिनी तथा गौरी, रमा। मनुष्य अपने आयु काल में ही भौतिक सुखों दुखों का भोग करता है। आयु ही मनुष्य का जीवन है। अतः आयु रेखा ही हस्त रेखाओं में प्रधान रेखा है।

बीसवीं सताब्दी में संसार में सबसे अधिक आयु वाला यूक्रेन प्रान्त है (काला सागर के उपर) भारत में मध्य प्रदेश और असम के व्यक्ति की आयु रेखा काफी लम्बी होती है इसी कारण वे दीर्घ जीवी होते हैं।

आयु रेखा जितनी स्पष्ट एवं गोलायी में होगी, वह व्यक्ति असाधारण रूप से महत्वाकांक्षी कार्य कुशल और यश को प्राप्त करने वाला होता है। वह व्यक्ति किस कार्य में सफलता प्राप्त करेगा यह निर्णय पर्वत की प्रधानता से किया जाता है।

जीवन रेखा शुक्र क्षेत्र को सीमित करेगी, तो व्यक्ति में सहानुभूति, वासना, यौन इच्छाओं की कमी पायी जाती है। जीवन रेखा की लम्बाई कम होने से व्यक्ति अल्पायु होता है अर्थात जीवन रेखा द्वारा जितनी अधिक सीमा बनेगी, उस व्यक्ति में उतना ही शुक्रीय गुण अधिक होगा। 

यदि जीवन रेखा कटी फटी या टूटी हुई हो तो मानसिक तौर पर अस्वस्थ बनाती है तथा सदा रुग्ण एवं चिड़चिड़ा स्वभाव युक्त रहता है। समान्यतः वही रेखायें प्रकट होती हैं, जिनका मानव शरीर पर प्रभाव होता है।

व्यक्ति के जीवन में योग क्रिया या विशेष परिस्थिति द्वारा परिवर्तन होने पर रेखायें अपना नया मार्ग चुन लेती है। ऐसी स्थिति में यह भी प्रश्न उठ सकता है कि उस हालत में भविष्यवाणी किस प्रकार की जाय? इसके उत्तर में यह परिवर्तन दाहिने हाथ में ही होता है। घटनाओं का संकेत बायें हाथ एवं पर्वतों से मिल सकता है।

सम्पूर्ण जीवन का लेखा जोखा इस आयु रेखा से ही होता है, समय या काल उस रेखा या नक्से का अंग नहीं है। जीवन का घटना चक्र इतना विस्तृत है कि उसमें हमारी हजारों यात्रायें उसी अकेली रेखा के थोड़े से भाग में समायी हुई है।




1. आयु रेखा और मष्तिष्क रेखा दोनों एक स्थान पर प्रारम्भ में मिलती हैं, तो व्यक्ति अपनी शक्ति और उत्साह से कार्य में प्रगति करेगा, वह सतर्क तो रहेगा, पर थोड़ी सी संवेदनशीलता भी होगी।





2.यदि आयु रेखा और मष्तिष्क रेखा में शुरु के स्थान परस्पर दूरी होगी, तो व्यक्ति में जरुरत से ज्यादा आत्म विश्वास एवं किसी भी विषय पर बोलने की क्षमता होती है। (दूरी का अर्थ है कि एक इंच का पांचवा या छठां भाग) ऐसी हालात में व्यक्ति दूसरों की कम सुनता है और स्वतंत्र विचार धारा का होता है और प्रायः नौकरी करने में असफल रहता हैं।





3. जीवन रेखा बृहस्पति क्षेत्र से शुरु होने पर व्यक्ति बचपन से ही महत्वाकांक्षी होता है। जीवन रेखा, हृदयरेखा, शीर्ष रेखा का एक साथ जुड़ा होना अत्यन्त दुर्भाग्य का सूचक है, वह इस बात की सूचना देता है कि बुद्धिहीनता या आवेश के कारण महा विपत्ति में डालेगा।





4.जीवन रेखा जब मध्य में विभाजित होकर उसकी शाखा चन्द्र क्षेत्र के मूल स्थान को जाती है तो एक अच्छी बनावट के दृ-सजय़ हाथ का व्यक्ति अस्थिर होता है। उसे यात्रायें ज्यादा पसंद आती है। अगर मुलायम हाथ हो शीर्ष रेखा -झुकी हो, तो व्यक्ति उत्तेजनापूर्ण अवसरों के लिए लालायित रहता है, और इस प्रकार की उत्तेजना किसी दुष्कर्म या शराब पीने से शान्त होती हैं। 







5. जो रेखाएं जीवन रेखा से निकल कर ऊपर की ओर जाती है, वे अधिकारों में वृद्धि, आर्थिक लाभ और सफलता की सूचक होती हैं।











6. अगर ऊपर की ओर जाती हुई रेखा जीवन रेखा से निकल कर सूर्य क्षेत्र की ओर जाये तो व्यक्ति में कुछ विशेष गुण पाये जाते हैं।







7. उपर्युक्त रेखा अगर बुध क्षेत्र की ओर जाये तो व्यापार और विज्ञान के क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।






8. अगर जीवन रेखा अंत में दो शाखाओं में बंट जाय और दोनों शाखाओं
के बीच की दूरी अधिक हो तो व्यक्ति की मृत्यु अपने जन्म स्थान से अन्य क्षेत्र में होती है।







9. यदि जीवन रेखा के आरम्भ में द्वीप का चिह्न हो तथा वह बीमारी हालात के पश्चात भी बना रहे, तो उस व्यक्ति का जन्म रहस्यपूर्ण होता है।






10. जीवन रेखा पर वर्ग अत्यन्त शुभ और सुरक्षा का लक्षण माना जाता है। जीवन रेखा के अनुकूल दिशा में सीधी रेखाएं शुभ और आड़ी-ंतिरछी व काटती हुई रेखाएं अशुभ मानी जाती है।





11. यदि कोई रेखा मंगल पर्वत से ऊपर उठती हुई नीचे आकर जीवन रेखा को काटती है या स्पर्श करती है तो ऐसी रेखा वाली स्त्री का पहले किसी व्यक्ति के साथ अनुचित सम्बन्ध रहा था, जो उसके लिए संकट का कारण रहा था।






12. यदि जीवन रेखा के भीतर की ओर छोटी रेखा समान्तर में साथ चलती है, तो स्त्री के जीवन में आने वाला पुरुष नम्र प्रकृति का होगा।










13. आयु रेखा अगर अंगूठे की जड़ से शुरु होगी तो उस व्यक्ति को संतान की प्राप्ति नहीं होगी।









14. आयु रेखा की शुरुआत में जंजीरनुमा होने से व्यक्ति कार्य के शुरुआत में बुद्धि को स्थिर नहीं रख पाता, हर कार्य में उतावलापन होता है, इस कारण कभी-ंकभी असफलता का मुंह देखना पड़ता है। मनःस्थिति भी संकुचित हो जाती है।






15. यदि आयु रेखा को प्रारम्भ में कोई अन्य रेखा काट रही है तो दमा सम्बन्धी हृदय या फेफड़े आदि का रोग होता है। प्रायः सर्दी जुकाम एवं स्नोफिल से संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ता है।





16. शनि पर्वत से कोई मोटी रेखा आकर आयु रेखा को काट दे तो पशु द्वारा व्यक्ति को चोट आ सकती है। ऐसे लोगों को पशु संबंधित कार्य करते समय संवेदनशील रहना चाहिए, ताकि भविष्य की घटनाओं से सुरक्षा मिल सके।


यह रेखा शास्त्र के अनुसार शायद कुछ महान पुरुषों में पायी गयी है। जैसे आज अनेक व्यक्तियों को सिंह, हाथी, मगरमच्छ आदि के द्वारा मृत्यु होती है। ऐसे लोगों में अधिकांशतः सर्कस के कार्यकर्ता पाये जाते हैं।


जीवन रेखा और रोग



 जीवन रेखा से नीचे की ओर गिरती शाखायें, तारक, (स्टार) चिह्न होने से री-सजय़ की हड्डी से सम्बन्धी बीमारी होती है।

जीवन रेखा से शनि पर्वत पर उपस्थित जाली क्रास चिह्न तक जाने से पित्त सम्बन्धी बीमारी होती है।

जीवन रेखा को काटकर स्वास्थ्य रेखा से मिलती हुई लहरदार रेखा पित्त ज्वर उत्पन्न करती है।

जीवन रेखा पर वृत्त अथवा धब्बा होने से नेत्र की बीमारी होती है।

जीवन रेखा को काट कर रेखा जाल युक्त प्रथम मंगल पर जाती रेखा रक्त विकार एवं खांसी उत्पन्न करती है।

जीवन रेखा के साथ-ंउचयसाथ जाती हुई मष्तिष्क रेखा, मष्तिष्क ज्वर उत्पन्न करती है।

जीवन रेखा पर सफेद विन्दु होने से मोतियाविन्द या आंख की अन्य बीमारी होती है।

जीवन रेखा को यदि स्वास्थ्य रेखा काटती है तो पाचन सम्बन्धी बीमारी होती है।

जीवन रेखा को काटकर सूर्य क्षेत्र तक जाती रेखा सूर्य पर्वत पर रेखा समूह अथवा गुणक चिह्न होने से हृदय सम्बन्धी बीमारी होती है।

जीवन रेखा पर द्वीप तथा आड़ी रेखाओं से भरा हाथ मानसिक अशान्ती का द्योतक है।

जीवन रेखा पर उपस्थित द्वीप को काटती एक रेखा आंख की शल्य चिकित्सा का संकेत देती है।

Star On Hand In Hindi | Hastrekha

नक्षत्र (स्टार

हाथ में केवल अशुभ लक्षण देखकर किसी निर्णय पर पहुँच जाना अनुचित है। 

मानव हाथ में गौण एवं मुख्य रेखाओं के साथ-ंसाथ अनेक प्रकार के चिह्न भी पाये जाते हैं जिनमें मुख्यतः विन्दु, क्रास, वर्ग, जाल, तारे (स्टार) त्रिभुज, वृत्त, द्वीप, मत्स्य, पेड़, धनुष, कमल, सर्प आदि हैं।



हस्तरेखा और नक्षत्र चिन्ह 

बुध क्षेत्र पर नक्षत्र निशान होने पर व्यक्ति कुशाग्र (तीक्ष्ण) बुद्धि का होता है एवं समाजसेवी, परोपकारी, तथा व्यवसायी बनता है।

मंगल क्षेत्र -ं मंगल क्षेत्र पर हो तो व्यक्ति शूरवीर, धैर्यवान एवं साहसी होता है तथा युद्ध में वीरता के कार्य से देशव्यापी सम्मान मिलता है।

गुरु क्षेत्र -ं गुरु क्षेत्र पर होने से व्यक्ति को जीवन में शक्ति, अधिकार, पद, कीर्ति और धन की प्राप्ति होती है। उसकी समस्त कार्य क्षमतायें उन्नति की ओर अग्रसर होने लगती हैं, शीघ्र ही वह सम्मानीय पद प्राप्त कर लेता है एवं जीवन में अचानक धन की प्राप्ति भी होती है।

शुक्र पर्वत -ं शुक्र पर्वत पर नक्षत्र का चिह्न होने से व्यक्ति काम भावनाओं के प्रति अग्रसर रहता है तथा प्रेम के क्षेत्र में सफल होता है एवं सुंदर स्त्री प्राप्त करता है।

शनि क्षेत्र -ं शनि क्षेत्र में होने से व्यक्ति सही दिशा में चिन्तन करने वाला भाग्यवान होता है तथा प्रसिद्धि प्राप्ति होती है, परन्तु बु-सजय़ापे में आराम और सम्मान नहीं मिलता है।

रवि क्षेत्र -ं रवि क्षेत्र पर नक्षत्र का चिह्न होने से व्यक्ति जीवन में पूर्ण ऐश्वर्य का भोग करता है एवं किसी भी प्रकार की कमी नहीं होती तथा मानसिक शान्ती बनी रहती है।

चन्द्र क्षेत्र -ंचन्द्र क्षेत्र पर नक्षत्र का चिह्न होने से व्यक्ति उच्च स्तर का कलाकार होता है तथा काव्य के माध्यम से धन और यश प्राप्त करता है।

राहु क्षेत्र -ं राहु क्षेत्र में होने से भाग्य हमेशा साथ देती है तथा अच्छी कीर्ति प्राप्त होती है।

केतु क्षेत्र -ं केतु क्षेत्र पर नक्षत्र का चिह्न होने से व्यक्ति का बाल्यकाल सुखी होता है तथा धन की कमी नहीं होती है।

आयु रेखा -ं आयु रेखा पर यह निशान होना अशुभ माना गया है। 

विवाह रेखा पर स्टार होने से विवाह सम्बन्धी अनेक अड़चने आती है तथा वैवाहिक जीवन
सुखी नहीं होता।

हृदय रेखा -ंउचय पर स्टार होने से हृदय सम्बन्धी बीमारी होती है। 

अंगूठे पर नक्षत्र होने से इच्छा शक्ति प्रबल होती है।

सौजन्य  - सरल हस्तरेखा पुस्तक 

Island On Hand In Hindi | Hast Rekha

द्वीप


हाथ में केवल अशुभ लक्षण देखकर किसी निर्णय पर पहुँच जाना अनुचित है। मानव हाथ में गौण एवं मुख्य रेखाओं के साथ-ंसाथ अनेक प्रकार के चिह्न भी पाये जाते हैं जिनमें मुख्यतः विन्दु, क्रास, वर्ग, जाल, तारे (स्टार) त्रिभुज, वृत्त, द्वीप, मत्स्य, पेड़, धनुष, कमल, सर्प आदि हैं।
हस्तरेखा मछली चिन्ह, यव का चिन्ह, हथेली में मछली का चिन्ह, हथेली पर शंख, हथेली पर त्रिशूल, हस्तरेखा का चित्र, हथेली पर त्रिभुज, गुरु पर्वत पर चतुर्भुज
हस्तरेखा और द्वीप चिन्ह 

हाथ में केवल अशुभ लक्षण देखकर किसी निर्णय पर पहुँच जाना अनुचित है। मानव हाथ में गौण एवं मुख्य रेखाओं के साथ-ंसाथ अनेक प्रकार के चिह्न भी पाये जाते हैं जिनमें मुख्यतः विन्दु, क्रास, वर्ग, जाल, तारे (स्टार) त्रिभुज, वृत्त, द्वीप, मत्स्य, पेड़, धनुष, कमल, सर्प आदि हैं।

हाथ में द्वीप का होना अधिक शुभ नहीं माना जाता है। द्वीप का सम्बन्ध जिस रेखा एवं क्षेत्र से होता है, उनमें अधिकतर बुराइयों से सम्बन्धित होता हैं।

उदाहरण के तौर पर जीवन रेखा पर होने से विरासत में मिली दुर्बलता या रोग का सूचक होता है।

जब यह द्वीप सूर्य रेखा पर हो तो यह यश और प्रतिष्ठा की हानि का सूचक होता है या किसी प्रकार की बदनामी अथवा अपयश का सामना होता है।

भाग्य रेखा पर होने से सांसारिक कार्यों में हानि का सूचक है।

मस्तिष्क रेखा के केन्द्र में स्पष्ट चिह्न के रुप में होने से मानसिकता से सम्बन्धी पैतृक दुर्बलता का लक्षण है।

हृदय रेखा पर होने से विरासत में मिली हृदय से सम्बन्धी बीमारी का सामना करना होता है।
स्वास्थ्य रेखा पर होने से गम्भीर रोग का सूचक है।

यदि कोई रेखा द्वीप में मिल रही हो या फिर द्वीप बनाती हो तो यह हाथ के जिस भाग में होगा उसके सम्बन्ध में एक बुरा लक्षण है।

यदि शुक्र पर्वत पर एक सहायक रेखा द्वीप में मिल रही हो तो यह जीवन को प्रभावित करने वाले स्त्री, पुरुष के लिए काम वासना के कारण परेशानी उत्पन्न कर सकता है।

शुक्र पर्वत की ओर से द्वीप बनाती हुई कोई रेखा यदि विवाह रेखा तक जाती है, तो उस विन्दु पर विवाह से सम्बन्धी या अन्य प्रकार से बदनामी होगी। 

इसी प्रकार अन्य कोई रेखा हृदय रेखा की ओर जाती हो तो प्रेम सम्बन्धों में बदनामी और संकट उत्पन्न करेगी।

गुरु पर्वत पर होने से आत्मविश्वास और आकांक्षा को आघात पहुंचाता है।

शनि पर्वत पर होने से व्यक्ति को दुर्भाग्य का शिकार बनाता है।

चन्द्र पर्वत पर होने से कल्पना की क्षमता को प्रभावित करता है।

मंगल पर्वत पर होने से भावना की कमी और कायरता उत्पन्न करता है।

बुध पर होने से परिवर्तनशील बनाता है। (व्यवसाय या विज्ञान क्षेत्र में)

शुक्र पर होने से काम संवेग एवं कल्पना के क्षेत्र में परिचालित होने का संकेत देता है।


सौजन्य  - सरल हस्तरेखा पुस्तक 

Circle Sign On Hand In Hindi | Palmistry

विभिन्न प्रकार के चिह्न


हाथ में केवल अशुभ लक्षण देखकर किसी निर्णय पर पहुँच जाना अनुचित है।
हथेली पर मछली का चिन्ह ,यव का चिन्ह, गुरु पर्वत पर चतुर्भुज, हाथ में त्रिभुज, , सूर्य पर्वत
, हथेली पर त्रिभुज, बुध पर्वत, चंद्र पर्वत
हस्तरेखा और बिंदु चिन्ह 

हाथ में केवल अशुभ लक्षण देखकर किसी निर्णय पर पहुँच जाना अनुचित है। 

मानव हाथ में गौण एवं मुख्य रेखाओं के साथ-ंसाथ अनेक प्रकार के चिह्न भी पाये जाते हैं जिनमें मुख्यतः विन्दु, क्रास, वर्ग, जाल, तारे (स्टार) त्रिभुज, वृत्त, द्वीप, मत्स्य, पेड़, धनुष, कमल, सर्प आदि हैं।

विन्दु-ंविन्दु प्रायः अस्थायी रोग परिचायक है, एक चमकीला और लाल विन्दु यदि:-ं मस्तिष्क रेखा पर होगा तो किसी आघात या गिरने के कारण घायल अथवा चोट का निशान होगा। भूरा अथवा नीला विन्दु स्नायु रोग का चिह्न है।

  •  स्वास्थ्य रेखा पर चमकीला लाल विन्दु प्रायः बुखार होने की सूचना देता है।
  •  जीवन रेखा पर होने से बीमारी का द्योतक है, जो ज्वर प्रकृति का होगा।
  • काला विन्दु धन-ंदौलत की प्राप्ति का संकेत देता है सफेद विन्दु उन्नति का सूचक है। 
  •  मंगल रेखा पर काला विन्दु होने पर व्यक्ति कायर होता है।
  •  बुध क्षेत्र पर होने से व्यक्ति धोखेबाज अथवा ठग होता है।
  •  गुरु क्षेत्र पर होने से विवाह में अड़चनें और अपयश होता है।
  •  शुक्र क्षेत्र में काला विन्दु होने से व्यक्ति कामपिपासु होता है, पर गुप्तांगों में बीमारी होने से अपनी काम पिपासा को शान्त नहीं कर पाता। ऐसे लोग पत्नी या प्रेमिका द्वारा तिरस्कार किये जाते हैं।  
  •  शनि क्षेत्र में होने से प्यार के मामले में बदनामी तथा पति पत्नी में रंजिस।
  •  रवि क्षेत्र में काला विन्दु होने से प्रतिष्ठा प्रभावित होती है।
  •  राहु क्षेत्र में होेेेने से युवावस्था में धन की कमी, केतु क्षेत्र में बचपन से बीमार होता है।    
  •  चन्द्र क्षेत्र में होने से विवाह में देरी एवं प्रेम में निराशा। 
  •  भाग्य रेखा पर होने से भाग्योदय में बाधा।
  •  जीवन रेखा पर होने से लम्बी बीमारी। 
  •  विवाह रेखा पर होने से सिर में भारी चोट और हृदय दुर्बल होता है। 


सौजन्य  - सरल हस्तरेखा पुस्तक 

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हस्तरेखा में उंगलियो का महत्त्व 



अंगुलियों के पोर पर पाये जानेवाले रेखा चिह्न और उनका प्रभाव
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अंगुलियों के पोर पर पाये जानेवाले रेखा चिह्न और उनका प्रभाव

1). वज्राकृति गुस्से की आदत, निराशा की प्रवृत्ति शारीरिक अवयव अस्त-ंव्यस्त, यदा-ंकदा प्रेरणा दायक प्रवृत्ति, अपने सिद्धान्त पर जीने वाले, भावुक और कलात्मक आदि लक्षण वज्राकृति के व्यक्ति में होते हैं।

2). कुण्डली आकार नाड़ी केन्द्र में तकलीफ, हृदय सम्बन्धी परेशानी का सामना, पाचन क्रिया खराब, बौद्धिक स्तर अच्छा व्यक्ति और समाज में व्यवहारिक एवं स्नेही, प्रतिक्रिया
भावुक होती हैं।

3).  मिश्रित बदला लेने की भावना, आलोचनात्मक प्रतिशोध, कार्यकुशल एवं व्यवहारिक प्रवृत्ति, संग्रहात्मक, मानसिक उलझने, मोटापा, वायुविकार, वेचैनी आदि।

4). वर्तुलाकार अंगुलियों के पोर पर वर्तुलाकार होने पर व्यक्ति स्वतंत्र मनोवृत्ति का होता है। अपनी शंकल्प शक्ति द्वारा इच्छानुसार लचीलेपन एवं गुप्त आत्म रक्षा में दक्ष होता है, ऐसे
लोगों की पाचनक्रिया में खराबी होती है तथा हृदय से सम्बन्धी कुछ विमारियों का सामना करना पड़ता है।

5). यव आकृति आत्म रक्षा में हुसियारी गोपनीयता का गुण मनोवेग दमन करने की भावना, अविश्वासी, दूसरों पर संशय, पाचनक्रिया कमजोर पेट में फोड़ाफुंसी भ्रमण
की आदत कभी-कभी दोषपूर्ण उदासी आदि यव आकृति के व्यक्ति में पाये जाते हैं।


अंगुलियों एवं नखों का वर्णन 


रसाद रक्तं ततो मांस मांसान्मेदा जायते।
मेदसेऽस्थि ततो मज्जा ततः शुक्र सम्भवः।।

मानव की ऊर्जा हमेशा खर्च होती रहती है, ऐसी स्थिति में उसे आहार की आवश्यकता होती है। आयुर्वेद के अनुसार व्यक्ति के भोजन से रस बनता है रस से मांश, मांश से मेदा, मेदा से मज्जा, मज्जा से शुक्र बनता है।

शुक्र भोजन करने के 28 दिन के पश्चात् बनता है। प्रत्येक धातु का एक मैल भी निकलता है, परन्तु शुक्र धातु का कोई मैल नहीं निकलता। वह बिल्कुल शुद्ध होता है। 

नख हड्डी का मैल होता है। तर्जनी मध्यमा और अनामिका का गर्भावस्था में नख 124 दिन बाद पूरा आ जाता है। कनिष्ठा 121 दिन लेती है और अंगूठे का नख 140 दिन बाद पूरा निकलकर बाहर आता है।

नखों से विशेषतः शरीर की व्याधि और कुछ अन्य रोगों की जानकारी प्राप्त होती है। नखों पर होने वाला चिह्न किसी आने वाले अग्रिम खतरे को सूचित करता है।, साफ, और चैड़ा नख अच्छे स्वास्थ्य का सूचक होता है।


सात प्रकार के नखों वाली अंगुलियां


1. लम्बा नाखून लम्बे नाखून शारीरिक शक्ति के प्रतीक नहीं होते, इनकी अपेक्षा छोटे और चैड़े नाखून वालों की शारीरिक शक्ति अधिक होती है। 

ऐसे लोग ज्यादा बहसबाजी नहीं करते और न आलोचना करते हैं। कविता, कला, संगीत, चित्रकारिता आदि के प्रेमी होते हैं तथा सिरदर्द, गले में खराबी आदि की बीमारी होने की स्थिति उत्पन्न होती है।

2. छोटा नाखून छोटे नख वाले व्यक्ति तार्किक होते हैं तथा अन्य लोगों से भिन्न मतवाले होकर कठोर आलोचक होते है  

इनमें सोचने की शक्ति अधिक होती है। परन्तु निर्णय में उतावले होते हैं। दिल के कुछ कठोर होते है तथा उनमें सहन शक्ति कम होती है, कभी कभी तथ्य को न सम-हजय पाने की स्थिति में उसे मजाक बनाकर बच निकलते हैं, ऐसे लोगों में दिल के दौरे की बीमारी होने की सम्भावनायें पायी जाती हैं तथा चिड़चिड़ापन होता है।

3. चैकोर और छोटा नख यह सामान्य कमजेारी का सूचक होता है ऐसे लोगों में हृदय से सम्बन्धी अनेक रोग पाये जाते हैं। नख पर किसी प्रकार का गड्-सजया आदि होने पर डेगूं बुखार एवं आन्तरिक पीड़ा का संकेत पाया जाता है तथा बदला लेने की भावना इनमें खूब होती है।

4. त्रिभुजकार नख ऐसे नख वालों को गला, लकवा, और श्वास प्रवास से सम्बन्धी बीमारी होती है तथा ऐसे नाखून में चन्द्राकृति न होने पर व्यक्ति सनकी स्वभाव का होता है।

5. चौड़ा नख अच्छे स्वास्थ्य का संकेत है, ऐसे व्यक्ति खाने-ंपीने के शौकीन तथा स्वास्थ्य के धनी होते हैं।

6. उभरा हुआ नख ऐसे नख के स्वामी का फेफड़ा कमजोर होता है, तथा कण्ठमाला बीमारी का सामना करना पड़ता है।

7. गरारियाँ सहित नख ऐसे नख वाले व्यक्ति को कमला की बीमारी होती है, तथा कभी-ंउचयकभी श्वास एवं दमा की शिकायत होती है।

नाखूनों की देखभाल कैसे भी कर लें, परन्तु उनके प्रभाव को नहीं बदला जा सकता। भले ही कार्य करते नाखून टूट जाय। मुख्यतः ये चार प्रकार के ही पाये जाते हैं। लम्बे छोटे, चैड़े, सकीर्ण, आदि।


अंगुलियों पर निशान और उनके प्रभाव


अंगूठे पर अगर सफेद धब्बा होगा, तो बातचीत में अधिक लगाव अगर यही काला होगा, तो प्रेम में अंधापन और अपराधी प्रवृति की होती है।

तर्जनी पर अगर सफेद धब्बा होगा, तो अच्छी आमदनी तथा काले धब्बे से धनहानि होती है।

मध्यमा पर सफेद धब्बे होने से यात्रायें होती है तथा काले धब्बे होने से भय और क्षति। अनामिका पर सफेद धब्बा होने से प्रतिष्ठा प्राप्त होती है तथा काला से बदनामी और नुकसान होता है।

कनिष्ठा पर काला धब्बा होने से व्यापारिक सफलता और काले धब्बे से अविश्वास और असफलता काले नखों वाला व्यक्ति अच्छा कृषक (किसान) होता है।

चौड़े नखवाला साधु और निष्कपटी होता है। नीले रंग के नख वाला व्यक्ति स्वास्थ्य से परेशान रहता है, तथा दूसरों के लिए सरदर्द बनता है। 

बेतुके, अटपटे और भद्दे नखों वाला व्यक्ति समाज के लिए अयोग्य माना जाता है तथा लोगों को हानि पहुंचाता है और दुष्कर्मों में लीन रहना उसका स्वभाव होता है।

नखों के नीचे अंगुलियों के पारों में एक ऐसा तरल पदार्थ होता है, जो अत्यन्त संवेदनशील होता है, उदाहरण के तौर पर अंधा व्यक्ति इसी हिस्से के स्पर्श से अपनी पहचान का आधार साबित करता है तथा डाक्टर जब किसी रोगी का नब्ज पकड़ता है तो इस हिस्से में स्पन्दन
होता है यह क्रिया अंगुलियों के पोर में स्थित तरल पदार्थ द्वारा होती है अंगे्रेजी में इसे (कोर्नीफिकेशन) कहते है। जिसे हिन्दी भाषा में श्रृगोत्पादन या शल्कीभवन कहते हैं।

हस्तरेखा परीक्षण के समय स्वास्थ्य रेखा में जो रोग या व्याधि नजर आती है, उसे नखों से ही प्रमाणित की जाती है।

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Indian Hastrekha mein useless thumb aur extra thumb ka koi role nahi hai usko nisfal mana jata hai.


सौजन्य  - सरल हस्तरेखा पुस्तक 

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