जीवनसाथी (पति या पत्नी) की मृत्यु का योग | विवाह रेखा
हाथ में विधवा होने का योग या अलगाव होने का योग
यदि किसी मनुष्य के हाथ में विवाह रेखा नीचोन्मुख होकर हृदय रेखा की ओर अत्यन्त झुक जाय तो जिस स्त्री या पुरुष के हाथ में यह अंकित होगी तो पर-लिंग-जातक की शीघ्र मृत्यु को प्रदर्शित करती है अथवा अविवाहित रहना पड़ता है।
अभाग्यवश किसी भी हाथ में यदि ऐसी ही कोई विवाह रेखा अत्यन्त बढ़कर हृदय रेखा से छु जाय अथवा हृदय रेखा को काटकर नीचे को निकल जाय तो उस स्त्री को वैवव्य योग देखना पड़ता है और पुरुष के हाथ में यह लक्षण उस पुरुष को रँडुआ बनाता है अथवा स्त्री पुरुष दोनों को ही वियोग दुख सहना पड़ता है ।
इस योग के साथ अन्य योग भी देखने चाहिए और मृत्यु का फलादेश करने से बचना चाहिए क्युकी इस योग का फल शत-प्रतिशत नहीं पाया जाता है।
पति और पत्नी में लड़ाई होना | विवाह रेखा
जिस स्त्री या पुरुष के हाथ में विवाह रेखा द्विजिह्व या फोर्क वाली हो तो उस स्त्री की अपने पति से, पुरुष की अपनी पत्नी के सदैव ही विचारों की प्रतिकूलता के कारण अनबन ही रहेगी और जीवन के अधिकतर भाग में विरह वेदना का शिकार रहना पड़ेगा।
ये दोनों कभी भी मिलें इनमें विचार विनिमय कभी न होगा फिर भी नितान्त त्याग की भावना कभी जागृत न होगी चाहे लड़ाई झगड़ा किसी हद तक क्यों न पहुँच जाय ।
यदि यही चिन्ह विवाह रेखा पर बुध क्षेत्र के बाहर की ओर साफ तौर पर दिखाई देता हो तो उस मनुष्य के विवाह के प्रस्ताव या संबन्ध आ-आकर नहीं होते यानी के संबन्ध के होने में अनेक बाधायें उपस्थित हो जाती हैं और विवाह नहीं हो पाता।
शादी न होना? कुंवारा रह जाना | विवाह रेखा
आपकी शादी की उम्र निकल गयी है और आप अभी भी कुंवारे हो तो आपके हाथ में ऐसा योग हो सकता है।
यदि किसी मनुष्य के दाहिने हाथ में विवाह रेखा बुध क्षेत्र पर मुड़कर, ऊपर की ओर कनिष्टिका उगली के तृतीय पोरुए की सन्धिगत मिल जाये तो उसको आजीवन क्वारा या अविवाहित ही रहना पड़ता है।
ऐसी दशा में विवाह के लिए बातचीत तो बहुत होती है। किन्तु विवाह किसी प्रकार भी नहीं होता । यदि येन-केन -प्रकारेण शादी हो भी जाय तो उसका परिणाम बड़ा भयंकर होता है। क्योंकि देखने में यही आया है कि जिस स्त्री-पुरुष के हाथ में यह उर्ध्वगामी विवाह रेखा होती है उसकी मृत्यु विवाह संबन्ध होने के कुछ ही समय पश्चात् हो जाया करती है। जोकि किसी भी हाथ में दुर्भाग्यपूर्ण लक्षण प्रतीत होता है ।
विवाह कब होगा? विवाह रेखा
विवाह या शादी कब या किस उम्र में होगी ? विवाह रेखा से कैसे पता करते है ?
जिस मनुष्य के हाथ में विवाह रेखा जितनी साफ, सुन्दर, स्पष्ट तथा निर्दोष होगी वह उतने. ही शुभ विवाह की सूचना देगी। यह रेखा हृदय रेखा के जितनी समीप होगी उतनी ही जल्दी विवाह की तैयारियाँ होंगी और जितनी हृदय रेखा से दूरी पर होगी उतनी ही शादी देर से होगी।
भारत में विवाह का समय अनिश्चित ही रहता है क्योंकि यहाँ गर्भावस्था से लेकर मरणावस्था तक मनुष्यों के विवाह होते रहते हैं ।
इसलिए हाथ देखते समय इस बात का विचार करना होगा कि विवाह रेखा हृदय रेखा को समीपता के अनुसार बाल, शैशव तथा किशोरावस्था में से कौन-सी अवस्था प्रदर्शित करती है।
साथ ही यह भी देखना होगा कि वह मनुष्य या स्त्री किस वर्ग, वर्ण, तथा जाति, उपजाति से सम्बन्धित है क्योंकि सवर्ण उच्च जातियों के विवाह सम्बन्ध देर में तथा दलित अथवा शूद्र जातियाँ अपने विवाह सम्बन्ध छोटी अवस्था में करती हैं ।
अमीर आदमी से विवाह होना - विवाह रेखा
यदि विवाह रेखा अथवा उसकी कोई शाखा आगे बढ़कर सूर्य या सफलता रेखा से मिल जाय तो उस मनुष्य या स्त्री को जिसके हाथ में यह अत्यन्त शुभ चिन्ह होता है उसे किसी शुभ गुणवान, धनवान तथा बुद्धिमान साथी मिलने का शुभ लक्षण ही समझना चाहिए।
यदि पुरुष के हाथ में है तो शादी के बाद तरक्की होती है और या फिर ससुराल अमीर मिलता है।



