हस्तरेखा विज्ञान में भ्रमण रेखाओं का महत्व बहुत है। जीवन रेखा से निकलने वाली छोटी रेखाएं यह बताती हैं कि जातक का जीवन यात्रा, अनुभव और विदेश भ्रमण से जुड़ा होता है।
भ्रमण रेखाएँ/यात्रा रेखाएँ - हस्तरेखा ज्ञान
जीवन रेखा से छोटी-छोटी रेखाएं निकलकर मणिबंध, चंद्र पर्वत और शुक्र पर्वत की ओर जाती हैं। इन्हें भ्रमण रेखा कहा जाता है। जो जातक इन रेखाओं के साथ होता है, उसका जीवन अक्सर देश-विदेश की यात्राओं से जुड़ा होता है और उसमें अनेक बदलाव आते हैं।
भ्रमण रेखा पर द्वीप चिह्न
यदि जीवन रेखा से निकली भ्रमण-रेखा पर द्वीप चिह्न दिखाई दे तो जातक की यात्रा निष्फल रहती है। यह संकेत देता है कि यात्रा में मनचाहा लाभ नहीं मिलेगा।
भ्रमण रेखा पर चतुष्कोण (वर्ग) चिह्न
यदि भ्रमण रेखा पर चतुष्कोण चिह्न दिखाई दे तो जातक की यात्रा में होने वाले खतरों से रक्षा होती है। यह सुरक्षा और सफलता का संकेत है।
भ्रमण रेखा का चंद्रक्षेत्र पार करना
यदि जीवन रेखा से निकली भ्रमण रेखा चंद्रक्षेत्र को पार करके हथेली के पार निकल जाए, तो जातक की यात्रा कठिनाईपूर्ण होती है और कभी-कभी यात्रा में गंभीर दुर्घटना या मृत्यु का संकेत देती है।
हस्तरेखा में भ्रमण रेखाओं का अध्ययन कर आप अपने जीवन के यात्रा-रूप, जोखिम और अवसरों का पूर्वानुमान लगा सकते हैं। यह जानकारी यात्रा योजना और जीवन के निर्णयों में मददगार होती है।
भाग्य रेखा का उदय मंगल पर्वत से होना जातक के जीवन में साहस, आत्मविश्वास और कठिन परिस्थितियों में भी सफलता पाने की क्षमता दर्शाता है- भाग्य रेखा का उदय मंगल पर्वत से होना


