हाथ के बीच में एक बड़े त्रिभुज का बनना - हस्तरेखा विज्ञान
यदि जीवन रेखा, मस्तक रेखा और सूर्य रेखा से त्रिकोण का निर्माण हो, जिसकी आधार रेखा सूर्य रेखा हो तो ऐसा व्यक्ति प्रतिभा और संकल्प से सफलता प्राप्त करता है। जब जीवन रेखा और मस्तिष्क रेखा से बनने वाला कोण तीक्ष्ण और साफ-सुथरा हो तो व्यक्ति अच्छे स्वभाव और परिष्कृत योग्यता का होता है। यदि ये दो रेखाएँ (जीवन रेखा और मस्तिष्क रेखा) एक दूसरे से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई हैं, तो व्यक्ति में आत्मविश्वास और सामाजिक कल्याण की कमी होती है।
यह बहुत कम हाथों में साफ सुथरा देखने को मिलता है ज्यादातर हाथों में कटा हुआ या फिर टूटा हुआ या फिर राहु रेखा से दोषयुक्त हुआ वा ही होता है इसलिए व्यक्ति को इसका फल उतना नहीं मिलता जितना मिलना चाहिए ।
हाथ के मध्य में बड़ा त्रिभुज (Big Triangle) बनना - हस्तरेखा शास्त्र
जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा और स्वास्थ्य रेखा द्वारा मंगल के मैदान वाले क्षेत्र में एक बड़ा त्रिभुज बन जाता है जिसका नाम ही 'बड़ा त्रिभुज' (Big Triangle) है। यह त्रिभुज विचार, स्वभाव एवं मानसिकता में उदारता का संकेत देता है। ऐसे लोग समाज, समुदाय और देशहित के लिए अपने निजी हितों का त्याग कर सकते हैं। ये सब बातें तब सही हैं जब त्रिभुज छोटा न हो, बड़ा हो और इसे बनाने वाली रेखाएं दोषरहित हों। यदि रेखाएं दोषपूर्ण हैं, तो व्यक्ति स्वार्थी, मतलबी और संकीर्ण विचारों वाला होता है।
यदि त्रिभुज जीवन रेखा, मस्तिष्क रेखा और सूर्य रेखा द्वारा बने, जिसकी आधार रेखा सूर्य रेखा हो, तो ऐसा व्यक्ति प्रतिभा और दृढ़ संकल्प के माध्यम से सफलता प्राप्त करता है। जब जीवन रेखा और मस्तिष्क रेखा द्वारा बनाया गया कोण नुकीला (Acute) और साफ सुथरा हो तो व्यक्ति अच्छे स्वभाव और परिष्कृत अभिरुचि वाला होता है। यदि ये दोनों रेखाएं (जीवन एवं मस्तिष्क) काफी दूर तक एक दूसरे से जुड़ी हों, तो व्यक्ति में आत्मविश्वास और सामाजिक सुघड़ता की कमी होती है।
नितिन कुमार पामिस्ट



