हाथ में भाग्यशाली त्रिशूल होना | हस्तरेखा ज्ञान
आप सभी को पता है कि त्रिशूल हिंदू धर्म में भगवान शिव जी का शस्त्र माना जाता है और यह आपको मंदिरों में अवश्य देखने को मिलता होगा, क्योंकि इसे एक शुभ प्रतीक भी माना गया है।
ऐसा माना जाता है कि त्रिशूल की तीनों नोक हमारे भूतकाल, वर्तमान और भविष्य को दर्शाती हैं। भगवान शिव जी के साथ-साथ माता दुर्गा के हाथ में भी त्रिशूल होता है। ऐसा विश्वास है कि जब धरती पर पाप और अत्याचार बढ़ जाते हैं, तब भगवान शिव और माता दुर्गा अपने त्रिशूल से राक्षसों का संहार करते हैं।
हाथ में त्रिशूल का होना शुभ माना गया है, लेकिन त्रिशूल का ऊपर की ओर बना होना आवश्यक होता है, न कि नीचे की ओर। ऊपर की ओर बना त्रिशूल ही लाभदायक होता है, जबकि उल्टा त्रिशूल व्यक्ति को असफलता की ओर ले जाता है।
त्रिशूल का सूर्य रेखा और भाग्य रेखा पर होना सबसे अधिक शुभ माना जाता है। जिस व्यक्ति के हाथ में त्रिशूल का चिन्ह होता है, उसे जीवन में धन की समस्या नहीं रहती और समाज में अच्छा नाम व प्रतिष्ठा प्राप्त होती है। हालांकि, ऐसे व्यक्ति को यह सभी शुभ फल प्रायः मध्यम आयु के बाद ही प्राप्त होते हैं।
त्रिशूल और धन
त्रिशूल को सदा शत्रु संहारक, पाप विनाशक, धार्मिक, जीव रक्षक, सुखी, पवित्रता व समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। जिन हाथों में यह प्रतीक चिह्न होता है। वह उक्त गुणों से समाहित होता है।
विभिन्न पर्वतों पर होने से पृथक् गुण भी आते है।
गुरु पर्वत पर हो तो नेतृत्व कर्ता, दयालु, धार्मिक, नीति नियमों का पालन कर्ता, त्यागी, मानसम्मान मिलता है। लोग इनकी बात सुनते व मानते हैं।
यदि यह चिन्ह शनि पर्वत पर हो तो अनुशासन प्रिय, संतुलित आचरणकर्ता, ज्ञानी, कर्मशील, गंभीर, धार्मिक होगा।




