Wednesday, May 30, 2018

हस्तरेखा ज्ञान हिंदी में चित्रों के साथ सींखो | Hastrekha Gyan

हस्तरेखा ज्ञान हिंदी में चित्रों के साथ सींखो 
(Learn Hast Rekha Gyan In Hindi With Photo)

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मस्तक रेखा का निकास बृहस्पति पर्वत से होना  

बृहस्पति ग्रह आत्मसम्मान, महत्तकांक्षा, प्रौदता व शासन का प्रतीक है। हाथ में बृहस्पति उन्नत होने पर व्यक्ति सचरित्र, महत्वाकांक्षी तथा शासकीय प्रवृति के होते हैं।

बृहस्पति ग्रह आत्मसम्मान, महत्तकांक्षा, प्रौदता व शासन का प्रतीक है। हाथ में बृहस्पति उन्नत होने पर व्यक्ति सचरित्र, महत्वाकांक्षी तथा शासकीय प्रवृति के होते हैं। 

इसी प्रकार जिन लोगों की मस्तिष्क रेखा बृहस्पति से निकलती है, उन व्यक्तियों में स्वभावतः ही उपरोक्त सभी गुण आ जाते हैं। ऐसे व्यक्ति पुरुषार्थ से जीवन बनाते हैं तथा स्वयं के गुणों में निरन्तर वृद्धि करने वाले होते हैं। इनकी मस्तिष्क शब्द कोष होता है व ग्रहण-शक्ति अच्छी होती है। 

ये बैद्धिक त्रुटियां नहीं करते। संयोगवश यदि कोई गलती कभी कर जाएं तो पुनरावृति का तो प्रश्न ही नहीं उठता। 

महत्वाकांक्षा की विशेष भावना इनमें पाई जाने के कारण अध्ययन के समय ये गुट बना कर रहते हैं: रुढिवादिता इन्हें बिल्कुल पसन्द नहीं होती, अतः अपने परिवार वालों से इनका विरोध बना रहता है। अध्ययन में तो ये निपुण होते हैं, परन्तु मेहनती नहीं होते।

ऐसे व्यक्तियों की उंगलियां मोटी हों तो आत्म-सम्मान के कारण झगड़े आदि रहते हैं तथा मस्तिष्क रेखा की कोई शाखा मंगल पर जाती हो तो कत्ल जैसे लांछन भी जीवन में लगते हैं। यह सब, सम्मान अथवा महत्वाकांक्षा के कारण ही होता है। (नितिन कुमार पामिस्ट )


सुधारवादी दृष्टिकोण के कारण इनके चरित्र में धीरे-धीरे सुधार होता जाता है। यदि मस्तिष्क रेखा में कोई दोष जैसे लाल या काली न हो तो समय आने पर ऐसे व्यक्ति स्वयं पैरों पर खड़े हो जाते हैं। उगलियां पतली होने पर उपरोक्त दोषपूर्ण फल नहीं होते। 

ये स्वाभिमानी होते हैं, झुकना पसन्द नहीं करते और छोटी सी बात को भी बहुत महसूस करते हैं। कभी-कभी यहां तक नौबत आती है कि छोटी-छोटी बातों पर झगड़ा कर बैठते हैं। यदि इनकं गृहस्थ-सम्बन्ध में जरा भी त्रुटि हो तो छोटी सी बात पर ही अपमान महसूस कर जाते हैं जैसे यदि पत्नी विना कहे कहीं चली जाए तो ये उसे लेने जाएं, ऐसा प्रश्न ही नहीं उठता। 

थोड़ा भी विरोध आपस में होने पर, दूसरे को ही झुकना पड़ता है। ऐसी स्त्रियां रोने में तेज, अड़ने वाली, शुरू में डरने वाली तथा बाद में बहादुर होती हैं। ----- इन्हें छोटे काम करने में लज्जा अनुभव होती है।  कभी-कभी आत्मसम्मान की मात्रा यहां तक बढ़ जाती है कि यदि गलत बात मुंह से निकल जाए तो उसी पर अड़ जाते हैं। 

छोटा काम नहीं करने के कारण स्थायित्व देर से प्राप्त होता है क्योंकि जब तक इनकी रुचि का कार्य नहीं मिलता, तब तक ये अपने आपको स्थायी महसूस नहीं करते और लगातार काम बदलने की सोचते रहते हैं। ऐसे व्यक्तियों की भाम्य रेखा चन्द्रमा से निकली हो तो स्त्री लोलुप होते हैं। (नितिन कुमार पामिस्ट )

ये मिलनसार व दृढ़ निश्चयी भी होते हैं। जिससे इनका परिचय या मित्रता हो जाती हैं, जीवन भर निभाते हैं, मित्रता होती भी अधिक व्यक्तियों से है। स्वयं से कोई गलती या अपराध होने पर क्षमा मांगने में देर नहीं करते और यदि कोई व्यक्ति गलती करके इनसे क्षमा मांगे तो क्षमा भी कर देते हैं।

ऐसे व्यक्तियों की दृदय रेखा व मस्तिष्क रेखा यदि एक-दूसरे के समानान्तर हो तो बदले की भावना रहती हैं, जिसके पीछे पड़ते हैं, उन्हें जड़ से उखाड़ देते हैं। परोपकारी, व्यवहारिक व मानवोचिन गुण होने के साथ ही जैसे के साथ तैसा व्यवहार करने वाले होते हैं।

 ऐसे व्यक्ति झगड़े में कम पड़ते हैं और यदि किसी झगड़े में आ भी जाते हैं तो उसका निपटारा भी स्वयं ही कर देते हैं। मुकद्दमें लड़ने में यदि डिकरी भी हो जाए तो ऐसे व्यक्ति उन्हें क्षमा मांगने पर छोड देते हैं। पैसा देने या अन्य कोई वायदा ये करते हैं तो उसका पूर्णतया पालन करते हैं, चाहें अपना काम बन्द करके भी करना पड़े। अत: बाजार में इनकी साख होती है।

मस्तिष्क रेखा समानान्तर होने पर ये लम्बे  समय तक किसी बात को नहीं भूल सकते और अवसर आने पर बदला लिए बगैर नहीं छोड़ते। 

ऐसे व्यक्ति अपने शत्रु को जान से नहीं मारते, जीवित रखकर मुकाबला करते हैं या अहसान से मारते हैं। उत्तरदायित्व अधिक अनुभव करने के कारण ऐसे व्यक्ति उस समय तक विवाह नहीं करते जब तक ये अपने पैरों पर खड़े न हो जाएं।

अतः अपनी शादी तक रोक देते हैं तथा आदर्श पसन्द या अन्य किसी करण से इनकी शादी में कई बार विध्न पड़ता है।


पर्वत और उन पर पाई जाने वाली बीमारीया - HASTREKHA VIGAN

बीमारी, पर्वतों से बीमारी के लक्षण कहाँ और कैसे होगे तथा उनकी प्रकृति क्या होगी इसका निर्णय पर्वतों की स्थिति देख कर की जा सकती है। सामान्य रूप में निम्नलिखित पर्वत अपने सामने अंकित बीमारी की सूचना प्रमुखता से देते हैं। जैसे:-
बीमारी, पर्वतों से बीमारी के लक्षण कहाँ और कैसे होगे तथा उनकी प्रकृति क्या होगी इसका निर्णय पर्वतों की स्थिति देख कर की जा सकती है।

1.बृहस्पति- अधिक ऊँचा रक्तविकार, फोड़े-पुंशी, हड्डी के रोग, आग से जलना तथा निम्नस्तर का उत्साहहीनता, दब्बूपन, भोजन ज्यादा, गैस से मूछ हाजमा खराब, द्वीप होनें पर धूम्रपान से फेफड़े खराब, शुक्र से सम्बन्धित होनें पर टी0 बी0 (कामुकता) के कारण लिवर खराब और जॉन्डिस ।

2. शनि- दबा हुआ डिप्रेशन, घाव, टाँग में तकलीफ, हड्डी रीढ़ की तकलीफ, गठिया शिराओं में तकलीफ, गैस्ट्रिक, महिलाओं में चन्द्र से सम्बन्धित होनें पर हिस्टिरिया तथा अति उच्च पर आत्महत्या की प्रवृत्ति।

3.सूर्य- आँख की तकलीफ, गठिया, बुखार, भावुकता के कारण एलर्जी। हृदय रोग

4 . मंगल - रक्तविकार , ऑपरेशन , अग्निभय , चोरी , एक्सीडेंट , एलर्जी , दमा, अंतड़ियों के रोग।

5. बुध- फोड़ा, हाजमा, बाहरी तौर पर निराशा । (नितिन पामिस्ट)

6. चन्द्र- किडनी, स्नायुरोग, पथरी, पेशाब की जलन, हिस्टिरिया, जलोदर, जलभय वातविकार, नींद में चलना ।

7. शुक्र- अधिक्तर छूत का गेग, यौन-रोग, वृद्धावस्था में पेशाब से सम्बन्धित होनें पर।

8.राहु- आँत, पेट, अचानक मृत्यु। (नितिन पामिस्ट )

9. केतु- चर्म रोग, सफेद दाग, रक्त विकार ।



जीवन रेखा क्षेत्र से निकलने वाली सूर्य रेखा


जीवन रेखा क्षेत्र से निकलने वाली सूर्य रेखा व्यक्ति को कलात्मक बनाती है, उसकी यह कला विभिन्न रूप धारण करती है और विभिन्न श्रोतों से उसका परिचय देती है।

वह एक सिद्ध हस्त दस्तकार, दर्जा, शिक्षक, शिल्पी, गायक और संगीतज्ञ, तान्त्रिक तथा अभिनेता हो सकता है, इनकी कलाओं में आकर्षण होता है ।

यह कला इन्हे यश प्रदान करती है, किन्तु इन्हें परिश्रम द्वारा ही धन प्राप्त होता है, इन्हें सामान्य धनाभाव भी होता है। ये सौन्दर्य के अंधे और परम उपासक होते हैं।

इन्हे परिवार द्वारा सफलता नहीं मिलती, ये स्वतः के बलबूते पर उन्नति करते हैं तथा स्वावलम्बी होते हैं। इनके माता-पिता कम, शिक्षा के स्वामी होते हैं, निर्धन निष्क्रिय और संसार विरक्त भी पाये जाते हैं। सात्विक हाथ में यह रेखा अच्छी और निकृष्ट हाथों में सामान्य मानी जाती है।



हृदय रेखा से शुरु होने वाली सूर्य रेखा
हृदय रेखा से शुरु होने वाली सूर्य रेखा को स्वामी कलाकारी, नाटक, कहानी उपन्यास काव्य, आदि कायों से लाभ कमाते हैं। यह रेखा उन्हें प्रौढ़ अवस्था में सफलता देती है। ऐसे व्यक्ति आरम्भ काल में सुखी एवं सम्पन्न नहीं होते । इस समय समाज में उन्हें निन्दा आदि का सामना करना पड़ता है।

ऐसी स्थिति में पिछला समय उनका अधकारमय कहा जा सकता है। इस काल में उन्हें विफलता और अनेक अपयश का सामना करना पड़ता है तथा मन प्रसन्न नहीं रहता उनके चेहरे पर प्रफुल्लता नहीं होती, उदासी उन्हें खूब प्रताड़ित करती है, जिससे वे व्याकुलता अनुभव करते हैं।

किन्तु इनका जीवन बाद में सुखमय होता है, समाज में सम्मान एवं यश मिलता है तथा उनकी रचना या कार्य इस समय सराहनीय हो जाती है। कुछ लोग ऐसे भी पाये गये हैं, जिन्हे संघर्ष करते-करते मृत्यु हो गयी, बाद में उनके कार्यों का फल उनके पुत्रादि को प्राप्त होता है। उन्हें जीते जी न कीर्ति मिलती है और न ही विपुल धन राशि। यदि हृदय रेखा से शुरु होने वाली सूर्य रेखा दोषी हो तो अपयश तथा दुख प्राप्त होता है वे दर-बदर ठोकरें खाते हैं।


उनकी कला ही बला बन जाती और गति स्थिति में पागल भी होते पाये गये हैं। उनकी मृत्यु मी भयानक और अशोभनीय होती है, जीवन का संघर्ष ही उनकी मृत्यु का कारण बन जाती है।



गदानुमा अंगूठा - हस्तरेखा (Gaddanuma Angutha - Hastrekha) - Clubbed Thumb - Palmistry


गदानुमा अंगूठा 


जिस व्यक्ति का अंगूठा गद्दानुमा (सोंटा) होता है उनकी हिंसक प्रर्वती होती है । ऐसे व्यक्ति को किस बात पर गुस्सा आ जाय कहा नहीं जा सकता है ।  ऐसा अंगूठा ज्यादातर हत्यारे और असामाजिक व्यक्तियों के हाथ में पाया जाता है । ऐसे व्यक्ति नास्तिक होते है । (नितिन कुमार पामिस्ट)


Gadanuma Angutha:


Jis aadami ka anghuta gadanuma hota hai unki hinsak parvati hoti hai.  Aise aadami ko kis baat pr gussa aa jaay kaha nahi ja sakta hai.  Aisa angutha jyadatar hatayaare aur asamajik vyktiyo ke hath mein paya jata hai.  Aise vykti jyadatar nastik hote hai.  ( Nitin Kumar Palmist)


Clubbed Thumb:   
Stubborn, ungovernable temper.




शुक्र पर्वत पर रेखाए 


जिन लोगो के हाथो में शुक्र क्षेत्र से आने वाली रेखाए जीवन रेखा को काटती हुई आगे बढ़ जाय और भाग्य रेखा को भी स्पर्श करें या भाग्य रेखा को भी काटकर आगे निकल जाय तो ऐसी रेखाए उन लोगो के विवाह सम्बन्ध तथा प्रेम सम्बन्ध में बाधक होती है।   ऐसे लोगो का विवाह देर से होता है अथवा अपनी पसंद के व्यक्ति के लिए भटकना पड़ता है।  इन सम्बन्धो में बाधा डालने वाले अधिकतर परिवार वाले ही होते है।



मस्तिष्क रेखा में सूर्य के नीचे द्वीप | Hast Rekha


मस्तिष्क रेखा में सूर्य के नीचे द्वीप

sun mount island palmistry

यह द्वीप मस्तिष्क रेखा में सूर्य की उंगली के नीचे पाया जाता है। यह व्यक्ति की आंख में रोग का लक्षण है। यदि हृदय रेखा में भी सूर्य की उंगली के नीचे कोई द्वीप हो या वहां बाहर से कोई रेखा आकर हदय रेखा को छूती हो तो निश्चित ही आंखों में दोष हो जाता है। यह द्वीप यदि गोलाकार अर्थात् वृत्त के आकार का हो तो व्यक्ति अन्धा हो जाता है।


ऐसे व्यक्ति की आंख में बाहर से आकर कोई चीज लगती है। सूर्य व शनि की उंगली के बीच मस्तिष्क रेखा में बड़ा द्वीप हो तो इस आयु में व्यक्ति के मस्तिष्क पर बड़ा भार पड़ता है या तो ये उदासीन हो जाते हैं या पागल अन्यथा मस्तिष्क में रसौली या खून का जमाव होकर लकवा हो जाता है। यह देखने की बात है कि द्वीप के दोनों ओर की रेखाएं मस्तिष्क रेखा जैसी या मौलिक मोटाई से कुछ कम मोटी होनी चाहिए। (नितिन पामिस्ट )

शुक्र क्षेत्र से निकलने वाली सूर्य रेखा
शुक्र क्षेत्र से निकलने वाली सूर्य रेखा की यह प्रथम अवस्था होती है यह जीवन भाग्य, मस्तिष्क एवं हृदय रेखा को काटती हुई सीधी अपने स्थान रविक्षेत्र पर पहुंचती है।


शुक्र क्षेत्र से निकलने वाली सूर्य रेखा की यह प्रथम अवस्था होती है यह जीवन भाग्य, मस्तिष्क एवं हृदय रेखा को काटती हुई सीधी अपने स्थान रविक्षेत्र पर पहुंचती है। शुक्र क्षेत्र प्रेम का प्रतीक है, स्त्री का द्योतक है।

इस कारण उसकी उन्नति किसी महिला के द्वारा होती है, वही उसको भूमि, सम्पदा, धन आदि से सम्पन्न करती है। यह स्त्री स्वयं की पत्नी या प्रेमिका ही सकती है जो कि पवित्र प्रेम करती है।



मंगल क्षेत्र से निकलने वाली सूर्य रेखा 
मंगल क्षेत्र से निकलने वाली सूर्य रेखा वीरता एवं चेतना को प्रदान करती है, जिनमें यह रेखा विद्यमान होती है वे हमेशा उत्साही, साहसी, आशावान, निडर और वाचाल होते हैं।

मंगल क्षेत्र से निकलने वाली सूर्य रेखा वीरता एवं चेतना को प्रदान करती है, जिनमें यह रेखा विद्यमान होती है वे हमेशा उत्साही, साहसी, आशावान, निडर और वाचाल होते हैं।

इनमें निरन्तर आत्मविश्वास की लहर दौड़ती रहती है तथा आपत्तियों का मुकाबला करने से नहीं डरते, इनमें हठ भी पाया जाता है परन्तु जिस कार्य को हठ भावना से करते हैं उसमें सफल भी पाये जाते हैं। कभी-2 विद्रोह की भावना भी जाग्रत होती है तथा रुढ़िवादी रीतिरिवाजों के खिलाफ रहना इनकी विशेषता है।

इनका हृदय एक ओर कठोर और दूसरी ओर कोमल होता हैं ये न्याय के प्रति हमेशा उतावले रहते हैं तथा न्याय के लिए स्वत: की बलि देना अपना कर्तव्य समझते हैं।

युद्ध स्थल में ये सफल सैनिक प्रमाणित होते हैं। ये लोग विषम परिस्थिति में भी अपने मनोबल और बैभव से सफल पाये जाते हैं।

मष्तिष्क रेखा क्षेत्र से शुरू होने वाली सूर्य रेखा
मष्तिष्क रेखा क्षेत्र से शुरू होने वाली सूर्य रेखा का स्वामी अद्भुत कार्यकर्ता होता हैं। ऐसे व्यक्ति विशेष मस्तिष्क के स्वामी होते हैं। ये प्राय: महानपुरुष, आदि होते हैं।


मष्तिष्क रेखा क्षेत्र से शुरू होने वाली सूर्य रेखा का स्वामी अद्भुत कार्यकर्ता होता हैं। ऐसे व्यक्ति विशेष मस्तिष्क के स्वामी होते हैं। ये प्राय: महानपुरुष, आदि होते हैं।

ऐसे लोगों का कार्य बड़ी सूझ बूझ से सम्पन्न होता है तथा उस कार्य की विशेषता को मानव समुदाय हमेशा स्मरण रखता है। कभी-कभी ऐसे लोगों को मध्य आयु में सफलता प्राप्त होती पायी गयी है। अगर ये व्यापारी होते हैं तो खूब धन, कलाकार होते है तो खूब यश प्राप्त करते है ।

Rahu Parvat - Hastrekha
Hateli mein rahu parvat ubhara hua hone pr vykti bhagyawan hota hai aur yadi hatheli mein gadda ho to vykti bhagyaheen hota hai usko mahnet karne pr bhi safalta nahi milti hai.


Hateli mein rahu parvat ubhara hua hone pr vykti bhagyawan hota hai aur yadi hatheli mein gadda ho to vykti bhagyaheen hota hai usko mahnet karne pr bhi safalta nahi milti hai.

Rahu bhagya bana bhi sakta hai aur bhagya ko bigaad bhi sakta hai.  Isi karan rahu parvat pr jydatar logo ki bhagya rekha rahu parvat pr tooti ya kati hui hoti hai.  Yadi hatheli mein gadda hai aur bhagya rekha bhi doshyukt hai to vykti apni sampathi galat niranyo ke karan gawa deta hai. (nitin kumar palmist)

दोषपूर्ण व निदाँष रेखाएँ - हस्तरेखा 

 दोषपूर्ण रेखाओं का अध्ययन करते समय यह परम आवश्यक है कि दोनों हाथों को ध्यान पूर्वक देखा जाय अथवा रेखाओं को बारीकी से समझा जाय इस तरह किसी निर्णय पर आसानी से पहुंचा जा सकता है।

दोषपूर्ण रेखाओं का अध्ययन करते समय यह परम आवश्यक है कि दोनों हाथों को ध्यान पूर्वक देखा जाय अथवा रेखाओं को बारीकी से समझा जाय इस तरह किसी निर्णय पर आसानी से पहुंचा जा सकता है।

यदि एक हाथ में खराब चिह्न और दूसरे में ऐसा न हो तो उसका परिणाम उतना बुरा नहीं होता जितना कि दोनों हाथों में होने पर।

उदाहरण- किसी व्यक्ति के दाहिने हाथ में जीवन रेखा खराब है या कड़ी हुई है अथवा उसमें कोई दोष है, ऐसी स्थिति में तीन तरीकों से मृत्यु टल सकती है।

1. बायें हाथ में जीवन रेखा निर्दोष व पूर्ण हो।
2. जीवन रेखा पुन: उदित होकर पूरी हो जाये।
3. कोई सहायक रेखा जीवन रेखा का स्थान ले लेवें।

दो अंगूठे हस्तरेखा (Twin Thumb/Two Thumb)

 अंगूठे एक से अधिक संख्या में होना अच्छा नहीं है। ऐसे व्यक्ति क्रोधी तो नहीं होते, परन्तु शेष सभी लक्षण टोपाकार अंगूठे से मिलते-जुलते होते हैं।

 अंगूठे एक से अधिक संख्या में होना अच्छा नहीं है। ऐसे व्यक्ति क्रोधी तो नहीं होते, परन्तु शेष सभी लक्षण टोपाकार अंगूठे से मिलते-जुलते होते हैं। ऐसे व्यक्ति अनेक झझट अपने सिर पर रखते हैं। 

जल्दबाज व बुद्धिमान होते हैं। ऐसे व्यक्ति का गृहस्थ जीवन सुखी नहीं रहता। नौकरी में होने पर ऐसे व्यक्तियों पर विभागीय कार्यवाही भी होती है या इन्हें बीच में नौकरी बदलनी पड़ती है। 

व्यापार में ही पर विश्वास के कारण धोखा खाना पड़ता है। घर में भी ऐसे व्यक्ति का व्यवहार क नहीं होता। आलोचना करना, बात-बात में टोकना, छोटी-छोटी बात में क्रोध करना आदि स्वभाव के होते हैं। 

ऐसे व्यक्तियों की सन्तान विद्वान होती है। सन्तान सम्बन्ध में भी ऐसे व्यक्ति कुछ न कुछ कमी अवश्य महसूस करते हैं। यदि मुख्य अंगूठा लम्बा हो तो दुर्गुणों में कमी होकर ये विद्वान व सफल होते हैं। (नितिन कुमार पामिस्ट)

 लम्बा व चौड़ा अंगूठा क्रोधी व बुद्धिमान व्यक्तियों का होता है, परन्तु ये व्यक्ति स्पष्टवक्ता, सिद्धान्तवादी व स्वतन्त्र विचारक होते हैं। अत: विचारों के विषय में इनकी खिचड़ी अलग पकती है। स्वतन्त्र मस्तिष्क होने के कारण अधिक समय तक सम्मिलित नहीं रह पाते, चाहे व्यापार हो या परिवार।


हृदय रेखा पर सूर्य पर्वत के नीचे द्वीप होना 

यह द्वीप भी आंखों के दोषों को निश्चित करता है। शनि के पर्वत पर अधिक रेखाएं या मस्तिष्क रेखा में शनि के नीचे द्वीप होने पर अवश्य ही आंखों में दोष होता है।

द्वीप हृद्य रेखा पर होने का मतलब 

यह द्वीप भी आंखों के दोषों को निश्चित करता है। शनि के पर्वत पर अधिक रेखाएं या मस्तिष्क रेखा में शनि के नीचे द्वीप होने पर अवश्य ही आंखों में दोष होता है। सूर्य के नीचे हृदय रेखा में द्वीप दूर की नजर के लिए अच्छा नहीं माना जाता । 


अतिशय-कामुकता; पित्त या जिगर दोषपूर्ण होने के कारण आंखों में खराबी पाई जाती है। इसी लक्षण से सिर में भारीपन भी रहता है। एक बात विशेष ध्यान रखने की है कि हदय रेखा में दोष होने पर मस्तिष्क रेखा निर्दोष हो तो कुछ समय के लिए ही आंखों में दोष पैदा होते हैं। 

कालान्तर में आख्चे ठीक हो जाती हैं। सूर्य के नीचे हृदय रेखा में दोप के साथ यदि मस्तिष्क रेखा में भी दोष हो तो सिर दर्द के कारण डर रहता है। ऐसे व्यक्तियों को साइनस का रोग पाया जाता है। इन्हें नाक से दूध पीना, सूत्र-नेति करना, बादाम रोगन पीना लाभकर रहता है। ऐसे व्यक्तियों को पेट में खराबी, नजला-जुकाम आदि का उपचार यथा समय व यथा शक्ति कराना चाहिए। (नितिन पामिस्ट)

स्त्रियों में आखों के दोष, प्रजनन के समय में कोई गड़बड़, अधिक रक्त स्राव, दौरे या सिर में चोट लगने से होता है। हाथ में अधिक दोष जैसे प्रत्येक रेखा में विशेघ दोष, मस्तिष्क रेखा अधिक दोषपूर्ण या जीवन रेखा टूटी हो तो मस्तिष्क में रसौली या कैंसर होने के कारण आखें खराब हो जाती हैं। 


हृदय रेखा टूट कर मस्तिष्क रेखा पर मिलने पर मस्तिष्क रेखा में सूर्य के नीचे दोष हो तो अधिक रोने के कारण आखों में दोष होता है। 

सूर्य या बुध के नीचे कोई वृत्ताकार द्वीप चाहे यह कई रेखाओं के द्वारा ही बना हो या बाहर की ओर से कोई रेखा सूर्य या बुध के नीचे छूती हो और मस्तिष्क रेखा में दोष व जीवन रेखा के आरम्भ में दोष हो तो पूर्णतया अन्धा होने का लक्षण कई बार हृदय रेखा पर त्रिकोण का आकार भी बुध या सूर्य के नीचे देखा जाता है । 

यह आकार निर्दोष दृदय रेखा पर होता है। वास्तव में यह द्वीप होता है और आरबों में विशेष दोष का लक्षण है। हदय रेखा में नीचे की ओर होने पर यह अधिक प्रभावशाली होता है।

हृदय रेखा मंगल से निकलने पर यदि सूर्य के नीचे द्वीप हो तो भी आंखों में दोष होता है। यह दोष पित्त के कारण आख्झें खराब होने का लक्षण है। ऐसे व्यक्तियों के घर में तिरछा देखने वाले (भैगे), एक आख बन्द करके देखने वाले या सूर्य-मुखी व्यक्ति होते हैं। 


सन्तान पर भी इसका प्रभाव देखा जाता है। ऐसे व्यक्तियों के चरित्र में किसी न किसी प्रकार का दोष भी होता है। हदय रेखा, सूर्य के नीचे द्वीपयुक्त होने से सन्तान की आंखें कमजोर होती हैं। हाथ पतला होने पर अधिकतर बच्चों को चश्मे का प्रयोग करना पड़ता है और भारी हाथ होने पर एक या दो चश्मे लगाते हैं। 

यदि मस्तिष्क रेखा में कोई दोष नहीं हो तो कुछ समय के लिए ऐसा होकर आंखें ठीक हो जाती हैं।
मस्तिष्क रेखा के अन्त में द्वीप होना 


मस्तक रेखा पर द्वीप

मस्तिष्क रेखा के अन्त में अर्थात् बुध के नीचे द्वीप हो तो यह व्यक्ति के जिगर में खराबी करता है। इस प्रकार का कष्ट 52-53 वर्ष की आयु के पश्चात् ही बढ़ता है। मस्तिष्क रेखा में द्वीप न होकर कोई त्रिकोण का आकार बनता हो तो यह चलते समय सांस फूलना या फेफड़ों में खराबी होने के लक्षण है। यह द्वीप केवल स्वास्थ्य के लिए ही फल बताता है ।
मस्तिष्क रेखा के अन्त में यदि बड़ा द्वीप हो तो व्यक्ति के किसी न किसी से अनैतिक सम्बन्ध रहते हैं।

मस्तिष्क रेखा के अन्त में यदि बड़ा द्वीप हो तो व्यक्ति के किसी न किसी से अनैतिक सम्बन्ध रहते हैं। ऐसे सम्बन्ध कभी जीवन के आरम्भ में 30-32 वर्ष की आयु में भी देखे जाते हैं लेकिन अन्त में तो निश्चित ही होते हैं। यह लक्षण रखैल रखने का है। (नितिन पामिस्ट )

ऐसे व्यक्तियों की आखों में भी किसी न किसी प्रकार का रोग रहता है। यहां यह बात विशेष रूप से देखने की है कि ये द्वीप ऐसी रेखाओं से मिलकर बनते हैं जिनकी मोटाई मौलिक मस्तिष्क रेखा से कुछ ही कम होती है। इस दशा में मस्तिष्क रेखा की कोई शाखा बुध वाले भंगल पर गई हो तो ऐसे सम्बन्ध किसी नजदीकी से होते हैं। यह अवश्य कहा जा सकता है कि ऐसे व्यक्ति रखैल या उप-पत्नी रखते हैं।

लहरदार मस्तक रेखा

टेड़ी-मेडी मस्तिष्क रेखा, टेड़ी-मेड़ी ही होती है। दोषपूर्ण मस्तिष्क रेखा के सारे फल यहां भी लागू होते हैं ।
विशेषतया किसी भी आदत के पक्के होने पर, ऐसे व्यक्ति वह आदत छोड़ने में कठिनाई महसूस करते हैं। इनका कोई भी कार्य लम्बे समय तक ठीक नहीं चल पाता।


विशेषतया किसी भी आदत के पक्के होने पर, ऐसे व्यक्ति वह आदत छोड़ने में कठिनाई महसूस करते हैं। इनका कोई भी कार्य लम्बे समय तक ठीक नहीं चल पाता। ऐसा देखा गया है कि इनके काम छः महीने ठीक और छः महीने खराब चलते हैं। ऐसे व्यक्ति मौसमी कार्य जैसे गन्ने का क्रेशर, भट्टा, अनाज का श्रेशर, चूने की भट्टी, बर्फ के कारखाने आदि के कार्य करते हैं। (नितिन पामिस्ट)

लहरदार स्वास्थ्य रेखा

यदि स्वास्थ्य-रेखा लहरदार हो। यदि स्वास्थ्य-रेखा लहरदार हो तो यह सूचित करती है कि ऐसा जातक लम्बे अरसे तक कुछ-कुछ बीमार रहेगा । जिगर की खराबी से पचासों रोग होते हैं और जो भी लम्बा रोग जातक को हो उसकी जड़ में-मूल कारण जिगर की खराबी होगी।
यदि जातक पर शनि का प्रभाव अधिक हो तो वात-विकार या गठिया-रोग होगा। स्नायु की दुर्बलता के कारण अन्य रोग भी हो सकते हैं ।
यदि जातक पर शनि का प्रभाव अधिक हो तो वात-विकार या गठिया-रोग होगा। स्नायु की दुर्बलता के कारण अन्य रोग भी हो सकते हैं । लहरदार स्वास्थ्य-रेखा होने से अनेक प्रकार के पित्त ज्वर-मलेरिया प्रादि होते हैं।

जिन पर सूर्य का अधिक प्रभाव हो और स्वास्थ्य-रेखा लहरदार हो तो पाचनशक्ति की खराबी के कारण उनको हृदयरोग की शंका होगी। ऐसे व्यक्तियों को उचित है कि वे अपने पेट और जिगर को ठीक हालत पर लावें, हृदय-रोग प्रपने-प्राप ठीक हो जावेगा।

यदि मंगल का प्रभाव प्रधिक होगा तो पेट की अंतड़ियों में शोय हो जावेगा। जब कभी भी स्वास्थ्यरेखा प्रच्छी न हो तो, हाथ के अन्य लक्षणों से तुलना कर यह विचार करना चाहिए कि क्या रोग होगा ।


दमा व श्वास रोग


यदि हृदय रेखा और मस्तक रेखा आपस में बहुत नजदीक आ जाय अर्थात चतुष्कोण
Fig-1

यदि हृदय रेखा और मस्तक रेखा आपस में बहुत नजदीक आ जाय अर्थात चतुष्कोण (हृदय रेखा और मस्तक रेखा का मध्य भाग) बहुत सकरा हो जाय तो व्यक्ति को दमा व श्वास रोग होने की सम्भावना होती है। (fig-1)


 यदि मस्तक रेखा के प्रारंभ में एक बड़ा द्वीप हो तो व्यक्ति को श्वास रोग होने की सम्भावना रहती है।
Fig-2

यदि मस्तक रेखा के प्रारंभ में एक बड़ा द्वीप हो तो व्यक्ति को श्वास रोग होने की सम्भावना रहती है।  (fig-2)

यदि स्वास्थ्य रेखा पर द्वीप हो व उस द्वीप को मस्तक रेखा काट रही हो तो व्यक्ति को श्वास का रोग होता है।
Fig-3

यदि स्वास्थ्य रेखा पर द्वीप हो व उस द्वीप को मस्तक रेखा काट रही हो तो व्यक्ति को श्वास का रोग होता है।  (fig-3)


  यदि चतुष्कोण में वर्ग हो तो व्यक्ति को दमा होता है।
Fig-4



यदि चतुष्कोण में वर्ग हो तो व्यक्ति को दमा होता है।  (fig-4)

जीवन रेखा का अंतिम भाग टुकड़ो में हो तो क्या होता है ?

जिन लोगो के हाथो में जीवन रेखा अपने अंतिम भाग में छोटी छोटी रेखाओ से बनी हो या टुकड़ो में हो तो उन लोगो को बुढ़ापे में किसी लम्बे रोग
जिन लोगो के हाथो में जीवन रेखा अपने अंतिम भाग में छोटी छोटी रेखाओ से बनी हो या टुकड़ो में हो तो उन लोगो को बुढ़ापे में किसी लम्बे रोग से ग्रस्त रहना पड़ता है और वह आदमी काफी तकलीफ देखकर मृत्यु को प्राप्त होता है।


मस्तक रेखा को छोटी छोटी रेखाए काटती हुई 
यदि व्यक्ति के हाथ में  मस्तक रेखा कई छोटी छोटी रेखाओ से कटी हो तो व्यकि को सिरदर्द कि शिकायत रहती है।

यदि व्यक्ति के हाथ में  मस्तक रेखा कई छोटी छोटी रेखाओ से कटी हो तो व्यकि को सिरदर्द कि शिकायत रहती है।


मोटी गद्देदार हथेली - हस्तरेखा

                                                                                   
मोटी गद्देदार हथेली में प्राय: शुक्र और चन्द्र पर्वत विशेष उभर लिए हुए होते है ।
                               
मोटी गद्देदार हथेली में प्राय: शुक्र और चन्द्र पर्वत विशेष उभर लिए हुए होते है । हथेली को दबाने  (नितिन कुमार पामिस्ट )  पर यह पिलपिली सी महसूस होती है । ऐसा जातक आरामप्रिय, आलसी, भोग प्रवृति वाला होता है तथा कर्म से दूर रहने का प्रयास करता है । असफल होने पर ईस्वर, किस्मत एवं भाग्य को कोसता है ।


भाग्य रेखा लहरदार ( Wavy Fate Line )


यदि भाग्य रेखा लहरदार हो तो यह प्रकट होता है की जातक अपना व्यवसाय या नौकरी बदलता रहेगा और आर्थिक स्थिति बदलती रहेगी
यदि भाग्य रेखा लहरदार हो तो यह प्रकट होता है की जातक अपना व्यवसाय या नौकरी बदलता रहेगा और आर्थिक स्थिति बदलती रहेगी । कठिनाइयां आएंगी । जहा रेखा गहरी हो वह काल अच्छा होगा बाकी का समय धनोपार्जन के लिए अच्छा नहीं होगा ।


हस्तरेखा में घमण्डी व्यक्ति का हाथ 


यदि व्यक्ति के हाथ में गुरु पर्वत सामान्य से ज्यादा उभरा हुआ है तो ऐसा व्यक्ति घमण्डी और मुफठ होता है।

यदि व्यक्ति के हाथ में गुरु पर्वत सामान्य से ज्यादा उभरा हुआ है तो ऐसा व्यक्ति घमण्डी और मुफठ होता है।  (1)

यदि व्यक्ति के हाथ में मस्तक रेखा गुरु पर्वत से निकल रही हो तो ऐसा व्यक्ति घमण्डी होता है।  (2)

यदि व्यक्ति के हाथ में गुरु कि ऊँगली सामान्य से ज्यादा लम्बी हो ऐसा व्यक्ति अहंकारी होता है।  (3)



अप्रत्यसित लाभ हस्तरेखा
मणिबँध पर क्रॉस होना
Fig 1


1.  मणिबँध पर क्रॉस होना।   (fig-1)

सूर्य रेखा का भाग्य रेखा से निकलना।
Fig-2
2.  सूर्य रेखा का भाग्य रेखा से निकलना।  (fig-2)

सूर्य रेखा पर त्रिशूल होना
Fig-3

3.  सूर्य रेखा पर त्रिशूल होना।   (fig-3)

भाग्य रेखा का गुरु पर्वत् पर समाप्त होना
Fig-4
4.  भाग्य रेखा का गुरु पर्वत् पर समाप्त होना। (fig 4)

भाग्य रेखा के अंत में स्टार होना
Fig-5
5.  भाग्य रेखा के अंत में स्टार होना।  (fig 5)

 मस्तक रेखा से भाग्य रेखा का निकलना
Fig- 6
6.   मस्तक रेखा से भाग्य रेखा का निकलना। (fig 6)

भाग्य रेखा की शाखा का सूर्य रेखा से मिलना
Fig 7

7. भाग्य रेखा की शाखा का सूर्य रेखा से मिलना।  (fig 7)


लचकदार अंगूठा हस्तरेखा ( Supple Thumb Palmistry )
लचकदार अंगूठा : अंगूठे के प्रथम जोड़ के नरम या लचीला होने से अंगूठा पीछे की ओर आसानी से धनुषाकार होकर घूम जाता है।

लचकदार अंगूठा : अंगूठे के प्रथम जोड़ के नरम या लचीला होने से अंगूठा पीछे की ओर आसानी से धनुषाकार होकर घूम जाता है। ऐसे अंगूठे का जोड़ बहुत लचकदार होता है। लचकदार अंगूठे वाले जातकों का स्वभाव भी लचकदार होता है।

अपने किसी निर्णय पर ये बहुत समय तक स्थिर नहीं रह सकते। अवसर एवं समय के रुख के अनुसार इनके विचार बदलते रहते हैं। फुलूलखर्ची, अस्थिरता व भावुकता इनके स्वभाव में होती है। ऐसे लोगों की बातों कोई पता नहीं गिरगिट की तरह रंग बदलनr इनके जीवन की अfभन्न सच्चाई है, किन्तु इसका मतलब यह नहीं है कि वे दगाबाज और बेईमान होते हैं।

दरअसल, ऐसे लोग भावुकता और उदारतावश दूसरों के प्रभाव में आकर अपने निर्णय बदल देते हैं, किन्तु अपने इस बदलाव का दु:ख इन्हें होता है। ऐसे लोग नयी परिस्थितियों व नये व्यक्तियों के साथ आसानी से पुल-मिल जाते हैं, इसलिए इन्हें कहीं भी परेशानी नहीं होती। दूसरों के गुणावगुणों को भी शीघ्र अपनाना इनका स्वभाव होता है। लचीले अंगूठे वाले जातक जल्दबाज, , भावुक व सहज होते हैं। प्रेम-प्रदर्शन, आकर्षण तथा काल्पनिक विचारों में निपुण होते हैं।

घर, परिवार व राष्ट्र के प्रति इन्हें भावात्मक प्रेम होता है, किन्तु इनमें क्रियात्मक क्षमता और संकल्पशक्ति का अभाव होता है। कई बार बिना सोचे-समझे गलत निर्णय ले लेते हैं और परेशानी में पड़ जाते हैं।



दाँतो में दर्द हस्तरेखा

यदि शनि पर्वत उभरा हुआ हो और पर खड़ी और तिरछी  रेखाये  बनी  हो  तो व्यक्ति  को दांत  में  दर्द  की  शिकायत  होती है।


यदि शनि पर्वत उभरा हुआ हो और पर खड़ी और तिरछी  रेखाये  बनी  हो  तो व्यक्ति  को दांत  में  दर्द  की  शिकायत  होती है। 

यदि मस्तक रेखा  शनि पर्वत  के नीचे खराब है तो भी व्यक्ति को दांतो और मसूड़ों की समस्या होती है। 

    
यदि उंगलियो का द्वितीय पर्व बाकी पर्वो से बड़ा हो तो ऐसे व्यक्तियों को दांतो में तकलीफ  है। 



रवि रेखा पर काले तिल का अर्थ जानिये - हस्तरेखा 

कृष्ण बिंदु रवि रेखा पर ( काला तिल रवि रेखा पर ) 

रवि या सूर्य रेखा पर काला बिंदु स्पष्ट रूप से होने पर मनुष्य को कलापूर्ण कार्यो में असफलता ही प्राप्त होती है ।

रवि या सूर्य रेखा पर काला बिंदु स्पष्ट रूप से होने पर मनुष्य को कलापूर्ण कार्यो में असफलता ही प्राप्त होती है ।

ऐसा मनुष्य अपनी ही गलतियों की वजह से यश , मान-सम्मान, प्रतिष्ठा खो देता है और धनहानि झेलता है । (नितिन कुमार पामिस्ट)  अपनी बदनामी करवा के अपना पतन अपने आप देखता रहता है और धीरे धीरे ऐसा व्यक्ति समाज में कलंकित हो जाता है ।

ऐसे व्यक्ति को आँखों की शिकायत भी होती है और ऐसे व्यक्ति को पिता का सुख नहीं मिलता है कहने का अर्थ ये है या तो पिता का स्वर्गवास जल्दी हो जाता है या फिर पिता के सात वैचारिक मतभेद हमेसा बने रहते है । (नितिन कुमार पामिस्ट)


ऐसे व्यक्ति को सूर्य को जल देना चाहिए और " आदित्य हृदयम स्तोत्रम " का पाठ नियमित रूप से रोजाना करना चाहिए और अनामिका ऊँगली में मानक धारण करना चाहिए । (नितिन कुमार पामिस्ट)


उंगलियों की लम्बाई | Hast Rekha

उंगलियों की लम्बाई | Hast Rekha


तर्जनी उंगली 

लम्बी - आदमी नास्तिक व हकुमत करना चाहता है !
बहुत लम्बी - क्रूर व अत्याचारी !
छोटी - विश्वास की कमी और अपनी जिम्मेदारी ना निभाना !
टेडी - सम्मान की कमी !


मध्यमा उंगली 

लम्बी - आदमी दूरदर्शी होता है !
बहुत लम्बी - दुखी !
छोटी - जीवन के प्रति गंभीर न होना !
टेडी - हिंसात्मक प्रवृति !


अनामिका उंगली 

लम्बी - सौन्दर्प्रियता !
बहुत लम्बी - जुआरी !
छोटी - कलात्मकता की कमी, केवल पैसा कमाने की चाह!
टेडी - कला व हुनर का गलत उपयोग !


कनिष्ठिका उंगली 

लम्बी - चतुर !
बहुत लम्बी - आदर्श की कमी !
छोटी - जल्दबाज़, जल्दी फैसला लेने वाला !
टेडी - बेईमान !

मस्तक रेखा से गहरी रेखाए भाग्य रेखा को काटती हुई

मस्तक रेखा से गहरी रेखाए भाग्य रेखा को काटती हुई मुकदमे के कारण आर्थिक हानि अथवा कार्यक्षेत्र में
मस्तक रेखा से गहरी रेखाए भाग्य रेखा को काटती हुई मुकदमे के कारण आर्थिक हानि अथवा कार्यक्षेत्र में असफलता का  मुह देखना पड़ता है। 

हृदय रेखा सूर्य क्षेत्र के नीचे टूटी हुई हो 

हृदय रेखा सूर्य क्षेत्र के नीचे टूटी हुई हो

यदि हृदय रेखा सूर्य क्षेत्र के नीचे टूटी हुई हो तो व्यक्ति को प्रेम सम्बन्ध में निराशा प्राप्त होती है व ऐसा व्यक्ति खुद जिम्मेदार होता है।   ऐसे व्यक्तिओ को आँखों कि बीमारी व पिता के प्रेम से वंचित रहना पड़ता है।

दो समान्तर रेखाय शनि पर्वत पर - हस्तरेखा 

शनि पर्वत पर भाग्य रेखा के दोनों तरफ छोटी छोटी समान्तर रेखाए होने पर व्यक्ति परिश्रमी होता है लेकिन उसको सफलता बहुत बाद (मध्य आयु) में मिलती है ।
शनि पर्वत पर भाग्य रेखा के दोनों तरफ छोटी छोटी समान्तर रेखाए होने पर व्यक्ति परिश्रमी होता है लेकिन उसको सफलता बहुत बाद (मध्य आयु) में मिलती है ।   ( नितिन कुमार पामिस्ट )

विवाह और अलगाव 






यदि विवाह रेखा आगे चलकर दो भागो में बट जाय तो जाल ले की पति पत्नी बिमा तलाक लिए एक दूसरे से अलग हो जाएंगे । पति पत्नी एक दूसरे से दुखी हो कर के कानून और दुनिया की नजर में तो पति-पत्नी होते है पर वास्तिविक जिंदगी में दोनों के बीच सभी रिस्ते टूट चुके होते है ।

हथेली पर ग्रहों के स्थान - हस्तरेखा 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार निर्धारित हैं जिनके गहन अध्ययन से जातक के फलाफल का ज्ञान होता है। वे इस प्रकार हैं : ग्रहों के स्थान को ग्रहों के पर्वत के नाम से भी जाना जाता है। जैसे सूर्य के स्थान को सूर्य का पर्वत, शुक्र के स्थान को शुक्र का पर्वत कहा जाता है। यदि पैनी दृष्टि से इनका अध्ययन किया जाए तो ग्रहों के पर्वतों को विकसित, अविकसित एवं निम्न देखकर ग्रहों की जानकारी वैसे ही मिल सकती है जैसे कि किसी जन्मपत्री से मिलती है।


ग्रहों के पर्वत से संकेत
गुरु - तर्जनी के मूल - धर्म, मानसम्मान, नेतृत्व, महत्वाकांक्षा, अधिकार, प्रभुत्व।
शानि - मध्यमा मूल - शिक्षण, अध्ययन, चिंतन, धृष्णा, एवं घुटन आदि।
सूर्य - अनामिका मूल - कला, प्रतिभा, यश, सफलता, महानता, तेज, आदर-सम्मान।
बुध - कनिष्ठा मूल - बुद्धि, व्यवसाय, विज्ञान एवं चातुर्य।।
शुक्र - अंगूठे का मूल - प्रणय, वासना, सहदयता, कला आदि।
चंद्र - शुक्र पर्वत के सामने - कल्पना, रहस्य, स्वार्थ, वासना एवं कलात्मक प्रगति का सूचक।
निम्न मंगल - शुक्र एवं गुरु पर्वत के बीच - हिंसा एवं क्रोध ।

उच्च मंगल - चंद्र एवं बुध पर्वत के बीच - साहस, धर्म , नैतिकता , धैर्य ।

नितिन कुमार पामिस्ट


हृदय रेखा का उच्च मंगल पर्वत से निकलना - HASTREKHA



मगल से निकली हुई हदय रेखा व्यक्ति में क्रोध, जल्दीबाजी, बुखार व खून की कमी का लक्षण है। खून की खराबी जैसे फोड़ा, फुन्सी, दाद आदि का प्रभाव इनको होता है।

मंगल से निकली हुई हृदय रेखा दोषपूर्ण भी हो तो उपरोक्त दोष अधिक होते हैं। हृदय रेखा में दोष हो तो आखों में दोष पाया जाता है। ऐसे व्यक्तियों के वंश में सूरजमुखी सन्तान होने की सम्भावना होती है। सूरजमुखी न होने पर आखें छोटी, तिरछा देखना या पलक झपकना आदि होते हैं।


स्वयं व सन्तान के चरित्र में भी कोई न कोई दोष होता है। ऐसे व्यक्तियों की सन्तान कुसंगति में पड़कर घर छोड़ कर भागती है। इनका स्वभाव चिड़चिड़ा होता है व घबराहट अधिक होती है (चित्र-132)। मंगल से निकली हुई हृदय रेखा मोटी व शाखा रहित हो। तो व्यक्ति दया-हीन होते हैं, ये मांस, मदिरा जैसे अभक्ष्य आहार करते हैं। मंगल से निकली हृदय रेखा उगलियों के आधार से बहुत नीचे हो तो व्यक्ति उपरोक्त दुर्गुण होते हुए भी किसी न किसी विषय में पारंगत होते हैं।


Mayur Chinha Hindu Palmistry (Peacock Sign In Palmistry)

Mayur Chinha:- Gandharva Kala mein roochi, bhogi aur samannit vykti.

Banawat:  Mor pankh ki pahchan hoti hai uske failey hue pankh.  Hath mein bhi mor ke failey hue pankho ki aakriti (chitra sankhya 290) ke anusaar jeevan rekha, bhagya rekha, surya rekha, swasthya rekha awam yatra rekha se banti hai. 

Shani Mudrika - Hastrekha ( Ring of Saturn In Palmistry )


Shani valay yani Shani mudrika jisko english mein ring of saturn naam se jana jata hai yah vykti mein shani ke swabhavik guno mein rok lagane ki kosheesh karti hai.  Jis vykti ke hath mein shani ka challa hota hai us mein ekagartha ki kami paai jaati hai.  Vah kisi bhi karya ko lambe samay tak tik kar nahi kar pata hai aur jaldi jaldi karya ko badalne ki kosheesh karta hai jiski wajah se usko asafalta milti hai aur yadi hath mein doosare yog khraabh hai to wah vykti apradh kar baithta hai.

Nitin Kumar
(http://indianpalmreading.blogspot.com) 



Bhrispati Parvat (Guru Parvat) - Hast Rekha Shastra


Brihaspati Parvat Ka Ubhar:-

1.  Ativiksit:- Brihaspati parvat ke atyadhik ubhar le kar ke viksit ho jaane par vykti ahankaari, aadamber priya, jhooti shaan ke liye atyadhik kharcha karne wala hota hai.  Doosaro ko neecha dikhane mein krurta ka bartaav, irsha, dwesh, avam swarth ki bhavna ka vikas ho jata hai. (http://indianpalmreading.blogspot.com)

2.  Aviksit:- Jab Brihaspati parvat atyadhik dabba hua hota hai to barhispati ke molik guno ka vikas nahi pata hai.  Vykti dharam ke parti avishwas rakhta hai.  Mahtvakanshay awam natritav ke guno ka vikas nahi hota hai.  Apne se bado ke parti shardha awam adar bhaav mein kami aati hai. (Nitin Kumar Palmist)


3. Bimari:- Brihaspati parvat pr rog lakshan hone par vykti ko atyadhik khaan-paan ka shuakeen hone se pachan tantra sambhandhi rog, liver, mirgi, peeliya, karna rog, sojan, motapa, apach, ajeerna awam madhumeh jaise bimari ho sakti hai.


चिकित्सक व समाजसेवक योग
चिकित्सक व समाजसेवक योग  Medical Palmistry and Social Worker Indian Palmistry

यदि भाग्य रेखा चन्द्र पर्वत से प्रारंभ होती है व बुध पर्वत पर खडी रेखाए हो जो हृदय रेखा की तरफ जाय तो व्यक्ति समाजसेवक, डॉक्टर व नर्स इत्यादि कार्य करने वाला होता है !

-नितिन कुमार



नवग्रहो के उपाय




ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारा जीवन नौ ग्रहों की स्थितियों पर निर्भर करता है। कुंडली 12 भागों में विभक्त रहती है और इन 12 भागों में ही नौ ग्रहों की अलग-अलग स्थितियां रहती हैं। सभी ग्रहों के शुभ-अशुभ फल होते हैं। हमारी कुंडली में जो ग्रह अच्छी स्थिति में होता है वह हमें अच्छा फल प्रदान करता है, जबकि जो ग्रह अशुभ स्थिति में होते हैं वे बुरा फल देते हैं।

सूर्य- सूर्य ग्रह हमें तेज, यश, मान-सम्मान प्रदान करता है। सूर्य शुभ होने पर हमें समाज में प्रसिद्धि मिलती है वहीं सूर्य के अशुभ होने पर अपमान जैसे विपरित प्रभाव होते हैं।
उपाय: सूर्य को प्रसन्न करने के लिए प्रतिदिन सुबह-सुबह सूर्य को जल अर्पित करें।

चंद्र: चंद्र का संबंध हमारे मन से बताया गया है। चंद्र अच्छी स्थिति में हो तो व्यक्ति शांत होता है लेकिन अशुभ चंद्र व्यक्ति को पागल तक बना सकता है।

उपाय: यदि चंद्र अशुभ स्थिति में हो तो प्रतिदिन शिवलिंग पर दूध अर्पित करें।


मंगल: मंगल हमारे धैर्य और पराक्रम को नियंत्रित करता है। शुभ मंगल हो तो व्यक्ति कुशल प्रबंधक होता है।

उपाय: मंगल से शुभ फल प्राप्त करने के लिए हर मंगलवार शिवलिंग पर लाल पुष्प अर्पित करें। ऊँ भौमाय नम: मंत्र का जप करें।

बुध: बुध ग्रह हमारी बुद्धि और बोली को प्रभावित करता है। शुभ बुध होने पर हमारी बुद्धि शुद्ध और पवित्र होती है लेकिन अशुभ होने पर विपरित प्रभाव होते हैं।

उपाय: बुध के अशुभ प्रभावों को दूर करने के लिए हर बुधवार गाय को हरी घास खिलाएं।

गुरु: गुरु ग्रह हमारी धार्मिक भावनाओं को नियंत्रित करता है। इस ग्रह के शुभ होने पर व्यक्ति को धर्म संबंधी कार्यों में विशेष लाभ प्राप्त होता है। भाग्य का साथ मिलता है।

उपाय: गुरु से शुभ फल प्राप्त करने के लिए हर गुरुवार चने की दाल का दान करें।

शुक्र: शुक्र से प्रभावित व्यक्ति कलाप्रेमी, सुंदर और ऐश्वर्य प्राप्त करने वाले होता है। शुभ शुक्र के प्रभाव से व्यक्ति विलासिता का जीवन पाता है।

उपाय: शुक्र को मनाने के लिए शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल अर्पित करना चाहिए।


शनि: जिस व्यक्ति की कुंडली शुभ अवस्था में हो वह सभी सुखों को प्राप्त करने वाला, श्याम वर्ण, शक्तिशाली होता है। शनि अशुभ होने पर कई परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।

उपाय: शनि से शुभ फल पाने के लिए हर शनिवार तेल का दान करें। पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें।

राहु: जिस व्यक्ति की कुंडली राहु बलशाली होता है वह कठोर स्वभाव वाला, प्रखर बुद्धि, श्याम वर्ण होता है। इसके अशुभ होने पर बड़ी-बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

उपाय: राहु के अशुभ प्रभावों को दूर करने के लिए किसी गरीब व्यक्ति को काले कंबल का दान करें।

केतु: केतु शुभ हो तो व्यक्ति को कठोर स्वभाव, गरीबों का हित करने वाला, श्याम वर्ण होता है।

उपाय: केतु से शुभ फल प्राप्त करने के लिए शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें और वृक्ष की सात परिक्रमा करें।

भाग्य रेखा का उदय मंगल पर्वत से होना - HAST REKHA VIGAN




भाग्य रेखा का उदय मंगल पर्वत से होना

हाथ में मंगल दो स्थानों पर होता है। अंगूठे के पास और बुध की उंगली के नीचे। कभी-कभी अंगूठे वाले मंगल से भाग्य रेखा निकलकर, शनि की ओर जाती हुई देखी जाती है। वैसे तो यह भाग्य रेखा ही होती है, परन्तु देखने में ऐसी नहीं लगती। अत: सूक्ष्म निरीक्षण करके, इसका निर्णय कर लेना चाहिए देखा गया है कि बुध के मंगल से निकल कर कोई भाग्य रेखा शनि पर नहीं जाती। (चित्र-107) (नितिन पामिस्ट)

इस प्रकार की भाग्य रेखा, श्रृहस्पति मुद्रिका का भी कार्य इसी स्थान पर करती है। यदि ऐसे व्यक्तियों को धर्म में विशेष रुचि हो तो ये इस विषय में अच्छी स्थिति प्राप्त कर लेते हैं। इन्हें गुरूत्व शक्ति की प्राप्ति साधनावस्था में हो जाती है। यह लक्षण आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। साधारण साधकों के हाथों में ऐसे लक्षण नहीं मिलते। हाथ में दूसरे आध्यात्मिक लक्षणों को देखकर विशेषता व आयु का पता लगाया जा सकता है।

मंगल से भाग्य रेखा निकलने पर बड़ी आयु में संघर्ष के साथ जीवन बनता है, फिर भी ऐसे व्यक्ति अच्छी उन्नति कर जाते हैं। मंगल से निकली भाग्य रेखा, यदि शनि पर जाती हो तो व्यक्ति चलती सवारी या जानवर आदि से टकराकर चोट खाता है। ये किसी वृक्ष से भी गिरते हैं। सटटे के काम में इन्हें हमेशा हानि होती है। (नितिन पामिस्ट)

इन्हें जीवन में टायफाइड बुखार एक से अधिक बार होता है। मंगल से निकलकर भाग्य रेञ्जा, शनि पर गई हो और हाथ भी भारी हो, जीवन रेखा निर्दोष व मस्तिष्क रेखा उत्तम हो तो व्यक्ति सम्पत्ति निर्माण या क्रय को पश्चात् उन्नति करता है। पगड़ी पर ली हुई, खरीदी हुई या बनाई हुई सम्पत्ति इन्हें यहीं फल देती है। गोद या बखशीश (दान) में प्राप्त हुई सम्पति का भी यही फल होता है।

एकादश भाव में राहु



एकादश भाव में राहु - एकादश भाव में सभी ग्रह शुभ फलदायक होते हैं अत: राहु भी शुभफलदायक है। पापमार्ग से धन लाभ जिसका दुष्परिणाम संतानों, पुत्रों पौत्रों को भोगना पड़ता है अत: पाप के धन से बचना ही श्रेयस्कर तथा शुभ है। स्त्रीराशि में - शुभफल पुरुष राशि में अशुभफल पुरुष राशि में - पुत्र संतति में बाधा, पूर्व जन्म का शाप, पुत्र की मृत्यु, गर्भपात, पत्नी को सन्तति प्रतिबंधक योग में प्रजनन अंगों के रोग अथवा संतान उत्पन्न करने की अक्षमता होना। अचानक धनी होने की इच्छा, दौड़, शेयर सट्टा, लाटरी, जुआ में धन खर्च, अधिकारी होने पर अन्धाधुन्ध रिश्वत लेना, कानून के चंगुल में फाँसकर दण्ड, अपमान, नौकरी छूटना, कारावास आदि भोगना, लोभी स्वभाव, मित्रों से हानि, भाग्योदय में रुकावटें।

स्त्रीराशि में प्रथम सन्तान कन्या, बहुत समय बाद पुत्र, पुत्रियां अधिक, मित्र अच्छे, ज्योतिष या मन्त्रशास्त्र में कुशल, उनकी सहायता से जीवन चलना, रिश्वत लेने पर पकड़ा न जाना, व्यापार व नौकरी दोनों में सफल बडी भाई की मृत्यु या बेरोजगारी से उसके कुटुम्ब का बोझ भी स्वयं उठाना 42वें वर्ष सहसा । प्राप्ति. 28वें वर्ष आजीविका प्रारंभ 27वें वर्ष विवाह।

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