नाख़ून (Nails On Hand) | Hastrekha


नाख़ून

नाख़ून व्यक्ति की अनेक मनोवृत्तियाँ और रोगों के विषय में महत्वपूर्ण सूचना देते हैं। अत: हाथ को देखते समय नाखूनों का अध्ययन भी बहुत आवश्यक है। नाखूनों का अध्ययन उनको रंग, रूप लम्बाई, मोटाई, आकार और अन्य बनावट को विषय में सूक्ष्म रूप से कर लेना चाहिए। इस लक्षण से हमें कई विशेष जानकारियां मिलती हैं। प्रत्येक नाखून अपना विशेष महत्त्व रखता है। ग्रह या उंगली के लक्षण देखते समय नाखून का लक्षण भी उससे मिलाना आवश्यक हो जाता है।

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नाखूनों के रंग

 श्वेत नाखून व्यक्ति में स्नायु-दोष का लक्षण है। इनका रक्त-चाप कम होता है। इन्हें सिर दर्द रहता है। यदि सिर के पिछले भाग में लगातार दर्द रहता हो तो ऐसे व्यक्तियों को लकचा होने का डर रहता है। स्नायु-विकार होने के समय नाखूनों का रंग बिल्कुल सफेद हो जाता है। कई बार इस प्रकार का रंग व्यक्ति में किसी दूसरी आत्मा का प्रभाव होने पर भी देखा जाता है, इनकी नींद कम आती है और मबराते अधिक हैं।

 हृदय रोग होने पर नाखूनों का रंग सफेद होता है। बीमारी की अवस्था में खून की कमी होने पर नाखून पतले हो जाते हैं और दबाने पर दब जाते हैं। हृदय रोग से ग्रस्त व्यक्ति के नाखून ऊबड़-खाबड़ तथा प्रेत-बाधा या अल्प-निद्रा रोग में ये कंवल सफेद होते हैं। आकार में विकार नहीं आता। चलने-फिरने से हृदय में पीड़ा का अनुभव करने वालों के नाखून हल्के सफेद होते हैं। इस रोग को एन्जायना कहते हैं। हृदय में छेद होने पर नाखून बीच में से ऊंचा हो जाता है। (नितिन कुमार पामिस्ट)

नाखून का रंग लाल होने पर व्यक्ति क्रोधी होता है। इनके शरीर में पित्त का प्रभाव अधिक होता है। इनकी कोई आदत नहीं डालनी चाहिए अन्यथा ये उसके आदी हो जाते हैं और छोड़ने में कठिनाई होती है। इन्हें खट्टी वस्तुएं नहीं खानी चाहिए। अघिक गरम पेय पदार्थ भी इनक स्वास्थ्य को हानि पहुंचाते हैं। लाल नाखून वाले व्यक्ति क्रोधी होते हैं। साथ में अन्य क्रोध के लक्षण होने पर ये विशेष क्रोधी पाये जाते हैं। 

अधिक धूम्रपान करने वालों के नाखून धुएं जैसे हो जाते हैं। यह रक्त में निकोटीन बढ़ जाने का लक्षण होता हैं। ऐसे लक्षण का प्रभाव हृदय पर पड़ता है। इनकी धूम्रपान कम कर देना चाहिए या बन्द कर देना चाहिए अन्यथा शरीर में कई रोग घर कर लेते है ।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

 लम्बे नाखून

 ऐसे व्यक्ति सीधे-सादे तथा भावुक होते हैं, इन्हें किसी भी विषय में तीव्र रूचि नहीं होती है। शरीर के अनुपात से लम्बे होने पर ऐसे व्यक्तियों की कमर मे दर्द रहता है। इन्हें मियादी बुखार बार-बार होता है। भाग्य रेखा गहरी होने पर यदि नाखून विशेष लम्बे हों तो कैंसर, ट्यूमर, गॉल ब्लेडर (पित्ताशय) में पथरी आदि की सम्भावना रहती है। 

छोटे नाखून

छोटे नाखून व्यक्ति में बुद्धिमत्ता व सतर्कता का लक्षण है। ऐसे व्यक्ति जल्दबाज होते हैं परन्तु, बुद्धिमान होने के कारण सफल ही रहते हैं। बचपन में इनका गला खराब रहता है। इनकी प्रबन्ध शक्ति अच्छी होती है।

चौड़े नाखून

चौड़े नाखून वाले व्यक्ति खुले दिल के, बुद्धिमान व सावधान होते हैं। खुले दिल के होने के साथ-साथ इनमें किसी बात को बहुत बारीकी से जानने का गुण होता है। ये जुबान के सच्चे होते हैं। मगर लम्बे समय तक एक काग नहीं कर सकते। उपाय अपाय की सोच कर कार्य करने वालों के नाखून चौड़े होते हैं। इनके स्वभाव • | में थोड़ी गर्म पायी जाती है, परंतु अबायोस ही किसी व्यक्ति से बिगाडते नहीं। इनकी छाती में दर्द की शिकायत रहती है। कभी-कभी रीद की हड्डी में भी दर्द रहता है, जिसका कारण झटका लगना होता है। अधिक चौडे और फैले हुए नाखून होने पर व्यक्ति की मस्तिष्क की नस फटने का डर रहता है। चौड़े नाखून यदि सख्त भी हों तो ऐसे व्यक्ति क्रोधी होते हैं।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

पतले नाख़ून 

 नाखूनों की मोटाई कम होने पर नाखून पतले कहे जाते हैं। ऐसे व्यक्ति का स्वास्थ्य कमजोर रहता है। मस्तिष्क में काम का दबाव होने से इनके सिर में दर्द रहने की शिकायत रहती है। इनका स्वभाव भूलने का होता है। ये आलसी होते हैं और नीद अधिक आती है। शरीर में दर्द और भूख की शिकायत भी इन्हें होती है। खट्टे च चटपटे पदार्थों में यह विशेष रूचि रखते हैं।

 मोटे नाखून 

नाखूनों का मोटा या मजबूत होना अच्छे स्वास्थ्य के चिन्ह हैं। सुदृढ़ नाखून वाले व्यक्ति शरीर व स्वास्थ्य के सुदृढ़ होते हैं। इन्हें लम्बे समय तक रहने वाली बीमारियां नहीं होती।


नाखूनों में चन्द्र



नाखूनों के पीछे की ओर सफंद भाग देखा जाता है, यह अर्ध-चन्द्राकार होता है। ऐसे व्यक्तियों का भार अवश्य बढ़ता है। भाग्य रेखा पतली होने के समय से इनका भार बढ़ना आरम्भ हो जाता है और जिस समय तक यह चन्द्र दिखाई देते रहते हैं, भार बढ़ता ही रहता है। जीवन रेखा सीधी होने पर व्यक्ति अधिक मोटा हो जाता है। अधिक बड़ा चन्द्र व्यक्ति में हृदय की कमजोरी का लक्षण है, इनको घबराहट बहुत होती है। अर्ध चन्द्र व अपूर्ण रेखा भी शरीर का भार बढने का लक्षण है।  (नितिन कुमार पामिस्ट)



चन्द रहित नाखून



नाखून छोटे अर्थात कम लम्बे होने पर उनमें सफेद चन्द्र का अभाव होता है। ये भी दुर्बल-स्नायु के होते हैं व हृदय कमजोर होता है। परन्तु यदि नाखून मोटे व दबाने पर सख्त हों तो उपरोक्त रोगों का भय नहीं रहता।



नाखूनों में दाग

नाखूनों में सफेद दाग भी स्नायु दुर्बलता का लक्षण है। ऐसे व्यक्ति प्रेमी और साधारण झूठ बोलने वाले होते हैं। बचपन में अधिक वीर्यपात के कारण भी नाखूनों में इस प्रकार के दाग हो जाते हैं। सूर्य की उंगली पर सफेद दाग होने पर व्यक्ति को सम्मान लाभ होता है। धृहस्पति पर लेखन सम्बन्धी त्र शनि पर धन सम्बन्पी लाभ होता है।

नाखूनों में काले दाग व्यक्ति की मृत्यु की सूचना देते हैं। इनको मस्तिष्क में शीघ्र ठेस पहुंचती है। स्त्री मरने, सन्तान भाग जाने या उसकी मृत्यु होने, पर धन नाश होने या सम्मान पर प्रहार होने पर नाखूनों में काले दाग पैदा हो जाते हैं।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

नाखूनों में काले दाग शारीरिक कष्ट का चिन्ह हैं। यदि ऐसे दागू नाखून के आरम्भ अर्थात् चन्द्र के स्थान पर हों तो मृत्यु जैसे कष्ट का सूचक है।

नालीदार (रेखायुक्त) नाखून

प्राय: नाखूनों में नालियां बन जाती हैं। ये नालियां नाखूनों के बीव गहराई हो जाने का परिणाम होती हैं। लम्बे समय तक पेट में गैस या कब्ज रहने के पश्चात् इस प्रकार की नालियां बनती हैं। मस्तिष्क रेखा शनि के नीचे दोषपूर्ण होने पर अंगूठे के नाखून में इस प्रकार की नालियां या रेखाएं मधुमेह का निश्चित लक्षण है।

नारवून में कभी-कभी काली धारियां भी देखी जाती हैं। ऐसे व्यक्तियों को पेट में गैस बनती है तथा आगे चल कर इन्हें गुर्दे के रोग हो जाते हैं। अंगूठे में इस प्रकार का काली धारी होने पर व्यक्ति को सिर में दर्द की शिकायत रहकर उसके मस्तिष्क
की कोई छोटी नाड़ी फट जाती है, उसी के फलस्वरूप इस प्रकार काली धारी अंगूठे के नाखून में बनती है। यह धारी कुछ मोटी व स्पष्ट होती है। ऐसे व्यक्तियों को गुर्दे के रोग होने का डर रहता है। धारियां छूने पर चिकनी तथा नालियां खुरदरी अनुभव होती हैं।


लम्बे संकरे नाखून



जब नाखून बहुत संकरे हों तो रीद की कमजोरी की ओर संकेत करते हैं। यदि वे बहुत बड़े व पतले हों तो यह समझना चाहिए कि रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो गयी है और शरीर निर्बल हो गया है।



भद्दे नाखून



कुछ व्यक्तियों के नाखून कटे-फटे से अथवा भद्दे-से होते हैं। थे ऊथट-खाबड़ से दिखाई देते हैं। इन्हें पेशाव में फास्फेट जाता है। चित्र-14 इन्हें रोगों की सम्भावना रहती है। खून की कमी इसमें प्रधान कारण है। कई बार नाखूनों के अन्त में अर्थात् बाहर की ओर धुंधली काली-सफेद-सी धारी दिखाई देती है। ऐसे व्यक्तियों को हृदय रोग हो जाता है।  (नितिन कुमार पामिस्ट)



चपटे

यदि नाखून बहुत चपटे दिखाई दें और ऊपरी अन्त पर मांस से उखड़े नजूर आयें तो पक्षाघात का खतरा होता है। यह खतरा और भी अधिक हो जाता है यदि वे सीप की आकार के होकर मूल स्थान की दिशा में नुकीले हों। जब इन नाखूनों में चन्द्र के कोई चिन्ह न हों तो यह समझना चाहिए कि रोग बढ़ गया है।

चतुष्कोणाकार नाखून

नाखूनों की लम्बाई व चौड़ाई बराबर होने पर ऐसे व्यक्ति उन्नति करने वाले होते हैं, परन्तु प्रारम्भिक जीवन में इन्हें संघर्ष का सामना करना पड़ता है। इनका लाभ और हानि बराबर होता है, परन्तु सन्तान के कार्य करने के पश्चात् विशेष सफलता मिलती है। इनकी मनोवृति मिली-जुली होती है। ऐसे व्यक्ति अच्छी बातों को ग्रहण करने वाले होते हैं, परन्तु क्रोध आने पर गुणों की टोपी उतार कर अलग रख देते हैं। बड़ी उम्र में इनका क्रोध बहुत कम हो जाता है। इस प्रकार स्नेह में भी ये व्यक्ति अविचारी पाए जाते हैं। आचार व व्यवहार में समान होते हैं। महसूस भी करते हैं और हसते भी हैं। इनका गला थोड़ा बहुत खराब होता है। वृद्धावस्था में नजला या कफ का प्रभाव देखा जाता है। ये साधारणतया शरीर से ठीक रहते हैं।

त्रिकोणाकार नाखून

कभी-कभी नाखून की बनावट त्रिकोणाकार देखी जाती है। ऐसे नाखून आगे से चौड़े तथा पीछे की ओर बहुत नुकीले हो जाते हैं। इस प्रकार नाखून की आकृति त्रिकोणाकार जैसी बन जाती है। ऐसे व्यक्ति बुद्धिमान, हँसमुख व जल्दबाज होते हैं। त्रिकोणाकार नाखून होना व्यक्ति की मानसिक दक्षता का लक्षण है। इनको गले व नाक के रोग देखे जाते हैं।

बृहस्पति या प्रथम उंगली का नाख़ून

हाथ में प्रथम उगली या बृहस्पति का नाखून व्यक्ति की मानसिक प्रवृत्तियों का मुख्य लक्षण है। बृहस्पति की दोनों उंगलियों के नाखून छोटे-बड़े अवश्य ही होने चाहिए. नहीं तो व्यक्ति की ग्रहण शक्ति कम होती है। जितना ही अधिक अन्तर बृहस्पति की दोनों उंगलियों के नाखूनों में होता है, उतना ही व्यक्ति भाग्यशाली, समझदार व चालाक होता है और उन्नति भी अधिक करता है।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

वृहस्पति के दोनों नाखून सम होने पर व्यक्ति सीधा होता है। इनमें ग्रहण शक्ति कम होती है। किसी भी बात को देर से समझते हैं और वृहस्पति का नाखून छोटा होने पर व्यक्ति में प्रबन्ध शक्ति अधिक होती है। मस्तिष्क रेखा एक से अधिक होने पर या मस्तिष्क रेखा दोनों ओर से शाखाकार होने पर ये उद्योगपति या बड़े प्रबन्धक होते हैं। बृहस्पति का नाखून गोल होने पर व्यक्ति के गले में दोष पाया जाता है। अन्य दोष होने पर इनकी सांस की नली का दमा हो जाता है।

शनि या दूसरी उंगली का नाखून

शनि का नाखून चौकोर, सुन्दर व छोटा होने पर व्यक्ति में मानव सुलभ गुणों की विशेषता पाई जाती है। ये पेड़-पौधों व पशु-पक्षियों सहित जीव मात्र से प्रेम करते हैं खेती, बागवानी व फुलवारी का इन्हें विशेष शौक होता है। ये व्यक्ति अध्यात्म व दर्शन में रूचि रखते हैं।

सूर्य या तीसरी उंगली का नाखून

सूर्य या तीसरी उंगली का नाखून चौकोर होने पर ऐसे व्यक्ति दस्तकार होते हैं। चौड़ा होने पर इनकी रूचि साहित्य की ओर जाती है।

बुध या चौथी उंगली का नाखून

इंसान की मानसिक रूचि व चरित्र की जानकारी के विषय में बुध की उंगली का नाखून विशेष महत्व रखता है। बुध का नाखून छोट, चौकोर व सुन्दर होने की या साहित्य में रूचि रखता है। ऐसे बच्चे क्या, क्यों, कैसे, इस प्रकार के प्रश्न करने वाले होते हैं। बुध का नाखून छोटा होने पर राजनीति में विशेष रूचि होती है तथा हाथ में अन्य लक्षण होने पर चुनाव लड़ता है। ये सफल राजनीतिज्ञ होते हैं।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

अंगूठे का नाखून

दोनों हाथों में एक जैसा हो तो व्यक्ति वंश परम्परा के अनुसार जीवन यापन करते हैं। बायें हाथ में अंगूठे का नाखून यड़ा व दायें का छोटा हो तो नये ढंग से जीवन निर्माण करते हैं। दायें हाथ में बड़ा व बायें में छोटा होने पर संघर्षशील होते हैं व अपना कमाया हुआ धन विश्वास व स्नेह के कारण दूसरों की सहायता में खर्च करने वाले होते हैं। ये 35 वर्ष के बाद धन-सम्पत्ति व सम्मान प्राप्त करते हैं तथा एकाग्रता से कार्य करने वाले होते हैं। ये स्वयं तथा समाज क लिए विशेष उदार होते हैं। जबकि दायें हाथ में नाखून छोटा होने पर व्यक्ति चालाक व निजी स्वार्थ आगे रखते हैं। दायां हाथ कता होने के कारण अधिकतर व्यक्तियों के इसी हाथ के नाखून बड़े होते हैं।

दो या अधिक नाखूनों का समन्वय

बुध व शनि का नाखून छोटा व चौकोर होने पर व्यक्ति में धार्मिक गुणों का अधिक समावेश होता है। इस सम्बन्ध में व्यक्ति विशेष ख्याति प्राप्त करता है तथा लेखक होने पर सत्-साहित्य का निर्माण करता है। बुध व वृहस्पति की उंगलियों कं नाखन छोटे व चौकोर हों तो व्यक्ति में व्यवहार व चरित्र सम्बन्धी गुण अधिक पाये जाते हैं। बुध व सूर्य का नाखून छोटा व चौकोर होने पर व्यक्ति रसायन व आयुर्वेद के ज्ञात होते हैं।  (नितिन कुमार पामिस्ट)

नाखून का महत्व शोध या मनोविज्ञान की दृष्टि से केवल सुन्दर व उत्तम हाथ में होता है। निकृष्ट हाथों में निकृष्ट कोटि के गुण पाये जाने के कारण नाखूनों का विशेष महत्व नहीं होता। उस समय अंगूठे के नाखूनों से केवल व्यक्ति की मनोवैज्ञानिक प्रवृत्तियों व रोग के विषय में जाना जाता है।


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