यदि चन्द्र-क्षेत्र पर तारे का चिह्न हो तो बहुत से हस्तपरीक्षकों के अनुसार यह पानी में डूबने का लक्षण है। यदि शीर्ष-रेखा घूम कर चन्द्र-क्षेत्र के नीचे के भाग पर आती है तो इससे कल्पना की अधिकता प्रकट होती है । उस रेखा के अन्त पर तारे का चिह्न होने से उसकी कल्पना में इतनी अधिकता हो जाती है कि उसे एक प्रकार से मस्तिष्क-विकार समझना चाहिए। अन्य शुभ लक्षणों के साथ यदि चन्द्र-क्षेत्र पर तारे का चिह्न हो तो उसे अशुभ लक्षण नहीं समझना चाहिए। क्योंकि शुभ कल्पना द्वारा यह सफलता और प्रतिष्ठा दिलाता है। किन्तु यदि अन्य अशुभ लक्षण हों तो चन्द्र-क्षेत्र के बिलकल नीचे के भाग में होने से जातक को जलोदर रोग होने का लक्षण है। यदि मध्य भाग में हो तो पानी में डूबने का; यदि समुद्र यात्रा-रेखा पर हो तो जहाज डूबने का।
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