Indications Of Love Marriage In Female Hand | Palmistry

Indications Of Love Marriage In Female Hand | Palmistry

Indications Of Love Marriage In Female Hand | Palmistry

An influence line from Mount of Moon join fate line indicates love marriage.

In female hand palmistry, one of the strongest indications of love marriage is when an influence line rising from the Mount of Moon clearly joins the fate line.

This formation shows emotional involvement, romantic attachment, and marriage by personal choice rather than family arrangement. According to love marriage signs in female hand palmistry, the Mount of Moon represents imagination, attraction, and opposite-gender influence. When this influence line meets the fate line, it indicates that a woman’s life direction changes due to love, relationship, or partner. 

Such palmistry signs of love marriage in female hand are often seen in women who marry after a love affair, intercaste marriage, or marriage against family wishes, especially when supported by a strong heart line and marriage line.

If you want more detail on love marriage line and signs then read this post - Love Marriage Or Arrange Marriage Line - Marriage Line

हस्तरेखा और भाग्य रेखा (Hastrekha Aur Bhagya Rekha)

हस्तरेखा और भाग्य रेखा
(Bhagya Rekha In Hindi)  

वर्तमान समय के जन मानस में भाग्य शब्द अपरिचित नहीं है।  आज अगर कोई कार्य समय पर नहीं हो पाता या उसमें किसी भी प्रकार की अड़चन आती है तो भाग्य को ही दोष दिया जाता है ।  

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गीता के अठारहवें अध्याय में कहा गया है कि भगवान श्री कृष्ण का सारा परिश्रम भाग्य के नीचे दब गया और उसमें लिखा है कि "दैवंचैवात्र पंचमम्"। वास्तव में देखा जाय तो भाग्य एक बाजार है जहां थोड़ी देर ठहरने के बाद भाव गिर जाते हैं।  

 बालक अपने पूर्व जन्म के संस्कारों के आधार पर जिस परिवार में जन्म लेता है उसका परिवेश परिजन बड़ी तन्मयता से पालन करता है। इस जीवन में जो कुछ मनुष्य कर्म करता है। वह धीरे धीरे संचय होता जाता है और उसकी एक तलपट तैयार होती जाती है, हम उसे कलान्तर में भाग्य का रुप दे देते हैं। आज का जो हमारा पुरुषार्थ है वही कल का भाग्य है, वास्तव में कर्मफल भोग के परिपाक को ही भाग्य कहते हैं।

मातृ दोषेण दुःशीलो, पितृ दोषेण मूर्खता। कार्पण्य वंश दोषेण, स्वदोषेण दरिद्रता।। (श्रीमद्भागवत महापुराण)  

मनुष्य यदि चरित्रहीन हो तो उसकी माता में दोष सम-हजयना चाहिए, यदि वह मूर्ख है तो उसके पिता का दोष सम-हजयना चाहिए, यदि वह गरीब है तो किसी का दोष नहीं स्वयं का दोष सम-हजयना चहिए। इन्ही दस अंगुलियों द्वारा किये गये काम से दैनिक सप्ताहिक मासिक या वार्षिक रुप से भाग्य का संचय होता है। शनि रेखा या भाग्य रेखा मनुष्य का जीवन चक्र बतलाती है। उसका कारबार, व्यक्तित्व, आर्थिक उन्नति, परिवर्तन, व्याप्त प्रवृतियां इन सब का चित्रण भाग्य रेखा या शनि रेखा करती है।    

भाग्य रेखा का उद्गम स्थान मणिबन्ध है, वहां से निकलने वाली रेखा मध्यमा अंगुली की ओर जाती है। इस रेखा के मार्ग में आने वाले अनेक चिह्न एवं रेखाओं का भिन्न-ंउचयभिन्न अर्थ निकलते हैं। 1.अ. भाग्य रेखा आयु रेखा में से निकलकर शनि पर्वत को जाये तो व्यक्ति का शुरुआती जीवन कुछ कठिनाई युक्त व्यतीत होता है। मेहनत से कार्य करके ये लोग प्रायः 21 वर्ष की आयु के पश्चात उन्नति करते हैं।





1.स. मणिबन्ध से प्रारम होनेवाली भाग्य रेखा शुभ मानी जाती है। आरम्भ में यदि मत्स्य रेखा हो तो अत्यन्त शुभ माना जाता है। यही रेखा चैकोर हाथ में होने से व्यक्ति काफी अधिक धन कमाता है तथा काम से जी नहीं चुराता है। यही रेखा दार्शनिक हाथ में होने से कम काम करने से अधिक पैसा प्राप्त होता है।  




2.अ. मस्तिष्क रेखा से भाग्य रेखा शुरु होने पर काफी परेशानी को -हजयेलने के बाद व्यक्ति का कार्य प्रगति पथ की ओर अग्रसर होता पाया गया है।   

2.ब. यदि भाग्य रेखा शनि पर्वत तक जाती है तो व्यक्ति की बृद्धावस्था सुखमय व्यतीत होती है।  

2.स. भाग्य रेखा के समाप्ति स्थान पर क्रास का चिह्न घातक संकेत है।   

3.अ. चन्द्र क्षेत्र से निकलने वाली भाग्य रेखा से दूसरों की सहायता या प्रोत्साहन से सफलता प्राप्त होती है राजनीतिज्ञ एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं के हाथों में ऐसी रेखा अधिकांश पायी जाती है।

3.ब. सीधी जाती हुई भाग्य रेखा में चन्द्र क्षेत्र से आकर अन्य रेखा मिलने पर व्यक्ति इच्छानुसार सफल होगा परन्तु किसी की सहायता से।

3.स. यही रेखा स्त्रियों के हाथ में होने से उसका विवाह या तो धनवान से होगा या फिर किसी द्वारा धन की सहायता प्राप्त होगी।   


4.अ. यदि भाग्य रेखा वृहस्पति क्षेत्र में पहुंच जाये तो व्यक्ति को अधिकार और विशिष्टता प्राप्त होती है ऐसे लोग उच्च पदों को प्राप्त करते हैं। इसके अलावा अगर अन्य शुभ लक्षण हों तथा रेखा के अन्त में त्रिशूल का आकार होवे तो यह राज योग होता है।   

4.ब. यदि भाग्य रेखा की कोई शाखा वृहस्पति क्षेत्र में पहंुच जाये तो अति उत्तम योग होता है तथा ऐसे व्यक्ति अत्यंत महत्वाकांक्षी होते हैं।   

4.स. शनि क्षेत्र में पहुंचने वाली भाग्य रेखा अच्छा फल देती है।  

5.अ. जंजीरनुमा भाग्य रेखा व्यक्ति को दुःख में डाल देती हैं   

5.ब. दो भाग्य रेखा हो तथा उसमें कोई दोष न हो तो व्यक्ति उन्नति करता है, सम्मान प्राप्त करता है, यह रेखा समानांन्तर होगी तो भी शुभ फल प्रदान करेगी।   

5.स. यदि भाग्य रेखा हाथ को पार करके मध्यमा में पहुंच जाये तो लक्षण शुभ नहीं होता, वह व्यक्ति हमेशा सीमा और नियम कायदे का उल्लंघन करता है।   

6.अ. यदि भाग्य रेखा शीर्ष रेखा पर ही रूकती हो तथा पुनः वहां से वृहस्पति क्षेत्र में पहुंचती हो तो व्यक्ति को प्रेम भावना के कारण बाधा उत्पन्न होती है। परन्तु गुरु के प्रभाव से पुनः प्रेम सम्बन्ध से सहायता द्वारा अभिलाषा पूर्ण होती है।   

6.ब. शीर्ष रेखा द्वारा भाग्य रेखा रुक जाय तो व्यक्ति को स्वयं की गलती से असफलता मिलती है।   

6.स. मंगल पर्वत से भाग्य रेखा शुरु होने पर भ्रम, शंका आदि का डर रहता है। यही रेखा शनि क्षेत्र पर जाने से बाधाओं में सफलता तथा धैर्य, श्रम, और लगन से उन्नति होती है।     

7.अ. शुक्र पर्वत की ओर से आकर कई बारीक रेखायें जब भाग्य रेखा को काटती हैं, तो पारिवारिक कष्ट और उल-हजयनों का सामना करना पड़ता है।  

7.ब. भाग्य रेखा मध्य में खण्डित होने से या टूट जाने से कुछ समय के लिए जीवन निष्क्रिय हो जाता है।   

7.स. भाग्य रेखा से हृदय रेखा की ओर जाने वाली छोटी रेखायें हो तो व्यक्ति के जीवन में प्रेम का ऐसा भी क्षण आता है कि जिनका अन्त विवाह बाद भी नहीं होता।   

8.अ. त्रिकोण से (दोनों हाथों में) शुरु होने वाली भाग्य रेखा व्यक्ति को बौद्धिक योजनाओं में सफलता प्रदान करती है।   

8.ब. भाग्य रेखा के शुरुआत में टे-सजय़ी-ंउचयमे-सजय़ी रेखा एवं श्रृंखला व्यक्ति के बचपन में कष्ट का संकेत देती है।   

8.स. भाग्य रेखा मध्य में हल्की पड़ जाने से उसके मध्य जीवनकाल में सुखमय समय का प्रतीक है।   

9.अ. दोनों हाथों में बुध पर्वत पर जानेवाली भाग्य रेखा व्यापार में सफलता देती है।   

9.ब. शुक्र पर्वत से एक गहरी रेखा भाग्य रेखा की ओर जाये तो व्यक्ति हिंसात्मक काम भावना वाला होता है।   

9.स. यदि इसी रेखा के साथ अन्य रेखा भी जाती हो तो भारी बाधाओं पर आनन्दपूर्ण विजय होती है।    

10.अ. भाग्य रेखा पर नीचे की ओर जाने वाली शाखायें व्यक्ति को आर्थिक कष्ट देती है।   

10.ब. भाग्य रेखा तीन जगह से बीच में टूटने से वात रोग द्वारा कष्ट होता है।   

10.स. अगर भाग्य रेखा को कोई अन्य शाखा काटती हुई बुध की जाली को पार कर जाये तो व्यक्ति की बेईमानी उसे ले डूबती है तथा उसे पश्चाताप करना होता है।   

11.अ. चन्द्र क्षेत्र से सूर्य या बुध क्षेत्र को सीधी जाने वाली भाग्य रेखा व्यक्ति को व्यापार से महान सफलता दिलाती है। ऐसे लोगों को साहित्य और कला में भी सफलता मिलती है।   

11.ब. मष्तिष्क रेखा से शुरु होने वाली भाग्य रेखा का व्यक्ति शराब या नशीले पदार्थों की दुकान आदि चलाता है।   

11.स. जिन हाथों में भाग्य रेखा नहीं पायी जाती वे जीवन में सफल तो होते हैं पर उनमें विशेष निखार या तेज नहीं पाया जाता है। ऐसे लोगों को सामान्य सुखी कहा जा सकता है।


सौजन्य  - सरल हस्तरेखा पुस्तक 

Hastrekha Vigyan Aur Fate Line


Indications of Second Marriage On Hand | Marriage Line Palmistry

Indications of Second Marriage On Hand | Marriage Line Palmistry

Indications of Second Marriage On Hand | Marriage Line Palmistry

1) Double or parallel marriage lines on both hands
2) Fate line broken under head line (Mount Of Rahu)
3) Big fork on marriage line
4) Parallel Mars Line on hand
5) Branch of fate line touching heart line
6) Double fate line

If you want more detail on chances of second marriage then read this post - Second Marriage Indications On Hand - Marriage Line  

Interpretation Of Mars Line In Palmistry

Interpretation Of Mars Line In Palmistry

The Line Of Mars

The usual starting point of this Line is the Lower Mount of Mars. It runs inside the Life Line and very close beside it.

Function Of Mars Line
By and large it supplements the functions of the Line of Life.
If the Mars Line runs close and parallel to the Life Line on the Lower Mount of Mars and the Mount of Venus. It corrects many of the breaks and defects in the Line Life.
It represents the vital force in man which offers greater power of resistance to withstand any disease, nervous debility or unexpected shock.


Characteristic Features Of The Mars Line

Deep or broad - A sign of great heat, violence and sexual passions.

Sister lines running parallel inside the Mount of Venus - Influence of other people over the life of the subject.

Terminating in a fork - Super abundance of the animal nature - intemperance of every kind.

Terminating in a fork one prong of which enters the mount of Moon and ends in a star - Alcoholic intemperance.

If you want to know more about Mars Line in detail then visit below link : Detailed Information About Mars Line

हथेली पर ग्रहों के स्थान - हस्तरेखा | Mounts On Hand Palmistry


हथेली पर ग्रहों के स्थान - हस्तरेखा | Mounts On Hand Palmistry


ज्योतिष शास्त्र के अनुसार निर्धारित हैं जिनके गहन अध्ययन से जातक के फलाफल का ज्ञान होता है। वे इस प्रकार हैं : ग्रहों के स्थान को ग्रहों के पर्वत के नाम से भी जाना जाता है। जैसे सूर्य के स्थान को सूर्य का पर्वत, शुक्र के स्थान को शुक्र का पर्वत कहा जाता है। यदि पैनी दृष्टि से इनका अध्ययन किया जाए तो ग्रहों के पर्वतों को विकसित, अविकसित एवं निम्न देखकर ग्रहों की जानकारी वैसे ही मिल सकती है जैसे कि किसी जन्मपत्री से मिलती है।


ग्रहों के पर्वत से संकेत
गुरु - तर्जनी के मूल - धर्म, मानसम्मान, नेतृत्व, महत्वाकांक्षा, अधिकार, प्रभुत्व।
शानि - मध्यमा मूल - शिक्षण, अध्ययन, चिंतन, धृष्णा, एवं घुटन आदि।
सूर्य - अनामिका मूल - कला, प्रतिभा, यश, सफलता, महानता, तेज, आदर-सम्मान।
बुध - कनिष्ठा मूल - बुद्धि, व्यवसाय, विज्ञान एवं चातुर्य।।
शुक्र - अंगूठे का मूल - प्रणय, वासना, सहदयता, कला आदि।
चंद्र - शुक्र पर्वत के सामने - कल्पना, रहस्य, स्वार्थ, वासना एवं कलात्मक प्रगति का सूचक।
निम्न मंगल - शुक्र एवं गुरु पर्वत के बीच - हिंसा एवं क्रोध ।
उच्च मंगल - चंद्र एवं बुध पर्वत के बीच - साहस, धर्म , नैतिकता , धैर्य ।

नितिन कुमार पामिस्ट

Bhrispati Parvat (Guru Parvat) - Hast Rekha Shastra


Bhrispati Parvat (Guru Parvat) - Hast Rekha Shastra

Brihaspati Parvat Ka Ubhar:-

1.  Ativiksit:- Brihaspati parvat ke atyadhik ubhar le kar ke viksit ho jaane par vykti ahankaari, aadamber priya, jhooti shaan ke liye atyadhik kharcha karne wala hota hai.  Doosaro ko neecha dikhane mein krurta ka bartaav, irsha, dwesh, avam swarth ki bhavna ka vikas ho jata hai. 

2.  Aviksit:- Jab Brihaspati parvat atyadhik dabba hua hota hai to barhispati ke molik guno ka vikas nahi pata hai.  Vykti dharam ke parti avishwas rakhta hai.  Mahtvakanshay awam natritav ke guno ka vikas nahi hota hai.  Apne se bado ke parti shardha awam adar bhaav mein kami aati hai.


3. Bimari:- Brihaspati parvat pr rog lakshan hone par vykti ko atyadhik khaan-paan ka shuakeen hone se pachan tantra sambhandhi rog, liver, mirgi, peeliya, karna rog, sojan, motapa, apach, ajeerna awam madhumeh jaise bimari ho sakti hai.

Mayur Chinha Hindu Palmistry (Peacock Sign In Palmistry)

Mayur Chinha Hindu Palmistry (Peacock Sign In Palmistry)

Mayur Chinha:- Gandharva Kala mein roochi, bhogi aur samannit vykti. Banawat: Mor pankh ki pahchan hoti hai uske failey hue pankh. Hath mein bhi mor ke failey hue pankho ki aakriti  ke anusaar jeevan rekha, bhagya rekha, surya rekha, swasthya rekha awam yatra rekha se banti hai.

हृदय रेखा का उच्च मंगल पर्वत से निकलना - HAST REKHA GYAN


हृदय रेखा का उच्च मंगल पर्वत से निकलना  - HAST REKHA GYAN

मगल से निकली हुई हदय रेखा व्यक्ति में क्रोध, जल्दीबाजी, बुखार व खून की कमी का लक्षण है। खून की खराबी जैसे फोड़ा, फुन्सी, दाद आदि का प्रभाव इनको होता है।
मंगल से निकली हुई हृदय रेखा दोषपूर्ण भी हो तो उपरोक्त दोष अधिक होते हैं। हृदय रेखा में दोष हो तो आखों में दोष पाया जाता है। ऐसे व्यक्तियों के वंश में सूरजमुखी सन्तान होने की सम्भावना होती है। सूरजमुखी न होने पर आखें छोटी, तिरछा देखना या पलक झपकना आदि होते हैं।

स्वयं व सन्तान के चरित्र में भी कोई न कोई दोष होता है। ऐसे व्यक्तियों की सन्तान कुसंगति में पड़कर घर छोड़ कर भागती है। इनका स्वभाव चिड़चिड़ा होता है व घबराहट अधिक होती है । मंगल से निकली हुई हृदय रेखा मोटी व शाखा रहित हो। तो व्यक्ति दया-हीन होते हैं, ये मांस, मदिरा जैसे अभक्ष्य आहार करते हैं। मंगल से निकली हृदय रेखा उगलियों के आधार से बहुत नीचे हो तो व्यक्ति उपरोक्त दुर्गुण होते हुए भी किसी न किसी विषय में पारंगत होते हैं।

लचकदार अंगूठा हस्तरेखा ( Supple Thumb Palmistry )

लचकदार अंगूठा हस्तरेखा (  Supple Thumb Palmistry )



लचकदार अंगूठा : अंगूठे के प्रथम जोड़ के नरम या लचीला होने से अंगूठा पीछे की ओर आसानी से धनुषाकार होकर घूम जाता है। ऐसे अंगूठे का जोड़ बहुत लचकदार होता है। लचकदार अंगूठे वाले जातकों का स्वभाव भी लचकदार होता है।

अपने किसी निर्णय पर ये बहुत समय तक स्थिर नहीं रह सकते। अवसर एवं समय के रुख के अनुसार इनके विचार बदलते रहते हैं। फुलूलखर्ची, अस्थिरता व भावुकता इनके स्वभाव में होती है। ऐसे लोगों की बातों कोई पता नहीं गिरगिट की तरह रंग बदलनr इनके जीवन की अfभन्न सच्चाई है, किन्तु इसका मतलब यह नहीं है कि वे दगाबाज और बेईमान होते हैं।
दरअसल, ऐसे लोग भावुकता और उदारतावश दूसरों के प्रभाव में आकर अपने निर्णय बदल देते हैं, किन्तु अपने इस बदलाव का दु:ख इन्हें होता है। ऐसे लोग नयी परिस्थितियों व नये व्यक्तियों के साथ आसानी से पुल-मिल जाते हैं, इसलिए इन्हें कहीं भी परेशानी नहीं होती। दूसरों के गुणावगुणों को भी शीघ्र अपनाना इनका स्वभाव होता है। लचीले अंगूठे वाले जातक जल्दबाज, , भावुक व सहज होते हैं। प्रेम-प्रदर्शन, आकर्षण तथा काल्पनिक विचारों में निपुण होते हैं।

घर, परिवार व राष्ट्र के प्रति इन्हें भावात्मक प्रेम होता है, किन्तु इनमें क्रियात्मक क्षमता और संकल्पशक्ति का अभाव होता है। कई बार बिना सोचे-समझे गलत निर्णय ले लेते हैं और परेशानी में पड़ जाते हैं।

दाँतो में दर्द हस्तरेखा | Teeth Pain Indications On Hand

 

यदि शनि पर्वत उभरा हुआ हो और पर खड़ी और तिरछी  रेखाये  बनी  हो  तो व्यक्ति  को दांत  में  दर्द  की  शिकायत  होती है।


यदि शनि पर्वत उभरा हुआ हो और पर खड़ी और तिरछी  रेखाये  बनी  हो  तो व्यक्ति  को दांत  में  दर्द  की  शिकायत  होती है। 

यदि मस्तक रेखा  शनि पर्वत  के नीचे खराब है तो भी व्यक्ति को दांतो और मसूड़ों की समस्या होती है। 

    
यदि उंगलियो का द्वितीय पर्व बाकी पर्वो से बड़ा हो तो ऐसे व्यक्तियों को दांतो में तकलीफ  है। 

अप्रत्याशित सफलता और लाभ हस्तरेखा


मणिबँध पर क्रॉस होना
Fig 1


1.  मणिबँध पर क्रॉस होना।   (fig-1)

सूर्य रेखा का भाग्य रेखा से निकलना।
Fig-2
2.  सूर्य रेखा का भाग्य रेखा से निकलना।  (fig-2)

सूर्य रेखा पर त्रिशूल होना
Fig-3

3.  सूर्य रेखा पर त्रिशूल होना।   (fig-3)

भाग्य रेखा का गुरु पर्वत् पर समाप्त होना
Fig-4
4.  भाग्य रेखा का गुरु पर्वत् पर समाप्त होना। (fig 4)

भाग्य रेखा के अंत में स्टार होना
Fig-5
5.  भाग्य रेखा के अंत में स्टार होना।  (fig 5)

मस्तक रेखा से भाग्य रेखा का निकलना
Fig- 6
6.   मस्तक रेखा से भाग्य रेखा का निकलना। (fig 6)

भाग्य रेखा की शाखा का सूर्य रेखा से मिलना
Fig 7

7. भाग्य रेखा की शाखा का सूर्य रेखा से मिलना।  (fig 7)

मोटी गद्देदार हथेली - हस्तरेखा

                                                                                   
मोटी गद्देदार हथेली में प्राय: शुक्र और चन्द्र पर्वत विशेष उभर लिए हुए होते है ।
                                
मोटी गद्देदार हथेली में प्राय: शुक्र और चन्द्र पर्वत विशेष उभर लिए हुए होते है । हथेली को दबाने  (नितिन कुमार पामिस्ट )  पर यह पिलपिली सी महसूस होती है । ऐसा जातक आरामप्रिय, आलसी, भोग प्रवृति वाला होता है तथा कर्म से दूर रहने का प्रयास करता है । असफल होने पर ईस्वर, किस्मत एवं भाग्य को कोसता है ।

हाथ में तलाक का योग - HASTREKHA VIGAN


हाथ में तलाक का योग - HASTREKHA VIGAN

हाथ में तलाक का योग 

यदि विवाह की रेखा हथेली के अंदर की और मुड़ती हुई दो  रेखाओ में बट जाय और उनमे से एक रेखा अंगूठे के गद्देदार स्थान तक पहुचे तो उस व्यक्ति का तलाक होता है ।

हस्तरेखा में घमण्डी व्यक्ति का हाथ | Egoist Person

यदि व्यक्ति के हाथ में गुरु पर्वत सामान्य से ज्यादा उभरा हुआ है तो ऐसा व्यक्ति घमण्डी और मुफठ होता है।

यदि व्यक्ति के हाथ में गुरु पर्वत सामान्य से ज्यादा उभरा हुआ है तो ऐसा व्यक्ति घमण्डी और मुफठ होता है।  (1)

यदि व्यक्ति के हाथ में मस्तक रेखा गुरु पर्वत से निकल रही हो तो ऐसा व्यक्ति घमण्डी होता है।  (2)

यदि व्यक्ति के हाथ में गुरु कि ऊँगली सामान्य से ज्यादा लम्बी हो ऐसा व्यक्ति अहंकारी होता है।  (3)

भाग्य रेखा लहरदार ( Wavy Fate Line )

भाग्य रेखा लहरदार ( Wavy Fate Line )

यदि भाग्य रेखा लहरदार हो तो यह प्रकट होता है की जातक अपना व्यवसाय या नौकरी बदलता रहेगा और आर्थिक स्थिति बदलती रहेगी । कठिनाइयां आएंगी । जहा रेखा गहरी हो वह काल अच्छा होगा बाकी का समय धनोपार्जन के लिए अच्छा नहीं होगा ।

पढ़ें - भाग्य रेखा सम्पूर्ण जानकारी 


हृदय रेखा पर सूर्य पर्वत के नीचे द्वीप होना

 

हृदय रेखा पर सूर्य पर्वत के नीचे द्वीप होना


हृद्य रेखा पर सूर्य पर्वत के नीचे द्धीप होने का मतलब 

यह द्वीप भी आंखों के दोषों को निश्चित करता है। शनि के पर्वत पर अधिक रेखाएं या मस्तिष्क रेखा में शनि के नीचे द्वीप होने पर अवश्य ही आंखों में दोष होता है। सूर्य के नीचे हृदय रेखा में द्वीप दूर की नजर के लिए अच्छा नहीं माना जाता । 


अतिशय-कामुकता; पित्त या जिगर दोषपूर्ण होने के कारण आंखों में खराबी पाई जाती है। इसी लक्षण से सिर में भारीपन भी रहता है। एक बात विशेष ध्यान रखने की है कि हदय रेखा में दोष होने पर मस्तिष्क रेखा निर्दोष हो तो कुछ समय के लिए ही आंखों में दोष पैदा होते हैं। 

कालान्तर में आख्चे ठीक हो जाती हैं। सूर्य के नीचे हृदय रेखा में दोप के साथ यदि मस्तिष्क रेखा में भी दोष हो तो सिर दर्द के कारण डर रहता है। ऐसे व्यक्तियों को साइनस का रोग पाया जाता है। इन्हें नाक से दूध पीना, सूत्र-नेति करना, बादाम रोगन पीना लाभकर रहता है। ऐसे व्यक्तियों को पेट में खराबी, नजला-जुकाम आदि का उपचार यथा समय व यथा शक्ति कराना चाहिए। (नितिन पामिस्ट)

स्त्रियों में आखों के दोष, प्रजनन के समय में कोई गड़बड़, अधिक रक्त स्राव, दौरे या सिर में चोट लगने से होता है। हाथ में अधिक दोष जैसे प्रत्येक रेखा में विशेघ दोष, मस्तिष्क रेखा अधिक दोषपूर्ण या जीवन रेखा टूटी हो तो मस्तिष्क में रसौली या कैंसर होने के कारण आखें खराब हो जाती हैं। 


हृदय रेखा टूट कर मस्तिष्क रेखा पर मिलने पर मस्तिष्क रेखा में सूर्य के नीचे दोष हो तो अधिक रोने के कारण आखों में दोष होता है। 

सूर्य या बुध के नीचे कोई वृत्ताकार द्वीप चाहे यह कई रेखाओं के द्वारा ही बना हो या बाहर की ओर से कोई रेखा सूर्य या बुध के नीचे छूती हो और मस्तिष्क रेखा में दोष व जीवन रेखा के आरम्भ में दोष हो तो पूर्णतया अन्धा होने का लक्षण कई बार हृदय रेखा पर त्रिकोण का आकार भी बुध या सूर्य के नीचे देखा जाता है । 

यह आकार निर्दोष दृदय रेखा पर होता है। वास्तव में यह द्वीप होता है और आरबों में विशेष दोष का लक्षण है। हदय रेखा में नीचे की ओर होने पर यह अधिक प्रभावशाली होता है।

हृदय रेखा मंगल से निकलने पर यदि सूर्य के नीचे द्वीप हो तो भी आंखों में दोष होता है। यह दोष पित्त के कारण आख्झें खराब होने का लक्षण है। ऐसे व्यक्तियों के घर में तिरछा देखने वाले (भैगे), एक आख बन्द करके देखने वाले या सूर्य-मुखी व्यक्ति होते हैं। 


सन्तान पर भी इसका प्रभाव देखा जाता है। ऐसे व्यक्तियों के चरित्र में किसी न किसी प्रकार का दोष भी होता है। हदय रेखा, सूर्य के नीचे द्वीपयुक्त होने से सन्तान की आंखें कमजोर होती हैं। हाथ पतला होने पर अधिकतर बच्चों को चश्मे का प्रयोग करना पड़ता है और भारी हाथ होने पर एक या दो चश्मे लगाते हैं। 

यदि मस्तिष्क रेखा में कोई दोष नहीं हो तो कुछ समय के लिए ऐसा होकर आंखें ठीक हो जाती हैं।

Hath Me Mrityu Rekha Konsi Hoti Hai - Hast rekha Gyan

Hath Me Mrityu Rekha Konsi Hoti Hai - Hast rekha Gyan

Hath Me Mrityu Rekha Konsi Hoti Hai - Hast rekha Gyan

Hast rekha vigyan mein mrityu (death) ko le kar bahut se yog ka vivran diya gaya hai lekin aisa nahi hai ki humesha wo sahi hi hote hai isliye hast-jyotishi ko bahut saavdhani ke sath faladesh karna chahiye aur vykti ko saavdhan karna chahiye.

Halaki ki mrityu ka faladesh karna kadapi anuchit aur anetik hai isliye palmist ko humesha is vishay se duri bana kar rakhni chahiye.

Yadi hast-jyotishi ko lagta hai ki vykti ke prano ko sanktan to hast-jyotish vykti ko aane wale khatra se aagah kar sakta hai aur usko jyotish remedy de sakta hai.

1) Yadi jeevan rekha dono hatho mein ek hi jagah par tooti hui ya dweep-yukt hai to vykti bimar pad sakta hai ya phir uska saamna kisi accident se ho sakta hai.

2) Yadi jeevan rekha mein dweep hai aur us ke bheetar aadi rekha ya cross hai to vykti ke parviar mein kisi mrityu ka soochak hai.

3) Kala til jab bhi kisi rekha par aata hai khastor par jeevan rekha par tab wo kisi badi bimari ka soochak mana jata hai.

4) Swasthaya rekha agar jeevan rekha ko kaat de aur shukar parvat par aa jaay to aise vykti ki dhurgatana mein mrityu hone ki sambhavna rahti hai.

5) Agar nimn magal parvat par cross ya island ka sign ho to vykti ka bada accident ya us pe humla hota hai ya phir wo suicide kar sakta hai.

6) Agar teeno mukhya rekha (Mastak, Jeevan, aur Hridhya) aapas mein mil jaay to vykti suicide kar sakta hai ya phir alpayu ho sakta hai.

7) Agar Head line life line ke parallel neeche manibandh par aa jaay to vykti tanaav mein aa kar suicide kar sakta hai ya doob kar mar sakta hai.

Is tarah hast rekha mein bahut sare yog (sign) death ko le kar batay gaye hai jaise family mein kisi ki death hona, father ya mother ki jaldi death hona, bhai ya bahan ki death hona, pati ya patni ki death hona, sudden death hona, lambi bimari ke baad death hona, videsh mein death hona, paani mein doob kar death hona, ya lambi bimari ke baad death hona, suicide kar lena, etc

Ye sab us particular line ke tootne ya us par bure sign (cross, island, ya mole) ke hone par pata lagta hai jaise marriage line par mole hai to husband ki death ho sakti hai ya marriage line heart line ko touch kar rahi hai to bhi aisa ho sakta hai aur jaise bhai-bahan ki rekha tooti hui ho to wo bhai ya bahan ki kacchi umar mein death ko darshati hai, etc.

Yaha par ek baat clear karna bahut jaroori hai ki is tarah ke yog (signs) ka result kabhi bhi 100% nahi paya jata hai isliye humesha is tarah ka prediction karte waqt bahut saavdhani bartani chahiye.

कनिष्ठिका अँगुली (Little Finger) बुध की अँगुली | Budh Ki Ungli Hast Rekha

कनिष्ठिका अँगुली (Little Finger) बुध की अँगुली | Budh Ki Ungli Hast Rekha


यह अँगुली जितनी लम्बी होती है उतनी शुभ मानी जाती है। अनामिका के पहले पोरे तक पहुँचने वाली अँगुली वाला व्यक्ति उच्चस्तर की सफलता प्राप्त करता है। वह साहित्यकार, अच्छा वक्ता या लेखन से सम्बन्धित कार्य करने वाला भी हो सकता है। वह जो भी कार्य करे उसमें अन्त में अच्छी कामयाबी पाता है। असाधारण लम्बाई बुद्धिजीवी होने, प्रभावशाली तथा सफल व्यक्तित्व को प्रकट करती है।

1) अगर अँगुली छोटी हो तो व्यक्ति में व्यावहारिकता बढ़ा देती है।
2) कनिष्ठिका का प्रथम पर्व बड़ा होने पर लेखन में रुचि, दूसरा पर्व विज्ञान में रुचि, तीसरा पर्व व्यापार में प्रवृत्ति बनाता है।

पढ़ें - अनामिका अँगुली (Ring Finger) सूर्य की अँगुली

अँगलियों के पोरों पर चिह्न और उनके फल | Ungliyo Ke Chinho Ka Faladesh Hastrekha

अँगलियों के पोरों पर चिह्न और उनके फल | Ungliyo Ke Chinho Ka Faladesh Hastrekha


भारतीय हस्त सामुद्रिक शास्त्रानुसार यदि चक्र का चिह्न सभी अँगुलियों के प्रथम पर्व पर हो तो बहुत शुभ होता है। ऐसा जातक अच्छा भाषण देने वाला, वार्तालाप में निपुण और ऊँची शिक्षा पाता है। चक्र का चिह्न नौ अँगुलियों पर हो तो जातक विदेश जाता है, गुणवान तथा बुद्धिमान होता है। जीवन में अच्छी उन्नति करता है। पर शनैः शनैः। अगर दाहिने हाथ की चार अँगुलियों में चक्र हो तो जातक धार्मिक, सामाजिक तथा शिक्षा के क्षेत्र में उन्नति करता है। दाहिने हाथ की 3 उंगलियों में चक्र होने पर जातक व्यापार करने या व्यापारिक कार्यों में उन्नति करता है।

1) दोनों हाथों की दसों अँगुलियों के प्रथम पोरे में शंख का चिह जा को आध्यात्मिक ज्ञान से पूर्ण संन्यासी विद्वान बनाता है। उसे समाज के प्रतिष्ठा और यश मिलता है।

2) अँगूठे या अँगुलियों के प्रथम पोरे (पर्व) पर स्थित तारा (Star) उस अँगुली की विशेषता के अनुसार सफलता देता है।

3) अँगुलियों के बीच बनी धारियाँ (पोरों को अलग करने वाली लकीरें) यव (जौ) के आकार की होना शुभ माना जाता है। ऐसा व्यक्ति उचित मात्रा में विद्या तथा धन प्राप्त करता है।

वर्गाकार हाथ में चपटे हाथ (Soatulate Hand) जैसी अँगुलियाँ होने पर वह किसी उपयोगी यन्त्र का आविष्कारक हो सकता है। वर्गाकार हाथ में अतीन्द्रिय हाथ (Psychic Hand) जैसी अँगुलियाँ होने पर उसकी व्यावहारिकता में कमी आ । जाती है। वह किसी कार्य को उत्साह से शुरू करेगा परन्तु सतत प्रयत्न नहीं कर सकेगा जिससे असफल हो जायेगा। परन्तु यदि वह कोई परामनोवैज्ञानिक साधना करेगा तो सफल होने की सम्भावना बढ़ जायेगी। वह ध्यान, प्राणायाम आदि करने की नयी विधियाँ और उनके उपयोग भी निकाल सकता है।

 अब दार्शनिक हाथ (Philosophic Hand) और अतीन्द्रिय हाथ (Psychic Hand) के बारे में बताते हैं क्योंकि इन दोनों के बीच भेद कम होता है। दार्शनिक हाथ फैला हुआ तथा बड़ा होता है परन्तु अतीन्द्रिय छोटा और पतला। पहले में हडिडयो उभरी हुई होती है, दूसरे में नहीं। अतीन्द्रिय हाथ का अँगूठा छोटा होता है और दार्शनिक हाथ का बडा। पहले में अँगुलियाँ चिकनी तथा नाखून नकौले पारे । है, दूसरे में अँगुलियाँ लम्बी तथा उनके जोड़ गाँठ वाले होते हैं।

अतीन्द्रिय हाथ वाले की हथेली पर दार्शनिक हाथ जैसा अँगूठा होने । उसमे गहराई से विचार करने, ज्ञान पाने की लालसा, अपने कार्य और । पर दृढ रहने, कम बोलने के गुण आ जायेंगे। इसके साथ मूल गुण अती हाथ के रहेंगे। इस प्रकार के हाथों को मिश्रित हाथ कहा जाता है। इन द्वारा हम मिश्रित हाथ होने पर उनके फल निकालने की विधि सीख सकते है।

पढ़ें - तर्जनी अँगुली (Index Finger)/पहली अँगुली/बृहस्पति की अँगुली

तर्जनी अँगुली (Index Finger) पहली अँगुली/बृहस्पति की अँगुली । Pointed Finger Palmistry

तर्जनी अँगुली (Index Finger) पहली अँगुली/बृहस्पति की अँगुली । Pointed Finger Palmistry

1) यह अनामिका (Ring Finger) से हल्की -सी छोटी होती है। अनामिका से बड़ी होने पर यह प्रकट करती है-उच्च पद की प्राप्ति, स्वार्थ व कठोरता की अधिकता, चतुरता, बड़ो की चापलूसी, छोटों पर कठोरता, अध्यात्म द्वारा दूसरों पर शासन, सत्ता पाने की भूख।
2) तर्जनी अगुली लम्बी, ऊपरी सिरा नकीला-परम्परा, धर्म तथा पुराने विश्वासों में अन्धी आस्था, तन्त्र-मन्त्र, भत-प्रेत में विश्वास, विशेषकर महिलाओं में।
3) लम्बी तर्जनी और ऊपरी सिरा वर्गाकार-चरित्र की दृढता तथा उदारता प्रकट करती है।
4) औसत लम्बाई की तर्जनी, आगे का सिरा चपटा-ऐसे व्यक्ति का मन अधिकतर अस्थिर रहता है।
5) बहुत छोटी तर्जनी-व्यक्ति शीघ्र निर्णय लेता है।
6) तर्जनी अँगुली का पहला पर्व लम्बा-आत्मविश्वास पूर्ण आध्यात्मिक विधाओं में रुचि।
7) तर्जनी अँगुली का दूसरा पर्व लम्बा-महत्त्वाकांक्षी, योगेच्छा।
8) तर्जनी अँगुली का तीसरा पर्व लम्बा-अहंकारी, कठोर, पाशविक।
9) प्रथम अँगुली (Index Finger) और मध्यमा (बीच की अँगुली) लम्बाई में बराबर-सौभाग्य, यश, अधिकार सम्पन्न।

पढ़ें - अनामिका अँगुली (Ring Finger) सूर्य की अँगुली

Surya Rekha Dilati Hai Govt Job | Hastrekha Shastra




Yadi hath mein acchi surya rekha hai aur sath hi yadi bhagya rekha chandra parvat se shuru ho kar shani parvat par khatham ho rahi hai to vykti ko sarkari naukari lag sakti hai ya phir sarkar se labh milta hai.

Note:  Surya rekha aur bhagaya rekha dono nirdosh honi chahiye.

Ye bhi padein-

Government Job Signs On Hand (English)

Samudrashastra Mein Sarkari Nokri Ke Yog (Hindi)



भाग्य रेखा का तर्जनी ऊँगली पर समाप्त होना - हस्तरेखा ज्ञान

भाग्य रेखा का तर्जनी ऊँगली पर समाप्त होना - हस्तरेखा ज्ञान
भाग्य रेखा का तर्जनी ऊँगली पर समाप्त होना - हस्तरेखा ज्ञान 
यदि मणिबन्ध से निकली हुई भाग्य रेखा गुरु-क्षेत्र को पार करती हुई तर्जनी अगुली के प्रथम पर्व के समीप जा पहुंचे तो ऐसा व्यक्ति कोई उच्चपदाधिकारी, मन्त्री, न्यायाधीश अथवा राजा होता है। जनता मे उसकी अत्यन्त प्रतिष्ठा होती है । वह हृदय का दयालु भी होता है।

गुरु पर्वत पर जाने वाली भाग्य रेखा से शाखा निकल कर बुध पर्वत पर जाय - हस्तरेखा विज्ञान

गुरु पर्वत पर जाने वाली भाग्य रेखा से शाखा निकल कर बुध पर्वत पर जाय - हस्तरेखा विज्ञान

गुरु पर्वत पर जाने वाली भाग्य रेखा से शाखा निकल कर बुध पर्वत पर जाय - हस्तरेखा विज्ञान
गुरु-क्षेत्र पर पहुंचने वाली भाग्य रेखा मे से एक शाखा रेखा निकलकर यदि बुध के पर्वत पर जा पहुंचे तो ऐसी रेखा वाले जातक को आकस्मिक रूप से धन की प्राप्ति होती है।

गुरु पर्वत पर जाने वाली भाग्य रेखा से शाखा का निकल कर सूर्य पर्वत पर जाना - हस्तरेखा विज्ञान

गुरु पर्वत पर जाने वाली भाग्य रेखा से शाखा का निकल कर सूर्य पर्वत पर जाना - हस्तरेखा विज्ञान

गुरु पर्वत पर जाने वाली भाग्य रेखा से शाखा का निकल कर सूर्य पर्वत पर जाना - हस्तरेखा विज्ञान 
यदि भाग्य रेखा गुरु-क्षेत्र पर पहुच रही हो और उसमे से एक शाखा रेखा निकलकर सूर्य-क्षेत्र पर चली गई हो तो ऐसी रेखा वाला व्यक्ति किसी धनी एव महापुरुष का विशेष कृपापात्र बनकर सुख-सम्पत्ति का लाभ करता है।

भाग्य रेखा का गुरु पर्वत पर समाप्त होना - हस्तरेखा ज्ञान

भाग्य रेखा का गुरु पर्वत पर समाप्त होना - हस्तरेखा ज्ञान

भाग्य रेखा का गुरु पर्वत पर समाप्त होना - हस्तरेखा ज्ञान 

१) पुरुष है तो औरत से लाभ मिलता है और औरत है तो पुरुष से लाभ मिलता है। 

२) शादी के बाद किस्मत खुलती है। 

३) अपने से बड़ी उम्र वाले इंसान के साथ शादी हो सकती है या फिर लव मैरिज, या इंटरकास्ट मैरिज हो सकती है। 

४) सरकार और विदेश से लाभ प्राप्त होता है। 

भ्रमण रेखाये - हस्तरेखा ज्ञान

भ्रमण रेखाये - हस्तरेखा ज्ञान

भ्रमण रेखाये - हस्तरेखा ज्ञान 

जीवन रेखा से छोटी छोटी रेखाएं निकलकर मणिबंध, चंद्र पर्वत, और शुक्र पर्वत जाती हैं उन्हे भ्रमण-रेखा कहा जाता है । जिस जातक के हाथ मे ऐसी रेखाएं जीवन-रेखा के दोनो ओर हो उसका सम्पूर्ण जीवन देश-विदेश में भ्रमण करते हुए ही व्यतीत होता है। उसके जीवन में अनेक प्रकार के परिबर्तन भी आते है। 

यदि जीवन-रेखा से निकली हुई भ्रमण-रेखा पर द्वीप चह्न दिखाई दे तो ऐसे जातक की यात्रा निष्फल होती है। 

यदि जीवन-रेखा से निकली हुई भ्रमण-रेखा से निकली हुई भ्रमण-रेखा पर चतुष्कोण (वर्ग) चिह्न दिखाई दे तो जातक की यात्रा काल मे प्राणां तक दुर्घटना से रक्षा हो जाती है। 

यदि जीवन-रेखा से निकली हुई भ्रमण-रेखा चन्द्रक्षेत्र को पार करती हुई हथेली के पार निकल गई हो तो जातक की यात्रा मे ही कष्ट पाकर मृत्यु हो जाती है।

बुध-मुद्रा हस्तरेखा ज्ञान

बुध-मुद्रा हस्तरेखा ज्ञान

बुध-मुद्रा हस्तरेखा ज्ञान 

कनिष्ठा उंगली के नीचे बुध-क्षेत्र पर यह रेखा पाई जाती है और अपने अर्द्धचन्द्राकार रूप मे वुध-क्षेत्र को घेरे रहती है यह रेखा बुध-क्षेत्र अथवा बुध-रेखा के शुभ प्रभाव में न्यूनता ला देती है। जिस जातक के हाथ मे बुध-मुद्रा हो, वह व्यक्ति जुमारी, चोर, मषयी तथा मूर्ख होता है। यदि वह कोई व्यवसाय करता है तो अत्यधिक परिश्रम करने पर भी उसे उसमे हानि उठानी पड़ती है। ऐसी रेखा वाले जातक की आयु ज्यो-ज्यों बढती है त्यो-स्यो उसमें दुर्गणो की वृद्धि हो जाती है । वह भाई-बन्धुओं से विरोध रखने वाला "विश्वासघाती, कुटिल, अपयशी तथा दरिद्र होता है। उसका वैवाहिक • जीवन भी अत्यन्त क्लेशमय बीतता है।

शुक्र मुद्रिका का भाग्य रेखा और सूर्य रेखा को काटना - हस्तरेखा

शुक्र मुद्रिका का भाग्य रेखा और सूर्य रेखा को काटना - हस्तरेखा

शुक्र मुद्रिका का भाग्य रेखा और सूर्य रेखा को काटना - हस्तरेखा 

यदि सूर्य-रेखा और भाग्य-रेखा पुष्ट तथा निर्दोष हों और वे दोनों शुक्र-मुद्रिका को काट रही हो तो ऐसी रेखाऔ वाला जातक अत्यन्त विद्वान, लेखक तथा प्रेमी स्वभाव का होता है परन्तु यदि शुक्र-मुद्रिका अधिक पुष्ट हो और ऐसा प्रतीत होता हो कि वह स्वयं भाग्य-रेखा तथा सूर्य-रेखा को काट रही है तो उस स्थिति मे वह जातक के दुर्भाग्य की सूचक होती है और ऐसी रेखा वाले जातक की बुद्धि नष्ट हो जाती है अर्थार्थ जातक को बुरी आदते लग जाती है और वह अपना जीवन नष्ट कर लेता है। 

Ring Of Mercury (Budh Mudrika) Palmistry

 

Ring Of Mercury (Budh Mudrika) Palmistry

Mercury Ring reduces the good effect/strength of Mount of Mercury.  Loss in business, and troublesome married life.

Mercury Ring reduces the good effect/strength of Mount of Mercury.  Loss in business, and troublesome married life.


Mercury Ring reduces the good effect/strength of Mount of Mercury.  Loss in business, and troublesome married life.

बुध मुद्रिका बुध पर्वत के गुणों में कमी लाती है । व्यापार में घाटा और वैवाहिक जीवन असंतोषजनक होता है । 

Your Marriage Line Indicates Divorce, Love Marriage Or Separation | Palmistry

 

Your Marriage Line Indicates Divorce, Love Marriage Or Separation | Palmistry


Marriage Line On Hand

Your marriage line indicates bad marriage or good marriage. If marriage line is long and straight then it indicates happy marriage but if bad sign present on it then it indicates bad marriage.

An influence line from Mount of Moon joins fate line denotes love marriage. 

If large fork present on marriage line then it indicates divorce.

If fork is small then it indicates separation.


Island, cross, break and other bad sign on marriage line indicates bad marriage, breakup, separation and divorce.


Also Read : Interpretation Of Marriage Line With Images

Your Hand Lines Indicates Twin Children | Palmistry


जुड़वां judwaa palmistry hastrekha
Twin Children Signs On Hand

Your Hand lines and signs also indicates twin children.  You need to check small vertical line on marriage line underneath little finger with magnifying glass because these lines are very faint and hardly visible to the naked eyes.


A thick line indicates a male and a thin line represents a female. If any line cuts by bar line then always chances of abortion or miscarriage.

Yav and barley sign on the base of thumb also indicates children.  Big yav denotes male child and small yav shape denotes female child and if yav is cut by any line then it denotes abortion or miscarriage.

If children line forked like a "V" indicates twins. See - 1


Islands in the base of the thumb also indicate number of children. If there are two islands attached to each other like "8" indicates twins. See - 2


Tag: sign dat shows that u will have twins in ur palm

Shani Mudrika - Hastrekha ( Ring of Saturn In Palmistry )

Shani Mudrika - Hastrekha ( Ring of Saturn In Palmistry )

Shani Valay yani Shani mudrika jisko english mein ring of saturn naam se jana jata hai yah vykti mein shani ke swabhavik guno mein rok lagane ki kosheesh karti hai. Jis vykti ke hath mein shani ka challa hota hai us mein ekagartha ki kami paai jaati hai. Vah kisi bhi karya ko lambe samay tak tik kar nahi kar pata hai aur jaldi jaldi karya ko badalne ki kosheesh karta hai jiski wajah se usko asafalta milti hai aur yadi hath mein doosare yog khraabh hai to wah vykti apradh kar baithta hai.


भाग्य रेखा का उदय मंगल पर्वत से होना

भाग्य रेखा का उदय मंगल पर्वत से होना

 भाग्य रेखा का उदय मंगल पर्वत से होना

हाथ में मंगल दो स्थानों पर होता है। अंगूठे के पास और बुध की उंगली के नीचे। कभी-कभी अंगूठे वाले मंगल से भाग्य रेखा निकलकर, शनि की ओर जाती हुई देखी जाती है। वैसे तो यह भाग्य रेखा ही होती है, परन्तु देखने में ऐसी नहीं लगती। अत: सूक्ष्म निरीक्षण करके, इसका निर्णय कर लेना चाहिए देखा गया है कि बुध के मंगल से निकल कर कोई भाग्य रेखा शनि पर नहीं जाती। (नितिन पामिस्ट)

इस प्रकार की भाग्य रेखा, श्रृहस्पति मुद्रिका का भी कार्य इसी स्थान पर करती है। यदि ऐसे व्यक्तियों को धर्म में विशेष रुचि हो तो ये इस विषय में अच्छी स्थिति प्राप्त कर लेते हैं। इन्हें गुरूत्व शक्ति की प्राप्ति साधनावस्था में हो जाती है। यह लक्षण आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। साधारण साधकों के हाथों में ऐसे लक्षण नहीं मिलते। हाथ में दूसरे आध्यात्मिक लक्षणों को देखकर विशेषता व आयु का पता लगाया जा सकता है।

मंगल से भाग्य रेखा निकलने पर बड़ी आयु में संघर्ष के साथ जीवन बनता है, फिर भी ऐसे व्यक्ति अच्छी उन्नति कर जाते हैं। मंगल से निकली भाग्य रेखा, यदि शनि पर जाती हो तो व्यक्ति चलती सवारी या जानवर आदि से टकराकर चोट खाता है। ये किसी वृक्ष से भी गिरते हैं। सटटे के काम में इन्हें हमेशा हानि होती है। (नितिन पामिस्ट)

इन्हें जीवन में टायफाइड बुखार एक से अधिक बार होता है। मंगल से निकलकर भाग्य रेञ्जा, शनि पर गई हो और हाथ भी भारी हो, जीवन रेखा निर्दोष व मस्तिष्क रेखा उत्तम हो तो व्यक्ति सम्पत्ति निर्माण या क्रय को पश्चात् उन्नति करता है। पगड़ी पर ली हुई, खरीदी हुई या बनाई हुई सम्पत्ति इन्हें यहीं फल देती है। गोद या बखशीश (दान) में प्राप्त हुई सम्पति का भी यही फल होता है।

एकादश भाव में राहु के सरल उपाय

 एकादश भाव में राहु के सरल उपाय

एकादश भाव में राहु के सरल उपाय


एकादश भाव में राहु - एकादश भाव में सभी ग्रह शुभ फलदायक होते हैं अत: राहु भी शुभफलदायक है। पापमार्ग से धन लाभ जिसका दुष्परिणाम संतानों, पुत्रों पौत्रों को भोगना पड़ता है अत: पाप के धन से बचना ही श्रेयस्कर तथा शुभ है। स्त्रीराशि में - शुभफल पुरुष राशि में अशुभफल पुरुष राशि में - पुत्र संतति में बाधा, पूर्व जन्म का शाप, पुत्र की मृत्यु, गर्भपात, पत्नी को सन्तति प्रतिबंधक योग में प्रजनन अंगों के रोग अथवा संतान उत्पन्न करने की अक्षमता होना। अचानक धनी होने की इच्छा, दौड़, शेयर सट्टा, लाटरी, जुआ में धन खर्च, अधिकारी होने पर अन्धाधुन्ध रिश्वत लेना, कानून के चंगुल में फाँसकर दण्ड, अपमान, नौकरी छूटना, कारावास आदि भोगना, लोभी स्वभाव, मित्रों से हानि, भाग्योदय में रुकावटें।

स्त्रीराशि में प्रथम सन्तान कन्या, बहुत समय बाद पुत्र, पुत्रियां अधिक, मित्र अच्छे, ज्योतिष या मन्त्रशास्त्र में कुशल, उनकी सहायता से जीवन चलना, रिश्वत लेने पर पकड़ा न जाना, व्यापार व नौकरी दोनों में सफल बडी भाई की मृत्यु या बेरोजगारी से उसके कुटुम्ब का बोझ भी स्वयं उठाना 42वें वर्ष सहसा । प्राप्ति. 28वें वर्ष आजीविका प्रारंभ 27वें वर्ष विवाह।

Navgraho Ke Upay

 नवग्रहो के उपाय



ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमारा जीवन नौ ग्रहों की स्थितियों पर निर्भर करता है। कुंडली 12 भागों में विभक्त रहती है और इन 12 भागों में ही नौ ग्रहों की अलग-अलग स्थितियां रहती हैं। सभी ग्रहों के शुभ-अशुभ फल होते हैं। हमारी कुंडली में जो ग्रह अच्छी स्थिति में होता है वह हमें अच्छा फल प्रदान करता है, जबकि जो ग्रह अशुभ स्थिति में होते हैं वे बुरा फल देते हैं।

सूर्य- सूर्य ग्रह हमें तेज, यश, मान-सम्मान प्रदान करता है। सूर्य शुभ होने पर हमें समाज में प्रसिद्धि मिलती है वहीं सूर्य के अशुभ होने पर अपमान जैसे विपरित प्रभाव होते हैं।
उपाय: सूर्य को प्रसन्न करने के लिए प्रतिदिन सुबह-सुबह सूर्य को जल अर्पित करें।

चंद्र: चंद्र का संबंध हमारे मन से बताया गया है। चंद्र अच्छी स्थिति में हो तो व्यक्ति शांत होता है लेकिन अशुभ चंद्र व्यक्ति को पागल तक बना सकता है।

उपाय: यदि चंद्र अशुभ स्थिति में हो तो प्रतिदिन शिवलिंग पर दूध अर्पित करें।


मंगल: मंगल हमारे धैर्य और पराक्रम को नियंत्रित करता है। शुभ मंगल हो तो व्यक्ति कुशल प्रबंधक होता है।

उपाय: मंगल से शुभ फल प्राप्त करने के लिए हर मंगलवार शिवलिंग पर लाल पुष्प अर्पित करें। ऊँ भौमाय नम: मंत्र का जप करें।

बुध: बुध ग्रह हमारी बुद्धि और बोली को प्रभावित करता है। शुभ बुध होने पर हमारी बुद्धि शुद्ध और पवित्र होती है लेकिन अशुभ होने पर विपरित प्रभाव होते हैं।

उपाय: बुध के अशुभ प्रभावों को दूर करने के लिए हर बुधवार गाय को हरी घास खिलाएं।

गुरु: गुरु ग्रह हमारी धार्मिक भावनाओं को नियंत्रित करता है। इस ग्रह के शुभ होने पर व्यक्ति को धर्म संबंधी कार्यों में विशेष लाभ प्राप्त होता है। भाग्य का साथ मिलता है।

उपाय: गुरु से शुभ फल प्राप्त करने के लिए हर गुरुवार चने की दाल का दान करें।

शुक्र: शुक्र से प्रभावित व्यक्ति कलाप्रेमी, सुंदर और ऐश्वर्य प्राप्त करने वाले होता है। शुभ शुक्र के प्रभाव से व्यक्ति विलासिता का जीवन पाता है।

उपाय: शुक्र को मनाने के लिए शिवलिंग पर तांबे के लोटे से जल अर्पित करना चाहिए।


शनि: जिस व्यक्ति की कुंडली शुभ अवस्था में हो वह सभी सुखों को प्राप्त करने वाला, श्याम वर्ण, शक्तिशाली होता है। शनि अशुभ होने पर कई परेशानियां झेलनी पड़ती हैं।

उपाय: शनि से शुभ फल पाने के लिए हर शनिवार तेल का दान करें। पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें।

राहु: जिस व्यक्ति की कुंडली राहु बलशाली होता है वह कठोर स्वभाव वाला, प्रखर बुद्धि, श्याम वर्ण होता है। इसके अशुभ होने पर बड़ी-बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

उपाय: राहु के अशुभ प्रभावों को दूर करने के लिए किसी गरीब व्यक्ति को काले कंबल का दान करें।

केतु: केतु शुभ हो तो व्यक्ति को कठोर स्वभाव, गरीबों का हित करने वाला, श्याम वर्ण होता है।

उपाय: केतु से शुभ फल प्राप्त करने के लिए शनिवार के दिन पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें और वृक्ष की सात परिक्रमा करें।

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Answer: If you are from India then you need to pay 600 rupees (you will get report in 10 days) but if you want to get report in one day/24 hours then you need to pay 1100 rupees.

If you are from USA, or from outside of India then you need to pay 20 dollars (you will get report in 10 days) but if you want to get report in one day/24 hours then you need to pay 35 dollars.

Question: I want to get palm reading done by you so let me know how to contact you?
Answer: Contact me at Email ID: nitinkumar_palmist@yahoo.in.


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Answer: You will get detailed palm reading report covering all aspects of life. Past, current and future predictions. Your palm lines and signs, nature, health, career, period, financial, marriage, children, travel, education, suitable gemstone, remedies and answer of your specific questions. It is up to 4-5 pages.



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Answer: Yes, remedies and solution of problems are also included in this reading.


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(Take image from iphone or from any android phone) or you can also use scanner. 



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Answer: You need to capture full images of both palms (Right and left hand), close-up of both hands and side views of both palms. See images below.



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Question: How much the detailed palm reading costs?

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Question: How you will confirm that I have made payment?

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Question: I am living outside of India so what are the options for me to pay you?

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